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  • पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा ..

    पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा ..

    पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा नकली पनीर, 1038 किलो माल नष्ट

    आमतौर पर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माने जाने वाले पनीर को लोग सेहतमंद भोजन समझकर परिवार की थाली में शामिल करते हैं, लेकिन मोदीनगर के नाहली गांव में पनीर के नाम पर जिस तरह का खेल सामने आया है, वह खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सेहत दोनों के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है. यहां तीन डेयरियों में दूध और क्रीम से प्राकृतिक तरीके से पनीर-खोया तैयार करने के बजाय वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, एसिटिक एसिड, सफेद चूर्ण और रानीपाल जैसे पदार्थों के इस्तेमाल से पनीर तैयार किए जाने के प्रमाण मिले हैं. खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में मौके से 868 किलोग्राम पनीर और 170 किलोग्राम खोया, यानी कुल 1038 किलोग्राम खाद्य सामग्री, नष्ट कराई गई.

    उत्पादन परिसर में मिली भारी गंदगी आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग तथा पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने कल बीती 12 अगस्त की रात करीब 11 बजे ग्राम नाहली में मैसर्स तोमर डेयरी, कलवा डेयरी और शकील डेयरी पर एक साथ छापा मारा. जांच के दौरान तीनों इकाइयों के उत्पादन परिसर में न केवल भारी गंदगी और अस्वच्छता मिली, बल्कि पनीर और खोया निर्माण में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल के प्रमाण भी मिले, जिनका इस तरह खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है.

    मिल्क पाउडर, वनस्पति और रानीपाल से बना रहे थे नकली पनीर जांच में सामने आया कि शकील डेयरी में मिल्क पाउडर, वनस्पति और रानीपाल समेत अन्य अपमिश्रक रसायन मिले. कलवा डेयरी में रिफाइंड पामोलीन ऑयल और अन्य अपमिश्रक रसायन पाए गए, जबकि तोमर डेयरी में वनस्पति और सफेद पाउडर बरामद हुआ. इन पदार्थों का इस्तेमाल पनीर निर्माण में किए जाने की बात सामने आई. यानी जिस पनीर को उपभोक्ता दूध की मलाई और प्रोटीन से तैयार प्राकृतिक खाद्य पदार्थ समझकर खरीदता है, उसकी जगह लागत घटाकर और मात्रा बढ़ाकर तैयार किए जाने वाले मिश्रण का इस्तेमाल किया जा रहा था. खाद्य सुरक्षा टीम ने तीनों इकाइयों से पनीर, खोया, वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड पाम ऑयल, एसिटिक एसिड, सफेद चूर्ण, रानीपाल, दूध और क्रीम समेत कुल 20 नमूने लिए हैं. इन नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है. प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन खाद्य पदार्थों में किस स्तर तक मिलावट और अपमिश्रण किया गया था.कपड़े चमकाने वाले रसायन तक का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल इस कार्रवाई में सबसे गंभीर पहलू रानीपाल की बरामदगी है.

    रानीपाल का इस्तेमाल सामान्य तौर पर डिटर्जेंट पाउडर, लिक्विड डिटर्जेंट और फैब्रिक व्हिटनर जैसे उत्पादों में कपड़ों का पीलापन दूर कर उन्हें अधिक सफेद दिखाने के लिए किया जाता है. ऐसे पदार्थ के खाद्य निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आना ही खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर चेतावनी है. खाद्य पदार्थ को देखने में सफेद और आकर्षक बनाने के लिए यदि किसी औद्योगिक व्हाइटनिंग एजेंट का सहारा लिया जाए तो उपभोक्ता के साथ छल के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकता है.

    868 किलोग्राम पनीर जब्त अस्वच्छ परिस्थितियों और खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन के चलते टीम ने मौके पर ही 868 किलोग्राम पनीर, जिसकी अनुमानित कीमत 2.11 लाख रुपये है, तथा 170 किलोग्राम खोया, जिसकी कीमत करीब 50,800 रुपये बताई गई, नष्ट करा दिया. इसके अलावा पनीर और खोया बनाने के लिए रखे गए 25 किलो सफेद पाउडर, चार किलो वनस्पति और 153 किलो रिफाइंड पामोलीन ऑयल को जब्त किया गया.

