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  • बिलासपुर में मां नयना देवी का दरबार ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड के फूलों से सजा, नवरात्रों में 22 घंटे होंगे दर्शन.

    बिलासपुर में मां नयना देवी का दरबार ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड के फूलों से सजा, नवरात्रों में 22 घंटे होंगे दर्शन.

    बिलासपुर में मां नयना देवी का दरबार ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड के फूलों से सजा, नवरात्रों में 22 घंटे होंगे दर्शन.

    बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश: शारदीय नवरात्रों को लेकर हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री नयना देवी मंदिर में तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। माता के दरबार को भव्य रूप देने के लिए देशी-विदेशी फूलों से सजाया जा रहा है। इस बार सजावट में ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड से मंगवाए गए फूल भी शामिल हैं। नवरात्रों के दौरान श्रद्धालु 22 घंटे तक माता के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर को रोजाना रात 12 बजे से सुबह 2 बजे तक सफाई और शृंगार के लिए बंद रखा जाएगा।

    विदेशी फूलों और आकर्षक रोशनी से सजेगा मंदिर

    नवरात्रों में मां नयना देवी के दरबार को खास रूप देने के लिए सजावट का काम तेजी से किया गया है। मंदिर की सजावट की जिम्मेदारी करनाल की एक समाजसेवी संस्था ने संभाली है। संस्था के 20 से अधिक कारीगर रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक रोशनी और सजावटी लड़ियों से मंदिर परिसर को सजाने में जुटे हैं।

    सजावट का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए माता का दरबार आकर्षण का केंद्र रहेगा। मंदिर न्यास और जिला प्रशासन ने भी नवरात्र मेले को व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं।

    22 घंटे खुले रहेंगे मंदिर के कपाट

    नवरात्रों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर के कपाट प्रतिदिन 22 घंटे खुले रखने की व्यवस्था की गई है। मंदिर रात 12 बजे से सुबह 2 बजे तक बंद रहेगा। इस दौरान परिसर की सफाई और माता का शृंगार किया जाएगा।

    दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को निर्धारित कतारों में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि भीड़ के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रहे। नवरात्रों में हिमाचल प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना है।

    सुरक्षा के लिए 250 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात

    श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। सुरक्षा की जिम्मेदारी के लिए करीब 250 पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए हैं।

    प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण के साथ यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। इसके लिए मंदिर परिसर को नौ सेक्टरों में बांटा गया है। नवरात्र मेले के संचालन और व्यवस्थाओं पर नजर रखने के लिए छह मेला मजिस्ट्रेट भी तैनात किए गए हैं।

    कड़ाह-प्रसाद और नारियल चढ़ाने पर प्रतिबंध

    नवरात्र मेले के दौरान मंदिर में कड़ाह, प्रसाद और नारियल चढ़ाने पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित नियमों का पालन करने और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।

    मेला अधिकारी एवं श्री नयना देवी जी के एसडीएम धर्मपाल के अनुसार, नवरात्र मेले के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर न्यास की ओर से रात के समय भजन संध्याओं का आयोजन भी किया जाएगा।

    इस बार फूलों से सजे भव्य दरबार, लंबी दर्शन अवधि और सुरक्षा इंतजामों के बीच श्रद्धालुओं को माता के दर्शन कराने की तैयारी है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। दर्शन के समय, प्रतिबंधों और मेले की व्यवस्थाओं में बदलाव संभव है। श्रद्धालु यात्रा से पहले मंदिर प्रशासन की ओर से जारी नवीनतम निर्देशों की पुष्टि कर लें।

  • कानपुर में सुनसान जगह पर युवती से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, दो युवकों पर ब्लैकमेलिंग की शिकायत; प्रेमी के भागने की भी बात.

    कानपुर में सुनसान जगह पर युवती से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, दो युवकों पर ब्लैकमेलिंग की शिकायत; प्रेमी के भागने की भी बात.

    कानपुर में सुनसान जगह पर युवती से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, दो युवकों पर ब्लैकमेलिंग की शिकायत; प्रेमी के भागने की भी बात.

    कानपुर, उत्तर प्रदेश: महाराजपुर थाना क्षेत्र में एक युवती ने दो युवकों पर सामूहिक दुष्कर्म और वीडियो के नाम पर धमकाकर पैसे मांगने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, युवती अपने प्रेमी के साथ तिवारीपुर गांव के पास एक सुनसान जगह पर बैठी थी, तभी दोनों युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि युवकों ने पहले उनका वीडियो बनाया और उसे परिवार को दिखाने की धमकी दी। घटना के दौरान युवती का प्रेमी मौके से भाग गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की है।

    सुनसान जगह पर पहुंचे दो युवक

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, युवती 26 जुलाई को अपने प्रेमी के साथ घूमने गई थी। दोनों महाराजपुर थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव के पास एकांत में बैठे थे। इसी दौरान दो युवक वहां पहुंचे और कथित तौर पर उनका वीडियो बनाने लगे।

    युवती का आरोप है कि दोनों युवकों ने वीडियो उसके परिवार को दिखाने की धमकी दी और पैसे मांगने लगे। अचानक हुई इस घटना से दोनों घबरा गए।

    प्रेमी के मौके से भागने का दावा

    शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि जब उसने और उसके प्रेमी ने युवकों से सवाल किया, तो उन्होंने दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसी दौरान उसका प्रेमी डरकर मौके से भाग गया।

    युवती के मुताबिक, प्रेमी के चले जाने के बाद दोनों युवकों ने उससे पैसे मांगे। जब उसने पैसे नहीं होने की बात कही, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। उसने यह आरोप भी लगाया कि आरोपियों ने उसकी नाक की कील छीनने की कोशिश की।

    शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज किया मामला

    युवती ने पुलिस से शिकायत की और कार्रवाई की मांग की। उसका आरोप था कि शुरुआत में उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने एसीपी अभिषेक पांडे से मदद मांगी।

    एसीपी के अनुसार, युवती की शिकायत पर दो युवकों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।

    सीसीटीवी और सर्विलांस से तलाश

    पुलिस के अनुसार, आरोपियों का पता लगाने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और सर्विलांस की मदद भी ली जा रही है।

    फिलहाल, आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे गंभीर मामले में पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा करना भी जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

  • पर्स में रखी ये 4 चीजें तुरंत निकालें बाहर! वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन से जुड़ी होती हैं ये बातें.

