Category: Dharam

  • नीम करोली बाबा का ‘बेस्ट पेरेंटिंग’ फॉर्मूला, जिद्दी बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए अपनाएं ये बातें..

    नीम करोली बाबा का ‘बेस्ट पेरेंटिंग’ फॉर्मूला, जिद्दी बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए अपनाएं ये बातें..

    बचपन में बच्चे जो सीखते हैं, उसका असर लंबे समय तक रहता है. लेकिन डिजिटल दौर में बच्चों की परवरिश किसी चक्रव्यूह से कम नहीं है. इंटरनेट, सोशल मीडिया और बढ़ती जिद के बीच संस्कार कहीं खोते जा रहे हैं. हर माता-पिता अपने बच्चे को सफल बनाना चाहते हैं, लेकिन इस होड़ में नैतिक मूल्य गायब हो रहे हैं. अगर आप भी इस पेरेंटिंग की उलझन से परेशान हैं, तो आपको सदियों पुराना लेकिन बेहद सटीक समाधान चाहिए.

    यह समाधान छिपा है बीसवीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा की शिक्षाओं में. बाबा की सीख में अनुशासन, सेवा, सच्चाई और प्रेम को खास जगह मिली है. स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक को जीवन की राह दिखाने वाले बाबा ने बच्चों की परवरिश के सरल लेकिन अचूक नियम बताए हैं. आइए जानते हैं बाबा के वे 5 चमत्कारी पेरेंटिंग टिप्स, जो आपके बच्चे को संस्कारी और सफल बना सकते हैं. पांचवीं सीख तो आज के हर बच्चे के लिए संजीवनी बूटी है.

    सुबह की शुरुआत प्रार्थना से

    बच्चों को सुबह जल्दी उठने की आदत डालें. दिन की शुरुआत भगवान को याद करके करें. कोई छोटा मंत्र बोलने को कह सकते हैं. या बस कुछ पल शांत बैठने दें. इससे बच्चे दिन की शुरुआत पॉजिटिव तरीके से करेंगे. मन भी शांत रहेगा. धीरे-धीरे उनमें कृतज्ञता की आदत बन सकती है. यह छोटी सी आदत उनके कॉन्फिडेंस और सोच पर भी अच्छा असर डाल सकती है.

    नियमित दिनचर्या का पालन

    बच्चों की लाइफ में रूटीन होना जरूरी है. सोने, उठने, पढ़ने और खेलने का समय तय रखें. हर बात में डांटने के बजाय प्यार से समझाएं. मोबाइल और गेमिंग का टाइम भी तय किया जा सकता है. इससे बच्चा खुद अपने समय को मैनेज करना सीखता है. पढ़ाई के साथ खेल और आराम के लिए भी वक्त मिले. ऐसी आदत आगे चलकर जिम्मेदारी निभाने में काम आती है.

    दूसरों की मदद

    नीम करोली बाबा की सीख में सेवा और प्रेम का खास महत्व है. बच्चों को दूसरों की मदद करना सिखाएं. दोस्त की पढ़ाई में मदद करना हो या घर में किसी छोटे काम में हाथ बंटाना. छोटी-छोटी चीजें भी मायने रखती हैं. उन्हें जरूरतमंद के साथ सम्मान से पेश आना बताएं. इससे बच्चे में दया और संवेदनशीलता बढ़ सकती है. वह सिर्फ अपने बारे में सोचने के बजाय दूसरों की फीलिंग्स भी समझना सीखेगा.

    सच्चाई और विनम्रता

    बच्चे से हमेशा सच बोलने की उम्मीद करें. लेकिन गलती होने पर उसे डराएं नहीं. उसे समझाएं कि सच बोलना ज्यादा जरूरी है. अपनी गलती मानना कमजोरी नहीं है. दूसरों से सम्मान से बात करना भी सिखाएं. बाबा की सीख के मुताबिक, अहंकार से दूर रहना जरूरी है. किसी ने बुरा व्यवहार किया हो, तब भी खुद का व्यवहार अच्छा रखना सीखें. यही आदत बच्चे की पर्सनैलिटी को मजबूत बना सकती है.

