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  • एमसीबी: घर की बाड़ी में उगा रहा था गांजा, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 14 पौधे किए जब्त.

    एमसीबी: घर की बाड़ी में उगा रहा था गांजा, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 14 पौधे किए जब्त.

    एमसीबी: घर की बाड़ी में उगा रहा था गांजा, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 14 पौधे किए जब्त.

    छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनकपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने गांजे की अवैध खेती के मामले में कार्रवाई की है। ग्राम गांजर में एक व्यक्ति अपने घर की बाड़ी में गांजे के पौधे उगा रहा था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर वहां से 14 गांजे के पौधे बरामद किए।

    जनकपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम गांजर में एक व्यक्ति अपने घर की बाड़ी में गांजे के पौधे उगा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बाड़ी की तलाशी ली।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपनी बाड़ी को चारों तरफ से कपड़े से घेरकर रखा था। तलाशी के दौरान वहां गांजे के कुल 14 पौधे मिले, जिनका कुल वजन 18 किलो 690 ग्राम बताया गया है। पुलिस ने सभी पौधों को जब्त कर लिया।

    मामले में पुलिस ने हरि लाल (52) को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

    पुलिस अब मामले में आगे की कार्रवाई और जांच कर रही है।

  • बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

    बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

    बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

    सिरदर्द, बदन दर्द या हल्का बुखार होने पर कई लोग बिना डॉक्टर से सलाह लिए पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। कभी-कभार सही दवा का इस्तेमाल आमतौर पर बड़ी समस्या नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन कुछ लोगों में किडनी समेत शरीर के दूसरे अंगों पर नुकसान का जोखिम बढ़ा सकता है।

    खासकर कुछ दर्द निवारक दवाएं, जैसे NSAIDs, किडनी में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं कुछ एंटीबायोटिक्स भी कुछ परिस्थितियों में किडनी पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना जरूरी है।

    पेनकिलर किडनी को कैसे प्रभावित कर सकती है?

    किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर में पानी व खनिजों का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। कुछ पेनकिलर, खासकर NSAIDs, किडनी में रक्त प्रवाह को कम कर सकती हैं। इससे कुछ लोगों में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

    किडनी को नुकसान की खास बात यह है कि शुरुआती चरण में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। समस्या का पता कभी-कभी ब्लड टेस्ट में क्रिएटिनिन बढ़ने के बाद चलता है।

    कितनी बार पेनकिलर लेना जोखिम बढ़ा सकता है?

    अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार थोड़े समय के लिए डॉक्टर या दवा के निर्देश के अनुसार पेनकिलर लेता है तो जोखिम आमतौर पर कम होता है। लेकिन लंबे समय तक या बार-बार खुद से दवा लेने पर खतरा बढ़ सकता है।

    डिहाइड्रेशन, अधिक उम्र, पहले से किडनी की समस्या और कुछ अन्य बीमारियां इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लगातार या बार-बार दर्द के लिए पेनकिलर की जरूरत पड़ रही है, तो दर्द की वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है नुकसानदायक

    हर बुखार या संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। खासकर वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक आमतौर पर काम नहीं करतीं। इसके बावजूद कई लोग सर्दी-जुकाम या वायरल बीमारी में खुद से एंटीब

  • नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

    नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

    नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

    गोवा: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

    नाना पाटेकर ने अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज से सिनेमा में खास पहचान बनाई। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘प्रहार’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस नाम से उन्हें पूरी दुनिया जानती थी, वह उनका जन्म के समय रखा गया नाम नहीं था?

