Category: Dharam

  • विवाह में आ रही रुकावट या शादीशुदा जिंदगी में तनाव? मां मंगला गौरी की पूजा से जुड़े उपाय जानें..?​​​​

    विवाह में आ रही रुकावट या शादीशुदा जिंदगी में तनाव? मां मंगला गौरी की पूजा से जुड़े उपाय जानें..?​​​​

    सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है. इसी महीने के मंगलवार को मां गौरी की पूजा करने की भी परंपरा है. सावन के मंगलवार को की जाने वाली इस पूजा को मंगला गौरी पूजा कहा जाता है. मान्यता है कि मां गौरी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और मंगल की कामना पूरी होती है. खासतौर पर विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानियों के लिए इस पूजा को शुभ माना जाता है.

    मंगला गौरी पूजा का क्या महत्व है?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार मां गौरी को सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. सावन के मंगलवार को उनकी पूजा करने से विवाह में आ रही परेशानियों को दूर करने और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाने की कामना की जाती है. ज्योतिष में मंगल दोष को भी विवाह में देरी या परेशानी से जोड़ा जाता है. ऐसे में मंगला गौरी की पूजा को मंगल दोष से जुड़ी परेशानियों के लिए भी शुभ माना जाता है.

    विवाह में देरी हो रही हो तो ऐसे करें पूजा

    जिन कन्याओं का विवाह लंबे समय से नहीं हो पा रहा है, वे सावन के मंगलवार को सुबह या शाम मां गौरी की पूजा कर सकती हैं. मां के सामने घी का चौमुखी दीपक जलाएं. इसके बाद 16 फूल या 16 प्रकार के फूल अर्पित करें. इनमें लाल फूल जरूर रखें. मां को लाल चुनरी और लौंग भी चढ़ाएं. इसके बाद ‘ऊं ह्रीं गौर्ये नमः’ मंत्र का जाप करें. जाप पूरा होने के बाद मन में अच्छे जीवनसाथी और शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें.

    पति-पत्नी के बीच तनाव हो तो करें ये उपाय

    अगर पति-पत्नी के बीच बार-बार विवाद होता है या आपसी संबंध अच्छे नहीं हैं, तो शाम के समय मां गौरी की पूजा करें. उनके सामने घी के तीन दीपक जलाएं. मां के चरणों में सिंदूर, इत्र और 16 इलायची अर्पित करें. इसके बाद “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे’ मंत्र का 11 माला जाप करें. पूजा के बाद इलायची को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है.

    रिश्ता टूटने की स्थिति में क्या करें?

    अगर वैवाहिक जीवन में परेशानी बहुत बढ़ गई है और रिश्ता टूटने की स्थिति में पहुंच गया है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार मध्य रात्रि में मां गौरी और भगवान शिव की संयुक्त पूजा की जा सकती है. दोनों को वस्त्र अर्पित करें. मां गौरी को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, आभूषण, मेहंदी, काजल, शीशा और आलता जैसी सुहाग सामग्री चढ़ाएं. इसके बाद ‘ऊं गौरीशंकराय नमः’ मंत्र का 11 माला जाप करें और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें.

  • क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं, बल्कि विपत्ति, विवाद, कानूनी उलझन और आर्थिक तंगी जैसे कठिन समय में होती है.

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्त होना बहुत आम बात है. किसी की पोस्ट पर लाइक करना या किसी पार्टी में शामिल होना बेहद आसान काम है.

    लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब आपकी जिंदगी में अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में साफ लिखा है कि सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं बल्कि दुख और कठिन परिस्थितियों में होती है. आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे कौन से 5 मौके हैं जो सच्चे दोस्त की पहचान कराते हैं.

    बड़े संकट और विपत्ति में न छोड़े साथ

    जिंदगी में मुसीबतें कभी भी बताकर नहीं आती हैं. अचानक नौकरी चले जाना, व्यापार में नुकसान होना या कोई पारिवारिक दुर्घटना इंसान को पूरी तरह से तोड़ देती है.