    खाद्य पदार्थों में अपमिश्रकों के इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए तीनों डेयरी संचालकों के खिलाफ थाना भोजपुर में भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है. फिलहाल लिए गए 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम होगी. रिपोर्ट से यह भी सामने आएगा कि तैयार पनीर और खोया में इस्तेमाल किए गए पदार्थ किस स्तर तक खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत थे.

  • हाइड्रेट रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए..?

    हाइड्रेट रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए..?

    हाइड्रेट रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए? जानें हाइड्रेट रहने के आसान टिप्स

    पानी हमारे शरीर की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है. शरीर के हर सेल, टिश्यू और अंग को सही से काम करने के लिए पानी चाहिए. यह शरीर का तापमान सामान्य रखता है, पोषक तत्वों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता है और बेकार चीजों को बाहर निकालने में मदद करता है. सांस लेने, पसीना आने और पेशाब के जरिए दिनभर शरीर से पानी निकलता रहता है. अगर इसकी भरपाई न हो तो डिहाइड्रेशन हो सकता है,

    जिससे थकान, सिरदर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में हमें पता होना चाहिए कि आखिर स्वस्थ रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए. चलिए हम आपको बताते हैं…दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए? एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में करीब 2.7 से 3.7 लीटर फ्लूइड की जरूरत होती है. इसमें सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि चाय, कॉफी, दूध, जूस और खाने से मिलने वाला पानी भी शामिल है. खाने से ही शरीर को करीब 20 प्रतिशत पानी मिल जाता है. इसलिए हर किसी को रोज 3 से 4 लीटर सिर्फ सादा पानी पीना ही जरूरी नहीं है.शरीर में पानी की कमी को कैसे पहचानें? जब शरीर में पानी कम होता है तो सबसे पहले प्यास लगती है और पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाता है. पर्याप्त पानी पीने पर पेशाब का रंग हल्का पीला या साफ रहता है.

    पानी की कमी से सिरदर्द, थकान और चक्कर आना भी आम है. अगर डिहाइड्रेशन बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो सोचने में परेशानी या घबराहट जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है.किन लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है? जो लोग रोज ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं या जिन्हें बहुत पसीना आता है, उन्हें ज्यादा पानी पीना चाहिए. गर्म और नमी वाले मौसम में भी पानी की जरूरत बढ़ जाती है. उल्टी, दस्त या बुखार में शरीर से तेजी से पानी निकलता है, इसलिए ज्यादा फ्लूइड लेना जरूरी है. प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान भी महिलाओं को ज्यादा पानी की सलाह दी जाती है. कुछ किडनी और यूरिन की समस्याओं में भी डॉक्टर ज्यादा पानी पीने को कहते हैं.

  • पहले पति से लव मैरिज, 5 बच्चों के बाद दूसरे से हुआ प्यार… पति ने मंदिर में कराई दोनों की शादी..

    पहले पति से लव मैरिज, 5 बच्चों के बाद दूसरे से हुआ प्यार… पति ने मंदिर में कराई दोनों की शादी..

    उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में एक अनोखी शादी की चर्चा हो रही है. एक पति ने अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करा दी. पति ने पत्नी के प्रेम प्रसंग और लगातार पारिवारिक विवाद के बाद मंदिर में शादी कराई. दोनों की शादी 21 साल पहले हुई थी. इस दंपति के 5 बच्चे हैं. लेकिन अब पति ने पत्नी को प्रेमी के पास भेज दिया. इस शादी की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है.

    21 साल पहले की थी लव मैरिज- धनघटा विधानसभा के डेवरी गांव निवासी बुद्धिराम निषाद की शादी करीब 21 वर्ष पहले फूलमती से प्रेम विवाह के रूप में हुई थी. दंपति के पांच बच्चे हैं. पिछले कुछ समय से फूलमती का गांव के ही अवधेश नाम के व्यक्ति से प्रेम संबंध था. करीब दो महीने पहले वह घर छोड़कर अवधेश के साथ चली गई थी.