    पर्स में रखी ये 4 चीजें तुरंत निकालें बाहर! वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन से जुड़ी होती हैं ये बातें.

    पर्स में रखी ये 4 चीजें तुरंत निकालें बाहर! वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन से जुड़ी होती हैं ये बातें.

    वास्तु टिप्स: कई लोग अपने पर्स या हैंडबैग में रुपये-पैसे के साथ दवाइयां, पुराने बिल, रसीदें और कई ऐसी चीजें भी रख लेते हैं, जिनकी अब जरूरत नहीं होती। धीरे-धीरे पर्स में सामान जमा होता जाता है और उसे व्यवस्थित रखना मुश्किल हो जाता है। वास्तु शास्त्र में पर्स को धन रखने का स्थान मानते हुए उसे साफ-सुथरा रखने पर जोर दिया गया है। मान्यता है कि कुछ चीजों को पर्स में रखना शुभ नहीं माना जाता। आइए जानते हैं ऐसी चार चीजों के बारे में, जिन्हें समय-समय पर पर्स से निकाल देना चाहिए।

    1. पुराने बिल और रसीदें

    कई लोगों की आदत होती है कि वे खरीदारी के बिल, पुरानी रसीदें और छोटे-छोटे कागज पर्स में ही रख लेते हैं। कुछ समय बाद ये कागज जमा हो जाते हैं और जरूरी सामान ढूंढना मुश्किल हो जाता है।

    वास्तु संबंधी मान्यताओं में पर्स को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। इसलिए जिन बिलों और रसीदों की अब जरूरत नहीं है, उन्हें हटा दें। हालांकि, टैक्स, वारंटी, रिफंड या किसी जरूरी भुगतान से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखना न भूलें।

    2. जरूरत न होने पर रखी दवाइयां

    कुछ लोग सिरदर्द की गोलियां या दूसरी दवाइयां हमेशा पर्स में रखते हैं। जरूरत के समय दवा पास होना सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन पर्स में रखी दवाइयों को उनकी पैकेजिंग, तापमान और इस्तेमाल की अवधि के हिसाब से सुरक्षित रखना जरूरी है।

    वास्तु की कुछ मान्यताओं में दवाइयों को पर्स में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि पर्स में दवा रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है या आर्थिक नुकसान होता है। अगर दवा नियमित रूप से लेनी जरूरी है, तो केवल वास्तु की मान्यता के कारण उसे हटाना उचित नहीं होगा।

    3. फटे या खराब नोट

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, फटे और गंदे नोटों को पर्स में रखने से बचना चाहिए। साफ-सुथरे और व्यवस्थित तरीके से रुपये रखना धन के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

    व्यावहारिक रूप से भी नोटों को ठीक से रखना अच्छा है। यदि कोई नोट फटा हुआ है, तो उसकी स्थिति के अनुसार उसे बैंक में बदलवाने की जानकारी लें। केवल नोट के फटे होने से धन हानि या आर्थिक तंगी होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    4. पुरानी चाबियां, पिन और बेकार धातु की चीजें

    कई बार पर्स में पुरानी चाबियां, सेफ्टी पिन, जंग लगे सिक्के या छोटी धातु की वस्तुएं जमा हो जाती हैं। इनका इस्तेमाल न होने पर भी ये पर्स में जगह घेरती रहती हैं।

    वास्तु संबंधी मान्यताओं में ऐसी अनावश्यक वस्तुओं को हटाकर पर्स व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। जरूरत न होने वाली चाबियां और दूसरी चीजें अलग रख दें। इससे पर्स हल्का रहेगा और जरूरी सामान आसानी से मिल सकेगा।

    पर्स को व्यवस्थित रखने के लिए अपनाएं ये आसान आदतें

    • हर सप्ताह पर्स की सफाई करें और गैरजरूरी कागज हटा दें।
    • रुपये, कार्ड और जरूरी दस्तावेज अलग-अलग व्यवस्थित रखें।
    • जरूरी दवाइयों और आपातकालीन संपर्क संबंधी जानकारी को सुरक्षित रखें।
    • पर्स में केवल वही सामान रखें, जिसकी वास्तव में जरूरत है।
    • खर्चों का हिसाब रखें और बचत के लिए नियमित योजना बनाएं।

    क्या पर्स की ये चीजें सच में आर्थिक तंगी लाती हैं?

    वास्तु शास्त्र में पर्स की साफ-सफाई और कुछ वस्तुओं को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। लेकिन पुराने बिल, दवाइयां, फटे नोट या धातु की वस्तुएं पर्स में रखने से धन का प्रवाह रुक जाता है या तरक्की बाधित होती है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए बजट बनाना, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना और नियमित बचत करना अधिक व्यावहारिक कदम हैं।

    डिस्क्लेमर: यह लेख वास्तु शास्त्र में प्रचलित मान्यताओं और सामान्य व्यावहारिक सुझावों पर आधारित है। वास्तु उपायों से धन लाभ या आर्थिक समस्याएं दूर होने की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • सीवान में आभूषण कारोबारी से 20 लाख की लूट, विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला; हवाई फायरिंग कर भागे 4 बदमाश.

    सीवान में आभूषण कारोबारी से 20 लाख की लूट, विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला; हवाई फायरिंग कर भागे 4 बदमाश.

