दिल्ली: जैतपुर इलाके में 38 वर्षीय बलवीर सिंह की हत्या के मामले का पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। इस मामले में पुलिस ने मृतक के जीजा राजेश यादव और उसके रिश्तेदार निलेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की वजह बलवीर की शराब पीने की आदत को लेकर होने वाला विवाद बताया जा रहा है।
जीजा ने रिश्तेदार के साथ मिलकर रची साजिश
पुलिस की जांच के अनुसार, राजेश यादव अपने साले बलवीर की शराब पीने की आदत से कथित तौर पर परेशान था। आरोप है कि इसी वजह से उसने रिश्तेदार और ट्रक ड्राइवर निलेश के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई।
शराब में मिलाने का आरोप
पुलिस का आरोप है कि बलवीर को शराब में नींद की गोलियां मिलाकर दी गईं। इसके बाद जब वह बेहोशी की हालत में पहुंच गया तो उस पर लोहे की रॉड से हमला किया गया।
हमले में गंभीर रूप से घायल बलवीर की मौत हो गई। घटना के बाद आरोपियों ने मामले को अलग दिशा देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की जांच में कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण सुराग मिले।
24 घंटे में खुला हत्या का राज
हत्या की सूचना मिलने के बाद जैतपुर थाना पुलिस ने जांच शुरू की। घटनास्थल से मिले सुरागों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने मृतक के करीबियों पर ध्यान केंद्रित किया।
जांच आगे बढ़ने पर राजेश यादव और निलेश की भूमिका सामने आने का पुलिस ने दावा किया। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अब हत्या की पूरी साजिश, इस्तेमाल की गई रॉड और नींद की गोलियों समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। दोनों आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।
नई दिल्ली: गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान वजन बढ़ना, थकान, पाचन संबंधी परेशानी और कब्ज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कई बार इन्हें सामान्य बदलाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन लगातार परेशानी रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
ऐसा ही एक मामला 34 वर्षीय एक महिला का सामने आया, जिनका डिलीवरी के बाद वजन बढ़ गया था और उन्हें थकान, ब्लोटिंग व कब्ज की शिकायत रहने लगी। जांच के बाद उन्हें फैटी लिवर का पता चला। इसके बाद उन्होंने अपनी स्नैकिंग आदतों और पूरी डाइट में बदलाव किया। उनकी डाइट में मखाना, भुना चना, बिना चीनी वाला ग्रीक योगर्ट, सीड्स और ताजे फल जैसे विकल्प शामिल हुए।
हालांकि, यह एक व्यक्तिगत अनुभव है और केवल इन खाद्य पदार्थों के सेवन से फैटी लिवर ठीक होने का दावा नहीं किया जा सकता। फैटी लिवर में वजन, शारीरिक गतिविधि, ब्लड शुगर, खानपान और अन्य मेटाबॉलिक कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
फैटी लिवर में डाइट क्यों है महत्वपूर्ण?
फैटी लिवर का संबंध कई बार अधिक वजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और असंतुलित खानपान जैसी स्थितियों से होता है। इसलिए डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना उपयोगी हो सकता है जिनमें फाइबर, प्रोटीन और पोषक तत्व अच्छी मात्रा में हों।
इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और वजन को स्वस्थ सीमा में रखना भी महत्वपूर्ण है।
1. भुना मखाना बना हेल्दी स्नैक
रात में भूख लगने पर तले-भुने या मीठे स्नैक्स खाने की आदत वजन बढ़ाने में योगदान दे सकती है। ऐसे में भुना हुआ मखाना अपेक्षाकृत हल्का स्नैक विकल्प हो सकता है।
मखाने में कार्बोहाइड्रेट के साथ कुछ प्रोटीन और फाइबर भी मिलता है। इसे कम तेल और कम नमक के साथ तैयार करके स्नैक के तौर पर लिया जा सकता है।
हालांकि, केवल मखाना खाने से फैटी लिवर कम होने की गारंटी नहीं है। इसकी मात्रा और पूरी डाइट को ध्यान में रखना जरूरी है।
2. भुना चना रख सकता है पेट भरा हुआ
पैकेज्ड नमकीन और तले हुए स्नैक्स की जगह भुना चना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं।
फाइबर युक्त भोजन वजन को नियंत्रित रखने और बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ में मदद कर सकता है, जो फैटी लिवर के प्रबंधन में महत्वपूर्ण है।
3. ग्रीक योगर्ट और सीड्स
शाम के समय बिना चीनी वाला ग्रीक योगर्ट, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है। ग्रीक योगर्ट प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकता है, जबकि चिया और फ्लैक्स सीड्स में फाइबर और हेल्दी फैट पाए जाते हैं।
