Category: Dharam

  • घर में पौधे लगा रखे हैं: तो न करें ये 5 वास्तु गलतियां, वरना बढ़ सकता है अशुभ प्रभाव.

    घर में पौधे लगा रखे हैं: तो न करें ये 5 वास्तु गलतियां, वरना बढ़ सकता है अशुभ प्रभाव.

    घर में पौधे लगा रखे हैं: तो न करें ये 5 वास्तु गलतियां, वरना बढ़ सकता है अशुभ प्रभाव.

    घर में हरियाली लाने के लिए लोग तरह-तरह के पौधे लगाते हैं। ज्यादातर लोग पौधे इसलिए भी लगाते हैं कि घर में बरकत और खुशहाली बनी रहे, लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां उनके शुभ प्रभाव को कम कर सकती हैं। वास्तु शास्त्र में पौधों की दिशा, उनकी स्थिति और देखभाल को भी महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में अगर आप भी प्लांट लवर हैं, तो इन सामान्य गलतियों से बचना जरूरी माना जाता है।

    1: गलत दिशा में पौधे रखना

    अगर पौधे बिना दिशा का ध्यान रखे कहीं भी रख दिए जाएं, तो उनका सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है। छत पर रखे पौधे घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ ही मन को सुकून भी देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, छत पर पौधों को दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

    2: मनी प्लांट कहीं भी रख देना

    मनी प्लांट को अक्सर लोग जहां जगह मिलती है, वहीं रख देते हैं। जबकि इसे बहुत सोच-समझकर और अच्छी सी जगह पर लगाया जाना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना अधिक शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं।

    3: बोनसाई प्लांट्स

    बोनसाई पौधे देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में इन्हें घर के अंदर रखना उचित नहीं माना गया है। मान्यता है कि यह विकास की धीमी गति का प्रतीक होता है, इसलिए इसे खुले स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है।

    4: तुलसी की गलत जगह

    तुलसी का पौधा धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है। इसे ईशान कोण या पूर्व दिशा में रखने की सलाह दी जाती है। तुलसी का पौधा वायु को भी शुद्ध करता है। वहीं, इस सही दिशा में रखे तो घर में पॉजिटिव एनर्जी और सुख-शांति हमेशा बनी रहती है।

    5: सूखे पौधों को न हटाना

    कई लोग सूख चुके या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में ही रखते हैं। वास्तु अनुसार, ऐसे पौधे नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकते हैं। इसलिए समय-समय पर उन्हें हटाना और पौधों की देखभाल करना जरूरी माना जाता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • दिनचर्या में शामिल करें: 5 आदतें, वास्तु के अनुसार जीवन में आने लगेंगे चमत्कारी बदलाव.

    दिनचर्या में शामिल करें: 5 आदतें, वास्तु के अनुसार जीवन में आने लगेंगे चमत्कारी बदलाव.

    दिनचर्या में शामिल करें: 5 आदतें, वास्तु के अनुसार जीवन में आने लगेंगे चमत्कारी बदलाव.

    वास्तु शास्त्र से हमें न केवल दिशाओं का सही ज्ञान मिलता है बल्कि जीवन को सफल बनाने के नियम भी वास्तु शास्त्र में हैं। वास्तु की मानें तो दिनचर्या में कुछ आदतें शामिल करके आप जीवन में चमत्कारी बदलाव ला सकते हैं। ये आदतें आपको सकारात्मकता ऊर्जा से भर सकती हैं और आप असंभव लक्ष्यों को भी प्राप्त कर सकते हैं। जिस तरह सही दिशा में रखी सही वस्तु आपके घर को सकारात्मक ऊर्जा देती है उसी तरह दिनचर्या में कुछ आदतों को शामिल करने से आप भी पॉजिटिव ऊर्जा से भरे रहते हैं। आइए जान लेते हैं कि आपको दिनचर्या में किन आदतों को शामिल करना चाहिए।

    सुबह उठते ही हथेली के दर्शन

    सुबह उठते ही आपको सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों के दर्शन करने चाहिए और अच्छे कार्य करने का विचार मन में लाना चाहिए। माना जाता है कि हथेली के दर्शन करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद आप पर बरसता है और जीवन में सुखद बदलाव आते हैं।