    सीवान में आभूषण कारोबारी से 20 लाख की लूट, विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला; हवाई फायरिंग कर भागे 4 बदमाश.

    सीवान, बिहार: दारौंदा थाना क्षेत्र में बेखौफ बदमाशों ने आभूषण कारोबारी को निशाना बनाकर लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया। शुक्रवार शाम दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने डिब्बी-जलालपुर मार्ग पर कारोबारी को रोक लिया और हथियार के बल पर करीब 20 लाख रुपये के गहने और नकदी लूट ली। कारोबारी ने विरोध किया तो बदमाशों ने पिस्टल के बट से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। वारदात के बाद दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग करते हुए सभी आरोपी फरार हो गए।

    दुकान बंद कर घर लौट रहे थे कारोबारी

    घायल कारोबारी की पहचान शिवजी प्रसाद के पुत्र रत्नेश कुमार के रूप में हुई है। मिली जानकारी के अनुसार, रत्नेश कुमार डीबी बाजार स्थित अपनी आभूषण की दुकान बंद करने के बाद मोटरसाइकिल से जलालपुर स्थित अपने घर लौट रहे थे।

    इसी दौरान डिब्बी-जलालपुर मार्ग के बीच दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने उन्हें ओवरटेक कर रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने हथियार दिखाकर उनके पास मौजूद गहने और नकदी छीननी शुरू कर दी।

    विरोध करने पर पिस्टल के बट से किया हमला

    बताया गया है कि रत्नेश कुमार ने लूट का विरोध किया, तो बदमाशों ने पिस्टल के बट से उन पर हमला कर दिया। इससे कारोबारी घायल हो गए। इसके बाद आरोपी करीब 20 लाख रुपये के गहने और नकदी लेकर डिब्बी बाजार की ओर भाग निकले।

    भागते समय बदमाशों ने कई राउंड हवाई फायरिंग भी की। गोली चलने की आवाज से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

    घटना की सूचना मिलने के बाद दारौंदा थानाध्यक्ष विकास कुमार सिंह पुलिस बल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना दिए जाने के समय तक पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी।

    अब पुलिस के सामने वारदात की जांच करने, आरोपियों की पहचान करने और लूटे गए गहने व नकदी का पता लगाने की चुनौती है। हालांकि, आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी को लेकर आगे की कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    इलाके में पहले भी हो चुकी है बड़ी लूट

    डिब्बी और आसपास के बाजार क्षेत्र में पहले भी लूट की बड़ी घटना सामने आ चुकी है। वर्ष 2022 में डिब्बी-चनचौरा बाजार स्थित एक स्वर्ण कारोबारी की दुकान पर छह बदमाशों ने धावा बोलकर करीब पांच लाख रुपये की संपत्ति लूट ली थी। उस घटना के दौरान बमबारी और फायरिंग किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। बदमाशों को पकड़ने की कोशिश करने वाले दो युवक घायल हो गए थे।

    लगातार ऐसी घटनाओं से क्षेत्र के कारोबारियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। ताजा वारदात में पुलिस जांच के बाद ही लूट से जुड़े सभी तथ्यों और आरोपियों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े आरोपों और लूटी गई संपत्ति के मूल्य की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • बच्चों का पढ़ाई में नहीं लगता मन? बुध दोष से जोड़ती हैं ज्योतिषीय मान्यताएं, जानें पूजा-पाठ के उपाय और ध्यान बढ़ाने के तरीके.

    बच्चों का पढ़ाई में नहीं लगता मन? बुध दोष से जोड़ती हैं ज्योतिषीय मान्यताएं, जानें पूजा-पाठ के उपाय और ध्यान बढ़ाने के तरीके.

    बच्चों का पढ़ाई में नहीं लगता मन? बुध दोष से जोड़ती हैं ज्योतिषीय मान्यताएं, जानें पूजा-पाठ के उपाय और ध्यान बढ़ाने के तरीके.

    बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता: कई माता-पिता की शिकायत होती है कि बच्चा पढ़ते समय जल्दी ध्यान भटका लेता है, सीखी हुई बातें भूल जाता है या कक्षा में अपनी बात कहने से झिझकता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, संवाद और सीखने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में ऐसी स्थितियों को बुध की कमजोर स्थिति से जोड़ा जाता है। हालांकि, एकाग्रता की कमी या पढ़ाई में परेशानी को केवल ग्रह दोष का परिणाम मानना सही नहीं है। इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण भी हो सकते हैं।

    बुध ग्रह को बुद्धि और संवाद का कारक क्यों माना जाता है?

    वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क और संचार का प्रतीक माना जाता है। इस मान्यता के अनुसार, कुंडली में बुध की स्थिति व्यक्ति की सीखने और अपनी बात समझाने की क्षमता से जुड़ी होती है।

    हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता कि किसी बच्चे की पढ़ाई में कमजोरी, याददाश्त की परेशानी या आत्मविश्वास की कमी का कारण बुध दोष ही है।

    बच्चों में इन संकेतों पर दें ध्यान

    1. पढ़ाई में मन नहीं लगना

    यदि बच्चा पढ़ते समय बार-बार दूसरी चीजों की ओर ध्यान देने लगता है या किसी विषय को समझने में अधिक समय लेता है, तो उसकी पढ़ाई की दिनचर्या पर ध्यान दें। कठिन विषय, थकान, आसपास का शोर या पढ़ने के तरीके से तालमेल न बैठना भी इसके कारण हो सकते हैं।

    2. पढ़ी हुई बातें जल्दी भूल जाना

    कुछ बच्चों को जानकारी याद रखने और जरूरत के समय उसे दोहराने में परेशानी होती है। ऐसे में छोटे-छोटे अध्ययन सत्र, नियमित दोहराव और अभ्यास से मदद मिल सकती है। पर्याप्त नींद भी सीखने और याददाश्त के लिए महत्वपूर्ण है।

