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  • उन्नाव: कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ विवाद, सगे भाई पर धारदार हथियारों से हमला; मौत के बाद कई आरोपी हिरासत में.

    उन्नाव: कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ विवाद, सगे भाई पर धारदार हथियारों से हमला; मौत के बाद कई आरोपी हिरासत में.

    उन्नाव: कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ विवाद, सगे भाई पर धारदार हथियारों से हमला; मौत के बाद कई आरोपी हिरासत में.

    उन्नाव, उत्तर प्रदेश: बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र में कपड़े धोने को लेकर शुरू हुआ पारिवारिक विवाद कथित तौर पर खूनी संघर्ष में बदल गया। आरोप है कि परिवार के ही लोगों ने दिलशाद उर्फ पप्पू पर कुल्हाड़ी, तलवार और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दिलशाद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    वाशिंग मशीन में कपड़े धोने को लेकर हुआ विवाद

    घटना बांगरमऊ के गंज मुरादाबाद स्थित मोचियाना मोहल्ले की बताई जा रही है। मृतक की पत्नी सूफिया बानो के मुताबिक, वह सुबह घर में वाशिंग मशीन से कपड़े धो रही थी। इसी दौरान उसके ससुर मुर्तजा ने कपड़े धोने को लेकर आपत्ति जताई।

    बात बढ़ने पर परिवार के अन्य सदस्य भी कथित तौर पर विवाद में शामिल हो गए। महिला ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसके हाथ में चोट आई। उसका दावा है कि उसने पुलिस से शिकायत भी की थी।

    घर में घुसकर दिलशाद पर हमला करने का आरोप

    महिला के अनुसार, विवाद के कुछ समय बाद आरोपियों ने कथित तौर पर दिलशाद पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों के पास कुल्हाड़ी और तलवार जैसे धारदार हथियार थे।

    हमले में दिलशाद गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर गया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांगरमऊ ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीओ बांगरमऊ के मुताबिक, सुबह करीब 9:30 बजे पारिवारिक विवाद में मारपीट की सूचना मिली थी। परिजनों की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

    पुलिस ने मामले में कई मुख्य आरोपियों और संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    नोट: मामले में लगाए गए आरोप पुलिस जांच और शिकायत पर आधारित हैं। आरोपियों की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

  • रोज 1 एवोकाडो खाने से दिल की बीमारी का खतरा 4% तक कम? नई रिसर्च में LDL को लेकर बड़ा दावा.

    रोज 1 एवोकाडो खाने से दिल की बीमारी का खतरा 4% तक कम? नई रिसर्च में LDL को लेकर बड़ा दावा.

    रोज 1 एवोकाडो खाने से दिल की बीमारी का खतरा 4% तक कम? नई रिसर्च में LDL को लेकर बड़ा दावा.

    नई दिल्ली: आजकल खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि, बढ़ता वजन और हाई कोलेस्ट्रॉल दिल की सेहत के लिए बड़ी चिंता बन चुके हैं। ऐसे में डाइट में कौन-सी चीजें शामिल की जाएं, इसे लेकर लगातार रिसर्च सामने आती रहती हैं। एक नई स्टडी में एवोकाडो को लेकर दिलचस्प जानकारी सामने आई है।

    रिसर्च के मुताबिक, पेट के आसपास मोटापे की समस्या से जूझ रहे लोगों ने करीब 6 महीने तक रोजाना एक एवोकाडो खाया तो उनके LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कुछ कणों के स्तर में कमी देखी गई। शोधकर्ताओं ने इस बदलाव के आधार पर हृदय रोग के जोखिम में करीब 4% की संभावित कमी का अनुमान लगाया।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रोज एक एवोकाडो खाने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक से बचाव की गारंटी मिल जाती है। अध्ययन में वास्तविक हार्ट अटैक या स्ट्रोक की घटनाओं को कम होते हुए सीधे नहीं मापा गया था।

    786 लोगों पर की गई स्टडी

    इस रिसर्च में 25 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 786 वयस्कों को शामिल किया गया था। सभी प्रतिभागियों में पेट के आसपास मोटापे की समस्या थी।

    अध्ययन में पुरुषों की कमर का आकार करीब 40 इंच या उससे अधिक और महिलाओं की कमर करीब 35 इंच या उससे अधिक थी। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह ने अपनी सामान्य डाइट जारी रखी, जबकि दूसरे समूह को 6 महीने तक रोजाना एक एवोकाडो खाने के लिए कहा गया।

    अध्ययन के अंत में एवोकाडो खाने वाले समूह में LDL से जुड़े कुछ कणों के स्तर में कमी देखी गई। वहीं, शरीर के वजन और कमर की चौड़ाई में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया।

    LDL के कणों में बदलाव क्यों है महत्वपूर्ण?