    ऐसे समय में ज्यादातर लोग धीरे धीरे दूरी बनाने लगते हैं. चाणक्य नीति कहती है कि जो मित्र आपकी विपत्ति सुनकर भागने के बजाय समस्या का समाधान खोजने में मदद करे, उसी पर आपको भरोसा करना चाहिए.

    किसी विवाद या शत्रु के संकट में बने ढाल

    जब आपके सामने कोई बड़ा विवाद या विरोधी खड़ा हो जाए, तब दोस्तों के असली चरित्र का पता चलता है. चाणक्य कहते हैं कि सच्चा दोस्त वह नहीं है जो आपकी हर गलत बात का समर्थन करे.

    सच्चा मित्र आपको सही और गलत का अंतर समझाता है. मुसीबत के समय वह आपके साथ खड़ा रहकर आपको सही मार्गदर्शन और संबल प्रदान करता है.

    कानूनी परेशानी में न मोड़े मुंह

    चाणक्य ने अपने श्लोक में राजद्वार का जिक्र किया है, जिसे आज के समय में कानूनी या कोर्ट कचहरी के मामलों से जोड़कर देखा जा सकता है.

    ऐसे मामलों में अक्सर लोग झंझट से बचने के लिए दूर भागते हैं. लेकिन जो दोस्त कानूनी उलझनों के दौरान सही सलाह दे और आपका मनोबल बनाए रखे, वही सच्चा दोस्त कहलाता है.

    आर्थिक तंगी में जब न बदले दोस्त का व्यवहार

    पैसा एक ऐसी चीज है जो किसी भी रिश्ते की असली सच्चाई सामने ला देती है. जब जेब भरी होती है तो दुनिया साथ खड़ी नजर आती है.

    लेकिन आर्थिक तंगी आते ही अक्सर परिचित लोग किनारा करने लगते हैं. चाणक्य के अनुसार सच्चा मित्र आपकी आर्थिक स्थिति देखकर अपना व्यवहार कभी नहीं बदलता. वह अपनी क्षमता के हिसाब से बिना किसी स्वार्थ के आपका साथ निभाता है.

  • दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

    दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

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    हर इंसान अपनी जिंदगी में सच्चा सुख और शांति पाना चाहता है. इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत भी करता है. महाभारत काल के महान ज्ञानी महात्मा विदुर ने सुखद जीवन के कई रहस्य बताए हैं.

    उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही सच साबित होती हैं. विदुर नीति के अनुसार दुनिया में सबसे सुखी इंसान वही है जिसके पास स्वास्थ्य, सम्मान और अपनों का प्यार है. आइए जानते हैं महात्मा विदुर के वे 6 नियम जो जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.

    निरोगी शरीर ही सबसे बड़ा धन है

    जीवन में सबसे पहला और बड़ा सुख इंसान का सेहतमंद रहना है. अगर शरीर में कोई बीमारी है तो दुनिया की हर खुशी बेकार लगने लगती है. बीमारी की वजह से इंसान का मन हमेशा चिंताओं से घिरा रहता है.

    बिना अच्छी सेहत के इंसान अपनी धन-दौलत का आनंद भी नहीं ले पाता. इसलिए महात्मा विदुर कहते हैं कि अपने शरीर और सेहत का ध्यान रखना सबसे पहला और जरूरी काम है.

    कर्ज से आजादी दिलाती है सच्चा सुकून

    जीवन में दूसरा सबसे बड़ा सुख कर्ज से मुक्त होना है. किसी से उधार या कर्ज लेकर जीने वाला इंसान कभी चैन की नींद नहीं सो पाता. कर्ज का बोझ इंसान का मानसिक सुकून और शांति पूरी तरह छीन लेता है.