    विश्वनाथ पाटेकर था उनका असली नाम

    नाना पाटेकर का पूरा नाम विश्वनाथ दीनकर पाटेकर था। आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनका नाम इसी रूप में दर्ज रहा है और इसके साथ ‘नाना पाटेकर’ नाम से उनकी सार्वजनिक पहचान बनी।

    उनके नाम को लेकर खुद नाना पाटेकर ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘नाना’ कोई बाद में अपनाया गया फिल्मी नाम नहीं था। उन्होंने कहा था कि बचपन से ही उनका नाम नाना था और उनके पासपोर्ट पर भी यही नाम दर्ज था।

    बचपन में ऐसे पड़ा ‘नाना’ नाम

    नाना नाम उनके बचपन से ही उनके साथ जुड़ गया था। परिवार और करीबियों के बीच उन्हें इसी नाम से पुकारा जाने लगा। धीरे-धीरे यह नाम इतना प्रचलित हो गया कि आगे चलकर यही उनकी सार्वजनिक और फिल्मी पहचान बन गया।

    उनके पुराने परिचित उन्हें कभी-कभी ‘विशू’ जैसे नाम से भी जानते थे। नाना पाटेकर ने बताया था कि जब कोई उन्हें विश्वनाथ या विशू कहकर बुलाता था तो उन्हें अंदाजा हो जाता था कि सामने वाला उनके पुराने दौर का परिचित है। बाकी लोगों के लिए वह हमेशा ‘नाना’ ही रहे।

    थिएटर से शुरू हुआ था अभिनय का सफर

    नाना पाटेकर ने अभिनय की दुनिया में सीधे फिल्मों से शुरुआत नहीं की थी। उनका जुड़ाव थिएटर से रहा और इसके बाद 1978 में फिल्म ‘गमन’ के जरिए उन्होंने सिनेमा में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई बेहद प्रभावशाली किरदार निभाए।

    ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। वहीं ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार उनके करियर के सबसे लोकप्रिय किरदारों में शामिल हो गया।

    तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित

    नाना पाटेकर को अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें 2013 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

    उनका अभिनय सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। मराठी सिनेमा और थिएटर में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और नकारात्मक किरदारों तक, उन्होंने अलग-अलग तरह के चरित्रों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से निभाया।

    ‘नाना’ नाम ही बन गया उनकी पहचान

    फिल्मी दुनिया में आने के बाद विश्वनाथ पाटेकर के बजाय ‘नाना पाटेकर’ नाम ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। यह नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें इसी नाम से जानने लगीं।

    इस तरह ‘नाना’ उनके लिए सिर्फ एक उपनाम नहीं रहा, बल्कि वही नाम उनकी दशकों लंबी फिल्मी यात्रा और दर्शकों की यादों का हिस्सा बन गया। 75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय शैली की अलग पहचान थी।

  • मुल्तानी मिट्टी से जुड़े ये वास्तु: उपाय घर में सकारात्मक माहौल के लिए माने जाते हैं, जानें आसान तरीके.

    मुल्तानी मिट्टी से जुड़े ये वास्तु: उपाय घर में सकारात्मक माहौल के लिए माने जाते हैं, जानें आसान तरीके.

    मुल्तानी मिट्टी से जुड़े ये वास्तु: उपाय घर में सकारात्मक माहौल के लिए माने जाते हैं, जानें आसान तरीके.

    नई दिल्ली: मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल आमतौर पर त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है, लेकिन वास्तु और ज्योतिष की कुछ मान्यताओं में इसे पृथ्वी तत्व से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि पृथ्वी तत्व स्थिरता और संतुलन का प्रतीक है। इसी आधार पर कुछ लोग मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने के लिए भी करते हैं।

    अगर घर में लगातार तनाव, चिड़चिड़ापन या बेचैनी का माहौल महसूस होता है तो वास्तु मान्यताओं के अनुसार कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, इन उपायों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    मुख्य दरवाजे पर रखें मुल्तानी मिट्टी

    वास्तु में घर के मुख्य द्वार को ऊर्जा के प्रवेश का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य दरवाजे के पास एक छोटी कटोरी में मुल्तानी मिट्टी रखने से नकारात्मक ऊर्जा को रोकने में मदद मिल सकती है।

