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  • रूस में हुआ प्यार, बिहार में बसने पहुंचीं जूली! राहुल यादव के साधारण घर में रहने को तैयार, नवंबर में शादी की उम्मीद.

    रूस में हुआ प्यार, बिहार में बसने पहुंचीं जूली! राहुल यादव के साधारण घर में रहने को तैयार, नवंबर में शादी की उम्मीद.

    रूस में हुआ प्यार, बिहार में बसने पहुंचीं जूली! राहुल यादव के साधारण घर में रहने को तैयार, नवंबर में शादी की उम्मीद.

    बिहार के भागलपुर के रहने वाले राहुल यादव और रूस की युवती जूली की प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों की मुलाकात रूस में हुई थी, जहां राहुल काम करने गए थे। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई और अब जूली राहुल के साथ जिंदगी बिताने के लिए बिहार पहुंच गई हैं। बताया जा रहा है कि दोनों परिवारों की सहमति से नवंबर में शादी होने की उम्मीद है।

    रूस में हुई मुलाकात, फिर बढ़ा प्यार

    रिपोर्ट के अनुसार, राहुल यादव रोजगार के सिलसिले में रूस गए थे। वहीं उनकी मुलाकात जूली से हुई। बातचीत और मुलाकातों के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और उनके बीच प्रेम संबंध बन गया। इसके बाद दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया।

    साधारण घर में रहने को भी तैयार जूली

    इस प्रेम कहानी की खास बात यह बताई जा रही है कि जूली बिहार में राहुल के साधारण, झोपड़ीनुमा घर में रहने के लिए भी तैयार हैं। उनके इस फैसले को लेकर लोग चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, किसी रिश्ते की मजबूती केवल घर या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और भरोसे से भी तय होती है।

    नवंबर में शादी की उम्मीद

    मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राहुल और जूली की शादी नवंबर में हो सकती है। दोनों के परिवारों की सहमति और शादी की तैयारियों से जुड़ी पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में शादी की अंतिम तारीख और अन्य रस्मों की पुष्टि आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही हो सकेगी।

    सीमाओं से परे रिश्ते की कहानी

    राहुल और जूली की कहानी इस बात की मिसाल बनकर चर्चा में है कि अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों के बीच भी रिश्ते बन सकते हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि दोनों की शादी कब होती है और वे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कैसे करते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। रिश्ते, पारिवारिक सहमति और शादी की संभावित तारीख से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

  • पत्नी से विवाद के बीच 21वीं मंजिल से गिरकर 31 वर्षीय युवक की मौत, बालकनी से नीचे जाने की कोशिश में फिसलने की आशंका.

    पत्नी से विवाद के बीच 21वीं मंजिल से गिरकर 31 वर्षीय युवक की मौत, बालकनी से नीचे जाने की कोशिश में फिसलने की आशंका.

    पत्नी से विवाद के बीच 21वीं मंजिल से गिरकर 31 वर्षीय युवक की मौत, बालकनी से नीचे जाने की कोशिश में फिसलने की आशंका.

    ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा की एक हाईराइज सोसाइटी में 31 वर्षीय हर्षित लवानिया की 21वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घटना के समय उनकी पत्नी फ्लैट पर पहुंची थीं और दोनों के बीच बातचीत को लेकर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस के अनुसार, हर्षित कथित तौर पर दरवाजा खोलने से बच रहे थे और इसी दौरान बालकनी के रास्ते नीचे की मंजिल पर जाने की कोशिश में गिर गए।

    यह घटना सेंचुरियन पार्क ट्रॉपिकल गार्डन सोसाइटी में इसी सप्ताह हुई। हर्षित को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    छह महीने से पत्नी से अलग रह रहे थे

    मिली जानकारी के अनुसार, हर्षित की शादी वर्ष 2024 में हुई थी। वैवाहिक विवाद के चलते वह पिछले करीब छह महीनों से अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे और किराए के फ्लैट में अकेले रहते थे।

