Category: Gazab

  • दिन में था 10 करोड़ की लागत से बना पुल… रात में हो गया गायब… लोग हैरान..

    दिन में था 10 करोड़ की लागत से बना पुल… रात में हो गया गायब… लोग हैरान..

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    छत्तीसगढ़ के सूरजुपर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम धोंधा स्थित नदी पर बना पुल रातभर हुई बारिश में बह गया. पुल का निर्माण 10 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था. निर्माण के बाद से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे. पुल पर जहां-तहां दरारें दिखाई दे रही थीं. इसी बीच गुरुवार को रातभर बारिश हुई. सुबह जब लोगों की आंखें खुलीं और नदी की ओर गए तो पुल बह चुका था. यह नजारा देखते ही लोग हैरान रह गए. जिस पुल से होकर दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही होती थी, वह देखते ही देखते पानी की तेज धारा में गायब हो चुका था. कहीं पिलर उखड़े पड़े थे, कहीं स्लैब पानी में समा गई थी और पुल का लंबा हिस्सा नदी की धार में बह चुका था. अब लोग निर्माण एजेंसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं.

    निर्माण में अनियमितता का आरोप  
    ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण में कथित तौर पर भारी अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण पुल पहले से ही कमजोर हो चुका था. वाहनों की आवाजाही के साथ पुल के अलग-अलग हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी थीं और समय के साथ इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई. गुरुवार देर रात हुई बारिश से पानी का दबाव बढ़ते ही पुल भरभराकर गिर पड़ा और देखते ही देखते तेज धार में बह गया.

    आवागमन में परेशानी
    ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण की मजबूती सिर्फ कागजों पर ही रही. पुल ध्वस्त होने से दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इससे नदी के दोनों ओर रहने वाले लोग प्रभावित हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले ही जिम्मेदार विभाग ने इसकी स्थिति का गंभीरता से परीक्षण किया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती.

    स्थानीय लोगों ने लगाए आरोप
    पुल टूटने की घटना ने प्रतापपुर क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में सड़क, पुल, रपटा और अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के बजाय कागजी प्रक्रिया को अधिक महत्व दिया जाता है. उनका कहना है कि कहीं सड़क खराब हो रही है तो कहीं पुल और रपटा पहली ही बारिश में जवाब दे रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है.

    कार्रवाई की मांग
    ग्रामीणों का कहना है कि करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से पुल निर्माण कराए जाने की बात कही जा रही है. इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी पुल इतनी जल्दी कैसे जर्जर हो गया, यह बड़ा सवाल है. उन्होंने निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, विभागीय अधिकारियों और गुणवत्ता परीक्षण की भूमिका की जांच की मांग शुरू कर दी है. उनका कहना है कि जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

  • अटल जी ने लिखी कविता, जगजीत सिंह ने गाया और कंपोज किया; ऐसे बनी ‘क्या खोया क्या पाया’ की यादगार धुन..

    अटल जी ने लिखी कविता, जगजीत सिंह ने गाया और कंपोज किया; ऐसे बनी ‘क्या खोया क्या पाया’ की यादगार धुन..

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    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी कविताओं के लिए भी जाने जाते थे. उनकी लिखी पंक्तियों में जिंदगी, अकेलापन, संघर्ष और इंसानी भावनाओं की गहरी झलक दिखाई देती है. ऐसी ही एक चर्चित रचना ‘क्या खोया क्या पाया’ है, जिसे गजल सम्राट जगजीत सिंह ने अपनी आवाज और संगीत से ऐसा रूप दिया कि कविता का मूल भाव पूरी तरह बरकरार रहा.

    ‘संवेदना’ का हिस्सा था ‘क्या खोया क्या पाया’
    ‘क्या खोया क्या पाया’ को 2002 में आए चर्चित सहयोगी एल्बम ‘संवेदना’ (Samvedna) में शामिल किया गया था. इस पूरे प्रोजेक्ट में देश की राजनीति, साहित्य, संगीत और सिनेमा से जुड़े कई बड़े नाम एक साथ आए थे. अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें कविताएं लिखीं और उन्हें अपनी आवाज में पेश भी किया. वहीं जगजीत सिंह ने इन कविताओं को संगीत दिया और अपनी आवाज में गाया.