    पितरों का स्मरण

    सुबह स्नान ध्यान के बाद आपको पितरों का स्मरण अश्य करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष का बुरा प्रभाव आप पर नहीं पड़ता और करियर, पारिवारिक जीवन में बेहद सुखद बदलाव आपको देखने को मिलते हैं। वास्तु के अनुसार पितरों के आशीर्वाद से आपका मान-सम्मान भी बढ़ता है।

    सूर्य देव को जल करें अर्पित

    सुबह के समय सूर्य देव को जल अर्पित करने से आपको आरोग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कुंडली में सूर्य की स्थिति भी मजबूत होने लगती है और आपको समाज में मान-सम्मान मिलता है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा न आपके घर में प्रवेश करती है और ना आपके अंदर।

    प्राणायाम और योग-ध्यान का अभ्यास

    जिस तरह घर को साफ-सुथरा रखने से आपको सुखद अनुभूति होती है वैसे ही योग-ध्यान करने से मन के साथ-साथ आत्मा भी शुद्ध होती है।  इसलिए दिन में कुछ समय आपको योग-ध्यान के लिए अवश्य निकालना चाहिए। ध्यान करने से आपको शारीरिक और मानसिक सुधार तो देखने को मिलता ही है साथ ही घर के अंदर ध्यान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बहती है और वास्तु दोष दूर हो सकता है।

    सोने से पूर्व मंत्रों का जप

    सोने से पूर्व आपको अपने इष्ट देव को याद करना चाहिए, उनके मंत्रों का जप करना चाहिए। इष्ट देव का पता न हो तो आप गायत्री मंत्र का जप कर सकते हैं या केवल ओम का उच्चारण भी कर सकते हैं। ऐसा करने से मन में चल रहे विचार ठहरने लगते हैं और आपको अच्छी नींद आती है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • नमक-लौंग का ये छोटा: सा उपाय ला सकता है घर में बरकत, दूर होगी पैसों की तंगी और बनी रहेगी सकारात्मकता.

    नमक-लौंग का ये छोटा: सा उपाय ला सकता है घर में बरकत, दूर होगी पैसों की तंगी और बनी रहेगी सकारात्मकता.

    नमक-लौंग का ये छोटा: सा उपाय ला सकता है घर में बरकत, दूर होगी पैसों की तंगी और बनी रहेगी सकारात्मकता.

    आजकल हर कोई अच्छी जिंदगी जानी चाहता है, जिसके लिए अच्छी कमाई की जरूरत होती है। बहुत बार लोग पैसा तो कमा लेते हैं, लेकिन वो कहां जाता पता ही नहीं चलता। अगर अच्छी कमाई के बावजूद घर में पैसा टिक नहीं रहा या बार-बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो वास्तु शास्त्र में कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। इन्हीं में से एक नमक और लौंग का उपाय भी है, जिसे घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है। जानिए इस उपाय के बारे में।

    नमक और लौंग का महत्व

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की ऊर्जा का असर परिवार की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। मान्यता है कि नमक नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में मदद करता है, जबकि लौंग की सुगंध घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रतीक मानी जाती है।

    ऐसे करें यह उपाय

    इस उपाय के लिए एक कांच की कटोरी लें और उसमें थोड़ा-सा मोटा नमक भर दें। अब उसमें चार या पांच लौंग रखकर घर के किसी ऐसे कोने में रखें, जहां वह सुरक्षित रहे। कई लोग इस उपाय को घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए अपनाते हैं।

    क्या है मान्यता?

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस उपाय से घर में नकारात्मकता कम होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिति में सुधार, धन की आवक और घर में सुख-शांति बनी रहने में मदद मिल सकती है। साथ ही लौंग की खुशबू से घर का वातावरण भी ताजगी भरा महसूस होता है।

    बाथरूम के लिए भी उपाय

    अगर बाथरूम से जुड़ा कोई वास्तु दोष माना जाता है, तो वहां एक कटोरी में क्रिस्टल नमक भरकर किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखें कि समय-समय पर उस नमक को बदलते रहें। मान्यता है कि इससे वहां की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वातावरण अधिक संतुलित बना रहता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • बाथरूम में रखी 5 चीजें: बन सकती हैं वास्तु दोष का कारण, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती.

    बाथरूम में रखी 5 चीजें: बन सकती हैं वास्तु दोष का कारण, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती.

    बाथरूम में रखी 5 चीजें: बन सकती हैं वास्तु दोष का कारण, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती.