कुछ डेयरी उत्पादों में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया भी हो सकते हैं, लेकिन हर ग्रीक योगर्ट प्रोबायोटिक हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए पैकेट पर दी गई जानकारी देखना बेहतर है।
4. पैकेज्ड मिठाइयों की जगह ताजे फल
मीठा खाने की इच्छा होने पर पैकेज्ड डेजर्ट, कुकीज और ज्यादा चीनी वाले स्नैक्स की जगह साबुत फल बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
सेब, अमरूद और बेरीज जैसे फलों में फाइबर और विभिन्न पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। साबुत फल खाने से जूस की तुलना में फाइबर भी मिलता है और अतिरिक्त शुगर का सेवन कम रखा जा सकता है।
5. चिप्स की जगह ह्यूमस और सब्जियां
चिप्स और अन्य अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह खीरा, गाजर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों को ह्यूमस के साथ लिया जा सकता है।
सब्जियों से फाइबर और ह्यूमस से प्लांट प्रोटीन व कुछ हेल्दी फैट मिल सकते हैं। हालांकि, ह्यूमस की मात्रा और उसमें मौजूद तेल व नमक को भी ध्यान में रखना चाहिए।
6. ओट्स और पीनट बटर
ओट्स में बीटा-ग्लूकान नामक घुलनशील फाइबर पाया जाता है। यह पेट भरा रखने और ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकता है।
ओट्स के साथ पीनट बटर लिया जा सकता है, लेकिन ऐसा पीनट बटर चुनना बेहतर है जिसमें अतिरिक्त चीनी और बहुत ज्यादा नमक न हो। कैलोरी अधिक होने के कारण इसकी मात्रा भी सीमित रखना जरूरी है।
डिलीवरी के बाद फैटी लिवर में किन बातों का रखें ध्यान?
फैटी लिवर को केवल किसी एक खाद्य पदार्थ से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। डाइट में बदलाव के साथ पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है।
डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के अनुसार संतुलित डाइट लें।
तले हुए और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करें।
मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ कम करें।
पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर वाली डाइट लें।
डॉक्टर की अनुमति के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि शुरू करें।
वजन ज्यादा है तो धीरे-धीरे स्वस्थ तरीके से वजन कम करने पर ध्यान दें।
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
एक जरूरी बात: डिलीवरी के बाद महिलाओं को बिना सलाह के बहुत कम कैलोरी वाली डाइट या तेजी से वजन घटाने वाली डाइट नहीं अपनानी चाहिए, खासकर अगर वे स्तनपान करा रही हों। इस स्थिति में पोषण की जरूरत अलग हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख एक व्यक्तिगत अनुभव और सामान्य पोषण संबंधी जानकारी पर आधारित है। मखाना, चना, सीड्स या किसी अन्य खाद्य पदार्थ को फैटी लिवर का इलाज न समझें। फैटी लिवर की पुष्टि होने पर डॉक्टर या योग्य डायटीशियन से व्यक्तिगत डाइट और उपचार संबंधी सलाह लें।
रूस के मशहूर स्टंटमैन येवगेनी चेबोटारेव एक बेहद खतरनाक कारनामे को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट में वह चलती हुई लीमोजीन कार की छत पर हेलिकॉप्टर रखकर उसे पहाड़ी से नीचे गिराते नजर आ रहे हैं। इस खतरनाक स्टंट में कार और हेलिकॉप्टर दोनों बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
कार की छत पर रखा था हेलिकॉप्टर
वायरल पोस्ट में एक लीमोजीन सड़क पर दिखाई देती है, जिसकी छत पर एक हेलिकॉप्टर रखा हुआ है। हेलिकॉप्टर का रोटर घूम रहा था और इंजन भी चालू नजर आ रहा था। इसके बाद येवगेनी चेबोटारेव कार की ड्राइविंग सीट पर बैठते हैं।
हेलिकॉप्टर के वजन और घूमते रोटर की वजह से कार असंतुलित होती दिखाई देती है। इसके बाद स्टंटमैन कार के एक्सीलरेटर को एक लकड़ी के टुकड़े की मदद से दबाकर छोड़ देते हैं। कार धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और वह खुद उससे छलांग लगाकर बाहर निकल जाते हैं।
कुछ ही सेकंड में खाई में जा गिरी कार
कार आगे बढ़ते हुए पहाड़ी के किनारे पहुंच जाती है और फिर हेलिकॉप्टर समेत नीचे गहरी खाई में गिर जाती है। जमीन से टकराने के बाद कार और हेलिकॉप्टर बुरी तरह टूट जाते हैं।
इस पूरे स्टंट का मकसद सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचना बताया जा रहा है। हालांकि, इस तरह के खतरनाक स्टंट में जान का गंभीर जोखिम भी रहता है।
कौन हैं येवगेनी चेबोटारेव?