    कमाई कम हो तो भी अपने खर्चों को सीमित रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है. कर्ज से दूर रहकर ही इंसान समाज में सम्मान के साथ सिर उठाकर जी सकता है.

    अपनों का साथ और प्यार है असली ताकत

    महात्मा विदुर के अनुसार इंसान का सच्चा सुख अपनों के साथ में ही छिपा है. जिस घर में परिवार के सदस्यों का प्यार और सहयोग मिलता है, वहाँ हमेशा खुशियाँ बनी रहती हैं.

    जब अपनों का साथ होता है तो जीवन के कठिन से कठिन रास्ते भी बेहद आसान हो जाते हैं. अपनों का साथ इंसान को हर दुख-दर्द से लड़ने की हिम्मत देता है.

    सही रास्ते से की गई कमाई देती है शांति

    इंसान का चौथा सुख उसकी मेहनत और ईमानदारी की कमाई है. गलत या धोखे के रास्ते से कमाया गया पैसा ज्यादा दिन नहीं टिकता और अशांति लाता है.

    ईमानदारी की कमाई से घर में बरकत आती है और मन हमेशा शांत रहता है. मेहनत की कमाई इंसान को समाज में मान-सम्मान दिलाती है. सही तरीके से कमाया हुआ धन ही जीवन को सुरक्षित बनाता है.

    समझदार और संस्कारी जीवनसाथी का होना

    जीवन में एक समझदार और गुणी जीवनसाथी का होना बेहद जरूरी है. अच्छा जीवनसाथी सुख और दुख दोनों में बराबर का भागीदार बनता है.

    अगर जीवनसाथी संस्कारी और सुलझा हुआ है तो घर का माहौल हमेशा सुखद बना रहता है. विपरीत परिस्थितियों में सही सलाह देने वाला जीवनसाथी ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत बनता है और जीवन को सफलता की ओर ले जाता है.

    ज्ञान और अच्छी संगति से मिलता है मान-सम्मान

    महात्मा विदुर के मुताबिक सही ज्ञान और अच्छी संगति जीवन का छठा सुख है. सही ज्ञान इंसान को सही और गलत का फर्क सिखाता है. अच्छे और सकारात्मक लोगों के साथ रहने से इंसान के विचार भी बेहतर बनते हैं.

    समझदार और सज्जन लोग समाज में हमेशा आदर पाते हैं. अपनी बुद्धि और अच्छी संगति के बल पर इंसान जीवन की हर बड़ी बाधा को आसानी से पार कर लेता है.

  • सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    Pradosh Vrat In Sawan 2026: सावन मास में पड़ने वाला भौम प्रदोष व्रत शिव जी उपासना के लिए समर्पित है. ध्यान दें सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है ऐसे में इस माह के प्रदोष व्रत पर शिव जी की पूजा करने से अति शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है. सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत कब है, इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस व्रत पर किस विधि से भोलेनाथ की पूजा करें? इस बारे में आइए इस लेख में जानें.

    सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत 2026 कब है

    सावन माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 की सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर तिथि समाप्त हो जाएगी. इस तरह 25 अगस्त 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यह प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ रहा है ऐसे में इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा.

    सावन भौम प्रदोष व्रत पर शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 बजे से लेकर 05:11 बजे तक.
    अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक.
    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:32 बजे से लेकर 03:24 बजे तक.
    प्रदोष काल: शाम 06:51 बजे से लेकर रात 09:04 बजे तक.

    भौम प्रदोष व्रत पर शिव जी और मां पार्वती की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत पर अगर विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें तो उनकी कृपा प्राप्त होगी. इसके साथ ही मंगल ग्रह भी मजबूत होगा. इस दिन व्रत रखने व शिव जी की पूजा करने से मंगल दोष और भूमि संबंधी बाधाओं का अंत भी हो सकती है. सावन माह के प्रदोष व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, ऐसे में इस दिन सही विधि से शिव जी की पूजा करें तो इससे भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है. आइए जानें शिव जी की किस विधि से पूजा करें.