    इसे साफ और सूखी जगह पर रखना चाहिए तथा समय-समय पर मिट्टी बदल देनी चाहिए।

    लिविंग रूम में रखने की मान्यता

    अगर घर में अक्सर तनाव या बहस का माहौल बना रहता है तो वास्तु मान्यताओं के अनुसार लिविंग रूम में मुल्तानी मिट्टी रखना शुभ माना जाता है।

    माना जाता है कि इससे वातावरण में संतुलन और शांति बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, घर के तनाव का कारण वास्तविक पारिवारिक, मानसिक या सामाजिक समस्या हो तो उसके समाधान के लिए उस पर सीधे ध्यान देना जरूरी है।

    बेडरूम के लिए भी बताया जाता है उपाय

    कुछ वास्तु मान्यताओं में बेडरूम में मुल्तानी मिट्टी रखने को मानसिक शांति और बेहतर नींद से जोड़ा जाता है।

    इसके लिए एक छोटी कटोरी में सूखी मुल्तानी मिट्टी रखी जा सकती है। हालांकि, नींद की समस्या लंबे समय से बनी हुई है तो केवल वास्तु उपाय पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।

    पौधों के साथ मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल?

    कुछ जगहों पर पौधों की मिट्टी में मुल्तानी मिट्टी मिलाने की सलाह भी दी जाती है। लेकिन हर पौधे के लिए मुल्तानी मिट्टी उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।

    इसलिए पौधों में इसका इस्तेमाल करने से पहले उस पौधे की मिट्टी और जल निकासी की जरूरत को समझना बेहतर है। केवल वास्तु लाभ के लिए पौधे की मिट्टी में कोई सामग्री मिलाने से पहले सावधानी बरतें।

    कितने समय बाद बदलें मुल्तानी मिट्टी?

    वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में मुल्तानी मिट्टी को लंबे समय तक एक ही जगह रखने के बजाय समय-समय पर बदलने की बात कही जाती है। कुछ मान्यताओं में करीब 10 से 15 दिन के अंतर पर इसे बदलने की सलाह दी जाती है।

    मिट्टी को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखें। अगर उसमें नमी आ जाए, बदबू आने लगे या वह गंदी हो जाए तो उसे तुरंत बदल देना बेहतर है।

    क्या मुल्तानी मिट्टी सच में नेगेटिव एनर्जी दूर करती है?

    मुल्तानी मिट्टी से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने या घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ये उपाय वास्तु, ज्योतिष और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं।

    इसलिए इन्हें आस्था के तौर पर अपनाया जा सकता है, लेकिन घर में तनाव, नींद की समस्या या मानसिक परेशानी होने पर वास्तविक कारणों और जरूरी व्यावहारिक उपायों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में बताए गए मुल्तानी मिट्टी के वास्तु उपाय धार्मिक आस्था, ज्योतिष और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें निश्चित परिणाम देने वाला उपाय न मानें।

  • पश्चिम चंपारण: 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का आरोप, मोबाइल दिखाने के बहाने कमरे में ले गया युवक; पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार.

    पश्चिम चंपारण: 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का आरोप, मोबाइल दिखाने के बहाने कमरे में ले गया युवक; पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार.

    पश्चिम चंपारण: 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का आरोप, मोबाइल दिखाने के बहाने कमरे में ले गया युवक; पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार.

    पश्चिम चंपारण: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के साठी थाना क्षेत्र के एक गांव में 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। बच्ची की मां की शिकायत पर पुलिस ने नामजद आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और करीब दो घंटे के भीतर उसे गिरफ्तार कर लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

    सामान लेने के बाद अचानक गायब हुई बच्ची

    पुलिस को दिए आवेदन के मुताबिक, 6 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 4 बजे बच्ची की मां ने उसे पैसे देकर दुकान से सामान लाने भेजा था। सामान लेकर लौटने के बाद बच्ची घर के दरवाजे पर खेल रही थी।

    कुछ देर बाद जब बच्ची दिखाई नहीं दी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान बच्ची रोते हुए घर पहुंची।

