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  • ‘हम 3 साल से रिलेशनशिप में हैं’… दुल्हन के प्रेमी के दावे से हड़कंप, दूल्हे ने लिया तलाक का फैसला..

    ‘हम 3 साल से रिलेशनशिप में हैं’… दुल्हन के प्रेमी के दावे से हड़कंप, दूल्हे ने लिया तलाक का फैसला..

    मनेंद्रगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गांव में शादी के अगले ही दिन दुल्हन के ससुराल में प्रेमी की एंट्री हो गई। इससे वहां बवाल मच गया। प्रेमी दुल्हन से मिलने को अड़ा रहा। उसका कहना था कि दुल्हन उसके साथ 3 साल से रिलेशनशिप में थी। घरवालों ने दबाव डालकर उसकी शादी करवाई है। इस पर मामला थाने तक पहुंच गया। दूल्हा-दुल्हन, उनके परिजन तथा प्रेमी को पुलिस शुक्रवार की रात 2 बजे तक समझाइश देती रही, लेकिन कोई हल नहीं निकला। इधर दूल्हा पक्ष ने रिसेप्शन रद्द कर दिया तथा दूल्हे ने दुल्हन पक्ष पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग कर दी। इस दौरान पुलिस ने प्रेमी को लॉकअप में बंद कर दिया तथा दुल्हन को मायके लौटना पड़ा।

    मनेन्द्रगढ़ इलाके में एक विवाह ने उस वक्त विवाद का रूप धारण कर लिया, जब शादी के महज दूसरे दिन ही दुल्हन का कथित प्रेमी उसके ससुराल पहुंच गया और दावा किया कि वह युवती (दुल्हन) के साथ 3 साल से रिलेशनशिप में है। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं। इसलिए अपनी गर्लफ्रें ड को किसी और के होते हुए नहीं देख सकता।

    शादी 6 मई को तथा विदाई 7 मई को हुई थी। कथित प्रेमी 8 मई को दुल्हन के ससुराल पहुंच गया। बताया जा रहा है कि युवती की रीति-रिवाज और धूमधाम के साथ शादी हुई थी। परिवार शादी के बाद रिसेप्शन की तैयारी में जुटा था। इसी बीच प्रेमी शुक्रवार को अचानक दुल्हन के ससुराल पहुंच गया। यहां उसने दुल्हन से मिलने की जिद शुरू कर दी।

    देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों परिवार आमने-सामने आ गए और घर के बाहर भीड़ लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रेमी लगातार यह कहता रहा कि युवती पिछले 3 साल से उसके साथ रिश्ते में थी और परिवार के दबाव में शादी हुई।

    ससुराल पक्ष इस घटनाक्रम से हैरान और नाराज नजर आया। शादी के दो दिन बाद अचानक यह विवाद चर्चा का विषय बन गया। वहीं दुल्हन के मायके वालों को भी थाने बुलाया गया। उसके बाद लडक़ी पक्ष ने मनेन्द्रगढ़ सिटी कोतवाली पहुंच जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर हालात को संभालने की कोशिश की। विवाद बढ़ता देख पुलिस दूल्हा-दुल्हन और कथित प्रेमी को थाने लेकर पहुंची।

    पीछे सेे लडक़ी के मायके और दुल्हे पक्ष के लोग भी पहुंच गए। यहां रात करीब 2 बजे तक समझाइश और पूछताछ चलती रही। लेकिन कई घंटे तक चले ड्रामे के बाद कोई समाधान नहीं निकला। थाना प्रभारी ने दुल्हन के परिजन व दूल्हे को बुलाकर आपस में बात भी करवाई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल पाया।

    प्रेमी को लॉकअप में किया बंद

    इधर दूल्हे ने थाना में साफ कहा कि दुल्हन को अब वह नहीं रखेगा। फिर अपने परिवार के साथ निकल गया। बताया जा रहा है कि प्रेमी थाने में भी जिद पर अड़ा रहा और युवती के साथ रहने की बात कहता रहा। मामले में पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के चलते लॉकअप में बंद कर दिया।

    दूल्हा पक्ष ने रिसेप्शन भी किया रद्द

    घटनाक्रम के बाद दूल्हा और उसका परिवार बेहद नाराज हो गया। शादी के बाद होने वाला रिसेप्शन भी रद्द कर दिया गया। इससे दुल्हन को बिना रिसेप्शन थाने से ही अपने मायके लौटना पड़ गया। शादी को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों से पूछताछ जारी है।

    हालांकि, लकड़ी पक्ष ने थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, जबकि दूल्हे ने शिकायत कर कहा कि मुझे अब तलाक चाहिए क्योंकि धोखे में रख कर मेरी शादी कराई गई है। मेरे पूरा सामान लौटाया जाए।

  • जिस जिम में बना रहा था मस्कुलर बॉडी, वहीं जिंदगी ने छोड़ा साथ! पोज देते-देते आया हार्ट अटैक

    जिस जिम में बना रहा था मस्कुलर बॉडी, वहीं जिंदगी ने छोड़ा साथ! पोज देते-देते आया हार्ट अटैक

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    मसल्स दिखाने के दौरान आ गया हार्ट अटैक (इमेज- सोशल मीडिया)

    इन दिनों जिम में अचानक हार्ट अटैक आने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज वायरल हो रहे हैं जिनमें युवा वर्कआउट के दौरान या उसके तुरंत बाद बेहोश होकर गिरते दिखते हैं. इसी कड़ी में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक युवक जिम में अपने बाइसेप्स बनाकर पोज दे रहा था. वह अपनी मसल्स को फ्लेक्स करके कैमरे के सामने दिखा रहा था. अचानक उसे हार्ट अटैक आ गया और वह जिम के फर्श पर निढाल होकर गिर पड़ा।

    आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी. इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है. वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखता है कि युवक अपनी बॉडी को फ्लेक्स कर रहा है. वह दोनों हाथों से बाइसेप्स को टाइट करके पोज दे रहा है. उसके चेहरे पर मेहनत और गर्व की भावना साफ झलक रही है. लेकिन कुछ ही सेकंड में उसका शरीर कांपने लगता है. वह संतुलन खो देता है और सीधे फर्श पर गिर जाता है.

    आ गया हार्ट अटैक
    वीडियो में देख सकते हैं कि मोमेंट को रिकॉर्ड कर रहा शख्स तुरंत उसके पास पहुंचता है. लेकिन बताया जा रहा है कि उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पड़ गई. इस वीडियो को देखकर लोग हैरान रह गए हैं. कई लोगों ने कमेंट कर लिखा कि जिम अब सिर्फ फिटनेस की जगह नहीं रह गई बल्कि जानलेवा साबित हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हादसों की संख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि युवा भारी वर्कआउट के तुरंत बाद रील बनाने या फोटो खिंचवाने के लिए सांस रोककर लंबे समय तक मसल्स फ्लेक्स करते हैं. जब व्यक्ति भारी वजन उठाता है तो शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है. वर्कआउट के दौरान दिल तेज धड़कता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. ऐसे में अगर व्यक्ति सांस रोककर पोज लेने लगे तो शरीर और दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इसे वाल्सल्वा मैन्यूवर कहा जाता है. इसमें सांस रोकने से ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और दिल पर अचानक बोझ पड़ जाता है. कई युवा बिना वार्म-अप के या ओवरट्रेनिंग करके भी यही गलती करते हैं. फिटनेस जरूरी है लेकिन दिखावे और सोशल मीडिया के दबाव में शरीर की सीमाओं को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

     

     

    बदल रहा है फिटनेस वर्ल्ड


    आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर्स वाले फिटनेस इंफ्लुएंसर अपनी परफेक्ट बॉडी दिखाते हैं. युवा उन्हें देखकर जल्दी रिजल्ट पाने की होड़ में लग जाते हैं. कई लोग सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं. कुछ स्टेरॉयड जैसी चीजों का सहारा लेते हैं जो दिल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं. डिहाइड्रेशन, कम नींद, अनियमित खानपान और तनाव भी हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देते हैं. जिम में एसी की ठंडक में पसीना नहीं आने पर कई लोग पानी कम पीते हैं जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. डॉक्टरों का कहना है कि 20 से 35 साल की उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले पहले कम होते थे लेकिन अब ये तेजी से बढ़ रहे हैं. एक अध्ययन के अनुसार जिम में होने वाले कई कार्डियक इवेंट्स में ओवरएक्सर्शन और गलत तकनीक मुख्य वजह होती है. जब व्यक्ति भारी वजन उठाकर तुरंत पोज लेता है तो कोरोनरी आर्टरीज पर दबाव बढ़ता है. अगर किसी को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैमिली हिस्ट्री ऑफ हार्ट डिजीज है तो जोखिम और बढ़ जाता है. कई युवा नियमित चेकअप नहीं कराते. वे सोचते हैं कि जिम जाने से वे पूरी तरह स्वस्थ हैं. लेकिन जिम जाना स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है.

  • जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

    जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

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    मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और बेजुबान जानवरों के प्रति अटूट प्रेम की एक अनूठी और भावुक मिसाल कायम कर दी है. अमूमन शोक सभाएं और तेहरवीं के आयोजन अपनों और परिजनों के जाने पर किए जाते हैं, लेकिन यहां एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी के लिए वो सब किया जो अमूमन सगे परिजनों के देहांत पर किया जाता है.

    सिरोंज के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी, जिसे पूरा परिवार और गांव प्यार से ‘कटोरी’ उर्फ ‘चमेली’ कहता था, 3 अगस्त को इस दुनिया को अलविदा कह गई. किसान नवल सिंह मालवीय के लिए ‘कटोरी’ महज एक मवेशी या जानवर नहीं थी, बल्कि परिवार की एक सदस्य और औलाद जैसी थी. कटोरी बीते 20 सालों से नवल सिंह के घर का अहम हिस्सा बनी हुई थी.

    घर की रानी: वह आम मवेशियों की तरह खूंटे से नहीं बांधी जाती थी, बल्कि बाकायदा घर के अंदर पलंग पर सोती थी और पूरे परिवार के सुख-दुख की साझीदार थी. जब 3 अगस्त को उसकी सांसे थमीं, तो पूरा मालवीय परिवार गमगीन हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला.

    प्रशासन से अनुमति लेकर अंतिम संस्कार, पवित्र गंगा में अस्थि विसर्जन

    नवल सिंह ने अपनी ‘कटोरी’ को अंतिम विदाई देने में कोई कमी नहीं छोड़ी. स्थानीय प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेकर कटोरी का पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के बाद नवल सिंह खुद कटोरी की अस्थियां संचित कर पवित्र गंगा नदी पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन का कर्मकांड पूरा किया. रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों को तेहरवीं में आमंत्रित करने के लिए बाकायदा शोक संदेश के कार्ड छपवाकर बांटे गए.

    तेहरवीं पर 600 लोगों का महाभोज, उमड़ा पूरा गांव

    13 दिनों के शोक के बाद 15 अगस्त को गंगाजली खोलने के साथ तेहरवीं का आयोजन किया गया. नवल सिंह ने अपनी प्यारी कटोरी की आत्मशांति और याद में एक विशाल भोज का आयोजन किया. इस तेहरवीं में रिश्तेदार, दोस्त और गांव के लगभग 600 लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में पहुंचे हर एक व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं और सबने एक बेजुबान के प्रति नवल सिंह के इस असीम समर्पण और प्यार की जमकर तारीफ की.

    संवेदना की मिसाल बना नवल का यह कदम

    आज के आधुनिक दौर में जहां इंसान के पास इंसानों के लिए समय और संवेदनाएं कम पड़ती जा रही हैं, वहीं नवल सिंह मालवीय का यह कदम समाज के लिए एक आईना है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवल सिंह का यह प्रयास दिखाता है कि जब प्यार सच्चा हो, तो बेजुबान और इंसान का रिश्ता रूहानी बन जाता है.

  • इच्छा पूरी करने वाला पेड़! न जड़ दिखती न पत्तियों में स्वाद, लकवा में फायदेमंद..

    इच्छा पूरी करने वाला पेड़! न जड़ दिखती न पत्तियों में स्वाद, लकवा में फायदेमंद..

    बालाघाट. प्रकृति में कई ऐसे सवाल है, जिसका जवाब मिलना मुश्किल ही हो जाता है. ऐसे में हम उसे चमत्कार कहते हैं. एक ऐसा ही चमत्कार बालाघाट जिले के गढ़दा गांव की पहाड़ी पर देखने को मिलता है, जहां पर करीब चार किलोमीटर की चढ़ाई करने के बाद मां अन्नपूर्णा का धाम आता है. वहीं पर मां अन्नपूर्णा चट्टानों के बीज विराजित है. उसी विशाल चट्टान पर एक पेड़ है, जो काफी बड़ा है. ऐसे में उस पेड़ को देख लोग हैरान हो जाते हैं. वहीं, उस पेड़ की प्रजाति का है इसकी जानकारी बहुत नहीं थी. अब इस पेड़ को लेकर कई दावे किए जाते हैं.

    अब से कुछ साल पहले तक इस पेड़ की पहचान नहीं हो सकी थी. लेकिन काशी से कुछ लोग आए थे. ऐसे में उन्होंने बताया कि यह पेड़ की पहचान कल्पवृक्ष के रूप में किए थे. हालांकि, मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस पेड़ की उम्र का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है. यह वृक्ष भी काफी विशाल है.

    दुर्लभ प्रजाति का है ये पेड़
    बालाघाट जिला एक वना आधारित जिला है. यहां पर कई प्रकार और कई प्रजाति की वनस्पति है. ऐसे में ज्यादातर पेड़ों या वृक्षों की पहचान हो चुकी है. लेकिन कई ऐसे पेड़ है, जिसे स्थानीय लोग भी नहीं पहचान पाते हैं. ऐसे में इसे दुर्लभ माना जाता है. यह वृक्ष इतना विशाल है कि इसका अंदाजा लगाना कठिन है कि वह कितना बड़ा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस वृक्ष का क्षेत्रफल करीब 100 वर्ग फीट से भी ज्यादा है.

    जड़ नहीं दिखती पत्तियों में स्वाद नहीं
    मां अन्नापूर्णा धाम के पुजारी बताते हैं कि इस पेड़ को देख हैरानी होती है. दरअसल, यह विशाल वृक्ष सिर्फ चट्टान तक ही दिखता है. इसकी जड़ें भूमि में मिलती हुई प्रतीत नहीं होती है. ऐसे में यह एक रहस्य है, जहां कि दुर्लभ प्रजाति के पेड़ को पोषण कैसे मिलता है. जहां एक ओर जंगल के सारे पेड़ हमेशा से गर्मी में सुख जाते हैं. लेकिन यह वृक्ष साल भर हरा भरा रहता है. ऐसे में इस बात से भी लोग हैरान हो जाते हैं.

    इच्छा पूरी करने वाला है पेड़!
    मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह वृक्ष मनोकामनाएं पूरी करने वाला है. मां अन्नपूर्णा के गढ़दा धाम में प्रकट दिवस, नवरात्रि (शारदेय और चैत्र) में भक्तों की भारी भीड़ रहती है. ऐसे में आने वाले भक्त हमेशा अपनी मन्नत पूरी करने के लिए इस पेड़ मन्नत बांधते हैं. वहीं, मन्नत पूरी होने पर वह चुनरी भी छोड़ देते हैं. ऐसे में यहां नौकरी लगने से लेकर संतान प्राप्ति का कामना लेकर कठिन चढ़ाई चढ़ते हैं और इस इच्छा पूरी करने वाले कल्प वृक्ष की अर्चना भी करते हैं.

    सेहत के लिए भी है फायदेमंद
    गढ़दा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सहदेव अड़मे बताते हैं कि इसकी पत्तियों की सेवन से गैस की समस्या से राहत मिलती है. वहीं, मंदिर के पुजारी ने दावा किया कि इस वृक्ष की पत्तियों का चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से लकवा जैसी गंभीर बीमारी से राहत मिलती है. वहीं, इसकी पत्तियों के सेवन से ब्लड पेशर, गैस और पेट की बीमारियों से राहत मिल सकती है. लेकिन, लोकल 18 इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.

    हालांकि, यह वृक्ष काफी विशाल है और दुर्लभ प्रजाति का जरूर है. ऐसे में चट्टान के ऊपर होना और जड़ का नजर न आना प्रकृति प्रेमियों में रोमांच उत्पन्न करता है.

  • न बिजली, न कार और न आधुनिक गैजेट्स… फिर भी डेटिंग स्टाइल देखकर रह जाएंगे हैरान!

    न बिजली, न कार और न आधुनिक गैजेट्स… फिर भी डेटिंग स्टाइल देखकर रह जाएंगे हैरान!

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    सिर्फ अंधेरे में हो होता है दो लोगों का मिलन (इमेज- सोशल मीडिया)

    दुनिया में कई समुदाय ऐसे हैं जो आधुनिक सुविधाओं से दूर रहना पसंद करते हैं. इनमें से एक सबसे चर्चित समुदाय है एमिश. अमेरिका और कनाडा के कुछ हिस्सों में बसे ये लोग बिजली, कार, टेलीविजन और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल नहीं करते. उनके अनुसार इन चीजों का इस्तेमाल ईश्वर को नाराज कर सकता है. वे साधारण जीवन जीते हैं, घोड़ा-गाड़ी से चलते हैं, हाथ से खेती करते हैं और पारंपरिक कपड़े पहनते हैं.

    लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक एक्स-एमिश क्रिएटर ने उनके डेटिंग स्टाइल के बारे में ऐसे खुलासे किए हैं कि लोग हैरान रह गए हैं. लोविना हर्शबर्गर जूक नाम की यह युवती खुद एमिश समुदाय में पली-बढ़ी हैं. उन्होंने समुदाय छोड़ दिया है और अब सोशल मीडिया पर एमिश रेसिपीज, कहानियां और परंपराओं को शेयर करती हैं. उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट या इंटरव्यू में एमिश डेटिंग की परंपराओं के बारे में बताया.

    बेहद आधुनिक है डेटिंग रूल


    उनके मुताबिक, एमिश समुदाय में डेटिंग का तरीका काफी अलग और कुछ मायनों में आधुनिक भी है. एमिश लोग आधुनिक तकनीक से दूर रहते हैं. घरों में बिजली नहीं होती. रात में लालटेन या मोमबत्ती की रोशनी में काम चलता है. कार की जगह घोड़ा-गाड़ी का इस्तेमाल होता है. मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया जैसी चीजें आमतौर पर वर्जित होती है. समुदाय के सख्त नियम होते हैं जिन्हें तोड़ने पर बहिष्कार तक हो सकता है. फिर भी डेटिंग के मामले में उनका तरीका अनोखा है. लोविना के अनुसार, एमिश युवक-युवतियां रात के अंधेरे में मिलते हैं. दिन में खुलेआम घूमना या डेट पर जाना आम नहीं है. रात को जब परिवार सो जाता है या काम खत्म हो जाता है तब दो लोग एकांत में बैठकर घंटों बातें करते हैं. यह बातचीत काफी लंबी होती है. वे एक-दूसरे को जानने की कोशिश करते हैं, भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हैं और रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला करते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शादी से पहले शारीरिक संबंधों से पूरा परहेज रखा जाता है. समुदाय में शुद्धता और नैतिकता को बहुत महत्व दिया जाता है. सेक्स सिर्फ विवाह के बाद ही मान्य है.

     

     

    सख्ती से मनवाए जाते हैं नियम
    अगर कोई इस नियम को तोड़ता है तो सख्त सजा या सामाजिक बहिष्कार हो सकता है. इस लिहाज से उनकी डेटिंग स्टाइल पारंपरिक भी है और कुछ मायनों में आज के समय की “नो सेक्स बिफोर मैरिज” वाली सोच से मिलती-जुलती है. सोशल मीडिया पर लोविना के खुलासों ने काफी चर्चा पैदा कर दी है. लोग कमेंट कर रहे हैं कि तकनीक से इतने दूर रहने वाले लोगों की डेटिंग इतनी व्यवस्थित और सख्त कैसे हो सकती है. कुछ यूजर्स ने लिखा कि “अंधेरे में मिलना रोमांटिक लगता है” तो कुछ ने कहा कि “बिजली-कार नहीं चलानी लेकिन डेटिंग मॉडर्न है, अजीब विरोधाभास है.” कई लोगों ने एमिश जीवनशैली के बारे में और जानने की इच्छा जताई. एमिश समुदाय की जड़ें 17वीं-18वीं शताब्दी के यूरोपीय एनाबैप्टिस्ट आंदोलन में हैं. वे सादगी, समुदाय और धार्मिक नियमों को प्राथमिकता देते हैं. आधुनिक दुनिया की भागदौड़ और तकनीक को वे आत्मा के लिए हानिकारक मानते हैं. इसलिए बिजली के तार, कार के इंजन और स्क्रीन वाली चीजों से दूर रहते हैं. फिर भी मानव स्वभाव के अनुसार युवाओं में प्रेम और साथी चुनने की इच्छा स्वाभाविक है. समुदाय ने इसके लिए अपनी व्यवस्था बना रखी है.

  • कपड़े धोएं और पाएं 90 लाख रुपये! साथ में विदेश घूमने का मौका, लेकिन नौकरी में हैं ये शर्तें..

    कपड़े धोएं और पाएं 90 लाख रुपये! साथ में विदेश घूमने का मौका, लेकिन नौकरी में हैं ये शर्तें..

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    कपड़े धोओ, विदेश घूमो और पाओ ₹90 लाख! लेकिन ये हैं शर्तें; इस वायरल 'ड्रीम जॉब' ने मचाया तहलका

    सोशल मीडिया पर आजकल लंदन की एक जॉब वैकेंसी को लेकर बड़ी चर्चा है. पहली नजर में सुनने में आता है कि कपड़े धोने की नौकरी के लिए सालाना 90 लाख रुपए मिल रहे हैं, तो हर कोई हैरान रह जाता है. ब्रिटेन की ‘द लेडी’ मैगजीन और ‘ब्यूचैम्प पार्टनर्स’ एजेंसी के जरिए आई यह वैकेंसी सुनने में जितनी आसान लगती है, असलियत में उतनी ही कड़ी है. आइए जानते हैं कि इस 90 लाख के पैकेज के पीछे आखिर माजरा क्या है.

    सिर्फ कपड़े धोना नहीं, फैब्रिक का रखना होगा हिसाब

    यह कोई आम नौकरी नहीं है. इसमें आपको दुनिया के सबसे महंगे और नाजुक डिजाइनर कपड़ों की देखभाल करनी होगी. कौन सा कपड़ा किस तरह धोना है, कैसे सुखाना है और उसे कैसे संभालकर रखना है, इसकी पूरी समझ होनी चाहिए. जरा सी गलती से लाखों रुपए के कपड़े खराब हो सकते हैं.

    लग्जरी गाड़ियों की ड्राइविंग और देखभाल

    इस जॉब में सिर्फ कपड़े धोने तक सीमित नहीं रहना है. आपको मालिक की लग्जरी कारों को भी चलाना होगा. उन्हें सही सलामत मीटिंग्स या इवेंट्स तक पहुंचाना और गाड़ियों की देखरेख करना भी इसी काम का हिस्सा है.

    पार्टियों और इवेंट्स का मैनेजमेंट

    मालिक के घर होने वाली बड़ी और हाई-प्रोफाइल पार्टियों की जिम्मेदारी भी आपको ही संभालनी होगी. मेहमानों का ध्यान रखना और घर की व्यवस्था को अच्छे से चलाना इसी रोल का हिस्सा है.

    लगातार विदेश यात्राएं

    मालिक साल में करीब 90 दिन ही लंदन में रहते हैं. बाकी पूरा साल वे दुनिया भर में घूमते रहते हैं. ऐसे में आपको भी उनके साथ हर जगह यात्रा करनी होगी. इसके लिए आपके काम करने के घंटे फिक्स नहीं होंगे, यानी आपको हर समय तैयार रहना होगा.

    इतनी बड़ी सैलरी का सच क्या है?

    यह 90 लाख रुपए का पैकेज सिर्फ कपड़े धोने के लिए नहीं है, बल्कि एक ही इंसान से कई सारे काम करवाने का है. इसमें आपको ड्राइवर, लॉन्ड्री एक्सपर्ट, केयरटेकर और पर्सनल हेल्पर, सबकी भूमिका एक साथ निभानी होगी. यह भी पढ़ें: 40 की उम्र में गई नौकरी, तो शख्स बोला- भैया, Layoff के तो बड़े फायदे हैं! वायरल हुआ वीडियो

    सबसे बड़ी शर्त यह है कि मालिक की पर्सनल लाइफ और प्राइवेसी से जुड़ी बातें पूरी तरह गोपनीय रखनी होंगी, यानी किसी को कुछ बताना नहीं है. यह भी पढ़ें: OMG! शख्स की चमकी किस्मतरातों-रात बदल गई जिंदगी, एक टिकट से मिला 13,357 करोड़ का इनाम

  • कुदरत का अनोखा करिश्मा! जमीन के अंदर दबकर भी सालों जिंदा रहती है ये मछली, जानिए इसका रहस्य?

    कुदरत का अनोखा करिश्मा! जमीन के अंदर दबकर भी सालों जिंदा रहती है ये मछली, जानिए इसका रहस्य?

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    दुनियाभर में कई ऐसे विचित्र जीव-जंतु हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. इनमें से कुछ जीव अपनी ही प्रजाति के दूसरे जीवों से बिल्कुल अलग होते हैं. अब मछली को ही ले लीजिए. बचपन से ही हम पढ़ते आ रहे हैं कि ‘मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है’, यानी बिना पानी के मछली का जिंदा रहना नामुमकीन है. वो तड़प-तड़प कर मर जाएगी. लेकिन एक मछली ऐसी भी है, जो पानी के बिना महीनों ही नहीं, बल्कि कई सालों तक जमीन पर जिंदा रह सकती है. इस अनोखी और रहस्यमयी मछली का नाम लंगफिश है, जिसे कई जगहों पर सालामैंडरफिश के नाम से भी पहचाना जाता है. यह मीठे पानी में पाई जाने वाली एक विशेष प्रकार की मछली है, जो जमीन पर रहने के अपने अद्भुत गुण के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

    लंगफिश, इसके नाम से ही साफ पता चलता है, इस मछली के पास एक बहुत ही विकसित श्वसन तंत्र होता है. इंसानों और जमीनी जानवरों की तरह यह मछली भी सीधे हवा से ऑक्सीजन लेने में सक्षम होती है. लंगफिश का शरीर काफी लंबा और पतला होता है, जो देखने में बिल्कुल बाम मछली की तरह दिखाई देता है. इसके पास धागे जैसे पतले पंख होते हैं, जिनका उपयोग यह पानी में तैरने और सतह पर रेंगने के लिए करती है. यह मछली आमतौर पर उथले पानी के सोर्स जैसे दलदल, पोखर और झीलों में रहना पसंद करती है. जब तक पानी मौजूद रहता है, तब तक यह बाकी सामान्य मछलियों की तरह ही व्यवहार करती है और छोटे जीवों तथा केकड़ों को अपना भोजन बनाती है.

    सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि वयस्क होने पर इनमें से कुछ प्रजातियों के गलफड़े काम करना लगभग बंद कर देते हैं. ऐसे में पानी में रहते हुए भी इन्हें सांस लेने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है. अगर इस मछली को लंबे समय तक पानी के अंदर ही दबाकर रखा जाए, तो सांस न ले पाने के कारण यह पानी के भीतर ही डूबकर मर सकती है. यह बात इसे दुनिया की बाकी सभी मछलियों से एकदम अलग और अनोखा बनाती है. जब भीषण गर्मी और सूखे का मौसम आता है और नदियां-तालाब सूखने लगते हैं, तब लंगफिश अपनी जान बचाने का अनोखा तरीका अपनाती है. यह अपने मुंह में मिट्टी भरकर और उसे गलफड़ों से बाहर निकालकर कीचड़ के अंदर एक गहरा गड्ढा खोद लेती है.

    उस गड्ढे की गहराई में पहुंचने के बाद यह अपनी त्वचा से एक विशेष तरल पदार्थ (म्यूकस) छोड़ती है, जो सूखकर एक सुरक्षात्मक खोल बन जाता है. इस खोल के अंदर मछली का केवल मुंह सांस लेने के लिए खुला रहता है. सूखे के इस लंबे दौर में मछली अपनी मेटाबॉलिज्म को बहुत कम कर देती है और अपनी पूंछ के मांसपेशियों के ऊतकों को खाकर जीवित रहती है. जब दोबारा बारिश होती है और मिट्टी नरम पड़ती है, तो यह बाहर निकल आती है. यह मछली सूखे कीचड़ में 4 साल तक बिना पानी के जिंदा रह सकती है. यह मुख्य रूप से अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है, जहां स्थानीय लोग सूखे के दौरान जमीन खोदकर इसे खाने के लिए निकालते हैं.

  • चॉकलेट के लिए मां से रूठा 3 साल का बच्चा, सीधे पुलिस के पास पहुंचकर बोला- ‘मम्मी की शिकायत करनी है!’

    चॉकलेट के लिए मां से रूठा 3 साल का बच्चा, सीधे पुलिस के पास पहुंचकर बोला- ‘मम्मी की शिकायत करनी है!’

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    Viral Video : बच्चों की नाराजगी भी कितनी मासूम होती है, इसका अंदाजा मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से वायरल हुए एक पुराने वीडियो को देखकर लगाया जा सकता है. मामला साल 2022 का बताया जा रहा है, लेकिन बच्चे की मासूम शिकायत का वीडियो एक बार फिर सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है.

    वीडियो में करीब 3 साल का एक बच्चा पुलिस चौकी में पुलिस अधिकारी के सामने बैठा नजर आता है. देखने में यह बिल्कुल सामान्य शिकायत जैसा लगता है, लेकिन जब बच्चे से उसकी परेशानी पूछी जाती है तो उसकी बात सुनकर वहां मौजूद लोग मुस्कुराने लगते हैं.

    चॉकलेट को लेकर नाराज था बच्चा

    बताया जाता है कि बच्चा चॉकलेट या कैंडी खाने की जिद कर रहा था. इसी दौरान उसकी मां उसे नहलाने और काजल या टीका लगाने की कोशिश कर रही थीं. बच्चे की जिद और शरारत से परेशान होकर मां ने उसे डांट दिया और हल्की फटकार भी लगा दी.

    बस फिर क्या था, नन्हा बच्चा अपनी मां से नाराज हो गया. उसने अपने पिता से पुलिस के पास चलने की जिद पकड़ ली. पिता भी बच्चे की बात मानते हुए उसे लेकर डेढ़तलाई पुलिस चौकी पहुंच गए.

    चौकी में मौजूद सब-इंस्पेक्टर प्रियंका नायक ने जब बच्चे से उसकी परेशानी पूछी, तो उसने अपनी मासूम भाषा में मां के खिलाफ शिकायत शुरू कर दी. बच्चे का आरोप था कि उसकी मां उसकी चॉकलेट ले लेती हैं और उसे मारती भी हैं. मासूम ने यहां तक कह दिया कि उसकी मां को जेल में डाल दिया जाए.

    पुलिस अधिकारी ने भी निभाया ‘इंसाफ’

    बच्चे की शिकायत सुनकर पुलिसकर्मी उसकी मासूमियत पर मुस्कुराने लगे. हालांकि, अधिकारी ने उसकी बात को नजरअंदाज नहीं किया. उन्होंने बच्चे को सहज महसूस कराने के लिए कागज और पेन लिया और उसकी शिकायत लिखने का नाटक किया.

    जब बच्चे से शिकायत पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, तो उसने भी बड़े गंभीर अंदाज में पेन उठाया और कागज पर कुछ लकीरें खींच दीं. उसके इस अंदाज ने पूरे माहौल को और मजेदार बना दिया.

    वीडियो ने फिर खींचा लोगों का ध्यान

    बच्चे की ‘पुलिस शिकायत’ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को खूब पसंद आ रहा है. यूजर्स उसकी मासूमियत, नाराजगी और पुलिस से न्याय मांगने के अंदाज पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कई लोगों के लिए यह वीडियो बचपन की उन छोटी-छोटी बातों की याद दिला रहा है, जब चॉकलेट, टॉफी या खिलौना न मिलने पर बच्चे दुनिया की सबसे बड़ी समस्या समझ लेते हैं. वीडियो 2022 की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है और इसकी मूल परिस्थितियों की न्यूज18 स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है.

  • पुरुषों की यौन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है सहजन! जानिए इसके सेवन के फायदे..

    पुरुषों की यौन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है सहजन! जानिए इसके सेवन के फायदे..

    सहजन यानी मोरिंगा की फली भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। इसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसे खास तौर पर पुरुषों की यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवा मानना सही नहीं है, लेकिन इसके पोषक गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जरूर हैं।

    विटामिन और मिनरल्स से भरपूर

    सहजन की फली में विटामिन C, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज और प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    फाइबर का अच्छा स्रोत

    सहजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। नियमित और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

    पुरुषों की सेहत के लिए

    सहजन में मौजूद पोषक तत्व शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करना भी पुरुषों की यौन और प्रजनन से जुड़ी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    क्या सहजन शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है?