    LDL को आमतौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। खून में LDL का अधिक स्तर धमनियों में प्लाक बनने से जुड़ा हुआ है, जिससे समय के साथ हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

    रिसर्च में एवोकाडो खाने वाले लोगों में LDL से जुड़े कणों में कमी देखी गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के बदलाव हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

    लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि LDL कणों में बदलाव और वास्तविक हार्ट अटैक या स्ट्रोक में कमी एक ही बात नहीं है। इसके लिए लंबे समय तक बड़े स्तर पर और ऐसे अध्ययन जरूरी हैं जिनमें वास्तविक हृदय संबंधी घटनाओं को देखा जाए।

    एवोकाडो में क्या खास होता है?

    एवोकाडो में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट, फाइबर, फाइटोस्टेरॉल्स, विटामिन ई और विभिन्न पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शामिल हैं।

    इसमें मौजूद फाइबर और हेल्दी फैट संतुलित डाइट का हिस्सा बनने पर हृदय और मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए उपयोगी हो सकते हैं। फाइटोस्टेरॉल्स भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

    हालांकि, किसी एक पोषक तत्व या फल को हृदय रोग से बचाव का अकेला उपाय नहीं माना जा सकता।

    एवोकाडो को डाइट में कैसे शामिल करें?

    अगर आप एवोकाडो खाना चाहते हैं तो इसे ऐसी चीजों की जगह इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर हो सकता है जिनमें संतृप्त वसा या ज्यादा कैलोरी होती है।

    • मक्खन की जगह होल ग्रेन टोस्ट पर मैश किया हुआ एवोकाडो लें।
    • सैंडविच में मेयोनीज की जगह एवोकाडो इस्तेमाल कर सकते हैं।
    • सलाद या ग्रेन बाउल में इसे शामिल करें।
    • क्रीमी ड्रेसिंग की जगह सीमित मात्रा में एवोकाडो इस्तेमाल किया जा सकता है।
    • इसे सब्जियों और साबुत अनाज के साथ संतुलित भोजन का हिस्सा बनाएं।

    ध्यान रखें कि एवोकाडो में हेल्दी फैट जरूर होता है, लेकिन यह कैलोरी से भरपूर फल भी है। इसलिए जरूरत से ज्यादा खाना वजन नियंत्रण के लिहाज से फायदेमंद नहीं होगा।

    क्या रोज एक एवोकाडो खाने से दिल की बीमारी खत्म हो जाएगी?

    नहीं। एवोकाडो को स्वस्थ डाइट का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन यह हृदय रोग से बचाव की कोई गारंटी या इलाज नहीं है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, स्वस्थ वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना तथा धूम्रपान से दूरी बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    इस रिसर्च की एक बड़ी सीमा यह भी है कि इसमें मुख्य रूप से पेट के आसपास मोटापे वाले लोगों को शामिल किया गया था। इसलिए इसके नतीजों को हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

    सबसे जरूरी बात: 4% की कमी का आंकड़ा LDL से जुड़े बदलावों के आधार पर लगाया गया अनुमान है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा वास्तव में 4% कम हो जाएगा।

    डिस्क्लेमर: यह लेख वैज्ञानिक शोध में सामने आए निष्कर्षों पर आधारित है। एवोकाडो किसी दवा या डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं है। अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, हृदय रोग है या आप पहले से कोई दवा लेते हैं, तो अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लें।

  • बिजनौर: महज 80 रुपये के लिए दोस्त की हत्या का आरोप, शराब पीते समय हाथ-पैर पकड़े और नुकीली सलाई से किए वार.

    बिजनौर: महज 80 रुपये के लिए दोस्त की हत्या का आरोप, शराब पीते समय हाथ-पैर पकड़े और नुकीली सलाई से किए वार.

    बिजनौर: महज 80 रुपये के लिए दोस्त की हत्या का आरोप, शराब पीते समय हाथ-पैर पकड़े और नुकीली सलाई से किए वार.

