बिजनौर, उत्तर प्रदेश: जिले में शराब को लेकर शुरू हुआ विवाद कुछ ही देर में गंभीर वारदात में बदल गया। आरोप है कि बहस के बाद एक युवक ने तेज रफ्तार ट्रैक्टर सड़क किनारे खड़े लोगों पर चढ़ा दिया। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला और आरोपी चालक भी घायल हुए हैं। घटना के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
शराब के ठेके पर हुई थी बहस
बताया जा रहा है कि दत्तीयाना गांव निवासी वीरेंद्र और जमालुद्दीनपुर निवासी सतवीर के बीच शराब के ठेके पर किसी बात को लेकर बहस हुई थी। शुरुआती विवाद के बाद मामला शांत हो गया और कुछ लोग सड़क किनारे खड़े होकर आपस में बातचीत करने लगे।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान वीरेंद्र कथित तौर पर तेज रफ्तार ट्रैक्टर लेकर वहां पहुंचा और सड़क किनारे मौजूद लोगों को टक्कर मार दी।
दो लोगों की मौके पर मौत
ट्रैक्टर की चपेट में आने से उदयवीर और बाबूराम की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं महेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें इलाज के लिए बिजनौर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई।
हादसे में एक महिला भी घायल हुई है, जिसका इलाज चांदपुर में चल रहा है। वहीं ट्रैक्टर पलटने के कारण आरोपी वीरेंद्र भी घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
टक्कर से बिजली का खंभा भी टूटा
ट्रैक्टर की टक्कर इतनी जोरदार थी कि सड़क किनारे लगा बिजली का खंभा भी क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और राहत-बचाव के साथ जांच शुरू की।
तीन मौतों के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
एक साथ तीन लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोगों ने आरोपी के घर पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा किया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
पुलिस ने लोगों को समझाकर स्थिति संभाली और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामला दो अलग-अलग गांवों से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात किया है।
पुलिस अब शराब के ठेके पर हुए शुरुआती विवाद से लेकर ट्रैक्टर की टक्कर तक पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। घटना में शामिल लोगों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
नई दिल्ली: हार्ट अटैक को अक्सर उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन दिल की बीमारी का जोखिम सिर्फ उम्र पर निर्भर नहीं करता। धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, खराब कोलेस्ट्रॉल, पेट के आसपास बढ़ती चर्बी और लंबे समय तक रहने वाला तनाव जैसे कई कारक हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
INTERHEART अध्ययन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हार्ट अटैक से जुड़े ऐसे जोखिम कारकों का अध्ययन किया गया था, जिनमें से कई को लाइफस्टाइल और उचित चिकित्सा देखभाल के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।
INTERHEART रिसर्च में क्या सामने आया?
INTERHEART एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय केस-कंट्रोल स्टडी थी, जिसमें 52 देशों के प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य यह समझना था कि किन बदले जा सकने वाले जोखिम कारकों का संबंध हार्ट अटैक यानी मायोकार्डियल इन्फार्क्शन से है।
इस अध्ययन में 15,000 से ज्यादा हार्ट अटैक के मरीजों और करीब 14,800 कंट्रोल प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। यह अध्ययन 2004 में The Lancet में प्रकाशित हुआ था।
रिसर्च में सामने आए प्रमुख जोखिम कारकों में ये शामिल हैं:
1. धूम्रपान और तंबाकू
सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। धूम्रपान छोड़ना हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
2. खून में असामान्य लिपिड्स
खून में मौजूद कुछ लिपिड्स का असंतुलन हार्ट अटैक के जोखिम से जुड़ा पाया गया। INTERHEART अध्ययन में ApoB/ApoA1 ratio का मायोकार्डियल इन्फार्क्शन के साथ मजबूत संबंध देखा गया था।
इसलिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार कोलेस्ट्रॉल और अन्य लिपिड्स की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
3. हाई ब्लड प्रेशर
लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन दिल और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक हाई बीपी रहने से हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।
