Category: Dharam

  • बारिश के पानी से जुड़े ये वास्तु उपाय बदल सकते हैं हालात, धन-सेहत से जुड़ी परेशानियों के लिए करें ये काम

    बारिश के पानी से जुड़े ये वास्तु उपाय बदल सकते हैं हालात, धन-सेहत से जुड़ी परेशानियों के लिए करें ये काम

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    सावन के महीने में बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश मौसम को खुशनुमा बनाती है और सूखे धरती को राहत देकर उसे हरा-भरा करती है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में बारिश के पानी को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि बरसात के साफ पानी को जमा करके किए गए कुछ उपायों से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। तो चलिए जानते हैं बारिश के पानी से जुड़े कुछ आसान उपाय।

    आर्थिक स्थिति से राहत का उपाय

    अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो बारिश के पानी से जुड़ा यह उपाय कर सकते हैं। इसके लिए बारिश का पानी मिट्टी के घड़े या तांबे के बर्तन में इकट्ठा करें। बर्तन में रखें इस पानी में एक चुटकी हल्दी मिला दें। अब इसे घर की उत्तर दिशा में रख दें। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, 11 दिनों तक सुबह और शाम इसके पास दीपक जलाने से आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बन सकते हैं।

    अच्छी सेहत के लिए उपाय

    हालांकि, बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह और सही इलाज लेना जरूरी है। लेकिन अगर परिवार में कोई व्यक्ति लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहा है तो बारिश पानी का यह उपाय राहत दे सकता है। इसे स्टील या तांबे के बर्तन में रखकर भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद शिवलिंग पर यह जल अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलने की मान्यता है।

    इस उपाय से चंद्रमा को करें मजबूत

    ज्योतिष में कमजोर चंद्रमा को मानसिक अशांति, अनिद्रा और आत्मविश्वास में कमी से जोड़ा जाता है। इसके लिए बारिश का पानी हरे रंग की कांच की बोतल में भरकर घर के किसी शांत स्थान पर रख सकते हैं। इसे पूरे साल स्टोर करके रखने की मान्यता है। इसके बाद आने वाले साल में पुराने पानी की जगह फिर से बारिश का नया पानी भरने की मान्यता है।

    साफ पानी का करें इस्तेमाल

    बारिश के पानी से जुड़े ये आसान उपाय ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन उपायों के लिए हमेशा साफ और स्वच्छ बारिश के पानी का ही इस्तेमाल करें।

  • पाताल लोक से हुई थी रक्षाबंधन की शुरुआत, एक अनोखे वादे के कारण कलाई पर बांधी गई थी पहली राखी

    पाताल लोक से हुई थी रक्षाबंधन की शुरुआत, एक अनोखे वादे के कारण कलाई पर बांधी गई थी पहली राखी

    रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा । जब भी कोई पर्व आने को होता है, तो उस पर्व से जुड़ी कथाओं और कहानियों के बारे में इंटरनेट पर खूब सर्च होने लगता है। जैसा कि राखी का त्योहार आने वाला है तो ऐसे में स्वाभाविक है कि लोग इस बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहेंगे। इस त्योहार को लेकर एक बड़ा सवाल जो हर किसी के मन में रहता है कि आखिर इस पर्व की शुरुआत हुई कैसे थी और इतिहास में सबसे पहली राखी किसने किसको बांधी थी? तो आज हम अपने इस खास लेख में आपके इसी सवाल का सटीक जवाब देंगे। क्या आप जानते हैं कि राखी की शुरुआत धरती नहीं बल्कि पाताल लोक से हुई थी।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के त्योहार का प्रारंभ खुद माता लक्ष्मी ने किया था। माता ने एक अनोखे वादे के कारण राजा बलि के हाथ में पहली राखी बांधी थी। चलिए जानते हैं राखी की सबसे पौराणिक कथा।

    रक्षाबंधन की सबसे पौराणिक कथा

    श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार , असुरराज बलि बहुत पराक्रमी और दानवीर राजा थे। उन्होंने अपने तपोबल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया था। इससे भयभीत होकर देवराज इंद्र भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और वे राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे। बलि ने यज्ञ में आए वामन देव से मनचाहा दान मांगने को कहा। जिस पर वामन देव ने केवल तीन पग भूमि देने की मांग की। जब राजा बलि इतनी भूमि देने के लिए तैयार हो गए तब वामन देव ने अपना विशाल रूप धारण किया और उन्होंने दो पग में ही पूरी पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग लोक नाप लिया।

