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  • बारिश में बेजान हो गया है चेहरा? अपनाएं ये आदतें… त्वचा रहेगी हेल्दी और ग्लोइंग!

    बारिश में बेजान हो गया है चेहरा? अपनाएं ये आदतें… त्वचा रहेगी हेल्दी और ग्लोइंग!

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    देश के कई राज्यों में इस समय मानसून का असर देखने को मिल रहा है. बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं बढ़ी हुई नमी त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं की वजह भी बन सकती है. इस मौसम में पसीना, तेल और धूल-मिट्टी त्वचा पर जल्दी जमा हो जाती है. इससे ऑयली स्किन, पिंपल्स, रैशेज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में सिर्फ चेहरा धोना ही काफी नहीं है, बल्कि सही स्किनकेयर रूटीन, संतुलित खानपान और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है. कुछ आसान आदतें अपनाकर मानसून में भी त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार रखा जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…

    मानसून में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल
    बारिश के मौसम में दिन में दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा साफ करें. इससे त्वचा पर जमा पसीना, अतिरिक्त तेल और गंदगी आसानी से हट जाती है. चेहरा धोने के बाद हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, क्योंकि ऑयली स्किन को भी नमी की जरूरत होती है. बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना ना भूलें.

    अगर ज्यादा पसीना आता है, तो चेहरे को साफ टिश्यू या मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से पोंछें. बारिश में भीगने के बाद चेहरा और शरीर साफ पानी से धो लें. साथ ही लंबे समय तक मेकअप लगाए रखने से बचें और रात में सोने से पहले मेकअप पूरी तरह साफ कर लें.

    इन गलतियों से करें परहेज
    मानसून में गंदे तौलिये, मेकअप ब्रश और तकिए के कवर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक न रहें. चेहरे पर बार-बार हाथ लगाने या पिंपल्स फोड़ने से भी बचें, क्योंकि इससे संक्रमण और दाग की समस्या हो सकती है. बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी क्रीम या दवा का इस्तेमाल न करें.

    डाइट का भी रखें ध्यान
    स्वस्थ त्वचा के लिए मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दालें, दही और सूखे मेवे अपनी डाइट में शामिल करें. संतरा, अमरूद और आंवला जैसे विटामिन सी से भरपूर फल त्वचा के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पीएं और तली-भुनी व ज्यादा मीठी चीजों का सेवन कम करें.

    कब लें डॉक्टर की सलाह
    अगर त्वचा पर लगातार खुजली, लालपन, रैशेज, सूजन, दर्द, पानी वाले दाने या बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है. वहीं, यदि पिंपल्स लगातार बढ़ रहे हों या घरेलू देखभाल के बाद भी समस्या ठीक न हो, तो समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहतर रहता है. इससे त्वचा की परेशानी गंभीर होने से बच सकती है.

  • बारिश में अचानक क्यों निकल आते हैं सांप? सावन से जुड़ी इस वजह से 90% लोग हैं अनजान

    बारिश में अचानक क्यों निकल आते हैं सांप? सावन से जुड़ी इस वजह से 90% लोग हैं अनजान

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    सावन का महीना शुरू होते ही खेतों, सड़कों और कई बार घरों के आसपास भी सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. सोशल मीडिया पर भी इस मौसम में सांपों के वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल होती हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या सावन में सचमुच सांप ज्यादा निकलते हैं और क्या इसका संबंध नाग पंचमी से है? तो चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…

    बारिश के कारण बिलों से बाहर आते हैं सांप
    सांप आमतौर पर जमीन के अंदर बने बिलों, दरारों, झाड़ियों और घास के बीच छिपकर रहते हैं. सावन के दौरान तेज बारिश होने से इनके बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में इनके दिखने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

    तापमान और नमी बनाते हैं अनुकूल माहौल
    सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं. उनके शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है. गर्मियों में तेज गर्मी और डिहाइड्रेशन के खतरे की वजह से वे कम सक्रिय रहते हैं. वहीं बरसात के मौसम में तापमान कम और नमी अधिक होने से उनके लिए बाहर निकलना आसान हो जाता है. इसलिए सावन में उनकी गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा दिखाई देती हैं.