    सादगीपूर्ण जीवन जीना

    बच्चों को हर नई चीज दिलाना जरूरी नहीं है. महंगा फोन या गैजेट खुशी की गारंटी नहीं है. उन्हें चीजों की वैल्यू समझाएं. दिखावे की जगह जरूरत को महत्व देना सिखाएं. परिवार के साथ समय बिताएं. साथ बैठकर खाना खाएं. कभी बिना मोबाइल के बातचीत करें. ऐसी छोटी आदतें बच्चे को रिश्तों की अहमियत समझाती हैं. सादगी के साथ जीने वाला बच्चा लाइफ के उतार-चढ़ाव को भी ज्यादा सहजता से संभालना सीख सकता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • Premanand Maharaj: ऑफिस में छुट्टी के लिए झूठ बोलना पाप है या नहीं? प्रेमानंद महाराज से जानिए जवाब..

    Premanand Maharaj: ऑफिस में छुट्टी के लिए झूठ बोलना पाप है या नहीं? प्रेमानंद महाराज से जानिए जवाब..

    Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज अपने साधक और भक्तों से एकांतिक वार्तालाप करते हैं. इसके कई वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. वह एकांतिक वार्तालाप के दौरान भक्तों द्वारा किए जाने वाले सभी सवालों का जबाव देते हैं. भक्त अक्सर सामान्य जीवन और धर्म-कर्म से जुड़े सवाल पूछते हैं. एक भक्त ने महाराज जी से ऑफिस में छूट्टी के लिए झूठ बोलने के बारे में पूछा.

    छुट्टी के लिए झूठ बोलना

    एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि, ‘मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं. कंपनी में जरूरी काम के कारण कई बार छुट्टी नहीं मिलती है. ऐसे में कई बार दादी, फूफा या किसी अन्य रिश्तेदार की मौत का बहाना बनाकर छुट्टी लेनी पड़ती है, तो क्या छुट्टी के लिए झूठ बोलने से पाप लगता है?’ इस बात को सुनकर प्रेमानंद महाराज के चेहरे पर हंसी आ गई. इसके बाद उन्होंने इस बात का जबाव दिया.

    क्या बोले प्रेमानंद महाराज?

    इसका जबाव प्रेमानंद महाराज ने हंसते हुए एक कहावत के साथ दिया, उन्होंने बोला कि, यह सब कलयुग का प्रभाव है. ‘झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना’ वह बोले कि, लेकिन कुछ भी हो झूठ बोलना पाप ही होता है. ऐसा करने से बचना चाहिए. उन्होंने आगे बताया कि, ‘सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप, जाके हृदय ताप है. तांके हृदय आप’ यानी जिसके मन में सच्चाई होती है उसके मन में भगवान का वास होता है. आप अपनी कठिनाइयों से लड़ें लेकिन झूठ बोलने से बचना चाहिए.

    प्रेमानंद महाराज को वहां बैठे एक व्यक्ति ने बताया कि, वह आज भी झूठ बोलकर यहां आया है. वरना उसे वृंदावन आने के लिए छुट्टी नहीं मिलती. इसको लेकर महाराज जी ने कहा कि, भजन, धाम और भगवत प्राप्ति के लिए झूठ बोलना झूठ नहीं होता है. आप पूजा-अर्चना और भगवान के दर्शन के छुट्टी लेकर जा सकते हैं. धार्मिक कार्यों के लिए झूठ बोलना उचित हो सकता है लेकिन सांसारिक कार्यों के लिए झूठ नहीं बोलना चाहिए.

  • कारागार में भक्ति की अनोखी गाथा, जानिए तुलसीदास जी ने कैसे की थी हनुमान चालीसा की रचना..?

    कारागार में भक्ति की अनोखी गाथा, जानिए तुलसीदास जी ने कैसे की थी हनुमान चालीसा की रचना..?

    तुलसीदास जी महान संत और भगवान श्रीराम के परम भक्त थे. वह 16वीं शताब्दी के महान संत थे. वह हनुमान जी की भक्ति करते थे. तुलसीदास जी ने रामचरितमानस महाकाव्य, हनुमान चालीसा और कई महाकाव्य की रचना की थी. उन्होंने अकबर की कैद में रहकर हनुमान चालीसा की रचना की थी.

    गोस्वामी तुलसीदास जी ने मुश्किल परिस्थितियों में हनुमान चालीसा की रचना की थी.