    शिव जी की पूजा विधि

    भौम प्रदोष व्रत पर सुबह उठकर स्नान आदि कर सफेद वस्त्र पहने.
    शिव का ध्यान करें और प्रदोष व्रत का संकल्प करें.
    प्रदोष काल में फिर से स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करेंय
    शिव जी और माता पर्वती की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें.
    चौकी के सामने आटे और हल्दी से स्वास्तिक बनाएं.
    भगवान शिव को धतूरा, मदार, बेलपत्र, दूध, दही, शहद चढ़ाएं.
    सफेज भोग जैसे सफेद मिठाई या खीर का भोग अर्पित करें.
    अब शिव जी का ध्यान कर मंत्र का जाप करें. मंत्र है- “ॐ नमः शिवाय”. 
    शिव चालीसा का पाठ करें और हो सकें तो रुद्राभिषेक करें.

  • मां पार्वती के एक मजाक से क्यों छा गया था ब्रह्मांड में अंधेरा? जानें महादेव की तीसरी आंख का रहस्य..

    मां पार्वती के एक मजाक से क्यों छा गया था ब्रह्मांड में अंधेरा? जानें महादेव की तीसरी आंख का रहस्य..

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    भगवान शिव को हम सब त्रिनेत्रधारी के नाम से भी जानते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि महादेव के पास तीन आंखें हैं. शिव पुराण में भोलेनाथ की इस तीसरी आंख का बहुत ही गहरा मतलब समझाया गया है. ये तीसरी आंख इंसान के भीतर छिपे अज्ञान, अहंकार और गलत विचारों को पूरी तरह खत्म करने की ताकत रखती है.

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव के माथे पर यह तीसरी आंख आखिर आई कहां से और ये पहली बार कैसे प्रकट हुई? शिव पुराण और मत्स्य पुराण में इसकी बहुत ही सुंदर कहानी मिलती है. आइए आज आपको बताते हैं शिवजी के इस तीसरे नेत्र का पूरा रहस्य.

    जब मां पार्वती ने खेल-खेल में बंद कर दीं शिवजी की आंखें

    एक बार की बात है, भगवान शिव हिमालय पर्वत पर बैठकर ध्यान में लीन थे. तभी वहां माता पार्वती पहुंचीं. उन्होंने पीछे से आकर मजाक-मजाक में अपने दोनों हाथों से शिवजी की दोनों आंखें ढक लीं.

    माता पार्वती ने तो यह बस हंसी-मजाक में किया था, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा हुआ. जैसे ही महादेव की आंखें बंद हुईं, पूरे ब्रह्मांड में पल भर में घना अंधेरा छा गया.

    पूरे संसार में मच गया हाहाकार

    भगवान शिव की आंखें बंद होते ही सूरज की रोशनी पूरी तरह गायब हो गई. पूरी सृष्टि अंधेरे में डूब गई और चारों तरफ सन्नाटा पसर गया. दुनिया के तमाम जीव-जंतु, इंसान और देवता घबराने लगे.

    रोशनी न होने की वजह से पूरी दुनिया पर एक बड़ा संकट आ खड़ा हुआ. चारों तरफ चीख-पुकार और हाहाकार मच गया कि अब इस दुनिया का क्या होगा.

    ऐसे प्रकट हुई महादेव की तीसरी आंख

    संसार को इस बड़े संकट से उबारने के लिए महादेव ने तुरंत कदम उठाया. उन्होंने अपने माथे के ठीक बीच में से एक बहुत ही तेज और चमकती हुई रोशनी पैदा की.

    यह रोशनी इतनी गर्म और चमकदार थी कि देखते ही देखते इसने एक आंख का रूप ले लिया. यही भगवान शिव की तीसरी आंख कहलाई. इस तीसरी आंख के खुलते ही पूरे ब्रह्मांड से अंधेरा छट गया और चारों तरफ फिर से उजाला और नई ऊर्जा फैल गई.