    मोबाइल दिखाने के बहाने कमरे में ले जाने का आरोप

    परिजनों के पूछने पर बच्ची ने कथित तौर पर बताया कि पड़ोस में रहने वाला एक युवक उसे मोबाइल दिखाने के बहाने अपने घर के कमरे में ले गया था। आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ गलत काम किया।

    शिकायत के अनुसार, बच्ची के विरोध करने पर उसके साथ जबरदस्ती और मारपीट की गई। बच्ची के रोने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसे किसी को कुछ नहीं बताने की धमकी दी और घर के पीछे के रास्ते से बाहर निकाल दिया।

    आरोपी के परिजनों पर भी धमकी देने का आरोप

    बच्ची की मां ने आरोप लगाया कि घटना के बारे में आरोपी के माता-पिता से पूछताछ करने पर उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई और मारपीट की धमकी दी गई।

    पुलिस ने दो घंटे में आरोपी को पकड़ा

    साठी थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार के मुताबिक, बच्ची की मां के आवेदन के आधार पर पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब दो घंटे के भीतर नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले में आगे की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • सागर: शराब की होम डिलीवरी करते 31 वर्षीय युवक को आबकारी टीम ने पकड़ा, स्कूटी समेत 80 हजार का माल जब्त.

    सागर: शराब की होम डिलीवरी करते 31 वर्षीय युवक को आबकारी टीम ने पकड़ा, स्कूटी समेत 80 हजार का माल जब्त.

    सागर: शराब की होम डिलीवरी करते 31 वर्षीय युवक को आबकारी टीम ने पकड़ा, स्कूटी समेत 80 हजार का माल जब्त.

    सागर, मध्य प्रदेश: जिले में अवैध शराब की बिक्री और परिवहन के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई जारी है। इसी अभियान के तहत आबकारी टीम ने शराब की कथित होम डिलीवरी करते एक 31 वर्षीय युवक को पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान उसके कब्जे से शराब की बोतल और एक स्कूटी जब्त की गई। जब्त सामान की कुल अनुमानित कीमत करीब 80 हजार रुपये बताई गई है।

    बस स्टैंड के पास हुई कार्रवाई

    आबकारी विभाग को 6 अक्टूबर 2026 को सूचना मिली थी कि सागर शहर में एक व्यक्ति अवैध तरीके से शराब की डिलीवरी कर रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने बस स्टैंड सागर के पास घेराबंदी की।

    कार्रवाई के दौरान कृष्णगंज वार्ड निवासी 31 वर्षीय सोहिल खान को पकड़ा गया। आबकारी विभाग के अनुसार, वह एक बोतल सिग्नेचर व्हिस्की का कथित तौर पर अवैध रूप से विक्रय करते पाया गया।

    शराब के साथ स्कूटी भी जब्त

    कार्रवाई के दौरान टीम ने शराब के साथ स्कूटी क्रमांक MP 15 ZL 4154 भी जब्त की। विभाग ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।

    80 हजार रुपये का सामान जब्त

    आबकारी विभाग के मुताबिक, जब्त की गई स्कूटी और शराब की अनुमानित कुल कीमत करीब 80 हजार रुपये है। विभाग का कहना है कि जिले में अवैध शराब की बिक्री, परिवहन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

    यह कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक एवं वृत्त दक्षिण प्रभारी राजेंद्र बिलावर, आबकारी उपनिरीक्षक एसपी साकेत और आबकारी आरक्षक दिलीप सिंह ठाकुर की टीम ने की। कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई।

  • जिला अस्पताल: महिला टॉयलेट के फ्लश में मिला नवजात का शव, मचा हड़कंप; CCTV और DNA जांच में जुटी पुलिस

    जिला अस्पताल: महिला टॉयलेट के फ्लश में मिला नवजात का शव, मचा हड़कंप; CCTV और DNA जांच में जुटी पुलिस

    जिला अस्पताल: महिला टॉयलेट के फ्लश में मिला नवजात का शव, मचा हड़कंप; CCTV और DNA जांच में जुटी पुलिस