ब्लड प्रेशर की नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा व लाइफस्टाइल बदलावों का पालन करना जरूरी है।
4. डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर
लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा रहने से रक्त वाहिकाओं और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में हृदय रोग का जोखिम सामान्य आबादी की तुलना में अधिक हो सकता है।
इसलिए ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण है।
5. पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी
कमर और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ी हो सकती है, जो आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।
संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि वजन तथा कमर की चर्बी को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।
6. तनाव और मनोवैज्ञानिक कारक
लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। INTERHEART अध्ययन में मनोवैज्ञानिक कारकों का संबंध हार्ट अटैक के जोखिम से देखा गया था।
तनाव को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, योग या ध्यान जैसी स्वस्थ आदतें मददगार हो सकती हैं।
7. खानपान की खराब आदतें
दिल को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड और असंतुलित भोजन का सेवन सीमित करना बेहतर है।
सिर्फ किसी एक खाद्य पदार्थ को खाने से हार्ट अटैक का खतरा खत्म नहीं होता। पूरे
मुंबई: नेहरू नगर इलाके की एक बिल्डिंग में जन्मदिन की पार्टी के बाद घर लौट रहे 14 लोग उस समय दहशत में आ गए, जब लिफ्ट अचानक तेजी से नीचे गिरने लगी। बताया जा रहा है कि लिफ्ट करीब छह मंजिल नीचे चली गई और ग्राउंड फ्लोर से कुछ पहले अचानक रुक गई। हादसे के बाद लिफ्ट के अंदर चीख-पुकार मच गई।
घटना नेहरू नगर स्थित ‘मास मेट्रोपोलिस’ बिल्डिंग की बताई जा रही है। 14वीं मंजिल पर जन्मदिन की पार्टी के बाद रिश्तेदार और मेहमान नीचे जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुए थे। शुरुआत में लिफ्ट सामान्य तरीके से नीचे आ रही थी, लेकिन छठी मंजिल के आसपास अचानक तेज झटका लगा और लिफ्ट बेकाबू होकर नीचे की ओर जाने लगी।
अचानक नीचे गिरने लगी लिफ्ट
लिफ्ट के तेजी से नीचे जाने से उसके अंदर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही सेकंड में छह मंजिल नीचे जाने के बाद लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर से पहले रुक गई। अचानक हुए इस हादसे में अंदर मौजूद लोग बुरी तरह घबरा गए।
लिफ्ट रुकने के बाद भी उनकी मुश्किल खत्म नहीं हुई। दरवाजे नहीं खुल रहे थे और सभी लोग अंदर ही फंसे हुए थे। घबराए लोगों ने इमरजेंसी अलार्म बजाया, जिसके बाद बिल्डिंग में मौजूद लोगों को घटना की जानकारी हुई।
पुलिस और दमकल विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू
बाहर मौजूद लोगों ने लिफ्ट के दरवाजे खोलने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। स्थिति गंभीर देखते हुए पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई।
रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और कटर तथा हाइड्रोलिक जैक की मदद से लिफ्ट को खोलने का काम शुरू किया। अंदर फंसे लोगों को करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
लगातार प्रयास के बाद दमकल कर्मियों ने लिफ्ट के हिस्से को काटकर अंदर फंसे सभी 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इनमें चार बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
तीन घंटे तक दहशत में रहे लोग
लिफ्ट में लंबे समय तक फंसे रहने के कारण कई लोग काफी घबरा गए थे। बाहर निकलने के बाद भी उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था। राहत की बात रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई।
ओवरलोडिंग या तकनीकी खराबी, जांच जारी
हादसे के बाद अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लिफ्ट में 14 लोगों के सवार होने से उसकी निर्धारित क्षमता तो नहीं बढ़ी थी। इसके अलावा लिफ्ट के मेंटेनेंस, तकनीकी स्थिति, सुरक्षा ऑडिट और किसी संभावित खराबी की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी देख रही है कि लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था या नहीं। फिलहाल हादसे की सही वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
नई दिल्ली: वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि कुछ शुभ वस्तुओं को सही तरीके से घर में रखने से सकारात्मक माहौल बना रह सकता है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। आर्थिक स्थिति और करियर से जुड़ी तरक्की के लिए भी कुछ वस्तुओं को शुभ माना गया है।