    3. अपनी बात कहने में झिझक

    यदि बच्चा कक्षा में सवाल पूछने या दूसरों के सामने बोलने से घबराता है, तो उसे डांटने या दूसरे बच्चों से तुलना करने के बजाय प्रोत्साहित करें। घर में बातचीत और अपनी बात रखने के अवसर देने से उसका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    4. एक जगह बैठने में परेशानी

    पढ़ाई के दौरान बार-बार उठना या ध्यान भटकना कई कारणों से हो सकता है। बच्चे की उम्र, नींद, शारीरिक गतिविधि, पढ़ाई का माहौल और भावनात्मक स्थिति को समझना जरूरी है। यदि यह परेशानी लगातार बनी रहती है और स्कूल या रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

    5. त्वचा संबंधी समस्याएं

    कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में बुध ग्रह को त्वचा से भी जोड़ा जाता है, लेकिन खुजली, एलर्जी या त्वचा की अन्य समस्याओं को बुध दोष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसी परेशानी होने पर उचित चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    बुध दोष से जुड़े पारंपरिक उपाय

    धार्मिक आस्था रखने वाले परिवार अपनी परंपरा के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं। इन्हें बच्चों की पढ़ाई या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का निश्चित उपचार नहीं समझना चाहिए।

    1. बुधवार को भगवान गणेश की पूजा: बुधवार के दिन भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करने की परंपरा है। परिवार बच्चे के साथ प्रार्थना कर सकता है।

    2. जरूरतमंदों को दान: कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में बुधवार को हरी मूंग, हरे फल या जरूरत की वस्तुएं दान करने की सलाह दी जाती है। इसे अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अपनाया जा सकता है।

    3. बुध मंत्र का जाप: पारंपरिक ज्योतिष में “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जाप बताया जाता है। इच्छुक परिवार इसे धार्मिक अभ्यास के रूप में कर सकते हैं।

    4. हरे रंग का प्रयोग: कुछ मान्यताओं में हरे रंग को बुध ग्रह से जोड़ा जाता है। बच्चे की पसंद के अनुसार हरे रंग की स्टेशनरी या पढ़ाई की जगह पर छोटे सजावटी सामान का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बुद्धि या परीक्षा के परिणाम बेहतर होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

    5. पक्षियों को दाना खिलाना: कुछ परंपराओं में बुधवार को पक्षियों को दाना खिलाना शुभ माना जाता है। यदि ऐसा करें, तो स्थानीय नियमों और पक्षियों के लिए उपयुक्त भोजन का ध्यान रखें।

    बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीके

    • नियमित समय पर पढ़ाई: बच्चे की उम्र और क्षमता के अनुसार पढ़ाई का समय तय करें।
    • छोटे अध्ययन सत्र: लंबे समय तक लगातार बैठाने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक दें।
    • पर्याप्त नींद: उम्र के अनुसार पर्याप्त और नियमित नींद लेने में मदद करें।
    • मोबाइल से दूरी: पढ़ाई के समय अनावश्यक स्क्रीन और शोर को कम रखें।
    • प्रोत्साहन दें: गलती होने पर डांटने के बजाय उसे समझने और दोबारा प्रयास करने का मौका दें।
    • शिक्षक से बात करें: यदि बच्चा किसी विषय में लगातार कठिनाई महसूस करता है, तो शिक्षक से चर्चा करके सीखने की जरूरतों को समझें।

    कब विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है?

    यदि बच्चे को लंबे समय से ध्यान लगाने, पढ़ना सीखने, निर्देश समझने या अपनी बात स्पष्ट रूप से कहने में कठिनाई हो रही है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर सुनने, देखने, सीखने या ध्यान से जुड़ी कठिनाइयों का आकलन किया जा सकता है। समय पर सही सहायता मिलने से बच्चे को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

    डिस्क्लेमर: बुध दोष और उससे जुड़े उपाय ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। बच्चों की एकाग्रता, याददाश्त, बोलने या त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण ग्रहों की स्थिति होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पूजा-पाठ को व्यक्तिगत आस्था तक सीमित रखें और लगातार बनी रहने वाली पढ़ाई या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

  • झांसी में मेडिकल छात्राओं के सामने युवक ने की अश्लील हरकत, पीछा करने का भी आरोप; लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा.

    झांसी में मेडिकल छात्राओं के सामने युवक ने की अश्लील हरकत, पीछा करने का भी आरोप; लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा.

    झांसी में मेडिकल छात्राओं के सामने युवक ने की अश्लील हरकत, पीछा करने का भी आरोप; लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा.

    झांसी, उत्तर प्रदेश: महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्राओं के सामने एक युवक की कथित अश्लील हरकत से हड़कंप मच गया। छात्राओं के मुताबिक, युवक ने रास्ते में उन्हें रोकने की कोशिश की और फिर कपड़े उतारकर अश्लील हरकत करने लगा। छात्राओं के शोर मचाने पर सुरक्षा गार्ड और राहगीर मौके पर पहुंच गए। लोगों ने युवक को पकड़ लिया और उसकी पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

    छात्राओं के सामने अचानक करने लगा अश्लील हरकत

    मामले के अनुसार, मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा सुबह हॉस्टल से कक्षा में जाने के लिए निकली थी। रास्ते में एक युवक स्कूटी पर बैठा मिला। आरोप है कि उसने छात्रा को आवाज देकर अपने पास बुलाया, लेकिन छात्रा आगे बढ़ गई। इसके बाद युवक स्कूटी से उसका पीछा करते हुए कक्षा तक पहुंच गया।