    बिजनौर, उत्तर प्रदेश: स्योहारा क्षेत्र में दोस्ती के रिश्ते को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। पुलिस जांच के मुताबिक, शराब पीने के दौरान तीन दोस्तों ने कथित तौर पर अनीस की हत्या कर दी। आरोपियों को शक था कि अनीस के पास काफी पैसे हैं, लेकिन वारदात के बाद उसकी जेब से सिर्फ 80 रुपये मिले।

    शराब पीने के दौरान बिगड़ी बात

    पुलिस के अनुसार घटना 23 सितंबर की रात की है। अनीस अपने साथियों हिमांशु, राजा और जसविन्दर उर्फ हर्ष उर्फ अंगा के साथ स्योहारा क्षेत्र में बैठकर शराब पी रहा था।

    इसी दौरान किसी बात को लेकर कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों को कथित तौर पर लगा कि अनीस के पास काफी रकम है। इसके बाद उस पर हमला करने की योजना बनाई गई।

    हाथ-पैर पकड़े और गला दबाने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, हिमांशु और राजा ने कथित तौर पर अनीस के हाथ-पैर पकड़ लिए। इसके बाद जसविन्दर पर बेल्ट से उसका गला दबाने और पगड़ी में इस्तेमाल होने वाली नुकीली सलाई से उसकी गर्दन पर वार करने का आरोप है।

    पुलिस का कहना है कि गंभीर चोट और दम घुटने के कारण अनीस की मौत हो गई।

    जेब से निकले सिर्फ 80 रुपये

    वारदात के बाद आरोपियों ने अनीस की जेब तलाशी तो कथित तौर पर उसमें सिर्फ 80 रुपये मिले। इसके बाद शव को कुम्हारपुरा गांव के पास राजवाह के किनारे गन्ने के खेत में छिपाने का आरोप है।

    जांच के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर घटना के दौरान पहने खून लगे कपड़े भी अलग-अलग जगहों पर फेंक दिए और अनीस की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल लेकर वहां से चले गए।

    गुमशुदगी के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

    अनीस के घर नहीं लौटने पर उसके भाई जमील ने 27 सितंबर को स्योहारा थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाकर जांच आगे बढ़ाई।

    जांच के दौरान पुलिस का शक अनीस के करीबी दोस्तों पर गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के बाद हिमांशु और राजा को पहले गिरफ्तार किया गया था। अब तीसरे आरोपी जसविन्दर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

    आरोपी की निशानदे

  • डेयरी व्हाइटनर: रोज चाय में डालते हैं तो जान लें सेहत पर क्या पड़ सकता है असर.

    डेयरी व्हाइटनर: रोज चाय में डालते हैं तो जान लें सेहत पर क्या पड़ सकता है असर.

    डेयरी व्हाइटनर: रोज चाय में डालते हैं तो जान लें सेहत पर क्या पड़ सकता है असर.

    नई दिल्ली: चाय पीने वालों की संख्या भारत में काफी ज्यादा है। कई लोग समय बचाने या सुविधा के लिए दूध की जगह डेयरी व्हाइटनर का इस्तेमाल करते हैं। चाय में इसे मिलाने से स्वाद और रंग दूध जैसा हो जाता है, लेकिन डेयरी व्हाइटनर को सीधे दूध समझना सही नहीं है। यह एक प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट होता है और इसमें अलग-अलग तरह के एडिटिव्स शामिल हो सकते हैं।

    हाल ही में एक डेयरी व्हाइटनर के सैंपल को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जांच सामने आई है। इसके बाद रोजाना डेयरी व्हाइटनर इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चर्चा बढ़ गई है। खासतौर पर फॉस्फेट एडिटिव्स के सेवन और किडनी की सेहत को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    डेयरी व्हाइटनर क्या होता है?

    डेयरी व्हाइटनर दूध नहीं होता। इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि चाय या कॉफी में मिलाने पर दूध जैसा रंग, स्वाद और टेक्सचर मिल सके। अलग-अलग ब्रांड के उत्पादों में इनके ingredients अलग हो सकते हैं, इसलिए पैकेट पर दी गई पूरी सामग्री सूची पढ़ना जरूरी है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति दिन में कई कप चाय पीता है और हर बार उसमें व्हाइटनर इस्तेमाल करता है, तो उसे यह देखना चाहिए कि उस प्रोडक्ट के जरिए उसकी डाइट में कौन-कौन से अतिरिक्त ingredients और food additives शामिल हो रहे हैं।

    फॉस्फेट एडिटिव्स को लेकर क्यों होती है चिंता?