    वास्तु शास्त्र की मानें तो बाथरूम घर का वह स्थान है जहां नकारात्मक ऊर्जा सबसे अधिक रहती है। इसलिए बाथरूम को हमेशा साफ रखना चाहिए। साथ ही बाथरूम में रखी कुछ चीजें भी वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं। ये चीजें कौन-कौन सी हैं और इनके होने से क्या दिक्कतें जीवन में आ सकती हैं आइए जानते हैं।

    बाथरूम में रखी ये चीजें पैदा कर सकती हैं वास्तु दोष

    • बाथरूम में आपको कभी भी गिले कपड़े नहीं रखने चाहिए। कई लोगों की आदत होती है कि कपड़ों को बाथरूम में गिला छोड़कर रख देते हैं। वास्तु की मानें तो ऐसा करने से सूर्य की ऊर्जा प्रभावित होती है और भाग्य आपसे रूठ सकता है। इसलिए आप भी यह गलती करने से बचें ताकि सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा आपको मिल सके।
    • बाथरूम के ड्रेन एरिया या फ्लोर पर पड़े बाल भी आपके जीवन में परेशानियों का कारण बन सकते हैं। इससे वास्तु दोष पैदा हो सकता है और साथ ही शनि का बुरा प्रभाव भी आप पर पड़ सकता है। इसलिए बाथरूम में पड़े बालों को आपको हर रोज साफ कर देना चाहिए।
    • आपको बाथरूम में कभी भी टूटा हुआ या दरार वाला शीशा नहीं रखना चाहिए ऐसा शीशा शुभ नहीं माना जाता। वास्तु की मानें तो ऐसा करने से आपको सेहत से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
    • बाथरूम में रखी बाल्टी को कभी भी खाली आपको नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक परेशानियां आपके जीवन में पैदा हो सकती हैं। इसलिए कभी भी खाली बाल्टी आपको अपने बाथरूम में नहीं रखनी चाहिए। इसके साथ ही आपको बाथरूम के साथ ही घर के सभी नलों पर भी ध्यान देना चाहिए, घर के नल अगर टपक रहे हैं तो उन्हें तुरंत ठीक करवाना चाहिए। टपकते हुए नल आपकी आर्थिक स्थिति को खराब कर सकते हैं।
    • कुछ चीजों जो अक्सर लोग बाथरूम में जमा करके रख देते हैं वो भी वास्तु दोष का कारण बन सकती है। जैसे इस्तेमाल हो चुका टूथब्रश, पेस्ट, शैंपू की खाली बोतलें आदि आपको इस्तेमाल करने के बाद तुरंत फेंक देनी चाहिए। अगर ये चीजें घर में बाथरूम में पड़ी रहती हैं तो घर की ऊर्जा प्रभावित होती है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • Dining Table या जमीन: पर बैठकर भोजन करना? वास्तु में छिपा है बड़ा राज, घर में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं ये नियम’

    Dining Table या जमीन: पर बैठकर भोजन करना? वास्तु में छिपा है बड़ा राज, घर में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं ये नियम’

    Dining Table या जमीन: पर बैठकर भोजन करना? वास्तु में छिपा है बड़ा राज, घर में सुख-समृद्धि बनाए रखते हैं ये नियम’

    Bhojan Vastu Niyam: आज के समय में ज्यादातर लोग डाइनिंग टेबल पर खाना खाते हैं, जबकि पुराने समय में जमीन पर बैठकर भोजन करने की परंपरा थी। वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद दोनों में भोजन करने के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं। जो व्यक्ति की सेहत, मानसिक स्थिति और घर की सुख-समृद्धि पर असर डालते हैं। भोजन जमीन पर बैठकर करना शुभ होता है या डाइनिंग टेबल पर? चलिए जानते हैं इसे विषय पर क्या कहता है वास्तु शास्त्र…

    जमीन पर बैठकर भोजन करना क्यों बेहतर

    वास्तु और आयुर्वेद में जमीन पर पालथी मारकर बैठकर भोजन करने को सबसे उत्तम तरीका बताया गया है। इसे सुखासन की मुद्रा कहा जाता है। इस तरह बैठकर खाने से शरीर का संतुलन बना रहता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। साथ ही व्यक्ति का पृथ्वी तत्व से भी सीधा जुड़ाव रहता है।

    सीधे फर्श पर बैठकर न करें भोजन

    वास्तु अनुसार, कभी भी सीधे जमीन या फर्श पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन करते समय सूती, ऊनी या कुशा के आसन का इस्तेमाल करना चाहिए। मान्यता है कि नंगे फर्श पर बैठने से शरीर की सकारात्मक ऊर्जा जमीन में चली जाती है।

    भोजन की थाली

    जमीन पर बैठकर भोजन करते समय थाली को सीधे जमीन पर रखने के बजाय छोटी चौकी या स्टैंड पर रखना बेहतर माना गया है। थाली का स्थान बैठने की जगह से थोड़ा ऊंचा होना चाहिए। इससे भोजन के प्रति सम्मान का भाव बना रहता है।

    डाइनिंग टेबल वास्तु नियम

    • डाइनिंग टेबल का आकार चौकोर या आयताकार होना चाहिए। गोल टेबल को ऊर्जा संतुलन के लिए सही नहीं माना जाता।
    • डाइनिंग रूम या डाइनिंग टेबल को घर के पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। भोजन करते समय परिवार के सदस्यों का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
    • डाइनिंग टेबल के सामने दर्पण लगाना चाहिए, जिसमें भोजन दिखाई दे, तो घर में अन्न और धन की वृद्धि होती है। इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    भोजन के लिए कौन-सी दिशा शुभ

    पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य की दिशा माना जाता है। इस दिशा में मुख करके भोजन करने से पाचन बेहतर रहता है। वहीं, उत्तर दिशा को ज्ञान और धन से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिशा शुभ मानी गई है।

    व्यापारियों के लिए पश्चिम दिशा शुभ: वास्तु में पश्चिम दिशा को लाभ और सुख-सुविधाओं की दिशा माना गया है। इस दिशा में मुख करके भोजन करने से व्यापार और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

    इस दिशा में भोजन करने न बैठें

    दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है। इस दिशा में मुख करके भोजन करना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

  • बार-बार लगाते हैं ‘पौधे’ फिर भी नहीं पनपते, तो पहले जान लें वास्तु के जरूरी नियम.

    बार-बार लगाते हैं ‘पौधे’ फिर भी नहीं पनपते, तो पहले जान लें वास्तु के जरूरी नियम.

    बार-बार लगाते हैं ‘पौधे’ फिर भी नहीं पनपते, तो पहले जान लें वास्तु के जरूरी नियम.

    Gardening Vastu Tips: ज्यादातर लोगों के लिए घर में पौधे लगाना सिर्फ सजावट का हिस्सा होता है। वहीं वास्तु में पौधों को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पौधों को समृद्धि और सौभाग्य से भी जोड़ा गया है। लेकिन बिना सही जानकारी के पौधे लगाने का वैसा परिणाम नहीं मिलता, जो असल में पौधों से प्राप्त किया जा सकता है। यही वजह है कि अक्सर पौधे पनप ही नहीं पाते या उनकी ग्रोथ नहीं हो पाती। तो चलिए जानते हैं इसे लेकर वास्तु में क्या नियम बताए गए हैं।

    शुभ नक्षत्र और समय का पड़ता है प्रभाव

    वास्तु शास्त्र के अनुसार स्वाति, उत्तरा, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र में लगाए गए पौधे तेजी से बढ़ते हैं। शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर कृष्ण पक्ष की सप्तमी तक का समय भी पौधारोपण के लिए शुभ होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यक्ति अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार पौधे लगाए तो अधिक अच्छे परिणाम मिलते हैं।

    वास्तु नियमों की अनदेखी

    घर बालकनी या गार्डन में पौधे लगाने के बाद भी अगर वे बार-बार सूख जाते हैं या नहीं बढ़ते तो गलत दिशा, समय और देखभाल की कमी के इन वास्तु नियमों की अनदेखी भी इसका कारण हो सकती है।

    1. घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़ा पौधा लगाना सही नहीं माना जाता। बड़े पेड़ों को हमेशा मुख्य द्वार की ऊंचाई से तीन गुना दूरी पर लगाना चाहिए, ताकि ऊर्जा का प्रवाह बाधित न हो।
    2. वास्तु के अनुसार सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच घर पर बड़े पेड़ों की भारी छाया पड़ना शुभ नहीं माना जाता। इससे घर का ऊर्जा संतुलन प्रभावित हो सकता है और वातावरण भारी महसूस हो सकता है।