    अकबर की कैद में लिखी थी हनुमान चालीसा?

    प्रचलित कहानियों के अनुसार, एक बार मुगल बादशाह अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास जी को अपने दरबार में बुलाया था. इसके बाद अकबर ने तुलसीदास जी से चमत्कार दिखाने के लिए कहा. उनके मना करने से अकबर ने तुलसीदास जी को फतेहपुर सीकरी के कारागार में डाल दिया था. तुलसीदास जी ने अकबर की कैद में रहने के दौरान हनुमान चालीसा की रचना की थी.

    तुलसीदास जी ने कारागार में रोजाना हनुमान जी की स्तुति की और रोजानाा एक चौपाई लिखि. इस प्रकार 40 दिनों तक अकबर की कैद में रहने के दौरान तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की थी. लोक कथाओं के अनुसार, तुलसीदास जी के कैद में होने के दौरान 40वें दिन बंदरों ने फतेहपुर सीकरी के कारागार में हमला कर दिया. अकबर की सेना भी उन्हें नहीं रोक पाई. इसके बाद एक दरबारी ने सलाह दी कि, तुलसीदास जी को मुक्त कर दें. अकबर ने दरबारी की सलाह मानी और तुलसीदास जी को मुक्त कर दिया गया. इसके बाद सभी बंदर भी वहां से चले गए. इस प्रकार से हनुमान चालीसा की रचना हुई थी.

  • भाई नहीं होने पर इन 4 देवताओं को बांध सकती हैं राखी, रक्षाबंधन पर घर आएगी सुख-समृद्धि..

    भाई नहीं होने पर इन 4 देवताओं को बांध सकती हैं राखी, रक्षाबंधन पर घर आएगी सुख-समृद्धि..

    Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है. सावन पूर्णिमा तिथि इस साल 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को महत्व देते हुए. सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को मान्य होगी. इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा.

    भाई न होने पर क्या करें?

    रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई के हाथ में राखी बांधती हैं. इसे रक्षा सूत्र माना जाता है. अगर किसी का भाई नहीं है, तो वह ऐसे में भगवान को राखी बांध सकती हैं. इससे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा. इसके अलावा भगवान को राखी बांधना बहुत ही शुभ माना जाता है. आप भाई को राखी बांधने से पहले भगवान को राखी बांध सकती हैं. चलिए देवताओं को राखी बांधने के बारे में जानते हैं.

    इन 4 देवताओं को बांध सकती हैं राखी

    शिव जी – रक्षाबंधन के पर्व पर भगवान शिव को राखी बांधनी चाहिए. शिव जी को राखी बांधने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा. भोलेनाथ भय और संकट से आपकी रक्षा करेंगे. शिव जी को हरे रंग की राखी बांधनी चाहिए.

    हनुमान जी – हनुमान जी को शिव जी का ही रूप माना जाता है. आप हनुमान जी को राखी बांध सकती हैं. हनुमान जी को नारंगी रक्षासूत्र बांधे. इससे आपको बल-बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिलेगा.

    गणेश जी – गणेश जी को हिंदू धर्म में सर्वप्रथम पूज्नीय माना जाता है. रक्षाबंधन के पर्व पर गणेश जी को राखी बांधें. गणेश जी को राखी बांधने से विघ्नहर्ता सभी विघ्न दूर करेंगे. गणेश जी को लाल या नारंगी रंग की राखी बांधे.

    कृष्ण जी – कृष्ण जी को आप राखी बांध सकती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्रौपदी ने कृष्ण जी को रक्षा सूत्र बांधा था. इसके बाद उन्होंने द्रौपदी की रक्षा की थी. आप कृष्ण जी को नीले रंग की राखी बांधे.

  • कैसे करें तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का पाठ..?

    कैसे करें तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का पाठ..?

    गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की थी. हनुमान जी के भक्त रोजाना या खासकर मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करते हैं. हनुमान जी की भक्ति और चालीसा का पाठ करने वाले लोगों को हनुमान चालीसा पढ़ने के दौरान कई नियमों का ध्यान रखना चाहिए. हनुमान चालीसा का पाठ करने के नियमों के बारे में जानते हैं.