    पति ने अब प्रेमी से मंदिर में कराई शादी- परिजनों और ग्रामीणों के समझाने के बाद जब फूलमती वापस लौटी, तब भी पारिवारिक विवाद समाप्त नहीं हुआ. इसके बाद बुद्धिराम ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने का निर्णय लिया. ग्रामीणों और परिजनों की मौजूदगी में अशरफपुर स्थित शिव मंदिर में फूलमती और अवधेश का विवाह कराया गया. विवाह के बाद बुद्धिराम ने दोनों को शुभकामनाएं देते हुए विदा कर दिया.

    पत्नी की खुशी के लिए फैसला किया- पति पति का कहना है कि करीब 21 साल पहले हमने भी प्रेम विवाह किया था, लेकिन अब पत्नी का मन मेरे साथ नहीं था. जब वह किसी और के साथ अपना जीवन बिताना चाहती थी, तो मैंने उसकी खुशी को स्वीकार करते हुए यह फैसला लिया. मैं शांति से अपना जीवन जीना चाहता हूं.

    पति ने पत्नी की शादी प्रेमी से कराई तो इसकी चर्चा पूरे इलाके में होने लगी. इस दंपति के 5 बच्चे हैं. अब सवाल उठता है कि ये बच्चे किसके साथ रहेंगे? अपने पिता के साथ रहेंगे या अपनी मां के साथ रहेंगे.

  • अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    कफन आ गया था, चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 17 घंटे बाद जिंदा हो गई महिला, जानें पूरा कहानी

    उत्तर प्रदेश के आगरा में 65 साल की शीला देवी की जिंदगी और मौत से जुड़ी कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया था. जिस बुजुर्ग महिला को मृत मानकर परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर चुका था, परिवार के मुताबिक करीब 17 घंटे बाद उनके शरीर में हलचल महसूस हुई और उन्हें जीवित पाया गया. लेकिन जिंदगी और मौत से करीब 9 दिन तक जंग लड़ने के बाद रविवार को शीला देवी की मौत हो गई.

    चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी- शीला देवी आगरा के ट्रांस यमुना कॉलोनी के श्रीनगर क्षेत्र में अपने बेटे सुनील माहौर के साथ रहती थीं. वह सांस की बीमारी से पीड़ित थीं और उनका इलाज बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था. 30 जुलाई को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद परिवार शीला देवी के शव को आगरा ले आया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं.

    कफन तक आ गया था, फिर हुआ चमत्कार- परिवार के मुताबिक, अंतिम संस्कार के लिए कपड़े और फूल-मालाएं तक मंगवा ली गई थीं. इसी दौरान शीला देवी के दामाद ने उनके पैर छुए. परिवार का दावा है कि पैर छूते ही उन्हें शरीर में हलचल महसूस हुई. इसके बाद शीला देवी ने कथित तौर पर बातचीत भी की और पूछा कि सभी लोग क्यों रो रहे हैं और उन्हें कहां ले जा रहे हैं.

    17 घंटे बाद जिंदा हो गई महिला- बुजुर्ग महिला को जीवित पाकर परिवार में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद शीला देवी का इलाज आगरा के घटिया आजम खां स्थित पार्क हॉस्पिटल में चल रहा था. परिवार को उम्मीद थी कि वह जिंदगी की जंग जीतकर वापस घर लौटेंगी, लेकिन रविवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

    शीला देवी के दूसरे बेटे संजीव बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत बताए जाते हैं. अब मां की मौत के बाद संजीव ने पार्क हॉस्पिटल के इलाज और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

    5 लाख का बिल, इलाज पर सवाल- संजीव का आरोप है कि अस्पताल में मरीजों को अस्पताल की खुद की कंपनी और लोकल ब्रांड की दवाइयां दी जाती हैं. उनका आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ मरीजों की ठीक से देखभाल नहीं करता था. परिवार का यह भी दावा है कि इलाज के दौरान अस्पताल की ओर से करीब पांच लाख रुपये का बिल थमाया गया.

    बेटे ने की कार्रवाई की मांग- मां की मौत के बाद अब बेटे ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है. संजीव का कहना है कि वह पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से करेंगे और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग करेंगे.