    एल्बम में अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान भी जुड़े
    ‘संवेदना’ सिर्फ अटल जी और जगजीत सिंह की वजह से खास नहीं था. एल्बम के लिए प्रस्तावना जावेद अख्तर ने लिखी थी, जिसे अमिताभ बच्चन ने अपनी दमदार आवाज में पेश किया था. इसके अलावा इस प्रोजेक्ट के चर्चित म्यूजिक वीडियो में सुपरस्टार शाहरुख खान भी नजर आए थे, जिसका निर्देशन खुद यश चोपड़ा ने किया था.

    अटल जी की कविताओं के पीछे था गहरा दर्द
    जगजीत सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी बैठकों के दौरान कविता और उसके पीछे की भावनाओं को लेकर बातचीत होती थी. अटल जी ने उन्हें समझाया था कि उनके जीवन में आया गहरा अकेलापन और देश के मुश्किल दौर ने उनके भीतर के कवि को और मजबूत किया. उनकी कई संवेदनशील रचनाओं पर इमरजेंसी के दौर में झेला गया कारावास और उस समय का व्यक्तिगत व सामूहिक दर्द भी असर डालता था.

    जगजीत सिंह ने करीब तीन साल तक तैयार किया संगीत
    जगजीत सिंह ने अटल जी की कविताओं को संगीत देने में जल्दबाजी नहीं की. उन्होंने करीब तीन साल तक ‘संवेदना’ की अवधारणा और इन कविताओं की धुनों पर काम किया. उनकी कोशिश थी कि संगीत कविता के शब्दों पर हावी न हो. इसलिए उन्होंने धुन को बेहद सादगी के साथ रखा, ताकि अटल जी की लिखी पंक्तियों की संवेदनशीलता, दार्शनिक गहराई और उनमें छिपा अकेलापन उसी तरह सामने आए.

    अटल जी की एक शर्त ने बदल दिया था पूरा नजरिया
    जगजीत सिंह अटल जी की रचनाओं को सामान्य राजनीतिक कविताओं की तरह पेश नहीं करना चाहते थे. उनका मकसद इन शब्दों को इंसान की जिंदगी, अकेलेपन, मृत्यु और मुश्किल समय में बने रहने की ताकत से जोड़ना था. अटल जी की शर्त भी यही थी कि कविता के मूल भाव और शब्दों के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. जगजीत सिंह ने इसी बात का ध्यान रखते हुए संगीत को इतना सधा हुआ रखा कि कविता की अपनी पहचान बनी रहे. यही वजह है कि ‘क्या खोया क्या पाया’ सिर्फ एक कविता का संगीतबद्ध रूप नहीं लगा, बल्कि अटल जी के शब्दों और जगजीत सिंह के संगीत का ऐसा मेल बना, जिसमें दोनों की अपनी-अपनी पहचान साफ सुनाई देती है.

  • मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    मोबाइल चोरी हुआ तो घबराएं नहीं! इन सेटिंग्स से बैंक से जुड़ा आपका पैसा रहेगा सुरक्षित..

    Phone हो गया चोरी... डर रहा सता कि Banking App से निकाल न ले कोई पैसा... तो इन सेटिंग्स को करें सेट, Bank से कनेक्शन रहेगा हमेशा जुड़ा

    मौजूदा समय में मोबाइल फोन सिर्फ बात करने के इस्तेमाल नहीं आता. बल्कि इसमें बैंकिंग ऐप, UPI ऐप, डिजिटल वॉलेट और इंवेस्टमेंट से जुड़ी कई जरूरी जानकारी रहती है. ऐसे में सोचें कि अगर फोन खो जाए, तो आपका कितना जरूरी डेटा किसी और के हाथ लग सकता है. होता भी ऐसा ही है जब लोगों का फोन खोता है तो वह सोचते हैं कि कहीं कोई व्यक्ति बैंक खाते का गलत इस्तेमाल न कर ले, जिससे बैंक खाता खाली हो जाए. लेकिन केवल फोन हाथ लग जाने से बैंक खाते से पैसे निकालना आसान नहीं होता, क्योंकि बैंकिंग ऐप में कई सेफ्टी लेयर्स होती हैं.

