Category: Dharam

  • शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत

    शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत

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    घर के मुख्य दरवाजा सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना गया है। मान्यता है कि शाम का समय घर में शुभता के आगमन का होता है। ऐसे में इस समय मुख्य द्वार से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियां घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार शाम को घर का दरवाजा बंद रखना क्यों शुभ नहीं माना जाता है।

    शाम के समय क्यों नहीं बंद करते मुख्य द्वार

    • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम का समय बेहद शुभ माना जाता है। इस समय मां लक्ष्मी के घर में आगमन की मान्यता है। कहते हैं कि अगर इस समय मुख्य द्वार बंद रखा जाए तो घर की समृद्धि और शुभ ऊर्जा के प्रवेश में बाधा आ सकती है।
    • वास्तु की माने तो लंबे समय तक शाम के समय मुख्य द्वार बंद रखने से घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    सकारात्मक ऊर्जा के लिए जरूरी

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के समय वातावरण में ऊर्जा का बदलाव होता है। ऐसे में घर का मुख्य द्वार कुछ समय के लिए खुला रखने से सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की मान्यता है। माना जाता है कि इससे घर का माहौल शांत और खुशहाल बना रहता है।

    मुख्य द्वार पर करें ये उपाय

    शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा काफी पुरानी है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी से घर में शुभता आती है।

    इसके अलावा मुख्य द्वार पर गंगाजल या साफ जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे नेगेटिविटी दूर होने और घर में सकारात्मक माहौल बने रहने की मान्यता है।

    ध्यान रखें ये बातें

    घर के मुख्य द्वार पर गंदगी, अव्यवस्था और अंधेरा नहीं रखना चाहिए। वास्तु अनुसार, साफ-सुथरा और रोशनी से भरा मुख्य द्वार घर में शुभ ऊर्जा को आकर्षित करता है, इसलिए इस स्थान को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय इन नियमों का ध्यान रखना घर-परिवार की बरकत और खुशहाली के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।

  • घर के ईशान कोण में रखी 4 चीजें बना सकती हैं आपको अमीर, भाग्य का भी मिलता है साथ,,

    घर के ईशान कोण में रखी 4 चीजें बना सकती हैं आपको अमीर, भाग्य का भी मिलता है साथ,,

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    वास्तु शास्त्र की मानें तो घर का हर कोना हमारे जीवन पर प्रभाव डालता है। इसलिए वास्तु के नियमों का पालन करके हम अगर सही दिशा में सही वस्तुएं रखते हैं तो जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में क्या चीजें रखने से आपके घर में सुख-शांति आती है, आर्थिक लाभ मिलता है और भाग्य का भी आपको साथ मिलने लगता है।