    फॉस्फोरस शरीर के लिए जरूरी खनिज है। यह दूध, दाल, मांस, नट्स और कई अन्य खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। लेकिन प्राकृतिक रूप से मौजूद फॉस्फोरस और खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले फॉस्फेट एडिटिव्स का शरीर में अवशोषण अलग-अलग हो सकता है।

    कुछ फॉस्फेट एडिटिव्स शरीर में अपेक्षाकृत आसानी से अवशोषित हो सकते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति के आहार में ऐसे एडिटिव्स वाले कई प्रोसेस्ड फूड नियमित रूप से शामिल हैं, तो कुल फॉस्फोरस सेवन बढ़ सकता है।

    एक-दो कप चाय में थोड़ी मात्रा में व्हाइटनर इस्तेमाल करना अपने आप में बड़ी मात्रा नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति रोजाना तीन-चार या उससे ज्यादा कप चाय में इसका इस्तेमाल करता है और साथ ही अन्य प्रोसेस्ड फूड भी खाता है, तो कुल सेवन पर ध्यान देना उचित है।

    किडनी की बीमारी वाले लोगों को क्यों रहना चाहिए सावधान?

    स्वस्थ किडनी शरीर में फॉस्फोरस का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर से अतिरिक्त फॉस्फोरस बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    क्रॉनिक किडनी डिजीज वाले लोगों में लंबे समय तक फॉस्फोरस का बढ़ा हुआ स्तर हड्डियों और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ हृदय संबंधी जोखिम से भी जुड़ा पाया गया है। इसलिए किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को प्रोसेस्ड फूड और फॉस्फेट एडिटिव्स के सेवन को लेकर अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह माननी चाहिए।

    हालांकि, सामान्य स्वस्थ लोगों में केवल फॉस्फेट एडिटिव्स के सेवन से गंभीर बीमारी होने का सीधा कारण-परिणाम संबंध साबित करने वाले प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे लेकर अनावश्यक डरने के बजाय संतुलित आहार और लेबल पढ़ने की आदत ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वालों को भी ध्यान देना चाहिए

    जिन लोगों को डायबिटीज, किडनी की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें प्रोसेस्ड फूड का चुनाव करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए कुल डाइट, सोडियम, शुगर, फॉस्फोरस और अन्य पोषक तत्वों का संतुलन महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इसलिए केवल चाय में इस्तेमाल होने वाले व्हाइटनर पर ध्यान देने के बजाय पूरे दिन के खान-पान को देखना ज्यादा जरूरी है।

    जिस प्रोडक्ट की जांच हुई, उसके बारे में क्या सामने आया?

    रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली के द ललित होटल से लिए गए एक लो-फैट डेयरी व्हाइटनर के सैंपल को लेकर खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जांच में सवाल उठे। खाद्य विश्लेषक की रिपोर्ट में सैंपल को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं बताया गया।

    वहीं, संबंधित कंपनी की ओर से यह कहा गया है कि उसका उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुसार है और जांच में कुल फॉस्फोरस की मात्रा मापी गई हो सकती है, जिसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद फॉस्फोरस भी शामिल हो सकता है। इस तकनीकी मुद्दे पर अंतिम स्थिति संबंधित नियामक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

    डेयरी व्हाइटनर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

    • पैकेट पर दी गई इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर पढ़ें।
    • फॉस्फेट या अन्य food additives की मौजूदगी देखें।
    • INS 338 से 343 और 450 से 452 जैसे नंबर दिखाई दें तो उनके बारे में जानकारी जरूर लें।
    • यदि संभव हो तो रोजाना इस्तेमाल के लिए ताजा दूध जैसे कम प्रोसेस्ड विकल्पों को प्राथमिकता दें।
    • डायबिटीज, किडनी की बीमारी या हाई ब्लड प्रेशर होने पर अपने डॉक्टर/डाइटिशियन से डाइट संबंधी सलाह लें।
    • दिन में कई बार चाय पीते हैं तो उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री के साथ-साथ पूरी डाइट पर भी ध्यान दें।

    ध्यान रखें: किसी एक खाद्य पदार्थ को अपने आप में हार्ट या किडनी की बीमारी का कारण मानना सही नहीं है। स्वास्थ्य पर असर व्यक्ति की पूरी डाइट, मात्रा, उम्र, मौजूदा बीमारियों और जीवनशैली पर निर्भर करता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। यदि आपको किडनी, हार्ट, डायबिटीज या अन्य कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले योग्य डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।

  • रानीताल-मुबारिकपुर हाईवे पर बीयर से लदा ट्रक पलटा, चालक को नींद की झपकी आने की आशंका.

    रानीताल-मुबारिकपुर हाईवे पर बीयर से लदा ट्रक पलटा, चालक को नींद की झपकी आने की आशंका.

    रानीताल-मुबारिकपुर हाईवे पर बीयर से लदा ट्रक पलटा, चालक को नींद की झपकी आने की आशंका.

    कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश: रानीताल-मुबारिकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर देहरा में ब्यास नदी पुल के पास गुरुवार सुबह बीयर की पेटियों से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। हादसे में ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि राहत की बात रही कि किसी की जान नहीं गई।

    ब्यास पुल के पास अचानक पलटा ट्रक

    जानकारी के अनुसार, बीयर से लदा ट्रक गुरुवार सुबह रानीताल-मुबारिकपुर हाईवे से गुजर रहा था। जैसे ही वह देहरा में ब्यास नदी पुल के समीप पहुंचा, अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण नहीं रहा और ट्रक सड़क पर पलट गया।

    हादसे के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। ट्रक में बीयर की पेटियां लदी होने के कारण मौके पर लोगों की भीड़ भी जुट गई।

    चालक को नींद की झपकी आने की आशंका

    प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि सुबह के समय चालक को नींद की झपकी आने के कारण वाहन अनियंत्रित हुआ होगा। हालांकि पुलिस ने अभी हादसे की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चालक के बयान और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आएंगे।

    पुलिस ने संभाली स्थिति, यातायात हुआ प्रभावित

    हादसे की सूचना मिलते ही देहरा पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने पहले यह सुनिश्चित किया कि दुर्घटना में कोई व्यक्ति घायल तो नहीं हुआ है।

    ट्रक के सड़क पर पलटने से हाईवे पर यातायात भी कुछ देर प्रभावित रहा। पुलिस और संबंधित टीमों ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क से हटाने की कार्रवाई शुरू की, ताकि यातायात व्यवस्था सामान्य हो सके।

    पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

  • पोलैंड: बर्फीले पानी में 1 घंटे: 38 सेकंड तक रहीं मारिया, ठंड को दी चुनौती और बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड.

    पोलैंड: बर्फीले पानी में 1 घंटे: 38 सेकंड तक रहीं मारिया, ठंड को दी चुनौती और बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड.

    पोलैंड: बर्फीले पानी में 1 घंटे: 38 सेकंड तक रहीं मारिया, ठंड को दी चुनौती और बना दिया वर्ल्ड रिकॉर्ड.

    पोलैंड की मारिया ‘आइसब्रेकर’ बोडाज ने ऐसी चुनौती को पूरा किया है, जिसके बारे में सोचना भी कई लोगों के लिए मुश्किल है। उन्होंने बेहद ठंडे पानी में करीब 1 घंटे 38 सेकंड तक रहकर महिलाओं की कैटेगरी में नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उनकी कहानी अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है।

    ठंडे पानी से शुरू हुआ जुनून

    मारिया ने साल 2021 से ठंडे पानी में रहने की ट्रेनिंग शुरू की थी। शुरुआत में उनके लिए यह एक रोमांचक अनुभव था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया।

    मारिया के मुताबिक, ठंडे पानी ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहना और अपनी प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखना सिखाया। उनका मानना है कि इंसान बाहरी परिस्थितियों को हमेशा अपने हिसाब से नहीं बदल सकता, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति अपनी प्रतिक्रिया जरूर नियंत्रित कर सकता है।

    एक के बाद एक बनाए कई रिकॉर्ड

    मारिया ने कम समय में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। 28 जून 2025 को उन्होंने पूरे शरीर पर बर्फ रखकर 3 घंटे 33 मिनट 33 सेकंड तक रहने का रिकॉर्ड बनाया।

    इसके बाद 19 सितंबर 2025 को उन्होंने बर्फीले पानी में 1 घंटे 38 सेकंड तक रहकर महिला वर्ग में एक और रिकॉर्ड कायम किया। इसके अलावा 21 फरवरी को उन्होंने बर्फ के सीधे संपर्क में रहते हुए 1 घंटे 33 मिनट 33 सेकंड की एक और उपलब्धि हासिल की।

    ठंड के बीच खुद को रखती हैं शांत

    इतनी कम तापमान वाली परिस्थितियों में शरीर और दिमाग को शांत रखना आसान नहीं होता। मारिया इस दौरान अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करती हैं और पानी में बनने वाले बुलबुलों पर ध्यान लगाती हैं।

    उनके प्रशिक्षक के अनुसार, ऐसी चुनौती में मानसिक शांति बेहद अहम होती है। मारिया भी डर पर ध्यान देने के बजाय अपने मन को शांत रखने और सकारात्मक विचारों पर फोकस करने की कोशिश करती हैं।

    महिलाओं को देना चाहती हैं खास संदेश

    मारिया का कहना है कि उनका मकसद केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं है। वह खासतौर पर महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि हर इंसान के भीतर अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा ताकत मौजूद हो सकती है।

    उनका मानना है कि नए अनुभवों और चुनौतियों के जरिए इंसान अपने शरीर और मन को बेहतर तरीके से समझ सकता है। मारिया की बर्फीले पानी में रहने की यह उपलब्धि इसी सोच को दर्शाती है।

  • सर्वपितृ अमावस्या 9 या 10 अक्टूबर? जानें सही तिथि, कुतुप-रौहिण मुहूर्त, तर्पण विधि, मंत्र और उपाय.