    हालांकि, अस्पताल पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पार्क हॉस्पिटल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है. ऐसे में अब जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि शीला देवी के इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं.

    9 दिन तक मौत से लड़की रही महिला- जिस परिवार ने नौ दिन पहले शीला देवी को मृत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी थी, उसी परिवार को उनके जीवित होने से नई उम्मीद मिली थी. लेकिन नौ दिन बाद वही उम्मीद फिर मातम में बदल गई. अब शीला देवी की मौत के बाद बेटे के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और इलाज के खर्च को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

  • पार्लर जाने की जरूरत नहीं! घर बैठे इस फुट सोक से पैरों को बनाएं सॉफ्ट और खूबसूरत..

    पार्लर जाने की जरूरत नहीं! घर बैठे इस फुट सोक से पैरों को बनाएं सॉफ्ट और खूबसूरत..

    Pedicure Tips: घर बैठे मुलायम पैर चाहिए? तो ये खास फुट सोक करें ट्राई... बेजान पैरों में आ जाएगी जान!

    पेडीक्योर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में स्क्रबिंग और डेड स्किन हटाने की बात आती है. लेकिन पैरों की अच्छी देखभाल के लिए सिर्फ स्क्रबिंग ही जरूरी नहीं है. पेडीक्योर में फुट सोक भी एक अहम स्टेप माना जाता है. इसमें कुछ खास चीजों को गुनगुने पानी में मिलाकर पैरों को कुछ देर भिगोया जाता है.

    इससे पैरों की त्वचा मुलायम होती है और स्क्रबिंग के दौरान डेड स्किन और कैलस को हटाना आसान हो जाता है. इतना ही नहीं, सही फुट सोक पैरों की थकान और दर्द से राहत देने में भी मदद कर सकता है.फुट सोक क्या होता है और क्यों जरूरी है फुट सोक के लिए गुनगुने पानी में नमक, क्रिस्टल, जेली या अन्य सामग्री मिलाई जाती है. कई लोग पानी में सिर्फ शैंपू डालकर पैर भिगोते हैं, लेकिन इससे पैरों को खास फायदा नहीं मिलता.

    फुट सोक का इस्तेमाल करने से त्वचा ज्यादा मुलायम हो सकती है और पैरों की सफाई बेहतर तरीके से की जा सकती है.फुट सोक के फायदे ये हैं पैरों की त्वचा मुलायम होती है डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है पैरों की थकान कम महसूस हो सकती है पैरों में आराम मिलता है हल्की सूजन में राहत मिल सकती है पैरों की बदबू कम करने में मदद मिल सकती है स्क्रबिंग के दौरान कैलस आसानी से हटाया जा सकता हैइप्सम सॉल्ट फुट सोक इप्सम सॉल्ट फुट सोक के लिए काफी लोकप्रिय है.

    गुनगुने पानी में करीब दो चम्मच इप्सम सॉल्ट डालकर लगभग 20 मिनट तक पैर भिगोए जा सकते हैं. इससे पैर मुलायम होने के साथ थकान कम महसूस हो सकती है. यह पैरों की मांसपेशियों को आराम देने और हल्की सूजन में राहत देने में भी मदद कर सकता है. जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं, जिम जाते हैं या ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं, उनके लिए इप्सम सॉल्ट फुट सोक आराम देने वाला विकल्प हो सकता है.जेली पेडीक्योर जेली पेडीक्योर इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है.

    इसमें पानी में खास जेली सोक डालने पर पानी जेली जैसा हो जाता है. इसमें आमतौर पर सोडियम पॉलीएक्रिलेट के साथ ग्लिसरीन, एलोवेरा, एसेंशियल ऑयल और प्लांट एक्सट्रैक्ट जैसे तत्व हो सकते हैं. यह पैरों की त्वचा को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने और कैलस को मुलायम करने में मदद करता है. इससे स्क्रैपर की मदद से डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है.किसके लिए है बेस्ट जिन लोगों के पैर बहुत रूखे रहते हैं या एड़ियां बार-बार फटती हैं,

    उनके लिए जेली पेडीक्योर एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि फुट सोक अकेले कैलस या डेड स्किन को पूरी तरह नहीं हटाता. यह त्वचा को मुलायम करता है, जिसके बाद स्क्रबिंग से डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है.