    बताया गया कि पोस्टमार्टम हाउस से कुछ आगे सुनसान स्थान पर युवक ने स्कूटी रोकी और छात्रा के पास पहुंच गया। आरोप है कि उसने अचानक अपना हाफ लोअर उतार दिया और अश्लील हरकत करने लगा। उसी समय पीछे से कुछ अन्य छात्राएं भी आ रही थीं। युवक की हरकत देखकर छात्राएं घबरा गईं और शोर मचाने लगीं।

    शोर सुनकर पहुंचे सुरक्षाकर्मी और राहगीर

    छात्राओं की आवाज सुनकर सुरक्षा गार्ड अमित और आसपास मौजूद राहगीर मौके पर पहुंच गए। लोगों को अपनी ओर आता देखकर आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे दौड़कर पकड़ लिया गया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने उसकी पिटाई की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

    बताया गया कि युवक को पहले मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पास ले जाया गया। बाद में उसे मेडिकल चौकी पुलिस को सौंप दिया गया।

    पहले भी पीछा करने का आरोप

    छात्राओं का आरोप है कि संबंधित युवक पहले भी कई बार स्कूटी से उनका पीछा कर चुका था। छात्राओं के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में कॉलेज के प्राचार्य से मौखिक शिकायत भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इस शिकायत और पहले हुई घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।

    पुलिस ने दर्ज किया मामला

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ में युवक ने अपना नाम रोशन प्रजापति और निवासी कोछाभांवर बताया। नवाबाद थाना प्रभारी के मुताबिक, छात्रा की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों के बाद ही होगी।

  • राजस्थान: आखिर क्यों वीरान हो गया भानगढ़ का पूरा शहर? तांत्रिक के श्राप से जुड़ी है रहस्यमयी कहानी, सूर्यास्त के बाद जाने पर भी रोक,

    राजस्थान: आखिर क्यों वीरान हो गया भानगढ़ का पूरा शहर? तांत्रिक के श्राप से जुड़ी है रहस्यमयी कहानी, सूर्यास्त के बाद जाने पर भी रोक,

    राजस्थान: आखिर क्यों वीरान हो गया भानगढ़ का पूरा शहर? तांत्रिक के श्राप से जुड़ी है रहस्यमयी कहानी, सूर्यास्त के बाद जाने पर भी रोक,

    राजस्थान: राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित भानगढ़ किला अपनी ऐतिहासिक इमारतों और रहस्यमयी कहानियों के लिए मशहूर है। कभी आबाद रहने वाले इस ऐतिहासिक शहर के खंडहर आज भी लोगों के मन में कई सवाल पैदा करते हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि यहां की बस्ती उजड़ गई? क्या इसके पीछे किसी तांत्रिक का श्राप था या फिर इसके पीछे कोई ऐतिहासिक वजह छिपी है? इन सवालों के जवाब तलाशने वाले पर्यटकों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए भानगढ़ आज भी आकर्षण का केंद्र है।

    16वीं सदी में बसाया गया था भानगढ़

    भानगढ़ का इतिहास राजस्थान के कछवाहा राजवंश से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इस शहर की स्थापना 16वीं सदी के उत्तरार्ध में राजा भगवंत दास के शासनकाल में हुई थी। बाद के वर्षों में यह एक महत्वपूर्ण बस्ती के रूप में विकसित हुआ। स्थानीय परंपराओं और प्रचलित विवरणों के अनुसार, राजा अजब सिंह के समय में इस शहर का विस्तार हुआ और यहां मंदिरों, बाजारों, आवासीय भवनों तथा किलेबंदी का निर्माण किया गया।

    आज भी भानगढ़ में पुराने मंदिरों, हवेलियों, बाजार की दुकानों और पत्थर की दीवारों के अवशेष दिखाई देते हैं। इन खंडहरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी यहां व्यवस्थित शहरी जीवन रहा होगा। लेकिन समय के साथ यह बस्ती वीरान हो गई और इसके उजड़ने की कहानी रहस्य और लोककथाओं से जुड़ती चली गई।

    राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंघिया की कहानी

    भानगढ़ से जुड़ी सबसे चर्चित लोककथाओं में राजकुमारी रत्नावती और सिंघिया नाम के एक तांत्रिक का जिक्र मिलता है। इस कहानी के अनुसार, सिंघिया राजकुमारी से प्रेम करने लगा था। वह कथित तौर पर तंत्र-मंत्र के जरिए राजकुमारी को अपने वश में करना चाहता था।

    कहानी में बताया जाता है कि सिंघिया ने एक सुगंधित तेल पर जादुई प्रभाव डालने की कोशिश की, ताकि राजकुमारी उसका इस्तेमाल करें और उसकी ओर आकर्षित हो जाएं। लेकिन राजकुमारी को उसकी मंशा का पता चल गया। लोककथा के अनुसार, उन्होंने उस तेल को एक बड़े पत्थर पर फेंक दिया।

    कहा जाता है कि जादुई प्रभाव के कारण वह पत्थर लुढ़कता हुआ सिंघिया की ओर बढ़ा और उसे कुचल दिया। मरने से पहले सिंघिया ने कथित तौर पर भानगढ़ को बर्बाद होने का श्राप दिया। कहानी के अगले हिस्से में दावा किया जाता है कि कुछ समय बाद शहर पर हमला हुआ और बस्ती उजड़ गई।

    हालांकि, यह पूरी कहानी स्थानीय लोककथा के रूप में प्रचलित है। इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना मानने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

    दूसरी कहानी में साधु के श्राप का जिक्र

    भानगढ़ के उजड़ने को लेकर एक दूसरी कथा भी सुनाई जाती है। इसमें गुरु बालू नाथ नाम के एक तपस्वी का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, शहर बसने से पहले वह इस क्षेत्र में तपस्या करते थे।

    कहानी के मुताबिक, उन्होंने शहर बसाने की अनुमति इस शर्त पर दी थी कि किसी भी इमारत की छाया उनके तपस्या स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। शुरुआत में इस शर्त का पालन किया गया, लेकिन बाद में एक ऊंची इमारत के निर्माण से कथित तौर पर यह नियम टूट गया।

    लोककथा के अनुसार, साधु नाराज हो गए और उन्होंने शहर के विनाश का श्राप दे दिया। इसके बाद भानगढ़ धीरे-धीरे उजड़ गया। इस कहानी को भी स्थानीय मान्यता के रूप में देखा जाता है, न कि किसी प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में।

    आखिर क्यों वीरान हुआ भानगढ़?

