वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में शनिवार तड़के हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. हनुमान फाटक क्षेत्र में दुकानों के बाहर सो रहे तीन लोगों पर अज्ञात हमलावरों ने ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया. हमले में 40 वर्षीय साड़ी कारीगर पप्पू विश्वकर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जुट गई और लोगों में आक्रोश फैल गया. सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी. पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला पुरानी रंजिश और आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है.
भोर में सो रहे लोगों पर किया गया हमला
जानकारी के अनुसार आदमपुर के मुस्लिम बहुल हनुमान फाटक क्षेत्र में पप्पू विश्वकर्मा शुक्रवार रात काम समाप्त करने के बाद अपनी दुकान के बाहर सो रहे थे. उनके पास ही पान की दुकान चलाने वाले अशोक पासी उर्फ बाबा और गणेशु कनौजिया भी सोए हुए थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक तड़के करीब तीन बजे कुछ हमलावर वहां पहुंचे और सो रहे लोगों पर अचानक ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया. हमले में पप्पू विश्वकर्मा के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
दो अन्य लोग घायल, मौके पर पहुंचे विधायक-पुलिस अधिकारी
इस हमले में अशोक पासी उर्फ बाबा गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि गणेशु कनौजिया को भी चोटें आईं. दोनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए. क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया. सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक नीलकंठ तिवारी भी मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को कहा. लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया.
पुलिस को पुरानी रंजिश का शक
काशी जोन के एडीसीपी वैभव बांगर ने NDTV को बताया कि प्रारंभिक जांच में आपसी विवाद और पुरानी रंजिश का एंगल सामने आया है. उन्होंने कहा कि घटना से पहले भी संबंधित पक्षों के बीच विवाद की जानकारी मिली है. शनिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई है. इसके बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और जांच शुरू की.
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है. हमलावरों की पहचान और उनके आने-जाने के रास्तों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा स्थानीय लोगों से पूछताछ भी की जा रही है. पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है.
तमिलनाडु पुलिस ने श्रीलंका भेजे जा रहे 290 किलो गांजा के साथ 2 तस्करों को गिरफ्तार किया।
तूतीकोरिन तट पर छापे में आठ बकरियां, तीन बक्सों में कबूतर और नाव जब्त हुई।
पुलिस को सीमा पार सक्रिय बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने का शक, जांच जारी।
चेन्नई:
तमिलनाडु पुलिस ने श्रीलंका के लिए की जा रही कथित तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 290 किलो गांजा जब्त किया है। इस मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, एक अलग कार्रवाई में पुलिस ने श्रीलंका भेजे जाने की तैयारी में रखी गई 8 बकरियां, 3 बक्सों में बंद कबूतर और एक बिना रजिस्ट्रेशन वाली डबल इंजन फाइबर नाव भी जब्त की है। पुलिस के मुताबिक, रामनाथपुरम जिले के उचिपुली क्षेत्र में रामेश्वरम सब-डिविजनल क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि प्रभान वलासई बीच के रास्ते गांजा श्रीलंका भेजने की तैयारी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने सुबह करीब 4 बजे इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया।
वैन के अंदर छिपाकर रखा गया था गांजा