येवगेनी चेबोटारेव रूस के चर्चित स्टंटमैन और डेयरडेविल के तौर पर जाने जाते हैं। वह सोशल मीडिया पर अपने खतरनाक और असामान्य स्टंट के लिए काफी चर्चित रहे हैं। उनके पोस्ट में अक्सर कारों और दूसरी बड़ी वस्तुओं से जुड़े जोखिम भरे कारनामे देखने को मिलते हैं।
लोगों ने बताया पैसे और जान दोनों की बर्बादी
स्टंट का पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया। एक यूजर ने सवाल उठाया कि सिर्फ लाइक्स और व्यूज के लिए आखिर लोग इतनी बड़ी जोखिम क्यों लेते हैं।
वहीं, कुछ लोगों ने करोड़ों की कीमत वाली मशीनरी को इस तरह नष्ट करने पर भी नाराजगी जताई। कई यूजर्स इस पूरे कारनामे को देखकर हैरान रह गए।
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि शुरू होने से पहले घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करना और वहां रखी पुरानी या खराब चीजों को हटाना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि साफ-सुथरे पूजा स्थल में पूजा करने से सकारात्मक वातावरण बना रहता है। ऐसे में नवरात्रि की शुरुआत से पहले मंदिर की सफाई करते समय इन चीजों को जरूर जांच लें।
कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर 2026 से माना जा रहा है।
खंडित मूर्तियां और तस्वीरें मंदिर में न रखें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर में देवी-देवताओं की टूटी या खंडित मूर्तियां और खराब तस्वीरें नहीं रखनी चाहिए। नवरात्रि से पहले मंदिर की सफाई करते समय ऐसी चीजों को सम्मानपूर्वक अलग कर दें। इनके विसर्जन या निस्तारण के लिए अपनी स्थानीय धार्मिक परंपरा का पालन करें।
सूखे और पुराने फूल-मालाएं हटा दें
पूजा में चढ़ाए गए फूल कुछ समय बाद सूख जाते हैं। इन्हें लंबे समय तक मंदिर में रखना उचित नहीं माना जाता। इसलिए नवरात्रि से पहले पुराने फूल, मालाएं और पत्तियां हटाकर मंदिर को अच्छी तरह साफ कर लें।
खराब हो चुकी पूजा सामग्री भी निकालें
अगर मंदिर में लंबे समय से रखे कलावा, जली हुई अगरबत्ती, पुराने कपूर के अवशेष या ऐसी दूसरी पूजा सामग्री है जिसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है या जो खराब हो चुकी है, तो सफाई के दौरान उसे अलग कर दें।
पुरानी और खराब चुनरी बदल दें
नवरात्रि में मां दुर्गा को नई चुनरी और वस्त्र अर्पित करने की परंपरा कई घरों में है। अगर मंदिर में रखी चुनरी या देवी-देवताओं के वस्त्र बहुत पुराने, मैले या खराब हो गए हैं, तो उन्हें सम्मानपूर्वक बदल दें। जो वस्त्र साफ और अच्छी स्थिति में हैं, उन्हें धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
टूटे हुए दीपक मंदिर से हटा दें
पूजा में इस्तेमाल होने वाले दीपक अगर टूट गए हैं या उनमें दरार आ गई है, तो उन्हें अलग कर दें। नवरात्रि के दौरान पूजा के लिए साफ और सही स्थिति वाले दीपक इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।
टूटी पूजा सामग्री और धार्मिक पुस्तकें जांचें
मंदिर में रखी पूजा की थाली, कलश, घंटी या अन्य वस्तुएं अगर टूट गई हैं तो उन्हें अलग कर दें। इसी तरह अगर कोई धार्मिक पुस्तक फट गई है या खराब हो चुकी है, तो उसे सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखें या स्थानीय परंपरा के अनुसार उसका उचित निस्तारण करें।
नवरात्रि से पहले ऐसे करें पूजा घर की सफाई
नवरात्रि शुरू होने से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। चौकी, मंदिर, देवी-देवताओं की मूर्तियां और पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को साफ करें। इसके बाद मंदिर को स्वच्छ तरीके से सजाएं और पूजा के लिए जरूरी सामग्री पहले से तैयार कर लें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए पूजा स्थल को साफ रखने के साथ-साथ पूजा के दौरान मन की शांति और श्रद्धा पर भी ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई बातें धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और लोक विश्वासों पर आधारित हैं। इनकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी नियम या परंपरा का पालन अपनी श्रद्धा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार करें।