  • 16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    5 साल से तालाब में रह रहा 16 साल का इकबाल, पानी से बाहर आते ही शरीर जलने लगता है; खाना-पीना और सोना सब पानी में

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    शरीर में होती है जलन

    शरीर में होती है जलन

    मुर्शिदाबाद के बेलडांगा का रहने वाला 16 वर्षीय इकबाल शेख इन दिनों अपनी अनोखी जीवनशैली के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है. एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार चार से पांच दिन, कभी-कभी सात दिनों तक भी वह पानी में ही रहकर समय बिताता है. इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि उसके लिए “जल ही जीवन” नहीं, बल्कि “जल में ही जीवन” है.

    तालाब में 5 साल से रह रहा इकबाल स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले लगभग पांच वर्षों से इकबाल घर छोड़कर बेलडांगा शहर के विभिन्न तालाबों में दिन-रात पानी में तैरते हुए रहता है. यह न तो किसी शौक का परिणाम है और न ही किसी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश.

    पानी से निकलने पर शरीर में होती है जलन इकबाल का कहना है कि उसके शरीर में लगातार जलन होती है. उसका दावा है कि उस पर जिन्न, परी या किसी अदृश्य शक्ति का साया है. जैसे ही वह पानी से बाहर निकलता है, शरीर में तेज जलन शुरू हो जाती है, जबकि पानी में उतरते ही उसे राहत मिलती है.

    इलाज में नहीं मिली मदद लगातार कई दिनों तक पानी में रहने के कारण उसके हाथ-पैर और पूरे शरीर की त्वचा सफेद पड़ गई है. लंबे समय तक पानी में रहने से वह सर्दी-खांसी से भी पीड़ित हो गया है. इकबाल का आरोप है कि इलाज के लिए वह स्थानीय ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गया था, लेकिन उसे उचित सहायता नहीं मिली. आर्थिक तंगी के कारण उसका परिवार निजी अस्पताल में इलाज कराने में भी असमर्थ है.

    हालांकि, स्थानीय लोग अब उसके इलाज के लिए आगे आ रहे हैं. रोज़ बड़ी संख्या में स्कूली छात्र और आम लोग तालाब के किनारे उसे देखने के लिए जुटते हैं. कई लोग उसे चिउड़ा, बिस्कुट और अन्य खाद्य सामग्री भी देते हैं. लेकिन कोई भी उसे घर में रोक नहीं पाता.

    चर्चा का विषय बनी इकबाल की कहानी इकबाल की यह असामान्य स्थिति देखकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. उनका सवाल है कि आखिर इस तरह वह कब तक जीवित रह पाएगा. वहीं, 16 वर्षीय इकबाल की यह कहानी अब पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गई है.

  • ग्रीन और ब्लैक टी में क्या है अंतर, रोज पीने के लिए कौन-सी चाय बेहतर?

    ग्रीन और ब्लैक टी में क्या है अंतर, रोज पीने के लिए कौन-सी चाय बेहतर?

    आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सजग हो गए हैं. लोग हेल्दी लाइफस्टाइल का ध्यान रख रहे हैं. फिटनेस बनाए रखने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं. वजन घटाना हो या इम्यूनिटी बेहतर करनी है, इसके लिए ग्रीन टी और ब्लैक टी इस समय काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं. हालांकि, कई लोग इस बात को लेकर संशय में रहते हैं कि आखिर ग्रीन टी पिएं या ब्लैक टी. यदि आप भी किस चाय को पिएं, इसको तय नहीं कर पा रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि आखिर कौन-सी चाय ज्यादा फायदेमंद है.

    एक ही पौधे से तैयार होती हैं दोनों चाय आपको मालूम हो कि ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों ही एक ही पौधे से तैयार होती हैं. ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की पत्तियों से बनाई जाती हैं. बस इन्हें प्रोसेस करने का तरीका अलग होता है. इसी के चलते इन दोनों चाय का स्वाद, रंग से लेकर पोषक तत्वों में अंतर आ जाता है.