    छत्तीसगढ़ जिला अस्पताल के महिला टॉयलेट में उस समय हड़कंप मच गया, जब फ्लश के अंदर एक नवजात शिशु का शव मिला। घटना की जानकारी सामने आते ही अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    फ्लश में मिला नवजात का शव

    जानकारी के मुताबिक, अस्पताल के महिला शौचालय में फ्लश जाम होने के बाद जब उसे देखा गया तो अंदर नवजात का शव फंसा मिला। इसके बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की पड़ताल शुरू की।

    CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

    पुलिस अब अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि नवजात को टॉयलेट तक कौन लेकर आया और घटना किस समय हुई। पुलिस अस्पताल में आने-जाने वाले लोगों और मरीजों के परिजनों से भी पूछताछ कर सकती है।

    DNA जांच से होगी पहचान

    मामले में नवजात की पहचान और घटना से जुड़े व्यक्ति तक पहुंचने के लिए DNA जांच भी कराई जा सकती है। पुलिस अस्पताल में भर्ती महिलाओं और हाल में प्रसव कराने वाली महिलाओं से जुड़ी जानकारी भी जुटा रही है।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसे टॉयलेट के फ्लश में किसने छोड़ा। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • क्या मखाना खाने से कंट्रोल; रहता है ब्लड प्रेशर? वजन घटाने और दिल की सेहत में कितना फायदेमंद, जानिए

    क्या मखाना खाने से कंट्रोल; रहता है ब्लड प्रेशर? वजन घटाने और दिल की सेहत में कितना फायदेमंद, जानिए

    क्या मखाना खाने से कंट्रोल; रहता है ब्लड प्रेशर? वजन घटाने और दिल की सेहत में कितना फायदेमंद, जानिए

    मखाना आजकल हेल्दी स्नैक के तौर पर काफी पसंद किया जाता है। इसे लोग भूनकर या हल्के मसालों के साथ खाते हैं। इसमें फाइबर, प्रोटीन और कई तरह के मिनरल्स पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे वजन मैनेजमेंट से लेकर हार्ट हेल्थ और ब्लड प्रेशर के लिए उपयोगी डाइट का हिस्सा माना जाता है।

    हालांकि, मखाना अपने आप किसी बीमारी का इलाज नहीं करता। इसकी सही मात्रा और इसे किस तरह खाया जा रहा है, यह काफी मायने रखता है।

    दिल की सेहत के लिए क्यों उपयोगी हो सकता है मखाना?

    मखाने में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं।

    इसके अलावा मखाने में फाइबर भी होता है। पर्याप्त फाइबर वाली डाइट कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़े कुछ जोखिम कारकों को मैनेज करने में मदद कर सकती है।

    क्या मखाना हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है?

    मखाने में सोडियम अपेक्षाकृत कम हो सकता है और इसमें पोटैशियम तथा मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसलिए बिना ज्यादा नमक वाला मखाना हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए एक बेहतर स्नैक विकल्प हो सकता है।

    लेकिन सिर्फ मखाना खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं किया जा सकता। हाई बीपी की स्थिति में डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा, कम सोडियम वाली डाइट, नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रित रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    वजन घटाने में कितना मददगार है?

    मखाना सीधे तौर पर वजन कम नहीं करता। हालांकि, अगर इसे ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स जैसे तले हुए खाद्य पदार्थों की जगह सीमित मात्रा में लिया जाए तो यह कुल कैलोरी सेवन को मैनेज करने में मदद कर सकता है।

    इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन कुछ समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। इसलिए वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भुना हुआ मखाना एक अच्छा स्नैक विकल्प हो सकता है।

    एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं मौजूद

    मखाने में कुछ एंटीऑक्सीडेंट और बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से निपटने में भूमिका निभा सकते हैं।

    हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि मखाना कैंसर, हार्ट डिजीज या उम्र से जुड़ी बीमारियों से बचाव की गारंटी देता है। किसी भी एक खाद्य पदार्थ को बीमारी की रोकथाम का विकल्प नहीं माना जा सकता।

    डायबिटीज में मखाना खा सकते हैं?