    घटना वाले दिन उनकी पत्नी फ्लैट पर पहुंचीं और दरवाजा खटखटाया। पुलिस के मुताबिक, हर्षित दरवाजा खोलने के इच्छुक नहीं थे, क्योंकि उन्हें दोबारा बहस होने की आशंका थी। पत्नी ने उनसे बाहर आकर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

    इसके बाद दरवाजा खुलवाने के लिए सुरक्षा कर्मचारियों को बुलाया गया। इसी दौरान हर्षित ने बालकनी से नीचे की मंजिल पर जाने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि इस कोशिश में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर पड़े।

    परिवार ने तनाव की बात कही, पुलिस जांच जारी

    हर्षित के परिवार का कहना है कि पत्नी के साथ चल रहे विवाद के कारण वह मानसिक तनाव में थे। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियां अभी जांच का विषय हैं। परिवार के इस दावे से घटना के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती।

    अधिकारियों के अनुसार, अभी तक इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। पुलिस हर्षित की पत्नी से पूछताछ कर रही है और सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि घटना से पहले और उसके दौरान हुई गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी पर आधारित है। घटना के कारणों और संबंधित परिस्थितियों की जांच जारी है; किसी पक्ष के दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

  • बेगूसराय: घर लौट रही महिला: डॉक्टर पर एसिड से हमला, अस्पताल के पास दुकान चलाने वाला आरोपी गिरफ्तार

    बेगूसराय: घर लौट रही महिला: डॉक्टर पर एसिड से हमला, अस्पताल के पास दुकान चलाने वाला आरोपी गिरफ्तार

    बेगूसराय: घर लौट रही महिला: डॉक्टर पर एसिड से हमला, अस्पताल के पास दुकान चलाने वाला आरोपी गिरफ्तार

    बिहार के बेगूसराय में महिला डॉक्टर पर एसिड से हमला किए जाने का मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। आरोप है कि अस्पताल से घर लौट रही डॉक्टर पर पीछे से एसिड फेंका गया, जिससे वह घायल हो गईं। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अब जांच में हमले की वजह और इसके पीछे की परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    घर लौटते समय महिला डॉक्टर पर हुआ हमला

    घटना नगर थाना क्षेत्र के हर्रख मोहल्ले की बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 की रात महिला डॉक्टर अपने अस्पताल से घर लौट रही थीं। उनका अस्पताल पोखरिया मोहल्ले में है, जबकि उनका घर हर्रख मोहल्ले में स्थित है।

    आरोप है कि घर के पास पहुंचने के दौरान किसी ने पीछे से एसिड से भरी बोतल फेंक दी। बोतल जमीन पर गिर गई और उसमें मौजूद एसिड डॉक्टर के शरीर पर पड़ गया। इस घटना में वह घायल हो गईं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया।

    पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

    मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की। अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर घटना से जुड़ी जानकारी जुटाई। महिला डॉक्टर के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

    पुलिस ने इस मामले में गौतम झा नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र का रहने वाला है और महिला डॉक्टर के अस्पताल के पास दुकान चलाता था।

    आठ साल पुराने विवाद की भी जांच

    पुलिस जांच में करीब आठ साल पहले महिला डॉक्टर के पति और आरोपी के बीच कथित विवाद का पहलू भी सामने आया है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या पुराने विवाद का इस हमले से कोई संबंध है या वारदात के पीछे कोई दूसरा कारण था।

    हालांकि, पुराने विवाद और एसिड हमले के बीच संबंध होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके।

    महिला डॉक्टर की सुरक्षा को लेकर पुलिस सतर्क

    घटना के बाद महिला डॉक्टर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने आवश्यक इंतजाम किए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है। वहीं, आरोपी से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच जारी है।

    फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस का मुख्य ध्यान हमले के कारण और घटनाक्रम की पुष्टि करने पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों और पुराने विवाद से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

  • 194 साल के कछुए जोनाथन से मिल सकता है लंबी उम्र का राज! दुनिया के सबसे उम्रदराज कछुओं में शामिल, वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ी.

    194 साल के कछुए जोनाथन से मिल सकता है लंबी उम्र का राज! दुनिया के सबसे उम्रदराज कछुओं में शामिल, वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ी.

    194 साल के कछुए जोनाथन से मिल सकता है लंबी उम्र का राज! दुनिया के सबसे उम्रदराज कछुओं में शामिल, वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ी.

    दुनिया में इंसान की उम्र आमतौर पर कुछ दशकों तक सीमित रहती है, लेकिन कुछ जीव ऐसे भी हैं जो एक सदी से ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं। ऐसा ही एक खास जीव है जोनाथन नाम का विशालकाय कछुआ, जिसकी उम्र करीब 194 साल बताई जाती है। इतनी लंबी उम्र के कारण जोनाथन लंबे समय से लोगों और वैज्ञानिकों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है। उसके जीवन और सेहत का अध्ययन यह समझने में मदद कर सकता है कि कुछ कछुए असाधारण रूप से लंबे समय तक कैसे जीवित रहते हैं।

    कौन है 194 साल का कछुआ जोनाथन?

    जोनाथन एक विशालकाय सेशेल्स कछुआ है, जो दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित सेंट हेलेना द्वीप पर रहता है। उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, उसे 1882 में द्वीप पर लाया गया था। उस समय भी वह पूरी तरह विकसित कछुए के आकार का था। इसी आधार पर माना जाता है कि उसकी उम्र 2026 में लगभग 194 साल हो सकती है, हालांकि जन्म की सटीक तारीख दर्ज नहीं है।

    जोनाथन को दुनिया के सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवरों में गिना जाता है। उसकी लंबी उम्र ने उसे वैश्विक पहचान दिलाई है।

    लंबी उम्र का रहस्य क्या हो सकता है?

    वैज्ञानिकों के लिए जोनाथन जैसे कछुए खास इसलिए हैं, क्योंकि कुछ कछुओं में उम्र बढ़ने के प्रभाव कई अन्य जानवरों की तुलना में धीमे दिखाई देते हैं। उनकी धीमी चयापचय दर, शरीर की मरम्मत से जुड़ी जैविक प्रक्रियाएं और जीवनशैली लंबे जीवन में भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, केवल जोनाथन को देखकर लंबी उम्र का कोई एक निश्चित कारण बताना संभव नहीं है।

    उसकी उम्र और स्वास्थ्य से जुड़े अध्ययन वैज्ञानिकों को उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, कोशिकाओं की कार्यप्रणाली और लंबे समय तक स्वस्थ रहने की जैविक विशेषताओं को समझने के लिए उपयोगी संकेत दे सकते हैं।

    क्या इंसान भी सीख सकता है लंबी उम्र का तरीका?

    जोनाथन की कहानी इंसानों में भी यह जानने की उत्सुकता पैदा करती है कि आखिर लंबी और स्वस्थ जिंदगी का आधार क्या है। लेकिन कछुओं और इंसानों की जीवविज्ञान में काफी अंतर होता है। इसलिए जोनाथन की लंबी उम्र को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता और न ही इससे किसी खास खानपान या उपचार को लंबी उम्र की गारंटी माना जा सकता है।

    इंसानों के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसे उपाय स्वस्थ जीवन बनाए रखने में मददगार माने जाते हैं।

    जोनाथन की कहानी क्यों है खास?

    करीब दो सदियों तक जीवित रहने का अनुमान अपने आप में असाधारण है। जोनाथन केवल अपनी उम्र के कारण ही आकर्षण का केंद्र नहीं है, बल्कि उसकी कहानी यह भी याद दिलाती है कि प्रकृति में जीवन की अवधि और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अलग-अलग प्रजातियों में कितनी भिन्न हो सकती है। आने वाले समय में ऐसे जीवों पर शोध से लंबी उम्र के जैविक पहलुओं को समझने में और मदद मिल सकती है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और सामान्य वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। जोनाथन की उम्र का अनुमान ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर आधारित है; उसकी सटीक जन्मतिथि ज्ञात नहीं है।

  • “मंत्री के पास सिक्योरिटी में हूं, सरकारी नौकरी लगवा दूंगा”, सिपाही पर तीन महिलाओं से 7 लाख रुपये ठगने का आरोप.

    “मंत्री के पास सिक्योरिटी में हूं, सरकारी नौकरी लगवा दूंगा”, सिपाही पर तीन महिलाओं से 7 लाख रुपये ठगने का आरोप.

    “मंत्री के पास सिक्योरिटी में हूं, सरकारी नौकरी लगवा दूंगा”, सिपाही पर तीन महिलाओं से 7 लाख रुपये ठगने का आरोप.

    जींद: हरियाणा के जींद जिले के जुलाना कस्बे की तीन महिलाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब सात लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। आरोप रोहतक पुलिस लाइन में तैनात एक सिपाही पर लगा है। महिलाओं की शिकायत पर जुलाना थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मंत्री के नाम का हवाला देकर दिया नौकरी का भरोसा

    शिकायतकर्ता सुकिता, ज्योति और सोनिया के मुताबिक, आरोपी रिंकू मूल रूप से जुलाना क्षेत्र के गांव गढ़वाली का रहने वाला है और रोहतक पुलिस लाइन में सिपाही के पद पर तैनात है। महिलाओं का आरोप है कि जून में उसने उनसे संपर्क कर दावा किया कि वह पहले विधायक अरविंद शर्मा की सुरक्षा में तैनात रह चुका है।

    आरोप है कि रिंकू ने महिलाओं को बताया कि अधिकारियों और संबंधित टीम के जरिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से विभिन्न विभागों में नौकरी लगवाई जा सकती है। इसके लिए उसने तीनों महिलाओं से कुल सात लाख रुपये देने को कहा।

    ऑनलाइन भुगतान और बैंक खाते में जमा कराए रुपये

    महिलाओं ने पुलिस को बताया कि आरोपी के कहने पर उन्होंने कुछ रकम गूगल पे और फोनपे के माध्यम से भेजी, जबकि बाकी रकम बैंक खाते में जमा कराई। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 16 जुलाई 2026 तक आंगनबाड़ी में नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिया था।

    तय समय तक नौकरी नहीं मिलने पर जब महिलाओं ने उससे पैसे और नियुक्ति के बारे में पूछताछ की, तो आरोप है कि वह लगातार बहाने बनाता रहा। इसके बाद तीनों महिलाओं ने पुलिस से शिकायत की।

    पुलिस ने दर्ज किया मामला

    जुलाना थाना पुलिस ने तीनों महिलाओं की शिकायत के आधार पर आरोपी सिपाही रिंकू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रूप से ठगी गई रकम की बरामदगी हुई है या नहीं।

    यह मामला सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सतर्क रहने की जरूरत भी बताता है। नौकरी के लिए किसी व्यक्ति को निजी तौर पर पैसे देने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया और नियुक्ति संबंधी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • उधार के फल का पैसा: लौटाने गई किशोरी से दुष्कर्म का आरोप, दुकानदार गिरफ्तार

    उधार के फल का पैसा: लौटाने गई किशोरी से दुष्कर्म का आरोप, दुकानदार गिरफ्तार

    उधार के फल का पैसा: लौटाने गई किशोरी से दुष्कर्म का आरोप, दुकानदार गिरफ्तार

    बिहार के गोपालगंज जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां फल की दुकान पर बकाया रकम चुकाने पहुंची एक किशोरी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगा है। घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम की मदद भी ली गई।

    बकाया रकम चुकाने दुकान पर पहुंची थी किशोरी

    पुलिस के अनुसार, मामला बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के राजापट्टी कोठी इलाके का है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अफताब आलम के रूप में बताई गई है, जो वहां फल की दुकान चलाता था।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, किशोरी ने पहले उसकी दुकान से उधार फल खरीदे थे। आरोप है कि 10 अक्टूबर 2026 को जब वह बकाया रकम चुकाने पहुंची, तो दुकानदार उसे बहला-फुसलाकर दुकान के पीछे बने गोदाम में ले गया। शिकायत के अनुसार, वहीं उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

    शिकायत के बाद पुलिस ने की कार्रवाई

    घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को बुलाया।

    पीड़िता को चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने जांच के दौरान नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजा गया

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    नाबालिग से जुड़े इस तरह के मामलों में पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा करना बेहद जरूरी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट और पुलिस की ओर से बताई गई जानकारी पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जाना चाहिए।

  • मोबाइल में हैं ये 3 ऐप्स? साइबर ठग कर सकते हैं रिमोट एक्सेस का गलत इस्तेमाल, बैंक खाते की सुरक्षा के लिए रहें सतर्क.

    मोबाइल में हैं ये 3 ऐप्स? साइबर ठग कर सकते हैं रिमोट एक्सेस का गलत इस्तेमाल, बैंक खाते की सुरक्षा के लिए रहें सतर्क.

    मोबाइल में हैं ये 3 ऐप्स? साइबर ठग कर सकते हैं रिमोट एक्सेस का गलत इस्तेमाल, बैंक खाते की सुरक्षा के लिए रहें सतर्क.

    आज के समय में स्मार्टफोन से बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान और जरूरी काम करना बेहद आसान हो गया है। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में ठग खुद को बैंक अधिकारी या तकनीकी सहायता कर्मचारी बताकर लोगों से मोबाइल में रिमोट एक्सेस या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करवा लेते हैं।

    AnyDesk, TeamViewer और QuickSupport जैसे ऐप्स का इस्तेमाल वैध तकनीकी सहायता के लिए भी किया जाता है। ये अपने आप में बैंक खाते को खाली करने वाले ऐप नहीं हैं, लेकिन यदि कोई अनजान व्यक्ति इनके जरिए आपके फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर ले, तो आपकी निजी जानकारी और वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

    1. AnyDesk: रिमोट एक्सेस देते समय रहें सावधान

    AnyDesk एक रिमोट डेस्कटॉप ऐप है, जिसका इस्तेमाल दूसरे डिवाइस को दूर से एक्सेस करने और तकनीकी सहायता देने के लिए किया जाता है।

    साइबर ठग इसका दुरुपयोग करके लोगों को अपने फोन या कंप्यूटर का एक्सेस देने के लिए मना सकते हैं। यदि उपयोगकर्ता अनजान व्यक्ति को अनुमति दे देता है, तो डिवाइस की सेटिंग और दी गई अनुमतियों के आधार पर उसकी गतिविधियों या संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने का खतरा हो सकता है।

    सावधानी: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस न दें और बैंकिंग के दौरान किसी के साथ अपनी स्क्रीन साझा न करें।

    2. TeamViewer: तकनीकी सहायता के नाम पर हो सकती है ठगी

    TeamViewer भी एक लोकप्रिय रिमोट सपोर्ट टूल है। इसका इस्तेमाल दफ्तरों और तकनीकी सहायता में किया जाता है, लेकिन धोखेबाज इसका नाम लेकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।

    उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति खुद को बैंक कर्मचारी बताकर कह सकता है कि खाते की समस्या ठीक करने के लिए यह ऐप डाउनलोड करना जरूरी है। इसके बाद वह उपयोगकर्ता से एक्सेस कोड या अनुमति मांग सकता है।

    याद रखें, केवल ऐप इंस्टॉल होने का अर्थ यह नहीं है कि आपका बैंक खाता खतरे में है। जोखिम तब बढ़ता है जब आप किसी अविश्वसनीय व्यक्ति को डिवाइस का एक्सेस देते हैं या उसके निर्देशों पर संवेदनशील जानकारी साझा करते हैं।

    3. QuickSupport: अनजान व्यक्ति को एक्सेस देना पड़ सकता है भारी

    QuickSupport का इस्तेमाल भी तकनीकी सहायता के लिए किया जाता है। इसके जरिए किसी डिवाइस की समस्या दूर करने में मदद मिल सकती है। लेकिन यदि कोई ठग आपको इसके माध्यम से रिमोट सपोर्ट देने के बहाने फोन का एक्सेस लेने के लिए राजी कर ले, तो इसका दुरुपयोग संभव है।

    इसलिए किसी भी अनजान कॉल, संदेश या संदिग्ध लिंक के जरिए तकनीकी सहायता लेने से बचें। सहायता की जरूरत हो तो संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा से संपर्क करें।

    क्या फोन से इन ऐप्स को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए?

    जरूरी नहीं। यदि आप इनमें से किसी ऐप का इस्तेमाल काम या विश्वसनीय तकनीकी सहायता के लिए करते हैं, तो केवल उसका फोन में होना अपने आप में खतरे का प्रमाण नहीं है।

    हालांकि, यदि कोई अनजान व्यक्ति आपको ऐप डाउनलोड करने के लिए कहे, आपने गलती से किसी को रिमोट एक्सेस दे दिया हो या अब उस ऐप की जरूरत नहीं है, तो ये कदम उठाएं:

    • चल रहे रिमोट-एक्सेस सत्र को तुरंत बंद करें।
    • ऐप की अनुमतियां जांचें और जरूरत न होने पर उसे अनइंस्टॉल करें।
    • यदि आपने बैंकिंग जानकारी साझा की है, तो सुरक्षित डिवाइस से अपने बैंक से संपर्क करें और जरूरी सुरक्षा कदम उठाएं।
    • बैंक खाते के लेन-देन पर नजर रखें और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत बैंक को दें।
    • OTP, UPI PIN, पासवर्ड या कार्ड की गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

    साइबर ठगी हो जाए तो कहां करें शिकायत?

    अगर आपके खाते से बिना अनुमति पैसे निकल गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और भारत की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह लेख साइबर सुरक्षा से जुड़ी सामान्य जानकारी पर आधारित है। AnyDesk, TeamViewer और QuickSupport वैध उपयोग वाले ऐप्स हैं; खतरा मुख्य रूप से इनके अनधिकृत या धोखाधड़ीपूर्ण इस्तेमाल से पैदा होता है।

  • दहेज की मांग और दो बेटियां होने पर विवाहिता को प्रताड़ित करने का आरोप, मारपीट कर घर से निकाला.

    दहेज की मांग और दो बेटियां होने पर विवाहिता को प्रताड़ित करने का आरोप, मारपीट कर घर से निकाला.

    दहेज की मांग और दो बेटियां होने पर विवाहिता को प्रताड़ित करने का आरोप, मारपीट कर घर से निकाला.

    समालखा: हरियाणा के समालखा क्षेत्र में दहेज की मांग पूरी न होने और दो बेटियों को जन्म देने के कारण एक विवाहिता को कथित तौर पर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। पीड़िता ने अपने पति और ससुराल पक्ष के छह अन्य सदस्यों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। महिला का आरोप है कि उसके साथ मारपीट करने के बाद उसे घर से बाहर निकाल दिया गया और दोबारा लौटने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

    वजीरपुर टिटाना निवासी मनीषा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी 12 मार्च 2022 को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जलपुरा गांव निवासी अमन के साथ हुई थी। पीड़िता के अनुसार, उसके परिवार ने शादी में अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दान-दहेज दिया था, लेकिन इसके बावजूद ससुराल पक्ष के लोग संतुष्ट नहीं थे। आरोप है कि उससे लगातार अतिरिक्त दहेज लाने की मांग की जाती थी और इस वजह से उसे मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था।

    दो बेटियां होने पर ताने देने का आरोप

    मनीषा का आरोप है कि उसकी दो बेटियां हैं और दोनों के जन्म के बाद भी ससुराल वालों का व्यवहार नहीं बदला। शिकायत के मुताबिक, सास और जेठानियां बेटियां पैदा होने को लेकर उसे ताने देती थीं और अपमानित करती थीं।

    पीड़िता ने आरोप लगाया कि 21 सितंबर को उसके पति अमन, जेठ सिकंदर, रवि और सुंदर के साथ सास तथा जेठानियों रिंकी और पिंकी ने मिलकर उसके साथ मारपीट की। महिला के मुताबिक, आरोपियों ने डंडों और लात-घूंसों से हमला किया और बाल पकड़कर उसे घर से बाहर निकाल दिया।

    पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    शिकायत के अनुसार, घर से निकाले जाने के बाद महिला ने फोन पर अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी। उसने आरोप लगाया कि उसे दोबारा घर लौटने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।

    समालखा थाना प्रभारी महिपाल के अनुसार, महिला की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले में पुलिस की जांच

  • शादी का वादा कर शोषण: और 4 लाख रुपये लेने का आरोप, होमगार्ड जवान के खिलाफ युवती ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा.

    शादी का वादा कर शोषण: और 4 लाख रुपये लेने का आरोप, होमगार्ड जवान के खिलाफ युवती ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा.

    शादी का वादा कर शोषण: और 4 लाख रुपये लेने का आरोप, होमगार्ड जवान के खिलाफ युवती ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा.

    बिहार के सारण जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक होमगार्ड जवान पर युवती को शादी का भरोसा देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण करने, निजी सामग्री के जरिए ब्लैकमेल करने और उसके परिजनों से 4 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। मामले में पीड़िता ने न्यायालय में परिवाद दायर कर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    नाबालिग होने के दौरान संपर्क में आने का आरोप

    मामला अमनौर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया गया है। न्यायालय में दायर परिवाद के अनुसार, जुलाई 2020 में जब युवती नाबालिग थी, तब आरोपी ने उससे बातचीत शुरू की थी।

    पीड़िता ने आरोप लगाया कि 30 मई 2021 को आरोपी उसके घर में घुसा और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान निजी सामग्री तैयार करने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, बाद में उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाया जाता रहा।

    ये सभी आरोप परिवाद में दर्ज दावों पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी है।

    शादी की बात के बाद रुपये देने का दावा

    पीड़िता के अनुसार, बालिग होने के बाद आरोपी से शादी की बात तय हुई थी। इसी सिलसिले में उसके परिजनों ने आरोपी के पिता को 29 अक्टूबर 2024 और 24 मार्च 2025 को दो अलग-अलग किस्तों में 2-2 लाख रुपये दिए थे। इस तरह कुल 4 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है।

    शिकायत में आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी पक्ष ने शादी करने से इनकार कर दिया। जब युवती के परिजनों ने रुपये वापस मांगे, तो उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई।

    न्यायालय से कार्रवाई की मांग

    पीड़िता ने अपने परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है।

    अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और आरोपों की जांच महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी में आरोपी का पक्ष या आरोपों पर उसका आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को फिलहाल सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता।

    मामले में आगे क्या होगा?

    न्यायालय में दायर परिवाद के आधार पर आगे की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार चलेगी। जांच में जुटाए गए साक्ष्य, संबंधित पक्षों के बयान और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट और न्यायालय में दायर परिवाद में बताए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।

  • फर्जी DigiLocker ऐप से सावधान! एक गलती से खतरे में पड़ सकते हैं आपके निजी दस्तावेज, ऐसे करें असली ऐप की पहचान.

    फर्जी DigiLocker ऐप से सावधान! एक गलती से खतरे में पड़ सकते हैं आपके निजी दस्तावेज, ऐसे करें असली ऐप की पहचान.

    फर्जी DigiLocker ऐप से सावधान! एक गलती से खतरे में पड़ सकते हैं आपके निजी दस्तावेज, ऐसे करें असली ऐप की पहचान.

    आज के डिजिटल दौर में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मार्कशीट और अन्य जरूरी दस्तावेजों को मोबाइल में सुरक्षित रखना आसान हो गया है। इसी काम के लिए सरकार का DigiLocker प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति असली ऐप की जगह उससे मिलता-जुलता फर्जी ऐप डाउनलोड कर ले, तो उसकी निजी जानकारी और डिजिटल सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

    साइबर सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है कि ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जांचें और किसी अनजान लिंक पर भरोसा करके अपनी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।

    क्या है DigiLocker और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?

    DigiLocker भारत सरकार की डिजिटल पहल है, जिसके जरिए उपयोगकर्ता अपने डिजिटल दस्तावेजों को प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं। इसमें जारी किए गए प्रमाणित दस्तावेजों और उपयोगकर्ता द्वारा अपलोड की गई फाइलों के बीच अंतर समझना भी जरूरी है।

    ऐप सरकारी प्लेटफॉर्म होने के बावजूद उपयोगकर्ताओं को अपने खाते की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी ऐप में लॉगिन करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वह आधिकारिक ऐप ही है।

    फर्जी ऐप आपकी जानकारी के लिए कैसे खतरा बन सकता है?

    साइबर अपराधी कभी-कभी लोकप्रिय ऐप्स के नाम, लोगो या डिजाइन से मिलते-जुलते ऐप बनाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे किसी दुर्भावनापूर्ण ऐप को संवेदनशील जानकारी देने या अनावश्यक अनुमतियां देने पर निजी डेटा के दुरुपयोग का खतरा पैदा हो सकता है।

    संभावित जोखिमों में शामिल हैं:

    • निजी जानकारी और दस्तावेजों का दुरुपयोग।
    • लॉगिन विवरण या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश।
    • अनावश्यक मोबाइल अनुमतियों के जरिए डेटा तक पहुंच।
    • फर्जी लिंक या संदेशों के जरिए आगे साइबर ठगी का प्रयास।

    हालांकि, केवल किसी ऐप का नाम या डिजाइन मिलता-जुलता होने से यह साबित नहीं होता कि वह डेटा चोरी कर रहा है। इसकी प्रामाणिकता और सुरक्षा की जांच जरूरी है।

    असली DigiLocker ऐप की पहचान कैसे करें?

    ऐप डाउनलोड करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

    1. आधिकारिक वेबसाइट से शुरुआत करें

    DigiLocker की आधिकारिक वेबसाइट digilocker.gov.in खोलें और वहां दिए गए ऐप डाउनलोड लिंक का इस्तेमाल करें।

    2. डेवलपर का नाम जांचें

    ऐप स्टोर पर ऐप के प्रकाशक या डेवलपर की जानकारी देखें। आधिकारिक DigiLocker ऐप का संबंध भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (National e-Governance Division) से है।

    3. ऐप की अनुमतियों पर ध्यान दें

    ऐप जिन सुविधाओं तक पहुंच मांग रहा है, उन्हें ध्यान से देखें। ऐसी अनुमति देने से बचें जो ऐप के काम के लिए जरूरी न लगे।

    4. अनजान लिंक से डाउनलोड न करें

    WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर आए संदिग्ध लिंक से ऐप इंस्टॉल करने के बजाय आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय ऐप स्टोर का इस्तेमाल करें।

    5. OTP और पासवर्ड साझा न करें

    किसी व्यक्ति या संदिग्ध ऐप के साथ OTP, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। किसी के कहने पर स्क्रीन-शेयरिंग या रिमोट-एक्सेस ऐप भी इंस्टॉल न करें।

    अगर गलती से फर्जी ऐप डाउनलोड हो जाए तो क्या करें?

    अगर आपको संदेह है कि आपने कोई नकली या दुर्भावनापूर्ण ऐप इंस्टॉल कर लिया है, तो घबराने के बजाय ये कदम उठाएं:

    • ऐप का इस्तेमाल बंद करें और उसे अनइंस्टॉल करें।
    • मोबाइल की सेटिंग में जाकर उसकी दी गई अनुमतियां जांचें।
    • यदि आपने उसमें पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी दर्ज की है, तो किसी सुरक्षित डिवाइस से संबंधित पासवर्ड बदलें।
    • बैंकिंग जानकारी साझा हुई हो या वित्तीय नुकसान का संदेह हो, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें।
    • साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के लिए भारत की आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in का इस्तेमाल करें। वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर हेल्पलाइन 1930 पर जल्द संपर्क करें।

    मोबाइल में दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सावधानियां

    अपने मोबाइल और डिजिटल खातों को सुरक्षित रखने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स अपडेट रखें, मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और किसी भी संदिग्ध संदेश में दिए गए लिंक को खोलने से बचें। समय-समय पर अपने खाते की गतिविधियों और ऐप अनुमतियों की जांच करना भी उपयोगी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए तैयार किया गया है। किसी विशेष ऐप के फर्जी होने या डेटा चोरी करने की पुष्टि उसके सत्यापित विवरण और तकनीकी जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।