    सहजन को सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने या यौनशक्ति बढ़ाने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध शोध सीमित हैं और इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए यौन कमजोरी या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर केवल सहजन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    महिलाओं के लिए भी उपयोगी

    सहजन में मौजूद फाइबर, विटामिन और खनिज महिलाओं के लिए भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, गर्भाशय की किसी बीमारी या दर्द का इलाज सहजन से होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।

    निष्कर्ष: सहजन को पौष्टिक सब्जी के रूप में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। किसी भी लगातार यौन या प्रजनन संबंधी समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    सहजन यानी मोरिंगा की फली भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। इसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसे खास तौर पर पुरुषों की यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवा मानना सही नहीं है, लेकिन इसके पोषक गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जरूर हैं।

    विटामिन और मिनरल्स से भरपूर

    सहजन की फली में विटामिन C, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज और प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    फाइबर का अच्छा स्रोत

    सहजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। नियमित और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

    पुरुषों की सेहत के लिए

    सहजन में मौजूद पोषक तत्व शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करना भी पुरुषों की यौन और प्रजनन से जुड़ी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    क्या सहजन शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है?

    सहजन को सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने या यौनशक्ति बढ़ाने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध शोध सीमित हैं और इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए यौन कमजोरी या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर केवल सहजन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    महिलाओं के लिए भी उपयोगी

    सहजन में मौजूद फाइबर, विटामिन और खनिज महिलाओं के लिए भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, गर्भाशय की किसी बीमारी या दर्द का इलाज सहजन से होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।

    निष्कर्ष: सहजन को पौष्टिक सब्जी के रूप में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। किसी भी लगातार यौन या प्रजनन संबंधी समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

  • परिवार से बगावत कर दो लड़कियों ने रचाई शादी, बिहार में मचा बवाल! कोर्ट ने दिया ये आदेश..

    परिवार से बगावत कर दो लड़कियों ने रचाई शादी, बिहार में मचा बवाल! कोर्ट ने दिया ये आदेश..

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    बिहार की राजधानी पटना से प्यार, बगावत और सामाजिक मान्यताओं को तोड़ने वाली एक अनोखी खबर सामने आई है. यहाँ अदालतगंज इलाके की रहने वाली दो स्कूली छात्राओं ने आपस में शादी कर ली. दोनों के बीच प्यार इस कदर गहरा था कि उन्होंने न सिर्फ सामाजिक और पारिवारिक बंदिशों को दरकिनार किया, बल्कि धर्म के बंधनों को भी तोड़ दिया.

    अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाली ये दोनों लड़कियां पिछले तीन सालों से एक-दूसरे से प्यार करती थीं और अंततः घर से भागकर एक मंदिर में शादी के बंधन में बंध गईं. पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों लड़कियां पड़ोसी हैं और आपस में गहरी सहेलियां थीं. इनमें से एक लड़की 10वीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि दूसरी 12वीं की छात्रा है. 10वीं की छात्रा के पिता सीआईडी (CID) में कार्यरत बताए जा रहे हैं.

    छात्राओं ने अपने रिश्ते को हमेशा के लिए शादी का रूप देने का फैसला किया और 7 अगस्त को बिना किसी को बताए घर से निकल गईं. उनके पास उस वक्त सिर्फ 3,500 रुपये थे. पटना से निकलकर दोनों सीधे खगड़िया पहुंचीं, जहाँ उन्होंने एक स्थानीय मंदिर में शादी की और उसके बाद एक होटल में ठहरीं.

    परिजनों ने दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस ने खगड़िया से किया बरामद

    दोनों लड़कियों के एक साथ अचानक गायब होने से परिजनों में हड़कंप मच गया. 7 अगस्त को परिजनों ने पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली थाने की महिला पुलिस पदाधिकारी पूनम कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों को खगड़िया स्टेशन के पास से सकुशल बरामद कर लिया और पटना ले आई.

    “साथ रहेंगे, अलग नहीं होंगे…” थाने में अड़ गईं दोनों

    पटना महिला थाने और कोतवाली थाने लाने के बाद भी दोनों लड़कियों का रुख नहीं बदला. दोनों ने पुलिस और परिजनों के सामने साफ कह दिया कि वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करती हैं और अब कभी अलग नहीं होंगी. दोनों में से कोई भी अपने-अपने परिजनों के साथ घर जाने को तैयार नहीं हुई.

    नाबालिग रिमांड होम भेजी गई, बालिग को मिली आजादी

    कोतवाली थाना प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि जांच में एक लड़की के बालिग (18 वर्ष या उससे अधिक) और दूसरी के नाबालिग होने की पुष्टि हुई है. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया. अदालत के आदेश पर नाबालिग लड़की को सुरक्षा और देखरेख के लिए रिमांड होम (बाल गृह) भेज दिया गया है. कोर्ट ने बालिग लड़की को अपनी मर्जी से कहीं भी रहने और जाने की पूरी आजादी दी है.