    भानगढ़ के उजड़ने की वास्तविक वजह को लेकर इतिहास में पूरी स्पष्टता नहीं मिलती। शहर के पतन से संबंधित ऐसी कोई सर्वमान्य व्याख्या उपलब्ध नहीं है, जो यह निश्चित रूप से बता सके कि बस्ती किस घटना के कारण खाली हुई थी।

    कुछ विवरणों में राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध, अकाल, बीमारी और प्रशासनिक बदलाव जैसी संभावनाओं का उल्लेख किया जाता है। लेकिन किसी एक कारण को निर्णायक रूप से साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं हैं।

    यही ऐतिहासिक अनिश्चितता भानगढ़ की रहस्यमयी छवि को मजबूत करती है। जहां इतिहास स्पष्ट जवाब नहीं दे पाता, वहां समय के साथ लोककथाएं और जनश्रुतियां जगह बना लेती हैं। भानगढ़ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

    खंडहरों में आज भी दिखाई देती है पुराने शहर की झलक

    भानगढ़ में आज भी कई ऐतिहासिक संरचनाओं के अवशेष मौजूद हैं। यहां गोपीनाथ मंदिर, सोमेश्वर मंदिर और मंगला देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख मिलता है। इन मंदिरों की वास्तुकला उस दौर की निर्माण शैली और शिल्पकला की झलक देती है।

    इसके अलावा, पुराने बाजार की सड़क और दुकानों के अवशेष भी इस बात का संकेत देते हैं कि यहां कभी व्यापारिक गतिविधियां होती थीं। आवासीय इमारतों और हवेलियों के खंडहर बताते हैं कि यह स्थान केवल सैन्य चौकी नहीं, बल्कि एक विकसित बस्ती भी रहा होगा।

    इन संरचनाओं का ऐतिहासिक महत्व भानगढ़ को केवल रहस्यमयी कहानियों तक सीमित नहीं रहने देता। यह राजस्थान की विरासत और मध्यकालीन शहरी जीवन को समझने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण स्थल है।

    सूर्यास्त के बाद जाने पर क्यों है रोक?

    भानगढ़ किले के प्रवेश द्वार पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से सूर्यास्त के बाद प्रवेश नहीं करने संबंधी चेतावनी का जिक्र अक्सर किया जाता है। इस सूचना को लेकर लोगों के बीच कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं और कुछ लोग इसे किले की भूतिया कहानियों से जोड़कर देखते हैं।

    हालांकि, अंधेरे में खंडहरों के बीच घूमना खतरनाक हो सकता है। यहां टूटी हुई संरचनाएं, असमान रास्ते, गहरे गड्ढे और कमजोर दीवारें दुर्घटना का कारण बन सकती हैं। इसलिए सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर रोक को अलौकिक घटनाओं का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

    भानगढ़ की रहस्यमयी छवि को लोकप्रिय बनाने में ऐसी कहानियों और पर्यटकों के अनुभवों का बड़ा योगदान रहा है। लेकिन किसी स्थान के बारे में प्रचलित डरावनी कहानियां अपने आप में वहां भूत-प्रेत या श्राप होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होतीं।

    भानगढ़ की कहानी आज भी लोगों को क्यों आकर्षित करती है?

    भानगढ़ का आकर्षण उसके इतिहास, वास्तुकला और रहस्यमयी लोककथाओं के मेल में छिपा है। एक तरफ यहां पुराने शहर के खंडहर हैं, जो बीते दौर की याद दिलाते हैं। दूसरी तरफ राजकुमारी रत्नावती, तांत्रिक सिंघिया और गुरु बालू नाथ से जुड़ी कहानियां हैं, जिन्होंने इस जगह को अलग पहचान दी है।

    भानगढ़ का उजड़ना इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में कई सवाल अब भी बने हुए हैं। श्राप की कहानियां इन सवालों को रोमांचक बनाती हैं, लेकिन शहर के पतन का असली कारण जानने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों को ही आधार मानना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह लेख भानगढ़ से जुड़ी उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियों और प्रचलित लोककथाओं पर आधारित है। श्राप, तांत्रिक और शहर के विनाश से जुड़ी कहानियों की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि नहीं है।

  • मधेपुरा में डबल मर्डर से सनसनी, 12 साल के सुमित की गला रेतकर हत्या; गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला.

    मधेपुरा में डबल मर्डर से सनसनी, 12 साल के सुमित की गला रेतकर हत्या; गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला.

    मधेपुरा में डबल मर्डर से सनसनी, 12 साल के सुमित की गला रेतकर हत्या; गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला.