    जब तीसरा पग रखने के लिए कुछ नहीं बचा तब राजा बलि ने अपना सिर ही वामन देव के चरणों में रख दिया। बलि की इस भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। साथ ही भगवान विष्णु ने बलि से वरदान मांगने को कहा, तब राजा बलि ने एक अत्यंत अनोखा वादा मांग लिया। बलि ने कहा, ‘हे प्रभु मुझे वरदान दीजिए कि जब भी मैं सुबह उठूं या रात को सोऊं, आप हमेशा मेरे सामने रहें। मेरी इच्छा है कि आप मेरे पाताल लोक के द्वारपाल बनकर रहें।’ इसके बाद भगवान विष्णु बैकुंठ धाम छोड़कर पाताल लोक में राजा बलि के द्वारपाल बनकर रहने लगे।

    माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को वापस पाने के लिए बांधी पहली राखी

    भगवान विष्णु के वैकुंठ धाम छोड़ने से माता लक्ष्मी अत्यंत दुखी रहने लगीं। तब उन्होंने प्रभु को वापस लाने की एक योजना बनाई। उस योजना के तहत माता लक्ष्मी एक साधारण स्त्री का रूप धारण करके पाताल लोक पहुंचीं। उन्होंने राजा बलि को अपना भाई माना और श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि की कलाई पर एक रक्षासूत्र बांध दिया। साथ ही उन्होंने राजा बलि के लंबे और सुखद जीवन की प्रार्थना की। यह देख राजा बलि का दिल स्नेह और करुणा से भर गया। जिसके बाद राजा बलि ने अपनी धर्म बहन से कुछ मांगने के लिए कहा। तब माता लक्ष्मी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं और बोलीं, ‘हे राजन! मुझे धन-दौलत कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ मेरे स्वामी मुझे लौटा दो।’ राजा बलि ने माता लक्ष्मी द्वारा बांधे गए पवित्र धागे का मान रखा और तुरंत भगवान विष्णु को अपने उस अनोखे वादे से मुक्त कर दिया, जिसके तहत उन्होंने भगवान को अपना द्वारपाल बना लिया था। इसके बाद माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को लेकर बैकुंठ धाम वापस आ गईं। कहते हैं इस घटना के बाद से ही राखी पर्व मनाया जाने लगा।

  • घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंगलवार, शनिवार समेत रामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव जैसे खास मौकों पर मंदिर में उनके श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। वहीं, बात करें घर के देवस्थान की तो वास्तु में भी घर में हनुमान जी की तस्वीर रखना शुभ बताया है। घर में हनुमान जी की 5 तस्वीरें लगाना बहुत लाभदायी माना जाता है। चलिए जानते हैं कौन सी फोटो घर में रखना चाहिए और इसके क्या लाभ हैं।

    इस दिशा में लगाएं तस्वीर

    सबसे पहले जान लेते हैं कि हनुमान जी की फोटो किस दिशा में रखना फायदेमंद होता है। वास्तु शास्त्र  के अनुसार हनुमान जी की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। खासतौर पर लाल रंग में बैठे हुए हनुमान जी का चित्र इस दिशा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे दक्षिण दिशा से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होने की मान्यता है।

    राम भक्ति करते हनुमान

    भगवान राम की पूजा या भजन-कीर्तन करते हुए हनुमान जी की तस्वीर घर में लगाना पूरे परिवार के लिए शुभ होता है। मान्यता है कि इससे घर के सदस्यों के बीच प्रेम, आपसी समझ और अपनापन बढ़ता है और वातावरण में सुख-शांति बनी रहती है।

    पर्वत उठाए बजरंगबली

    हाथ में पर्वत उठाए हुए हनुमान जी का चित्र साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु अनुसार ऐसी तस्वीर घर में रखने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार होता है। इसे मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा से भी जोड़ा जाता है।