    तीनों आंखों के पीछे का क्या है असली रहस्य?

    धार्मिक मान्यताओं की मानें तो शिवजी की तीनों आंखें अलग-अलग चीजों को दर्शाती हैं. उनकी दाहिनी आंख को सूर्य माना गया है, बाईं आंख को चंद्रमा और माथे पर मौजूद तीसरी आंख को अग्नि यानी आग का रूप माना जाता है.

    जब भी यह तीसरी आंख खुलती है, तो इसकी गर्मी से बुराई, पाप और सारी अशुद्धियां जलकर राख हो जाती हैं. इसी वजह से भगवान शिव को त्रिनेत्रधारी कहा जाता है.

    भूत, वर्तमान और भविष्य की प्रतीक है ये आंख

    भोलेनाथ की ये तीन आंखें समय के तीनों रूपों को भी दिखाती हैं बीता हुआ कल, आज का दिन और आने वाला कल. इसका मतलब यह है कि महादेव हर समय और हर काल पर अपनी नजर रखते हैं. शिव पुराण की रुद्रसंहिता के तीसरे खंड (अध्याय 18 से 20) में भगवान शिव की इस तीसरी आंख का बहुत विस्तार से जिक्र किया गया है.

  • घर की आर्थिक स्थिति को दूर करने के लिए किचन की एक चीज आएगी काम, जान लेंगे तो दूर होगी समस्या..

    घर की आर्थिक स्थिति को दूर करने के लिए किचन की एक चीज आएगी काम, जान लेंगे तो दूर होगी समस्या..

    Vastu Tips For Money: घर की आर्थिक स्थिति को दूर करने के लिए किचन की एक चीज आएगी काम, जान लेंगे तो दूर होगी समस्या

    घर की छोटी-छोटी चीजों को लेकर हमारे यहां कई तरह की मान्यताएं हैं. खासकर किचन को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं माना जाता, बल्कि इसे घर की सुख-समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि किचन में रखी कुछ चीजों का सही तरीके से इस्तेमाल और रख-रखाव घर के माहौल पर सकारात्मक असर डाल सकता है. इन्हीं में से एक चीज नमक है, जिसे लेकर वास्तु और ज्योतिष में कई बातें कही जाती हैं.

    नमक को क्यों माना जाता है खास? नमक हर घर की रसोई में आसानी से मिल जाता है. खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ इसे कई पारंपरिक मान्यताओं में नकारात्मकता दूर करने वाला भी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि नमक का सही तरीके से इस्तेमाल घर के माहौल को बेहतर रखने में मदद कर सकता है.

    किचन में नमक कहां रखें? वास्तु मान्यताओं के अनुसार नमक को किचन में साफ और सूखी जगह पर रखना चाहिए. इसे खुले में रखने के बजाय हमेशा किसी साफ डिब्बे में बंद करके रखना बेहतर माना जाता है. इससे नमक में नमी भी नहीं आएगी और किचन व्यवस्थित रहेगा.

    आर्थिक परेशानी दूर करने के लिए क्या करें? मान्यता है कि अगर घर में लगातार आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं तो नमक से जुड़ा एक छोटा-सा उपाय किया जा सकता है. इसके लिए कांच की कटोरी में थोड़ा सा नमक रखकर किचन के किसी साफ कोने में रखने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा कम करने में मदद मिल सकती है.

    नमक को गंदे स्थान पर न रखें किचन में नमक रखने की जगह भी साफ होनी चाहिए. इसे सिंक, कूड़े या गंदगी वाली जगह के पास रखना अच्छा नहीं माना जाता. नमक का डिब्बा भी साफ रखना चाहिए और उसमें गीला चम्मच नहीं डालना चाहिए.