    डायबिटीज वाले लोग भी मखाने को डाइट में शामिल कर सकते हैं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं।

    बिना चीनी और कम नमक में भुना हुआ मखाना मीठे या तले हुए स्नैक्स की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है। डायबिटीज वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत डाइट और ब्लड शुगर के अनुसार मात्रा तय करनी चाहिए।

    मखाना खाने का सही तरीका क्या है?

    मखाने को हल्का भूनकर खाना एक आसान विकल्प है। इसमें ज्यादा नमक, घी, मक्खन या चीनी मिलाने से बचें, खासकर अगर आप ब्लड प्रेशर या वजन को लेकर सावधान हैं।

    इसे शाम के समय स्नैक के तौर पर सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। अगर आप पहले से हाई बीपी, डायबिटीज या दिल की बीमारी की दवा लेते हैं, तो अपनी डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।

    डिस्क्लेमर: मखाना पौष्टिक आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज या किसी अन्य बीमारी का इलाज नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही डाइट और दवाओं में बदलाव करें।

  • बरेली: महिला ने एक साथ 2 बेटे और 2 बेटियों को दिया जन्म, चारों नवजात स्वस्थ; परिवार में खुशी का माहौल.

    बरेली: महिला ने एक साथ 2 बेटे और 2 बेटियों को दिया जन्म, चारों नवजात स्वस्थ; परिवार में खुशी का माहौल.

    बरेली: महिला ने एक साथ 2 बेटे और 2 बेटियों को दिया जन्म, चारों नवजात स्वस्थ; परिवार में खुशी का माहौल.

    बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक खुशखबरी सामने आई है। सीबीगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है। नवजातों में दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक मां और चारों बच्चे फिलहाल स्वस्थ हैं और सभी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

    प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल पहुंची महिला

    सीबीगंज क्षेत्र के सनईया रानी गांव निवासी शबनम को सोमवार तड़के करीब 4 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद परिजन उन्हें मिनी बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टरों ने महिला को अस्पताल में भर्ती कर लिया और चिकित्सकीय निगरानी में प्रसव कराया।

    प्रसव के दौरान शबनम ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया। इनमें दो बेटे और दो बेटियां हैं। एक साथ चार बच्चों के जन्म की जानकारी मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया। परिजनों ने खुशी में मिठाइयां भी बांटीं।

    एक साथ चार बच्चों का जन्म कितना दुर्लभ?

    चिकित्सकों के मुताबिक एक साथ चार बच्चों का जन्म सामान्य प्रसव की तुलना में काफी कम देखने को मिलता है। चिकित्सा विज्ञान में एक साथ चार बच्चों के जन्म को चतुष प्रसव (Quadruplets) कहा जाता है।

    ऐसे मामलों में मां और नवजातों की विशेष निगरानी जरूरी होती है, क्योंकि एक साथ कई बच्चों के जन्म के बाद उन्हें अतिरिक्त चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है।

    डॉक्टरों की निगरानी में मां और चारों बच्चे

    प्रसव के बाद डॉक्टर मां और चारों नवजातों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रहे हैं। फिलहाल चिकित्सकों ने सभी की हालत ठीक बताई है और चारों बच्चों को निगरानी में रखा गया है।

    चार बच्चों के जन्म से परिवार में खुशी

    एक साथ दो बेटों और दो बेटियों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों के लिए यह पल बेहद खास है। चार बच्चों के एक साथ घर में आने से परिवार के लोग काफी उत्साहित हैं।

  • चकला-बेलन को लेकर न करें ये गलतियां, वास्तु के अनुसार घर में बढ़ सकती हैं परेशानियां.

    चकला-बेलन को लेकर न करें ये गलतियां, वास्तु के अनुसार घर में बढ़ सकती हैं परेशानियां.

    चकला-बेलन को लेकर न करें ये गलतियां, वास्तु के अनुसार घर में बढ़ सकती हैं परेशानियां.