    उड़ते हुए हनुमान

    आकाश में उड़ते हुए हनुमान जी की तस्वीर को प्रगति और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर बनते हैं और मुश्किल कामों को पूरा करने का आत्मविश्वास मिलता है।

    लाल रूप में विराजमान

    दक्षिण दिशा में लाल रंग में बैठे हनुमान जी की तस्वीर लगाने की भी विशेष मान्यता है। इसे घर की परेशानियों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला माना जाता है। साथ ही, ऐसी तस्वीर घर में सुरक्षा और सकारात्मक माहौल बनाए रखने से जोड़ी जाती है।

    पंचमुखी हनुमान

    वास्तु में मुख्य दरवाजे पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा लगाना भी शुभ बताया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। इस स्वरूप को हनुमान जी का विराट स्वरूप माना जाता है।

  • मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा के साथ… क्यों 13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है… जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण..?

    मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा के साथ… क्यों 13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है… जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण..?

    हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि भले ही किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है लेकिन आत्मा अमर है. किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद आत्मा का नया सफर शुरू हो जाता है. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा का क्या होता है. अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद आत्मा तुरंत स्वर्ग या नर्क चली जाती है लेकिन गरुण पुराण के मुताबिक ऐसा नहीं होता है. किसी व्यक्ति की मौत के बाद आत्मा शरीर से बाहर निकलकर 13 दिनों तक अपने ही घर में अपने परिवार वालों के बीच रहती है.

    यमलोक से यमदूत आते हैं आत्मा को लेने
    गरुड़ पुराण के मुताबिक किसी व्यक्ति की मौत के बाद तुरंत यमलोक से दो यमदूत आत्मा को लेने के लिए आ जाते हैं. यमदूत आत्मा को अपने संग लेकर यमलोक चले जाते हैं. गरुण पुराण के मुताबिक आत्मा को यमलोक ले जाने का उद्देश्य महज इतना ही होता है कि उसे उसके जीवनभर के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब-किताब दिखाया जा सके. यमराज के दरबार में आत्मा को उसके कर्मों की झलक दिखाई जाती है. इसके बाद यमदूत आत्मा को वापस उसी के घर पर छोड़ देते हैं, जहां वह रहती थी. आत्मा को यमलोक ले जाने और उसके कर्मों की झलक दिखाने में लगभग 24 घंटे यानी एक दिन का समय लग जाता है. आत्मा को इसके बाद अगले 13 दिनों तक अपने परिवार के बीच रहना पड़ता है.

    अपनो के बीच घर में क्या करती है आत्मा
    गरुड़ पुराण के मुताबिक आत्मा जब यमलोक से अपने घर आती है तो उसे अपने परिवार और अपनी चीजों से लगाव अधिक महसूस होने लगता है. वह दूर से अपने मृत पड़े शरीर को देखती है और घरवालों को भी रोते हुए पाती है. इससे आत्मा परेशान हो जाती है. वह अपने घरवालों को चुप कराने की कोशिश करती है, उनसे बात करना चाहती है और उन्हें आवाज भी देती है. हालांकि वह पूरी तरह से हवा जैसी एनर्जी बन चुकी होती है. ऐसे में कोई भी आत्मा को देख या फिर सुन नहीं सकता है. कई बार आत्मा अपने पुराने शरीर के अंदर घुसने की कोशिश भी करती है, लेकिन नियमों की वजह से वह अपने शरीर में वापस नहीं जा पाती.

    ऐसे आत्मा की भूख और प्यास होती है शांत
    शरीर से निकलने के बाद आत्मा खुद को बहुत कमजोर महसूस करती है. उसे भूख और प्यास भी लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक मौत के बाद के पहले 10 दिनों तक घर के लोग जो पिंडदान यानी चावल या जौ के आटे से बने गोल लड्डू का दान करते हैं, वह आत्मा के लिए काफी जरूरी होता है. रोज पिंडदान किया जाता है, उससे आत्मा की भूख व प्यास शांत होती है. इसी पिंडदान की ताकत से आत्मा को एक नया अदृश्य शरीर मिलता है, ताकि वह आगे का सफर तय कर सके. रोज के पिंडदान से इस नए शरीर के अलग-अलग हिस्से बनते हैं, जिससे आत्मा को आगे की यात्रा के लिए ताकत मिलती है.