    ईशान कोण में रखें ये चीजें

    • ईशान कोण के देवता भगवान शिव हैं वहीं देवगुरु बृहस्पति को इस दिशा का स्वामी ग्रह माना जाता है। ऐसे में अगर आप ईशान कोण में गुरु यंत्र या फिर भगवान शिव की प्रतिमा रखते हैं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। ऐसा करने से आपको करियर और आर्थिक पक्ष में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते है। गुरु ग्रह को संपन्नता का कारक माना जाता है ऐसे में अगर आप गुरु यंत्र ईशान कोण में स्थापित करते हैं तो आपकी तिजोरी पैसों से भर सकती है।
    • ईशान कोण में शंख रखना भी अच्छा माना गया है। भगवान विष्णु के प्रतीक शंख को अगर आप ईशान कोण में रखते हैं तो आपको सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। हालांकि इस दिशा में रखे शंख की आपको पूजा करनी चाहिए और इसे घर के लोगों के अलावा किसी और को नहीं छूने देने चाहिए। इस शंख का इस्तेमाल बजाने के लिए आपको नहीं करना चाहिए।
    • कलश को भी आप घर के ईशान कोण में रख सकते हैं। कलश को दैवीय शक्तियों का आह्वान करने का स्रोत माना जाता है। ऐसे में अगर आप घर के ईशान कोण में कलश रखते हैं तो देवी-देवताओं की कृपा आप पर बनी रहती है। इसके साथ ही वास्तु से संबंधित दोष भी दूर होते हैं। ईशान कोण में कलश रखने से आरोग्य की आपको प्राप्ति होती है और साथ ही आर्थिक रूप से भी आप संपन्न होते हैं।
    • घर के ईशान कोण में आपको श्रीफल रखने से भी बेहद शुभ फल मिल सकते हैं। श्रीफल को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है ऐसे में अगर आप ईशान कोण में श्रीफल रखते हैं तो धन-धान्य की आपके जीवन में कोई कमी नहीं रहती। श्रीफल के प्रभाव से घर में मौजूद नकारात्मकता भी दूर होने लगती है। श्रीफल रखने से घर का वातावरण भी पवित्र और सात्विक बना रहता है। अगर आप विस्तार से जानना चाहते हैं कि ईशान कोण को शुभ क्यों माना जाता है और इस दिशा में पूजा करना लाभकारी क्यों है तो हमारी वेबसाइट पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।
  • पंचमुखी हनुमान के पांचों चेहरों का क्या है रहस्य? हर रूप देता है अलग आशीर्वाद, ये हैं तस्वीर लगाने की सही दिशा

    पंचमुखी हनुमान के पांचों चेहरों का क्या है रहस्य? हर रूप देता है अलग आशीर्वाद, ये हैं तस्वीर लगाने की सही दिशा

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    हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप को बेहद शक्तिशाली माना गया है। पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख अलग-अलग शक्तियों के प्रतीक हैं। मान्यता है कि इन पांचों रूपों से साहस, सुरक्षा, स्वास्थ्य, समृद्धि, ज्ञान और विजय का आशीर्वाद मिलता है। यही वजह है कि पंचमुखी हनुमान की तस्वीर को घर में रखना भी शुभ माना जाता है। तो चलिए जानते हैं उनके पांच मुखों का महत्व और घर में पंचमुखी हनुमान की तस्वीर लगाने की सही दिशा।

    पंचमुखी रूप की कथा

    सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब अहिरावन भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था, तब उन्हें बचाने के लिए हनुमान जी ने पंचमुखी स्वरूप धारण किया। पाताल लोक में पांच दिशाओं में रखे पांच दीपकों को एक साथ बुझाने के बाद ही अहिरावन का अंत संभव था। हनुमान जी ने पांच रूप धारण कर सभी दीपक बुझाए। इस तरह अपनी सूझबूझ और पराक्रम से उन्होंने भगवान राम और उनके अनुज लक्ष्मण को मुक्त कराया।

    पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख का महत्व

    1. वानर मुख
      : पंचमुखी हनुमान का मुख्य मुख वानर रूप में होता है। इसे पूर्व दिशा से संबंधित माना जाता है। यह रूप साहस, यश, पवित्रता और भक्ति से जुड़ा है। इसे हनुमान जी की शक्ति और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।
    2. नरसिंह मुख:
      दक्षिण दिशा की ओर माने जाने वाले सिंह मुख को भगवान नरसिंह का स्वरूप बताया जाता है। यह रूप भय से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
    3. गरुड़ मुख:
      पंचमुखी स्वरूप में पश्चिम दिशा से संबंधित गरुड़ मुख भी शामिल है। मान्यता है कि यह रूप विषैले प्रभावों, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव का प्रतीक है।
    4. वराह मुख:
      उत्तर दिशा से जुड़ा वराह मुख भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। इसे स्वास्थ्य, लंबी आयु, स्थिरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
    5. हयग्रीव मुख:
      पंचमुखी हनुमान का ऊपर की ओर रहने वाला अश्व मुख भगवान हयग्रीव के स्वरूप से संबंधित माना जाता है। यह ज्ञान, बुद्धि और विजय का प्रतीक है। विद्यार्थियों और ज्ञान की साधना करने वालों के लिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    घर में कहां लगाएं पंचमुखी हनुमान की  तस्वीर?