    नमक बदलते समय रखें इस बात का ध्यान अगर नमक नमी पकड़ ले या काफी समय से रखा हुआ हो तो उसे बदल देना चाहिए. पुराने नमक को लंबे समय तक जमा करके रखना ठीक नहीं माना जाता. नया नमक रखने से पहले डिब्बे को अच्छी तरह साफ और सुखा लेना चाहिए.

  • कांच के बर्तन, टेबल.. घर में रखा ये सामान रोक रहा सुख-समृद्धि? कांच का ज्यादा इस्तेमाल बनता है दुर्भाग्य की वजह, इन बातों का रखें ध्यान..

    कांच के बर्तन, टेबल.. घर में रखा ये सामान रोक रहा सुख-समृद्धि? कांच का ज्यादा इस्तेमाल बनता है दुर्भाग्य की वजह, इन बातों का रखें ध्यान..

    कांच के बर्तन, टेबल.. घर में रखा ये सामान रोक रहा सुख-समृद्धि? कांच का ज्यादा इस्तेमाल बनता है दुर्भाग्य की वजह, इन बातों का रखें ध्यान..

    आजकल मॉडर्न होम डेकोर में कांच से बनी चीजों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। डाइनिंग टेबल से लेकर बर्तन, शोपीस तक, कांच की चीजें लगभग हर घर का हिस्सा बन चुकी हैं। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनका जरूरत से ज्यादा उपयोग शुभ नहीं होता। क्योंकि कई बार कांच की वस्तुएं घर के माहौल, रिश्तों और मानसिक शांति पर नकारात्मक असर डालती हैं। अगर फिर भी आप इन चीजों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है। तो चलिए जानते हैं इससे जुड़े वास्तु नियम क्या है।

    कांच का सीमित करें इस्तेमाल

    वास्तु शास्त्र कहता है कि घर में कांच की वस्तुओं का उपयोग जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए। अगर घर में हर जगह कांच का बहुत इस्तेमाल किया जाए, तो इसका असर परिवार के सदस्यों के स्वभाव पर पड़ सकता है। मान्यता है कि इससे लोग अधिक भावुक हो सकते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमियां या तनाव बढ़ने की संभावना रहती है।

    कांच के बर्तन

    आजकल बहुत से घरों में लोग रोजाना ही भोजन के लिए कांच की प्लेट, कटोरी और गिलास का इस्तेमाल करते हैं। हर समय कांच के बर्तनों का उपयोग करने से जीवन में संतुष्टि और आनंद की भावना धीरे-धीरे कम हो सकती है। ऐसे में इनका इस्तेमाल समझदारी से करें, ताकि इसका बुरा प्रभाव आपके परिवार पर न पड़े।

    मिरर लगाने की सही जगह

    दर्पण को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। इसे व्यक्ति की भावनाओं का भी रिफ्लेक्शन माना जाता है। इसलिए घर के हर हिस्से में आईना लगाने से बचना चाहिए। खासकर बेडरूम या सोने की जगह पर आईना लगाना सही नहीं माना जाता। सुबह उठते ही सबसे पहले नजर आईने पर नहीं पड़ना चाहिए। ऐसे में सुबह उठते ही दर्पण के सामने न खड़े होने की सलाह दी जाती है।

    कांच की टेबल से जुड़ी मान्यता

    कई घरों और ऑफिस में कांच की टेबल का चलन बढ़ गया है, लेकिन वास्तु की माने तो लंबे समय तक कांच की मेज पर काम करना उचित नहीं होता है। इससे एकाग्रता प्रभावित हो सकती है और करियर में रुकावटें आने की आशंका रहती है।

  • अनजाने में हर दिन कर रहे हैं ये गलतियां? इन आदतों को वास्तु शास्त्र में माना गया है अशुभ..

    अनजाने में हर दिन कर रहे हैं ये गलतियां? इन आदतों को वास्तु शास्त्र में माना गया है अशुभ..