अमृतसर के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मैड संधू की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। हत्याकांड की जांच के दौरान अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान परमिंदर काका उर्फ परमिंदर प्रसाद के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की भूमिका हत्या की वारदात में फायरिंग करने और इस्तेमाल की गई बाइक की व्यवस्था करने में बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, मैड संधू की 3 अक्टूबर को अमृतसर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह वारदात अमृतसर कैंटोनमेंट थाना क्षेत्र में हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और हत्याकांड से जुड़े आरोपियों तथा उनकी भूमिका की जानकारी जुटाई।
पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या की वारदात में परमिंदर काका की अहम भूमिका थी। आरोप है कि उसने मैड संधू पर गोली चलाई थी। इसके अलावा वारदात को अंजाम देने के लिए बाइक उपलब्ध कराने में भी उसकी भूमिका बताई गई है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि हत्या की साजिश में उसकी भूमिका कितनी थी और उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल थे।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस हत्याकांड की जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गोल्डी बरार से जुड़े गिरोह के एंगल से भी की जा रही है। पुलिस इसी कड़ी में आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की जांच कर रही है। गिरफ्तार किए गए परमिंदर काका से पूछताछ के जरिए पुलिस हत्या की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।
हत्या के बाद आरोपी ने अमृतसर से निकलकर पहले उदयपुर का रुख किया। इसके बाद वह उदयपुर से अहमदाबाद पहुंचा। अहमदाबाद पहुंचने के बाद क्राइम ब्रांच को उसकी मौजूदगी की जानकारी मिली और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने आरोपी को पंजाब पुलिस की कस्टडी में सौंप दिया है। अब पंजाब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां आरोपी से हत्या के पीछे की वजह, वारदात की तैयारी, बाइक की व्यवस्था और फायरिंग से जुड़ी जानकारी हासिल करने में जुटी हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मैड संधू की हत्या की योजना कब और कैसे बनाई गई थी। इसके साथ ही आरोपी के अन्य साथियों, उसके संपर्कों और वारदात के बाद फरार होने के रास्ते की भी जांच की जा रही है।
मैड संधू की हत्या के मामले में इस गिरफ्तारी को जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आरोपी के पकड़े जाने के बाद पुलिस को हत्याकांड की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है। अब पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: वायु प्रदूषण को आमतौर पर फेफड़ों और सांस से जुड़ी बीमारियों के लिए बड़ा जोखिम माना जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है। एक हालिया अध्ययन में वायु प्रदूषण और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध सामने आया है।
Kidney International Reports में प्रकाशित इस शोध में 12 हजार से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य और प्रदूषण के संपर्क का लंबे समय तक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि हवा में मौजूद PM2.5 के अधिक संपर्क का संबंध किडनी की फिल्टर करने की क्षमता में कमी से था। यह संबंध डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कुछ प्रमुख जोखिम कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी देखा गया।
दिल्ली और चेन्नई के लोगों पर हुई तुलना
अध्ययन में दिल्ली और चेन्नई जैसे अलग-अलग वायु प्रदूषण स्तर वाले शहरों के लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की किडनी की कार्यक्षमता को eGFR (estimated glomerular filtration rate) के जरिए आंका।
अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में PM2.5 का स्तर चेन्नई की तुलना में काफी अधिक था और दिल्ली के प्रतिभागियों में किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता अपेक्षाकृत कम पाई गई।
शोध में यह भी पाया गया कि PM2.5 के संपर्क में हर 5 μg/m³ की वृद्धि किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट से जुड़ी थी। हालांकि, ऐसे अध्ययन किसी संबंध को दिखाते हैं और अकेले यह साबित नहीं करते कि प्रदूषण ही हर व्यक्ति में किडनी की बीमारी का प्रत्यक्ष कारण है।
PM2.5 किडनी को कैसे प्रभावित कर सकता है?