हालांकि, इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के तौर पर ही देखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी पांच चीजों के बारे में जिन्हें वास्तु और ज्योतिष में शुभ माना जाता है।
1. चांदी का सिक्का
चांदी को धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में शुभ धातु माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में चांदी का सिक्का रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
इसे पूजा स्थल या तिजोरी में रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता में चांदी का संबंध माता लक्ष्मी और चंद्रमा से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, इससे धन बढ़ने की कोई निश्चित गारंटी नहीं है।
2. गुलाब का पौधा
गुलाब को सुंदरता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसका संबंध माता लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है। वास्तु के अनुसार घर की बालकनी, छत या उपयुक्त स्थान पर गुलाब का पौधा रखना शुभ माना जाता है।
ध्यान रखें कि पौधा स्वस्थ और हरा-भरा रहे। सूखे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में रखना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
3. धातु का कछुआ
वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी मान्यताओं में कछुए को स्थिरता, धैर्य और दीर्घकालिक प्रगति का प्रतीक माना जाता है। पीतल या चांदी जैसे धातु से बना कछुआ घर में रखना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि इसे सही स्थान पर रखने से घर के वातावरण में स्थिरता और आपसी सामंजस्य बना रह सकता है। इसे करियर में प्रगति से भी जोड़कर देखा जाता है।
4. हल्दी की गांठ
हल्दी का धार्मिक महत्व भारतीय परंपरा में काफी पुराना है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसका संबंध गुरु ग्रह और भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है।
घर के पूजा स्थल में हल्दी की गांठ रखना शुभ माना जाता है। गुरुवार के दिन हल्दी से जुड़े धार्मिक उपाय करने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार इससे सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रह सकती है।
5. कौड़ियां
कौड़ियों को भी माता लक्ष्मी और धन-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पांच कौड़ियों को पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी के पास रखना या साफ स्थान पर सुरक्षित रखना शुभ माना जाता है।
कुछ लोग इन्हें अपनी तिजोरी में भी रखते हैं। माना जाता है कि इससे घर में धन की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
सिर्फ उपायों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं
वास्तु से जुड़े इन उपायों को आस्था के अनुसार अपनाया जा सकता है, लेकिन आर्थिक मजबूती और करियर की सफलता के लिए मेहनत, सही वित्तीय योजना, बचत, कौशल विकास और सोच-समझकर लिए गए फैसले भी महत्वपूर्ण हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई बातें वास्तु, ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें आर्थिक लाभ या करियर में सफलता की निश्चित गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
आगरा, उत्तर प्रदेश: 26 वर्षीय विशाखा के लापता होने के आठ दिन बाद उसका शव इटावा में यमुना किनारे एक बोरे से बरामद होने के बाद मामला गंभीर हो गया है। पुलिस ने इस मामले में फतेहाबाद तहसील में तैनात लेखपाल शिवजीत भदौरिया को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, विशाखा और शिवजीत के बीच कथित तौर पर प्रेम संबंध थे और दोनों के बीच शादी को लेकर विवाद चल रहा था।
29 सितंबर को घर से निकली थी विशाखा
विशाखा आगरा के एमएम गेट क्षेत्र के नूरी दरवाजा इलाके में रहती थी और BTC की पढ़ाई कर रही थी। वह आगे सुपर TET की तैयारी भी कर रही थी।
29 सितंबर को वह घर से निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल समेत अन्य जानकारियों की जांच की।
जांच में लेखपाल का नाम सामने आया
पुलिस की जांच के दौरान फतेहाबाद तहसील में तैनात लेखपाल शिवजीत भदौरिया का नाम सामने आया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में शिवजीत ने विशाखा के साथ लंबे समय से संबंध होने की बात स्वीकार की। पुलिस के मुताबिक, उसने विशाखा से शादी करने का वादा किया था, लेकिन इसी साल मई में उसने दूसरी जगह शादी कर ली। इसके बाद दोनों के बीच शादी को लेकर विवाद होने लगा।
30 सितंबर को क्या हुआ?
