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  • कपड़े धोएं और पाएं 90 लाख रुपये! साथ में विदेश घूमने का मौका, लेकिन नौकरी में हैं ये शर्तें..

    कपड़े धोएं और पाएं 90 लाख रुपये! साथ में विदेश घूमने का मौका, लेकिन नौकरी में हैं ये शर्तें..

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    कपड़े धोओ, विदेश घूमो और पाओ ₹90 लाख! लेकिन ये हैं शर्तें; इस वायरल 'ड्रीम जॉब' ने मचाया तहलका

    सोशल मीडिया पर आजकल लंदन की एक जॉब वैकेंसी को लेकर बड़ी चर्चा है. पहली नजर में सुनने में आता है कि कपड़े धोने की नौकरी के लिए सालाना 90 लाख रुपए मिल रहे हैं, तो हर कोई हैरान रह जाता है. ब्रिटेन की ‘द लेडी’ मैगजीन और ‘ब्यूचैम्प पार्टनर्स’ एजेंसी के जरिए आई यह वैकेंसी सुनने में जितनी आसान लगती है, असलियत में उतनी ही कड़ी है. आइए जानते हैं कि इस 90 लाख के पैकेज के पीछे आखिर माजरा क्या है.

    सिर्फ कपड़े धोना नहीं, फैब्रिक का रखना होगा हिसाब

    यह कोई आम नौकरी नहीं है. इसमें आपको दुनिया के सबसे महंगे और नाजुक डिजाइनर कपड़ों की देखभाल करनी होगी. कौन सा कपड़ा किस तरह धोना है, कैसे सुखाना है और उसे कैसे संभालकर रखना है, इसकी पूरी समझ होनी चाहिए. जरा सी गलती से लाखों रुपए के कपड़े खराब हो सकते हैं.

    लग्जरी गाड़ियों की ड्राइविंग और देखभाल

    इस जॉब में सिर्फ कपड़े धोने तक सीमित नहीं रहना है. आपको मालिक की लग्जरी कारों को भी चलाना होगा. उन्हें सही सलामत मीटिंग्स या इवेंट्स तक पहुंचाना और गाड़ियों की देखरेख करना भी इसी काम का हिस्सा है.

    पार्टियों और इवेंट्स का मैनेजमेंट

    मालिक के घर होने वाली बड़ी और हाई-प्रोफाइल पार्टियों की जिम्मेदारी भी आपको ही संभालनी होगी. मेहमानों का ध्यान रखना और घर की व्यवस्था को अच्छे से चलाना इसी रोल का हिस्सा है.

    लगातार विदेश यात्राएं

    मालिक साल में करीब 90 दिन ही लंदन में रहते हैं. बाकी पूरा साल वे दुनिया भर में घूमते रहते हैं. ऐसे में आपको भी उनके साथ हर जगह यात्रा करनी होगी. इसके लिए आपके काम करने के घंटे फिक्स नहीं होंगे, यानी आपको हर समय तैयार रहना होगा.

    इतनी बड़ी सैलरी का सच क्या है?

    यह 90 लाख रुपए का पैकेज सिर्फ कपड़े धोने के लिए नहीं है, बल्कि एक ही इंसान से कई सारे काम करवाने का है. इसमें आपको ड्राइवर, लॉन्ड्री एक्सपर्ट, केयरटेकर और पर्सनल हेल्पर, सबकी भूमिका एक साथ निभानी होगी. यह भी पढ़ें: 40 की उम्र में गई नौकरी, तो शख्स बोला- भैया, Layoff के तो बड़े फायदे हैं! वायरल हुआ वीडियो

    सबसे बड़ी शर्त यह है कि मालिक की पर्सनल लाइफ और प्राइवेसी से जुड़ी बातें पूरी तरह गोपनीय रखनी होंगी, यानी किसी को कुछ बताना नहीं है. यह भी पढ़ें: OMG! शख्स की चमकी किस्मतरातों-रात बदल गई जिंदगी, एक टिकट से मिला 13,357 करोड़ का इनाम

  • दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

    दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

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    हर इंसान अपनी जिंदगी में सच्चा सुख और शांति पाना चाहता है. इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत भी करता है. महाभारत काल के महान ज्ञानी महात्मा विदुर ने सुखद जीवन के कई रहस्य बताए हैं.

    उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही सच साबित होती हैं. विदुर नीति के अनुसार दुनिया में सबसे सुखी इंसान वही है जिसके पास स्वास्थ्य, सम्मान और अपनों का प्यार है. आइए जानते हैं महात्मा विदुर के वे 6 नियम जो जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.