    पेड़ों को काटने का नियम

    वास्तु शास्त्र में पेड़ों को काटना या स्थानांतरित करना बेहद संवेदनशील माना गया है। अगर किसी कारण से आपको पेड़ हटाना या काटना पड़े, तो माघ या भाद्रपद का समय सबसे उपयुक्त होता है। साथ ही पेड़ हटाने के बाद तीन महीनों के अंदर उसकी जगह नया पौधा लगाना जरूरी माना जाता है।

    पौधों का ग्रहों से संबंध

    वास्तु में पौधों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से माना गया है। सूर्य से जुड़े पौधे मजबूत तने वाले होते हैं जैसे शीशम। चंद्र और शुक्र का संबंध लताओं और दूध वाले पौधों से माना जाता है। बृहस्पति ग्रह का कनेक्शन फलदार वृक्षों से होता है। बुध फल रहित हरे-भरे पौधों का प्रतिनिधित्व करता है। शनि का संबंध सूखे, कमजोर और रसहीन पौधों से होता है जबकि राहु केतु कांटेदार झाड़ियों से संबंधित माने जाते हैं।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • अच्छी कमाई के बाद भी: खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय;

    अच्छी कमाई के बाद भी: खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय;

    अच्छी कमाई के बाद भी: खाली हो जाता है बैंक अकाउंट? आजमाकर देखें वास्तु के ये आसान उपाय;

    अगर कमाई अच्छी होने के बावजूद महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं, तो घर के माहौल पर भी ध्यान देना चाहिए। वास्तु शास्त्र में घर की व्यवस्था और कुछ दिशाओं को आर्थिक स्थिरता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि कुछ आसान उपायों से घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    महीने की शुरुआत में सैलरी या कारोबार की कमाई खाते में आते ही आर्थिक स्थिति अच्छी नजर आती है, लेकिन कुछ दिनों बाद बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो केवल कम कमाई को इसकी वजह मानना सही नहीं है। खर्च करने की आदत और पैसों को संभालने की आदत भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और व्यवस्था को भी आर्थिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में कुछ आसान वास्तु उपाय आजमाए जा सकते हैं।

    आर्थिक समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु उपाय

    1. मुख्य द्वार: वास्तु शास्त्र
      में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया गया है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश यहीं से होता है। इसलिए दरवाजे के आसपास कूड़ा, पुराने जूते, टूटे सामान या कबाड़ जमा न होने दें। मुख्य द्वार को साफ और रोशन रखें।
    2. टूटी चीजें:
      घर में लंबे समय से पड़ी खराब या टूटी वस्तुओं को वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। टूटे बर्तन, बंद घड़ी, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटा शीशा और बेकार पड़ी चीजें समय-समय पर हटा दें। इससे घर व्यवस्थित रहेगा और अनावश्यक सामान भी जमा नहीं होगा।
    3. नमक:
      वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में नमक को नकारात्मकता दूर करने से जोड़ा जाता है। कई लोग सप्ताह में एक बार पोछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक मिलाकर घर की सफाई करते हैं। हालांकि, इसे धन बढ़ाने का वैज्ञानिक उपाय नहीं माना जाता। इसे केवल पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही अपनाएं।
    4. उत्तर दिशा:
      वास्तु में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है और इसका संबंध धन-संपत्ति से जोड़ा जाता है। इसलिए इस हिस्से में भारी कबाड़ या अनुपयोगी सामान रखने से बचें। अगर यहां सामान रखा है तो उसे व्यवस्थित करें और बेकार चीजें हटा दें।
    5. तिजोरी की दिशा:
      वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन रखने वाली तिजोरी या अलमारी को सही दिशा में रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण दिशा की दीवार के पास तिजोरी रखकर उसका मुंह उत्तर की ओर खुलना शुभ माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट अलग-अलग होती है, इसलिए बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। तिजोरी में फटे नोट, बेकार कागज और पुरानी रसीदें जमा न करें।
    6. शाम को जलाएं दीपक:
      सनातन परंपरा में शाम के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। शाम के समय घर को साफ रखें और अनावश्यक अंधेरा न रहने दें।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • पंचमुखी हनुमान के ‘पांचों’ चेहरों का क्या है रहस्य? हर रूप: देता है अलग आशीर्वाद, ये हैं तस्वीर लगाने की सही दिशा.

    पंचमुखी हनुमान के ‘पांचों’ चेहरों का क्या है रहस्य? हर रूप: देता है अलग आशीर्वाद, ये हैं तस्वीर लगाने की सही दिशा.

