Category: Crime

  • पेट में मिले अधपचे खाने: से खुला हत्या का राज, मां की हत्या कर भाइयों को फंसाना चाहता था बेटा; 26 महीने बाद ऐसे पकड़ा गया.

    पेट में मिले अधपचे खाने: से खुला हत्या का राज, मां की हत्या कर भाइयों को फंसाना चाहता था बेटा; 26 महीने बाद ऐसे पकड़ा गया.

    पेट में मिले अधपचे खाने: से खुला हत्या का राज, मां की हत्या कर भाइयों को फंसाना चाहता था बेटा; 26 महीने बाद ऐसे पकड़ा गया.

    बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भमोरा क्षेत्र के कुड्डा गांव में करीब 26 महीने पहले हुई एक महिला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, 55 वर्षीय रामबेटी की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनके बेटे महेंद्र सिंह ने ही की थी। आरोप है कि उसने राशन की दुकान को लेकर चल रही पारिवारिक रंजिश के चलते अपनी मां की हत्या की और शक अपने तहेरे भाइयों पर डालने की कोशिश की।

    करीब दो साल से ज्यादा समय तक चली जांच के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर महेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    पेड़ के नीचे तख्त पर सो रही थीं रामबेटी

    पुलिस के मुताबिक, घटना 6 अगस्त 2024 की है। कुड्डा गांव में 55 वर्षीय रामबेटी पत्नी अमर सिंह यादव अपने बेटे महेंद्र के घर के बाहर पेड़ के नीचे रखे तख्त पर सो रही थीं। इसी दौरान सिर पर किसी भारी वस्तु से वार कर उनकी हत्या कर दी गई।

    घटना के बाद रामबेटी के बेटे गजेंद्र ने अपने तहेरे भाइयों नाथू सिंह, सर्वेश, सुरेंद्र, वीरेंद्र और छोटेलाल के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच आगे बढ़ने पर वीरेश उर्फ बाबा का नाम भी मुकदमे में शामिल किया गया।

    पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद आरोपितों को मिली थी राहत

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने नामजद आरोपितों का दिल्ली में पॉलीग्राफ परीक्षण कराया था। पुलिस को महेंद्र पर भी संदेह था और उसका पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की कोशिश की गई, लेकिन उसने परीक्षण कराने से इनकार कर दिया था।

    उपलब्ध साक्ष्यों और पॉलीग्राफ परीक्षण के आधार पर मामले में नामजद आरोपितों को अदालत से राहत मिल गई। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की दोबारा जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। टीम ने पुराने साक्ष्यों के साथ-साथ नए वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य पहलुओं पर भी काम शुरू किया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिला अहम सुराग

    जांच के दौरान पुलिस की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज एक महत्वपूर्ण तथ्य पर गई। रामबेटी के पेट में अधपचा भोजन पाया गया था।

    विवेचना में इस तथ्य को उस दिन के घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया। जांच के मुताबिक, रामबेटी ने रात करीब 7:30 बजे भोजन किया था। आम तौर पर वह अपने दूसरे बेटे के घर खाना खाने के बाद वहीं सो जाती थीं। लेकिन घटना वाली रात महेंद्र उन्हें अपने साथ गांव के बाहर स्थित घर पर ले गया।

    पुलिस के अनुसार, महेंद्र ने अपनी मां को पेड़ के नीचे तख्त पर सुलाया। इसके बाद उसने अपने बच्चों को रात करीब 10:30 बजे गांव के अंदर वाले घर भेज दिया। करीब 11:30 बजे उसने अपनी पत्नी को भी वहां से भेज दिया।

    पुलिस का दावा है कि इसके बाद महेंद्र ने मौका देखकर अपनी मां की हत्या कर दी और फिर वापस घर लौट गया।

    रात में अलग-अलग नंबरों से दी पुलिस को सूचना

    मामले में पुलिस के लिए एक और महत्वपूर्ण सुराग आपातकालीन नंबर पर की गई कॉल बनी। पुलिस के मुताबिक, महेंद्र ने सुबह करीब 4 बजे यूपी 112 पर हत्या की सूचना दी थी।

    जांच के दौरान पुलिस ने उन नंबरों की पड़ताल की, जिनसे घटना की सूचना दी गई थी। पुलिस का दावा है कि अलग-अलग नंबरों से की गई सूचनाओं के पीछे महेंद्र का ही इस्तेमाल सामने आया।

    जांच में घटनाक्रम, भोजन के समय, परिवार के सदस्यों की मौजूदगी और फोन संबंधी जानकारी को जोड़कर पुलिस ने हत्या का अनुमानित समय रात करीब 12 बजे के आसपास माना।

    राशन की दुकान को लेकर चल रही थी रंजिश

    पुलिस जांच में परिवार के भीतर चल रहे विवाद का पहलू भी सामने आया। अधिकारियों के मुताबिक, महेंद्र की अपने तहेरे भाइयों के साथ राशन की दुकान को लेकर रंजिश थी।

    पुलिस ने यह भी बताया कि घटना से करीब दो दिन पहले महेंद्र का भतीजा आशीष एक विवाद के मामले में जेल गया था। वहीं हत्या के मामले में नामजद किए गए आरोपितों में शामिल वीरेंद्र के घटना के समय एक अन्य स्थान पर मौजूद होने की जानकारी भी जांच में सामने आई थी।

    इन सभी तथ्यों को दोबारा जांच में शामिल किया गया और पुलिस ने महेंद्र को मुख्य संदिग्ध मानते हुए उसके खिलाफ उपलब्ध वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को एकत्र किया।

    26 महीने बाद हुई गिरफ्तारी

    एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा के मुताबिक, विशेषज्ञों की राय के साथ चिकित्सकीय, मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने महेंद्र सिंह को 30 सितंबर 2026 को उसके घर से गिरफ्तार किया।