    सर्वपितृ अमावस्या 9 या 10 अक्टूबर? जानें सही तिथि, कुतुप-रौहिण मुहूर्त, तर्पण विधि, मंत्र और उपाय.

    सर्वपितृ अमावस्या 9 या 10 अक्टूबर? जानें सही तिथि, कुतुप-रौहिण मुहूर्त, तर्पण विधि, मंत्र और उपाय.

    नई दिल्ली: पितृ पक्ष में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है और इस अवसर पर उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या किसी कारण से उनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर न हो पाया हो।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों का स्मरण और अपनी श्रद्धा के अनुसार तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होने की कामना की जाती है। साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या की तिथि को लेकर कई लोगों के मन में 9 या 10 अक्टूबर को लेकर सवाल है।

    2026 में कब है सर्वपितृ अमावस्या?

    पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर 2026 की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर 2026 की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि और धार्मिक परंपरा के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।

    कुतुप और रौहिण मुहूर्त का समय

    सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। दिए गए पंचांग के अनुसार मुहूर्त इस प्रकार हैं—

    • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
    • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक
    • अपराह्न काल: दोपहर 1:18 बजे से 3:37 बजे तक

    श्राद्ध या तर्पण का सही समय स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

    सर्वपितृ अमावस्या पर कैसे करें तर्पण?

    सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुश, काले तिल, जल और पुष्प आदि का उपयोग करते हुए तर्पण किया जाता है।

    हाथ में जल, काले तिल और कुश लेकर पितरों का ध्यान करें और श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार भोजन तैयार करके जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को भोजन कराने की परंपरा है।

    कई परिवारों में गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भी भोजन निकालने की परंपरा है। अलग-अलग परंपराओं में तर्पण की विधि में अंतर हो सकता है।

    तर्पण के समय इस मंत्र का जाप

    पारंपरिक रूप से तर्पण के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए मंत्र जाप किया जाता है। एक प्रचलित मंत्र है—

    “ॐ आगच्छन्तु मे पितर एवं गृह्णन्तु जलाञ्जलिम।”

    मंत्र का उच्चारण अपनी परंपरा और धार्मिक विधि के अनुसार किया जा सकता है।

    पितृ गायत्री मंत्र का जाप

    पितरों की शांति और स्मरण के लिए पितृ गायत्री मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक परंपरा है—

    “ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
    नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः॥”

    इस मंत्र का जाप श्रद्धा और शांत मन से करने की मान्यता है।

    सर्वपितृ अमावस्या पर कौन से उपाय किए जाते हैं?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं—

    • पितरों के नाम से काले तिल और जल का तर्पण करें।
    • जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या भोजन का दान करें।
    • घर में पितरों का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं।
    • परंपरा के अनुसार गाय को हरा चारा और कौवे को भोजन कराया जा सकता है।
    • पितरों से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए श्रद्धापूर्वक क्षमा प्रार्थना करें।
    • इस दिन घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें और अनावश्यक विवाद से बचें।

    सर्वपितृ अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इसलिए किसी भी कर्मकांड से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, सम्मान और अपनी पारिवारिक परंपराओं का पालन माना जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और पंचांग संबंधी विवरणों पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। तिथि, मुहूर्त या श्राद्ध की विशेष विधि के लिए अपने क्षेत्र के प्रमाणित पंचांग या स्थानीय विद्वान से पुष्टि करना उचित रहेगा।

  • शिमला: चैकिंग के दौरान वाहन से करीब 10 ग्राम चिट्टा बरामद, 26 वर्षीय युवती समेत तीन गिरफ्तार.

    शिमला: चैकिंग के दौरान वाहन से करीब 10 ग्राम चिट्टा बरामद, 26 वर्षीय युवती समेत तीन गिरफ्तार.

    शिमला: चैकिंग के दौरान वाहन से करीब 10 ग्राम चिट्टा बरामद, 26 वर्षीय युवती समेत तीन गिरफ्तार.