पुलिस के मुताबिक, शिवजीत ने पूछताछ में दावा किया कि 30 सितंबर को विशाखा उसके कमरे पर आई थी। दोनों के बीच शादी को लेकर बहस हुई। आरोपी के कथित बयान के अनुसार, इसी दौरान विशाखा ने पंखे से लटककर जान दे दी।
हालांकि, पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर युवती की मौत कमरे में हुई थी तो उसका शव इटावा स्थित यमुना किनारे कैसे पहुंचा।
आरोपी ने शव को बोरे में रखने की बात कही
पुलिस के मुताबिक, शिवजीत ने दावा किया कि विशाखा की मौत के बाद वह घबरा गया था। इसके बाद उसने शव को कार में रखा और आगरा से बाह की ओर चला गया। बाद में इटावा क्षेत्र में पहुंचकर शव को बोरे में डालकर यमुना में फेंकने की बात आरोपी ने कही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह आरोपी का कथित बयान है। विशाखा की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आठ दिन बाद यमुना किनारे मिला शव
इटावा के बढ़पुरा थाना क्षेत्र में मिहौली गांव के पास मंगलवार शाम ग्रामीणों ने यमुना किनारे एक बोरा पड़ा देखा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बोरे से महिला का शव बरामद किया।
पहचान की प्रक्रिया के बाद शव की पहचान आगरा से लापता विशाखा के रूप में हुई। इसके बाद आगरा पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई।
परिवार ने हत्या का आरोप लगाया
विशाखा के पिता विजय ओझा ने पुलिस के सामने आरोपी के बयान से अलग आशंका जताई है। परिवार का आरोप है कि विशाखा की हत्या की गई और इसके बाद शव को यमुना में फेंका गया।
परिवार ने दोनों परिवारों के बीच वर्ष 2017 से कथित रंजिश होने की बात भी पुलिस को बताई है और इसी विवाद को घटना से जोड़कर जांच की मांग की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पुलिस ने लेखपाल शिवजीत भदौरिया को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब घटनास्थल, कार, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से युवती की मौत की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना में आरोपी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
फिलहाल इस मामले में आरोपी की ओर से आत्महत्या का दावा और परिवार की ओर से हत्या की आशंका सामने आई है। मौत की वास्तविक वजह और पूरे घटनाक्रम का पता पुलिस जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा।
नई दिल्ली: सहजन यानी मोरिंगा को भारतीय खानपान में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसकी फलियों के साथ-साथ पत्तियों का भी सेवन किया जाता है। सहजन की पत्तियों में कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन ए और कई एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। इसी वजह से इसे पोषक आहार का हिस्सा माना जाता है।
हालांकि, सहजन की पत्तियों को किसी बीमारी का इलाज समझना सही नहीं है। इनके कई स्वास्थ्य लाभों को लेकर आयुर्वेदिक मान्यताएं हैं और कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भी संभावित फायदे सामने आए हैं, लेकिन हर दावे के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
सहजन की पत्तियों में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
सहजन की पत्तियों में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शामिल हैं। संतुलित डाइट में इन्हें शामिल करने से भोजन की पोषण गुणवत्ता बढ़ सकती है।
सहजन की पत्तियों को सब्जी, सूप या अन्य व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। इन्हें सुखाकर पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
आयुर्वेद में सहजन की तासीर कैसी मानी जाती है?
आयुर्वेदिक परंपरा में सहजन को लघु, रूक्ष और तीक्ष्ण गुणों वाला तथा गर्म तासीर का माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह वात और कफ को संतुलित करने में मदद कर सकता है, जबकि अधिक सेवन से कुछ लोगों में पित्त से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से शरीर में ज्यादा गर्मी, जलन या ऐसी ही समस्या रहती है, तो उसे इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।
पाचन के लिए सहजन की पत्तियां
आयुर्वेद में सहजन की पत्तियों को पाचन और भूख से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना गया है। इनमें मौजूद फाइबर भी पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकता है।
हालांकि, पेट के कीड़ों या किसी पाचन संबंधी बीमारी का इलाज केवल सहजन के सेवन से किया जा सकता है, ऐसा मानना सही नहीं है। ऐसी समस्या होने पर उचित जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ में संभावित फायदा
सहजन की पत्तियां कम कैलोरी वाले पोषक खाद्य पदार्थों में शामिल की जा सकती हैं। इनमें मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं।
कुछ शुरुआती शोध मोरिंगा के सेवन और ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल या शरीर के मेटाबॉलिज्म से जुड़े संभावित प्रभावों की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इसे वजन घटाने या कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा नहीं माना जा सकता।
जोड़ों के लिए भी किया जाता है इस्तेमाल
आयुर्वेदिक परंपरा में सहजन की पत्तियों का इस्तेमाल जोड़ों से जुड़ी परेशानी और सूजन में भी किया जाता रहा है। पत्तियों का लेप बाहरी रूप से लगाने की परंपरा भी कुछ जगहों पर मिलती है।
लेकिन गठिया या लंबे समय से होने वाले जोड़ों के दर्द में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से कारण की जांच कराना जरूरी है।
सहजन पाउडर का सेवन कैसे करें?
अगर आप सहजन के पत्तों का पाउडर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसकी मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और डाइट पर निर्भर कर सकती है। किसी एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार इसे कम मात्रा से शुरू किया जा सकता है।
इसे गुनगुने पानी में मिलाकर लिया जाता है। इसके अलावा कुछ लोग इसे छाछ या भोजन में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं।
एक साथ ज्यादा मात्रा में सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे कुछ लोगों को पेट संबंधी परेशानी या जलन हो सकती है।
किन लोगों को सहजन के सेवन में सावधानी रखनी चाहिए?