    पुलिस टीम में इंस्पेक्टर संजय धीर, उपनिरीक्षक अनीज कुमार और मुख्य आरक्षी सुंदरपाल सिंह शामिल रहे।

    करीब 26 महीने तक अनसुलझे रहे इस मामले में पुलिस का दावा है कि पोस्टमार्टम में मिले अधपचे भोजन से जुड़े समय-क्रम, फोन कॉल और परिवार के सदस्यों की गतिविधियों समेत कई साक्ष्यों को जोड़ने के बाद जांच एक नए निष्कर्ष तक पहुंची। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • सगी मां से दुष्कर्म के प्रयास: के बाद की थी जघन्य हत्या, बंडा कोर्ट ने ‘जघन्यतम अपराध’ मानकर बेटे को सुनाया मृत्युदंड.

    सगी मां से दुष्कर्म के प्रयास: के बाद की थी जघन्य हत्या, बंडा कोर्ट ने ‘जघन्यतम अपराध’ मानकर बेटे को सुनाया मृत्युदंड.

    सगी मां से दुष्कर्म के प्रयास: के बाद की थी जघन्य हत्या, बंडा कोर्ट ने ‘जघन्यतम अपराध’ मानकर बेटे को सुनाया मृत्युदंड.
    -प्रतीकात्मक चित्र।

    प्रदेश के सागर जिले के बंडा कस्बे में मां की हत्या के मामले में अदालत ने बेटे को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विनायका थाना क्षेत्र के रोड़ा गांव में जुलाई 2025 में 50 वर्षीय महिला की हत्या हुई थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए आरोपित बेटे संतोष लोधी (26) को दोषी ठहराया और अपराध को जघन्यतम श्रेणी का मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।

    आंगन में मिला था खून से लथपथ शव

    अभियोजन के अनुसार घटना 20 जुलाई 2025 की है। इससे एक दिन पहले 19 जुलाई को सीताराम लोधी अपनी बेटी को लेने छतरपुर गए थे। घर में उनकी पत्नी और बेटा संतोष मौजूद थे।

    20 जुलाई को सीताराम घर लौटे तो आंगन में पत्नी का लहूलुहान शव पड़ा मिला, जबकि संतोष घर से गायब था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    विरोध करने पर पत्थर से हमला करने का आरोप

    जांच के दौरान पुलिस के सामने आया कि संतोष ने घर में अकेली मां के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। विरोध करने पर उसने पत्थर से हमला कर उनकी हत्या कर दी। घटना के बाद वह मौके से फरार हो गया था।

    पुलिस ने 25 जुलाई को बांदरी-मालथौन रोड से संतोष को गिरफ्तार किया। मामले में पुलिस ने करीब 150 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में पेश किया।

    फिंगरप्रिंट और डीएनए रिपोर्ट बनी अहम कड़ी

    अभियोजन ने अदालत में घटनास्थल से मिले अंगुलियों के निशान और मृतका के शरीर से मिले जैविक नमूनों को अहम साक्ष्य के रूप में पेश किया। जांच में जैविक नमूनों से मिले डीएनए का मिलान आरोपित संतोष से होने की बात सामने आई।

    साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर अदालत ने संतोष लोधी को दोषी माना और उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।

  • शादी का वादा किया, कई बार ‘संबंध’ बनाए युवती प्रेग्नेंट हो गई तो मुकर गया आरोपी कौशांबी में FIR दर्ज.

    शादी का वादा किया, कई बार ‘संबंध’ बनाए युवती प्रेग्नेंट हो गई तो मुकर गया आरोपी कौशांबी में FIR दर्ज.

    शादी का वादा किया, कई बार ‘संबंध’ बनाए युवती प्रेग्नेंट हो गई तो मुकर गया आरोपी कौशांबी में FIR दर्ज.

    उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक युवती ने गांव के ही युवक पर शादी का वादा कर कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है. युवती के मुताबिक, वह 4 महीने की प्रेग्नेंट हुई तो युवक ने शादी से इनकार कर दिया. परिजनों की शिकायत पर कड़ा धाम कोतवाली पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा है.

    यूपी के कौशांबी जिले से सनसनीखेज कहानी सामने आई है. यहां एक युवती को एक युवक ने अपने प्रेमजाल में फंसाया. फिर शादी का झांसा दिया और कई बार रेप किया. जब युवती 4 महीने की प्रेग्नेंट हो गई तो युवक ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया. जब इसकी जानकारी परिजनों को हुई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. परिजन तत्काल युवती को लेकर कड़ा धाम थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने पीड़ित युवती की तहरीर पर आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया लिया है.

    इस मामले को लेकर डीएसपी का कहना है कि युवती को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है. अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है. यह पूरा मामला कड़ा धाम कोतवाली क्षेत्र का है. पुलिस का कहना है कि गांव के रहने वाले एक युवक से युवती का काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था.

    दोनों एक दूसरे से चोरी छिपे मिलते थे. जब बातचीत आगे बढ़ी तो युवक ने युवती को झांसा दिया कि वह शादी करेगा. इसी के साथ उसने कई बार संबंध बनाए. जब युवती चार माह की प्रेग्नेंट हो गई तो युवक शादी से मुकर गया. जब इसकी जानकारी युवती के परिजनों को हुई तो वे सन्न रह गए.

    इसके बाद पीड़ित युवती के परिजन तत्काल थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने इस शिकायत पर आरोपी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने पीड़ित युवती को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा. इसी के साथ इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. जब इस मामले में डीएसपी सिराथू सत्येंद्र तिवारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. मेडिकल के लिए पीड़िता को भेजा गया है. आगे जो भी कार्रवाई है, वह की जा रही है.