    आत्मा के नए अदृश्य शरीर को मिलती है ताकत
    किसी व्यक्ति के मरने के 11वें और 12वें दिन घर में जो खास पूजा-पाठ और पिंडदान किए जाते हैं, वे आत्मा के अदृश्य शरीर को मजबूत और स्थिर बनाते हैं. इन दो दिनों में परिवार के लोग जो प्रार्थना करते हैं, उससे आत्मा को बहुत शांति मिलती है. आत्मा को यह अहसास हो जाता है कि अब उसका इस दुनिया का सफर पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उसे आगे बढ़ना ही होगा. इन दिनों की पूजा से आत्मा को वह ताकत मिलती है जिससे वह पृथ्वी लोक को छोड़कर यमलोक के कठिन रास्ते पर आसानी से चल सके.

    इस तरह से आत्मा की होती है अंतिम विदाई
    आत्मा के लिए 13वां दिन विशेष होता है. इस दिन को तेरहवीं भी कहते हैं. तेरहवीं के दिन घर पर विशेष पूजा-पाठ होती है, पंडितों को भोजन कराया जाता है और गरीबों को दान दिया जाता है. गरुड़ पुराण के मुताबिक तेरहवीं के दिन जो भी चीजें दान की जाती हैं, उनका फायदा सीधे तौर पर आत्मा को यमलोक के सफर में भोजन, पानी और रास्ते की सुख-सुविधाओं के रूप में प्राप्त होता है. तेरहवीं की पूरी प्रक्रिया पूरी होते ही यमदूत दोबारा आते हैं. गरुण पुराण के मुताबिक इसके बाद आत्मा का धरती और अपने परिवार से नाता हमेशा के लिए टूट जाता है. आत्मा यमलोक की यात्रा पर निकल पड़ती है. इस यात्रा को पूरा करने में आत्मा को लगभग एक साल का समय लग जाता है.

  • नहीं हो रहे जीवन में सफल? तो इन 5 बातों की बांध लें गांठ… कोई रोड़ा नहीं रोक पाएगा..?​​​​

    नहीं हो रहे जीवन में सफल? तो इन 5 बातों की बांध लें गांठ… कोई रोड़ा नहीं रोक पाएगा..?​​​​

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    क्या आप भी सोचते हैं कि आप जिंदगी में सफल क्यों नहीं हो रहे? दरअसल आपकी जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सच्चाइयां भी है, जिन्हें आप मानते नहीं क्योंकि वो कड़वी होती है. लेकिन अक्सर यही कड़वे सच हमें मजबूत बनाते हैं और आगे बढ़ने की ताकत देते हैं. अगर आप भी अपनी सोच और जीवन में अच्छा बदलाव लाना चाहते हैं, तो कुछ बातों को समझना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

    जिंदगी की जिम्मेदारी केवल आपकी

    कई लोग सही मौके या किसी की मदद का इंतजार करते रहते हैं. लेकिन सच यह है कि आपकी जिंदगी बदलने की शुरुआत आपको खुद करनी होगी. जब आप अपनी जिम्मेदारी खुद लेते हैं, तभी असली बदलाव शुरू होता है.

    हर आलोचना गलत नहीं होती

    अगर कोई आपकी कमी बताता है, तो तुरंत नाराज होने की बजाय उसकी बात पर शांत होकर सोचें. हर आलोचना बुरी नहीं होती. कई बार यही बातें हमें अपनी गलतियां सुधारने और बेहतर इंसान बनने का मौका देती हैं.

    लोगों को बनाएं दूरियां

    हर रिश्ता हमेशा अच्छा नहीं होता. अगर कोई व्यक्ति बार-बार आपको दुख, तनाव या परेशानी दे रहा है, तो उससे दूरी बनाना गलत नहीं है. अपनी मानसिक शांति को सबसे पहले रखना भी जरूरी है.

    हर कदम एक नई शुरुआत की ओर

    कोई भी इंसान पहली बार में सब कुछ नहीं सीखता. नई चीज सीखते समय गलतियां होना बिल्कुल आम बात है. जो लोग लगातार कोशिश करते रहते हैं, वही आगे चलकर सफलता हासिल करते हैं. इसलिए शुरुआत करने से कभी न डरें.