सहजन की पत्तियों को सामान्य भोजन की मात्रा में लेना ज्यादातर लोगों के लिए अलग बात है, लेकिन पाउडर, अर्क या सप्लीमेंट की अधिक मात्रा लेने से पहले सावधानी जरूरी है।
खास तौर पर:
गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना सहजन के सप्लीमेंट या अर्क का सेवन नहीं करना चाहिए।
स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी अधिक मात्रा में सेवन से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
बच्चों को पाउडर या सप्लीमेंट देने से पहले डॉक्टर से पूछना बेहतर है।
जो लोग नियमित रूप से दवाएं लेते हैं, उन्हें सहजन के सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
अत्यधिक सेवन से कुछ लोगों में पेट की परेशानी, जलन या अन्य असहजता हो सकती है।
सहजन को डाइट में कैसे शामिल करें?
सहजन की पत्तियों को रोजाना किसी बीमारी के इलाज के उद्देश्य से लेने के बजाय संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। इन्हें सब्जी, दाल या सूप में शामिल करना एक आसान तरीका है।
याद रखें कि किसी एक खाद्य पदार्थ को सुपरफूड मानकर अत्यधिक मात्रा में खाना जरूरी नहीं है। शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व संतुलित और विविध आहार से मिलते हैं।
डिस्क्लेमर: सहजन की पत्तियों और पाउडर से जुड़े कई स्वास्थ्य लाभ आयुर्वेदिक मान्यताओं और शुरुआती या सीमित वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित हैं। इन्हें किसी बीमारी के इलाज या डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का विकल्प न मानें। गर्भावस्था, स्तनपान, बच्चों, किसी गंभीर बीमारी या नियमित दवाओं के सेवन की स्थिति में सहजन का पाउडर, अर्क या सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की हालिया राजनीतिक गतिविधियों में अचानक कार्रवाई, औचक धरना और छोटे समूह के साथ विरोध दर्ज कराने की रणनीति चर्चा में है। कई मौकों पर वह बिना लंबे कार्यक्रम या बड़े जमावड़े के अचानक किसी मुद्दे पर सक्रिय होते नजर आए हैं। कांग्रेस की राजनीति में इसे सरकार के सामने राहुल गांधी की अलग और आक्रामक राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
कभी अचानक धरने पर बैठना, कभी पुलिस थाने की ओर बढ़ना और कभी बिना पहले से बड़े स्तर पर घोषणा किए किसी जगह पहुंच जाना—राहुल गांधी की राजनीति में इस तरह के कदमों की चर्चा बढ़ी है। उनके इन कदमों में एक बात समान दिखाई देती है कि बड़े प्रदर्शन के बजाय सीमित लोगों के साथ सीधे मौके पर पहुंचकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जाती है।
अचानक एक्शन को बनाया रणनीति का हिस्सा
राहुल गांधी की यह शैली पूरी तरह नई नहीं है। वर्ष 2011 में उत्तर प्रदेश के भट्टा-पारसौल में किसानों के आंदोलन के दौरान भी वह अचानक वहां पहुंचे थे। उस समय उनके इस कदम ने काफी राजनीतिक सुर्खियां बटोरी थीं।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उनकी सड़क और जमीनी राजनीति में ऐसे औचक कदमों की आवृत्ति बढ़ी है। उनका फोकस कई बार बड़े कार्यक्रम के बजाय सीधे उस जगह पहुंचने पर दिखाई देता है, जहां कोई राजनीतिक या सामाजिक मुद्दा गर्म हो।
मार्शल आर्ट से राजनीति तक कनेक्शन
राहुल गांधी लंबे समय से मार्शल आर्ट का अभ्यास करते रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने यात्रियों के साथ मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग से जुड़े अभ्यास किए थे।
राहुल गांधी कई मौकों पर यह भी कह चुके हैं कि मार्शल आर्ट ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में संतुलन और प्रतिक्रिया को लेकर अलग नजरिया दिया है। उनकी राजनीतिक शैली को देखने वाले कुछ लोग उनके इस प्रशिक्षण को उनके आत्मविश्वास और आक्रामक राजनीतिक तेवर से जोड़कर देखते हैं।
धरना और सड़क की राजनीति में फिटनेस भी अहम
सड़क पर लंबे समय तक रहना, लगातार यात्रा करना और धरने जैसे राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहना शारीरिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। राहुल गांधी अपनी फिटनेस को लेकर भी सार्वजनिक रूप से बात करते रहे हैं और नियमित कसरत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बताते हैं।
हालांकि, उनकी राजनीतिक रणनीति को केवल फिटनेस या मार्शल आर्ट से जोड़कर देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे मुद्दे का चयन, राजनीतिक समय, संगठनात्मक रणनीति और जनता तक संदेश पहुंचाने की कोशिश भी महत्वपूर्ण होती है।
‘अड़ियल तेवर’ या सोची-समझी रणनीति?
हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में राहुल गांधी कई बार सरकार के खिलाफ सीधे मोर्चे पर उतरते दिखाई दिए हैं। धरने से लेकर पुलिस कार्रवाई का सामना करने और किसी मुद्दे पर मौके पर डटे रहने तक, उनकी शैली में टकराव का संदेश स्पष्ट नजर आता है।
कांग्रेस के भीतर इसे सरकार पर दबाव बनाने और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय नेतृत्व की छवि मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है। वहीं राजनीतिक विरोधी इसे आक्रामक या टकराव वाली राजनीति के तौर पर पेश करते हैं।
राहुल गांधी के समर्थकों का तर्क रहा है कि वह कई बार राजनीतिक नफा-नुकसान की गणना से ज्यादा अपने मुद्दे पर टिके रहने को प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि उनकी मौजूदा राजनीति में अचानक फैसले और मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की शैली को खास तौर पर नोटिस किया जा रहा है।
‘ब्रैंड मोदी’ के सामने अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश?
राष्ट्रीय राजनीति में राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबे समय से स्थापित राजनीतिक छवि है। ऐसे में कांग्रेस की रणनीति में राहुल गांधी को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करने की कोशिश दिखाई देती है, जो सत्ता के स्थापित तौर-तरीकों से अलग सड़क पर उतरकर सीधे संघर्ष करने वाली राजनीति करता है।
एक ओर मोदी की स्थापित और केंद्रीय नेतृत्व वाली राजनीतिक शैली है, तो दूसरी ओर राहुल गांधी की मौजूदा रणनीति में सड़क पर उतरना, अचानक कार्रवाई करना और राजनीतिक टकराव को स्वीकार करना प्रमुखता से दिखाई देता है।
आने वाले समय में यह रणनीति राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए कितना राजनीतिक लाभ लेकर आती है, यह चुनावी राजनीति और जनता की प्रतिक्रिया से तय होगा। फिलहाल ‘गुरिल्ला पॉलिटिक्स’ की चर्चा इस बात का संकेत है कि राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में अचानक और सीधे एक्शन को एक अलग पहचान के तौर पर स्थापित करने की कोशिश तेज हुई है।
नई दिल्ली: घर की अलग-अलग दिशाओं को वास्तु और फेंगशुई में अलग-अलग ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। फेंगशुई की मान्यताओं में दक्षिण-पूर्व दिशा को घर का Money Corner यानी धन क्षेत्र माना जाता है। कहा जाता है कि इस हिस्से को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। वहीं, यहां अव्यवस्था या खराब सामान रखने को आर्थिक रुकावटों से जोड़कर देखा जाता है।
क्या होता है Money Corner?
फेंगशुई एक प्राचीन चीनी परंपरा है, जिसमें घर और आसपास के वातावरण में ऊर्जा के संतुलन को महत्व दिया जाता है। इसके अनुसार घर का दक्षिण-पूर्व हिस्सा धन, संपन्नता और आर्थिक विकास से जुड़ा माना जाता है। इसी वजह से इसे Wealth Area या Money Corner कहा जाता है।
दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें हरे पौधे
फेंगशुई मान्यताओं के अनुसार इस हिस्से में हरे-भरे पौधे रखना शुभ माना जाता है। जेड प्लांट, मनी प्लांट और लकी बैम्बू जैसे पौधों को इस दिशा के लिए उपयुक्त बताया जाता है।
हालांकि पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल भी जरूरी है। सूखे या मुरझाए पौधों को घर में लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। उन्हें हटाकर स्वस्थ पौधा रखना बेहतर माना जाता है।
पानी से जुड़ी चीजों को भी माना जाता है शुभ
फेंगशुई में पानी को ऊर्जा और प्रवाह का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से दक्षिण-पूर्व दिशा में छोटा वॉटर फाउंटेन रखने की सलाह कुछ फेंगशुई मान्यताओं में दी जाती है।
मान्यता है कि फाउंटेन का पानी घर के अंदर की ओर बहना चाहिए। हालांकि इसे आर्थिक लाभ की गारंटी नहीं माना जा सकता।
Money Corner को अंधेरा न रखें
फेंगशुई के अनुसार घर का धन क्षेत्र साफ और पर्याप्त रोशनी वाला होना चाहिए। इस हिस्से में जरूरत से ज्यादा अंधेरा या सामान का ढेर रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
जरूरत हो तो यहां हल्की रोशनी वाला लैंप लगाया जा सकता है। साथ ही दक्षिण-पूर्व हिस्से को नियमित रूप से साफ रखना भी बेहतर है।
इन रंगों को माना जाता है शुभ
फेंगशुई की कुछ मान्यताओं में दक्षिण-पूर्व दिशा के लिए हरे, बैंगनी और नीले रंगों को शुभ माना जाता है। इन रंगों का इस्तेमाल सजावट, छोटे डेकोरेटिव आइटम या अन्य चीजों में किया जा सकता है।
क्रिस्टल रखने की भी है मान्यता
फेंगशुई में कुछ क्रिस्टल और स्टोन को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। दक्षिण-पूर्व दिशा में सिट्रीन जैसे क्रिस्टल रखने की मान्यता है। इसे आर्थिक स्थिरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि इन क्रिस्टल या किसी अन्य वस्तु से नौकरी, व्यापार या धन में निश्चित लाभ होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
सबसे जरूरी है साफ-सफाई और व्यवस्था
Money Corner से जुड़ी मान्यताओं को अपनाते समय सबसे पहले इस हिस्से को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। टूटे सामान, कचरा, सूखे पौधे या बेकार चीजों का ढेर लगाने से बचें। घर की नियमित साफ-सफाई और चीजों को व्यवस्थित रखना व्यावहारिक रूप से भी बेहतर माना जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बताई गई फेंगशुई और वास्तु से जुड़ी बातें धार्मिक, पारंपरिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें आर्थिक लाभ की गारंटी के रूप में नहीं लेना चाहिए।
कटिहार: बिहार के कटिहार से पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा एक मामला सामने आया है। कैमूर के रहने वाले हंसलाल गुप्ता का आरोप है कि उन्होंने और उनके पिता ने मेहनत-मजदूरी और ई-रिक्शा चलाकर पत्नी प्रतिभा की पढ़ाई का खर्च उठाया और उसे बिहार पुलिस में सिपाही बनने में मदद की। अब पति का दावा है कि नौकरी लगने के बाद पत्नी ने उससे दूरी बना ली और साथ रहने से इनकार कर दिया। मामले को लेकर पति और उसके पिता ने पुलिस अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है।
प्रेम विवाह के बाद हुई थी कोर्ट मैरिज
हंसलाल के मुताबिक, वह रोजगार के सिलसिले में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक पेट्रोल पंप पर काम करता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात प्रतिभा से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वर्ष 2021 में दोनों ने प्रेम विवाह किया।
शादी के बाद प्रतिभा कैमूर स्थित हंसलाल के परिवार के साथ रहने लगी। इसके बाद 26 अप्रैल 2024 को दोनों ने कैमूर कोर्ट में भी शादी का पंजीकरण कराया।
ई-रिक्शा चलाकर जुटाए पढ़ाई के पैसे
हंसलाल का दावा है कि शादी के बाद प्रतिभा ने आगे पढ़ाई कर सरकारी नौकरी हासिल करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद पति और ससुर परमहंस गुप्ता ने उसकी पढ़ाई में आर्थिक मदद की।
परिवार के मुताबिक, पिता-पुत्र दोनों ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे और इसी कमाई से प्रतिभा की पढ़ाई का खर्च उठाया गया। उनका दावा है कि पढ़ाई और भर्ती की तैयारी में करीब 8 से 9 लाख रुपये खर्च हुए।
आखिरकार प्रतिभा बिहार पुलिस की भर्ती प्रक्रिया में सफल हुईं और सिपाही के पद पर नियुक्त हो गईं।
नौकरी के बाद दूरी बढ़ने का आरोप
हंसलाल का आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद प्रतिभा के व्यवहार में बदलाव आया। उनकी पोस्टिंग कटिहार के मनसाही थाना क्षेत्र में हुई। पति का दावा है कि वह फोन पर बातचीत करने से बचने लगीं और जब वह कटिहार मिलने पहुंचता तो मुलाकात करने से भी इनकार कर देती थीं।
हंसलाल ने पत्नी के किसी अन्य युवक से संबंध होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, खबर में प्रतिभा की ओर से पति के आरोपों के जवाब में यह दावा बताया गया है कि उन्होंने हंसलाल को पति के रूप में स्वीकार नहीं किया था और उनके बीच जो कुछ हुआ, वह उनकी इच्छा के विरुद्ध था। इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के दावों की पुलिस स्तर पर जांच की जरूरत है।
पत्नी से रिश्ता बचाने की गुहार
हंसलाल और उनके पिता का कहना है कि वे परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं। इसी सिलसिले में दोनों कटिहार पुलिस केंद्र पहुंचे और प्रतिभा से मुलाकात कर साथ रहने की अपील की।
जब मामला नहीं सुलझा तो उन्होंने कटिहार समाहरणालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन दिया और मामले में मदद की मांग की।
पुलिस ने काउंसलिंग की बात कही
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मुख्य रूप से पति-पत्नी के बीच का निजी और पारिवारिक विवाद है। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और दोनों पक्षों की बात सुनना जरूरी है।
पुलिस की ओर से महिला थाना स्तर पर काउंसलिंग के जरिए विवाद सुलझाने की संभावना बताई गई है। फिलहाल पति और उसके पिता अपनी शिकायत के आधार पर मामले में समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
यह मामला अब पति-पत्नी के बीच लगाए जा रहे आरोपों और रिश्ते को लेकर खड़े हुए विवाद की जांच पर निर्भर है। किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य मानने से पहले पुलिस जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
हिंगोली, महाराष्ट्र: जिले के वसमत तालुका में पेट्रोल पंप को सील कर अपने नियंत्रण में लेने पहुंची इंडियन ऑयल की टीम के साथ विवाद के दौरान कंपनी के एक मैनेजर की हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, 37 वर्षीय महेश शेल्के पर धारदार हथियार से सात बार हमला किया गया। घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पेट्रोल पंप पर पहुंची थी कंपनी की टीम
महेश शेल्के इंडियन ऑयल के नांदेड कार्यालय में मैनेजर (रिटेल सेल्स) के पद पर कार्यरत थे। मंगलवार दोपहर वह कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ चोंढी गांव स्थित एक पेट्रोल पंप पर पहुंचे थे।
कंपनी की ओर से विवाद के चलते पेट्रोल पंप को सील कर उसका संचालन अपने नियंत्रण में लेने की कार्रवाई की जानी थी। पेट्रोल पंप का संचालन पांडववीर परिवार द्वारा किया जा रहा था।
समय देने की मांग को लेकर बढ़ा विवाद
पुलिस के अनुसार, कंपनी की टीम और पेट्रोल पंप संचालक परिवार के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। परिवार की ओर से कथित तौर पर एक महीने का समय मांगा गया और इसके बाद पेट्रोल पंप का कब्जा सौंपने की बात कही गई।
हालांकि, कंपनी की टीम तत्काल सीलिंग और टेकओवर की कार्रवाई पर आगे बढ़ना चाहती थी। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और स्थिति हिंसक हो गई।
धारदार हथियार से 7 वार करने का आरोप
हिंगोली पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में उमेश पांडववीर पर महेश शेल्के पर खंजर से हमला करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि महेश पर सात बार वार किए गए। इसी दौरान कुछ अन्य लोगों पर पथराव करने का भी आरोप लगाया गया है।
गंभीर रूप से घायल महेश को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कुरुंदा पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
24 घंटे में 5 आरोपी गिरफ्तार
मामले में इंडियन ऑयल के वरिष्ठ प्रबंधक की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई। पुलिस ने हत्या समेत अन्य संबंधित धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में लताबाई पांडववीर, उमेश पांडववीर, श्रवण वाकुड़े, राहुल धायजे और प्रथमेश वाघमारे शामिल हैं।
महेश शेल्के के शव का पोस्टमार्टम वसमत उप-जिला अस्पताल में कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
कौन थे महेश शेल्के?
महेश शेल्के इंडियन ऑयल के नांदेड कार्यालय में मैनेजर (रिटेल सेल्स) के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और वर्ष 2014 में इंडियन ऑयल में नौकरी शुरू की थी।
नौकरी के दौरान उन्होंने दक्षिण भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी काम किया। वर्ष 2024 में उनका तबादला महाराष्ट्र में हुआ था और पिछले करीब दो वर्षों से वह परिवार के साथ नांदेड में रह रहे थे।
केंद्रीय मंत्री ने जताया दुख
ड्यूटी के दौरान अधिकारी की हत्या पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दुख जताया। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से मामले को लेकर बातचीत की और आरोपियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की बात कही।
इंडियन ऑयल प्रबंधन की ओर से भी घटना पर शोक व्यक्त किया गया है। कंपनी ने मामले में तेजी से कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेट्रोल पंप के कब्जे और सीलिंग को लेकर विवाद किस तरह हिंसा में बदला और घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका क्या थी।