  • ड्रम में शव, ऊपर ‘सीमेंट’ और घर के आंगन में कब्र. 4 साल बाद ऐसे खुला 3 हत्याओं का राज.

    ड्रम में शव, ऊपर ‘सीमेंट’ और घर के आंगन में कब्र. 4 साल बाद ऐसे खुला 3 हत्याओं का राज.

    ड्रम में शव, ऊपर ‘सीमेंट’ और घर के आंगन में कब्र. 4 साल बाद ऐसे खुला 3 हत्याओं का राज.

    गुजरात के कोसंबा में चार साल पुराने हत्याकांड की जांच के दौरान तीन हत्याओं का राज खुला. पुलिस के मुताबिक, माधवदास ने अपनी पत्नी को हत्या के मामले में फंसाने के लिए पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन पूछताछ आगे बढ़ी तो उसकी ही भूमिका सामने आ गई. जांच में पता चला कि एक महिला के शव को ड्रम में रखकर सीमेंट से सील किया गया और बाद में घर के आंगन में दफना दिया गया.

    गुजरात के सूरत जिले के कोसंबा में करीब चार साल पुराने एक हत्याकांड का राज खुला तो पुलिस भी हैरान रह गई. एक शख्स अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार पर हत्या का आरोप लगाकर पुलिस के पास पहुंचा था, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो शक की सुई उसी पर घूम गई. पूछताछ में उसने पत्नी के साथ मिलकर तीन महिलाओं की हत्या करने की बात कबूल की.

    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस कोसंबा के पुराने मकान तक पहुंची. जमीन की खुदाई कराई गई तो सीमेंट से भरा एक ड्रम बरामद हुआ. ड्रम को तोड़ने पर उसके भीतर मानव अवशेष, खोपड़ी, हड्डियां और बाल मिले. कपड़ों और कंगन के आधार पर परिजनों ने अवशेषों की पहचान शांताबेन के तौर पर की. इन अवशेषों को फॉरेंसिक जांच और DNA परीक्षण के लिए भेजा गया है.

    पुलिस के मुताबिक, माधवदास भक्तिराम साधु ने शुरुआत में दावा किया था कि उसकी दादी सास शांताबेन गंभीरभाई वसावा की हत्या उसकी पत्नी उर्मिलाबेन उर्फ जया और एक रिश्तेदार ने की थी. उसने यह भी बताया था कि शव घर के अंदर सीमेंट के नीचे दफन है. पुलिस ने बताए गए रिश्तेदार से पूछताछ की, लेकिन उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला. इसके बाद जांच का रुख सूचना देने वाले माधवदास की तरफ हो गया.

    पत्नी को फंसाने की चाल, पूछताछ में खुला ट्रिपल मर्डर

    पूछताछ में माधवदास के बयानों में विरोधाभास सामने आए. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने पत्नी उर्मिला के साथ मिलकर शांताबेन की हत्या की थी. 7 अक्टूबर 2022 की रात शांताबेन घर में सो रही थीं. आरोप है कि दंपति ने तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी और शव को एक ड्रम में रख दिया.

    इसके बाद ड्रम में सीमेंट और पानी डालकर उसे पूरी तरह बंद कर दिया गया. करीब साढ़े तीन महीने तक शव इसी तरह घर में रखा रहा. मौका मिलने पर दंपति ने ड्रम को खोलकर शव और सीमेंट के अवशेषों को घर के आंगन में खोदे गए गड्ढे में दफना दिया. पुलिस के मुताबिक, ऊपर से सीमेंट की मोटी परत भी बना दी गई, ताकि किसी को शक न हो.

    शांताबेन की मौत को छिपाने के लिए रिश्तेदारों को अलग-अलग कहानी बताई गई. पुलिस के अनुसार, किसी को उनकी मौत कोरोना से होने की बात बताई गई तो किसी को दूसरी जगह मौत की जानकारी दी गई. जांच में पुलिस को यह भी पता चला कि शांताबेन की हत्या के पीछे संपत्ति और कीमती सामान हासिल करने का इरादा होने का आरोप है.

    एक हत्या से खुला दूसरा और तीसरा राज

    पूछताछ आगे बढ़ी तो कहानी सिर्फ शांताबेन की हत्या तक सीमित नहीं रही. पुलिस के मुताबिक, माधवदास और उर्मिला ने वर्ष 2022 में दो और महिलाओं की जान ली थी. इनमें माधवदास की मां मंजुलाबेन भक्तिराम साधु और उर्मिला की बहन भारतीबेन उर्फ भगवती कमलेशभाई वसावा शामिल थीं. तीनों मृतक महिलाएं आरोपी दंपति के परिवार से जुड़ी थीं.

    पुलिस के अनुसार, मंजुलाबेन करीब 65 वर्ष की थीं और लंबे समय से लकवे की बीमारी से पीड़ित थीं. उनकी देखभाल और इलाज का खर्च उठाना आरोपी दंपति के लिए मुश्किल बताया गया. आरोप है कि 19 जुलाई 2022 की रात दोनों ने तकिए से उनका मुंह दबाकर हत्या कर दी. इसके बाद परिवार और गांव के लोगों को बीमारी से स्वाभाविक मौत की बात बताई गई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

    तीसरी मृतक भारतीबेन उर्फ भगवती थीं, जो उर्मिला की बहन थीं और टीबी से पीड़ित थीं. पुलिस के मुताबिक, उनके इलाज और देखभाल से बचने के लिए 25 फरवरी 2022 की रात उनकी भी कथित तौर पर तकिए से मुंह दबाकर हत्या की गई. बाद में उनकी मौत को बीमारी से जोड़ते हुए अंतिम संस्कार कर दिया गया.