    निरोगी शरीर ही सबसे बड़ा धन है

    जीवन में सबसे पहला और बड़ा सुख इंसान का सेहतमंद रहना है. अगर शरीर में कोई बीमारी है तो दुनिया की हर खुशी बेकार लगने लगती है. बीमारी की वजह से इंसान का मन हमेशा चिंताओं से घिरा रहता है.

    बिना अच्छी सेहत के इंसान अपनी धन-दौलत का आनंद भी नहीं ले पाता. इसलिए महात्मा विदुर कहते हैं कि अपने शरीर और सेहत का ध्यान रखना सबसे पहला और जरूरी काम है.

    कर्ज से आजादी दिलाती है सच्चा सुकून

    जीवन में दूसरा सबसे बड़ा सुख कर्ज से मुक्त होना है. किसी से उधार या कर्ज लेकर जीने वाला इंसान कभी चैन की नींद नहीं सो पाता. कर्ज का बोझ इंसान का मानसिक सुकून और शांति पूरी तरह छीन लेता है.

    कमाई कम हो तो भी अपने खर्चों को सीमित रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है. कर्ज से दूर रहकर ही इंसान समाज में सम्मान के साथ सिर उठाकर जी सकता है.

    अपनों का साथ और प्यार है असली ताकत

    महात्मा विदुर के अनुसार इंसान का सच्चा सुख अपनों के साथ में ही छिपा है. जिस घर में परिवार के सदस्यों का प्यार और सहयोग मिलता है, वहाँ हमेशा खुशियाँ बनी रहती हैं.

    जब अपनों का साथ होता है तो जीवन के कठिन से कठिन रास्ते भी बेहद आसान हो जाते हैं. अपनों का साथ इंसान को हर दुख-दर्द से लड़ने की हिम्मत देता है.

    सही रास्ते से की गई कमाई देती है शांति

    इंसान का चौथा सुख उसकी मेहनत और ईमानदारी की कमाई है. गलत या धोखे के रास्ते से कमाया गया पैसा ज्यादा दिन नहीं टिकता और अशांति लाता है.

    ईमानदारी की कमाई से घर में बरकत आती है और मन हमेशा शांत रहता है. मेहनत की कमाई इंसान को समाज में मान-सम्मान दिलाती है. सही तरीके से कमाया हुआ धन ही जीवन को सुरक्षित बनाता है.

    समझदार और संस्कारी जीवनसाथी का होना

    जीवन में एक समझदार और गुणी जीवनसाथी का होना बेहद जरूरी है. अच्छा जीवनसाथी सुख और दुख दोनों में बराबर का भागीदार बनता है.

    अगर जीवनसाथी संस्कारी और सुलझा हुआ है तो घर का माहौल हमेशा सुखद बना रहता है. विपरीत परिस्थितियों में सही सलाह देने वाला जीवनसाथी ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत बनता है और जीवन को सफलता की ओर ले जाता है.

    ज्ञान और अच्छी संगति से मिलता है मान-सम्मान

    महात्मा विदुर के मुताबिक सही ज्ञान और अच्छी संगति जीवन का छठा सुख है. सही ज्ञान इंसान को सही और गलत का फर्क सिखाता है. अच्छे और सकारात्मक लोगों के साथ रहने से इंसान के विचार भी बेहतर बनते हैं.

    समझदार और सज्जन लोग समाज में हमेशा आदर पाते हैं. अपनी बुद्धि और अच्छी संगति के बल पर इंसान जीवन की हर बड़ी बाधा को आसानी से पार कर लेता है.

  • कुदरत का अनोखा करिश्मा! जमीन के अंदर दबकर भी सालों जिंदा रहती है ये मछली, जानिए इसका रहस्य?

    कुदरत का अनोखा करिश्मा! जमीन के अंदर दबकर भी सालों जिंदा रहती है ये मछली, जानिए इसका रहस्य?