    हनुमान चालीसा का पाठ करने के नियम

    हनुमान चालीसा का पाठ साफ और स्वच्छ स्थान पर बैठकर करना चाहिए. शुद्धता और पवित्रता का खास ध्यान रखना चाहिए. सुबह या शाम के समय चालीसा का पाठ करना अधिक फलदायी होता है. स्नान कर साफ लाल रंग के वस्त्र पहनकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर और प्रतिमा के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर चालीसा का पाठ करें. चालीसा का पाठ करने के साथ ही हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं. भक्त 5, 7, या 11 बार चालीसा का पाठ करें.

    श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि।
    बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
    बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

    चौपाई

    —विज्ञापन—

    जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
    जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
    राम दूत अतुलित बल धामा।
    अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
    महाबीर बिक्रम बजरंगी।
    कुमति निवार सुमति के संगी।।
    कंचन बरन बिराज सुबेसा।
    कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
    हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।
    कांधे मूंज जनेउ साजे।।
    शंकर सुवन केसरी नंदन।
    तेज प्रताप महा जग वंदन।।
    बिद्यावान गुनी अति चातुर।
    राम काज करिबे को आतुर।।
    प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
    राम लखन सीता मन बसिया।।
    सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
    बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
    भीम रूप धरि असुर संहारे।
    रामचन्द्र के काज संवारे।।
    लाय सजीवन लखन जियाये।
    श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
    रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
    तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
    सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
    अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
    सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
    नारद सारद सहित अहीसा।।
    जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
    कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
    तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
    राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
    तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
    लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
    जुग सहस्र जोजन पर भानु।
    लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
    प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
    जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
    दुर्गम काज जगत के जेते।
    सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
    राम दुआरे तुम रखवारे।
    होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
    सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
    तुम रच्छक काहू को डर ना।।
    आपन तेज सम्हारो आपै।
    तीनों लोक हांक तें कांपै।।
    भूतपिसाच निकट नहिं आवै।
    महाबीर जब नाम सुनावै।।
    नासै रोग हरे सब पीरा।
    जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
    संकट तें हनुमान छुड़ावै।
    मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
    सब पर राम तपस्वी राजा।
    तिन के काज सकल तुम साजा।।
    और मनोरथ जो कोई लावै।
    सोई अमित जीवन फल पावै।।
    चारों जुग परताप तुम्हारा। है
    परसिद्ध जगत उजियारा।।
    साधु संत के तुम रखवारे।
    असुर निकन्दन राम दुलारे।।
    अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
    अस बर दीन जानकी माता।।
    राम रसायन तुम्हरे पासा।
    सदा रहो रघुपति के दासा।।
    तुह्मरे भजन राम को पावै।
    जनम जनम के दुख बिसरावै।।
    अंत काल रघुबर पुर जाई।
    जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
    और देवता चित्त न धरई।
    हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
    संकट कटै मिटै सब पीरा।
    जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
    जय जय जय हनुमान गोसाईं।
    कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
    जो सत बार पाठ कर कोई।
    छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
    जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
    होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
    तुलसीदास सदा हरि चेरा।
    कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

    दोहा

    पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
    राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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  • कब होगी पितृपक्ष की शुरुआत? जानिए श्राद्ध और तर्पण की सभी तिथियां और महत्व…

    कब होगी पितृपक्ष की शुरुआत? जानिए श्राद्ध और तर्पण की सभी तिथियां और महत्व…

    Pitru Paksha 2026 Date: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत ही खास महत्व होता है. पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. पितृपक्ष का आरंभ हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होता है. इसका समापन आश्विन माह की अमावस्या पर होता है. पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष का आरंभ 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के दिन होगा. इसका समापन 10 अक्टूबर को आश्विन अमावस्या को पितृपक्ष का समापन हो जाएगा.

    पितृपक्ष की तिथियां (Pitru Paksha Dates)

    26 सितंबर, 2026 – शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध
    27 सितंबर, 2026 – रविवार प्रतिपदा श्राद्ध
    28 सितंबर, 2026 – सोमवार द्वितीया श्राद्ध
    29 सितंबर, 2026 – मंगलवार तृतीया श्राद्ध
    30 सितंबर, 2026 – बुधवार चतुर्थी श्राद्ध
    1 अक्टूबर, 2026 – गुरुवार पंचमी श्राद्ध
    2 अक्टूबर, 2026 – शुक्रवार षष्ठी श्राद्ध
    3 अक्टूबर, 2026 – शनिवार सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध

    पंचांग के अनुसार, 3 अक्टूबर को सप्तमी तिथि का समापन सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है. इसके बाद अष्टमी तिथि 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर समाप्त हो रही है. 4 अक्टूबर को नवमी तिथि मान्य होगी. ऐसे में 3 अक्टूबर को सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथि मान्य होगी.