    नई दिल्ली: हिंदू परंपरा में रसोईघर को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में रसोई को मां अन्नपूर्णा से जोड़ा जाता है, इसलिए इसे साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जाता है। वहीं वास्तु शास्त्र में रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीजों को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं।

    इन्हीं में चकला-बेलन भी शामिल है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार चकला-बेलन को इस्तेमाल करने और रखने के तरीके का घर के वातावरण पर प्रभाव पड़ सकता है। आइए जानते हैं इससे जुड़े कौन-कौन से नियम बताए जाते हैं।

    चकला-बेलन इस्तेमाल के बाद गंदा न छोड़ें

    वास्तु के अनुसार चकला-बेलन को इस्तेमाल करने के बाद अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसे लंबे समय तक आटा लगा हुआ या गंदा छोड़ना उचित नहीं माना जाता।

    चकला-बेलन को धोने या साफ करने के बाद अच्छी तरह सुखाकर ही रखना चाहिए। मान्यता है कि रसोई के सामान की साफ-सफाई बनाए रखने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    रोटी बनाते समय आवाज करने वाला चकला-बेलन

    वास्तु मान्यताओं में ऐसे चकले-बेलन के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है, जो रोटी बेलते समय लगातार तेज आवाज करता हो।

    मान्यता है कि रसोई में बार-बार होने वाली ऐसी आवाज घर के वातावरण में अशांति से जुड़ी हो सकती है। इसलिए रोटी बनाने के लिए मजबूत और समतल लकड़ी या पत्थर के चकले का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

    मंगलवार और शनिवार को खरीदने से जुड़ी मान्यता

    वास्तु और ज्योतिष की कुछ मान्यताओं के अनुसार मंगलवार और शनिवार को चकला-बेलन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके लिए बुधवार और गुरुवार को अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है।

    चकला-बेलन खरीदते समय यह भी ध्यान रखने की बात कही जाती है कि वह टूटा हुआ, टेढ़ा या असंतुलित न हो।

    चकला-बेलन को उल्टा या खड़ा करके न रखें

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार चकला-बेलन को इस्तेमाल करने के बाद उल्टा या खड़ा करके रखने से बचना चाहिए। इसे साफ करके उचित तरीके से रखना बेहतर माना जाता है।

    चकले और बेलन को एक-दूसरे से अलग या व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकता है, ताकि रसोई भी साफ और व्यवस्थित रहे।

    गीला चकला-बेलन न रखें

    चकला-बेलन को साफ करने के बाद उसे अच्छी तरह सुखाना चाहिए। गीला छोड़ने से लकड़ी के सामान में नमी, बदबू या फफूंद जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी हो सकती हैं।

    इसलिए साफ-सफाई के लिहाज से भी इसे पूरी तरह सुखाकर रखना बेहतर है।

    कहां रखना माना जाता है शुभ?

    वास्तु शास्त्र की कुछ मान्यताओं में चकला-बेलन को रसोई की साफ जगह पर रखने की सलाह दी जाती है। कुछ परंपराओं में आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा को रसोई के सामान के लिए उचित माना जाता है।

    हालांकि, अलग-अलग वास्तु परंपराओं में दिशाओं को लेकर अलग मत मिल सकते हैं। इसलिए इसे निश्चित वैज्ञानिक नियम के तौर पर नहीं लेना चाहिए।

    चकला-बेलन को ढककर रखें

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार चकला-बेलन को इस्तेमाल के बाद साफ करके किसी व्यवस्थित स्थान पर रखना चाहिए। खुले में लंबे समय तक रखने के बजाय इसे साफ और सूखी जगह पर रखना बेहतर है।

    इससे धूल-मिट्टी से भी बचाव होता है और रसोई का सामान स्वच्छ रहता है।

    डिस्क्लेमर: चकला-बेलन से जुड़े ये नियम वास्तु शास्त्र, धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें निश्चित परिणाम देने वाले उपाय के रूप में न लें।