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    दुनियाभर में कई ऐसे विचित्र जीव-जंतु हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. इनमें से कुछ जीव अपनी ही प्रजाति के दूसरे जीवों से बिल्कुल अलग होते हैं. अब मछली को ही ले लीजिए. बचपन से ही हम पढ़ते आ रहे हैं कि ‘मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है’, यानी बिना पानी के मछली का जिंदा रहना नामुमकीन है. वो तड़प-तड़प कर मर जाएगी. लेकिन एक मछली ऐसी भी है, जो पानी के बिना महीनों ही नहीं, बल्कि कई सालों तक जमीन पर जिंदा रह सकती है. इस अनोखी और रहस्यमयी मछली का नाम लंगफिश है, जिसे कई जगहों पर सालामैंडरफिश के नाम से भी पहचाना जाता है. यह मीठे पानी में पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की मछली है, जो जमीन पर रहने के अपने अद्भुत गुण के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

    लंगफिश, इसके नाम से ही साफ पता चलता है, इस मछली के पास एक बहुत ही विकसित श्वसन तंत्र होता है. इंसानों और जमीनी जानवरों की तरह यह मछली भी सीधे हवा से ऑक्सीजन लेने में सक्षम होती है. लंगफिश का शरीर काफी लंबा और पतला होता है, जो देखने में बिल्कुल बाम मछली की तरह दिखाई देता है. इसके पास धागे जैसे पतले पंख होते हैं, जिनका उपयोग यह पानी में तैरने और सतह पर रेंगने के लिए करती है. यह मछली आमतौर पर उथले पानी के सोर्स जैसे दलदल, पोखर और झीलों में रहना पसंद करती है. जब तक पानी मौजूद रहता है, तब तक यह बाकी सामान्य मछलियों की तरह ही व्यवहार करती है और छोटे जीवों तथा केकड़ों को अपना भोजन बनाती है.

    सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि वयस्क होने पर इनमें से कुछ प्रजातियों के गलफड़े काम करना लगभग बंद कर देते हैं. ऐसे में पानी में रहते हुए भी इन्हें सांस लेने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है. अगर इस मछली को लंबे समय तक पानी के अंदर ही दबाकर रखा जाए, तो सांस न ले पाने के कारण यह पानी के भीतर ही डूबकर मर सकती है. यह बात इसे दुनिया की बाकी सभी मछलियों से एकदम अलग और अनोखा बनाती है. जब भीषण गर्मी और सूखे का मौसम आता है और नदियां-तालाब सूखने लगते हैं, तब लंगफिश अपनी जान बचाने का अनोखा तरीका अपनाती है. यह अपने मुंह में मिट्टी भरकर और उसे गलफड़ों से बाहर निकालकर कीचड़ के अंदर एक गहरा गड्ढा खोद लेती है.

    उस गड्ढे की गहराई में पहुंचने के बाद यह अपनी त्वचा से एक विशेष तरल पदार्थ (म्यूकस) छोड़ती है, जो सूखकर एक सुरक्षात्मक खोल बन जाता है. इस खोल के अंदर मछली का केवल मुंह सांस लेने के लिए खुला रहता है. सूखे के इस लंबे दौर में मछली अपनी मेटाबॉलिज्म को बहुत कम कर देती है और अपनी पूंछ के मांसपेशियों के ऊतकों को खाकर जीवित रहती है. जब दोबारा बारिश होती है और मिट्टी नरम पड़ती है, तो यह बाहर निकल आती है. यह मछली सूखे कीचड़ में 4 साल तक बिना पानी के जिंदा रह सकती है. यह मुख्य रूप से अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है, जहां स्थानीय लोग सूखे के दौरान जमीन खोदकर इसे खाने के लिए निकालते हैं.

  • चॉकलेट के लिए मां से रूठा 3 साल का बच्चा, सीधे पुलिस के पास पहुंचकर बोला- ‘मम्मी की शिकायत करनी है!’

    चॉकलेट के लिए मां से रूठा 3 साल का बच्चा, सीधे पुलिस के पास पहुंचकर बोला- ‘मम्मी की शिकायत करनी है!’

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    Viral Video : बच्चों की नाराजगी भी कितनी मासूम होती है, इसका अंदाजा मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से वायरल हुए एक पुराने वीडियो को देखकर लगाया जा सकता है. मामला साल 2022 का बताया जा रहा है, लेकिन बच्चे की मासूम शिकायत का वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है.

    वीडियो में करीब 3 साल का एक बच्चा पुलिस चौकी में पुलिस अधिकारी के सामने बैठा नजर आता है. देखने में यह बिल्कुल सामान्य शिकायत जैसा लगता है, लेकिन जब बच्चे से उसकी परेशानी पूछी जाती है तो उसकी बात सुनकर वहां मौजूद लोग मुस्कुराने लगते हैं.