तलाशी के दौरान वहां से गुजर रही एक वैन को रोककर उसकी जांच की गई। जांच में वैन के अंदर छिपाकर रखा गया करीब 290 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस का कहना है कि इस गांजे को समुद्री रास्ते से श्रीलंका भेजने की तैयारी थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने इस मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय पी. दिनेश, जो रामनाथपुरम के अट्टांगरा नॉर्थ स्ट्रीट का रहने वाला है, और 22 वर्षीय एस. कलंजीश्वरन, जो मंडपम के पिल्लई मठ इलाके का निवासी है, के रूप में हुई है।
पुलिस ने अन्ना कॉलोनी बीच पर मारा छापा
क्राइम की एक अन्य बड़ी खबर में तमिलनाडु पुलिस की विशेष खुफिया शाखा ‘क्यू’ ब्रांच ने तूतीकोरिन जिले के थेरेसपुरम अन्ना कॉलोनी बीच पर भी छापा मारा। पुलिस को सूचना मिली थी कि वहां से बकरियों और कबूतरों को अवैध रूप से श्रीलंका भेजने की तैयारी की जा रही है। यह कार्रवाई क्यू ब्रांच की इंस्पेक्टर विजया अनीथा की निगरानी में की गई। टीम में सब-इंस्पेक्टर रामचंद्रन, स्पेशल सब-इंस्पेक्टर रामर, हेड कांस्टेबल इरुधया राजकुमार और इसाक्किमुथु, तथा कांस्टेबल पलानी, बालामुरुगन और पेची राजा शामिल थे।
फरार हुए बकरियों और कबूतरों के तस्कर
पुलिस के मुताबिक 6 अगस्त की रात करीब 9:45 बजे टीम ने देखा कि 8 बकरियों और 3 बक्सों में बंद कबूतरों को एक बिना पंजीकरण वाली डबल इंजन फाइबर नाव पर लादा जा रहा था। पुलिस को देखते ही संदिग्ध तस्कर मौके से फरार हो गए और जानवरों के साथ नाव वहीं छोड़ गए। इसके बाद पुलिस ने 8 बकरियां, 3 बक्सों में बंद कबूतर और फाइबर नाव को जब्त कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, जब्त की गई संपत्ति की कुल कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है।
फाइबर नाव के मालिक का पता लगा रही पुलिस
पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और फरार आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि यह तस्करी का प्रयास किसी बड़े सीमा पार तस्करी नेटवर्क से जुड़ा है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जब्त की गई फाइबर नाव के मालिक का पता लगाया जा रहा है। साथ ही इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। दोनों मामलों में आगे की जांच जारी है।
इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के महलई गांव में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला का शव घर की छत पर बने कमरे में साड़ी के फंदे से लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
घर की छत पर मिला शव
मृतका की पहचान लज्जावती, पत्नी स्वर्गीय भगवानदास, के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह अपने बड़े बेटे अजय कुमार के साथ रहती थीं, जबकि उनके अन्य दो बेटे अलग-अलग मकानों में परिवार सहित रहते हैं। शुक्रवार को उनका शव छत पर बने कमरे में लोहे के पाइप से साड़ी के सहारे लटका हुआ मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और गांव में शोक का माहौल बन गया।
बेटी ने लगाया हत्या का आरोप
मृतका की बेटी अनीता देवी ने अपनी तीनों भाभियों पर मां की हत्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परिवार में जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और इसी कारण उनकी मां के साथ अक्सर मारपीट और प्रताड़ना की जाती थी। अनीता का आरोप है कि हत्या के बाद मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटका दिया गया।
बेटे ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, मृतका के बड़े बेटे अजय कुमार ने बहन के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि घटना के समय घर में केवल उनकी पत्नी मौजूद थीं, जबकि अन्य दोनों भाइयों की पत्नियां अपने-अपने घरों में थीं। उन्होंने दावा किया कि लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं।
जमीन विवाद की भी जांच