    मधेपुरा, बिहार: मधेपुरा जिले के घैलाढ़ प्रखंड के ईटहरी गांव में शनिवार सुबह एक 12 वर्षीय बच्चे की हत्या के बाद हिंसा भड़क उठी। आरोप है कि 45 वर्षीय अनिल यादव ने सुमित कुमार की गला रेतकर हत्या कर दी। घटना की खबर फैलते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को तलाशकर पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। इस हमले में अनिल यादव की भी मौत हो गई। एक ही घटना में दो लोगों की मौत से इलाके में सनसनी फैल गई।

    घर के बच्चे की हत्या से गांव में मचा हड़कंप

    मृतक सुमित कुमार ईटहरी गांव के वार्ड नंबर दो के निवासी सुनील ठाकुर का बेटा था। उसकी उम्र महज 12 साल थी। मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11 बजे बच्चे पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में लोगों की भीड़ जुट गई। बच्चे की हत्या से नाराज ग्रामीणों ने कथित आरोपी अनिल यादव को खोजने के बाद उसे पकड़ लिया। इसके बाद लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी। गंभीर चोटों के कारण अनिल यादव की भी मौत हो गई।

    ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर की पिटाई

    अनिल यादव बराही पंचायत के वार्ड नंबर आठ का रहने वाला था। वह स्वर्गीय राजकिशोर यादव का बेटा बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था। हालांकि, उसकी मानसिक स्थिति और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    बच्चे की हत्या के बाद ग्रामीणों की प्रतिक्रिया हिंसक हो गई और कानून अपने हाथ में लेने की इस घटना में कथित आरोपी की भी जान चली गई। मामले में पुलिस अब दोनों मौतों की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    पुलिस ने दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे

    मधेपुरा सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार के अनुसार, पुलिस ने दोनों शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बच्चे पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ और उसके बाद आरोपी की पिटाई में कौन-कौन लोग शामिल थे।

    थानाध्यक्ष ने बताया कि कानून अपने हाथ में लेने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी और पुलिस के शुरुआती बयान पर आधारित है। दोनों मौतों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

  • घर में सात घोड़ों की तस्वीर किस दिशा में लगाना माना जाता है शुभ? जानें सही जगह और इन 5 जरूरी बातों का महत्व.

    घर में सात घोड़ों की तस्वीर किस दिशा में लगाना माना जाता है शुभ? जानें सही जगह और इन 5 जरूरी बातों का महत्व.

    घर में सात घोड़ों की तस्वीर किस दिशा में लगाना माना जाता है शुभ? जानें सही जगह और इन 5 जरूरी बातों का महत्व.

    वास्तु शास्त्र में सात दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर को गति, मेहनत, आत्मविश्वास और सफलता का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग इसे अपने घर, ऑफिस या कारोबार की जगह पर लगाते हैं। मान्यता है कि ऐसी तस्वीर व्यक्ति को आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देती है। हालांकि, इसे लगाने से धन लाभ या किस्मत चमकने की गारंटी नहीं होती। अगर आप भी घर में सात घोड़ों की तस्वीर लगाने की सोच रहे हैं, तो इससे जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं और जरूरी बातों को जान लें।

    सात घोड़ों की तस्वीर क्यों मानी जाती है खास?

    वास्तु और प्रतीकात्मक मान्यताओं में घोड़े को शक्ति, गति, ऊर्जा और निरंतर प्रगति से जोड़ा जाता है। सात घोड़ों की तस्वीर को जीवन में आगे बढ़ने, चुनौतियों का सामना करने और अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करने का प्रतीक माना जाता है।

    इसी वजह से कुछ लोग इसे अपने कार्यस्थल या घर की ऐसी जगह लगाते हैं, जहां उनकी नजर बार-बार इस पर पड़े। तस्वीर को देखकर व्यक्ति को मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण की याद मिल सकती है। इसका प्रभाव व्यक्तिगत सोच और प्रेरणा पर निर्भर करता है, न कि किसी निश्चित चमत्कारी परिणाम पर।

    किस दिशा में लगाएं सात घोड़ों की तस्वीर?

    वास्तु की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, सात घोड़ों की तस्वीर लगाने के लिए पूर्व और दक्षिण दिशा को शुभ माना जाता है।

    • पूर्व दिशा: इसे नई शुरुआत, ऊर्जा और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। इस दिशा में तस्वीर लगाने की सलाह कुछ वास्तु परंपराओं में दी जाती है।
    • दक्षिण दिशा: कुछ मान्यताओं में इसे नाम, प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र में प्रगति से जोड़ा जाता है।

    ध्यान रखें कि ये दिशाएं वास्तु संबंधी मान्यताओं पर आधारित हैं। वैज्ञानिक रूप से ऐसा प्रमाण नहीं है कि किसी खास दिशा में तस्वीर लगाने से नौकरी, कारोबार या आर्थिक स्थिति में अपने आप सुधार हो जाता है।

    घर में किस जगह लगाना बेहतर माना जाता है?

    सात घोड़ों की तस्वीर को लिविंग रूम, ड्रॉइंग रूम या कार्यस्थल की दीवार पर लगाया जा सकता है। ऐसी जगह चुनें जहां तस्वीर आसानी से दिखाई दे और कमरे की सजावट के साथ अच्छी लगे।

    यदि आप इसे ऑफिस में लगाना चाहते हैं, तो अपनी मेज के सामने या किसी साफ दीवार पर जगह चुन सकते हैं। इससे तस्वीर आपके लिए प्रेरणा का माध्यम बन सकती है।

    बेडरूम या रसोई में इसे लगाने से बचने की सलाह कुछ वास्तु मान्यताओं में दी जाती है, लेकिन ऐसा करना कोई अनिवार्य नियम नहीं है। तस्वीर कहां लगानी है, यह कमरे के उपयोग, उपलब्ध जगह और आपकी पसंद पर निर्भर करता है।

    कैसी होनी चाहिए सात घोड़ों की तस्वीर?