    चॉकलेट को लेकर नाराज था बच्चा

    बताया जाता है कि बच्चा चॉकलेट या कैंडी खाने की जिद कर रहा था. इसी दौरान उसकी मां उसे नहलाने और काजल या टीका लगाने की कोशिश कर रही थीं. बच्चे की जिद और शरारत से परेशान होकर मां ने उसे डांट दिया और हल्की फटकार भी लगा दी.

    बस फिर क्या था, नन्हा बच्चा अपनी मां से नाराज हो गया. उसने अपने पिता से पुलिस के पास चलने की जिद पकड़ ली. पिता भी बच्चे की बात मानते हुए उसे लेकर डेढ़तलाई पुलिस चौकी पहुंच गए.

    चौकी में मौजूद सब-इंस्पेक्टर प्रियंका नायक ने जब बच्चे से उसकी परेशानी पूछी, तो उसने अपनी मासूम भाषा में मां के खिलाफ शिकायत शुरू कर दी. बच्चे का आरोप था कि उसकी मां उसकी चॉकलेट ले लेती हैं और उसे मारती भी हैं. मासूम ने यहां तक कह दिया कि उसकी मां को जेल में डाल दिया जाए.

    पुलिस अधिकारी ने भी निभाया ‘इंसाफ’

    बच्चे की शिकायत सुनकर पुलिसकर्मी उसकी मासूमियत पर मुस्कुराने लगे. हालांकि, अधिकारी ने उसकी बात को नजरअंदाज नहीं किया. उन्होंने बच्चे को सहज महसूस कराने के लिए कागज और पेन लिया और उसकी शिकायत लिखने का नाटक किया.

    जब बच्चे से शिकायत पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, तो उसने भी बड़े गंभीर अंदाज में पेन उठाया और कागज पर कुछ लकीरें खींच दीं. उसके इस अंदाज ने पूरे माहौल को और मजेदार बना दिया.

    वीडियो ने फिर खींचा लोगों का ध्यान

    बच्चे की ‘पुलिस शिकायत’ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को खूब पसंद आ रहा है. यूजर्स उसकी मासूमियत, नाराजगी और पुलिस से न्याय मांगने के अंदाज पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कई लोगों के लिए यह वीडियो बचपन की उन छोटी-छोटी बातों की याद दिला रहा है, जब चॉकलेट, टॉफी या खिलौना न मिलने पर बच्चे दुनिया की सबसे बड़ी समस्या समझ लेते हैं. वीडियो 2022 की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है और इसकी मूल परिस्थितियों की न्यूज18 स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है.

  • पुरुषों की यौन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है सहजन! जानिए इसके सेवन के फायदे..

    पुरुषों की यौन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है सहजन! जानिए इसके सेवन के फायदे..

    सहजन यानी मोरिंगा की फली भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। इसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसे खास तौर पर पुरुषों की यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवा मानना सही नहीं है, लेकिन इसके पोषक गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जरूर हैं।

    विटामिन और मिनरल्स से भरपूर

    सहजन की फली में विटामिन C, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज और प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    फाइबर का अच्छा स्रोत

    सहजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। नियमित और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

    पुरुषों की सेहत के लिए

    सहजन में मौजूद पोषक तत्व शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करना भी पुरुषों की यौन और प्रजनन से जुड़ी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    क्या सहजन शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है?

    सहजन को सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने या यौनशक्ति बढ़ाने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध शोध सीमित हैं और इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए यौन कमजोरी या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर केवल सहजन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    महिलाओं के लिए भी उपयोगी

    सहजन में मौजूद फाइबर, विटामिन और खनिज महिलाओं के लिए भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, गर्भाशय की किसी बीमारी या दर्द का इलाज सहजन से होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।

    निष्कर्ष: सहजन को पौष्टिक सब्जी के रूप में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। किसी भी लगातार यौन या प्रजनन संबंधी समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    सहजन यानी मोरिंगा की फली भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। इसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसे खास तौर पर पुरुषों की यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवा मानना सही नहीं है, लेकिन इसके पोषक गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जरूर हैं।

    विटामिन और मिनरल्स से भरपूर

    सहजन की फली में विटामिन C, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज और प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    फाइबर का अच्छा स्रोत

    सहजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। नियमित और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

    पुरुषों की सेहत के लिए

    सहजन में मौजूद पोषक तत्व शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करना भी पुरुषों की यौन और प्रजनन से जुड़ी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    क्या सहजन शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है?