    अनजाने में हर दिन कर रहे हैं ये गलतियां? इन आदतों को वास्तु शास्त्र में माना गया है अशुभ..

    अक्सर लोग जीवन में आने वाली मुश्किलों का कारण ग्रहों की स्थिति या खराब समय को मानते हैं। लेकिन हमारी दिनचर्या की कुछ छोटी-छोटी आदतें भी जीवन पर असर डाल सकती हैं। वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकती हैं।

    अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियों के कारण हमारे आसपास नेगेटिव एनर्जी बढ़ती है। जिसके कारण कार्यों में रुकावट व आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। चलिए जानते हैं कि ऐसी कौन सी आदतें हैं जो हमारे ग्रह दोष का कारण बन सकती है।

    रोज की ये आदतें चुपचाप बिगाड़ रही हैं आपका वास्तु

    देर तक सोने से बचें: वास्तु और ज्योतिष में सूर्य को ऊर्जा, स्वास्थ्य और सम्मान का प्रतीक माना गया है। अगर व्यक्ति देर तक सोता है, तो उसे सुबह की प्राकृतिक धूप का लाभ नहीं मिल पाता। इससे सकारात्मक ऊर्जा कम होती है। ऐसे में आलस्य, आत्मविश्वास में कमी और करियर से जुड़ी बाधाएं बढ़ सकती हैं। इसलिए सूर्योदय के आसपास या उससे पहले उठना चाहिए।

    दूसरों के कपड़े पहनने की आदत: हर व्यक्ति की अपनी ऊर्जा होती है, जिसका प्रभाव उसके कपड़ों पर भी माना जाता है। ऐसे में नियमित रूप से किसी और के कपड़े पहनना शुभ नहीं होता। मान्यता है कि इससे मानसिक अस्थिरता, चिड़चिड़ापन और नकारात्मकता बढ़ सकती है। खासकर रोजमर्रा के कपड़ों को साझा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    नाखून चबाने की आदत छोड़ें: दांतों से नाखून चबाना सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि इसे मानसिक अशांति का संकेत भी माना जाता है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, यह आदत व्यक्ति की एकाग्रता और सही निर्णय लेने की क्षमता पर असर डालती है। इससे बार-बार गलत फैसले लेने की संभावना बढ़ सकती है।

    बिस्तर पर बैठकर भोजन न करें: बिस्तर को केवल आराम और नींद के लिए उपयुक्त माना गया है। बिस्तर पर बैठकर भोजन करना शुभ नहीं माना जाता। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। व्यक्ति को मानसिक तनाव या उलझनों का सामना करना पड़ सकता है। भोजन हमेशा साफ-सुथरे स्थान पर, शांत मन से और उचित दिशा में बैठकर करना बेहतर माना गया है।

  • शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत..

    शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत..

    शाम होते ही क्यों खुला रखना चाहिए घर का दरवाजा? न करें वास्तु का ये नियम नजरअंदाज, रुक सकती है बरकत..

    घर के मुख्य दरवाजा सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना गया है। मान्यता है कि शाम का समय घर में शुभता के आगमन का होता है। ऐसे में इस समय मुख्य द्वार से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियां घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार शाम को घर का दरवाजा बंद रखना क्यों शुभ नहीं माना जाता है।

    शाम के समय क्यों नहीं बंद करते मुख्य द्वार

    • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम का समय बेहद शुभ माना जाता है। इस समय मां लक्ष्मी के घर में आगमन की मान्यता है। कहते हैं कि अगर इस समय मुख्य द्वार बंद रखा जाए तो घर की समृद्धि और शुभ ऊर्जा के प्रवेश में बाधा आ सकती है।
    • वास्तु की माने तो लंबे समय तक शाम के समय मुख्य द्वार बंद रखने से घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    सकारात्मक ऊर्जा के लिए जरूरी