    4 अक्टूबर, 2026 – रविवार नवमी श्राद्ध
    5 अक्टूबर, 2026 – सोमवार दशमी श्राद्ध
    6 अक्टूबर, 2026 – मंगलवार एकादशी श्राद्ध
    7 अक्टूबर, 2026 – बुधवार द्वादशी श्राद्ध
    8 अक्टूबर, 2026 – गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध
    9 अक्टूबर, 2026 – शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
    10 अक्टूबर,2026 – शनिवार सर्वपितृ अमावस्या

    श्राद्ध पक्ष तिथि के अनुसार श्राद्ध का नियम

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचांग की जिस तिथि को परिजन की मृत्यु हुई होती है, उसी दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है. अगर किसी की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई है. ऐसे में उसका श्राद्ध पितृपक्ष में पंचमी तिथि के दिन किया जाएगा. इसके अलावा अगर किसी को अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि का नहीं पता हैं, ऐसे में वह सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और पिंडदान कर सकता है. पितृपक्ष के दौरान पितरों की आत्मा पृथ्वी लोक पर आती हैं. इस दौरान पितरों का श्राद्ध कर्म करने से वह प्रसन्न होते हैं. पितरों के प्रसन्न होने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है.

  • घर के एंट्री गेट पर कौन-सी 3 चीजें लगाने से पैसों की तंगी तुरंत होती है दूर,..?

    घर के एंट्री गेट पर कौन-सी 3 चीजें लगाने से पैसों की तंगी तुरंत होती है दूर,..?

    Money Vastu Upay: क्या मेहनत करने के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिकता है? कमाई होती है, लेकिन खर्च और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है? ऐसे में हम अक्सर आय बढ़ाने के तरीके खोजते हैं, लेकिन घर के माहौल और मुख्य द्वार पर ध्यान नहीं देते हैं. वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को बेहद खास माना गया है. मान्यता है कि यहीं से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रवेश होता है. इसलिए आज जानते हैं, 3 आसान लेकिन असदार वास्तु उपाय, जिन्हें अपनाने से लाभ होता है.

    दरवाजे का रंग और नेमप्लेट

    वास्तु की मान्यता के अनुसार, मुख्य द्वार पर बहुत गहरे रंगों से बचना चाहिए. खासकर काला या गहरा नीला रंग न चुनने की सलाह दी जाती है. इसकी जगह हल्का पीला, क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग अच्छा माना जाता है. साथ ही मुख्य द्वार के दाईं तरफ साफ-सुथरी नेमप्लेट लगाएं. लकड़ी या पीतल की नेमप्लेट रख सकते हैं. ध्यान रखें कि उस पर नाम साफ दिखाई दे. टूटी, पुरानी या धुंधली नेमप्लेट को बदल देना बेहतर है.

    काली हल्दी की पोटली

    नकारात्मक ऊर्जा और नजर से बचाव के लिए काली हल्दी का यह पारंपरिक उपाय किया जाता है. इसके लिए एक छोटे काले कपड़े में काली हल्दी की गांठ और थोड़ा फिटकरी बांध लें. इस पोटली को मुख्य द्वार के पास ऐसी जगह रखा या टांगा जा सकता है, जहां वह बहुत ज्यादा नजर न आए. यह एक पारंपरिक वास्तु मान्यता है, जो अक्सर लोग करते हैं.

    दहलीज के लिए खास उपाय

    घर की दहलीज को वास्तु में खास महत्व दिया जाता है. पारंपरिक मान्यता के अनुसार, दहलीज के नीचे चांदी का तार रखने का उपाय बताया गया है. अगर इसके लिए तोड़-फोड़ संभव नहीं है, तो आसान तरीका अपना सकते हैं. हर सुबह मुख्य द्वार और दहलीज की अच्छी तरह सफाई करें. पानी में थोड़ी हल्दी मिलाकर दहलीज पर छिड़काव भी किया जा सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि दरवाजे के सामने जूते, कूड़ा या बेकार सामान का ढेर न लगाएं.