    सहजन को सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने या यौनशक्ति बढ़ाने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध शोध सीमित हैं और इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए यौन कमजोरी या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर केवल सहजन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    महिलाओं के लिए भी उपयोगी

    सहजन में मौजूद फाइबर, विटामिन और खनिज महिलाओं के लिए भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, गर्भाशय की किसी बीमारी या दर्द का इलाज सहजन से होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।

    निष्कर्ष: सहजन को पौष्टिक सब्जी के रूप में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। किसी भी लगातार यौन या प्रजनन संबंधी समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

  • परिवार से बगावत कर दो लड़कियों ने रचाई शादी, बिहार में मचा बवाल! कोर्ट ने दिया ये आदेश..

    परिवार से बगावत कर दो लड़कियों ने रचाई शादी, बिहार में मचा बवाल! कोर्ट ने दिया ये आदेश..

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    बिहार की राजधानी पटना से प्यार, बगावत और सामाजिक मान्यताओं को तोड़ने वाली एक अनोखी खबर सामने आई है. यहाँ अदालतगंज इलाके की रहने वाली दो स्कूली छात्राओं ने आपस में शादी कर ली. दोनों के बीच प्यार इस कदर गहरा था कि उन्होंने न सिर्फ सामाजिक और पारिवारिक बंदिशों को दरकिनार किया, बल्कि धर्म के बंधनों को भी तोड़ दिया.

    अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाली ये दोनों लड़कियां पिछले तीन सालों से एक-दूसरे से प्यार करती थीं और अंततः घर से भागकर एक मंदिर में शादी के बंधन में बंध गईं. पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों लड़कियां पड़ोसी हैं और आपस में गहरी सहेलियां थीं. इनमें से एक लड़की 10वीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि दूसरी 12वीं की छात्रा है. 10वीं की छात्रा के पिता सीआईडी (CID) में कार्यरत बताए जा रहे हैं.

    छात्राओं ने अपने रिश्ते को हमेशा के लिए शादी का रूप देने का फैसला किया और 7 अगस्त को बिना किसी को बताए घर से निकल गईं. उनके पास उस वक्त सिर्फ 3,500 रुपये थे. पटना से निकलकर दोनों सीधे खगड़िया पहुंचीं, जहाँ उन्होंने एक स्थानीय मंदिर में शादी की और उसके बाद एक होटल में ठहरीं.

    परिजनों ने दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस ने खगड़िया से किया बरामद

    दोनों लड़कियों के एक साथ अचानक गायब होने से परिजनों में हड़कंप मच गया. 7 अगस्त को परिजनों ने पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली थाने की महिला पुलिस पदाधिकारी पूनम कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों को खगड़िया स्टेशन के पास से सकुशल बरामद कर लिया और पटना ले आई.

    “साथ रहेंगे, अलग नहीं होंगे…” थाने में अड़ गईं दोनों

    पटना महिला थाने और कोतवाली थाने लाने के बाद भी दोनों लड़कियों का रुख नहीं बदला. दोनों ने पुलिस और परिजनों के सामने साफ कह दिया कि वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करती हैं और अब कभी अलग नहीं होंगी. दोनों में से कोई भी अपने-अपने परिजनों के साथ घर जाने को तैयार नहीं हुई.

    नाबालिग रिमांड होम भेजी गई, बालिग को मिली आजादी

    कोतवाली थाना प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि जांच में एक लड़की के बालिग (18 वर्ष या उससे अधिक) और दूसरी के नाबालिग होने की पुष्टि हुई है. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया. अदालत के आदेश पर नाबालिग लड़की को सुरक्षा और देखरेख के लिए रिमांड होम (बाल गृह) भेज दिया गया है. कोर्ट ने बालिग लड़की को अपनी मर्जी से कहीं भी रहने और जाने की पूरी आजादी दी है.

  • सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    Pradosh Vrat In Sawan 2026: सावन मास में पड़ने वाला भौम प्रदोष व्रत शिव जी उपासना के लिए समर्पित है. ध्यान दें सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है ऐसे में इस माह के प्रदोष व्रत पर शिव जी की पूजा करने से अति शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है. सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत कब है, इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस व्रत पर किस विधि से भोलेनाथ की पूजा करें? इस बारे में आइए इस लेख में जानें.

    सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत 2026 कब है

    सावन माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 की सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर तिथि समाप्त हो जाएगी. इस तरह 25 अगस्त 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यह प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ रहा है ऐसे में इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा.

    सावन भौम प्रदोष व्रत पर शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 बजे से लेकर 05:11 बजे तक.
    अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक.
    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:32 बजे से लेकर 03:24 बजे तक.
    प्रदोष काल: शाम 06:51 बजे से लेकर रात 09:04 बजे तक.