    भोजन की तलाश भी है बड़ी वजह
    मानसून में मेंढक, चूहे और कीड़े-मकोड़े तेजी से बढ़ते हैं. यही जीव सांपों का मुख्य भोजन हैं. जब भोजन आसानी से मिलने लगता है तो सांप भी ज्यादा सक्रिय होकर शिकार की तलाश में बाहर निकलते हैं. इसलिए बारिश के मौसम में उनका दिखना स्वाभाविक माना जाता है.

    प्रजनन काल का भी पड़ता है असर
    जानकारों के मुताबिक कई प्रजातियों के सांपों का प्रजनन काल भी मानसून के दौरान होता है. इस समय वे साथी की तलाश में अधिक दूरी तय करते हैं. इससे भी लोगों को सांप पहले की तुलना में ज्यादा नजर आते हैं.

    नाग पंचमी और धार्मिक मान्यता
    सावन में ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जो नाग देवता और भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे सर्पदंश के भय से रक्षा होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. हालांकि, इसी समय सांप प्राकृतिक कारणों से ज्यादा दिखाई देते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि उनका संबंध सीधे नाग पंचमी से है.

  • सुबह खाली पेट फल खाना पड़ सकता है भारी! इन फलों से बनाएं दूरी, जानें क्यों..

    सुबह खाली पेट फल खाना पड़ सकता है भारी! इन फलों से बनाएं दूरी, जानें क्यों..

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    फल शरीर के लिए जरूरी विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत हैं. इसलिए डॉक्टर और एक्सपर्ट रोजाना फल खाने की सलाह देते हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर फल को खाली पेट खाना सभी लोगों के लिए फायदेमंद हो. कुछ फलों में मौजूद प्राकृतिक एसिड या ज्यादा मात्रा में प्राकृतिक शुगर कुछ लोगों में एसिडिटी, गैस, पेट फूलने, सीने में जलन या ब्लड शुगर में तेजी से उतार-चढ़ाव जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है. आइए जानते हैं ऐसे 6 फलों के बारे में जिन्हें भूलकर भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए.

    संतरा और खट्टे फल
    संतरा, मौसंबी और दूसरे खट्टे फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है. हालांकि इनमें प्राकृतिक एसिड भी मौजूद होता है. जिन लोगों को एसिडिटी या गैस्ट्रिक समस्या रहती है, उन्हें खाली पेट इनका सेवन करने से सीने में जलन या पेट में असहजता महसूस हो सकती है.

    इमली
    इमली का स्वाद खट्टा होता है और इसमें एसिड की मात्रा अधिक होती है. खाली पेट इमली खाने से कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ सकती है और सीने में जलन की शिकायत हो सकती है.

    कच्चा अमरूद
    अमरूद पोषण से भरपूर फल है, लेकिन बिल्कुल कच्चा या अधिक मात्रा में खाली पेट खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलने या भारीपन की समस्या हो सकती है.

    लीची
    लीची स्वादिष्ट और रसीला फल है, लेकिन इसे खाली पेट ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए. खासकर बच्चों के लिए इसे सीमित मात्रा में और भोजन के साथ या बाद में खाना बेहतर माना जाता है.

    अनानास
    अनानास में ब्रोमेलैन नाम का एंजाइम और प्राकृतिक एसिड मौजूद होते हैं. कुछ लोगों को खाली पेट इसका सेवन करने से पेट में जलन, बेचैनी या असहजता महसूस हो सकती है.

    अंगूर
    अंगूर में प्राकृतिक शुगर अच्छी मात्रा में होती है. खाली पेट ज्यादा अंगूर खाने से कुछ लोगों का ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे थोड़ी देर बाद फिर से भूख महसूस होने लगती है.

  • एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

    एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

    मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक अनोखा मामले सामने आया है. मर चुका युवक एक अचानक जिंदा हो गया और कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंच गया. युवक ने कलेक्टर से गुहार लगाई कि साहब, मैं जिंदा हूं. दरअसल ये शख्स जिंदा हैं, लेकिन कागजों में इनको मृत घोषित कर दिया गया है. जिसकी वजह से इनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इतना ही नहीं, जमीन जायदाद का काम भी अटका हुआ है.

    पिता की जगह बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र-
    शिवपुरी जिले की रन्नौद नगर परिषद की एक लापरवाही ने जिंदा इंसान को कागजों में मृत घोषित कर दिया. मामला सेसई निवासी गिटला आदिवासी का है. पिता के निधन के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए तो अधिकारियों ने पिता की जगह बेटे गिटला का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया.