    चार साल बाद जमीन के नीचे से निकला राज

    शांताबेन के शव की तलाश में पुलिस ने सरकारी पंचों, FSL अधिकारियों, मेडिकल टीम और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में खुदाई कराई. करीब चार से पांच फीट तक जमीन खोदने के बाद सीमेंट से दबा अवशेष बरामद हुआ. कपड़े और कंगन मिलने के बाद रिश्तेदारों ने इसे शांताबेन के रूप में पहचाना, हालांकि पुलिस ने वैज्ञानिक पुष्टि के लिए अवशेष FSL और DNA जांच के लिए भेजे हैं.

    पुलिस के मुताबिक, माधवदास और उर्मिला पिछले कुछ समय से अलग रह रहे थे. इसी दौरान माधवदास ने पत्नी और उसके रिश्तेदार को हत्या में फंसाने के लिए कथित तौर पर पुलिस को सूचना दी थी. लेकिन जिस व्यक्ति का नाम उसने लिया, उसकी भूमिका नहीं मिली. यही जांच का वह मोड़ था, जिसने करीब चार साल पुराने तीन हत्याकांड की परतें खोल दीं.

    पुलिस ने माधवदास भक्तिराम साधु और उर्मिलाबेन उर्फ जया को गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस तीनों मौतों से जुड़े बयानों, बरामद अवशेषों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और दूसरे साक्ष्यों को जोड़ रही है. जांच मांगरोल के डिप्टी एसपी बी.के. वनार के मार्गदर्शन में चल रही है.

    पुलिस के अनुसार, माधवदास मूल रूप से अहमदाबाद ग्रामीण के धोलका क्षेत्र के वालथेरा गांव का रहने वाला है और उसका कोई स्थायी व्यवसाय नहीं था. वह मजदूरी के लिए कभी कोसंबा तो कभी कलोल-छत्राल के औद्योगिक इलाके में रहता था. उर्मिला और माधवदास की शादी करीब 17 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा तथा एक बेटी हैं. पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.

    फॉरेंसिक रिपोर्ट बताएगी अवशेषों का सच

    अब पुलिस की जांच का अहम हिस्सा बरामद मानव अवशेषों की वैज्ञानिक पहचान है. FSL जांच और DNA परीक्षण से यह स्पष्ट किया जाएगा कि सीमेंट से भरे ड्रम से मिले अवशेष शांताबेन के ही हैं या नहीं. इसके साथ ही पुलिस तीनों हत्याओं में आरोपियों की भूमिका और घटनाओं से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है.

    इस केस में सबसे बड़ा मोड़ वही सूचना बनी, जिसके जरिए माधवदास ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और उसके रिश्तेदार को फंसाने की कोशिश की. जिस हत्या का आरोप लेकर वह पुलिस के पास पहुंचा था, उसी की जांच ने उसके खिलाफ तीन हत्याओं की कहानी खोल दी. अब फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अदालत में मामले की चार्जशीट मजबूत करने की तैयारी में है.

  • ‘बस वापस आना चाहती हूं’, दुबई में फंसी झारखंड की मोनिका, नर्स की नौकरी के नाम पर बुलाया, कराया घरों में काम

    ‘बस वापस आना चाहती हूं’, दुबई में फंसी झारखंड की मोनिका, नर्स की नौकरी के नाम पर बुलाया, कराया घरों में काम

    ‘बस वापस आना चाहती हूं’, दुबई में फंसी झारखंड की मोनिका, नर्स की नौकरी के नाम पर बुलाया, कराया घरों में काम

    झारखंड के रांची की रहने वाली 35 वर्षीय नर्स मोनिका कच्छप के लिए दुबई में नौकरी करने का सपना मुश्किल हालात में बदल गया। बेहतर कमाई और अपनी बीमार मां के इलाज का खर्च उठाने के लिए विदेश में नौकरी की तलाश कर रहीं मोनिका ने इंस्टाग्राम पर एक एजेंसी के विज्ञापन के जरिए संपर्क किया था। आरोप है कि दुबई पहुंचने के बाद उन्हें नर्सिंग की नौकरी के बजाय अलग-अलग घरों में घरेलू काम करने के लिए भेजा गया।

    मोनिका के परिवार ने अब झारखंड सरकार से हस्तक्षेप कर उन्हें दुबई से सुरक्षित भारत वापस लाने की अपील की है। मामले में उनके पिता रत्न ने भर्ती एजेंसी से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है।

    इंस्टाग्राम के जरिए एजेंट से हुआ संपर्क

    मोनिका के मुताबिक, साल 2025 में उनकी मुलाकात इंस्टाग्राम के जरिए प्रियंका आर्या नाम की एजेंट से हुई थी। प्रियंका कथित तौर पर खाड़ी देशों में घरेलू कर्मचारियों की भर्ती का काम करने वाली एजेंसी चलाती हैं। उस समय मोनिका रांची के एक निजी अस्पताल में नर्स के तौर पर काम कर रही थीं और विदेश में बेहतर नौकरी की तलाश में थीं।

    मोनिका ने बताया कि प्रियंका ने उन्हें दुबई में नर्सिंग की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। एजेंट के इंस्टाग्राम पेज पर 16 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और यहां यूएई में नौकरी मिलने का दावा करने वाली महिलाओं के वीडियो भी मौजूद हैं। मोनिका के अनुसार, एजेंट के कहने पर उन्होंने अपने दस्तावेज भेजे और अपना मूल पासपोर्ट दिल्ली के एक पते पर भेज दिया था।