    भौम प्रदोष व्रत पर शिव जी और मां पार्वती की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत पर अगर विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें तो उनकी कृपा प्राप्त होगी. इसके साथ ही मंगल ग्रह भी मजबूत होगा. इस दिन व्रत रखने व शिव जी की पूजा करने से मंगल दोष और भूमि संबंधी बाधाओं का अंत भी हो सकती है. सावन माह के प्रदोष व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, ऐसे में इस दिन सही विधि से शिव जी की पूजा करें तो इससे भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है. आइए जानें शिव जी की किस विधि से पूजा करें.

    शिव जी की पूजा विधि

    भौम प्रदोष व्रत पर सुबह उठकर स्नान आदि कर सफेद वस्त्र पहने.
    शिव का ध्यान करें और प्रदोष व्रत का संकल्प करें.
    प्रदोष काल में फिर से स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करेंय
    शिव जी और माता पर्वती की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें.
    चौकी के सामने आटे और हल्दी से स्वास्तिक बनाएं.
    भगवान शिव को धतूरा, मदार, बेलपत्र, दूध, दही, शहद चढ़ाएं.
    सफेज भोग जैसे सफेद मिठाई या खीर का भोग अर्पित करें.
    अब शिव जी का ध्यान कर मंत्र का जाप करें. मंत्र है- “ॐ नमः शिवाय”. 
    शिव चालीसा का पाठ करें और हो सकें तो रुद्राभिषेक करें.

  • बुजुर्गों की मदद के लिए साल में 200 से ज्यादा यात्राएं! इस शख्स की कहानी जीत लेगी आपका दिल

    बुजुर्गों की मदद के लिए साल में 200 से ज्यादा यात्राएं! इस शख्स की कहानी जीत लेगी आपका दिल

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    Viral Post : चीन के हुबेई प्रांत में रहने वाले 39 वर्षीय टियान रुई इन दिनों अपनी अनोखी पहल की वजह से सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहे हैं. कभी कूरियर डिलीवरी का काम करने वाले टियान अब उन बुजुर्गों के लिए परिवार की तरह बन चुके हैं, जिनके बच्चे नौकरी या बेहतर भविष्य की तलाश में उनसे हजारों किलोमीटर दूर रहते हैं.

    टियान पहाड़ी इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों से मिलने के लिए साल में 200 से ज्यादा बार सफर करते हैं. वह उनके लिए दवाइयां, राशन और जरूरत का सामान लेकर जाते हैं. लेकिन टियान का काम केवल सामान पहुंचाने तक सीमित नहीं है. कई बुजुर्गों के लिए उनकी सबसे बड़ी जरूरत किसी अपने से बातचीत करना और कुछ पल साथ बिताना है.

    बुजुर्गों को सामान से ज्यादा चाहिए साथ

    टियान बताते हैं कि पहाड़ों में रहने वाले बुजुर्गों से मिलने पर उन्हें अक्सर एक ही बात महसूस होती है. उन्हें सिर्फ दवा या खाने-पीने का सामान नहीं चाहिए, बल्कि किसी ऐसे इंसान की जरूरत है जो बैठकर उनकी बातें सुने. एक करीब 80 वर्षीय महिला तो हर मुलाकात के बाद टियान से पूछती हैं कि वह अगली बार कब आएंगे. उनके लिए टियान की यात्रा सिर्फ एक डिलीवरी नहीं, बल्कि अपनों के आने जैसा इंतजार बन चुकी है.

    इसी तरह बोलीविया में करीब 17 हजार किलोमीटर दूर रहने वाला एक बेटा भी अपने माता-पिता तक दवाइयां और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए टियान की मदद लेता है.

    टियान जब भी पहाड़ों में जाते हैं, वहां रहने वाले बुजुर्गों से मुलाकात के छोटे-छोटे वीडियो रिकॉर्ड करते हैं. बाद में उन्हें एडिट करके विदेश या दूसरे शहरों में रहने वाले परिवार के सदस्यों तक पहुंचाते हैं.

    उनके बनाए वीडियो कभी-कभी परिवार के लिए बेहद भावुक याद बन जाते हैं. टियान ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग का वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिनकी करीब चार महीने बाद मौत हो गई. बाद में वही वीडियो उनके परिवार के लिए पिता की आखिरी यादों में से एक बन गया.