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार , पंचमुखी हनुमान की तस्वीर घर के मुख्य द्वार पर लगाना शुभ होता है। इसे ड्रॉइंग रूम या लिविंग रूम में भी रखा जा सकता है। दक्षिण दिशा को पंचमुखी हनुमान की तस्वीर के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण में भी इसे लगाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होने की मान्यता है।

  • बारिश के पानी से जुड़े ये वास्तु उपाय बदल सकते हैं हालात, धन-सेहत से जुड़ी परेशानियों के लिए करें ये काम

    बारिश के पानी से जुड़े ये वास्तु उपाय बदल सकते हैं हालात, धन-सेहत से जुड़ी परेशानियों के लिए करें ये काम

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    सावन के महीने में बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश मौसम को खुशनुमा बनाती है और सूखे धरती को राहत देकर उसे हरा-भरा करती है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में बारिश के पानी को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि बरसात के साफ पानी को जमा करके किए गए कुछ उपायों से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। तो चलिए जानते हैं बारिश के पानी से जुड़े कुछ आसान उपाय।

    आर्थिक स्थिति से राहत का उपाय

    अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो बारिश के पानी से जुड़ा यह उपाय कर सकते हैं। इसके लिए बारिश का पानी मिट्टी के घड़े या तांबे के बर्तन में इकट्ठा करें। बर्तन में रखें इस पानी में एक चुटकी हल्दी मिला दें। अब इसे घर की उत्तर दिशा में रख दें। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, 11 दिनों तक सुबह और शाम इसके पास दीपक जलाने से आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बन सकते हैं।

    अच्छी सेहत के लिए उपाय

    हालांकि, बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह और सही इलाज लेना जरूरी है। लेकिन अगर परिवार में कोई व्यक्ति लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहा है तो बारिश पानी का यह उपाय राहत दे सकता है। इसे स्टील या तांबे के बर्तन में रखकर भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद शिवलिंग पर यह जल अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलने की मान्यता है।

    इस उपाय से चंद्रमा को करें मजबूत

    ज्योतिष में कमजोर चंद्रमा को मानसिक अशांति, अनिद्रा और आत्मविश्वास में कमी से जोड़ा जाता है। इसके लिए बारिश का पानी हरे रंग की कांच की बोतल में भरकर घर के किसी शांत स्थान पर रख सकते हैं। इसे पूरे साल स्टोर करके रखने की मान्यता है। इसके बाद आने वाले साल में पुराने पानी की जगह फिर से बारिश का नया पानी भरने की मान्यता है।

    साफ पानी का करें इस्तेमाल

    बारिश के पानी से जुड़े ये आसान उपाय ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन उपायों के लिए हमेशा साफ और स्वच्छ बारिश के पानी का ही इस्तेमाल करें।

  • पाताल लोक से हुई थी रक्षाबंधन की शुरुआत, एक अनोखे वादे के कारण कलाई पर बांधी गई थी पहली राखी

    पाताल लोक से हुई थी रक्षाबंधन की शुरुआत, एक अनोखे वादे के कारण कलाई पर बांधी गई थी पहली राखी

    रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा । जब भी कोई पर्व आने को होता है, तो उस पर्व से जुड़ी कथाओं और कहानियों के बारे में इंटरनेट पर खूब सर्च होने लगता है। जैसा कि राखी का त्योहार आने वाला है तो ऐसे में स्वाभाविक है कि लोग इस बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहेंगे। इस त्योहार को लेकर एक बड़ा सवाल जो हर किसी के मन में रहता है कि आखिर इस पर्व की शुरुआत हुई कैसे थी और इतिहास में सबसे पहली राखी किसने किसको बांधी थी? तो आज हम अपने इस खास लेख में आपके इसी सवाल का सटीक जवाब देंगे। क्या आप जानते हैं कि राखी की शुरुआत धरती नहीं बल्कि पाताल लोक से हुई थी।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के त्योहार का प्रारंभ खुद माता लक्ष्मी ने किया था। माता ने एक अनोखे वादे के कारण राजा बलि के हाथ में पहली राखी बांधी थी। चलिए जानते हैं राखी की सबसे पौराणिक कथा।