    दुबई जाने के बाद बदली पूरी कहानी

    मोनिका ने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते दुबई की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपना मन बदल लिया था और पासपोर्ट वापस मांगा। हालांकि, उनका आरोप है कि एजेंट ने पासपोर्ट लौटाने से इनकार कर दिया और उन्हें वीजा व टिकट की जानकारी ऑनलाइन भेज दी।

    इसके बाद मोनिका 3 मई को दिल्ली पहुंचीं और वहां उन्हें अपना पासपोर्ट वापस मिला। 6 मई को वह दुबई पहुंचीं, जहां उन्हें शारजाह जाने के लिए कहा गया। एयरपोर्ट पर एक पाकिस्तानी ड्राइवर उन्हें लेने पहुंचा।

    मोनिका का आरोप है कि एयरपोर्ट पहुंचते ही ड्राइवर ने उनका पासपोर्ट अपने पास रख लिया। इसके बाद उन्हें एक ऐसे ठिकाने पर ले जाया गया, जहां एजेंसी के जरिए नौकरी के लिए आई अन्य महिलाएं भी रह रही थीं।

    अरबी और अंग्रेजी में दस्तावेज पर लिया अंगूठा

    अगले दिन मोनिका को अजमान स्थित एक ऑफिस ले जाया गया। वहां प्रियंका के पति रितेश कुमार और मोहम्मद मेराज अंसारी मौजूद थे। मोनिका का आरोप है कि वहां उनसे अरबी और अंग्रेजी में लिखे एक दस्तावेज पर अंगूठे का निशान लगवाया गया।

    उन्हें बताया गया कि यह दो साल का नौकरी का सामान्य कॉन्ट्रैक्ट है। हालांकि, बाद में उन्हें पता चला कि दस्तावेज में 12,600 दिरहम का कर्ज लेने की बात लिखी थी। आरोप है कि यह रकम ब्याज समेत 14,000 दिरहम चुकाने को कहा गया और भुगतान नहीं करने पर जेल भेजे जाने की धमकी दी गई।

    मोनिका ने कहा कि उन्हें अंग्रेजी और अरबी भाषा ठीक से समझ नहीं आती थी, इसलिए वह दस्तावेज की वास्तविक जानकारी नहीं समझ पाईं। उनका दावा है कि उन्होंने ऐसा कोई कर्ज लिया ही नहीं था।

    नर्सिंग जॉब के बजाय घरों में कराया काम

    मोनिका के मुताबिक, दुबई पहुंचने से पहले उन्हें नर्स की नौकरी का भरोसा दिया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें एजेंसी से जुड़े लोगों के घर पर घरेलू काम करना पड़ा।

    उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों से उन्हें अलग-अलग घरों में मरीजों और बच्चों की देखभाल के लिए भेजा जाता रहा। अरबी भाषा नहीं आने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा और बाद में उन्हें वापस एजेंसी के ऑफिस ले आया जाता था।

    मोनिका का कहना है कि उन्होंने कई बार रितेश और मेराज से भारत वापस जाने की बात कही, खासकर अपनी मां की बीमारी के कारण। लेकिन कथित तौर पर उनसे पहले 14,000 दिरहम चुकाने को कहा गया। मोनिका ने आरोप लगाया कि मेराज ने रकम कंपनी के खाते में जमा नहीं करने पर उन्हें धमकी दी और कहा कि वह दुबई में ही फंसी रहेंगी और उन्हें कोई काम नहीं मिलेगा।

    पासपोर्ट भी अपने पास रखने का आरोप

    मोनिका के अनुसार, उनका पासपोर्ट भी उन लोगों के पास ही रहा जिन्होंने उनकी यात्रा की व्यवस्था की थी। हालांकि, उन्होंने अपने साथ किसी तरह के शारीरिक या यौन उत्पीड़न से इनकार किया है।

    मोनिका के पिता रत्न ने प्रियंका, रितेश, मेराज और भर्ती एजेंसी AMD ट्रेंड सॉल्यूशन LLC से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनकी बेटी को नौकरी, खाना और रहने की सुविधा का भरोसा देकर विदेश भेजा गया और बाद में उससे जबरन काम कराया गया तथा उसे भारत लौटने से रोका गया।

    परिवार ने सरकार से लगाई बेटी को वापस लाने की गुहार

    रत्न के अनुसार, नौकरी दिलाने के लिए मोनिका ने अप्रैल में यूपीआई के जरिए प्रियंका को 15 हजार रुपये दिए थे। द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रियंका से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। रत्न ने कहा कि परिवार अपनी बेटी को वापस भारत लाना चाहता है और सरकार से इसमें मदद की अपील कर रहा है।

    एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर पंकज शर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि परिवार की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, मोनिका को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। दुबई में रह रहीं मोनिका ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा, “मैं बस भारत वापस आना चाहती हूं।”

  • अकबर को किस तरह: का संगीत पसंद था? तानसेन के अलावा इन चीजों में भी थी गहरी दिलचस्पी.

    अकबर को किस तरह: का संगीत पसंद था? तानसेन के अलावा इन चीजों में भी थी गहरी दिलचस्पी.

    अकबर को किस तरह: का संगीत पसंद था? तानसेन के अलावा इन चीजों में भी थी गहरी दिलचस्पी.