    तस्वीर खरीदते या चुनते समय इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं:

    1. सात घोड़े स्पष्ट दिखाई दें: तस्वीर में घोड़ों की संख्या और उनकी आकृति साफ होनी चाहिए।
    2. घोड़े गतिशील मुद्रा में हों: दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर गति और प्रगति का प्रतीक मानी जाती है।
    3. तस्वीर साफ और अच्छी गुणवत्ता वाली हो: धुंधली, फटी या क्षतिग्रस्त तस्वीर के बजाय अच्छी स्थिति वाली तस्वीर चुनें।
    4. रंग और आकार कमरे के अनुकूल हों: तस्वीर ऐसी हो जो दीवार और कमरे की सजावट के साथ मेल खाए।
    5. दृश्य सकारात्मक लगे: ऐसी तस्वीर चुनें जिसे देखकर आपको उत्साह और प्रेरणा महसूस हो।

    क्या घोड़ों का मुंह घर के अंदर की ओर होना चाहिए?

    वास्तु की कुछ मान्यताओं के अनुसार, तस्वीर में दौड़ते घोड़ों का रुख घर के भीतर की ओर होना शुभ माना जाता है। इसे प्रगति और सकारात्मकता को घर की ओर आने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    हालांकि, तस्वीर में घोड़ों का रुख घर के अंदर होने से धन या सफलता मिलने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए इसे अपनी आस्था और सजावट की पसंद के अनुसार चुन सकते हैं।

    सात घोड़ों की तस्वीर लगाते समय इन गलतियों से बचें

    • तस्वीर को ऐसी जगह न लगाएं जहां वह बार-बार गिरने या टूटने के खतरे में हो।
    • दीवार पर धूल जमा होने से बचाने के लिए तस्वीर की नियमित सफाई करें।
    • कमरे की सजावट और जगह के अनुपात से बहुत बड़ी तस्वीर न चुनें।
    • केवल वास्तु उपाय के भरोसे अपने जरूरी फैसले न छोड़ें।
    • करियर और आर्थिक प्रगति के लिए मेहनत, योजना, कौशल और सही वित्तीय निर्णयों पर भी ध्यान दें।

    डिस्क्लेमर: सात घोड़ों की तस्वीर की दिशा और उससे जुड़े शुभ-अशुभ प्रभाव वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि तस्वीर लगाने मात्र से किस्मत बदलती है या धन लाभ होता है। इसे सजावट और सकारात्मक प्रेरणा के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है।

  • डेटिंग ऐप पर प्यार, फिर 90 लाख का खेल! MBA पास युवती पर बॉयफ्रेंड को ब्लैकमेल करने का आरोप, कैफे में ऐसे खुला मामला,

    डेटिंग ऐप पर प्यार, फिर 90 लाख का खेल! MBA पास युवती पर बॉयफ्रेंड को ब्लैकमेल करने का आरोप, कैफे में ऐसे खुला मामला,

    डेटिंग ऐप पर प्यार, फिर 90 लाख का खेल! MBA पास युवती पर बॉयफ्रेंड को ब्लैकमेल करने का आरोप, कैफे में ऐसे खुला मामला,

    हरियाणा: डेटिंग ऐप पर हुई एक मुलाकात, धीरे-धीरे बढ़ती नजदीकियां और फिर पैसों को लेकर शुरू हुआ विवाद। गुरुग्राम में सामने आया यह मामला इन दिनों चर्चा में है। आरोप है कि एक युवती ने पहले युवक से दोस्ती की, फिर रिश्ते में नजदीकियां बढ़ने के बाद उसे कथित तौर पर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। युवक का दावा है कि उससे करीब 90 लाख रुपये वसूले गए। मामले में पुलिस ने MBA पास युवती को सेक्टर-47 के एक कैफे से गिरफ्तार किया था, जहां वह कथित तौर पर 50 हजार रुपये नकद ले रही थी।

    डेटिंग ऐप से शुरू हुई कहानी

    मामले के मुताबिक, युवक और युवती की जान-पहचान एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच बातचीत हुई और फिर मुलाकातों का सिलसिला आगे बढ़ा। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं और उनके संबंध भी बन गए।

    युवक का आरोप है कि कुछ समय बाद रिश्ते का माहौल बदल गया। उसने दावा किया कि युवती उस पर पैसे देने का दबाव बनाने लगी। मामला सिर्फ पैसों की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवक को कथित तौर पर कानूनी कार्रवाई में फंसाने और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां भी दी गईं।

    90 लाख रुपये वसूलने का दावा

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, युवती ने कथित धमकियों के जरिए उससे अलग-अलग समय पर करीब 90 लाख रुपये ले लिए। युवक का आरोप है कि झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की बात कहकर उस पर दबाव बनाया जाता था, जिसके चलते वह पैसे देने को मजबूर हुआ।

    हालांकि, यह रकम किस-किस तारीख को और किन माध्यमों से दी गई, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस के लिए यह पता लगाना भी जरूरी है कि कथित ब्लैकमेलिंग किस तरह की गई और आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य मौजूद हैं।

    कैफे में 50 हजार रुपये लेते समय पहुंची पुलिस

    मामले की शिकायत मिलने के बाद गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने सेक्टर-47 स्थित एक कैफे में युवती को उस समय गिरफ्तार किया, जब वह कथित तौर पर युवक से 50 हजार रुपये नकद ले रही थी।

    इस कार्रवाई के बाद मामले ने लोगों का ध्यान खींचा। पुलिस अब पैसों के लेन-देन, धमकियों से जुड़े आरोपों और युवक-युवती के बीच हुए संपर्क की जांच कर रही है।

    रिश्ते और पैसों के बीच उलझा मामला

    इस घटना में सबसे अहम सवाल यह है कि डेटिंग ऐप से शुरू हुआ रिश्ता आखिर ऐसे विवाद तक कैसे पहुंचा। युवक ने युवती पर ब्लैकमेलिंग और बड़ी रकम वसूलने के आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

    फिलहाल, गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने पर ही स्पष्ट हो पाएगा कि कथित तौर पर कितनी रकम का लेन-देन हुआ और इसमें किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

    डिस्क्लेमर: यह घटना पहले प्रकाशित रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।