    क्या कोई भी बैंक खाते से पैसे निकाल सकता है?

    आमतौर पर बैंकिंग ऐप से पैसे भेजने के लिए स्क्रीन लॉक, ऐप पासवर्ड, MPIN, बायोमेट्रिक या UPI PIN की जरूरत होती है. इसलिए सिर्फ फोन मिलने से कोई व्यक्ति सीधे पैसे ट्रांसफर नहीं कर सकता. लेकिन अगर फोन में स्क्रीन लॉक नहीं है, और बैंकिंग ऐप पहले से लॉगिन है या PIN और पासवर्ड फोन में सेव हैं, तो खतरा बढ़ सकता है.

    फोन खोते ही सबसे पहले क्या करें?

    अगर आपका फोन चोरी हो गया है, तो इंतजार न करें. सबसे पहले फोन को Find My Device जैसी सुविधा से खोजने या दूर से लॉक करने की कोशिश करें. अगर फोन वापस मिलने की उम्मीद नहीं है, तो अगर पॉसिबल हो तो उसे रिमोट तरीके से डेटा डिलीट भी कर सकते हैं.

    इसके बाद अपनी मोबाइल कंपनी से संपर्क करके SIM बंद करवाएं. ऐसा करना जरूरी है, क्योंकि बैंक के OTP और दूसरे जरूरी मैसेज आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आते हैं. इसके साथ ही अपने बैंक को भी फोन खोने की जानकारी दें, ताकि जरूरत पड़ने पर बैंक जरूरी कार्रवाई कर सके.

    बैंक खाते पर रखें नजर

    फोन सेफ रखने के बाद भी कुछ दिनों तक अपने बैंक खाते पर नजर बनाएं रखें. बैंक से आने वाले SMS, अकाउंट स्टेटमेंट और UPI ट्रांजैक्शन देखें. अगर कोई ऐसा लेनदेन दिखता है जो आपने नहीं किया है, तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें. जल्दी शिकायत करने से बैंक मामले की जांच शुरू कर सकता है और आगे की जरूरी प्रक्रिया कर सकता है.

    किन बातों का रखें हमेशा ध्यान

    फोन में हमेशा मजबूत स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सेफ्टी लोक रखें. बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या UPI PIN को फोन की नोट्स या मैसेज में सेव न करें. सभी बैंक खातों के ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें. नया फोन लेने पर पुराने फोन से बैंकिंग ऐप को लॉगआउट करके ही उसे रीसेट करें.

  • पहले पति से लव मैरिज, 5 बच्चों के बाद दूसरे से हुआ प्यार… पति ने मंदिर में कराई दोनों की शादी..

    पहले पति से लव मैरिज, 5 बच्चों के बाद दूसरे से हुआ प्यार… पति ने मंदिर में कराई दोनों की शादी..

    उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में एक अनोखी शादी की चर्चा हो रही है. एक पति ने अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करा दी. पति ने पत्नी के प्रेम प्रसंग और लगातार पारिवारिक विवाद के बाद मंदिर में शादी कराई. दोनों की शादी 21 साल पहले हुई थी. इस दंपति के 5 बच्चे हैं. लेकिन अब पति ने पत्नी को प्रेमी के पास भेज दिया. इस शादी की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है.

    21 साल पहले की थी लव मैरिज- धनघटा विधानसभा के डेवरी गांव निवासी बुद्धिराम निषाद की शादी करीब 21 वर्ष पहले फूलमती से प्रेम विवाह के रूप में हुई थी. दंपति के पांच बच्चे हैं. पिछले कुछ समय से फूलमती का गांव के ही अवधेश नाम के व्यक्ति से प्रेम संबंध था. करीब दो महीने पहले वह घर छोड़कर अवधेश के साथ चली गई थी.

    पति ने अब प्रेमी से मंदिर में कराई शादी- परिजनों और ग्रामीणों के समझाने के बाद जब फूलमती वापस लौटी, तब भी पारिवारिक विवाद समाप्त नहीं हुआ. इसके बाद बुद्धिराम ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने का निर्णय लिया. ग्रामीणों और परिजनों की मौजूदगी में अशरफपुर स्थित शिव मंदिर में फूलमती और अवधेश का विवाह कराया गया. विवाह के बाद बुद्धिराम ने दोनों को शुभकामनाएं देते हुए विदा कर दिया.

    पत्नी की खुशी के लिए फैसला किया- पति पति का कहना है कि करीब 21 साल पहले हमने भी प्रेम विवाह किया था, लेकिन अब पत्नी का मन मेरे साथ नहीं था. जब वह किसी और के साथ अपना जीवन बिताना चाहती थी, तो मैंने उसकी खुशी को स्वीकार करते हुए यह फैसला लिया. मैं शांति से अपना जीवन जीना चाहता हूं.

    पति ने पत्नी की शादी प्रेमी से कराई तो इसकी चर्चा पूरे इलाके में होने लगी. इस दंपति के 5 बच्चे हैं. अब सवाल उठता है कि ये बच्चे किसके साथ रहेंगे? अपने पिता के साथ रहेंगे या अपनी मां के साथ रहेंगे.

  • अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी, तभी महिला ने खोल दी आंखें! 17 घंटे बाद जिंदा होने की कहानी चौंकाएगी..

    कफन आ गया था, चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 17 घंटे बाद जिंदा हो गई महिला, जानें पूरा कहानी

    उत्तर प्रदेश के आगरा में 65 साल की शीला देवी की जिंदगी और मौत से जुड़ी कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया था. जिस बुजुर्ग महिला को मृत मानकर परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर चुका था, परिवार के मुताबिक करीब 17 घंटे बाद उनके शरीर में हलचल महसूस हुई और उन्हें जीवित पाया गया. लेकिन जिंदगी और मौत से करीब 9 दिन तक जंग लड़ने के बाद रविवार को शीला देवी की मौत हो गई.

    चल रही थी अंतिम संस्कार की तैयारी- शीला देवी आगरा के ट्रांस यमुना कॉलोनी के श्रीनगर क्षेत्र में अपने बेटे सुनील माहौर के साथ रहती थीं. वह सांस की बीमारी से पीड़ित थीं और उनका इलाज बरेली के एक निजी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था. 30 जुलाई को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके बाद परिवार शीला देवी के शव को आगरा ले आया और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं.

    कफन तक आ गया था, फिर हुआ चमत्कार- परिवार के मुताबिक, अंतिम संस्कार के लिए कपड़े और फूल-मालाएं तक मंगवा ली गई थीं. इसी दौरान शीला देवी के दामाद ने उनके पैर छुए. परिवार का दावा है कि पैर छूते ही उन्हें शरीर में हलचल महसूस हुई. इसके बाद शीला देवी ने कथित तौर पर बातचीत भी की और पूछा कि सभी लोग क्यों रो रहे हैं और उन्हें कहां ले जा रहे हैं.

    17 घंटे बाद जिंदा हो गई महिला- बुजुर्ग महिला को जीवित पाकर परिवार में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद शीला देवी का इलाज आगरा के घटिया आजम खां स्थित पार्क हॉस्पिटल में चल रहा था. परिवार को उम्मीद थी कि वह जिंदगी की जंग जीतकर वापस घर लौटेंगी, लेकिन रविवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

    शीला देवी के दूसरे बेटे संजीव बदायूं के एक निजी अस्पताल में कार्यरत बताए जाते हैं. अब मां की मौत के बाद संजीव ने पार्क हॉस्पिटल के इलाज और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

    5 लाख का बिल, इलाज पर सवाल- संजीव का आरोप है कि अस्पताल में मरीजों को अस्पताल की खुद की कंपनी और लोकल ब्रांड की दवाइयां दी जाती हैं. उनका आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ मरीजों की ठीक से देखभाल नहीं करता था. परिवार का यह भी दावा है कि इलाज के दौरान अस्पताल की ओर से करीब पांच लाख रुपये का बिल थमाया गया.

    बेटे ने की कार्रवाई की मांग- मां की मौत के बाद अब बेटे ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है. संजीव का कहना है कि वह पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से करेंगे और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग करेंगे.

    हालांकि, अस्पताल पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पार्क हॉस्पिटल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है. ऐसे में अब जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि शीला देवी के इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं.

    9 दिन तक मौत से लड़की रही महिला- जिस परिवार ने नौ दिन पहले शीला देवी को मृत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी थी, उसी परिवार को उनके जीवित होने से नई उम्मीद मिली थी. लेकिन नौ दिन बाद वही उम्मीद फिर मातम में बदल गई. अब शीला देवी की मौत के बाद बेटे के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और इलाज के खर्च को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

  • 16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    5 साल से तालाब में रह रहा 16 साल का इकबाल, पानी से बाहर आते ही शरीर जलने लगता है; खाना-पीना और सोना सब पानी में

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    शरीर में होती है जलन

    शरीर में होती है जलन

    मुर्शिदाबाद के बेलडांगा का रहने वाला 16 वर्षीय इकबाल शेख इन दिनों अपनी अनोखी जीवनशैली के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है. एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार चार से पांच दिन, कभी-कभी सात दिनों तक भी वह पानी में ही रहकर समय बिताता है. इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि उसके लिए “जल ही जीवन” नहीं, बल्कि “जल में ही जीवन” है.

    तालाब में 5 साल से रह रहा इकबाल स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले लगभग पांच वर्षों से इकबाल घर छोड़कर बेलडांगा शहर के विभिन्न तालाबों में दिन-रात पानी में तैरते हुए रहता है. यह न तो किसी शौक का परिणाम है और न ही किसी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश.

    पानी से निकलने पर शरीर में होती है जलन इकबाल का कहना है कि उसके शरीर में लगातार जलन होती है. उसका दावा है कि उस पर जिन्न, परी या किसी अदृश्य शक्ति का साया है. जैसे ही वह पानी से बाहर निकलता है, शरीर में तेज जलन शुरू हो जाती है, जबकि पानी में उतरते ही उसे राहत मिलती है.

    इलाज में नहीं मिली मदद लगातार कई दिनों तक पानी में रहने के कारण उसके हाथ-पैर और पूरे शरीर की त्वचा सफेद पड़ गई है. लंबे समय तक पानी में रहने से वह सर्दी-खांसी से भी पीड़ित हो गया है. इकबाल का आरोप है कि इलाज के लिए वह स्थानीय ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गया था, लेकिन उसे उचित सहायता नहीं मिली. आर्थिक तंगी के कारण उसका परिवार निजी अस्पताल में इलाज कराने में भी असमर्थ है.

    हालांकि, स्थानीय लोग अब उसके इलाज के लिए आगे आ रहे हैं. रोज़ बड़ी संख्या में स्कूली छात्र और आम लोग तालाब के किनारे उसे देखने के लिए जुटते हैं. कई लोग उसे चिउड़ा, बिस्कुट और अन्य खाद्य सामग्री भी देते हैं. लेकिन कोई भी उसे घर में रोक नहीं पाता.

    चर्चा का विषय बनी इकबाल की कहानी इकबाल की यह असामान्य स्थिति देखकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. उनका सवाल है कि आखिर इस तरह वह कब तक जीवित रह पाएगा. वहीं, 16 वर्षीय इकबाल की यह कहानी अब पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गई है.

  • लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    लोगों के राज जानना बना कमाई का जरिया, महिला ने चुगली से खड़े कर लिए दो-दो मकान..

    चुगली कर महिला ने खरीद लिए दो-दो घर, बस पैसे लेकर लीक कर देती है मोहल्ले का सीक्रेट, लोग मुंह बंद करने के लिए देते हैं पैसे

    मोहल्ले में कोई खबर हो और आपको सबसे पहले पता चल जाए, तो अक्सर लोग आपको चुगलखोर कह देते हैं लेकिन कोलंबिया की 67 साल की मिरियम ने इसी आदत को कमाई का जरिया बना लिया. वो पड़ोस के लोगों की बातें सुनती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें अच्छी कीमत पर बेचती हैं. मिरियम का दावा है कि इस अनोखे काम से उन्होंने दो घर तक खरीद लिए हैं.

    घर के बाहर बैठकर सुनती हैं मोहल्ले की खबरें मिरियम कोलंबिया की रहने वाली हैं और खुद को प्रोफेशनल चिसमोसा यानी गॉसिपर बताती हैं. उनका कहना है कि उन्हें बचपन से ही चुगली और लोगों की बातें सुनने का शौक है. इसी शौक को उन्होंने कारोबार में बदल दिया. मिरियम अक्सर अपने घर के बाहर बैठती हैं. यहां आने-जाने वाले लोगों की बातचीत पर कान लगाए रहती हैं. वह कहती हैं कि मोहल्ले की गॉसिपर को हर छोटी-बड़ी खबर पता होती है.

    हर खबर की कीमत 5 से 10 हजार रुपए तक मिरियम के मुताबिक साधारण और कम सनसनीखेज खबरों के लिए वह 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो तक लेती हैं. हालांकि, अगर खबर ज्यादा बड़ी हो तो उसकी कीमत भी बढ़ जाती है. वह हर जगह अपने साथ एक नोटबुक रखती हैं. इसमें वह सुनी हुई बातों को लिख लेती हैं, ताकि बाद में कहानी बताते समय कोई गलती न हो. उनका कहना है कि वह बिना सबूत के किसी के बारे में कुछ नहीं कहतीं.

    सबूत के लिए तस्वीरें और पूरा रिकॉर्ड मिरियम ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने घर में एक बोर्ड भी दिखाया. इसमें कई तस्वीरें और कंटेंट था. उनका दावा है कि ये उनके पास मौजूद सबूत हैं. इनमें कुछ तस्वीरें पड़ोसियों के अफेयर से जुड़ी हैं. कई लोग अपने राज सामने आने के डर से उन्हें पैसे देते हैं ताकि वह चुप रहें. उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किस्सा भी बताया, जिससे पत्नी की गैरमौजूदगी में अफेयर की बात छिपाने के बदले उन्होंने 7 लाख कोलंबियन पेसो लिए थे.

    गॉसिप से जमा पैसों को रखती हैं गुल्लक में मिरियम ने अपनी एक बड़ी गुल्लक भी दिखाई, जिसमें सिक्कों और नोटों की भरमार थी. उनका दावा है कि यह एक सामान्य हफ्ते की कमाई है. वह कहती हैं कि इसी काम से जमा किए पैसों की मदद से उन्होंने दो घर खरीदे हैं. अब पड़ोस की दूसरी महिलाएं भी उनकी नकल करने लगी हैं. लेकिन मिरियम का कहना है कि असली गॉसिप क्वीन बनना इतना आसान नहीं है.

    दोस्तों के साथ बांटती हैं ताजा गॉसिप मिरियम सिर्फ अपने घर के बाहर बैठकर ही खबरें नहीं जुटातीं. वह अपने दूसरे घर में दोस्तों के साथ गेम खेलते हुए भी मोहल्ले की नई-नई खबरों का आदान-प्रदान करती हैं.

    हर मोहल्ले में एक चुगलखोर जरूर होता है मिरियम अपने काम को सिर्फ चुगली नहीं मानतीं. उनका कहना है कि वह किसी के बारे में बिना सबूत कुछ नहीं बोलतीं. इसी वजह से इलाके में उनकी पहचान क्वीन ऑफ गॉसिप के रूप में हो गई है. उनका मानना है कि जब तक लोग रहेंगे, तब तक खबरें और गॉसिप भी रहेंगी. वह मजाकिया अंदाज में कहती हैं, हर अच्छे मोहल्ले में एक चुगलखोर होता है और अगर आपको कोई चुगलखोर नहीं पता, तो शायद वह चुगलखोर आप ही हैं.

  • भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    भूत-प्रेत का खौफ या रहस्यमयी सच्चाई? दिल्ली की इन जगहों पर रात होते ही बदल जाता है माहौल

    दिल्ली की इन जगहों पर जाने से पहले 10 बार सोचें, अंधेरा होते ही हो जाता है भूतों का बसेरा

    दिल्ली सिर्फ लाल किले, कुतुब मीनार और खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही मशहूर नहीं है. इस शहर की कुछ गलियां और पुरानी इमारतें ऐसी भी हैं, जिनसे डरावनी और रहस्यमय कहानियां जुड़ी हैं. कहीं रात के सन्नाटे में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं, तो कहीं परछाइयां दिखाई देने की बातें कही जाती हैं. हालांकि, इन कहानियों में कितना सच है और कितना लोगों का डर येतो कोई नहीं जानता. चलिए जानते हैं दिल्ली की इन भूतियां जगहों के बारे में.

    जमाली-कमाली मस्जिद महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में मौजूद जमाली-कमाली मस्जिद और मकबरा ऐतिहासिक होने के साथ अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी मशहूर है. मान्यता है कि यहां सूफी संत जमाली और कमाली की आत्माओं का साया है. स्थानीय लोगों के बीच ऐसी कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें रात के समय अजीब आवाजें और डरावने अनुभव होने का जिक्र मिलता है. इसी वजह से लोग सूरज ढलने के बाद यहां जाने से बचते हैं.

    दिल्ली की खूनी नदी दिल्ली की खूनी नदी का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है. इस जगह को लेकर लंबे समय से कई डरावनी कहानियां कही जाती रही हैं. स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यहां अतीत में कई हिंसक घटनाएं हुई थीं. कुछ लोगों का दावा है कि रात में नदी के आसपास अजीब आवाजें सुनाई देती हैं और कभी-कभी किसी अनजान शख्स के दिखाई देने की बात भी कही जती है, जो अचानक गायब हो जाता है.

    अग्रसेन की बावली कनॉट प्लेस के पास स्थित अग्रसेन की बावली दिल्ली की मशहूर ऐतिहासिक जगहों में शामिल है. इसकी सीढ़ियां और गहरी संरचना पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. लेकिन इस जगह से जुड़ी कुछ डरावनी मान्यताएं भी हैं. कहा जाता है कि पुराने समय में लोग बावली के गहरे पानी में कूदकर आत्महत्या करते थे. इसी वजह से इसके पानी को लेकर कई तरह की रहस्यमय कहानियां प्रचलित हो गईं. शाम के समय यहां का सन्नाटा इन कहानियों को और डरावना बना देता है.

    भूली भटियारी का महल दिल्ली के जंगल इलाके में स्थित भूली भटियारी का महल फिरोज शाह तुगलक के समय से जुड़ा माना जाता है. वीरान माहौल और पुरानी इमारत इसे बाकी ऐतिहासिक स्थलों से अलग बनाती है. इस जगह को लेकर मान्यता है कि यहां किसी महिला का साया भटकता है.

    दिल्ली कैंट में सफेद साड़ी वाली महिला की कहानी दिल्ली कैंट से जुड़ी सबसे चर्चित डरावनी कहानी एक सफेद साड़ी पहने महिला की है. लोगों के बीच यह दावा लंबे समय से सुनने को मिलता है कि रात में सड़क पर एक महिला दिखाई देती है और फिर अचानक गायब हो जाती है. कुछ कहानियों में उसे ब्रिटिश महिला की आत्मा बताया जाता है.

  • जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    जिस गोबर को लोग समझते हैं बेकार, उसी से 71 साल का किसान कमा रहा लाखों?

    71 साल के किसान का कमाल! गोबर से हो रही लाखों की कमाई

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गांव महरवानी की रहने वाली 71 साल की किसान आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो तो गाय का गोबर भी लाखों की कमाई का जरिया बन सकता है. फॉरेस्ट रेंजर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने देसी गायों का पालन शुरू किया, लेकिन केवल दूध बेचने से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने देसी गाय के गोबर का बेहतर उपयोग करने का निर्णय लिया और उससे सम्भरानी कप (धूनी कप) बनाने का काम शुरू किया. आज उनके बनाए गए उत्पाद देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बिक रहे हैं और उन्हें हर महीने लाखों रुपये की आय हो रही है.

    गोबर से बनाए संभरानी कप- आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर में गूगल और लोबान जैसी प्राकृतिक सामग्री मिलाकर ऐसे सम्भरानी कप तैयार किए हैं, जिनका उपयोग घरों में धूनी देने और वातावरण को सुगंधित बनाने के लिए किया जाता है. उनका कहना है कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश सम्भरानी कप कोयले से बने होते हैं, जिनके जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है. वहीं देसी गाय के गोबर से बने इन कपों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तैयार किया गया है.

    उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि लोगों तक शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद पहुंचाना भी है.

    10 ग्राम गोबर में बनता है एक कप- उन्होंने बताया कि एक सम्भरानी कप बनाने में लगभग 10 ग्राम देसी गाय का गोबर लगता है, जबकि एक कप की कीमत करीब 10 रुपये पड़ती है. इस हिसाब से गोबर का मूल्य 400 रुपये प्रति किलो से भी अधिक हो जाता है. उनके उत्पाद होलसेल में करीब 90 रुपये और ऑनलाइन लगभग 220 रुपये में बिकते हैं.

    विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर से ऑर्डर मिल रहे हैं, जिनमें दक्षिण भारत से सबसे अधिक मांग आ रही है. इस वर्ष उन्होंने 20 हजार सम्भरानी कप तैयार किए, जिनमें से एक महीने के भीतर ही 7 से 8 हजार कप की बिक्री हो चुकी है.

  • सुंदर दिखने का ऐसा दबाव कि बच्चों तक की बदलवा देते हैं शक्ल! इस देश की कहानी हैरान कर देगी..

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    इस देश में बदसूरत होना है गुनाह! खुद मां-बाप करवाते हैं बच्चे की प्लास्टिक सर्जरी... सुंदर दिखने का होता है दबाव

    दुनिया भर में लोग खूबसूरत दिखना चाहते हैं. कोई क्रीम और घरेलू नुस्खे अपनाता है, तो कोई जिम और डाइट के जरिए अपनी लुक बेहतर करने की कोशिश करता है. लेकिन साउथ कोरिया में खूबसूरती को लेकर सोच कुछ ज्यादा ही सख्त मानी जाती है. यहां प्लास्टिक सर्जरी करवाना काफी आम है और कई परिवार इसे बच्चों के बेहतर .

    भविष्य से जोड़कर देखते हैं. साउथ कोरिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां प्रति व्यक्ति प्लास्टिक सर्जरी की दर काफी ज्यादा बताई जाती है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां हर एक हजार लोगों पर करीब 8.9 से 13.5 कॉस्मेटिक सर्जरी होती हैं. खासतौर पर युवा महिलाओं में कॉस्मेटिक प्रोसीजर का चलन ज्यादा देखने को मिलता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 19 से 29 साल की करीब 25 प्रतिशत महिलाओं ने कम से कम एक

    कॉस्मेटिक प्रोसीजर कराया है.गंगनाम बना प्लास्टिक सर्जरी का हब सियोल का गंगनाम इलाका प्लास्टिक सर्जरी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में कॉस्मेटिक सर्जरी क्लिनिक मौजूद हैं. सबसे ज्यादा कराई जाने वाली प्रक्रियाओं में डबल आईलिड सर्जरी शामिल है. इसमें आंखों पर फोल्ड बनाया जाता है, जिससे आंखें बड़ी और अलग नजर आती हैं. इसके अलावा नाक की सर्जरी, वी-लाइन जबड़े की शेपिंग, लिपोसक्शन और बोटॉक्स भी काफी लोकप्रिय हैं.

    बच्चों की सर्जरी भी करवाते हैं माता-पिता साउथ कोरिया में कई माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें प्लास्टिक सर्जरी का तोहफा तक देते हैं. कुछ परिवारों का मानना है कि बेहतर लुक से नौकरी और शादी के मौके बढ़ सकते हैं. यहां जॉब एप्लिकेशन में फोटो लगाना भी आम है. इसी वजह से लुक को लेकर दबाव और भेदभाव की चर्चा अक्सर होती रहती है. हालांकि, हर कोरियाई व्यक्ति प्लास्टिक सर्जरी को जरूरी नहीं मानता, लेकिन वहां की ब्यूटी इंडस्ट्री और सामाजिक दबाव ने इसे काफी सामान्य जरूर बना दिया है.