    इसका भी रखें ध्यान

    मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ का चिह्न लगाना भी शुभ माना जाता है. आम या अशोक के पत्तों की वंदनवार भी लगा सकते हैं. बस ध्यान रखें कि एंट्री साफ, खुली और रोशनी वाली हो. घर का माहौल जितना व्यवस्थित रहेगा, उतना ही पॉजिटिव फील होगा. आखिर घर की पहली झलक मुख्य द्वार से ही मिलती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • सुख पाने के लिए करें इन जीव-जंतुओं की सेवा, दूर होगी आर्थिक तंगी और बनेंगे बिगड़े काम..

    सुख पाने के लिए करें इन जीव-जंतुओं की सेवा, दूर होगी आर्थिक तंगी और बनेंगे बिगड़े काम..

    सुख-समृद्धि के लिए करें जीव-जंतुओं की सेवा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दूसरों की भलाई और जीव-जंतुओं की सेवा करने से मन को शांति मिलती है। व्यक्ति को हमेशा दूसरों के हित के बारे में सोचना चाहिए और जरूरतमंदों की मदद करने का प्रयास करना चाहिए। किसी दूसरे के दुख को देखकर उसके प्रति संवेदना रखना और अपनी क्षमता के अनुसार सहायता करना अच्छे कर्मों में माना जाता है।

    मान्यता है कि जीवन में सुख-समृद्धि और आर्थिक परेशानियों से राहत के लिए गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भोजन कराया जा सकता है। गाय को गुड़-रोटी या हरा चारा खिलाएं। कौवों को खिचड़ी या तेल लगी रोटी और चींटियों को आटे की रोटी खिलाने की परंपरा भी बताई गई है।

    शनिवार और गुरुवार को करें ये उपाय

    धार्मिक मान्यताओं में शनिवार और गुरुवार को जीव-जंतुओं को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलने और घर में सुख-शांति आने की मान्यता है।

    हालांकि, जीव-जंतुओं को भोजन कराते समय उनकी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्हें हमेशा ताजा, साफ और उनके लिए सुरक्षित भोजन ही दें। सेवा का उद्देश्य केवल किसी मनोकामना की पूर्ति नहीं, बल्कि जीवों के प्रति दया और करुणा का भाव रखना भी होना चाहिए।

  • महात्मा विदुर के इस श्लोक को अपनाने से मिल सकता है सुखी जीवन, इन 7 बातों से रहें दूर..

    महात्मा विदुर के इस श्लोक को अपनाने से मिल सकता है सुखी जीवन, इन 7 बातों से रहें दूर..

    महात्मा विदुर ने अपनी नीतियों में जीवन जीने के बारे और सुखी जीवन से जुड़े कई नियमों के बारे में बताया है. वह महाभारत काल में हस्तिनापुर के महामंत्री थे. वह अपनी बुद्धिमत्ता और नीतियों के लिए प्रसिद्ध थे. उस समय के उनके विचार और नीतियां आज के समय में भी प्रासांगिक साबित होती है. व्यक्ति को सुखी जीवन के लिए उनके बताए इन नियमों को अपनाना चाहिए.

    विदुर नीति में वर्णित प्रसिद्ध श्लोक

    अनर्थकं विदेशवासं गृहेशुं। पापैः सख्यं परदाराभिमर्शनम्।
    दशं स्तेयं पैशुनं मध्यपानं न सेवते यः स सुखी सदेव॥

    महात्मा विदुर का यह प्रसिद्ध श्लोक महाभारत काल में वर्णित विदुर नीति का है. इस श्लोक के माध्यम से महात्मा विदुर ने लोगों को बुरे कर्मो और बुराई से दूर रहने की सलाह दी है. इस श्लोक के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सात चीजों से दुरी बनाकर रहना चाहिए. आइये इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.

    इन 7 बातों से रहें दूर

    व्यर्थ का विदेशवास – व्यर्थ में घर-परिवार से दूर नहीं रहना चाहिए. इससे जीवन में अकेलापन और दुख आता है. घर से दूर रहना उचित नहीं होता है.