PM2.5 बेहद छोटे प्रदूषण कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में इनके कारण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस जैसी प्रक्रियाएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से कई तरह की जैविक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिनका असर रक्त वाहिकाओं और शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ सकता है।
किडनी में बहुत महीन रक्त वाहिकाओं का जाल होता है और यह अंग लगातार रक्त को फिल्टर करता है। इसलिए लंबे समय तक होने वाली सूजन, रक्त वाहिकाओं को नुकसान और अन्य मेटाबॉलिक बदलाव किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करने में भूमिका निभा सकते हैं।
सिर्फ बुजुर्गों के लिए चिंता की बात नहीं
किडनी पर प्रदूषण के संभावित प्रभाव को केवल बुजुर्गों या पहले से किडनी की बीमारी वाले लोगों तक सीमित नहीं माना जा सकता। अध्ययन में अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों को शामिल किया गया था।
हालांकि, जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या किडनी की बीमारी है, उनमें किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले कई जोखिम एक साथ मौजूद हो सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रदूषण के साथ-साथ इन बीमारियों को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिसर्च?
भारत के कई बड़े शहरों में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। वहीं क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है।
ऐसे में प्रदूषण और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध को समझना महत्वपूर्ण है। यह शोध इस बात की ओर संकेत करता है कि खराब हवा का प्रभाव केवल सांस और फेफड़ों तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि लंबे समय में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदूषण के दिनों में किडनी और फेफड़ों का कैसे रखें ध्यान?
hello @letsblinkit@albinder i’m a regular blinkit user from past three years & every single day i spend roughly ₹800 on the app, which means at this point i have contributed more to blinkit’s growth than some employees. i order everything from groceries to things i could’ve…
सोशल मीडिया पर नौकरी मांगने का एक अनोखा तरीका चर्चा में है। आमतौर पर नौकरी के लिए लोग रिज्यूमे भेजते हैं, इंटरव्यू देते हैं और अपनी योग्यता बताते हैं, लेकिन एक शख्स ने अपनी नौकरी की दावेदारी के लिए Blinkit पर की गई अपनी शॉपिंग को ही आधार बना लिया। उसकी मजेदार अर्जी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग तरह-तरह के कमेंट कर इस मामले का खूब मजा ले रहे हैं।
3 साल से Blinkit का ग्राहक, रोज खर्च करता है करीब 800 रुपये
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शुभ नाम के एक यूजर ने Blinkit को टैग करते हुए अपनी बात रखी। यूजर के मुताबिक, वह पिछले करीब तीन साल से Blinkit का इस्तेमाल कर रहा है और रोजाना लगभग 800 रुपये तक का सामान ऑर्डर कर देता है।
उसने मजाकिया अंदाज में कहा कि कंपनी की ग्रोथ में उसका योगदान कुछ कर्मचारियों से भी ज्यादा हो सकता है। वह किराने के सामान से लेकर छोटी-छोटी जरूरत की चीजें भी ऐप के जरिए मंगाता है, जबकि इनमें से कई चीजें पास की दुकान से भी खरीदी जा सकती हैं।
