Category: Gazab

  • बोरों में भरकर​​​​​​​ लाए आवारा कुत्ते, अफसर की मेज पर छोड़े… नासिक में अनोखा प्रदर्शन

    बोरों में भरकर​​​​​​​ लाए आवारा कुत्ते, अफसर की मेज पर छोड़े… नासिक में अनोखा प्रदर्शन

    बोरों में भरकर लाए आवारा कुत्ते, अफसर की मेज पर छोड़े... नासिक में अनोखा प्रदर्शन; VIDEO वायरल

    महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों को लेकर हो रहे प्रदर्शन के बीच एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जहां कुछ लोग आवारा कुत्तों को बोरे में भरकर नगर पंचायत ऑफिस पहुंच गए. मामला नासिक के निफाड नगर पंचायत ऑफिस का है. प्रदर्शन करने पंचायत ऑफिस पहुंचे युवा सेना के जिला प्रमुख विक्रम रंधावे ने बोरे में भरकर लाए कुत्तों को दफ्तर में छोड़ दिया. उनका कहना है कि प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या को दूर करने में नाकाम है.

    वायरल हुआ वीडियो

    इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि आवारा पिल्लों को बोरों में भरकर लाया गया और फिर अधिकारी की मेज पर छोड़ दिया गया. इसके बाद कुत्ते मेज पर इधर-उधर भागते दिख रहे हैं. कुत्ते थोड़े घबराए हुए भी लग रहे थे. इसके साथ ही रंधावे ने चीफ ऑफिसर धीरज भामरे की मेज पर नोटों की माला रख दी.

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    क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग

    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है. इसकी वजह से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही उनका दावा है कि आवारा कुत्तों ने शहर में कई लोगों को काट लिया है. प्रशासन से बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. गणेशोत्सव के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया और कहा कि आवारा कुत्तों की वजह से गणेश मंडलों में आने वाले लोगों में डर का माहौल बन गया है.

    प्रदर्शनकारियों की मांग है कि तुरंत नसबंदी अभियान चलाएं , कुत्तों को पकड़ने के लिए सही इंतजाम करें और आवारा कुत्तों की आबादी को कंट्रोल के उपाय अपनाएं जाएं.

    रंधावे ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो वे फिर से विरोध प्रदर्शन करेंगे. साथ ही कहा कि फिर चीफ ऑफिसर के ऑफिस में आवारा कुत्ते छोड़ देंगे.

  • दुनिया का अनोखा​​​​​​​ गांव! 50 मीटर ऊंचे पेड़ों पर घर बनाकर रहती है जनजाति, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया का अनोखा​​​​​​​ गांव! 50 मीटर ऊंचे पेड़ों पर घर बनाकर रहती है जनजाति, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया का अनोखा​​​​​​​ गांव! 50 मीटर ऊंचे पेड़ों पर घर बनाकर रहती है जनजाति, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जहां लोगों की जीवनशैली आम शहरों और गांवों से बिल्कुल अलग है। इंडोनेशिया के पापुआ क्षेत्र के घने जंगलों में रहने वाली कोरवाई जनजाति भी अपनी अनोखी जीवनशैली के लिए जानी जाती है। इस समुदाय के कुछ लोग जमीन पर घर बनाने के बजाय ऊंचे पेड़ों पर घर बनाकर रहते हैं।

    पेड़ों की ऊंचाई पर बने इन घरों को देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो सकता है। जंगल के बीच कई मीटर ऊपर बने ये ट्री हाउस इस समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली का खास हिस्सा माने जाते हैं।

    10 से 50 मीटर की ऊंचाई पर बने घर

    कोरवाई समुदाय के कुछ पारंपरिक ट्री हाउस जमीन से करीब 10 से 50 मीटर तक की ऊंचाई पर बनाए जाते हैं। घने जंगलों के बीच पेड़ों की ऊंचाई पर बने ये घर दूर से बेहद अनोखे नजर आते हैं।