    बिना मुनाफे के निभा रहे हैं जिम्मेदारी

    चीन में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संख्या बड़ी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 तक करीब 11.8 करोड़ बुजुर्ग अकेले रह रहे थे, जिन्हें वहां ‘एम्प्टी नेस्ट’ बुजुर्ग कहा जाता है. टियान इस काम से कोई मुनाफा नहीं कमाते. वह मुख्य रूप से पेट्रोल का खर्च लेते हैं और बाकी काम अपनी इच्छा से करते हैं. उनके लिए यह सिर्फ सामान पहुंचाने का काम नहीं, बल्कि उन परिवारों के बीच दूरी कम करने की कोशिश है, जहां बच्चे दूर हैं और माता-पिता पहाड़ों में अकेले हैं.

  • न शादी का सामान, न कोई गहना… दुल्हन की डोली में रखी जाती थी ये खास रोटी, वजह बेहद दिलचस्प..

    न शादी का सामान, न कोई गहना… दुल्हन की डोली में रखी जाती थी ये खास रोटी, वजह बेहद दिलचस्प..

    मुल्तान की वो अनोखी रोटी, जिसे हर दुल्हन की डोली में रखा जाता था

    भारत और पाकिस्तान भले ही आज अलग-अलग देशों में बंटे हुए हैं, लेकिन दोनों जगहों की खान-पान और लाइफस्टाइल में आज भी कई समानताएं देखने को मिलती हैं. रोटी भी ऐसी ही चीज है, जो दोनों देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रही है. भारत में जहां नान, पराठा, रुमाली रोटी से लेकर कई तरह की पारंपरिक रोटियां बनाई जाती हैं, वहीं पाकिस्तान में भी अलग-अलग इलाकों की अपनी खास रोटियां हैं. इन्हीं में से एक है मुल्तान की मशहूर ‘डोली रोटी’, जिसका रिश्ता सिर्फ स्वाद से नहीं, बल्कि करीब 100 साल पुरानी एक दिलचस्प परंपरा से जुड़ा हुआ है.

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कंटेंट क्रिएटर अक्सा जट ने मुल्तान की इसी खास रोटी के बारे में जानकारी दी है. वीडियो में वह बताती हैं कि करीब 100 साल पहले मुल्तान में शादी के समय दुल्हन की डोली के साथ यह रोटी रखी जाती थी. हालांकि, इसे सिर्फ दुल्हन के लिए नहीं रखा जाता था. यह बारात के लोगों के लिए रास्ते का खाना हुआ करता था. आज के दौर में शादी में कुछ घंटों का सफर तय करके बारात आसानी से दुल्हन के घर पहुंच जाती है, लेकिन पुराने समय में ऐसा नहीं था. उस वक्त न तो आज जैसी सड़कें थीं और न ही हर किसी के पास कार या दूसरे साधन उपलब्ध थे. कई बार बारात को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कई दिन लग जाते थे.

    कई दिनों के सफर के लिए था खाने का इंतजाम
    अक्सा जट के मुताबिक, पुराने समय में लोग घोड़ों और तांगों से सफर करते थे. लंबी दूरी की यात्रा में सबसे बड़ी समस्या खाने-पीने की होती थी. रास्ते में हर जगह खाना मिलना आसान नहीं था और बारात में बड़ी संख्या में लोग भी शामिल होते थे. ऐसे में ऐसी चीज की जरूरत थी, जिसे पहले से तैयार करके लंबे सफर के दौरान आसानी से खाया जा सके. इसी जरूरत ने डोली रोटी को खास बना दिया. मीठी रोटी को डोली में रख दिया जाता था, ताकि रास्ते में जब किसी को भूख लगे तो वह इसे खा सके. इस तरह यह रोटी सिर्फ एक व्यंजन नहीं रही, बल्कि उस समय की यात्रा और शादी की जरूरत का हिस्सा बन गई.

    कभी सिर्फ मीठी होती थी डोली रोटी
    बताया जाता है कि पुराने समय में डोली रोटी मुख्य रूप से मीठी बनाई जाती थी. इसे इस तरह तैयार किया जाता था कि वह सफर के दौरान खाने के काम आ सके. समय के साथ इसके स्वाद और बनाने के तरीके में भी बदलाव आया. आज डोली रोटी के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं. इसमें खोया और कीमा जैसी चीजों का इस्तेमाल भी किया जाने लगा है. यानी एक समय बारात के लंबे सफर का सहारा रही यह रोटी अब स्वाद और स्थानीय पहचान का हिस्सा बन चुकी है. दशकों से रोटी बना रहा है मुल्तान का मशहूर रोटी वाला