    रक्षाबंधन की सबसे पौराणिक कथा

    श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार , असुरराज बलि बहुत पराक्रमी और दानवीर राजा थे। उन्होंने अपने तपोबल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया था। इससे भयभीत होकर देवराज इंद्र भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और वे राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे। बलि ने यज्ञ में आए वामन देव से मनचाहा दान मांगने को कहा। जिस पर वामन देव ने केवल तीन पग भूमि देने की मांग की। जब राजा बलि इतनी भूमि देने के लिए तैयार हो गए तब वामन देव ने अपना विशाल रूप धारण किया और उन्होंने दो पग में ही पूरी पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग लोक नाप लिया।

    जब तीसरा पग रखने के लिए कुछ नहीं बचा तब राजा बलि ने अपना सिर ही वामन देव के चरणों में रख दिया। बलि की इस भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही भगवान विष्णु ने बलि से वरदान मांगने को कहा, तब राजा बलि ने एक अत्यंत अनोखा वादा मांग लिया। बलि ने कहा, ‘हे प्रभु मुझे वरदान दीजिए कि जब भी मैं सुबह उठूं या रात को सोऊं, आप हमेशा मेरे सामने रहें। मेरी इच्छा है कि आप मेरे पाताल लोक के द्वारपाल बनकर रहें।’ इसके बाद भगवान विष्णु बैकुंठ धाम छोड़कर पाताल लोक में राजा बलि के द्वारपाल बनकर रहने लगे।

    माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को वापस पाने के लिए बांधी पहली राखी

    भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम छोड़ने से माता लक्ष्मी अत्यंत दुखी रहने लगीं। तब उन्होंने प्रभु को वापस लाने की एक योजना बनाई। उस योजना के तहत माता लक्ष्मी एक साधारण स्त्री का रूप धारण करके पाताल लोक पहुंचीं। उन्होंने राजा बलि को अपना भाई माना और श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि की कलाई पर एक रक्षासूत्र बांध दिया। साथ ही उन्होंने राजा बलि के लंबे और सुखद जीवन की प्रार्थना की। यह देख राजा बलि का दिल स्नेह और करुणा से भर गया। जिसके बाद राजा बलि ने अपनी धर्म बहन से कुछ मांगने के लिए कहा। तब माता लक्ष्मी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं और बोलीं, ‘हे राजन! मुझे धन-दौलत कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ मेरे स्वामी मुझे लौटा दो।’ राजा बलि ने माता लक्ष्मी द्वारा बांधे गए पवित्र धागे का मान रखा और तुरंत भगवान विष्णु को अपने उस अनोखे वादे से मुक्त कर दिया, जिसके तहत उन्होंने भगवान को अपना द्वारपाल बना लिया था। इसके बाद माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को लेकर बैकुंठ धाम वापस आ गईं। कहते हैं इस घटना के बाद से ही राखी पर्व मनाया जाने लगा।

  • घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंगलवार, शनिवार समेत रामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव जैसे खास मौकों पर मंदिर में उनके श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। वहीं, बात करें घर के देवस्थान की तो वास्तु में भी घर में हनुमान जी की तस्वीर रखना शुभ बताया है। घर में हनुमान जी की 5 तस्वीरें लगाना बहुत लाभदायी माना जाता है। चलिए जानते हैं कौन सी फोटो घर में रखना चाहिए और इसके क्या लाभ हैं।