    पंचमुखी हनुमान के ‘पांचों’ चेहरों का क्या है रहस्य? हर रूप: देता है अलग आशीर्वाद, ये हैं तस्वीर लगाने की सही दिशा.

    हनुमान जी के पंचमुखी स्वरूप को बेहद शक्तिशाली माना गया है। पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख अलग-अलग शक्तियों के प्रतीक हैं। मान्यता है कि इन पांचों रूपों से साहस, सुरक्षा, स्वास्थ्य, समृद्धि, ज्ञान और विजय का आशीर्वाद मिलता है। यही वजह है कि पंचमुखी हनुमान की तस्वीर को घर में रखना भी शुभ माना जाता है। तो चलिए जानते हैं उनके पांच मुखों का महत्व और घर में पंचमुखी हनुमान की तस्वीर लगाने की सही दिशा।

    पंचमुखी रूप की कथा

    सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब अहिरावन भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था, तब उन्हें बचाने के लिए हनुमान जी ने पंचमुखी स्वरूप धारण किया। पाताल लोक में पांच दिशाओं में रखे पांच दीपकों को एक साथ बुझाने के बाद ही अहिरावन का अंत संभव था। हनुमान जी ने पांच रूप धारण कर सभी दीपक बुझाए। इस तरह अपनी सूझबूझ और पराक्रम से उन्होंने भगवान राम और उनके अनुज लक्ष्मण को मुक्त कराया।

    पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख का महत्व

    1. वानर मुख
      : पंचमुखी हनुमान का मुख्य मुख वानर रूप में होता है। इसे पूर्व दिशा से संबंधित माना जाता है। यह रूप साहस, यश, पवित्रता और भक्ति से जुड़ा है। इसे हनुमान जी की शक्ति और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।
    2. नरसिंह मुख:
      दक्षिण दिशा की ओर माने जाने वाले सिंह मुख को भगवान नरसिंह का स्वरूप बताया जाता है। यह रूप भय से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
    3. गरुड़ मुख:
      पंचमुखी स्वरूप में पश्चिम दिशा से संबंधित गरुड़ मुख भी शामिल है। मान्यता है कि यह रूप विषैले प्रभावों, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव का प्रतीक है।
    4. वराह मुख:
      उत्तर दिशा से जुड़ा वराह मुख भगवान विष्णु के वराह स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। इसे स्वास्थ्य, लंबी आयु, स्थिरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
    5. हयग्रीव मुख:
      पंचमुखी हनुमान का ऊपर की ओर रहने वाला अश्व मुख भगवान हयग्रीव के स्वरूप से संबंधित माना जाता है। यह ज्ञान, बुद्धि और विजय का प्रतीक है। विद्यार्थियों और ज्ञान की साधना करने वालों के लिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    घर में कहां लगाएं पंचमुखी हनुमान की  तस्वीर?

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार , पंचमुखी हनुमान की तस्वीर घर के मुख्य द्वार पर लगाना शुभ होता है। इसे ड्रॉइंग रूम या लिविंग रूम में भी रखा जा सकता है। दक्षिण दिशा को पंचमुखी हनुमान की तस्वीर के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण में भी इसे लगाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होने की मान्यता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • शारदीय नवरात्रि 9 नहीं: बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें.

    शारदीय नवरात्रि 9 नहीं: बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें.

    शारदीय नवरात्रि 9 नहीं: बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें.

    Shardiya Navratri 2026: देवी के भक्तों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है, इस बार शारदीय नवरात्रि बहुत खास रहेगी क्योंकि 2026 में शारदीय नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिन की होगी. माता की पूजा के लिए 10 दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

    इस बार नवरात्रि के क्रम में एक तिथि की पुनरावृत्ति हो रही है. इसे तिथि वृद्धि कहा जाता है. इसी वजह से इस बार नवरात्रि 10 दिन तक चलने वाली है. कौन सी तिथि दो दिन तक रहेगी जान लें.

    इस बार 10 दिन की क्यों है नवरात्रि?

    सामान्य तौर पर प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि नौ दिनों की होती है लेकिन 2026 में पंचांग की तिथियों में विशेष स्थिति बन रही है. सप्तमी तिथि दो दिन यानी 17 और 18 अक्टूबर को पड़ रही है. इसके चलते नवरात्रि का एक दिन बढ़ गया है और ये पर्व 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा.

    शारदीय नवरात्रि 10 या 11 अक्टूबर से

    पंचांग की गणना के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात लगभग 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. हिंदू परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, यानी जिस तिथि में सूर्योदय होता है वही पूरे दिन मान्य मानी जाती है। इसी कारण नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्तूबर को होगा. इसके बाद अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की क्रमवार पूजा की जाएगी.

    11 अक्टूबर को घटस्थापना

    पंचांग के अनुसार 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होगी. इसी दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी. प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी.

    दिल्ली के लिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा. इसकी अवधि करीब 3 घंटे 52 मिनट है. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना का समय सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा.

    नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी कब है?

    इस बार दुर्गा अष्टमी 18 अक्टूबर रविवार को मनाई जाएगी. इसी दिन मां महागौरी की पूजा का विधान रहेगा. अष्टमी के दिन कन्या पूजन, हवन और देवी आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह करीब 8.27 बजे शुरू होगी और अगले दिन 19 अक्टूबर दोपहर करीब 10.51 बजे तक रहेगी.

    नवमी और दशहरा कब होगा?

    महानवमी 19 अक्टूबर मंगलवार को होगी. इसी दिन नवमी हवन, आयुध पूजा और नवरात्रि पारण से जुड़े अनुष्ठान किए जाएंगे. पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12.50 तक रहेगी. इसी दिन विजयादशमी और दुर्गा विसर्जन भी रहेगा.

    10 दिन की नवरात्रि समृद्धि का प्रतीक

    ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार जब शारदीय नवरात्रि तिथि वृद्धि के कारण 10 दिन की हो तो उसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि में एक अतिरिक्त दिन मिलने का अर्थ देवी आराधना, जप, पाठ और साधना के लिए एक दिन अतिरिक्त अवसर मिलना है.

    Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा इस बार हाथी पर आएंगी, लेकिन उनकी विदाई किस सवारी पर होगी?

    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.

  • साल 2026 की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या, अक्टूबर में कब है, नोट करें डेट.

    साल 2026 की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या, अक्टूबर में कब है, नोट करें डेट.

    साल 2026 की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या, अक्टूबर में कब है, नोट करें डेट.

    Shanishchari Amavasya 2026: अक्टूबर 2026 में अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है. खास बात यह है कि ये दिन सर्व पितृ अमावस्या भी है. 3 साल बाद ये संयोग बना है. एक ही दिन पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है.

    धार्मिक मान्यता में अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी गई है, जबकि शनिवार शनि देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है. ऐसे में इस दिन श्रद्धापूर्वक पितृ कर्म करने के साथ शनि देव से जुड़े दान और पूजा पितरों के साथ शनि देव को भी प्रसन्न करने वाला रहेगा.

    साल की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या कब ?

    पंचांग के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिवार 10 अक्टूबर 2026 को होगी. आश्विन कृष्ण अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे तक रहेगी. इस दिन पितृ पक्ष का आखिरी दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या भी रहेगी. इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका किसी विशेष तिथि पर श्राद्ध न हो पाया हो.

    क्यों खास है ये शनि अमावस्या

    शनिवार, शनि देव का दिन होता है और अमावस्या पितरों व कर्मों से जुड़ी होती है। जब ये दोनों एक साथ आते हैं, तो माना जाता है कि शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव कम हो सकते हैं और इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और पूजा करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति आती है. इस दिन काले तिल, तेल, उड़द दाल, काले कपड़े आदि का दान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में स्थिरता और सफलता बढ़ती है.

    शनिश्चरी अमावस्या पर शनि देव की पूजा करते समय सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि से जुड़े कष्टों से राहत की कामना की जाती है. इस दिन श्रद्धापूर्वक शनि देव का पूजन करें और उनके समक्ष सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं.

    शनि देव और पितरो को कैसे करें प्रसन्न

    इस दिन गरीब या जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल, वस्त्र और भोजन का दान कर सकते हैं. दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए. ये न सिर्फ शनि देव बल्कि पितरों को भी संतुष्ट करता है.

    सर्व पितृ अमावस्या पर कुत्ते को भोजन खिलाया जाता ही है. ऐसे में शनिवार को अमावस्या पड़ रही है तो काले कुत्ते के लिए भोग निकाले. इससे शनि देव और पितर दोनों प्रसन्न होंगे.

    पितरों के लिए शाम को सरसों के तेल का दीपक लगाएं. इसी के साथ तेल में खुद का चेहरा देखकर दान भी कर दें. इससे शनि दोष दूर होता है.

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