    पापियों से दोस्ती – आपको अपने मित्र सोच-समझकर बनाने चाहिए. पाप करने वाले और चरित्रहीन लोगों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए.

    पराई स्त्री से संबंध – कभी भी जीवन में पराई स्त्री से संबंध नहीं रखने चाहिए. पराई स्त्री के साथ संबंध बनाने से परिवार का नाश होता है.

    अपवाद – अपवाद का अर्थ है कि, दूसरों को बदनाम करने और व्यर्थ में किसी के बारे में झूठ बोलने से बचना चाहिए. इसके कारण रिश्ते कमजोर होते हैं.

    चोरी करना – चोरी करने वाले इंसान को जीवन में कभी सुख नहीं मिलता है. चोरी करने से मिले धन से जीवन में परेशानियों आती हैं. हमेशा मेहनत से धन कमाना चाहिए.

    चुगली करना – दूसरों की चुगली करना और इधर-उधर की बातें करके अफवाह फैलाना गलत होता है. इससे समाज में कलह पैदा होती है.

    नशा और मद्यपान – नशा यानी मद्यपान करने से व्यक्ति की बुद्धि, सेहत और सम्मान का नाश होता है. इसलिए नशा करने से बचना चाहिए. शराब, सिगरेट और किसी भी नशे की लत है, तो इसे छोड़ दें.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.Satyareport  इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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  • अच्छी कमाई के बाद भी खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय..

    अच्छी कमाई के बाद भी खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय..

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    अगर कमाई अच्छी होने के बावजूद महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं, तो घर के माहौल पर भी ध्यान देना चाहिए। वास्तु शास्त्र में घर की व्यवस्था और कुछ दिशाओं को आर्थिक स्थिरता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि कुछ आसान उपायों से घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    महीने की शुरुआत में सैलरी या कारोबार की कमाई खाते में आते ही आर्थिक स्थिति अच्छी नजर आती है, लेकिन कुछ दिनों बाद बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो केवल कम कमाई को इसकी वजह मानना सही नहीं है। खर्च करने की आदत और पैसों को संभालने की आदत भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और व्यवस्था को भी आर्थिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में कुछ आसान वास्तु उपाय आजमाए जा सकते हैं।

    आर्थिक समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु उपाय

    1. मुख्य द्वार: वास्तु शास्त्र
      में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया गया है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश यहीं से होता है। इसलिए दरवाजे के आसपास कूड़ा, पुराने जूते, टूटे सामान या कबाड़ जमा न होने दें। मुख्य द्वार को साफ और रोशन रखें।
    2. टूटी चीजें:
      घर में लंबे समय से पड़ी खराब या टूटी वस्तुओं को वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। टूटे बर्तन, बंद घड़ी, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटा शीशा और बेकार पड़ी चीजें समय-समय पर हटा दें। इससे घर व्यवस्थित रहेगा और अनावश्यक सामान भी जमा नहीं होगा।
    3. नमक:
      वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में नमक को नकारात्मकता दूर करने से जोड़ा जाता है। कई लोग सप्ताह में एक बार पोछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक मिलाकर घर की सफाई करते हैं। हालांकि, इसे धन बढ़ाने का वैज्ञानिक उपाय नहीं माना जाता। इसे केवल पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही अपनाएं।
    4. उत्तर दिशा:
      वास्तु में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है और इसका संबंध धन-संपत्ति से जोड़ा जाता है। इसलिए इस हिस्से में भारी कबाड़ या अनुपयोगी सामान रखने से बचें। अगर यहां सामान रखा है तो उसे व्यवस्थित करें और बेकार चीजें हटा दें।
    5. तिजोरी की दिशा:
      वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन रखने वाली तिजोरी या अलमारी को सही दिशा में रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण दिशा की दीवार के पास तिजोरी रखकर उसका मुंह उत्तर की ओर खुलना शुभ माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट अलग-अलग होती है, इसलिए बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। तिजोरी में फटे नोट, बेकार कागज और पुरानी रसीदें जमा न करें।
    6. शाम को जलाएं दीपक:
      सनातन परंपरा में शाम के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। शाम के समय घर को साफ रखें और अनावश्यक अंधेरा न रहने दें।