    खुशी लक्ष्य में नहीं, मिलती सफर में

    अक्सर लोग सोचते हैं कि अच्छी नौकरी, ज्यादा पैसा या बड़ा घर मिलने के बाद ही खुशी मिलेगी. लेकिन सच यह है कि खुशी छोटी-छोटी बातों में भी छिपी होती है. परिवार के साथ बिताया समय, दोस्तों से बातचीत और रोज की छोटी सफलताएं भी जिंदगी को खुशहाल बनाती हैं.

    जिंदगी से जुड़ी ये बातें पहली नजर में मुश्किल लग सकती हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से सोच मजबूत होती है और जीवन आसान बनता है. अपनी जिम्मेदारी लेना, सीखने के लिए तैयार रहना, सही लोगों के साथ रहना और छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करना आपको लंबे समय तक सफल और खुश रहने में मदद कर सकता है.

  • इस दिशा में रखें Money Plant, होगी पैसों की बारिश… लेकिन अगर कर दी ये गलती, तो हो जाएंगे कंगाल..?​​​​

    इस दिशा में रखें Money Plant, होगी पैसों की बारिश… लेकिन अगर कर दी ये गलती, तो हो जाएंगे कंगाल..?​​​​

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    घर में मनी प्लांट लगाना आम बात है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसे सही दिशा में रखने से इसका फायदा कई गुना बढ़ जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार मनी प्लांट सिर्फ हरियाली के लिए नहीं बल्कि घर में पैसों का प्रवाह यानी कैशफ्लो बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है. ऐसे में जानना जरूरी है कि इसे किस दिशा में रखें.

    दक्षिण-पूर्व दिशा है सबसे अच्छी

    वास्तु के अनुसार दक्षिण-पूर्व दिशा को धन और समृद्धि की दिशा माना जाता है. इस दिशा में मनी प्लांट रखने से घर में आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और पैसों की तंगी दूर होती है. कहा जाता है कि यह दिशा शुक्र ग्रह से जुड़ी होती है, जो धन और सुख-समृद्धि का प्रतीक है. इसलिए ज्यादातर लोग इसी दिशा को चुनते हैं.

    पूर्व दिशा भी है अच्छा ऑप्शन

    अगर आपके घर में दक्षिण-पूर्व दिशा नहीं है, तो पूर्व दिशा में भी मनी प्लांट लगाया जा सकता है. यह दिशा सूरज की पहली रोशनी लेती है, जिससे पौधे को अच्छी एनर्जी मिलती है और घर में पॉजिटिवी बनी रहती है. इससे भी घर में पैसों का आना-जाना बेहतर होता है.

    किस दिशा में नहीं रखना चाहिए

    उत्तर दिशा में मनी प्लांट रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे कुछ मान्यताओं के अनुसार सही नहीं माना जाता. इसी तरह घर के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने भी मनी प्लांट लगाने से मना किया जाता है. कहा जाता है कि ऐसा करने से पैसा बाहर की ओर जाता है, अंदर नहीं आता.

    पौधे की देखभाल भी जरूरी है

    सिर्फ सही दिशा में रखना ही काफी नहीं है, पौधे की देखभाल भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है. सूखी या पीली पत्तियां तुरंत हटा दें, क्योंकि इन्हें नेगेटिवी का इशारा माना जाता है. पौधे को साफ रखें और समय-समय पर पानी दें, ताकि यह हरा-भरा बना रहे.

    मिट्टी में लगाएं, पानी में नहीं

    बहुत से लोग मनी प्लांट को पानी की बोतल में रखते हैं, लेकिन मान्यता है कि इसे मिट्टी के गमले में लगाना ज्यादा शुभ होता है. मिट्टी में लगा पौधा जमीन से जुड़ा रहता है, जिससे घर में स्थिरता और धन दोनों बने रहते हैं.