    ग्रीन टी कम प्रोसेस की जाती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट खासकर कैटेचिन अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इसका स्वाद हल्का और थोड़ा कड़वा होता है. इस चाय में कैफीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है. उधर, ब्लैक टी पूरी तरह ऑक्सीडाइज की जाती है. इसका स्वाद गहरा होता है. इसमें कैफीन की मात्रा ग्रीन टी से अधिक होती है. ब्लैक टी में थियोफ्लेविन और थियोरूबिजिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं.

    ग्रीन टी पीने के फायदे ग्रीन टी वजन नियंत्रित करने में सहायक होती है. यह चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. ऐसे में दिल की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. ग्रीन टी त्वचा के लिए फायदेमंद होती है. यह चाय शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करती है.

    ब्लैक टी पीने के फायदे ब्लैक टी शरीर में ऊर्जा और सतर्कता बढ़ाने में मदद करती है. यह चाय मानसिक फोकस बेहतर करने में सहायक हो सकती है. इस चाय को पीने से पाचन तंत्र ठीक रहता है. यह टी हृदय के अच्छी मानी जाती है. इस चाय को सुबह में पीने से शरीर को ऊर्जा मिलेती है. ऐसे लोग इस चाय को सुबह में पीना पसंद करते हैं. सुबह की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है।

    किसे पीनी चाहिए ग्रीन टी और किसे ब्लैक टी अब सवाल उठ रहा है कि किसी ग्रीन टी और किसे ब्लैक टी पीनी चाहिए क्योंकि दोनों चाय में कुछ न कुछ विशेषताएं हैं. वैसे लोग जो अपना वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें ग्रीन टी पीनी चाहिए. वैसे लोग जो कम कैफीन पसंद करते हैं, उनके लिए ग्रीन टी अच्छी है. वैसे लोग जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पेय लेना चाहते हैं, उनके लिए ग्रीन टी अच्छी हो सकती है. उधर, ब्लैट की वे लोग पी सकते हैं, जिन्हें सुबह अधिक ऊर्जा और ताजगी चाहिए. वैसे लोग जो स्ट्रॉन्ग फ्लेवर पसंद करते हैं, वे ब्लैक टी पी सकते हैं. वैसे लोग जिन्हें किसी काम में पूरे दिन फोकस बनाए रखना है, वे ब्लैक टी पी सकते हैं.

    ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में से क्या पिएं यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं और एंटीऑक्सीडेंट लेना चाहते हैं तो आपके लिए ग्रीन टी बेहतर विकल्प है. उधर, यदि आपको पूरे दिन ऊर्जा और बेहतर फोकस चाहिए तो ब्लैक टी उपयुक्त हो सकती है. ऐसे में आप किसी भी चाय का चुनाव अपनी सेहत की स्थिति, कैफीन सहनशीलता और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखकर कर सकते हैं.

  • एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम… मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम… मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    गुलाबी होठ चाहिए? एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम... मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    बदलते मौसम में होंठों का सूखना, फटना और परतदार होना आम समस्या है. खासकर मौसम में नमी कम होने पर होंठ जल्दी ड्राई होने लगते हैं. ऐसे में बाजार के लिप बाम पर निर्भर रहने के बजाय आप घर पर ही गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम बना सकते हैं.

    इसे बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियां, नारियल या बादाम का तेल, शहद और विटामिन ई जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है.गुलाब की पंखुड़ियां होंठों को फायदा गुलाब की पंखुड़ियां सिर्फ खुशबू और खूबसूरती के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि इनमें ऐसे प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं जो त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं. गुलाब की पंखुड़ियों से बना लिप बाम होंठों को मुलायम रखने के साथ उन्हें ताजगी भरा और हेल्दी लुक देने में मदद कर सकता है.लिप बाम बनाने का सामान घर पर गुलाब का लिप बाम बनाने के लिए 1 कप ताजी गुलाब की पंखुड़ियां, 2 बड़े चम्मच नारियल या बादाम का तेल, 1 बड़ा चम्मच बीजवैक्स या पेट्रोलियम जेली, आधा चम्मच शहद और 1 विटामिन ई कैप्सूल की जरूरत होगी. विटामिन ई का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है,