    इस दिशा में लगाएं तस्वीर

    सबसे पहले जान लेते हैं कि हनुमान जी की फोटो किस दिशा में रखना फायदेमंद होता है। वास्तु शास्त्र  के अनुसार हनुमान जी की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। खासतौर पर लाल रंग में बैठे हुए हनुमान जी का चित्र इस दिशा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे दक्षिण दिशा से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होने की मान्यता है।

    राम भक्ति करते हनुमान

    भगवान राम की पूजा या भजन-कीर्तन करते हुए हनुमान जी की तस्वीर घर में लगाना पूरे परिवार के लिए शुभ होता है। मान्यता है कि इससे घर के सदस्यों के बीच प्रेम, आपसी समझ और अपनापन बढ़ता है और वातावरण में सुख-शांति बनी रहती है।

    पर्वत उठाए बजरंगबली

    हाथ में पर्वत उठाए हुए हनुमान जी का चित्र साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु अनुसार ऐसी तस्वीर घर में रखने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार होता है। इसे मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा से भी जोड़ा जाता है।

    उड़ते हुए हनुमान

    आकाश में उड़ते हुए हनुमान जी की तस्वीर को प्रगति और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर बनते हैं और मुश्किल कामों को पूरा करने का आत्मविश्वास मिलता है।

    लाल रूप में विराजमान

    दक्षिण दिशा में लाल रंग में बैठे हनुमान जी की तस्वीर लगाने की भी विशेष मान्यता है। इसे घर की परेशानियों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला माना जाता है। साथ ही, ऐसी तस्वीर घर में सुरक्षा और सकारात्मक माहौल बनाए रखने से जोड़ी जाती है।

    पंचमुखी हनुमान

    वास्तु में मुख्य दरवाजे पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा लगाना भी शुभ बताया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। इस स्वरूप को हनुमान जी का विराट स्वरूप माना जाता है।

  • मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा के साथ… क्यों 13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है… जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण..?

    मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा के साथ… क्यों 13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है… जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण..?

    हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि भले ही किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है लेकिन आत्मा अमर है. किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद आत्मा का नया सफर शुरू हो जाता है. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा का क्या होता है. अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद आत्मा तुरंत स्वर्ग या नर्क चली जाती है लेकिन गरुण पुराण के मुताबिक ऐसा नहीं होता है. किसी व्यक्ति की मौत के बाद आत्मा शरीर से बाहर निकलकर 13 दिनों तक अपने ही घर में अपने परिवार वालों के बीच रहती है.

    यमलोक से यमदूत आते हैं आत्मा को लेने
    गरुड़ पुराण के मुताबिक किसी व्यक्ति की मौत के बाद तुरंत यमलोक से दो यमदूत आत्मा को लेने के लिए आ जाते हैं. यमदूत आत्मा को अपने संग लेकर यमलोक चले जाते हैं. गरुण पुराण के मुताबिक आत्मा को यमलोक ले जाने का उद्देश्य महज इतना ही होता है कि उसे उसके जीवनभर के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब-किताब दिखाया जा सके. यमराज के दरबार में आत्मा को उसके कर्मों की झलक दिखाई जाती है. इसके बाद यमदूत आत्मा को वापस उसी के घर पर छोड़ देते हैं, जहां वह रहती थी. आत्मा को यमलोक ले जाने और उसके कर्मों की झलक दिखाने में लगभग 24 घंटे यानी एक दिन का समय लग जाता है. आत्मा को इसके बाद अगले 13 दिनों तक अपने परिवार के बीच रहना पड़ता है.

    अपनो के बीच घर में क्या करती है आत्मा
    गरुड़ पुराण के मुताबिक आत्मा जब यमलोक से अपने घर आती है तो उसे अपने परिवार और अपनी चीजों से लगाव अधिक महसूस होने लगता है. वह दूर से अपने मृत पड़े शरीर को देखती है और घरवालों को भी रोते हुए पाती है. इससे आत्मा परेशान हो जाती है. वह अपने घरवालों को चुप कराने की कोशिश करती है, उनसे बात करना चाहती है और उन्हें आवाज भी देती है. हालांकि वह पूरी तरह से हवा जैसी एनर्जी बन चुकी होती है. ऐसे में कोई भी आत्मा को देख या फिर सुन नहीं सकता है. कई बार आत्मा अपने पुराने शरीर के अंदर घुसने की कोशिश भी करती है, लेकिन नियमों की वजह से वह अपने शरीर में वापस नहीं जा पाती.

    ऐसे आत्मा की भूख और प्यास होती है शांत
    शरीर से निकलने के बाद आत्मा खुद को बहुत कमजोर महसूस करती है. उसे भूख और प्यास भी लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक मौत के बाद के पहले 10 दिनों तक घर के लोग जो पिंडदान यानी चावल या जौ के आटे से बने गोल लड्डू का दान करते हैं, वह आत्मा के लिए काफी जरूरी होता है. रोज पिंडदान किया जाता है, उससे आत्मा की भूख व प्यास शांत होती है. इसी पिंडदान की ताकत से आत्मा को एक नया अदृश्य शरीर मिलता है, ताकि वह आगे का सफर तय कर सके. रोज के पिंडदान से इस नए शरीर के अलग-अलग हिस्से बनते हैं, जिससे आत्मा को आगे की यात्रा के लिए ताकत मिलती है.

    आत्मा के नए अदृश्य शरीर को मिलती है ताकत
    किसी व्यक्ति के मरने के 11वें और 12वें दिन घर में जो खास पूजा-पाठ और पिंडदान किए जाते हैं, वे आत्मा के अदृश्य शरीर को मजबूत और स्थिर बनाते हैं. इन दो दिनों में परिवार के लोग जो प्रार्थना करते हैं, उससे आत्मा को बहुत शांति मिलती है. आत्मा को यह अहसास हो जाता है कि अब उसका इस दुनिया का सफर पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उसे आगे बढ़ना ही होगा. इन दिनों की पूजा से आत्मा को वह ताकत मिलती है जिससे वह पृथ्वी लोक को छोड़कर यमलोक के कठिन रास्ते पर आसानी से चल सके.

    इस तरह से आत्मा की होती है अंतिम विदाई
    आत्मा के लिए 13वां दिन विशेष होता है. इस दिन को तेरहवीं भी कहते हैं. तेरहवीं के दिन घर पर विशेष पूजा-पाठ होती है, पंडितों को भोजन कराया जाता है और गरीबों को दान दिया जाता है. गरुड़ पुराण के मुताबिक तेरहवीं के दिन जो भी चीजें दान की जाती हैं, उनका फायदा सीधे तौर पर आत्मा को यमलोक के सफर में भोजन, पानी और रास्ते की सुख-सुविधाओं के रूप में प्राप्त होता है. तेरहवीं की पूरी प्रक्रिया पूरी होते ही यमदूत दोबारा आते हैं. गरुण पुराण के मुताबिक इसके बाद आत्मा का धरती और अपने परिवार से नाता हमेशा के लिए टूट जाता है. आत्मा यमलोक की यात्रा पर निकल पड़ती है. इस यात्रा को पूरा करने में आत्मा को लगभग एक साल का समय लग जाता है.

  • नहीं हो रहे जीवन में सफल? तो इन 5 बातों की बांध लें गांठ… कोई रोड़ा नहीं रोक पाएगा..?​​​​

    नहीं हो रहे जीवन में सफल? तो इन 5 बातों की बांध लें गांठ… कोई रोड़ा नहीं रोक पाएगा..?​​​​

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    क्या आप भी सोचते हैं कि आप जिंदगी में सफल क्यों नहीं हो रहे? दरअसल आपकी जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सच्चाइयां भी है, जिन्हें आप मानते नहीं क्योंकि वो कड़वी होती है. लेकिन अक्सर यही कड़वे सच हमें मजबूत बनाते हैं और आगे बढ़ने की ताकत देते हैं. अगर आप भी अपनी सोच और जीवन में अच्छा बदलाव लाना चाहते हैं, तो कुछ बातों को समझना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

    जिंदगी की जिम्मेदारी केवल आपकी

    कई लोग सही मौके या किसी की मदद का इंतजार करते रहते हैं. लेकिन सच यह है कि आपकी जिंदगी बदलने की शुरुआत आपको खुद करनी होगी. जब आप अपनी जिम्मेदारी खुद लेते हैं, तभी असली बदलाव शुरू होता है.

    हर आलोचना गलत नहीं होती

    अगर कोई आपकी कमी बताता है, तो तुरंत नाराज होने की बजाय उसकी बात पर शांत होकर सोचें. हर आलोचना बुरी नहीं होती. कई बार यही बातें हमें अपनी गलतियां सुधारने और बेहतर इंसान बनने का मौका देती हैं.

    लोगों को बनाएं दूरियां

    हर रिश्ता हमेशा अच्छा नहीं होता. अगर कोई व्यक्ति बार-बार आपको दुख, तनाव या परेशानी दे रहा है, तो उससे दूरी बनाना गलत नहीं है. अपनी मानसिक शांति को सबसे पहले रखना भी जरूरी है.

    हर कदम एक नई शुरुआत की ओर

    कोई भी इंसान पहली बार में सब कुछ नहीं सीखता. नई चीज सीखते समय गलतियां होना बिल्कुल आम बात है. जो लोग लगातार कोशिश करते रहते हैं, वही आगे चलकर सफलता हासिल करते हैं. इसलिए शुरुआत करने से कभी न डरें.

    खुशी लक्ष्य में नहीं, मिलती सफर में

    अक्सर लोग सोचते हैं कि अच्छी नौकरी, ज्यादा पैसा या बड़ा घर मिलने के बाद ही खुशी मिलेगी. लेकिन सच यह है कि खुशी छोटी-छोटी बातों में भी छिपी होती है. परिवार के साथ बिताया समय, दोस्तों से बातचीत और रोज की छोटी सफलताएं भी जिंदगी को खुशहाल बनाती हैं.

    जिंदगी से जुड़ी ये बातें पहली नजर में मुश्किल लग सकती हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से सोच मजबूत होती है और जीवन आसान बनता है. अपनी जिम्मेदारी लेना, सीखने के लिए तैयार रहना, सही लोगों के साथ रहना और छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करना आपको लंबे समय तक सफल और खुश रहने में मदद कर सकता है.

  • इस दिशा में रखें Money Plant, होगी पैसों की बारिश… लेकिन अगर कर दी ये गलती, तो हो जाएंगे कंगाल..?​​​​

    इस दिशा में रखें Money Plant, होगी पैसों की बारिश… लेकिन अगर कर दी ये गलती, तो हो जाएंगे कंगाल..?​​​​

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    घर में मनी प्लांट लगाना आम बात है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसे सही दिशा में रखने से इसका फायदा कई गुना बढ़ जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार मनी प्लांट सिर्फ हरियाली के लिए नहीं बल्कि घर में पैसों का प्रवाह यानी कैशफ्लो बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है. ऐसे में जानना जरूरी है कि इसे किस दिशा में रखें.

    दक्षिण-पूर्व दिशा है सबसे अच्छी

    वास्तु के अनुसार दक्षिण-पूर्व दिशा को धन और समृद्धि की दिशा माना जाता है. इस दिशा में मनी प्लांट रखने से घर में आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और पैसों की तंगी दूर होती है. कहा जाता है कि यह दिशा शुक्र ग्रह से जुड़ी होती है, जो धन और सुख-समृद्धि का प्रतीक है. इसलिए ज्यादातर लोग इसी दिशा को चुनते हैं.

    पूर्व दिशा भी है अच्छा ऑप्शन

    अगर आपके घर में दक्षिण-पूर्व दिशा नहीं है, तो पूर्व दिशा में भी मनी प्लांट लगाया जा सकता है. यह दिशा सूरज की पहली रोशनी लेती है, जिससे पौधे को अच्छी एनर्जी मिलती है और घर में पॉजिटिवी बनी रहती है. इससे भी घर में पैसों का आना-जाना बेहतर होता है.

    किस दिशा में नहीं रखना चाहिए

    उत्तर दिशा में मनी प्लांट रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे कुछ मान्यताओं के अनुसार सही नहीं माना जाता. इसी तरह घर के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने भी मनी प्लांट लगाने से मना किया जाता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से पैसा बाहर की ओर जाता है, अंदर नहीं आता.

    पौधे की देखभाल भी जरूरी है

    सिर्फ सही दिशा में रखना ही काफी नहीं है, पौधे की देखभाल भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है. सूखी या पीली पत्तियां तुरंत हटा दें, क्योंकि इन्हें नेगेटिवी का इशारा माना जाता है. पौधे को साफ रखें और समय-समय पर पानी दें, ताकि यह हरा-भरा बना रहे.

    मिट्टी में लगाएं, पानी में नहीं

    बहुत से लोग मनी प्लांट को पानी की बोतल में रखते हैं, लेकिन मान्यता है कि इसे मिट्टी के गमले में लगाना ज्यादा शुभ होता है. मिट्टी में लगा पौधा जमीन से जुड़ा रहता है, जिससे घर में स्थिरता और धन दोनों बने रहते हैं.

  • अगर घर में दिख रहे हैं ये संकेत, तो होने वाली है आपकी बल्ले-बल्ले.. क्योंकि होने वाला है मां लक्ष्मी का आगमन..​​​​

    अगर घर में दिख रहे हैं ये संकेत, तो होने वाली है आपकी बल्ले-बल्ले.. क्योंकि होने वाला है मां लक्ष्मी का आगमन..​​​​

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    वास्तु शास्त्र की हमारे जीवन में खास जगह होती है. यह केवल घर की बनावट तक ही नहीं होता, बल्कि हमारे जीवन की ऊर्जा, सुख और मानसिक शांति से भी जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यदि हम वास्तु के नियमों का पालन करते हैं, तो जीवन में पॉजिटिव बदलाव होते हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी संकेत होते हैं जो इस बात का इशारा करते हैं कि हमारे घर में मां लक्ष्मी का आगमन हो चुका है या होने वाला है. चलिए बताते हैं आपको उन संकेतों के बारे में.

    हरी-भरी तुलसी का पौधा

    अगर आपके घर की तुलसी अचानक अधिक हरी-भरी और स्वस्थ दिखने लगे, तो यह बेहद शुभ संकेत माना जाता है. तुलसी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इसका अच्छा विकास इस बात का संकेत है कि घर में पॉजिटिव एनर्जी आने वाली है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी हुई है.

    अचानक धन लाभ के संकेत

    यदि बिना किसी मेहनत किए आपको आर्थिक लाभ होने लगे या इनकम के नए अवसर मिलने लगें, तो यह भी शुभ संकेत है. यह इस बात को दर्शाता है कि आपके जीवन में आर्थिक लाभ के द्वार खुल रहे हैं और मां लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी हुई है.

    घर में खुशहाली और पॉजिटिविटी

    जब घर का माहौल बिना किसी कारण के शांत और खुशहाल बनने लगे, तो इसे भी शुभ संकेत माना जाता है. परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ना इस बात का संकेत है कि घर में पॉजिटिव एनर्जी दाखिल हो रही है.

    सुबह अच्छी खबर मिलना

    अगर आपके दिन की शुरुआत अच्छी खबरों या पॉजिटिव घटनाओं से होने लगे, तो यह भी मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत माना जाता है. ऐसा होना आपके जीवन में खुशियों के आगमन को दर्शाता है.

    घर में सुगंध का अनुभव

    अगर घर में बिना किसी कारण के एक अच्छी सुगंध महसूस हो, तो यह भी एक शुभ संकेत है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह मां लक्ष्मी की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है.