    ‘साहब, मैं जिंदा हूं…’
    गिटला ने शिवपुरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपा. उसने बताया कि मेरे पिताजी का निधन 2022 में हो गया था. नामांतरण करवाने गया तो पता चला कि नगर परिषद रन्नौद ने गलती से मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया है. ये प्रमाण पत्र 1 साल पहले बना था. गिटला का कहना है कि नगर परिषद में कई बार शिकायत की, सुनवाई नहीं हुई. अब जमीन-जायदाद के काम अटक गए हैं. बैंक, राशन, सरकारी योजनाएं सब बंद. जिंदा होते हुए भी सिस्टम ने उसे मृत मान लिया. बड़ा सवाल यह है कि रन्नौद नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की गलती का खामियाजा पीड़ित युवक भुगत रहा है.

    उचित कार्रवाई होगी- एडीएम
    हालांकि प्रशासन भी इस मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिला रहा है. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस पूरे मामले को लेकर एडीएम दिनेश चंद शुक्ला का कहना है कि यह पूरा मामला मीडिया के द्वारा उनके संज्ञान में लाया गया है इस पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.

  • दिन में था 10 करोड़ की लागत से बना पुल… रात में हो गया गायब… लोग हैरान..

    दिन में था 10 करोड़ की लागत से बना पुल… रात में हो गया गायब… लोग हैरान..

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    छत्तीसगढ़ के सूरजुपर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम धोंधा स्थित नदी पर बना पुल रातभर हुई बारिश में बह गया. पुल का निर्माण 10 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था. निर्माण के बाद से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे. पुल पर जहां-तहां दरारें दिखाई दे रही थीं. इसी बीच गुरुवार को रातभर बारिश हुई. सुबह जब लोगों की आंखें खुलीं और नदी की ओर गए तो पुल बह चुका था. यह नजारा देखते ही लोग हैरान रह गए. जिस पुल से होकर दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही होती थी, वह देखते ही देखते पानी की तेज धारा में गायब हो चुका था. कहीं पिलर उखड़े पड़े थे, कहीं स्लैब पानी में समा गई थी और पुल का लंबा हिस्सा नदी की धार में बह चुका था. अब लोग निर्माण एजेंसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं.

    निर्माण में अनियमितता का आरोप  
    ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण में कथित तौर पर भारी अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण पुल पहले से ही कमजोर हो चुका था. वाहनों की आवाजाही के साथ पुल के अलग-अलग हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी थीं और समय के साथ इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई. गुरुवार देर रात हुई बारिश से पानी का दबाव बढ़ते ही पुल भरभराकर गिर पड़ा और देखते ही देखते तेज धार में बह गया.

    आवागमन में परेशानी
    ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण की मजबूती सिर्फ कागजों पर ही रही. पुल ध्वस्त होने से दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इससे नदी के दोनों ओर रहने वाले लोग प्रभावित हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले ही जिम्मेदार विभाग ने इसकी स्थिति का गंभीरता से परीक्षण किया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती.

    स्थानीय लोगों ने लगाए आरोप
    पुल टूटने की घटना ने प्रतापपुर क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में सड़क, पुल, रपटा और अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के बजाय कागजी प्रक्रिया को अधिक महत्व दिया जाता है. उनका कहना है कि कहीं सड़क खराब हो रही है तो कहीं पुल और रपटा पहली ही बारिश में जवाब दे रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है.

    कार्रवाई की मांग
    ग्रामीणों का कहना है कि करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से पुल निर्माण कराए जाने की बात कही जा रही है. इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी पुल इतनी जल्दी कैसे जर्जर हो गया, यह बड़ा सवाल है. उन्होंने निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, विभागीय अधिकारियों और गुणवत्ता परीक्षण की भूमिका की जांच की मांग शुरू कर दी है. उनका कहना है कि जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

  • महंगे स्किन केयर को भूल जाइए! चावल का पानी बना सकता है चेहरे को Glass Skin जैसा चमकदार..

    महंगे स्किन केयर को भूल जाइए! चावल का पानी बना सकता है चेहरे को Glass Skin जैसा चमकदार..

    चेहरे को ग्लोइंग और साफ रखने के लिए लोग कई घरेलू नुस्खे आजमाते हैं. इन्हीं में चावल का पानी यानी राइस वॉटर भी शामिल है. माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट स्किन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. यही वजह है कि कई स्किन केयर प्रोडक्ट्स में भी राइस वॉटर का इस्तेमाल किया जाता है. तो चलिए आपको बताते हैं कि रोजाना राइस वॉटर से फेस वॉश करने के फायदे के बारे में.