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के समय वातावरण में ऊर्जा का बदलाव होता है। ऐसे में घर का मुख्य द्वार कुछ समय के लिए खुला रखने से सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की मान्यता है। माना जाता है कि इससे घर का माहौल शांत और खुशहाल बना रहता है।

    मुख्य द्वार पर करें ये उपाय

    शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा काफी पुरानी है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी से घर में शुभता आती है।

    इसके अलावा मुख्य द्वार पर गंगाजल या साफ जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे नेगेटिविटी दूर होने और घर में सकारात्मक माहौल बने रहने की मान्यता है।

    ध्यान रखें ये बातें

    घर के मुख्य द्वार पर गंदगी, अव्यवस्था और अंधेरा नहीं रखना चाहिए। वास्तु अनुसार, साफ-सुथरा और रोशनी से भरा मुख्य द्वार घर में शुभ ऊर्जा को आकर्षित करता है, इसलिए इस स्थान को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय इन नियमों का ध्यान रखना घर-परिवार की बरकत और खुशहाली के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।

  • किचन में गुस्सा करना पड़ सकता है भारी! वास्तु अनुसार खाना बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान..

    किचन में गुस्सा करना पड़ सकता है भारी! वास्तु अनुसार खाना बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान..

    किचन में गुस्सा करना पड़ सकता है भारी! वास्तु अनुसार खाना बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान..

    भारतीय परंपरा में भोजन पकाने के दौरान मन के भाव और स्थिति पर जोर दिया गया है, क्योंकि रसोई में भोजन के जरिए पूरे परिवार के लिए पूरे दिन की ऊर्जा तैयार होती है। वास्तु शास्त्र में भी किचन को घर की महत्वपूर्ण जगह माना जाता है। कहते हैं कि जिस भाव से भोजन बनाया जाता है, उसी के अनुरूप भोजन करने वालों के मन पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में खाना बनाते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? यहां जानिए कुकिंग से जुड़े जरूरी वास्तु नियम।

    गुस्से पर रखें काबू

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भोजन बनाते समय गुस्सा, चिड़चिड़ापन और तनाव से बचना चाहिए। अशांत मन से बनाया गया भोजन सकारात्मकता के बजाय नकारात्मक माहौल को बढ़ा सकता है। इसलिए कोशिश करें कि खाना बनाते समय मन को शांत रखा जाए और छोटी-छोटी बातों पर बहस न हो।

    कटु वाणी से रहें दूर

    किचन में ऊंची आवाज में बोलना, झगड़ा करना या अपशब्दों का इस्तेमाल करना भी अच्छा नहीं होता। भोजन बनाते समय मधुर भाषा और शांत वातावरण रखने की परंपरा इसी सोच से जुड़ी है। घर में बातचीत हो तो कोशिश करें कि उसका माहौल सहज और पॉजिटिव रहे।

    पानी को रखें साफ

    वास्तु में पानी को ऊर्जा ग्रहण करने वाला तत्व माना गया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले पानी के पात्र को साफ और व्यवस्थित रखना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है। पानी को गंदगी और अव्यवस्था से दूर रखने की सलाह दी जाती है।

    मन अशांत हो तो ठहरें

    आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में हर दिन स्ट्रेस फ्री रहना संभव नहीं है। ऐसे में खाना बनाने से पहले कुछ पल खुद को शांत करने की कोशिश करें। अपनी आस्था के अनुसार मंत्र, प्रार्थना या मधुर भजन सुनना मन को सहज बनाने का एक आसान तरीका हो सकता है।

    प्यार से परोसें

    भोजन तैयार करने के साथ उसे परोसने का तरीका भी मायने रखता है। मुस्कुराकर और स्नेह के साथ भोजन परोसने की परंपरा परिवार में अपनापन बढ़ाने से जुड़ी मानी जाती है। भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि साथ बैठने, एक-दूसरे को समय देने और रिश्तों में मिठास घोलने का माध्यम भी है।