     

     


    अक्सा जट ने अपने वीडियो में मुल्तान के मशहूर फहीम रोटी वाले की दुकान भी दिखाई. बताया जाता है कि यहां लंबे समय से इस तरह की पारंपरिक रोटी बनाई जा रही है. दुकान पर मिलने वाली डोली रोटी आज भी लोगों को मुल्तान की पुरानी परंपराओं और खान-पान की याद दिलाती है. इस रोटी की खासियत यह है कि इसे देखने और खाने के साथ-साथ इसके पीछे की कहानी भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ाती है. एक साधारण सी रोटी कैसे कभी बारात के कई दिनों के सफर का जरूरी खाना हुआ करती थी, यह बात आज के समय में काफी अनोखी लगती है.

    बंटवारे के बाद भी नहीं भूली गई यह परंपरा


    इस वीडियो को अक्सा जट ने अपने इंस्टाग्राम @aqsajutt1212 पर शेयर किया है. वीडियो पर एक भारतीय यूजर का कमेंट भी काफी खास रहा. उन्होंने बताया कि उनके परिवार का रिश्ता बंटवारे से पहले मुल्तान से था. उनके मुताबिक, मुल्तान से भारत आने के कई साल बाद भी उनकी दादी डोली रोटी बनाया करती थीं. यह बात दिखाती है कि खाने की परंपराएं सिर्फ एक जगह या सीमा तक सीमित नहीं रहतीं. लोग जब एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं, तब भी अपने साथ स्वाद, यादें और पुरानी रिवायतें लेकर जाते हैं. डोली रोटी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज मुल्तान की यह रोटी सोशल मीडिया के जरिए फिर चर्चा में है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी इसे और खास बनाती है. कभी लंबी यात्रा के दौरान बारातियों का पेट भरने वाली यह मीठी रोटी आज एक पुरानी परंपरा, बदलते खान-पान और बंटवारे से पहले की साझा संस्कृति की याद दिलाती है.

  • रोना आपकी सेहत के लिए क्यों फायदेमंद हो सकता है? जानिए आंसुओं से जुड़े फायदे..

    रोना आपकी सेहत के लिए क्यों फायदेमंद हो सकता है? जानिए आंसुओं से जुड़े फायदे..

    रोना इंसानी भावनाओं का स्वाभाविक हिस्सा है। दुख, खुशी, तनाव या भावनात्मक दबाव के दौरान आंखों से आंसू निकलना सामान्य प्रक्रिया है। कई बार रोने के बाद व्यक्ति खुद को हल्का और बेहतर महसूस करता है। हालांकि, रोने को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता, लेकिन भावनात्मक रूप से यह तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    आइए जानते हैं रोने से जुड़े कुछ संभावित फायदे।

    आंखों को मिलती है नमी

    आंसू आंखों की सतह को नम रखने में मदद करते हैं। इससे आंखों में सूखापन और जलन जैसी परेशानी से राहत मिल सकती है। आंसुओं में मौजूद प्राकृतिक तत्व आंखों की सतह को सुरक्षित रखने में भी भूमिका निभाते हैं।

    भावनात्मक बोझ कम महसूस हो सकता है

    जब व्यक्ति लंबे समय तक अपनी भावनाओं को दबाकर रखता है, तो मानसिक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में रोना भावनाओं को व्यक्त करने का एक प्राकृतिक तरीका हो सकता है। कई लोगों को रोने के बाद मन हल्का महसूस होता है।

    तनाव कम करने में मदद

    भावनात्मक तनाव के दौरान रोने के बाद कुछ लोगों को शांति और आराम महसूस होता है। रोने के साथ गहरी सांस लेना और भावनाओं को बाहर निकालना व्यक्ति को मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस करा सकता है।

    मूड बेहतर हो सकता है

    रोने के बाद व्यक्ति को भावनात्मक राहत मिल सकती है, खासकर तब जब वह किसी परेशानी या दुख से गुजर रहा हो। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका अनुभव अलग-अलग हो सकता है।

    भावनाओं को व्यक्त करने का स्वस्थ तरीका

    रोना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह शरीर और दिमाग की भावनाओं को व्यक्त करने की प्राकृतिक प्रक्रिया है। अपनी भावनाओं को समझना और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा मददगार हो सकता है।

    जरूरी बात: रोने से आंखों की रोशनी बढ़ने या शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकलने जैसे दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। अगर लगातार उदासी, तनाव, घबराहट या रोने की समस्या बनी रहती है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।