    शिमला, हिमाचल प्रदेश: नशे के खिलाफ अभियान के तहत शिमला पुलिस की स्पैशल सैल ने घनाहट्टी इलाके में कार्रवाई करते हुए एक युवती समेत तीन लोगों को कथित तौर पर चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से करीब 10 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ है।

    नलहट्टी क्रॉसिंग के पास पुलिस ने रोका वाहन

    पुलिस के अनुसार स्पैशल सैल की टीम घनाहट्टी के नलहट्टी क्रॉसिंग के पास गश्त और चैकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम ने संदेह के आधार पर एक वाहन को रुकवाया। वाहन में एक युवती और दो युवक सवार थे।

    नियमों के तहत तलाशी लेने पर पुलिस को उनके कब्जे से करीब 10 ग्राम चिट्टा मिलने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर बरामद नशीले पदार्थ को कब्जे में लेकर तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

    अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं आरोपी

    पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में 25 वर्षीय युवक बिलासपुर जिले का, 34 वर्षीय युवक अर्की, जिला सोलन का और 26 वर्षीय युवती शिमला जिले की रहने वाली है।

    NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

    पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर बरामद चिट्टा कहां से लाया गया था और इसे आगे किसे पहुंचाया जाना था।

    पुलिस को आशंका है कि मामले के तार अंतर-जिला नशा नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड लेने की प्रक्रिया के बाद पुलिस उनसे पूछताछ करेगी। जांच के दौरान इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।

    नोट: बरामदगी और आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपियों को दोषी ठहराया जाना अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

  • सूरत: 700 साल पुराने:पेड़ को बचाने के लिए बदला मेट्रो का रूट, लेकिन 932 पेड़ काटने के प्रस्ताव से उठे सवाल

    सूरत: 700 साल पुराने:पेड़ को बचाने के लिए बदला मेट्रो का रूट, लेकिन 932 पेड़ काटने के प्रस्ताव से उठे सवाल

    सूरत: 700 साल पुराने:पेड़ को बचाने के लिए बदला मेट्रो का रूट, लेकिन 932 पेड़ काटने के प्रस्ताव से उठे सवाल

    सूरत में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दौरान करीब 700 साल पुराने ऐतिहासिक ‘चोर आमली’ पेड़ को बचाने के लिए रूट में बदलाव किए जाने की चर्चा है। अडाजन इलाके में मौजूद इस प्राचीन पेड़ को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने आवाज उठाई थी, जिसके बाद मेट्रो प्रशासन ने अलाइनमेंट में बदलाव किया।

    हालांकि, इसी प्रोजेक्ट से जुड़े पेड़ों के आंकड़े अब चर्चा का विषय बन गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो के 40.35 किलोमीटर लंबे फेज-1 कॉरिडोर और खजोद स्थित डिपो क्षेत्र में करीब 2,500 पेड़ प्रभावित पाए गए थे। इनमें से 932 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

    700 साल पुराना है ‘चोर आमली’ पेड़

    अडाजन में मौजूद ‘चोर आमली’ को अफ्रीकन बाओबाब के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे सूरत की ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है।

    मेट्रो निर्माण के दौरान जब इस पेड़ के प्रभावित होने की आशंका सामने आई तो स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसके संरक्षण की मांग उठाई। इसके बाद मेट्रो लाइन के डिजाइन और रूट में बदलाव किया गया, जिससे इस प्राचीन पेड़ को बचाया जा सका।

    932 पेड़ों को काटने का था प्रस्ताव

    मेट्रो फेज-1 की कुल लंबाई करीब 40.35 किलोमीटर बताई गई है। पूरे कॉरिडोर और खजोद डिपो क्षेत्र में किए गए सर्वे के दौरान लगभग 2,500 पेड़ों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी।

    इनमें से 932 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि एक ऐतिहासिक पेड़ को बचाने के साथ-साथ प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाली बाकी हरियाली की भरपाई किस तरह की जाएगी।

    बताया गया है कि क्षतिपूर्ति के तौर पर खजोद स्थित ड्रीम सिटी डिपो परिसर में 3,000 से ज्यादा नए पौधे लगाने की योजना भी रखी गई है।

    मेट्रो प्रोजेक्ट में कई खास तकनीकी खूबियां

    सूरत मेट्रो प्रोजेक्ट सिर्फ पेड़ों को लेकर ही चर्चा में नहीं है। इसमें कई तकनीकी और डिजाइन से जुड़े खास प्रावधान भी किए गए हैं।