अपनी आदत को ही बना दिया नौकरी की योग्यता
यूजर ने खुद को Blinkit का बेहद अनुभवी ग्राहक बताते हुए कहा कि उसे ऐप, प्रोडक्ट्स और डिलीवरी सिस्टम की अच्छी समझ है। इसके साथ ही उसने उस आदत का भी जिक्र किया, जिसमें एक सामान ऑर्डर करने के बाद लोग सोचते हैं कि ‘ये भी मंगवा लेते हैं’ और देखते ही देखते छोटा ऑर्डर बड़ा हो जाता है।
इसी मजाकिया तर्क के आधार पर उसने कंपनी से नौकरी देने की अपील कर दी। उसका कहना था कि उसे नौकरी पर रख लिया जाए, इससे पहले कि वह अपनी योग्यता साबित करने के चक्कर में Blinkit पर 800 रुपये और खर्च कर दे।
लोगों ने कहा- ग्राहक नहीं, सीधे इन्वेस्टर हो
यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने भी मजेदार प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। एक यूजर ने मजाक में कहा कि इस शख्स को नौकरी की जरूरत ही नहीं है, क्योंकि वह तो सीधे Blinkit का इन्वेस्टर बन चुका है।
वहीं, कुछ लोगों ने उसके अंदाज की तारीफ करते हुए कहा कि नौकरी मांगने के लिए रिज्यूमे की जगह अपनी शॉपिंग हिस्ट्री पेश करने का यह तरीका काफी अलग है।
फिलहाल यह पोस्ट सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है और Blinkit के एक नियमित ग्राहक की यह अनोखी नौकरी की अर्जी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और यूजर्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
नई दिल्ली: हथेली और कलाई के बीच दिखाई देने वाली रेखाओं को हस्तरेखा शास्त्र में मणिबंध रेखाएं कहा जाता है। आमतौर पर किसी व्यक्ति की कलाई पर एक, दो या तीन मणिबंध रेखाएं दिखाई दे सकती हैं। हस्तरेखा शास्त्र में इन रेखाओं को व्यक्ति के स्वास्थ्य, जीवनशैली, समृद्धि और भाग्य से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, इन रेखाओं की व्याख्या व्यक्ति की पूरी हथेली की बनावट और दूसरी रेखाओं के साथ मिलाकर की जाती है। आइए जानते हैं कि हस्तरेखा शास्त्र में एक, दो और तीन मणिबंध रेखाओं को लेकर क्या मान्यताएं हैं।
1 मणिबंध रेखा का क्या मतलब है?
अगर कलाई और हथेली के जोड़ पर एक मणिबंध रेखा स्पष्ट, गहरी और बिना किसी टूटाव के दिखाई देती है, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे शुभ संकेत माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी रेखा वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रह सकता है और वह लंबी उम्र प्राप्त कर सकता है।
वहीं, अगर एक ही मणिबंध रेखा कमजोर, टूटी हुई या जगह-जगह से कटी हुई दिखाई दे, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव से जोड़कर देखा जाता है।
2 मणिबंध रेखाएं हों तो क्या माना जाता है?
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार दो स्पष्ट मणिबंध रेखाएं संपन्नता, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में स्थिरता का संकेत मानी जाती हैं। ऐसी रेखाओं वाले लोगों के बारे में मान्यता है कि उम्र बढ़ने के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
इन लोगों को सामाजिक जीवन में सम्मान मिलने और समाज से जुड़े कार्यों में रुचि होने की बात भी कही जाती है। दो स्पष्ट मणिबंध रेखाओं को सामान्य तौर पर शुभ माना जाता है।
3 मणिबंध रेखाएं होने का क्या संकेत है?
कलाई पर तीन स्पष्ट और गहरी मणिबंध रेखाएं अपेक्षाकृत कम दिखाई देती हैं। हस्तरेखा शास्त्र में इन्हें विशेष शुभ संकेत माना गया है।
मान्यता के अनुसार, तीन स्पष्ट मणिबंध रेखाओं वाले लोगों को जीवन में भाग्य का अच्छा साथ मिल सकता है। ऐसे व्यक्ति समझदार, आत्मविश्वासी और परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभालने वाले माने जाते हैं। इनके जीवन में सफलता और आर्थिक उन्नति के अवसर आने की बात भी हस्तरेखा शास्त्र में कही गई है।
रेखा का स्पष्ट होना भी माना जाता है महत्वपूर्ण
मणिबंध रेखाओं की केवल संख्या ही नहीं, बल्कि उनका गहरा, सीधा, साफ और बिना टूटाव के होना भी हस्तरेखा शास्त्र में महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर रेखाएं बहुत हल्की, टूटी या अस्पष्ट हों तो उनकी व्याख्या अलग तरीके से की जाती है।
हालांकि, केवल मणिबंध रेखाओं को देखकर किसी व्यक्ति के भविष्य, स्वास्थ्य या आर्थिक स्थिति के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी हस्तरेखा शास्त्र और धार्मिक-लोक मान्यताओं पर आधारित है। इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं लेना चाहिए।
657 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच में अब एक कथित रिश्ते और आलीशान जीवनशैली से जुड़े वित्तीय लेनदेन की चर्चा सामने आई है। सीबीआई की जांच के मुताबिक, रिभव ऋषि की कथित डांसर गर्लफ्रेंड पर कुछ ही महीनों में लाखों रुपये खर्च किए गए। जांच में महंगे घर, विदेश यात्राओं, आलीशान होटलों और पार्टियों पर हुए खर्च का भी जिक्र है।
2025 में हुई थी पहली मुलाकात
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, रिभव ऋषि की महिला से मुलाकात मार्च-अप्रैल 2025 के आसपास हुई थी। इसके बाद 5 जुलाई 2025 को मुंबई के एक लग्जरी होटल में दोनों की मुलाकात हुई, जहां ऋषि ने कथित तौर पर महिला के सामने अपने प्रेम का इजहार किया।
महिला के बयान के अनुसार, ऋषि ने खुद को इवेंट प्लानर बताया था। उसने यह भी दावा किया था कि वह चावल के आयात-निर्यात के कारोबार से जुड़ा है और IDFC First Bank में ब्रांच मैनेजर के तौर पर काम करता है।
‘तुम्हारा और परिवार का ख्याल रखूंगा’
जांच के दौरान महिला ने कथित तौर पर बताया कि ऋषि ने उससे और उसके परिवार का ख्याल रखने की बात कही थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और महिला के मुताबिक, उसके खर्चों के लिए बड़ी रकम उपलब्ध कराई जाने लगी।
6 महीने में 56 लाख रुपये देने का दावा
सीबीआई की जांच के मुताबिक, करीब छह महीने की अवधि में महिला को लगभग 56 लाख रुपये दिए गए। यानी औसतन हर महीने कई लाख रुपये के खर्च का दावा सामने आया है।
जांच में दिल्ली स्थित एक महंगे घर से जुड़े खर्च का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा पार्टियों, महंगे होटलों और विदेश यात्राओं पर खर्च किए जाने की बात भी जांच का हिस्सा है।
चंडीगढ़ की पार्टियों और विदेश यात्राओं का जिक्र
जांच में चंडीगढ़ में आयोजित पार्टियों का भी उल्लेख सामने आया है। इन आयोजनों में डांसरों पर पैसे खर्च किए जाने की बात कही गई है।
महिला के साथ विदेश यात्राओं और महंगे होटलों में ठहरने का भी दावा जांच में सामने आया है। दुबई के बुर्ज अल अरब जैसे आलीशान होटल में ठहरने और वहां संपत्ति लेने की योजना से जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है।
बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन का आरोप
सीबीआई का आरोप है कि रिभव ऋषि ने कई सरकारी खातों से जुड़े कम से कम 25 कथित फर्जी डेबिट ट्रांजैक्शन को मंजूरी दी। इन लेनदेन की कुल रकम करीब 187.35 करोड़ रुपये बताई गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, ऋषि से जुड़े खातों में भी करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। इन्हीं वित्तीय गतिविधियों को कथित बैंक घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आलीशान जीवनशैली की जांच में कई कड़ियां
सीबीआई की जांच में सामने आए बयानों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर महंगे होटल, विदेश यात्राएं, पार्टियां, संपत्ति और निजी खर्चों से जुड़ी कई कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।
हालांकि, जांच में सामने आए आरोप अभी जांच एजेंसी के दावों और उपलब्ध बयानों पर आधारित हैं। मामले में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में आरोपों और सबूतों की जांच के बाद ही तय होगी।
नई दिल्ली: गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में पथरी या दूसरी गंभीर परेशानी होने पर कई मरीजों को इसे निकालने की सलाह दी जाती है। इस सर्जरी को मेडिकल भाषा में कोलेसिस्टेक्टॉमी (Cholecystectomy) कहा जाता है। सर्जरी के बाद ज्यादातर लोग सामान्य जीवन जीते हैं, लेकिन कुछ लोगों को कुछ समय तक ब्लोटिंग, अपच, ढीला मल या तला-भुना खाना खाने के बाद पेट में असहजता जैसी शिकायत हो सकती है।
ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या गॉल ब्लैडर निकलवाने से फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है? विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल गॉल ब्लैडर की सर्जरी को फैटी लिवर का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, कुछ शोधों में पित्ताशय हटाने और फैटी लिवर के बीच संभावित संबंध के संकेत जरूर मिले हैं।
गॉल ब्लैडर कब निकाला जाता है?
गॉल ब्लैडर को पित्ताशय भी कहा जाता है। इसमें पित्त यानी बाइल जमा रहता है। गॉल ब्लैडर में पथरी, बार-बार सूजन, पित्त की नली में पथरी फंसना या कुछ अन्य स्थितियों में डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
हालांकि हर मरीज में गॉल ब्लैडर निकालने की जरूरत नहीं होती। सर्जरी का फैसला बीमारी की गंभीरता, लक्षणों और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाता है।
गॉल ब्लैडर निकलने के बाद शरीर में क्या बदलता है?
गॉल ब्लैडर खुद बाइल नहीं बनाता। बाइल का निर्माण लिवर करता है और गॉल ब्लैडर इसे जमा करके जरूरत के समय आंत में पहुंचाने में मदद करता है।
खासकर वसा वाला भोजन खाने के दौरान गॉल ब्लैडर सिकुड़कर बाइल को छोटी आंत में छोड़ता है। यह वसा के पाचन और फैट में घुलने वाले विटामिनों के अवशोषण में भूमिका निभाता है।
गॉल ब्लैडर निकाल दिए जाने के बाद भी लिवर बाइल बनाता रहता है। फर्क यह होता है कि बाइल अब गॉल ब्लैडर में जमा नहीं होता और छोटी मात्रा में लगातार आंत तक पहुंचता रहता है।
अधिकांश लोग इस बदलाव के साथ आसानी से सामंजस्य बैठा लेते हैं। हालांकि कुछ लोगों को शुरुआत में खासकर ज्यादा तला-भुना या वसायुक्त भोजन खाने के बाद पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।
क्या गॉल ब्लैडर निकलने के बाद फैट पचाने में परेशानी होती है?
कुछ मरीजों में सर्जरी के बाद भारी या ज्यादा वसायुक्त भोजन पचाने में परेशानी महसूस हो सकती है। इसके कारण ब्लोटिंग, गैस, अपच, पेट में असहजता या ढीला मल जैसी शिकायत हो सकती है।
आमतौर पर शरीर समय के साथ बाइल के नए प्रवाह के अनुसार खुद को ढाल लेता है और ये लक्षण कम हो सकते हैं। हर व्यक्ति में इसका अनुभव अलग हो सकता है।
क्या गॉल ब्लैडर हटाने से फैटी लिवर हो जाता है?
सिर्फ गॉल ब्लैडर की सर्जरी को फैटी लिवर का सीधा कारण नहीं माना जाता।
फैटी लिवर के पीछे आमतौर पर कई मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण होते हैं। इनमें मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई कोलेस्ट्रॉल, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी प्रमुख हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई जोखिम कारक गॉल ब्लैडर में पथरी और फैटी लिवर दोनों से जुड़े हो सकते हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को सर्जरी के बाद फैटी लिवर का पता चलता है तो यह जरूरी नहीं कि इसकी वजह सर्जरी ही हो।
फिर गॉल ब्लैडर और फैटी लिवर के बीच संबंध की बात क्यों होती है?
वैज्ञानिकों ने बाइल के प्रवाह, गट माइक्रोबायोम और मेटाबॉलिज्म के बीच संबंध पर भी अध्ययन किया है। गॉल ब्लैडर हटने के बाद बाइल के आंत तक पहुंचने का तरीका बदल जाता है। इससे कुछ लोगों में आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन में बदलाव हो सकता है।
बाइल एसिड केवल वसा के पाचन में ही भूमिका नहीं निभाते, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। इनमें ग्लूकोज और फैट मेटाबॉलिज्म जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।