    इसे आप अपनी पसंद के अनुसार डाल सकते हैं.ऐसे बनाएं लिप बाम सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें. अब इन्हें थोड़े से नारियल तेल या कच्चे दूध के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को नारियल तेल के साथ धीमी आंच पर डबल बॉयलर की मदद से करीब 10 से 12 मिनट तक गर्म करें. इसके बाद मिश्रण को छानकर गुलाब से तैयार तेल अलग कर लें. अब इस तेल में पेट्रोलियम जेली डालकर हल्का गर्म करें, ताकि यह अच्छी तरह पिघलकर तेल में मिल जाए. इसमें आधा चम्मच शहद और विटामिन ई कैप्सूल का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. तैयार मिश्रण को साफ कंटेनर में डालकर 20 से 30 मिनट के लिए फ्रिज में रखें. ठंडा होने के बाद आपका होममेड लिप बाम तैयार है.

    ऐसे करें इस्तेमाल लिप बाम बनाने के लिए हमेशा साफ और ताजी गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करें. इसे साफ और एयरटाइट डिब्बे में रखें. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ा सा प्रोडक्ट लगाकर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर होंठों पर जलन, लालिमा या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.

  • लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके..?

    लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके..?

    लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके

    दोपहर का खाना खाने के बाद अगर आपकी आंखें भारी होने लगती हैं और काम करने का मन नहीं करता, तो आप अकेले नहीं हैं. कई लोगों को लंच के बाद अचानक नींद और सुस्ती महसूस होती है. इसे पोस्ट मील स्लीपिनेस कहा जाता है. आमतौर पर यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होती. हालांकि, अब सवाल उठता है कि आखिर खाने के बाद भयंकर नींद क्यों आती है? चलिए आपको इसका सही जवाब बताते हैं…दोपहर में क्यों बढ़ जाती है नींद दरअसल, हमारे शरीर में 24 घंटे की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है. दोपहर के समय इस घड़ी में ऐसा बदलाव आता है, जिससे कुछ समय के लिए जागे रहने का संकेत कम हो जाता है. यही वजह है कि कई लोगों को बिना खाना खाए भी दोपहर में सुस्ती महसूस होती है.

    खाना खाने के बाद यह असर और ज्यादा महसूस हो सकता है.ज्यादा और भारी खाना भी है वजह अगर लंच बहुत ज्यादा या भारी है, तो उसके बाद नींद और सुस्ती बढ़ सकती है. खासकर बहुत ज्यादा कैलोरी, तली-भुनी चीजें, मीठी चीजें और सफेद आटे से बनी चीजें खाने पर यह असर ज्यादा महसूस हो सकता है. खाना खाने के बाद शरीर में पाचन से जुड़े कई बदलाव होते हैं. ब्लड ग्लूकोज और पोषक तत्वों में बदलाव के साथ दिमाग के जागने और नींद से जुड़े संकेत भी बदलते हैं. इन सभी प्रक्रियाओं का मिलाजुला असर सुस्ती के रूप में दिखाई दे सकता है.

    रात में नींद पूरी न होना भी कारण अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो दोपहर के खाने के बाद सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है. लंबे समय तक जागने पर शरीर की नींद की जरूरत बढ़ती जाती है. इसलिए दिनभर एक्टिव रहने के लिए रात में पर्याप्त और अच्छी नींद लेना जरूरी है.सुस्ती कम करने के लिए क्या करें दोपहर में जरूरत से ज्यादा खाना खाने से बचें और संतुलित भोजन लें. खाने के बाद कुछ देर हल्की चाल से टहलना भी मददगार हो सकता है.

    पर्याप्त पानी पीना और रात में अच्छी नींद लेना भी जरूरी है. अगर हर दिन खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा नींद, चक्कर या कमजोरी महसूस होती है या इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें. लगातार ज्यादा नींद कभी-कभी नींद की समस्या, खून की कमी, थायराइड या ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी का संकेत भी हो सकती है.

  • लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    चुगली कर महिला ने खरीद लिए दो-दो घर, बस पैसे लेकर लीक कर देती है मोहल्ले का सीक्रेट, लोग मुंह बंद करने के लिए देते हैं पैसे

    मोहल्ले में कोई खबर हो और आपको सबसे पहले पता चल जाए, तो अक्सर लोग आपको चुगलखोर कह देते हैं लेकिन कोलंबिया की 67 साल की मिरियम ने इसी आदत को कमाई का जरिया बना लिया. वो पड़ोस के लोगों की बातें सुनती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें अच्छी कीमत पर बेचती हैं. मिरियम का दावा है कि इस अनोखे काम से उन्होंने दो घर तक खरीद लिए हैं.

    घर के बाहर बैठकर सुनती हैं मोहल्ले की खबरें मिरियम कोलंबिया की रहने वाली हैं और खुद को प्रोफेशनल चिसमोसा यानी गॉसिपर बताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें बचपन से ही चुगली और लोगों की बातें सुनने का शौक है. इसी शौक को उन्होंने कारोबार में बदल दिया. मिरियम अक्सर अपने घर के बाहर बैठती हैं. यहां आने-जाने वाले लोगों की बातचीत पर कान लगाए रहती हैं. वह कहती हैं कि मोहल्ले की गॉसिपर को हर छोटी-बड़ी खबर पता होती है.

    हर खबर की कीमत 5 से 10 हजार रुपए तक मिरियम के मुताबिक साधारण और कम सनसनीखेज खबरों के लिए वह 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो तक लेती हैं. हालांकि, अगर खबर ज्यादा बड़ी हो तो उसकी कीमत भी बढ़ जाती है. वह हर जगह अपने साथ एक नोटबुक रखती हैं. इसमें वह सुनी हुई बातों को लिख लेती हैं, ताकि बाद में कहानी बताते समय कोई गलती न हो. उनका कहना है कि वह बिना सबूत के किसी के बारे में कुछ नहीं कहतीं.

    सबूत के लिए तस्वीरें और पूरा रिकॉर्ड मिरियम ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने घर में एक बोर्ड भी दिखाया. इसमें कई तस्वीरें और कंटेंट था. उनका दावा है कि ये उनके पास मौजूद सबूत हैं. इनमें कुछ तस्वीरें पड़ोसियों के अफेयर से जुड़ी हैं. कई लोग अपने राज सामने आने के डर से उन्हें पैसे देते हैं ताकि वह चुप रहें. उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किस्सा भी बताया, जिससे पत्नी की गैरमौजूदगी में अफेयर की बात छिपाने के बदले उन्होंने 7 लाख कोलंबियन पेसो लिए थे.

    गॉसिप से जमा पैसों को रखती हैं गुल्लक में मिरियम ने अपनी एक बड़ी गुल्लक भी दिखाई, जिसमें सिक्कों और नोटों की भरमार थी. उनका दावा है कि यह एक सामान्य हफ्ते की कमाई है. वह कहती हैं कि इसी काम से जमा किए पैसों की मदद से उन्होंने दो घर खरीदे हैं. अब पड़ोस की दूसरी महिलाएं भी उनकी नकल करने लगी हैं. लेकिन मिरियम का कहना है कि असली गॉसिप क्वीन बनना इतना आसान नहीं है.

    दोस्तों के साथ बांटती हैं ताजा गॉसिप मिरियम सिर्फ अपने घर के बाहर बैठकर ही खबरें नहीं जुटातीं. वह अपने दूसरे घर में दोस्तों के साथ गेम खेलते हुए भी मोहल्ले की नई-नई खबरों का आदान-प्रदान करती हैं.

    हर मोहल्ले में एक चुगलखोर जरूर होता है मिरियम अपने काम को सिर्फ चुगली नहीं मानतीं. उनका कहना है कि वह किसी के बारे में बिना सबूत कुछ नहीं बोलतीं. इसी वजह से इलाके में उनकी पहचान क्वीन ऑफ गॉसिप के रूप में हो गई है. उनका मानना है कि जब तक लोग रहेंगे, तब तक खबरें और गॉसिप भी रहेंगी. वह मजाकिया अंदाज में कहती हैं, हर अच्छे मोहल्ले में एक चुगलखोर होता है और अगर आपको कोई चुगलखोर नहीं पता, तो शायद वह चुगलखोर आप ही हैं.