    मस्कती अस्पताल और लाभेश्वर में करीब 110 फीट की गहराई में स्टैक्ड मेट्रो स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों की छत और एलिवेशन में सूरत की डायमंड सिटी वाली पहचान को ध्यान में रखते हुए डायमंड कट डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है।

    प्रोजेक्ट के छह भूमिगत स्टेशनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुसार तैयार किए जाने की बात कही गई है। बिजली आपूर्ति के लिए 750V DC थर्ड रेल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    मजूरागेट स्टेशन को सूरत के पहले इंटरचेंज हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि ड्रीम सिटी डिपो में एक साथ 24 मेट्रो ट्रेनों को खड़ा करने की क्षमता रखी गई है।

    ऐसे में एक तरफ 700 साल पुराने पेड़ को बचाने के लिए मेट्रो रूट बदलने की पहल सामने आई है, तो दूसरी तरफ सैकड़ों पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव ने प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय असर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

  • हथेली में ऐसी गुरु रेखा वाले लोग माने जाते हैं भाग्यशाली, नेतृत्व से लेकर राजनीति तक में बना सकते हैं पहचान

    हथेली में ऐसी गुरु रेखा वाले लोग माने जाते हैं भाग्यशाली, नेतृत्व से लेकर राजनीति तक में बना सकते हैं पहचान

    हथेली में ऐसी गुरु रेखा वाले लोग माने जाते हैं भाग्यशाली, नेतृत्व से लेकर राजनीति तक में बना सकते हैं पहचान

    नई दिल्ली: हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की अलग-अलग रेखाओं और पर्वतों को व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन से जोड़कर देखा जाता है। इन्हीं में गुरु पर्वत और उससे जुड़ी रेखाओं को भी विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि गुरु पर्वत मजबूत और स्पष्ट होने पर व्यक्ति में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और दूसरों को प्रभावित करने की कला अच्छी हो सकती है।

    हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार ऐसे लोग राजनीति, शिक्षा, प्रबंधन, सलाहकारी कार्य और लोगों के सामने अपनी बात रखने वाले क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं।

    कहां होता है गुरु पर्वत?

    हथेली में तर्जनी उंगली के ठीक नीचे का हिस्सा गुरु पर्वत कहलाता है। हस्तरेखा शास्त्र में इस स्थान को महत्वाकांक्षा, ज्ञान, नेतृत्व, सम्मान और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है।

    अगर गुरु पर्वत उभरा हुआ हो और वहां मौजूद रेखाएं स्पष्ट दिखाई दें, तो इसे पारंपरिक हस्तरेखा शास्त्र में शुभ संकेत माना जाता है।

    नेतृत्व क्षमता से जोड़ी जाती है ऐसी रेखा

    मान्यता के अनुसार गुरु पर्वत पर साफ और सीधी रेखा होने पर व्यक्ति में नेतृत्व करने की क्षमता अच्छी हो सकती है। ऐसे लोग अपनी बात आत्मविश्वास के साथ दूसरों तक पहुंचाने और लोगों को अपने विचारों से प्रभावित करने में सक्षम माने जाते हैं।

    इसी वजह से हस्तरेखा शास्त्र में गुरु पर्वत को सार्वजनिक जीवन, नेतृत्व और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है।

    राजनीति और मोटिवेशनल स्पीकिंग में मिल सकती है सफलता

    हस्तरेखा शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार अगर गुरु से जुड़ी रेखा का संबंध बुध पर्वत की दिशा से बनता हो, तो व्यक्ति में बातचीत और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता मानी जाती है।

    ऐसे लोगों को राजनीति, शिक्षण, प्रबंधन, सलाहकारी क्षेत्र या मोटिवेशनल स्पीकिंग जैसे कामों के लिए उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, केवल हथेली की एक रेखा के आधार पर किसी व्यक्ति के करियर या भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

    सम्मान और प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है गुरु पर्वत

    हस्तरेखा शास्त्र में गुरु पर्वत को ज्ञान, सम्मान, महत्वाकांक्षा और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। अगर यह पर्वत संतुलित और उभरा हुआ हो तथा उस पर मौजूद रेखाएं साफ हों, तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रभाव के लिहाज से अच्छा संकेत माना जाता है।

    वहीं, गुरु पर्वत पर मौजूद अलग-अलग रेखाओं और चिन्हों की व्याख्या अलग हो सकती है। इसलिए पारंपरिक हस्तरेखा पद्धति में पूरी हथेली का अध्ययन करने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाता है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी हस्तरेखा शास्त्र और पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। हथेली की रेखाओं के आधार पर व्यक्तित्व, सफलता या भविष्य के बारे में किए जाने वाले दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए।