उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में, हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के बीच एक ऐसा स्थान है, जो आस्था, प्रकृति और रहस्य तीनों का अनोखा संगम माना जाता है। यह जगह है कालापानी का प्राचीन काली मंदिर। समुद्र तल से करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
कहा जाता है कि यहीं से काली नदी की शुरुआत होती है। लोगों की मान्यता है कि मंदिर के पास बहने वाली एक छोटी सी पवित्र धारा ही आगे चलकर काली नदी का रूप ले लेती है। यही काली नदी आगे जाकर भारत और नेपाल के बीच प्राकृतिक सीमा भी बनाती है। मंदिर परिसर में बहते इस जल को लोग देवी काली का आशीर्वाद मानते हैं और श्रद्धा के साथ इसे अपने साथ ले जाते हैं।
कालापानी का यह काली मंदिर आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अहम पड़ाव भी है। जो भी यात्री इस दुर्गम और दिव्य यात्रा पर निकलते हैं, वे यहां रुककर माता काली के दर्शन जरूर करते हैं और आगे की यात्रा के लिए आशीर्वाद लेते हैं। चारों तरफ फैली बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण इस जगह को और भी विशेष बना देते हैं।
मंदिर के पास ही व्यास गुफा भी स्थित है। मान्यता है कि महान ऋषि वेद व्यास ने इसी गुफा में बैठकर कठोर तपस्या की थी और यहीं से उन्होंने ज्ञान की अलौकिक रोशनी से मानवता को मार्ग दिखाया। इसी कारण यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि एक पवित्र तपोभूमि भी माना जाता है।लोक मान्यता के अनुसार, यह जगह पांडवों की कथाओं से भी जुड़ी हुई है। माना जाता है कि अपने वनवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र में कुछ समय बिताया था।
आसपास के कई स्थानों के नाम जैसे भीम शिला और युधिष्ठिर मार्ग इन्हीं कथाओं से जुड़े बताए जाते हैं। इस क्षेत्र में रहने वाला भोटिया समुदाय काली माता को अपना रक्षक देवता मानता है। उनका विश्वास है कि माता काली इस पूरी घाटी की रक्षा करती हैं और सच्चे मन से आने वाले यात्रियों की यात्रा सुरक्षित बनाती हैं।हालांकि कालापानी तक पहुंचना आसान नहीं है। यात्रियों को धारचूला से कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है। लेकिन जो लोग यहां तक पहुंचते हैं, उनके लिए यह अनुभव जीवनभर याद रहने वाला बन जाता है।
साइबर क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है. साइबर ठगी के एक से बढ़कर एक तरीके सामने आ रहे हैं. साइबर ठगी के एक नए और बेहद खतरनाक तरीके ने देशभर में कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, सीएफओ और वित्तीय विभाग से जुड़े कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. साइबर ठग अब WhatsApp, SMS और ई-मेल के जरिए अकाउंट स्टेटमेंट या सरकारी नियामकीय नोटिस के नाम पर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही कंप्यूटर और WhatsApp अकाउंट उनके नियंत्रण में जा सकता है. इस पूरे खेल को साइबर सुरक्षा एजेंसियां ‘Boss Scam’ या CEO Impersonation Fraud के तौर पर देख रही हैं.
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C, गृह मंत्रालय की साइबर अपराध नियंत्रण इकाई, ने इस खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है. हाल के दिनों में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों से इस तरह के एक जैसे मामलों की शिकायतें सामने आई हैं. I4C के मुताबिक National Cyber Crime Reporting Portal यानी NCRP पर इस तरह की शिकायतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है.
एक ZIP फाइल और पूरा WhatsApp अकाउंट खतरे में-
इस साइबर ठगी की शुरुआत बेहद सामान्य दिखाई देने वाले संदेश से होती है. पीड़ित को WhatsApp, SMS या ई-मेल पर ‘Statement of Account.zip’, तारीख के साथ ‘0714 Statement of Account.zip’, ‘RBI.zip’ या ‘MCA.zip’ जैसी फाइल भेजी जाती है.
कई मामलों में संदेश इस तरह तैयार किया जाता है कि वह किसी कंपनी के नियमित अकाउंट स्टेटमेंट जैसा लगे. वहीं कुछ संदेशों में RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक या MCA यानी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से तत्काल अनुपालन करने का दावा किया जाता है. साइबर अपराधी जानबूझकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति बिना ज्यादा सोच-विचार किए फाइल खोल दे.
I4C के मुताबिक इन ZIP फाइलों के भीतर एक खतरनाक Windows executable यानी .exe फाइल और उसके साथ एक .dll फाइल होती है। जैसे ही पीड़ित इसे Windows कंप्यूटर या लैपटॉप पर extract करके खोलता है, सिस्टम में Trojan प्रकार का malware सक्रिय हो जाता है.
WhatsApp Web को बनाया जा रहा निशाना-
इस हमले की सबसे गंभीर बात यह है कि malware सिर्फ कंप्यूटर को संक्रमित करने तक सीमित नहीं रहता. यह पीड़ित के सक्रिय WhatsApp Web session को hijack कर सकता है. इसके बाद साइबर अपराधी पीड़ित के WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल उसी व्यक्ति के संपर्कों और ग्रुपों तक पहुंचने के लिए करते हैं.
संक्रमित WhatsApp अकाउंट से वही malicious file आगे दूसरे लोगों को भेजी जाती है. कई बार संदेश में लिखा होता है कि फाइल को कंपनी के Finance Manager से verification के लिए साझा करें और कंप्यूटर पर खोलें. इस तरह एक संक्रमित कंप्यूटर से शुरू हुआ हमला धीरे-धीरे पूरी कंपनी के नेटवर्क और कर्मचारियों तक पहुंच सकता है.
यानी जिस व्यक्ति को फाइल भेजी गई, उसके भरोसेमंद WhatsApp अकाउंट से वही फाइल आगे भेजे जाने के कारण दूसरे लोग भी इसे असली समझकर खोल सकते हैं. यही इस पूरे अभियान को बेहद खतरनाक बनाता है.
‘बॉस’ बनकर होती है पैसे की मांग-
साइबर ठगों का अंतिम लक्ष्य अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी होता है. I4C के अनुसार इस चरण में अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी या कंपनी के CEO के वास्तविक WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ मामलों में हमलावर अपने नियंत्रण वाले नंबर को मोबाइल में ‘CEO’ के नाम से सेव कर देते हैं.
इसके बाद कंपनी के अकाउंट्स या फाइनेंस कर्मचारियों को बेहद जरूरी और तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है. संदेश में कहा जा सकता है कि किसी खाते में तुरंत रकम ट्रांसफर करनी है या किसी विशेष बैंक अकाउंट में भुगतान करना है.
कंपनी का कर्मचारी जब संदेश को अपने वरिष्ठ अधिकारी का समझकर निर्देश का पालन करता है तो रकम साइबर अपराधियों के mule bank accounts में पहुंच जाती है. इसीलिए इसे ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है, क्योंकि अपराधी कंपनी के ‘बॉस’ या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का फायदा उठाकर कर्मचारियों को ठगी का शिकार बनाते हैं.
22 जून को I4C ने जारी किया था एडवाइजरी-
I4C ने इस उभरते खतरे को लेकर 22 जून 2026 को भी विस्तृत एडवाइजरी जारी की थी. इसका विषय “Regulatory and Executive Impersonation for WhatsApp Account Takeover using Malicious Windows Executables and High Value Financial Fraud” था.
इस एडवाइजरी में बताया गया था कि किस तरह regulatory communication और executive impersonation की आड़ में WhatsApp अकाउंट takeover और उसके बाद high-value financial fraud को अंजाम दिया जा रहा है.
हाल में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों से समान modus operandi सामने आने के बाद साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने इस खतरे को लेकर फिर से चेतावनी दी है.
DLL Sideloading से बच निकलने की कोशिश-
I4C की National Cybercrime Threat Analytics Unit यानी NCTAU की तकनीकी जांच में सामने आया है कि इस अभियान के पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक ये नेटवर्क राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी सक्रिय हो सकते हैं और अभियान में ऐसे advanced malware का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें propagation और detection-evasion की क्षमता है.
इस malware में DLL Sideloading जैसी तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. इसका उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों की नजर से बचते हुए malware को सिस्टम में सक्रिय करना और संक्रमण को आगे बढ़ाना है.
इस मामले की जांच संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों और तकनीकी एजेंसियों के साथ समन्वय में की जा रही है.
CA, CFO और Finance टीम सबसे ज्यादा जोखिम में-
I4C ने विशेष रूप से उन लोगों को सावधान किया है जो कंपनियों के वित्तीय लेन-देन से जुड़े हैं. चूंकि malware Windows कंप्यूटरों को निशाना बनाता है और भेजी जाने वाली फाइलें अकाउंट स्टेटमेंट तथा regulatory compliance से जुड़ी होती हैं, इसलिए Chartered Accountants, Company Directors, CFOs और Finance & Accounts personnel विशेष जोखिम में हैं.
कॉरपोरेट कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे अपने कर्मचारियों, खासकर finance teams को तत्काल इस खतरे के बारे में जागरूक करें.
सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि WhatsApp या ई-मेल पर किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया urgent fund transfer या account-change request मिलने पर सिर्फ संदेश के आधार पर कार्रवाई न की जाए. ऐसे निर्देशों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि सीधे फोन कॉल या व्यक्तिगत रूप से बातचीत करके की जानी चाहिए.
10 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया गया-
I4C ने इस अभियान से जुड़े malware के threat signals और technical indicators CERT-In, Microsoft Defender तथा भारतीय antivirus कंपनियों—Quick Heal, K7 Computing और Net Protector—के साथ साझा किए हैं।इसका उद्देश्य malicious files की तेजी से पहचान, blocking और removal सुनिश्चित करना है. I4C के मुताबिक इन coordinated interventions के जरिए अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को इस अभियान से सुरक्षित किया जा चुका है. इसके अलावा Sahyog Portal के जरिए malware को लगातार block किया जा रहा है.
58 हजार से ज्यादा संभावित पीड़ितों को SMS अलर्ट-
I4C की ओर से संभावित प्रभावित लोगों को ‘I4CMHA-G’ SMS header के जरिए अलर्ट भेजे जा रहे हैं. पिछले 30 दिनों में इस माध्यम से 58,000 से ज्यादा संभावित पीड़ितों को सूचना दी गई है. I4C ने नागरिकों से अपील की है कि अगर उन्हें ‘I4CMHA-G’ से कोई चेतावनी मिलती है तो उसे गंभीरता से लें और उसमें दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन करें.
RBI या कोई regulator WhatsApp पर ZIP फाइल नहीं भेजता-
I4C ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अज्ञात या unverifed source से मिली .zip फाइल या executable को download, extract या open न करें. किसी regulatory communication के नाम पर भेजी गई फाइल को खोलने से पहले उसके स्रोत की पुष्टि जरूरी है. खास तौर पर वित्तीय और सरकारी संस्थाओं के नाम पर आने वाले ऐसे संदेशों से सावधान रहने की जरूरत है.
WhatsApp की Settings > Linked Devices में जाकर समय-समय पर यह भी जांचना चाहिए कि कौन-कौन से डिवाइस WhatsApp अकाउंट से जुड़े हुए हैं. जिन sessions की जरूरत नहीं है, उन्हें तुरंत log out करना चाहिए.
कंपनियों के सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के लिए भी अलर्ट-
I4C ने कंपनियों के system administrators को भी जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है. Unknown .exe और .dll files को user profile directories से execute होने से रोकने के लिए software restriction policies लागू की जानी चाहिए. साथ ही सभी Windows endpoints पर updated anti-malware solutions सुनिश्चित किए जाने चाहिए. कर्मचारियों को यह भी समझाना जरूरी है कि सिर्फ antivirus installed होना पर्याप्त नहीं है; suspicious files को खोलने से बचना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है.
अगर WhatsApp अकाउंट हैक हो जाए तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति का WhatsApp अकाउंट compromised होने का संदेह है तो सबसे पहले सभी linked devices को log out करना चाहिए. इसके बाद अपने सभी contacts और WhatsApp groups को तुरंत चेतावनी दें कि उनके अकाउंट से भेजी गई किसी भी file को न खोलें. जिस Windows कंप्यूटर पर संदिग्ध ZIP या executable file खोली गई हो, उसे updated antivirus से तुरंत scan कराया जाना चाहिए. जरूरत पड़ने पर संबंधित तकनीकी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करना चाहिए. अगर इस तरह की साइबर ठगी में आर्थिक नुकसान हुआ है या संदिग्ध communication मिला है तो तत्काल National Cyber Crime Helpline 1930 पर शिकायत करनी चाहिए या National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए.
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव-
‘Boss Scam’ की सबसे बड़ी ताकत तकनीक से ज्यादा भरोसा है. साइबर अपराधी किसी अजनबी नंबर से नहीं, बल्कि कई बार उसी WhatsApp अकाउंट से संदेश भेजते हैं, जिस पर कर्मचारी पहले से भरोसा करता है. यही वजह है कि कंपनी के भीतर cybersecurity awareness बेहद जरूरी हो गई है. अकाउंट स्टेटमेंट, RBI या MCA notice, Income Tax communication या CEO के नाम पर आया कोई भी urgent message हो, बिना स्वतंत्र पुष्टि के फाइल न खोलें और पैसे ट्रांसफर न करें. एक ZIP फाइल खोलने की छोटी-सी गलती न सिर्फ WhatsApp अकाउंट को खतरे में डाल सकती है, बल्कि पूरी कंपनी के वित्तीय नेटवर्क को साइबर अपराधियों के लिए खोल सकती है. ऐसे में I4C की चेतावनी साफ है- संदिग्ध फाइल से दूरी, हर वित्तीय निर्देश की दोहरी पुष्टि और समय रहते शिकायत ही इस नए साइबर खतरे से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.
एक मजबूत शादी सिर्फ बड़े सरप्राइज या महंगे तोहफों से नहीं चलती। कई बार दिन के आखिर में बिताए गए कुछ मिनट ही रिश्ते को पहले से ज्यादा मजबूत बना देते हैं। अगर पति-पत्नी एक-दूसरे को समय दें, सम्मान दें और खुलकर बात करें, तो छोटी-छोटी गलतफहमियां भी आसानी से दूर हो सकती हैं।
अगर आप अपने रिश्ते में प्यार और अपनापन बनाए रखना चाहते हैं, तो सोने से पहले ये तीन आसान आदतें अपनाना फायदेमंद हो सकता है।
1. दिनभर की बातें जरूर करें
दिनभर की भागदौड़ के बाद दोनों ही शारीरिक और मानसिक रूप से थके हो सकते हैं। ऐसे में सोने से पहले कुछ मिनट अपने साथी के साथ बैठकर यह जरूर पूछें कि उनका दिन कैसा रहा।
उनकी बातें ध्यान से सुनें, बिना बीच में टोके। कई बार केवल किसी का धैर्य से सुन लेना भी रिश्ते में विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है।
2. प्यार से बात करें और भावनाएं साझा करें
हर दिन समस्याओं और तनाव की बातें करना जरूरी नहीं होता। दिन खत्म होने से पहले अपने साथी से प्यार भरी बातें करें, उनका हाल पूछें और अगर वे किसी बात को लेकर परेशान हैं तो उनका साथ दें।
साथ ही अपनी भावनाएं भी खुलकर साझा करें। जब दोनों एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं, तो रिश्ता पहले से ज्यादा मजबूत बनता है।
3. छोटे-छोटे सरप्राइज रिश्ते में नई खुशी ला सकते हैं
अपने साथी को खुश करने के लिए हमेशा महंगे उपहारों की जरूरत नहीं होती। कभी उनका पसंदीदा फूल, पसंदीदा मिठाई या एक प्यारा-सा नोट भी उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है।
आप चाहें तो अगले वीकेंड की योजना साथ बैठकर बना सकते हैं या दिनभर की कोई अच्छी बात साझा कर सकते हैं। ऐसे छोटे-छोटे पल रिश्ते को खास बनाते हैं।
निष्कर्ष
एक सफल वैवाहिक रिश्ता रोज़ की छोटी-छोटी अच्छी आदतों पर टिका होता है। सम्मान, बातचीत, भरोसा और साथ बिताया गया समय किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत हैं। अगर पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे की भावनाओं को समझने और समय देने की कोशिश करें, तो रिश्ते में प्यार और खुशियां लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
मध्य प्रदेश का खजुराहो अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां मौजूद मंदिरों की नक्काशी और वास्तुकला लोगों को हैरान करती है, लेकिन इसी परिसर में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर भी है, जिसके बारे में एक रहस्यमयी मान्यता सदियों से चली आ रही है। यह मंदिर है मातंगेश्वर मंदिर।
कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग पर जब भक्त जल चढ़ाते हैं तो वह पानी कुछ ही समय में दिखाई देना बंद हो जाता है। इसी वजह से श्रद्धालुओं के बीच यह धारणा है कि यहां चढ़ाया गया जल किसी रहस्यमयी तरीके से शिवलिंग में समा जाता है। हालांकि, इस दावे के पीछे किसी वैज्ञानिक जांच से प्रमाणित कोई विशेष अलौकिक प्रक्रिया सामने नहीं आई है। इसे मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यता के रूप में देखा जाता है।
खजुराहो के सबसे खास मंदिरों में शामिल है मातंगेश्वर
मातंगेश्वर मंदिर खजुराहो के पश्चिमी समूह के मंदिरों में स्थित है। खास बात यह है कि खजुराहो के अधिकांश प्राचीन मंदिर आज ऐतिहासिक स्मारक के रूप में देखे जाते हैं, जबकि मातंगेश्वर मंदिर में आज भी नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है।
भारत सरकार के आधिकारिक पर्यटन पोर्टल के मुताबिक, मातंगेश्वर मंदिर खजुराहो के उन प्रमुख मंदिरों में से है जहां आज भी धार्मिक गतिविधियां जारी हैं। यहां सुबह और दोपहर पूजा होती है।
क्यों खास है यहां का शिवलिंग?
मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा की जाती है। भक्त यहां जल, दूध, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इसी दौरान पानी के गायब होने की कहानी सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है।
स्थानीय स्तर पर यह मान्यता सुनने को मिलती है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल कुछ देर बाद वहां दिखाई नहीं देता। इसे कई श्रद्धालु भगवान शिव की विशेष शक्ति से जोड़कर देखते हैं।
हालांकि, जल के गायब होने की घटना को किसी अलौकिक शक्ति का प्रमाण मानने से पहले वैज्ञानिक कारणों की जांच जरूरी है। मंदिर की संरचना, जल निकासी की व्यवस्था, सतह की बनावट या अन्य भौतिक कारण इसके पीछे हो सकते हैं। इसलिए इसे निश्चित रूप से ‘चमत्कार’ कहना उचित नहीं होगा।
करीब एक हजार साल पुराना है खजुराहो का मंदिर समूह
खजुराहो का मंदिर समूह चंदेल राजवंश के समय विकसित हुआ। आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार, यहां के मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच हुआ था। खजुराहो के मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।
कभी खजुराहो में बड़ी संख्या में मंदिर हुआ करते थे। समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए और आज केवल कुछ प्रमुख मंदिर ही सुरक्षित बचे हैं।
खजुराहो के मंदिरों को मुख्य रूप से पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी समूह में बांटा गया है। मातंगेश्वर मंदिर पश्चिमी समूह का हिस्सा है।
खजुराहो के बाकी मंदिरों से अलग क्यों है मातंगेश्वर?
मातंगेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह केवल ऐतिहासिक स्मारक नहीं है, बल्कि आज भी जीवंत धार्मिक स्थल है।
खजुराहो के कई मंदिरों में अब नियमित पूजा नहीं होती, लेकिन मातंगेश्वर में श्रद्धालु आज भी भगवान शिव की पूजा करने पहुंचते हैं। यही वजह है कि इतिहास और आस्था—दोनों नजरिए से यह मंदिर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।
क्या सच में शिवलिंग में समा जाता है जल?
यही इस मंदिर से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है।
जल चढ़ाने के बाद पानी दिखाई न देने की बात को लेकर अलग-अलग स्थानीय मान्यताएं प्रचलित हैं। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक पर्यटन स्रोत इस घटना को किसी अलौकिक या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित रहस्य के तौर पर स्थापित नहीं करते।
इसलिए इसे इस तरह समझना ज्यादा उचित है कि मातंगेश्वर मंदिर से जुड़ी जल वाली बात एक प्रचलित धार्मिक मान्यता है, जिसका श्रद्धालुओं के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व है।
वैज्ञानिक रूप से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए मंदिर की जल निकासी व्यवस्था और संरचना का विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा।
खजुराहो सिर्फ अपनी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध नहीं
खजुराहो को अक्सर यहां की प्रसिद्ध मूर्तियों और नक्काशी के कारण याद किया जाता है, लेकिन इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व इससे कहीं ज्यादा व्यापक है।
यहां शिव, विष्णु, सूर्य और जैन तीर्थंकरों को समर्पित मंदिर भी मौजूद हैं। आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार, खजुराहो के मंदिर मध्यकालीन भारत की कला, धर्म और स्थापत्य परंपरा की महत्वपूर्ण झलक देते हैं।
कंडारिया महादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर और मातंगेश्वर मंदिर पश्चिमी समूह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।
इतिहास और आस्था का अनोखा संगम
मातंगेश्वर मंदिर की खासियत सिर्फ इसका प्राचीन होना नहीं है। इसकी पहचान इस बात से भी है कि करीब एक हजार साल पुरानी खजुराहो की मंदिर परंपरा के बीच आज भी यहां पूजा की परंपरा जारी है।
यही कारण है कि जब श्रद्धालु मंदिर में जल चढ़ाते हैं और उसे कुछ समय बाद शिवलिंग के आसपास दिखाई नहीं देता देखते हैं, तो उनके मन में इसके प्रति रहस्य और आस्था दोनों बढ़ जाते हैं।
मातंगेश्वर मंदिर इसलिए सिर्फ एक पुराना मंदिर नहीं, बल्कि इतिहास, स्थापत्य, धार्मिक आस्था और लोकमान्यताओं का ऐसा संगम है, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ से शादी के बाद दुल्हन के कथित तौर पर घर से जेवर और नकदी लेकर फरार होने का मामला सामने आया है. सिंभावली थाना क्षेत्र के लिसड़ी गांव में एक युवक ने पुलिस से शिकायत कर आरोप लगाया है कि शादी के अगले ही दिन उसकी नवविवाहिता पत्नी घर से लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नकदी लेकर चली गई. सुबह जब परिवार के लोगों की नींद खुली तो दुल्हन घर में नहीं थी. काफी तलाश करने के बाद भी उसका पता नहीं चला.
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस दुल्हन की तलाश के साथ शादी कराने वाले लोगों और पूरे घटनाक्रम की भी पड़ताल कर रही है. इस बीच एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें महिला जाती हुई दिखाई दे रही है.
मंदिर में हुई थी शादी
पीड़ित युवक विनोद के मुताबिक, उसकी शादी रामपुर स्थित एक मंदिर में हुई थी. उसका कहना है कि मंदिर के पंडित के कहने पर उसने युवती से शादी की थी. पंडित से उसकी मुलाकात करीब दो-तीन महीने पहले हुई थी. शादी के बाद वह अपनी पत्नी को लेकर हापुड़ के लिसड़ी गांव स्थित अपने घर पहुंचा. शादी के बाद उसकी पत्नी घर में सिर्फ एक रात और एक दिन रही. इसके बाद रात में जब परिवार के लोग सो रहे थे, वह घर से निकल गई.
जेवर और नकदी लेकर जाने का आरोप
विनोद ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी शादी के दौरान पहने हुए सोने-चांदी के जेवर अपने साथ ले गई. इसके अलावा घर में मौजूद नकदी भी लेकर जाने का आरोप है. सुबह परिवार के लोगों को उसके घर से गायब होने की जानकारी हुई. इसके बाद आसपास और रिश्तेदारी में उसकी तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. पीड़ित के अनुसार, शादी के सिलसिले में युवती की मां को एक लाख रुपये नकद भी दिए गए थे.
CCTV फुटेज में जाती दिखी महिला
घटना के बाद सामने आए CCTV फुटेज में एक महिला तेज कदमों से जाती हुई नजर आ रही है. पुलिस इस फुटेज की भी जांच कर रही है. हालांकि, फुटेज में दिखाई दे रही महिला वही नवविवाहिता है या नहीं, इसकी पुलिस की ओर से अभी पुष्टि नहीं की गई है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है. पुलिस शादी से जुड़े लोगों, मंदिर में मौजूद लोगों और दुल्हन के बारे में मिली जानकारी जुटा रही है.
Sam Kee Building कनाडा के Vancouver शहर में स्थित एक अनोखी इमारत है, जो अपनी असाधारण पतली बनावट के कारण दुनियाभर में मशहूर है। पेंडर स्ट्रीट पर बनी यह इमारत Guinness World Records में दुनिया की सबसे संकरी व्यावसायिक इमारत के रूप में दर्ज है। इसकी चौड़ाई मात्र 4 फीट 11 इंच है, जो इसे एक अनोखा वास्तु उदाहरण बनाती है। बता दें कि एक चीनी व्यापारी के अपमान और गुस्से से उपजा विरोध का प्रतीक है, जिसने सरकार को अपनी जिद के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया।
जानें इस इमारत की कहानी
इस इमारत की कहानी 1902 से शुरू होती है, जब चीनी मूल के व्यापारी Chang Toy, जिन्हें सैम की के नाम से जाना जाता था, ने एक बड़ा प्लॉट खरीदा था, लेकिन 1912 में नगर प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण के लिए उनकी जमीन का बड़ा हिस्सा अधिग्रहित कर लिया। मुआवजा न मिलने पर टॉय ने इसे अपमान माना और बची हुई बेहद पतली जमीन पर ही इमारत बनाने का निश्चय किया। Chang Toy आर्किटेक्ट ब्राउन और गिलम की मदद से एक स्टील-फ्रेम संरचना तैयार करवाई, जो सीमित जगह में भी खड़ी हो सके। इमारत का निचला हिस्सा बेहद संकरा है, जबकि ऊपर की मंजिल पर बाहर की ओर निकली खिड़कियों (बे विंडो) के कारण चौड़ाई करीब 6 फीट तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, इसका बेसमेंट फुटपाथ के नीचे तक फैला हुआ है, जिससे उपयोगी जगह बढ़ाई गई।
दुकानों के रूप में किया जाता है उपयोग
शुरुआत में ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल रहने के लिए और निचले हिस्से का उपयोग दुकानों के रूप में किया जाता था। बेसमेंट खासतौर पर स्थानीय चीनी समुदाय के लिए उपयोगी था, जहां सार्वजनिक स्नानघर और नाई की सेवाएं उपलब्ध थीं। समय के साथ इस इमारत से जुड़ी कई अफवाहें भी फैलीं, जैसे कि इसके नीचे गुप्त सुरंगें हैं, हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं मिला।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
यह इमारत न केवल अपने अनोखे डिजाइन के लिए, बल्कि चाइनाटाउन के सांस्कृतिक इतिहास में योगदान के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसे 1966 और 1986 में पुनर्स्थापित किया गया। आज भी यह इमारत पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और वास्तुकला की दुनिया में एक अनोखी मिसाल मानी जाती है।
मोटापा आज के समय में बहुत कॉमन प्रॉब्लम है। कई लोग इस समस्या से परेशान हैं, ऐसे में लोग तेजी से वजन कम करना चाहते हैं। इसके लिए लोग शॉर्टकट भी अपनाते हैं। वहीं कुछ लोग तेजी से वजन घटाने के लिए रोजाना खूब चलते हैं। वजन घटाने के लिए लोग टारगेट तक सेट करते हैं। ज्यादातर लोगों का गोल एक हफ्ते में 5 किलो वजन घटाना होता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या एक हफ्ते में 5 किलो वजन घटाया जा सकता है और अगर घटाया जा सकता है तो इसका शरीर पर क्या असर होता है। डॉ वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ, बता रही हैं कि एक हफ्ते में 5 किलो वजन कम करना सेफ है या नहीं।
क्या कहती हैं डाइटिशियन
एक हफ्ते में 5 किलो वजन घटाने के लिए बहुत बड़ा कैलोरी डेफिसिट चाहिए, जिसे केवल पैदल चलकर एक सप्ताह में हासिल करना अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं है और ऐसा करना कमजोरी, डिहाइड्रेशन और मांसपेशियों की कमजोरी को बढ़ा सकता है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए शुरुआत में प्रतिदिन 5–7 किलोमीटर या लगभग 7,000–10,000 कदम चलना एक लक्ष्य हो सकता है। लेकिन कैलोरी बर्न व्यक्ति के वजन, चलने की गति, उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। वजन घटाने में केवल वॉकिंग नहीं, बल्कि कैलोरी-कंट्रोल, संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, नींद और फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है।
वेट लॉस का सही तरीका
अगर आप हेल्दी तरीके से वजन घटाना चाहते हैं तो हफ्ते में लगभग 0.5–1 किलो वजन घटाना सेफ हो सकता है। 5 किलो वजन एक महीने या कुछ हफ्तों के अंदर घटाना स्वास्थ के लिए भी सेफ होता है। अगर आप एक हफ्ते में 5 किलो वजन घटाते हैं तो इसका असर आपकी ओवरऑल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। अगर आप वॉक करके वजन घटाना चाहते हैं तो इसके साथ आपको अपनी डाइट में चीनी, मीठे पेय, तले हुए खाद्य पदार्थ और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड कम करे तथा सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करे। डॉ दीक्षा सहवाग कहती हैं कि मेरी सलाह है कि किलोमीटर की संख्या के बजाय स्थिरता पर ध्यान दें। रोज 30–60 मिनट ब्रिस्क वॉक से शुरुआत करें और अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं।
शिमला में नशे की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस ने एक युवक को कथित तौर पर चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने चेकिंग के दौरान संदिग्ध हरकत करते हुए एक सिगरेट की डिब्बी को अपने पैरों के नीचे छिपाने की कोशिश की थी। तलाशी लेने पर डिब्बी के अंदर से करीब 12 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ।
मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर शोघी पुलिस चौकी के पास का है। पुलिस की विशेष टीम ने यहां नाका लगाया हुआ था। इसी दौरान सोलन की तरफ से आ रही एक बस को जांच के लिए रोका गया। पुलिसकर्मी जब बस के अंदर यात्रियों की चेकिंग कर रहे थे, तभी एक युवक उन्हें देखकर घबरा गया।
पुलिस के मुताबिक, युवक ने अचानक अपनी जींस की जेब से एक वस्तु निकाली और उसे सीट के पास अपने पैरों के नीचे छिपाने का प्रयास किया। उसकी इस हरकत पर पुलिस को शक हुआ और टीम ने तुरंत युवक को रोककर उसके आसपास तलाशी ली।
तलाशी के दौरान पैरों के पास से एक सिगरेट की डिब्बी बरामद हुई। पुलिस ने डिब्बी खोलकर जांच की तो उसके भीतर एक पारदर्शी पॉलीथीन पाउच मिला। इसमें हल्के भूरे रंग का पाउडरनुमा पदार्थ रखा हुआ था। जांच के बाद इसे चिट्टा बताया गया। बरामद पदार्थ का वजन करीब 12 ग्राम बताया गया है।
पुलिस ने नशीले पदार्थ को कब्जे में लेकर युवक को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान 25 वर्षीय मयंक नेगटा के रूप में हुई है।
इस मामले में बालूगंज पुलिस थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत केस दर्ज किया गया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कथित तौर पर यह नशीला पदार्थ कहां से लेकर आया था और इसकी सप्लाई आगे किसे की जानी थी।
जांच के तहत पुलिस आरोपी के नशे के कारोबार से जुड़े संभावित संपर्कों और लेन-देन की जानकारी भी जुटा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
मानव शरीर में लिवर एक ऐसी ‘केमिकल फैक्ट्री’ की तरह काम करता है, जो भोजन को पचाने,टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालने और ऊर्जा को स्टोर करने जैसे 500 से अधिक जरूरी काम अकेले संभालता है। लेकिन जब हमारी खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण इस महत्वपूर्ण अंग की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा (Fat) जमा होने लगती है, तो यह ‘फैटी लिवर’ का रूप ले लेता है। शुरुआती दौर में इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि किन लोगों को इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है और इसके शुरुआती संकेत क्या हैं।
मारेंगो एशिया हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में वरिष्ठ सलाहकार एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मित्तल ने बताया फैटी लिवर की बीमारी का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो ये परेशानी बढ़कर हेपेटाइटिस या सिरोसिस की अवस्था में पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज को भूख कम लगना, कमजोरी, मांसपेशियों की कमजोरी और पोषण की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है ताकि परेशानी से बचा जा सके। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि फैटी लिवर के लक्षण कौन-कौन से हैं और किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है और इससे बचाव कैसे करें।
फैटी लिवर के प्रमुख कारण
लिवर पर फैट चढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे मोटापा,शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खानपान, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, अत्यधिक शराब सेवन, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ लिवर पर फैट डिपॉजिट करने के लिए जिम्मेदार है।
फैटी लिवर के लक्षण
फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। कई लोगों को इसका पता नियमित हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड के दौरान चलता है। अगर बॉडी के संकेतों पर ध्यान दिया जाए तो फैटी लिवर की पहचान की जा सकती है। इसके लक्षणों की बात करें तो
पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन
लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
बिना कारण वजन कम होना
भूख कम लगना
मतली या उल्टी जैसा महसूस होना
पेट में सूजन होना
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या भ्रम की स्थिति
स्किन और आंखों का पीला पड़ना
पैरों और टखनों में सूजन
शरीर में खुजली होना
किन लोगों में फैटी लिवर का खतरा अधिक होता है?
जिन लोगों का मोटापा ज्यादा है या पेट पर चर्बी है उन्हें फैटी लिवर का खतरा ज्यादा है।
टाइप 2 डायबिटीज मरीजों को रहता है फैटी लिवर का खतरा
हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ट्राइग्लिसराइड्स के मरीजों को
हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को
शारीरिक गतिविधि की कमी वाले लोगों को
अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले लोगों को
अनहेल्दी डाइट का सेवन करने वाले लोगों को रहता है ज्यादा खतरा
फैटी लिवर से बचाव के लिए ये रहा डाइट चार्ट
समय क्या खाएं सुबह उठते ही गुनगुना पानी, ग्रीन टी या ब्लैक कॉफी नाश्ता पोहा, दलिया, बेसन चीला, दाल चीला, फल मिड-मॉर्निंग सेब, पपीता, संतरा, मौसमी, बादाम, अखरोट दोपहर का भोजन1-2 मल्टीग्रेन रोटी, दाल, हरी सब्जी, सलादशाम का नाश्ताग्रीन टी, भुने चने, स्प्राउट्स, फल रात का भोजन 1-2 रोटी, दाल, सब्जी, सलाद और दही
फैटी लिवर से बचाव के लिए इन उपायों को अपनाएं
संतुलित और फाइबर युक्त डाइट लें। रोजाना भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और बीन्स शामिल करें। फाइबर युक्त आहार वजन कंट्रोल रखने और लिवर की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
हेल्दी फैट को प्राथमिकता दें। डाइट में घी, मक्खन और तले-भुने खाद्य पदार्थों की जगह सीमित मात्रा में जैतून का तेल, मेवे, बीज और एवोकाडो जैसे हेल्दी फैट्स का सेवन करें।
वजन और कैलोरी पर कंट्रोल रखें। जरूरत से ज्यादा भोजन करने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी फैट के रूप में जमा हो सकती है। इसलिए संतुलित मात्रा में भोजन करें और स्वस्थ वजन बनाए रखने की कोशिश करें।
रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज, तेज चलना, साइकिलिंग या योग करने से लिवर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड, मीठे पेय, बेकरी उत्पाद और सैचुरेटेड व ट्रांस फैट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। ये फैटी लिवर और मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। लेख में डाइट चार्ट, फल और आयुर्वेदिक उपाय मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अमित मित्तल द्वारा साझा किए गए सुझावों पर आधारित हैं। डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ में झाड़ियों के बीच 21 वर्षीय युवक का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। शव न्यू नालागढ़ क्षेत्र में बरामद किया गया। मृतक की पहचान 21 वर्षीय अकवर के रूप में हुई है। शव के पास से एक सिरिंज भी मिली है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में शव करीब दो से तीन दिन पुराना होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।
झाड़ियों में मिला शव
जानकारी के अनुसार, न्यू नालागढ़ इलाके में झाड़ियों के बीच एक युवक का शव पड़ा होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लिया।
मृतक की पहचान उसके ताया ने की। पुलिस ने मौके पर जरूरी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
शव के पास मिली सिरिंज
पुलिस को शव के पास से एक सिरिंज भी बरामद हुई है। इस बरामदगी को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, सिरिंज का युवक की मौत से क्या संबंध है, यह जांच और पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस ने घटनास्थल से उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का कारण
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई।
पुलिस घटनास्थल की परिस्थितियों और सामने आए अन्य तथ्यों को भी जांच में शामिल कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।