परिजनों के अनुसार, मृतका के पति का करीब 11 वर्ष पहले निधन हो चुका था। तीनों बेटों के बीच जमीन का बंटवारा हो चुका था, लेकिन मृतका के नाम दर्ज जमीन को लेकर परिवार में विवाद बना हुआ था। पुलिस इस पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
थाना प्रभारी कमल भाटी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने और जांच पूरी होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में आठ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के बाद 22 वर्षीय आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। ग्रामीणों ने आरोपित को फांसी देने, …और पढ़ें
जबलपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में आठ वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या किए जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने इस मामले में 22 वर्षीय आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। लोगों ने आरोपित को फांसी देने, उसका मकान बुलडोजर से ध्वस्त करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की बात कही है।
स्कूल से बहाने से ले गया, फिर जंगल में मिला शव
पुलिस के अनुसार आरोपित बुधवार को लंच ब्रेक के दौरान बच्ची के स्कूल पहुंचा और यह कहकर उसे अपने साथ ले गया कि उसके पिता ने घर बुलाया है। स्कूल की छुट्टी के बाद जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की सूचना दी।
करीब आठ घंटे तक चले संयुक्त सर्च अभियान के बाद बच्ची का शव गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में एक गड्ढे से बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है।
तलाशी अभियान में शामिल होकर करता रहा गुमराह
नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने बताया कि बच्ची की तलाश में लगभग 40-50 पुलिसकर्मी और 60 ग्रामीण जुटे थे। इस दौरान आरोपित युवक भी लोगों के साथ बच्ची को खोजने का नाटक करता रहा ताकि किसी को उस पर संदेह न हो।
हालांकि कुछ स्कूली छात्राओं से मिली अहम जानकारी के आधार पर पुलिस ने स्निफर डॉग की मदद ली। डॉग स्क्वॉड सीधे आरोपित के घर तक पहुंचा, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
ग्रामीणों का प्रदर्शन, बुलडोजर कार्रवाई और फांसी की मांग
घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोपित को फांसी की सजा देने, उसका मकान बुलडोजर से गिराने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बच्ची के शव को वैकल्पिक मार्ग से गांव पहुंचाया। वहीं पूरे गांव में बाजार बंद रहा और ग्रामीणों ने घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
स्थानीय लोगों में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और अभियोजन पक्ष फास्ट ट्रैक कोर्ट में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करेगा।
देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के कांटाफोड़ क्षेत्र में घरेलू हिंसा का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति पर शराब के नशे में अपनी पत्नी की पीट-पीटकर हत्या करने और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटकाने का आरोप है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आत्महत्या की सूचना पर पहुंची थी पुलिस
पुलिस के मुताबिक, 4 अगस्त को सूचना मिली थी कि वार्ड नंबर-14 निवासी 32 वर्षीय सुनीता भील ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदला जांच का रुख
जांच के दौरान महिला के शरीर पर चोटों के कई निशान मिलने से पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मौत का कारण फांसी नहीं, बल्कि मारपीट से आई गंभीर चोटें थीं। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई।
बेटी के बयान और सबूतों से खुली साजिश