    कोलेजन को मिल सकता है सपोर्ट
    चावल के पानी पर हुई कुछ रिसर्च में इसके स्किन के लिए फायदेमंद होने के संकेत मिले हैं. साल 2013 की एक स्टडी में कुछ समय तक चेहरे पर फर्मेंटेड राइस वॉटर का इस्तेमाल किया गया था. इसमें स्किन की सूजन कम होने और कोलेजन से जुड़े कुछ फायदे देखने को मिले. कोलेजन त्वचा को हेल्दी और जवां बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.

    एजिंग के निशान कम करने में मदद
    चावल के पानी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से स्किन को बचाने में मदद कर सकते हैं. इसके चलते फाइन लाइंस और झुर्रियों जैसे एजिंग के कुछ निशान कम नजर आ सकते हैं. हालांकि, इसे किसी पक्के एंटी-एजिंग इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

    ड्राई स्किन को मिल सकती है राहत
    अगर आपकी स्किन अक्सर रूखी और खिंची-खिंची रहती है, तो राइस वॉटर कुछ राहत दे सकता है. इसका इस्तेमाल स्किन में नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है. इससे त्वचा पहले के मुकाबले सॉफ्ट और फ्रेश नजर आ सकती है.

    घर पर कैसे बनाएं चावल का पानी
    चावल का पानी बनाने के लिए सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद साफ चावल में पानी डालकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें. अब चावल को छानकर पानी को एक साफ कंटेनर में रख लें. इसी पानी का इस्तेमाल चेहरा धोने के लिए किया जा सकता है. अगर आपके पास समय कम है, तो चावल उबालने के बाद बचे हुए पानी को भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इस्तेमाल करने से पहले पानी को पूरी तरह ठंडा कर लें.

    इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
    राइस वॉटर घरेलू नुस्खा है और हर व्यक्ति की स्किन पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ा सा पानी त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर पैच टेस्ट कर लें. अगर जलन, लालिमा या खुजली हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. अगर चेहरे पर ज्यादा एक्ने, पिंपल या कोई दूसरी स्किन समस्या है, तो घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले स्किन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है. साथ ही, राइस वॉटर को स्किन केयर रूटीन का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इससे तुरंत ग्लो मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

  • अटल जी ने लिखी कविता, जगजीत सिंह ने गाया और कंपोज किया; ऐसे बनी ‘क्या खोया क्या पाया’ की यादगार धुन..

    अटल जी ने लिखी कविता, जगजीत सिंह ने गाया और कंपोज किया; ऐसे बनी ‘क्या खोया क्या पाया’ की यादगार धुन..

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    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कविताओं के लिए भी जाने जाते थे. उनकी लिखी पंक्तियों में जिंदगी, अकेलापन, संघर्ष और इंसानी भावनाओं की गहरी झलक दिखाई देती है. ऐसी ही एक चर्चित रचना ‘क्या खोया क्या पाया’ है, जिसे गजल सम्राट जगजीत सिंह ने अपनी आवाज और संगीत से ऐसा रूप दिया कि कविता का मूल भाव पूरी तरह बरकरार रहा.

    ‘संवेदना’ का हिस्सा था ‘क्या खोया क्या पाया’
    ‘क्या खोया क्या पाया’ को 2002 में आए चर्चित सहयोगी एल्बम ‘संवेदना’ (Samvedna) में शामिल किया गया था. इस पूरे प्रोजेक्ट में देश की राजनीति, साहित्य, संगीत और सिनेमा से जुड़े कई बड़े नाम एक साथ आए थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें कविताएं लिखीं और उन्हें अपनी आवाज में पेश भी किया. वहीं जगजीत सिंह ने इन कविताओं को संगीत दिया और अपनी आवाज में गाया.

    एल्बम में अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान भी जुड़े
    ‘संवेदना’ सिर्फ अटल जी और जगजीत सिंह की वजह से खास नहीं था. एल्बम के लिए प्रस्तावना जावेद अख्तर ने लिखी थी, जिसे अमिताभ बच्चन ने अपनी दमदार आवाज में पेश किया था. इसके अलावा इस प्रोजेक्ट के चर्चित म्यूजिक वीडियो में सुपरस्टार शाहरुख खान भी नजर आए थे, जिसका निर्देशन खुद यश चोपड़ा ने किया था.

    अटल जी की कविताओं के पीछे था गहरा दर्द
    जगजीत सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी बैठकों के दौरान कविता और उसके पीछे की भावनाओं को लेकर बातचीत होती थी. अटल जी ने उन्हें समझाया था कि उनके जीवन में आया गहरा अकेलापन और देश के मुश्किल दौर ने उनके भीतर के कवि को और मजबूत किया. उनकी कई संवेदनशील रचनाओं पर इमरजेंसी के दौर में झेला गया कारावास और उस समय का व्यक्तिगत व सामूहिक दर्द भी असर डालता था.

    जगजीत सिंह ने करीब तीन साल तक तैयार किया संगीत
    जगजीत सिंह ने अटल जी की कविताओं को संगीत देने में जल्दबाजी नहीं की. उन्होंने करीब तीन साल तक ‘संवेदना’ की अवधारणा और इन कविताओं की धुनों पर काम किया. उनकी कोशिश थी कि संगीत कविता के शब्दों पर हावी न हो. इसलिए उन्होंने धुन को बेहद सादगी के साथ रखा, ताकि अटल जी की लिखी पंक्तियों की संवेदनशीलता, दार्शनिक गहराई और उनमें छिपा अकेलापन उसी तरह सामने आए.

    अटल जी की एक शर्त ने बदल दिया था पूरा नजरिया
    जगजीत सिंह अटल जी की रचनाओं को सामान्य राजनीतिक कविताओं की तरह पेश नहीं करना चाहते थे. उनका मकसद इन शब्दों को इंसान की जिंदगी, अकेलेपन, मृत्यु और मुश्किल समय में बने रहने की ताकत से जोड़ना था. अटल जी की शर्त भी यही थी कि कविता के मूल भाव और शब्दों के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. जगजीत सिंह ने इसी बात का ध्यान रखते हुए संगीत को इतना सधा हुआ रखा कि कविता की अपनी पहचान बनी रहे. यही वजह है कि ‘क्या खोया क्या पाया’ सिर्फ एक कविता का संगीतबद्ध रूप नहीं लगा, बल्कि अटल जी के शब्दों और जगजीत सिंह के संगीत का ऐसा मेल बना, जिसमें दोनों की अपनी-अपनी पहचान साफ सुनाई देती है.

  • हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान… तो बालों पर लगाएं फिटकरी… और फिर देखें कमाल..

    हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान… तो बालों पर लगाएं फिटकरी… और फिर देखें कमाल..

    Get Rid of Hair Fall with Alum: आज के समय में शायद ही ऐसा कोई हो, जो बालों के झड़ने की समस्या से परेशान न हों. बारिश के मौसम में तो हेयर फॉल और डैंड्रफ की समस्या और बढ़ जाती है. यदि आप हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान तो आपकी परेशानी एक छोटी सी फिटकरी दूर कर सकती है. जी हां, बालों के लिए फिटकरी को रामबाण मना जाता है. आपको मालूम हो कि फिटकरी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो स्कैल्प पर मौजूद बैक्टीरिया और फंगस को कम करने में मदद कर सकते हैं. फिटकरी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण स्कैल्प पर जमा गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल को साफ करने के साथ डैंड्रफ और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद कर सकती है. हम आपको बता रहे हैं फिटकरी को बालों में कैसे लगाना है?

    ऐसे लगाएं बालों में फिटकरी 
    1. फिटकरी और गुलाब जाल

    आप फिटकरी को गुलाब जल में मिलाकर बालों पर लगा सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आप फिटकरी का पाउडर लें. इसके बाद गुलाब जल दें. अब फिटकरी और गुलाब जल को मिलाकर पतला पेस्ट बना लें. फिर इस फिटकरी और गुलाब जल के पेस्ट को स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाएं. इस पेस्ट को 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें. इसके बाद नॉर्मल पानी से बालों को अच्छी तरह से धो लें. आपको मालूम हो कि इस दिन बालों में शैंपू न लगाएं आप अगले दिन बालों में शैंपू लाकर स्नान कर सकते हैं.

    2. फिटकरी और नारियल तेल
    यदि आपके बाल झड़ रहे हैं और डैंड्रफ की समस्या है तो आप फिटकरी और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आपको सबसे पहले फिटकरी का पाउडर और नारियल तेल लेना होगा. अब आप दो बड़े चम्मच हल्के गर्म नारियल तेल में एक छोटा चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाएं. फिर इस पेस्ट को स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं. अब इस पेस्ट को 30 से 40 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर बालों को शैंपू से अच्छी तरह धो लें. ऐसा महीने में कुछ दिन करने से हेयर फॉल नहीं होगा और डैंड्रफ की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा.

    3. फिटकरी और अंडा
    यदि आपके बाल झड़ रहे हैं और डैंड्रफ की समस्या है तो आप फिटकरी और अंड़ा का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप फिटकरी के पाउडर में एक अंडा मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. फिर इस मिश्रण को स्कैल्प और बालों पर लगाएं. इसको लगाने के 20 से 30 मिनट बाद बालों को पानी से धो लें और फिर शैंपू कर लें. ऐसा कुछ दिन करने से हेयर फॉल की समस्या दूर हो जाएगी. डैंड्रफ भी दूर हो जाएंगे.

    फिटकरी लगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

    • फिटकरी कुछ लोगों के स्कैल्प को रूखा या इरिटेट कर सकती है. ऐसे में इसे पूरे सिर पर लगाने से पहले हाथ या स्कैल्प के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट कर लेना चाहिए.
    • बालों पर फिटकरी का इस्तेमाल हफ्ते में एक से दो बार से ज्यादा करने से बचें.
    • डैंड्रफ लगातार बना रहता है, स्कैल्प पर ज्यादा खुजली, लालिमा या घाव हो रहे हैं तो डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लिए बिना बालों में फिटकरी न लगाएं.
  • प्रेमी के लिए घर से भागी 3 बच्चों की मां, पति ने पकड़ा तो नहीं किया विरोध… करा दी दोनों की शादी..

    प्रेमी के लिए घर से भागी 3 बच्चों की मां, पति ने पकड़ा तो नहीं किया विरोध… करा दी दोनों की शादी..

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    उत्तर प्रदेश के चंदौली में पति-पत्नी और वो का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. पिछले 4 महीने से अपने आधी उम्र के प्रेमी के साथ फरार 3 बच्चों की मां को उसके पति ने पकड़ा और घर वापस चलने की मिन्नतें की. लेकिन बावजूद इसके जब पत्नी पति के साथ घर जाने के लिए तैयार नहीं हुई. तो पति ने अपनी मौजूदगी में अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी के साथ करा दी. चंदौली के सकलडीहा क्षेत्र का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.

    आधी उम्र के युवक के प्यार में 3 बच्चों की मां-
    दरअसल चंदौली के सकलडीहा तहसील क्षेत्र के डैना गांव का रहने वाला जीवनाथ राजभर दिल्ली में रहकर वेल्डिंग का काम करता था. उसकी पत्नी सरिता अपने तीन बच्चों के साथ गांव में ही रहती थी. इसी दौरान तकरीबन 45 साल की सरिता का अफेयर अपनी आधी से भी कम उम्र के अजय नाम के एक युवक से हो गया. अजय गाजीपुर जनपद के गहमर गांव का रहने वाला है और ट्रेन में मूंगफली बेचने का काम करता है.

    प्रेमी के साथ फरार हो गई महिला-
    बताया जाता है कि सरिता की अजय से मुलाकात ट्रेन में ही हुई थी और दोनों में प्रेम संबंध बन गया था. उधर, जब इस बात की जानकारी सरिता के पति जीवनाथ को हुई तो उसने एतराज जताया. इसके बाद तकरीबन 4 महीना पहले सरिता अपने तीनों बच्चों को छोड़कर अपने प्रेमी अजय के साथ घर से फरार हो गई. उसके पति जीवनाथ ने उसे काफी ढूंढने का प्रयास किया. लेकिन वह नहीं मिली. 2 दिन पहले मंगलवार को अचानक सकलडीहा रेलवे स्टेशन पर जीवनाथ की मुलाकात अपनी पत्नी सरिता और उसके प्रेमी अजय से हो गई. जीवनाथ ने एक बार फिर अपने बच्चों का वास्ता दिया और कहा कि तुम वापस घर चलो. लेकिन काफी प्रयास के बाद भी सरिता अपने पति जीवनाथ के साथ घर जाने के लिए तैयार नहीं हुई.

    पति ने प्रेमी के साथ कराई शादी-
    इसके बाद जीवनाथ ने जो किया, वह काफी हैरान कर देने वाला था. जीवनाथ अपनी पत्नी और उसके प्रेमी अजय को लेकर सकलडीहा तहसील पहुंचा और मैरिज रजिस्ट्रार के ऑफिस में अपनी पत्नी और उसके प्रेमी की शादी करा दी. सरिता का कहना था कि उसका पति खर्च के लिए उसको पैसे नहीं देता है और साथ ही साथ उसके साथ लड़ाई झगड़ा भी करता है. लिहाजा वह उसके साथ नहीं रहेगी और बच्चों को भी अपने साथ नहीं ले जाएगी. वहीं, जीवनाथ ने बताया कि मैं तो चाहता हूं कि यह मेरे साथ रहे, लेकिन जब यह मेरे साथ रहने के लिए तैयार नहीं है तो हम क्या ही कर सकते हैं.

  • मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    Phone हो गया चोरी... डर रहा सता कि Banking App से निकाल न ले कोई पैसा... तो इन सेटिंग्स को करें सेट, Bank से कनेक्शन रहेगा हमेशा जुड़ा

    मौजूदा समय में मोबाइल फोन सिर्फ बात करने के इस्तेमाल नहीं आता. बल्कि इसमें बैंकिंग ऐप, UPI ऐप, डिजिटल वॉलेट और इंवेस्टमेंट से जुड़ी कई जरूरी जानकारी रहती है. ऐसे में सोचें कि अगर फोन खो जाए, तो आपका कितना जरूरी डेटा किसी और के हाथ लग सकता है. होता भी ऐसा ही है जब लोगों का फोन खोता है तो वह सोचते हैं कि कहीं कोई व्यक्ति बैंक खाते का गलत इस्तेमाल न कर ले, जिससे बैंक खाता खाली हो जाए. लेकिन केवल फोन हाथ लग जाने से बैंक खाते से पैसे निकालना आसान नहीं होता, क्योंकि बैंकिंग ऐप में कई सेफ्टी लेयर्स होती हैं.

    क्या कोई भी बैंक खाते से पैसे निकाल सकता है?

    आमतौर पर बैंकिंग ऐप से पैसे भेजने के लिए स्क्रीन लॉक, ऐप पासवर्ड, MPIN, बायोमेट्रिक या UPI PIN की जरूरत होती है. इसलिए सिर्फ फोन मिलने से कोई व्यक्ति सीधे पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकता. लेकिन अगर फोन में स्क्रीन लॉक नहीं है, और बैंकिंग ऐप पहले से लॉगिन है या PIN और पासवर्ड फोन में सेव हैं, तो खतरा बढ़ सकता है.

    फोन खोते ही सबसे पहले क्या करें?

    अगर आपका फोन चोरी हो गया है, तो इंतजार न करें. सबसे पहले फोन को Find My Device जैसी सुविधा से खोजने या दूर से लॉक करने की कोशिश करें. अगर फोन वापस मिलने की उम्मीद नहीं है, तो अगर पॉसिबल हो तो उसे रिमोट तरीके से डेटा डिलीट भी कर सकते हैं.

    इसके बाद अपनी मोबाइल कंपनी से संपर्क करके SIM बंद करवाएं. ऐसा करना जरूरी है, क्योंकि बैंक के OTP और दूसरे जरूरी मैसेज आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आते हैं. इसके साथ ही अपने बैंक को भी फोन खोने की जानकारी दें, ताकि जरूरत पड़ने पर बैंक जरूरी कार्रवाई कर सके.

    बैंक खाते पर रखें नजर

    फोन सेफ रखने के बाद भी कुछ दिनों तक अपने बैंक खाते पर नजर बनाएं रखें. बैंक से आने वाले SMS, अकाउंट स्टेटमेंट और UPI ट्रांजैक्शन देखें. अगर कोई ऐसा लेनदेन दिखता है जो आपने नहीं किया है, तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें. जल्दी शिकायत करने से बैंक मामले की जांच शुरू कर सकता है और आगे की जरूरी प्रक्रिया कर सकता है.

    किन बातों का रखें हमेशा ध्यान

    फोन में हमेशा मजबूत स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सेफ्टी लोक रखें. बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या UPI PIN को फोन की नोट्स या मैसेज में सेव न करें. सभी बैंक खातों के ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें. नया फोन लेने पर पुराने फोन से बैंकिंग ऐप को लॉगआउट करके ही उसे रीसेट करें.