  • अगर घर में दिख रहे हैं ये संकेत, तो होने वाली है आपकी बल्ले-बल्ले.. क्योंकि होने वाला है मां लक्ष्मी का आगमन..​​​​

    अगर घर में दिख रहे हैं ये संकेत, तो होने वाली है आपकी बल्ले-बल्ले.. क्योंकि होने वाला है मां लक्ष्मी का आगमन..​​​​

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    वास्तु शास्त्र की हमारे जीवन में खास जगह होती है. यह केवल घर की बनावट तक ही नहीं होता, बल्कि हमारे जीवन की ऊर्जा, सुख और मानसिक शांति से भी जुड़ा हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यदि हम वास्तु के नियमों का पालन करते हैं, तो जीवन में पॉजिटिव बदलाव होते हैं. वहीं, कुछ ऐसे भी संकेत होते हैं जो इस बात का इशारा करते हैं कि हमारे घर में मां लक्ष्मी का आगमन हो चुका है या होने वाला है. चलिए बताते हैं आपको उन संकेतों के बारे में.

    हरी-भरी तुलसी का पौधा

    अगर आपके घर की तुलसी अचानक अधिक हरी-भरी और स्वस्थ दिखने लगे, तो यह बेहद शुभ संकेत माना जाता है. तुलसी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. इसका अच्छा विकास इस बात का संकेत है कि घर में पॉजिटिव एनर्जी आने वाली है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी हुई है.

    अचानक धन लाभ के संकेत

    यदि बिना किसी मेहनत किए आपको आर्थिक लाभ होने लगे या इनकम के नए अवसर मिलने लगें, तो यह भी शुभ संकेत है. यह इस बात को दर्शाता है कि आपके जीवन में आर्थिक लाभ के द्वार खुल रहे हैं और मां लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बनी हुई है.

    घर में खुशहाली और पॉजिटिविटी

    जब घर का माहौल बिना किसी कारण के शांत और खुशहाल बनने लगे, तो इसे भी शुभ संकेत माना जाता है. परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ना इस बात का संकेत है कि घर में पॉजिटिव एनर्जी दाखिल हो रही है.

    सुबह अच्छी खबर मिलना

    अगर आपके दिन की शुरुआत अच्छी खबरों या पॉजिटिव घटनाओं से होने लगे, तो यह भी मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत माना जाता है. ऐसा होना आपके जीवन में खुशियों के आगमन को दर्शाता है.

    घर में सुगंध का अनुभव

    अगर घर में बिना किसी कारण के एक अच्छी सुगंध महसूस हो, तो यह भी एक शुभ संकेत है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह मां लक्ष्मी की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है.

  • विवाह में आ रही रुकावट या शादीशुदा जिंदगी में तनाव? मां मंगला गौरी की पूजा से जुड़े उपाय जानें..?​​​​

    विवाह में आ रही रुकावट या शादीशुदा जिंदगी में तनाव? मां मंगला गौरी की पूजा से जुड़े उपाय जानें..?​​​​

    सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए खास माना जाता है. इसी महीने के मंगलवार को मां गौरी की पूजा करने की भी परंपरा है. सावन के मंगलवार को की जाने वाली इस पूजा को मंगला गौरी पूजा कहा जाता है. मान्यता है कि मां गौरी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और मंगल की कामना पूरी होती है. खासतौर पर विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़ी परेशानियों के लिए इस पूजा को शुभ माना जाता है.

    मंगला गौरी पूजा का क्या महत्व है?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार मां गौरी को सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. सावन के मंगलवार को उनकी पूजा करने से विवाह में आ रही परेशानियों को दूर करने और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ाने की कामना की जाती है. ज्योतिष में मंगल दोष को भी विवाह में देरी या परेशानी से जोड़ा जाता है. ऐसे में मंगला गौरी की पूजा को मंगल दोष से जुड़ी परेशानियों के लिए भी शुभ माना जाता है.

    विवाह में देरी हो रही हो तो ऐसे करें पूजा

    जिन कन्याओं का विवाह लंबे समय से नहीं हो पा रहा है, वे सावन के मंगलवार को सुबह या शाम मां गौरी की पूजा कर सकती हैं. मां के सामने घी का चौमुखी दीपक जलाएं. इसके बाद 16 फूल या 16 प्रकार के फूल अर्पित करें. इनमें लाल फूल जरूर रखें. मां को लाल चुनरी और लौंग भी चढ़ाएं. इसके बाद ‘ऊं ह्रीं गौर्ये नमः’ मंत्र का जाप करें. जाप पूरा होने के बाद मन में अच्छे जीवनसाथी और शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें.

    पति-पत्नी के बीच तनाव हो तो करें ये उपाय

    अगर पति-पत्नी के बीच बार-बार विवाद होता है या आपसी संबंध अच्छे नहीं हैं, तो शाम के समय मां गौरी की पूजा करें. उनके सामने घी के तीन दीपक जलाएं. मां के चरणों में सिंदूर, इत्र और 16 इलायची अर्पित करें. इसके बाद “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे’ मंत्र का 11 माला जाप करें. पूजा के बाद इलायची को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है.

    रिश्ता टूटने की स्थिति में क्या करें?

    अगर वैवाहिक जीवन में परेशानी बहुत बढ़ गई है और रिश्ता टूटने की स्थिति में पहुंच गया है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार मध्य रात्रि में मां गौरी और भगवान शिव की संयुक्त पूजा की जा सकती है. दोनों को वस्त्र अर्पित करें. मां गौरी को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, आभूषण, मेहंदी, काजल, शीशा और आलता जैसी सुहाग सामग्री चढ़ाएं. इसके बाद ‘ऊं गौरीशंकराय नमः’ मंत्र का 11 माला जाप करें और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें.

  • क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं, बल्कि विपत्ति, विवाद, कानूनी उलझन और आर्थिक तंगी जैसे कठिन समय में होती है.

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्त होना बहुत आम बात है. किसी की पोस्ट पर लाइक करना या किसी पार्टी में शामिल होना बेहद आसान काम है.

    लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब आपकी जिंदगी में अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में साफ लिखा है कि सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं बल्कि दुख और कठिन परिस्थितियों में होती है. आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे कौन से 5 मौके हैं जो सच्चे दोस्त की पहचान कराते हैं.

    बड़े संकट और विपत्ति में न छोड़े साथ

    जिंदगी में मुसीबतें कभी भी बताकर नहीं आती हैं. अचानक नौकरी चले जाना, व्यापार में नुकसान होना या कोई पारिवारिक दुर्घटना इंसान को पूरी तरह से तोड़ देती है.

    ऐसे समय में ज्यादातर लोग धीरे धीरे दूरी बनाने लगते हैं. चाणक्य नीति कहती है कि जो मित्र आपकी विपत्ति सुनकर भागने के बजाय समस्या का समाधान खोजने में मदद करे, उसी पर आपको भरोसा करना चाहिए.

    किसी विवाद या शत्रु के संकट में बने ढाल

    जब आपके सामने कोई बड़ा विवाद या विरोधी खड़ा हो जाए, तब दोस्तों के असली चरित्र का पता चलता है. चाणक्य कहते हैं कि सच्चा दोस्त वह नहीं है जो आपकी हर गलत बात का समर्थन करे.

    सच्चा मित्र आपको सही और गलत का अंतर समझाता है. मुसीबत के समय वह आपके साथ खड़ा रहकर आपको सही मार्गदर्शन और संबल प्रदान करता है.

    कानूनी परेशानी में न मोड़े मुंह

    चाणक्य ने अपने श्लोक में राजद्वार का जिक्र किया है, जिसे आज के समय में कानूनी या कोर्ट कचहरी के मामलों से जोड़कर देखा जा सकता है.

    ऐसे मामलों में अक्सर लोग झंझट से बचने के लिए दूर भागते हैं. लेकिन जो दोस्त कानूनी उलझनों के दौरान सही सलाह दे और आपका मनोबल बनाए रखे, वही सच्चा दोस्त कहलाता है.

    आर्थिक तंगी में जब न बदले दोस्त का व्यवहार

    पैसा एक ऐसी चीज है जो किसी भी रिश्ते की असली सच्चाई सामने ला देती है. जब जेब भरी होती है तो दुनिया साथ खड़ी नजर आती है.

    लेकिन आर्थिक तंगी आते ही अक्सर परिचित लोग किनारा करने लगते हैं. चाणक्य के अनुसार सच्चा मित्र आपकी आर्थिक स्थिति देखकर अपना व्यवहार कभी नहीं बदलता. वह अपनी क्षमता के हिसाब से बिना किसी स्वार्थ के आपका साथ निभाता है.

  • दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

    दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

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    हर इंसान अपनी जिंदगी में सच्चा सुख और शांति पाना चाहता है. इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत भी करता है. महाभारत काल के महान ज्ञानी महात्मा विदुर ने सुखद जीवन के कई रहस्य बताए हैं.

    उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही सच साबित होती हैं. विदुर नीति के अनुसार दुनिया में सबसे सुखी इंसान वही है जिसके पास स्वास्थ्य, सम्मान और अपनों का प्यार है. आइए जानते हैं महात्मा विदुर के वे 6 नियम जो जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.

    निरोगी शरीर ही सबसे बड़ा धन है

    जीवन में सबसे पहला और बड़ा सुख इंसान का सेहतमंद रहना है. अगर शरीर में कोई बीमारी है तो दुनिया की हर खुशी बेकार लगने लगती है. बीमारी की वजह से इंसान का मन हमेशा चिंताओं से घिरा रहता है.

    बिना अच्छी सेहत के इंसान अपनी धन-दौलत का आनंद भी नहीं ले पाता. इसलिए महात्मा विदुर कहते हैं कि अपने शरीर और सेहत का ध्यान रखना सबसे पहला और जरूरी काम है.

    कर्ज से आजादी दिलाती है सच्चा सुकून

    जीवन में दूसरा सबसे बड़ा सुख कर्ज से मुक्त होना है. किसी से उधार या कर्ज लेकर जीने वाला इंसान कभी चैन की नींद नहीं सो पाता. कर्ज का बोझ इंसान का मानसिक सुकून और शांति पूरी तरह छीन लेता है.

    कमाई कम हो तो भी अपने खर्चों को सीमित रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है. कर्ज से दूर रहकर ही इंसान समाज में सम्मान के साथ सिर उठाकर जी सकता है.

    अपनों का साथ और प्यार है असली ताकत

    महात्मा विदुर के अनुसार इंसान का सच्चा सुख अपनों के साथ में ही छिपा है. जिस घर में परिवार के सदस्यों का प्यार और सहयोग मिलता है, वहाँ हमेशा खुशियाँ बनी रहती हैं.

    जब अपनों का साथ होता है तो जीवन के कठिन से कठिन रास्ते भी बेहद आसान हो जाते हैं. अपनों का साथ इंसान को हर दुख-दर्द से लड़ने की हिम्मत देता है.

    सही रास्ते से की गई कमाई देती है शांति

    इंसान का चौथा सुख उसकी मेहनत और ईमानदारी की कमाई है. गलत या धोखे के रास्ते से कमाया गया पैसा ज्यादा दिन नहीं टिकता और अशांति लाता है.

    ईमानदारी की कमाई से घर में बरकत आती है और मन हमेशा शांत रहता है. मेहनत की कमाई इंसान को समाज में मान-सम्मान दिलाती है. सही तरीके से कमाया हुआ धन ही जीवन को सुरक्षित बनाता है.

    समझदार और संस्कारी जीवनसाथी का होना

    जीवन में एक समझदार और गुणी जीवनसाथी का होना बेहद जरूरी है. अच्छा जीवनसाथी सुख और दुख दोनों में बराबर का भागीदार बनता है.

    अगर जीवनसाथी संस्कारी और सुलझा हुआ है तो घर का माहौल हमेशा सुखद बना रहता है. विपरीत परिस्थितियों में सही सलाह देने वाला जीवनसाथी ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत बनता है और जीवन को सफलता की ओर ले जाता है.

    ज्ञान और अच्छी संगति से मिलता है मान-सम्मान

    महात्मा विदुर के मुताबिक सही ज्ञान और अच्छी संगति जीवन का छठा सुख है. सही ज्ञान इंसान को सही और गलत का फर्क सिखाता है. अच्छे और सकारात्मक लोगों के साथ रहने से इंसान के विचार भी बेहतर बनते हैं.

    समझदार और सज्जन लोग समाज में हमेशा आदर पाते हैं. अपनी बुद्धि और अच्छी संगति के बल पर इंसान जीवन की हर बड़ी बाधा को आसानी से पार कर लेता है.