    मुगल बादशाह अकबर को आमतौर पर उसकी राजनीतिक और सैन्य उपलब्धियों के लिए याद किया जाता है, लेकिन उसके व्यक्तित्व का एक दूसरा पहलू भी था। उसे संगीत, कला, खेल, शिकार और तरह-तरह की मनोरंजक गतिविधियों में काफी रुचि थी।

    अकबर के शासनकाल से जुड़े ऐतिहासिक विवरणों में उसके दरबार की संगीत परंपरा और कलाकारों का खास उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि राजकाज की व्यस्तताओं के बीच संगीत और दूसरी गतिविधियां उसके मनोरंजन का महत्वपूर्ण हिस्सा थीं।

    तानसेन के संगीत का था खास आकर्षण

    अकबर के दरबार से जुड़े सबसे प्रसिद्ध संगीतकारों में तानसेन का नाम आता है। वह दरबारी संगीत परंपरा में ध्रुपद के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।

    ऐतिहासिक विवरणों में अकबर के दरबार में कई गायकों और वादकों की मौजूदगी का उल्लेख मिलता है। वीणा, रबाब और दूसरे वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां दरबार की संगीत सभाओं का हिस्सा हुआ करती थीं।

    तानसेन की कला से अकबर कितना प्रभावित था, इसका उल्लेख अबुल फजल द्वारा लिखे गए दरबारी विवरणों में भी मिलता है। संगीत अकबर के दरबार की सांस्कृतिक जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था।

    स्वामी हरिदास से जुड़ी कहानी भी है मशहूर

    अकबर और संगीत के संबंध में स्वामी हरिदास से जुड़ी एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक परंपरा भी सुनने को मिलती है। स्वामी हरिदास वृंदावन के प्रसिद्ध संत और संगीत साधक थे तथा उन्हें तानसेन का गुरु माना जाता है।

    लोकप्रिय कथाओं के अनुसार अकबर ने उनके गायन को सुनने के लिए वृंदावन की यात्रा की थी। हालांकि इस घटना से जुड़े सभी विवरणों को समान रूप से प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता।

    अकबर को नगाड़ा बजाने का भी शौक था

    संगीत सुनने के साथ अकबर के खुद वाद्ययंत्र बजाने की रुचि का भी उल्लेख मिलता है। कुछ ऐतिहासिक विवरणों में उसके नगाड़ा बजाने के शौक की बात कही गई है।

    फतेहपुर सीकरी में संगीत और मनोरंजन के लिए बनाए गए स्थानों से भी पता चलता है कि शाही दरबार में संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण स्थान हासिल था।

    चौपड़ और पचीसी में भी थी दिलचस्पी

    अकबर के मनोरंजन में खेलों की भी अहम भूमिका थी। फतेहपुर सीकरी में बना विशाल पचीसी का मैदान आज भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि शाही मनोरंजन किस स्तर पर आयोजित किया जाता था।

    ऐतिहासिक विवरणों में शाही खेलों में लोगों को गोटियों के रूप में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन घटनाओं से जुड़े लोकप्रिय विवरणों में कई बार कहानी और इतिहास आपस में मिल जाते हैं, इसलिए हर दावे को समान प्रमाणिकता के साथ नहीं देखा जा सकता।

    अकबर को चौगान यानी पोलो का भी शौक था। घुड़सवारी और दूसरे शारीरिक खेल शाही जीवन का हिस्सा थे।

    जानवरों से जुड़े खेलों में भी रुचि

    अकबर के समय शाही दरबार में हाथियों और दूसरे जानवरों को लेकर होने वाली गतिविधियां भी मनोरंजन का हिस्सा थीं। अकबर खुद हाथियों को नियंत्रित करने और उनकी लड़ाइयों को देखने के लिए जाना जाता था।

    शिकार भी शाही जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था। विशेष रूप से प्रशिक्षित चीतों का इस्तेमाल शिकार में किया जाता था। शाही शिकार केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि राजकीय शक्ति और सैन्य कौशल से भी जुड़ा हुआ था।

    कबूतर पालने का था शौक

    अकबर को कबूतर पालने और उन्हें उड़ाने में भी रुचि थी। मुगल दरबार में कबूतरबाजी एक लोकप्रिय शाही शगल थी।

    दरबार में अलग-अलग नस्लों के कबूतरों को रखा जाता था और उनकी देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था होती थी। अकबर के कबूतरों के प्रति लगाव का उल्लेख भी कई ऐतिहासिक विवरणों में मिलता है।

    नई तकनीक और हथियारों में भी दिलचस्पी

    अकबर केवल कला और मनोरंजन तक सीमित नहीं था। उसके शासनकाल में हथियारों और सैन्य तकनीक के विकास पर भी ध्यान दिया गया।

    उस दौर में ऐसी तोपों और हथियारों के विकास पर काम हुआ जिन्हें युद्ध के दौरान अपेक्षाकृत आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सके। हालांकि किसी खास हथियार का डिजाइन सीधे अकबर की व्यक्तिगत खोज बताना सावधानी से किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसे सैन्य विकास में कारीगरों, इंजीनियरों और दरबारी विशेषज्ञों की भूमिका भी होती थी।

    किताबें पढ़ने के बजाय सुनकर लेता था ज्ञान

    अकबर के बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि वह औपचारिक रूप से पढ़-लिख नहीं सकता था, लेकिन उसे ज्ञान और किताबों में गहरी रुचि थी।

    उसके शाही पुस्तकालय में बड़ी संख्या में पांडुलिपियां मौजूद थीं। विद्वान और पाठक उसे किताबें पढ़कर सुनाते थे। इस तरह वह इतिहास, धर्म, दर्शन और दूसरे विषयों पर जानकारी हासिल करता था।

    अलग-अलग धर्मों के विद्वानों से करता था चर्चा

    अकबर ने धार्मिक और दार्शनिक चर्चाओं में भी रुचि दिखाई। फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना स्थापित किया गया, जहां विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े विद्वानों के बीच चर्चा होती थी।

    इन चर्चाओं में इस्लाम के अलग-अलग विद्वानों के साथ हिंदू, जैन, ईसाई और अन्य धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों की भागीदारी का भी उल्लेख मिलता है।