    इन घरों की ऊंचाई हर जगह एक जैसी नहीं होती। घर बनाने के लिए मजबूत और उपयुक्त पेड़ों का चयन किया जाता है, जिसके बाद उनकी शाखाओं और तने के आसपास रहने की जगह तैयार की जाती है।

    लकड़ी और पत्तियों से तैयार होते हैं ट्री हाउस

    इन पारंपरिक घरों को तैयार करने में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध लकड़ी, पत्तियों और पेड़ों से मिलने वाली दूसरी प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

    सीमित संसाधनों के बावजूद इन घरों को इस तरह बनाया जाता है कि लोग उनमें रह सकें और जंगल के वातावरण में अपना जीवन जारी रख सकें।

    आखिर पेड़ों पर क्यों बनाए जाते हैं घर?

    इतनी ऊंचाई पर घर बनाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। जंगल में जमीन से ऊपर रहने को जंगली जानवरों और दूसरी संभावित परेशानियों से बचाव का एक तरीका माना जाता है।

    इसके अलावा ऊंचाई पर बने घरों से आसपास के इलाके पर नजर रखना भी आसान हो सकता है। जंगल के वातावरण में यह जीवनशैली पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक परिस्थितियों से जुड़ी हुई मानी जाती है।

    आधुनिक दुनिया से अलग है जीवनशैली

    कोरवाई जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली आधुनिक शहरों की जिंदगी से काफी अलग दिखाई देती है। घने जंगलों के बीच प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहकर जीवन बिताना और पेड़ों की ऊंचाई पर घर बनाना इस समुदाय को दुनिया की अन्य आबादी से अलग पहचान देता है।

    हालांकि, समय के साथ इस क्षेत्र में भी आधुनिक जीवनशैली का प्रभाव बढ़ा है और समुदाय के सभी लोग आज एक जैसी पारंपरिक परिस्थितियों में नहीं रहते। फिर भी ऊंचे पेड़ों पर बने पारंपरिक घर कोरवाई संस्कृति और उनके जंगल से जुड़े जीवन का एक अनोखा उदाहरण माने जाते हैं।

  • PIA ने क्रू​​​​​​​ मेंबर्स के लिए लॉन्च की नई ड्रेस, सोशल मीडिया पर यूजर्स बोले- पहले विमानों की हालत सुधारो.

    PIA ने क्रू​​​​​​​ मेंबर्स के लिए लॉन्च की नई ड्रेस, सोशल मीडिया पर यूजर्स बोले- पहले विमानों की हालत सुधारो.

    PIA ने क्रू​​​​​​​ मेंबर्स के लिए लॉन्च की नई ड्रेस, सोशल मीडिया पर यूजर्स बोले- पहले विमानों की हालत सुधारो.

    पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) ने अपने क्रू मेंबर्स के लिए नई ड्रेस लॉन्च की है। एयरलाइन की ओर से नई यूनिफॉर्म पेश किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    कई सोशल मीडिया यूजर्स ने नई ड्रेस पर चर्चा करने के साथ ही एयरलाइन की दूसरी सेवाओं पर भी सवाल उठाए। कुछ यूजर्स का कहना है कि यूनिफॉर्म बदलने से पहले एयरलाइन को अपने विमानों और यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।

    नई ड्रेस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा

    PIA की नई यूनिफॉर्म की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने ड्रेस में बदलाव को लेकर प्रतिक्रिया दी, जबकि कई लोगों ने एयरलाइन की मौजूदा सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए।

    सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यूनिफॉर्म बाद में भी बदली जा सकती है, लेकिन पहले विमानों की स्थिति और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार किया जाना चाहिए।

    सर्विस और ऑपरेशन को लेकर भी सवाल

    नई ड्रेस के साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स ने PIA की कस्टमर सर्विस और एयरलाइन के ऑपरेशन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाएं अलग-अलग यूजर्स की राय हैं और इन्हें एयरलाइन की सेवाओं का आधिकारिक आकलन नहीं माना जा सकता।

    PIA की नई यूनिफॉर्म को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है और यूजर्स एयरलाइन की अन्य सेवाओं पर भी अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कर रहे हैं।

  • स्पीति की खतरनाक​​​​​​​ सड़कों: पर ऑटो चला रहे ब्रिटिश टूरिस्ट, देखकर भारतीय ट्रैवलर भी रह गया हैरान..

    स्पीति की खतरनाक​​​​​​​ सड़कों: पर ऑटो चला रहे ब्रिटिश टूरिस्ट, देखकर भारतीय ट्रैवलर भी रह गया हैरान..

    स्पीति की खतरनाक​​​​​​​ सड़कों: पर ऑटो चला रहे ब्रिटिश टूरिस्ट, देखकर भारतीय ट्रैवलर भी रह गया हैरान..

    हिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली अपनी खूबसूरत वादियों के साथ-साथ मुश्किल पहाड़ी सड़कों के लिए भी जानी जाती है. यहां का सफर आसान नहीं होता. ऐसे में जब दो ब्रिटिश पर्यटक इन सड़कों पर ऑटो रिक्शा चलाते नजर आए, तो वहां मौजूद एक भारतीय ट्रैवलर भी हैरान रह गया. दोनों पर्यटक बजाज ऑटो से भारत घूम रहे हैं. उनका सफर हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों से होते हुए आगे राजस्थान के जैसलमेर तक जाने का है. स्पीति की कठिन सड़कों पर ऑटो से सफर करते उनका वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है.

    ताबो से काजा जाते समय दिखे दोनों पर्यटक

    भारतीय सोलो ट्रैवलर विशाल की नजर इन दोनों पर्यटकों पर तब पड़ी, जब वह स्पीति वैली में ताबो से काजा की ओर जा रहे थे. उन्होंने दोनों को पहाड़ी रास्ते पर ऑटो चलाते देखा और इस पल का वीडियो बना लिया. वीडियो में विशाल ने हैरानी जताई कि जिस रास्ते पर बड़े वाहन चलाना भी चुनौतीपूर्ण होता है, वहां दोनों विदेशी पर्यटक तीन पहियों वाले ऑटो से सफर कर रहे हैं.

    सफर को बनाया एडवेंचर

    विशाल ने अपने वीडियो में कहा कि जो लोग सच में घूमने के शौकीन होते हैं, वे किसी भी चीज को रोमांचक सफर में बदल सकते हैं. ब्रिटिश पर्यटकों का यह सफर भी इसी अंदाज में नजर आ रहा है. स्पीति की ऊंची पहाड़ी सड़कें, मुश्किल मोड़ और बदलता मौसम इस सफर को और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं. यही वजह है कि ऑटो से स्पीति घूमते इन पर्यटकों का वीडियो लोगों के लिए खासा दिलचस्प बन गया.

  • अमीरी हो तो​​​​​​​ ऐसी! घर जाने के लिए नहीं था रास्ता, तो बनवा दिया सड़क से कनेक्टेड ब्रिज.

    अमीरी हो तो​​​​​​​ ऐसी! घर जाने के लिए नहीं था रास्ता, तो बनवा दिया सड़क से कनेक्टेड ब्रिज.

    अमीरी हो तो​​​​​​​ ऐसी! घर जाने के लिए नहीं था रास्ता, तो बनवा दिया सड़क से कनेक्टेड ब्रिज.

    सोशल मीडिया पर इन दिनों एक आलीशान घर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक ऐसी आलीशान महलनुमा कोठी दिखाई दे रही है, जहां तक पहुंचने के लिए सामान्य सड़क के बजाय एक लंबा कंक्रीट ब्रिज बनाया गया है. वीडियो सामने आने के बाद लोग इस निर्माण को लेकर हैरानी जता रहे हैं और सोशल मीडिया पर तरह-तरह के रिएक्शन भी वायरल हो रहे हैं. वायरल वीडियो में सफेद रंग की बहुमंजिला इमारत नजर आती है. यह घर सड़क से कुछ ऊंचाई पर बना हुआ दिखाई देता है.

    वीडियो में यूजर्स ये देखकर हैरान रह गए कि घर तक पहुंचने के लिए नीचे मुख्य सड़क से एक घुमावदार और ऊंचा कंक्रीट का रास्ता तैयार किया गया है, जो सीधे मकान की बाउंड्री और मेन गेट तक पहुंचता है. पहली नजर में यह संरचना किसी छोटे फ्लाईओवर या ओवरब्रिज जैसी दिखाई देती है.

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    सड़क नहीं मिली तो घर तक बना दिया ब्रिज

    वीडियो बनाने वाला व्यक्ति इस पूरे घर और ब्रिज को अपने अंदाज में दिखाता है. वीडियो बना रहा शख्स बताता है कि घर तक पहुंचने के लिए नॉर्मल रास्ता उपलब्ध नहीं था, इसलिए सड़क से सीधे मकान तक पहुंचने वाला ब्रिज तैयार कर दिया गया. वीडियो में वह इस निर्माण को लेकर मजाकिया अंदाज में कहता है कि जब पैसा हो तो ऐसी सुविधाएं भी बनाई जा सकती हैं.

    वीडियो में दिखाई दे रहे ब्रिज की लंबाई और उसके घुमावदार रास्ते किसी सरकारी ब्रिज से बहुत अलग और खूबसूरत बनाया गया है. यही वजह है कि सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान इस पर तेजी से गया है.

     
     

     

    किसका है यह आलीशान घर?

    हालांकि, वायरल वीडियो के साथ सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह घर किसका है और कहां स्थित है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो किस शहर या इलाके का है. इसी तरह मकान के मालिक की पहचान भी सामने नहीं आई है. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे अमीरी का अनोखा उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ लोग निर्माण को लेकर मजेदार कमेंट कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि आम लोगों को सड़क और रास्ते के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि यहां घर तक पहुंचने के लिए ही पूरा ब्रिज तैयार कर दिया गया.

  • आपका साबुन, शैंपू​​​​​​​ और टूथपेस्ट: वेज है या नॉनवेज? अब आसानी से चलेगा पता, सरकार ने बदले पैकेजिंग के नियम

    आपका साबुन, शैंपू​​​​​​​ और टूथपेस्ट: वेज है या नॉनवेज? अब आसानी से चलेगा पता, सरकार ने बदले पैकेजिंग के नियम

    आपका साबुन, शैंपू​​​​​​​ और टूथपेस्ट: वेज है या नॉनवेज? अब आसानी से चलेगा पता, सरकार ने बदले पैकेजिंग के नियम

    साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और दूसरे कॉस्मेटिक्स व टॉयलेटरी प्रोडक्ट्स खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब यह पहचानना आसान होगा कि किसी उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री शाकाहारी है या मांसाहारी. केंद्र सरकार ने पैकेज्ड उत्पादों की लेबलिंग से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए इन उत्पादों की पैकेजिंग पर वेजिटेरियन या नॉन-वेजिटेरियन होने की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में संशोधन किया है. यह संशोधन सोमवार (सितंबर, 21, 2026) से प्रभावी हो गया है. नए नियमों के तहत शाकाहारी मूल वाले उत्पादों की पैकेजिंग पर ग्रीन डॉट लगाना अनिवार्य होगा. वहीं, मांसाहारी मूल वाले उत्पादों के लिए रेड या ब्राउन डॉट लगाना जरूरी होगा.

    पैकेजिंग पर कहां होगा निशान?

    नए नियमों के मुताबिक यह निशान पैकेज के मुख्य डिस्प्ले पैनल के ऊपरी हिस्से में लगाया जाएगा. इसका उद्देश्य यह है कि ग्राहक को खरीदारी के दौरान उत्पाद की पूरी जानकारी आसानी से मिल सके साथ ही उसे सामग्री की पूरी सूची पढ़कर यह पता लगाने की जरूरत न पड़े कि उत्पाद शाकाहारी है या मांसाहारी. यह व्यवस्था खास तौर पर उन रोजमर्रा के उत्पादों पर लागू होगी, जिनमें साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट के अलावा अन्य कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरी आइटम शामिल हैं. यानी अब इन उत्पादों को खरीदते समय ग्राहक पैकेजिंग पर लगे ‘कलर डॉट’ के जरिए उनके शाकाहारी या मांसाहारी मूल की पहचान कर सकेंगे.

    क्यों किया गया नियम में बदलाव?

    सरकार की ओर से किए गए इस बदलाव का मकसद पैकेजिंग पर उत्पाद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक स्पष्ट और आसानी से समझ आने वाला बनाना है. रंग आधारित प्रतीक एक तरह से विजुअल संकेत के रूप में काम करेंगे, जिससे ग्राहक बिना ज्यादा जानकारी पढ़े भी उत्पाद की श्रेणी पहचान सकेगा. अब तक उपभोक्ताओं को कई कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जानकारी के लिए पैकेज पर दिए गए इंग्रीडिएंट्स पढ़ने पड़ते थे. नए नियम के बाद निर्धारित प्रतीक के जरिए यह जानकारी सीधे पैकेज के प्रमुख हिस्से पर उपलब्ध होगी.

    कंपनियों को करना होगा नियमों का पालन

    नया नियम लागू होने के बाद संबंधित उत्पादों के निर्माता और विक्रेताओं को निर्धारित लेबलिंग नियमों का पालन करना जरूरी होगा. इसका मतलब है कि बाजार में आने वाली संबंधित पैकेजिंग पर उत्पाद के शाकाहारी या मांसाहारी मूल की पहचान के लिए तय रंग का निशान मौजूद होना चाहिए. यह बदलाव ‘Legal Metrology’ के तहत पैकेजिंग और उपभोक्ता सूचना से जुड़े नियमों के तहत किया गया है.

  • महिलाओं की अनोखी मुहिम: शाम होते ही हाथों में झाड़ू-डंडा लेकर निकलती है 50 औरतों की टीम, शराबबंदी के लिए गश्त

    महिलाओं की अनोखी मुहिम: शाम होते ही हाथों में झाड़ू-डंडा लेकर निकलती है 50 औरतों की टीम, शराबबंदी के लिए गश्त

    महिलाओं की अनोखी मुहिम: शाम होते ही हाथों में झाड़ू-डंडा लेकर निकलती है 50 औरतों की टीम, शराबबंदी के लिए गश्त

    बिहार के बगहा अंतर्गत रामनगर के सिल्वटिया बड़गो गांव में महिलाओं ने अवैध शराब बिक्री और सेवन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हाथ में डंडा और झाड़ू लेकर 50 से अधिक महिलाओं की टीम रोज शाम गांव में गश्त करती है.

    बगहा के रामनगर में इन दिनों शाम होते ही एक अलग नजारा देखने को मिल रहा है. हाथों में डंडा और झाड़ू लिए महिलाओं का समूह गांव की गलियों में निकल पड़ता है. मकसद है- शराब के खिलाफ आवाज बुलंद करना और गांव के माहौल को बेहतर बनाना. मामला रामनगर प्रखंड के सोनख पंचायत के सिल्वटिया बड़गो गांव का है. यहां शराब की बिक्री और सेवन से परेशान महिलाओं ने खुद एकजुट होकर अभियान शुरू किया है. पिछले करीब एक सप्ताह से महिलाएं हर शाम समूह बनाकर गांव में गश्त कर रही हैं और शराब पीने-पिलाने का विरोध कर रही हैं.

    चंद महिलाओं से शुरू हुआ अभियान, अब 50 से ज्यादा महिलाएं साथ शुरुआत में कुछ महिलाओं ने मिलकर यह अभियान शुरू किया था. धीरे-धीरे गांव की दूसरी महिलाएं भी इससे जुड़ती चली गईं. अब 50 से ज्यादा महिलाएं इस मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं. महिलाओं का कहना है कि उनका मकसद किसी से विवाद करना नहीं, बल्कि गांव के माहौल को बेहतर बनाना और परिवारों को शराब के नुकसान से बचाना है. जीविका समूह की अध्यक्ष फूलकली देवी ने बताया कि घरों में शराब की वजह से बिगड़ते माहौल को देखते हुए महिलाओं ने यह कदम उठाया. उनके मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद बाहरी लोगों की आवाजाही भी कम हुई है.

    रामनगर एसडीपीओ सतेंद्र राम ने बताया कि गांव की महिलाएं अब अवैध पदार्थों की बिक्री और खरीदारी को लेकर जागरूक हो रही हैं. महिलाएं इस तरह की गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. पुलिस भी ऐसी सूचनाओं पर कार्रवाई कर रही है और लोगों से अपील है कि वे अवैध पदार्थों की बिक्री या खरीदारी की जानकारी तत्काल पुलिस को दें.

    शाम होते ही निकलता है महिला दस्ता गांव में महिलाओं की टीम शाम होते ही सक्रिय हो जाती है. हाथों में डंडा और झाड़ू लेकर महिलाएं गांव की गलियों में घूमती हैं और लोगों को शराब से दूर रहने के लिए जागरूक करती हैं. महिलाओं का कहना है कि जब तक गांव में पूरी तरह बेहतर माहौल नहीं बन जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा. मुखिया रमिता देवी ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना की है. वहीं, नगीना देवी ने बताया कि कुछ महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां अब 50 से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच गया है.

    महिलाओं के मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद गांव में शराब की बिक्री में कमी देखने को मिली है. अब महिलाएं इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि गांव के माहौल को बदलने की सामूहिक कोशिश मान रही हैं.

  • बंद बंगले में घुसते: ही जाली में बुरी तरह फंसा युवक, बाहर निकालने के बजाय लोगों ने शुरू कर दी पिटाई, जानिए पूरा मामला

    बंद बंगले में घुसते: ही जाली में बुरी तरह फंसा युवक, बाहर निकालने के बजाय लोगों ने शुरू कर दी पिटाई, जानिए पूरा मामला

    बंद बंगले में घुसते: ही जाली में बुरी तरह फंसा युवक, बाहर निकालने के बजाय लोगों ने शुरू कर दी पिटाई, जानिए पूरा मामला

    सूरत: गुजरात के सूरत शहर के नाना वराछा इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बंद बंगले में घुसने की कोशिश के दौरान एक युवक स्टील की जाली में बुरी तरह फंस गया। वह काफी देर तक बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। इस दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि युवक की मदद करने के बजाय कुछ लोगों ने उसे डंडों से पीटना शुरू कर दिया।

    बंद बंगले की जाली में फंसा युवक

    यह मामला नाना वराछा की राजा राम नगर सोसायटी का बताया जा रहा है। सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, युवक एक बंद बंगले में घुसा था। इसी दौरान वह मकान की स्टील की जाली में फंस गया। जाली के बीच फंसे युवक ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह खुद को छुड़ा नहीं पाया।

    कुछ ही देर में आसपास के लोग वहां इकट्ठा हो गए। युवक को कथित चोर समझकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस घटना ने इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है।

    हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक यह पुष्टि नहीं की गई है कि युवक वास्तव में चोरी करने के इरादे से बंगले में घुसा था या उसके पीछे कोई दूसरी वजह थी।

    करीब 15 दिन पुराना बताया जा रहा मामला

    कापोद्रा पुलिस इंस्पेक्टर महिपाल सिंह सोलंकी के मुताबिक, यह घटना करीब 15 दिन पुरानी है। हालांकि, इससे जुड़ा मामला दो-तीन दिन पहले सोशल मीडिया पर सामने आया और इसके बाद चर्चा में आ गया।

    पुलिस के अनुसार, बंगले में रहने वाला परिवार लंबे समय से अमेरिका में रहता है। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बंगले के मालिक किशोर भाई से भी संपर्क किया।

    घर से सामान चोरी होने की नहीं मिली जानकारी

    बंगले के मालिक ने पुलिस को बताया कि घर से कोई सामान चोरी नहीं हुआ है। साथ ही, किसी ताले के टूटने की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल पुलिस जाली में फंसे युवक की पहचान करने में जुटी है। इसके अलावा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह बंगले में किस उद्देश्य से दाखिल हुआ था। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल मामले में किसी शिकायत की जानकारी नहीं मिली है।

    जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक बंगले में किस मकसद से घुसा था और उसके साथ हुई मारपीट को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

  • पति ने इलाज का: नहीं दिया पैसा तो पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग, 40 किमी दूर नाविकों ने बचाई जान

    पति ने इलाज का: नहीं दिया पैसा तो पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग, 40 किमी दूर नाविकों ने बचाई जान

    पति ने इलाज का: नहीं दिया पैसा तो पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग, 40 किमी दूर नाविकों ने बचाई जान

    यूपी के मिर्जापुर में एक कपल के बीच झड़गा इतना बढ़ गया कि पत्नी ने पुल से गंगा में छलांग लगा दी. 12 घंटे बाद 40 किलोमीटर दूर नाविकों ने महिला को पानी से निकाला. नाविकों ने महिला की जान बचाई.

    उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में पति और पत्नी के झगड़े में पत्नी ने गंगा में छलांग लगा दिया. गंगा में रात भर 12 घंटे संघर्ष करने के बाद 40 किलोमीटर दूर नाविकों ने उसको बचाया.

    इलाज के पैसे को लेकर कपल में बवाल- घटना कटरा कोतवाली थाना क्षेत्र के लोहिया तालाब छोटी बसही की है, जहाँ 15 सितंबर 2026 को सुनीता देवी ने गुजरात मे नौकरी करने वाले अपने पति सूरज से फोन कर अपने इलाज के लिए पैसे मांगे. पति ने फोन पर पैसे देने से इंकार कर दिया और अपनी माँ से बात करवाने को कहा.

    नाराज पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग- जिसके बाद सुनीता नाराज हो कर शाम 5 बजे के लगभग शास्त्री ब्रिज पर पहुची, वहां से गंगा में छलांग लगा दिया. घर वाले सुनीता का इंतजार करते रहे, मगर जब घण्टों बाद नहीं आई तो उसकी तलाश शुरू किया. मगर कहीं उसका पता नहीं चला.

    40 किमी दूर नाविकों ने बचाया- अगले दिन सुबह 5 बजे के लगभग 40 किलोमीटर दूर चुनार में नाविकों ने सुनीता को पानी में बहते देख उसको बचाया. सुनीता अब अपने मायके में है. उसके चारों बच्चे घर पर माँ का इंतजार कर रहे है.

    बेटे राहुल का कहना है कि पापा और मम्मी के बीच फोन पर बात हुई. दोनों के बीच झगड़ा हुआ. जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया है.

    सास ने क्या कहा? वहीं, सुनीता की सास बिरंजी देवी का कहना है कि बेटे ने कहा, मेरी माँ से बात करवा दीजिये, मगर उन्होंने बात नहीं करवाया. हम लोग तलाश किए, नहीं मिली. इलाज के लिए हम लोग पैसा दे रहे थे. पति से बात हुई तो उसने कहा कि पैसा नही है. माँ से बात करवा दीजिये. वह शाम को 5 बजे कूदी थी, सुबह 5 बजे मिली है.

    कटरा कोतवाली थाना प्रभारी नीरज पाठक का कहना है कि महिला परसो गंगा में कूदी थी. अब वह पूरी तरह से सुरक्षित है.

  • ड्रोन उड़ाकर खेतों में करती हैं छिड़काव, नीतू पासवान की बदली जिंदगी, बताईं 50-60 हजार रुपये महीने की कमाई.

    ड्रोन उड़ाकर खेतों में करती हैं छिड़काव, नीतू पासवान की बदली जिंदगी, बताईं 50-60 हजार रुपये महीने की कमाई.

    गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली नीतू पासवान ने ड्रोन के जरिए कृषि क्षेत्र में काम करते हुए अपनी कमाई का जरिया तैयार किया है। मेरौली गांव की रहने वाली नीतू ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से जुड़ी हैं। उनके मुताबिक, साल 2024 में ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने ड्रोन से खेतों में स्प्रे का काम शुरू किया।

    नीतू पासवान का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने ड्रोन चलाने और खेतों में इसका इस्तेमाल करने का काम सीख लिया। अब अच्छे सीजन में उनकी कमाई 50 से 60 हजार रुपये महीने तक पहुंच जाती है। उन्होंने सालभर में करीब 5 से 6 लाख रुपये तक कमाई होने की बात भी कही है।

    ड्रोन से खेतों में करती हैं कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव

    नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन ड्रोन का इस्तेमाल किसानों के खेतों में तरल उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाओं के लिए किया जाता है।

    नीतू भी किसानों के खेतों में ड्रोन के जरिए स्प्रे का काम करती हैं। इस तरह ड्रोन उनके लिए सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि आय का एक साधन भी बन गया है।

    2024 में ली ट्रेनिंग, फिर शुरू किया काम

    नीतू पासवान के मुताबिक, उन्होंने 2024 में ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद उन्होंने खेतों में स्प्रे का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में काम आसान नहीं था, लेकिन समय के साथ उन्हें इसका अनुभव होने लगा।

    सरकार की योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को ड्रोन पायलट के तौर पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। फरवरी 2026 में सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, ड्रोन दीदियों को अधिकृत ट्रेनिंग संस्थानों के जरिए ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग दी गई है।

    योजना में 80 फीसदी तक केंद्रीय सहायता

    नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पैकेज की लागत का 80 फीसदी तक केंद्रीय वित्तीय सहयोग, अधिकतम 8 लाख रुपये तक, दिया जाता है। बाकी राशि के लिए ऋण की सुविधा का प्रावधान है और उस पर ब्याज में भी सहायता दी जाती है।

    केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 2023-24 से 2025-26 की अवधि में 1,261 करोड़ रुपये का परिव्यय मंजूर किया था। योजना का लक्ष्य महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि क्षेत्र में ड्रोन आधारित सेवाएं देने के लिए सक्षम बनाना है।

    नीतू ने सरकार के लिए कही ये बात

    नीतू पासवान ने अपने अनुभव को साझा करते हुए प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं से महिलाओं को आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिल रहा है।

    उन्होंने अपने बयान में योगी सरकार के योगदान की भी सराहना की और इसे महिलाओं के लिए मददगार बताया। यह नीतू पासवान का व्यक्तिगत अनुभव और उनके द्वारा दिया गया बयान है।

    15 हजार ड्रोन देने का लक्ष्य

    नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कुल 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार के अनुसार, योजना के जरिए महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ ड्रोन सेवाओं के माध्यम से अतिरिक्त आजीविका का अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।

    नीतू पासवान की कहानी इसी योजना के तहत ड्रोन ट्रेनिंग और कृषि सेवाओं से जुड़ी महिलाओं की बदलती आजीविका की एक मिसाल के तौर पर सामने आई है।