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिजनों और घटना के समय घर में मौजूद बच्ची के बयान भी दर्ज किए। जांच में आरोप है कि पति जितेंद्र भील ने शराब के नशे में पत्नी के साथ बुरी तरह मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसने साड़ी का फंदा बनाकर शव को लटका दिया ताकि मामला आत्महत्या जैसा लगे।
आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस का कहना है कि भौतिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
हलधरपुर थाना क्षेत्र के गहनी गांव निवासी 30 वर्षीय युवक बलवंत सिंह की हत्या आशनाई के चक्कर में हुई थी।कातिल कोई और नहीं बल्कि दोस्त ही निकले हैं। घटना के तीन दिन बाद पुलिस ने इस घटना का राजफाश कर दिया।
बलवंत एक दोस्त की प्रेमिका को प्रेमजाल में फंसाया था तोर दूसरे दोस्त की पत्नी पर डोरे डाल रहा था। पुलिस ने गांव निवासी दोस्त इलेक्ट्रीशियन विवेक व सेल्समैन देवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। पुलिस लाइन सभागार में शुक्रवार को प्रेस वार्ता में अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि तीनों आपस दोस्त थे।
हलधरपुर थाना क्षेत्र के गहनी गांव निवासी बलवंत सिंह गांव के ही देवेंद्र यादव की पत्नी पर डोरे डाल रहा था। साथ ही विवेक सिंह उर्फ सिट्टू सिंह की प्रेमिका को अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था। बताया कि विवेक और उसकी प्रेमिका के बीच विवाद होने पर मृतक समझौता कराता था। इसका फायदा उठाकर मृतक उसकी प्रेमिका के संपर्क में आ गया।
इसके कारण वह उससे बात भी करना बंद कर दी। आरोपित गांव के ही एक टेंट हाउस पर इलेक्ट्रीशिन है। एएसपी ने बताया कि देवेंद्र खलीलाबाद में सेल्समैन की नौकरी करता है। गांव में उसकी पत्नी रहती है। जान पहचान होने के कारण मृतक उसकी पत्नी पर भी डोरे डाल रहा था। इसकी जानकारी होने पर दोस्तों ने मिलकर युवक के हत्या की साजिश रची।
घर से कुछ दूर पर मृतक रात में ट्यूबवेल पर मौजूद रहकर खेत में पानी चला रहा था। आरोपित शराब लेकर ट्यूबवेल पर पहुंच गए। इसके बाद तीनों ने बैठकर आपस में शराब पी। इसके बाद सिर पर डंडे से हमलाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद मृतक का मोबाइल फोन बगल के एक ट्यूबवेल के पास छिपा दिया गया। जिसकी निशानदेही पर पुलिस ने बरामद कर लिया।
पुलिस ने आरोपित देवेंद्र यादव को सेमराजपुर चट्टी और विवेक को रमेश सिंह के ट्यूबवेल के पास से गिरफ्तार किया है। हलधरपुर पुलिस ने पिता प्रदीप कुमार सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया था।
पीलीभीत में पत्नी के बार-बार मायके जाने से नाराज दामाद महेंद्रपाल ने अपनी सास मोहनदेई की हत्या कर दी। उसने शव को उपलों के ढेर में जला दिया, जिसकी राख से चूड़ियां और हड्डियां मिली हैं।
बेटी को मायके बुलाकर सुख-दुख साझा करती थीं, नाराज था दामाद
पत्नी बीना के बार-बार मायके जाने से बौखलाए महेंद्रपाल ने बुजुर्ग सास मोहनदेई की हत्या कर दी। निर्दयी दामाद उनकी लालसा को समझ नहीं सका, जो बिटिया से अपना सुख-दुख साझा कर लेती थीं। घर का सूनापन छांटने के लिए उन्हें कुछ समय अपने पास बुला लेती थीं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनने के बजाय दामाद लड़ाई करने लगा था।
इस बीच मौका मिलते ही उनकी हत्या कर शव उपलों के बीच जला दिया। शुक्रवार को राख के ढेर से उनकी चूड़ियां व हड्डियां मिलने के बाद आरोपित महेंद्र के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपित से पूछताछ शुरू कर दी है।
जिठनिया गांव निवासी 65 वर्षीय मोहनदेई कब्रिस्तान के पास मकान में अकेली रहती थीं। उनके बेटे सुरेश कुमार गांव के अंदर दूसरे मकान में रहते हैं। मां मोहनदेई अक्सर विवाहित बेटी बीना को अपने पास बुला लेती थीं। उनके बार-बार मायके जाने पर पति महेंद्रपाल आपत्ति जताता था।
यह कहासुनी धीरे-धीरे पारिवारिक कलह में बदल गई थी। महेंद्र ने सास मोहनदेई के पास जाकर भी नाराजगी जताई थी, मगर उन्होंने बीना का पक्ष लेते हुए कहा कि बेवजह कलह न करें। सुरेश कुमार के अनुसार, इसी बात पर बहनोई महेंद्रपाल कई बार मोहनदेई से लड़ाई-झगड़ा करके गया था।
वह नहीं चाहता था कि बीना मायके आएं। 31 जुलाई की रात को महेंद्रपाल अपने गांव हरहरपुर से मोहनदेई के पास पहुंचा। रात में वहां रुका, सुबह बिना सूचना चला गया। दोपहर तक मां मोहनदेई पर ध्यान नहीं गया। शाम तक वह घर में नहीं दिखीं तो तलाश शुरू की।
उस समय महेंद्रपाल पर शक नहीं था। सोचा कि कहीं रिश्तेदारी में चली गई होंगी। सुरेश बोले, शुक्रवार सुबह मां के मकान में जले उपलों का ढेर देखकर शक हुआ। वहां से राख हटाई तो उसमें हड्डियां व मां की चूड़ियां मिलीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि 31 जुलाई की रात को महेंद्रपाल ने उनकी हत्या कर शव उपलों के ढेर के बीच रखकर आग लगा दी। उस दिन के बाद उसने किसी तरह संपर्क भी नहीं किया।
सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि सुरेश की शिकायत पर गांव पहुंची टीम ने राख से मिले अवशेष बरामद किए हैं। उनका डीएनए परीक्षण कराया जाएगा, इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि अवशेष मोहनदेई के हैं या नहीं। आरंभिक रूप से सुरेश की तहरीर के आधार पर महेंद्रपाल के विरुद्ध हत्या, साक्ष्य मिटाने की धारा में प्राथमिकी पंजीकृत करा दी गई है। वह फरार है। घटनाक्रम से आहत बीना भी मायके पहुंचीं।
भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में शाहपुर से भाजपा विधायक राकेश रंजन उर्फ राकेश रंजन ओझा की हत्या की कथित साजिश का मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन में हलचल मच गई है। विधायक को डाक के माध्यम से मिले एक गुमनाम पत्र के आधार पर भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
गुमनाम पत्र में लगाए गए गंभीर आरोप
विधायक राकेश रंजन ओझा के अनुसार, 8 जुलाई को उनके पैतृक घर पर डाक से एक गुमनाम पत्र मिला था। पत्र में दावा किया गया था कि भागलपुर जेल में बंद कुछ आरोपी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। साथ ही जेल अधीक्षक पर भी बंदियों की कथित मदद करने और साजिश में सहयोग देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
विधायक के बयान के आधार पर करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा, आरा कोर्ट बम ब्लास्ट मामले के आरोपी लंबू शर्मा, बक्सर निवासी कुबेर मिश्रा और सोनबरसा निवासी हरीश मिश्रा को नामजद किया गया है। पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है।
पत्र में हैंड ग्रेनेड और शूटर का भी जिक्र
गुमनाम पत्र में यह भी दावा किया गया कि विधायक की हत्या के लिए हैंड ग्रेनेड की व्यवस्था की गई है और कथित शूटर के जरिए वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई है। पत्र मिलने के बाद विधायक ने तत्काल पुलिस को इसकी जानकारी दी और पूरा पत्र जांच के लिए सौंप दिया।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गुमनाम पत्र में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां पत्र की प्रामाणिकता, उसमें दर्ज आरोपों और नामजद लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
पहले भी निशाने पर रह चुका है विधायक का परिवार
विधायक राकेश रंजन ओझा के परिवार का पहले भी आपराधिक घटनाओं से सामना हो चुका है। वर्ष 2016 में उनके पिता और भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा अप्रैल 2025 में स्वयं विधायक पर भी फायरिंग की घटना हुई थी। ऐसे में इस नए मामले की जांच को पुलिस गंभीरता से आगे बढ़ा रही है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाते हुए सागर सोनकर और उसके भाई साहिब को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों कथित हत्या की साजिश का हिस्सा थे। CBI की चार्जशीट में दोनों के नाम शामिल हैं और मामले में कथित आर्थिक लेनदेन समेत कई पहलुओं की जांच जारी है।
राजनीति से जुड़े रहे हैं सागर सोनकर
सागर सोनकर का परिवार लंबे समय से कोलकाता के श्यामपुकुर इलाके में रह रहा है और उसके कई सदस्य विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। सागर ने पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) की विधायक शशि पांजा के कार्यालय में काम किया था। बाद में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गया और कथित तौर पर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ के साथ काम करने लगा।
CBI को साजिश के मिले कथित सुराग
CBI का दावा है कि जांच के दौरान सागर सोनकर की भूमिका संदिग्ध पाई गई। एजेंसी के अनुसार, भाजपा में शामिल होने के बाद भी उसके संपर्क एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल से बने हुए थे। जांच में इन संपर्कों और कथित बातचीत को हत्या की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
40 लाख रुपये के कथित लेनदेन की जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, दिसंबर 2025 से हत्या की कथित योजना तैयार की जा रही थी। CBI का आरोप है कि इस साजिश के दौरान करीब 40 लाख रुपये के कथित लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि इस धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
11 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
CBI ने इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें कथित शूटर, बिचौलिये और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका और उनके बीच संबंधों की विस्तृत जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि 6 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी चर्चित रहा है और इसकी जांच अब भी जारी है।
पूर्वी दिल्ली के गगन विहार में हुई एक महिला की हत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. पुलिस का दावा है कि 62 साल के सॉफ्टवेयर कंसल्टेंट कमल सिंह ने अपनी पत्नी कोमल सिंह की हत्या की पूरी साजिश एक क्राइम वेब सीरीज देखने के बाद रची. हत्या के बाद वह सबूत मिटाने की कोशिश करता रहा और करीब 12 लाख 75 हजार रुपये नकद लेकर नेपाल भागने की योजना बना ली. हालांकि दिल्ली पुलिस ने चार दिन बाद उसे मथुरा रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार कर लिया.
एक घर में रहते थे, लेकिन रिश्ते टूट चुके थे
पुलिस के मुताबिक कमल और कोमल की शादीशुदा जिंदगी पिछले करीब एक साल से बेहद तनावपूर्ण चल रही थी. जांच में सामने आया कि मुंबई की एक यात्रा के दौरान कमल की किसी दूसरी महिला से नजदीकियां बढ़ गई थीं. इसके बाद वह पत्नी से अलग रहने लगा.
Delhi Murder Case: कमल सिंह
दोनों एक ही घर में रहते थे लेकिन घर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था. यहां तक कि अलग-अलग बिजली के मीटर लगा दिए गए थे और कोमल को अपने हिस्से का बिजली बिल खुद भरना पड़ता था. पुलिस का कहना है कि कमल नहीं चाहता था कि पत्नी या बच्चे उसके हिस्से में आएं.
जांच में सामने आया कि कमल जगतपुरी में एक प्रॉपर्टी खरीदना चाहता था. वह चाहता था कि रजिस्ट्री अपने पिता के नाम हो, जबकि कोमल चाहती थीं कि उनका भी उसमें हिस्सा हो. इसी बात को लेकर दोनों के बीच लगातार झगड़े होते थे. पुलिस के मुताबिक इसी विवाद के बाद कमल ने जुलाई महीने में पत्नी की हत्या की योजना बना ली. उसने हरि नगर इलाके से एक तलवार खरीदी और उसे छिपाकर रख दिया.
Delhi Murder Case: कोमल सिंह
वेब सीरीज देखकर बनाया कथित प्लान
पुलिस जांच के मुताबिक कमल सिंह इन दिनों एचबीओ (HBO) की चर्चित क्राइम सीरीज द स्टेयरकेस (The Staircase) देख रहे थे. इस सीरीज की कहानी एक ऐसे हत्या के मामले पर आधारित है जिसमें पत्नी की हत्या तो होती है, लेकिन हत्या का हथियार कभी बरामद नहीं हो पाता. पुलिस का कहना है कि कमल ने भी इसी तरह हत्या का हथियार गायब करने की योजना बनाई ताकि उसके खिलाफ सबूत कमजोर पड़ जाएं.
10 मिनट में अंजाम दी गई वारदात
पुलिस के मुताबिक 30 जुलाई को दोपहर के समय घर में केवल कमल और कोमल मौजूद थे. बेटा लाइब्रेरी जा चुका था, बेटी कार्यालय में थी और घरेलू सहायिका भी घर छोड़कर जा चुकी थी. दोपहर करीब 12:45 बजे कमल उस स्थान पर पहुंचा जहां कोमल बालकनी में कपड़े सुखा रही थीं. पुलिस का आरोप है कि उसने पीछे से तलवार के हिस्से से उनके सिर पर हमला किया. हमले के बाद कोमल जान बचाने के लिए रसोई की ओर भागीं. आरोप है कि कमल ने उन्हें बाल पकड़कर बाहर घसीटा और फिर कैंची से लगातार कई वार किए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर दस से अधिक गंभीर घाव पाए गए. पुलिस के अनुसार पूरी वारदात लगभग दस मिनट के भीतर अंजाम दी गई.
पूरे घर में गूंजती रहीं चीखें
पुलिस के अनुसार महिला की चीखें पूरे मकान में सुनाई दे रही थीं. पुलिस ने बताया कि कमल के पिता ने परिवार के अन्य सदस्य से जाकर देखने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर कहा कि रहने दो. किसी ने बीच-बचाव नहीं किया.
हत्या के बाद शुरू हुआ फरार होने का प्लान
वारदात के बाद आरोपी ने कथित रूप से खून से सने कपड़े और हथियार को एक बैग में रखा. तलवार का हिस्सा दिखाई देने पर उसे तकिए के कवर से ढंक दिया गया. इसके बाद वह करीब 15 मिनट तक नहाया और फिर स्कूटर लेकर घर से निकल गया. रास्ते में उसने हत्या से जुड़ा बैग सुनसान इलाके में फेंक दिया. पुलिस के मुताबिक उसने दो बैंकों से करीब 7 लाख रुपये निकाले. इसके अलावा घर से पहले ही लगभग 5 लाख रुपये ले चुका था. उसके पास कुल करीब 12.75 लाख रुपये नकद थे.
बेटे ने खोला दरवाजा, सामने था खौफनाक मंजर
कमल का 26 वर्षीय बेटा गौरव सिंह दिनभर नोएडा की लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहा था. मेडिकल पीजी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे गौरव ने दिन में कई बार मां को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. शाम करीब 9:15 बजे वह घर पहुंचा और दूसरी चाबी से दरवाजा खोला. अंदर पहुंचते ही उसने मां को खून से लथपथ हालत में लिविंग रूम में पड़ा देखा. पास में कैंची मिली, लेकिन कथित हत्या का मुख्य हथियार तलवार वहां मौजूद नहीं थी. वहीं पिता भी घर से फरार थे..
नेपाल के रास्ते घुमाया, मथुरा में पकड़ाया
दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी की तलाश शुरू की. पुलिस के अनुसार उसने शुरुआत में गोरखपुर की दिशा में जाकर अपना मोबाइल सक्रिय किया ताकि जांच एजेंसियों को लगे कि वह नेपाल भाग गया है. बाद में उसने मोबाइल बंद कर दिया और मथुरा की ओर निकल गया. हालांकि यह प्लान ज्यादा देर तक काम नहीं आया. 2 अगस्त को पुलिस ने उसे मथुरा रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार कर लिया.
अब भी नहीं मिला हत्या का हथियार
गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से 12.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. वारदात में इस्तेमाल स्कूटर भी जब्त कर लिया गया है. हालांकि पुलिस अब तक हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार बरामद नहीं कर पाई है. आरोप है कि कमल ने जानबूझकर उसे रास्ते में फेंक दिया ताकि हत्या का सबसे अहम सबूत पुलिस के हाथ न लग सके. दिल्ली पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ में हत्या की साजिश, पारिवारिक विवाद और फरार होने की पूरी योजना के बारे में जानकारी दी है. पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल हथियार की तलाश कर रही है और मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है. फिलहाल आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है.
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