    बाद के वर्षों में अकबर की धार्मिक नीतियों और विचारों में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिए। इसी संदर्भ में दीन-ए-इलाही का नाम भी इतिहास में आता है, हालांकि इसे एक व्यापक संगठित धर्म के बजाय अकबर से जुड़े एक सीमित धार्मिक-नैतिक विचार के रूप में समझना अधिक उचित है।

    अकबर का मनोरंजन सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं था

    अकबर के जीवन से जुड़े ऐतिहासिक विवरण बताते हैं कि उसके मनोरंजन के तरीके काफी विविध थे। संगीत में तानसेन और दरबारी कलाकारों की प्रस्तुतियां, खेलों में पचीसी और चौगान, शिकार, कबूतरबाजी, जानवरों से जुड़ी गतिविधियां और विद्वानों से चर्चा—ये सभी उसके शाही जीवन के अलग-अलग पहलू थे।

    यही वजह है कि अकबर को केवल एक योद्धा या शासक के रूप में देखना उसके व्यक्तित्व की पूरी तस्वीर नहीं देता। उसके शासनकाल में संगीत, कला, साहित्य और विभिन्न बौद्धिक परंपराओं को भी दरबार में महत्वपूर्ण स्थान मिला।

  • रैपिडो से शुरू हुई पहचान, सोशल मीडिया पर बढ़ी नजदीकी; नाबालिग के गर्भवती होने पर सामने आया गंभीर मामला

    रैपिडो से शुरू हुई पहचान, सोशल मीडिया पर बढ़ी नजदीकी; नाबालिग के गर्भवती होने पर सामने आया गंभीर मामला

    रैपिडो से शुरू हुई पहचान, सोशल मीडिया पर बढ़ी नजदीकी; नाबालिग के गर्भवती होने पर सामने आया गंभीर मामला

    मुंबई: महाराष्ट्र के मुंबई में नाबालिग युवती से कथित दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। दहिसर पुलिस ने 19 वर्षीय बाइक-टैक्सी चालक इरफान हमीद शेख के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    मामले का खुलासा तब हुआ, जब नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी उसके परिवार को मिली। इसके बाद परिवार ने सोनोग्राफी कराई और गर्भावस्था की पुष्टि होने पर युवती से पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद युवती ने परिवार को घटना के बारे में बताया और परिजनों ने दहिसर पुलिस से संपर्क किया।

    रैपिडो राइड के दौरान हुई थी पहचान

    पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, युवती की आरोपी चालक से पहचान एक बाइक-टैक्सी राइड के दौरान हुई थी। आरोप है कि यात्रा के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई और इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए भी संपर्क बना रहा।

    पुलिस का कहना है कि कुछ समय बाद दोनों की मुलाकातें होने लगीं। आरोपी के युवती के घर आने-जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    आरोप है कि बाद में आरोपी ने युवती को मिलने के लिए बुलाया और उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की।

    पुलिस ने मोबाइल लोकेशन से शुरू की तलाश

    मामला दर्ज होने के बाद दहिसर पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए तकनीकी जांच का सहारा लिया। मोबाइल फोन और लोकेशन से जुड़ी जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों की पड़ताल शुरू की।

    जांच के दौरान पुलिस आरोपी के घर भी पहुंची। पुलिस का आरोप है कि आरोपी के परिजनों ने उसकी मौजूदगी के बारे में जानकारी छिपाने की कोशिश की।

    भेष बदलकर बाहर भेजने की कोशिश का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी को कथित तौर पर बुर्का पहनाकर महिला के रूप में बाहर निकालने और मुंबई से बाहर भेजने की कोशिश की गई।

    पुलिस को इस संबंध में संदेह होने के बाद आरोपी के माता-पिता से पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी की मां से मिली जानकारी के आधार पर उसकी लोकेशन का पता लगाया गया।

    इसके बाद पुलिस टीम ने भिवंडी में कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    तकनीकी जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस

    मामले की जांच में दहिसर पुलिस की डिटेक्शन टीम ने मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी जानकारियों का इस्तेमाल किया। जांच अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की टीम ने अलग-अलग स्थानों पर तलाश करने के बाद आरोपी को भिवंडी से पकड़ा।

    आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

    ऐप आधारित बाइक-टैक्सी सेवाओं की सुरक्षा पर चर्चा

    घटना सामने आने के बाद ऐप आधारित बाइक-टैक्सी सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। खासतौर पर महिला यात्रियों के लिए ड्राइवर वेरिफिकेशन, बैकग्राउंड चेक, ट्रिप मॉनिटरिंग और शिकायत तंत्र जैसे सुरक्षा उपायों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    हालांकि, इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच के बाद ही होगी।

    फिलहाल दहिसर पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और घटना से जुड़े डिजिटल तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। मामले में आगे सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर पुलिस अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाएगी।

  • तीन साल के रिश्ते में आया विवाद, युवक पर जानलेवा हमला; 11 दिन बाद इलाज के दौरान 19 वर्षीय तेजिंदर की मौत

    तीन साल के रिश्ते में आया विवाद, युवक पर जानलेवा हमला; 11 दिन बाद इलाज के दौरान 19 वर्षीय तेजिंदर की मौत

    तीन साल के रिश्ते में आया विवाद, युवक पर जानलेवा हमला; 11 दिन बाद इलाज के दौरान 19 वर्षीय तेजिंदर की मौत

    गुरदासपुर: पंजाब के गुरदासपुर जिले में 19 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि रिश्ते से जुड़े विवाद के बाद तेजिंदर सिंह पर कुछ युवकों ने हमला किया था। 18 सितंबर को हुई कथित मारपीट में गंभीर रूप से घायल तेजिंदर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां करीब 11 दिन बाद 29 सितंबर को उसकी मौत हो गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है, जो घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

    तीन साल से लड़की के संपर्क में था तेजिंदर

    मृतक की पहचान खोखरा गांव निवासी तेजिंदर सिंह के रूप में हुई है। परिवार के मुताबिक, तेजिंदर करीब तीन साल से एक लड़की के संपर्क में था। बाद में दोनों के बीच किसी बात को लेकर तनाव बढ़ गया।

    परिवार का दावा है कि तेजिंदर ने रिश्ता खत्म करने का फैसला लिया था, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद होने लगे। कुछ मुलाकातों और बहस का भी परिजनों ने जिक्र किया है। हालांकि, इन घटनाओं का 18 सितंबर को हुए हमले से सीधा संबंध था या नहीं, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    मिलने के लिए बुलाने के बाद हमले का आरोप

    परिवार का आरोप है कि 18 सितंबर को तेजिंदर को मिलने के लिए बुलाया गया था। उनके मुताबिक, वहां पहुंचने के बाद कई युवकों ने उस पर हमला कर दिया।

    हमले में तेजिंदर के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसकी हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था। परिवार के अनुसार, तेजिंदर को वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी रखा गया था। आखिरकार 29 सितंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

    करीब नौ युवकों पर लगाए आरोप

    परिजनों ने इस मामले में करीब नौ युवकों के हमले में शामिल होने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि हमला पहले से योजना बनाकर किया गया था।

    हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस कथित हमलावरों की भूमिका, घटना के समय मौके पर मौजूद लोगों और हमले की वजह से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    नाबालिग लड़की से भी पूछताछ

    पुलिस ने मामले में एक नाबालिग लड़की को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। परिवार की ओर से दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान लड़की ने हमले के लिए पैसे देने की बात कही थी, लेकिन कथित तौर पर यह भी कहा कि उसने हत्या के लिए नहीं कहा था।

    यह जानकारी फिलहाल जांच का हिस्सा है। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी।

    परिवार ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की

    तेजिंदर की मौत के बाद उसके परिजनों ने मामले में नाम सामने आ रहे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है। परिवार का कहना है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अंतिम संस्कार को लेकर आगे नहीं बढ़ेंगे।

    जांच के लिए बनाई गई SIT

    गुरदासपुर के एसपी मनोज ठाकुर के अनुसार, तेजिंदर के पिता की शिकायत के आधार पर 20 सितंबर को FIR दर्ज की गई थी। परिवार ने स्थानीय स्तर पर चल रही जांच को लेकर असंतोष जताया था।

    इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया। टीम अब घटनास्थल, उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपियों की भूमिका और हमले से पहले तथा बाद के घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर की जाएगी।

  • सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा, सीढ़ी गिरने से 7 साल की बच्ची की मौत, 3 छात्र घायल

    सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा, सीढ़ी गिरने से 7 साल की बच्ची की मौत, 3 छात्र घायल

    सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा, सीढ़ी गिरने से 7 साल की बच्ची की मौत, 3 छात्र घायल

    बिहार के खगड़िया जिले में एक सरकारी प्राइमरी स्कूल की सीढ़ी गिरने से बुधवार को सात साल की एक बच्ची की मौत हो गई और तीन अन्य छात्र घायल हो गए। यह घटना सुबह करीब 10 बजे मानसी पुलिस थाना क्षेत्र के अमनी गांव में हुई।

    मृतक बच्ची की पहचान प्राइमरी स्कूल की पहली कक्षा की छात्रा रितिका कुमारी के रूप में हुई है। डीएम विक्रम विरकर ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को घटना की जांच करने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। घायल छात्रों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    मानसी के SHO दीपक कुमार ने कहा, “स्कूल की सीढ़ी अचानक गिर गई, जिससे कई छात्र फंस गए। सात साल की एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए।” उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है और आगे की जांच चल रही है।

  • ससुराल से प्रताड़ना और डिप्रेशन: की दवा …होटल में संदिग्ध अवस्था में मिला 25 वर्षीय महिला का शव, मची सनसनी

    ससुराल से प्रताड़ना और डिप्रेशन: की दवा …होटल में संदिग्ध अवस्था में मिला 25 वर्षीय महिला का शव, मची सनसनी

    ससुराल से प्रताड़ना और डिप्रेशन: की दवा …होटल में संदिग्ध अवस्था में मिला 25 वर्षीय महिला का शव, मची सनसनी

    बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक होटल के कमरे में 25 वर्षीय महिला का शव फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, घटना सोमवार को सदर थाना क्षेत्र में गोबरसही चौक के पास स्थित एक होटल में हुई। महिला की पहचान बेगूसराय जिले के तेघड़ा निवासी निगम कुमारी के रूप में हुई है। वह गुजरात के अहमदाबाद में एक रियल एस्टेट कंपनी में काम करती थी। 

    सदर थाना प्रभारी नवलेश कुमार आजाद ने संवाददाताओं से कहा, ”होटल के कमरे से एक महिला का शव बरामद किया गया है। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है, लेकिन सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।” उन्होंने बताया कि घटनास्थल से फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। होटल के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार सुबह होटल का एक कर्मचारी कमरे की सफाई करने गया था। अंदर से कोई जवाब नहीं मिलने पर होटल के प्रबंधक ने बालकनी से कमरे के भीतर देखा, जहां महिला का शव फंदे से लटका मिला। उन्होंने बताया कि निगम रविवार को अहमदाबाद से बेगूसराय पहुंची थी और उसने तेघड़ा थाने में अपने पति मदन कुमार तथा ससुराल पक्ष के सदस्यों के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी।