पुष्कर,। ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सृष्टि का निर्माता, पालनकर्ता और संहारक माना गया है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि विष्णु और शिव जी के तो पूरे देश में कई मंदिर हैं और लोग घर में भी उनकी पूजा करते हैं, जबकि ब्रह्मा जी की पूजा लगभग कभी नहीं होती।
उनका केवल एक ही मंदिर है जो पुष्कर में स्थित है। पुराणों के अनुसार, इसका कारण देवी सावित्री का दिया हुआ श्राप है। कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी अपने हाथ में कमल का फूल लिए हुए अपने वाहन हंस पर सवार होकर यज्ञ के लिए जगह तलाश रहे थे। इसी दौरान उनका कमल का फूल हाथ से गिर गया और उस जगह पर तीन झरने बन गए। इन्हें ब्रह्म पुष्कर, विष्णु पुष्कर और शिव पुष्कर के नाम से जाना गया।
ब्रह्मा जी ने यही यज्ञ करने का निर्णय लिया, लेकिन यज्ञ में उनकी पत्नी का होना जरूरी था।उस समय देवी सावित्री वहां नहीं थीं और शुभ मुहूर्त निकल रहा था, इसलिए ब्रह्मा जी ने उसी समय वहां मौजूद एक सुंदर स्त्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न कर लिया। जब यह बात देवी सावित्री को पता चली, तो वे बहुत नाराज हुईं और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि पूरी सृष्टि में उनकी पूजा नहीं की जाएगी।
यही वजह है कि ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर पुष्कर में है। इसके बाद ब्रह्मा जी ने यहीं दस हजार साल तक रहकर सृष्टि की रचना की और पांच दिनों तक यज्ञ किया। यहीं तपस्या के दौरान सावित्री देवी वहां पहुंचीं और उनकी नाराजगी शांत हुई।श्रद्धालु आज भी ब्रह्मा जी से दूर से ही प्रार्थना करते हैं। कहा जाता है कि श्राप की वजह से पूरी दुनिया में ब्रह्मा की पूजा नहीं होती। वहीं, देवी सावित्री तपस्या के लिए पुष्कर की पहाड़ियों पर चली गईं और आज भी वहां मंदिर में विराजमान हैं। वे भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी कृपा से ही श्रद्धालु लाभ पाते हैं-
अगर आपको बताया जाए कि भविष्य में ब्रिटेन के कई बड़े शहर समंदर में समा सकते हैं. शायद किसी को भी इस बात पर यकीन नहीं होगा. मगर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी चेतावनी दी है जो किसी के भी होश उड़ा देगी. वैज्ञानिकों ने एक शोध के हवाले से बताया कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन तेजी से नहीं रुका, तो आने वाले समय में समंदर का बढ़ता जलस्तर ब्रिटेन के कई शहरों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2300 तक ब्रिटेन के कई तटीय इलाके पानी में डूब सकते हैं और करीब 17 लाख लोग समुद्री बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों में रहने को मजबूर हो सकते हैं.
मौसम ने दी डराने वाली जानकारी
मालूम हो कि ये चेतावनी ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में दी गई है. शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की कि आने वाले सालों में समुद्र का जलस्तर कितना बढ़ सकता है और इसका असर किन इलाकों पर पड़ेगा. स्टडी के मुताबिक, अगर दुनिया मौजूदा जलवायु लक्ष्यों को भी पूरा कर ले, तब भी साल 2200 तक करीब 14 लाख लोग समुद्री बाढ़ के खतरे में होंगे. वहीं 2300 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 17 लाख हो सकती है.
धीरे-धीरे बढ़ा समुद्र का जलस्तर
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो जाए तो इसका असर कई सदियों तक बना रहता है. यही वजह है कि इसे जलवायु परिवर्तन का ‘स्लीपिंग जायंट’ यानी धीरे-धीरे बढ़ने वाला बड़ा खतरा माना जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2100 तक ब्रिटेन के तटीय इलाकों में समुद्र का जलस्तर करीब 40 से 60 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है. इससे बाढ़ प्रभावित जमीन का दायरा लगभग 13 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा. सबसे ज्यादा खतरा द वॉश, हम्बर एस्ट्यूरी और ब्रिस्टल चैनल जैसे निचले इलाकों को बताया गया है.
1.8 मीटर जलस्तर बढ़ने का अनुमान
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि साल 2300 तक समुद्र का जलस्तर 1.2 से 1.8 मीटर तक बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र 56 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे. लंदन, लिवरपूल, ब्लैकपूल, नॉरफोक और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के कई हिस्सों में भी समुद्री पानी घुसने का खतरा बढ़ जाएगा. रिसर्चरों ने एक और गंभीर संभावना भी जताई है. अगर अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की बर्फ तेजी से पिघलने लगी, तो 2300 तक समुद्र का जलस्तर 15 मीटर से भी ज्यादा बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में मौजूदा समुद्री सुरक्षा दीवारों और बाढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं का बड़ा हिस्सा बेअसर हो जाएगा.
Trending News: रेलवे स्टेशन का नाम आते ही भारत के बड़े स्टेशनों का ख्याल आता है। भारत में हावड़ा जंक्शन और गोरखपुर जैसे स्टेशन अपनी खासियतों के लिए मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा प्लेटफॉर्म वाला रेलवे स्टेशन कौन सा है?
यह स्टेशन भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में मौजूद है। इसका नाम ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल है और यह अपनी विशालता तथा ऐतिहासिक इमारत के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।
44 प्लेटफॉर्म वाला दुनिया का विशाल स्टेशन
Grand Central Terminal की सबसे बड़ी खासियत इसके प्लेटफॉर्म हैं। यहां कुल 44 प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जो अलग-अलग ट्रेनों के संचालन के लिए इस्तेमाल होते हैं।
इतने ज्यादा प्लेटफॉर्म होने के कारण ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल को दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशनों में गिना जाता है। इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है।
करीब 48 एकड़ में फैला है पूरा टर्मिनल
ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल का निर्माण 1903 से 1913 के बीच हुआ था। यह परिसर करीब 48 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
स्टेशन की इमारत अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी मशहूर है। यहां यात्रियों के लिए कई तरह की सुविधाएं मौजूद हैं और स्टेशन का एक बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे भी बना हुआ है।
रोजाना लाखों यात्रियों की आवाजाही
रिपोर्टों के अनुसार, ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। यहां से सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं और न्यूयॉर्क के परिवहन नेटवर्क में इसकी अहम भूमिका है।
स्टेशन के नीचे दो भूमिगत स्तर भी हैं। यही वजह है कि ऊपर दिखाई देने वाले विशाल स्टेशन के मुकाबले इसका पूरा ढांचा कहीं ज्यादा बड़ा है।
स्टेशन से जुड़ा है एक गुप्त प्लेटफॉर्म
ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल से जुड़ी सबसे दिलचस्प बातों में एक इसका एक गुप्त प्लेटफॉर्म भी बताया जाता है। यह प्लेटफॉर्म पास के वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल के नीचे स्थित है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस गुप्त हिस्से का इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के दौरान किया गया था।
बताया जाता है कि राष्ट्रपति को सार्वजनिक नजरों से बचाते हुए होटल से इस भूमिगत हिस्से तक पहुंचाया गया था। हालांकि, इस कहानी से जुड़े कई विवरण अलग-अलग रिपोर्टों में अलग तरह से सामने आते हैं।
भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन कौन सा है?
अगर भारत की बात करें तो हावड़ा जंक्शन देश के सबसे बड़े और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां 23 प्लेटफॉर्म और 25 ट्रैक हैं।
वहीं, गोरखपुर जंक्शन अपने लंबे प्लेटफॉर्म के लिए जाना जाता है। यार्ड के री-मॉडलिंग का काम पूरा होने के बाद इसका प्लेटफॉर्म लंबे समय तक दुनिया के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज रहा।
यानी भारत भी रेलवे के मामले में पीछे नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा प्लेटफॉर्म वाले स्टेशन की बात करें तो न्यूयॉर्क का ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल दुनिया के सबसे चर्चित नामों में शामिल है।
अगर कोई आपसे कहे कि पीठ खुजाने की एक घंटे की सर्विस के लिए लोग हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं, तो शायद आपको यकीन न हो। लेकिन चीन में एक शख्स ने इसी अजीबोगरीब आइडिया को बिजनेस में बदल दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के शेनझेन शहर में रहने वाले 32 वर्षीय झांग शियाओचियाओ ने एक ऐसी दुकान शुरू की है, जहां ग्राहक पैसे देकर अपनी पीठ और शरीर पर खुजली करवाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अनोखे कारोबार से वह हर महीने करीब 1 लाख युआन यानी लगभग 14 से 15 लाख रुपये की कमाई करने का दावा करते हैं।
शेनझेन में खुली ‘इचिंग शॉप’
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, झांग ने इस साल मई की शुरुआत में शेनझेन के बाओआन जिले में अपनी पहली ‘इचिंग शॉप’ शुरू की थी।
दुकान का सेटअप किसी सामान्य मसाज सेंटर जैसा बताया जाता है। ग्राहक एक बेड पर पेट के बल लेटते हैं और कर्मचारी खास तरह के उपकरण या डिजाइन किए गए नेल्स की मदद से उनकी पीठ और शरीर पर धीरे-धीरे खुजली करते हैं।
यानी जिस काम को लोग आमतौर पर घर में किसी परिवार के सदस्य से करवाते हैं, उसे झांग ने बाकायदा एक पेड सर्विस बना दिया।
एक घंटे की सर्विस के लिए 300 युआन
इस अनोखी सेवा की कीमत भी तय है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहक से एक घंटे के लिए करीब 300 युआन, यानी लगभग 3,500 रुपये लिए जाते हैं।
झांग का दावा है कि इस सर्विस का मकसद सिर्फ खुजली मिटाना नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ ग्राहकों को इससे आराम महसूस होता है और वे तनाव कम करने या बेहतर नींद के लिए भी इस सेवा का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, तनाव या नींद की समस्या के इलाज के तौर पर इस सर्विस को वैज्ञानिक उपचार नहीं माना जाना चाहिए।
दुकान पर आने वालों में 70 फीसदी पुरुष
इस बिजनेस की एक और दिलचस्प बात सामने आई है।
झांग के मुताबिक, उनकी दुकान पर आने वाले करीब 70 फीसदी ग्राहक पुरुष हैं। इनमें कई लोग काम के बाद आराम और रिलैक्सेशन के लिए यहां पहुंचते हैं।
सोशल मीडिया पर इस अनोखे बिजनेस की चर्चा होने के बाद लोगों के बीच भी इसे लेकर काफी उत्सुकता देखने को मिली।
सोशल मीडिया वीडियो से आया आइडिया
झांग के लिए यह बिजनेस आइडिया अचानक नहीं आया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, वह इससे पहले ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया से जुड़े काम कर चुके थे, लेकिन उन्हें वहां अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
इसके बाद एक दिन सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो देखते हुए उनकी नजर एक वीडियो पर पड़ी। उसमें एक महिला अपने पति की पीठ खुजा रही थी।
वीडियो के कमेंट सेक्शन में कुछ लोगों ने ऐसी बातें लिखीं कि अगर कोई उनके लिए इस तरह पीठ खुजा दे तो वे इसके लिए पैसे देने को भी तैयार हैं।
यही बात झांग के दिमाग में बैठ गई।
बचपन की याद ने दिया बिजनेस का आइडिया
इस वीडियो ने उन्हें अपने बचपन की याद भी दिला दी।
झांग के मुताबिक, बचपन में उनके पिता उनकी पीठ खुजाया करते थे और उन्हें इससे काफी सुकून मिलता था।
उन्होंने इसी व्यक्तिगत अनुभव और सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया को मिलाकर एक ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार किया, जिसके बारे में शायद ही किसी ने पहले सोचा होगा।
एक महीने में खोल दी दूसरी ब्रांच
शुरुआत में यह आइडिया भले ही अजीब लगा हो, लेकिन झांग का दावा है कि उनकी पहली दुकान को ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
इसके करीब एक महीने के भीतर उन्होंने शेनझेन के फुतियान इलाके में दूसरी ब्रांच भी शुरू कर दी।
उनके मुताबिक, दोनों आउटलेट अब मुनाफे में चल रहे हैं और मिलकर करीब 1 लाख युआन प्रति महीने का कारोबार कर रहे हैं।
भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 14 से 15 लाख रुपये बैठती है।
अब पूरे चीन में 100 दुकानें खोलने का सपना
झांग अब इस बिजनेस को सिर्फ दो दुकानों तक सीमित नहीं रखना चाहते।
उनका लक्ष्य आने वाले समय में पूरे चीन में 100 इचिंग शॉप्स खोलना है।
वह चाहते हैं कि पीठ खुजाने जैसी साधारण लगने वाली सेवा भी एक व्यवस्थित और प्रोफेशनल सर्विस के रूप में पहचान बनाए।
अजीब आइडिया, लेकिन बिजनेस का बड़ा सबक
झांग की कहानी भले ही सुनने में मजाकिया लगे, लेकिन इसमें बिजनेस की एक दिलचस्प सीख भी छिपी है।
कई सफल बिजनेस ऐसे कामों से बने हैं, जिन्हें लोग पहले सामान्य या मामूली जरूरत समझते थे। झांग ने भी लोगों की एक छोटी-सी जरूरत और सोशल मीडिया पर दिखाई गई दिलचस्पी को कारोबार में बदलने की कोशिश की।
हालांकि, इस तरह की सर्विस में साफ-सफाई, त्वचा की सुरक्षा और ग्राहक की सहमति जैसे पहलुओं का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
आखिरकार, बिजनेस आइडिया कितना भी अनोखा क्यों न हो, ग्राहक की सुरक्षा और हाइजीन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। झांग शियाओचियाओ की कमाई और कारोबार से जुड़े आंकड़े रिपोर्ट में किए गए दावों के अनुसार हैं। इस सेवा को किसी बीमारी, तनाव या नींद की समस्या का चिकित्सकीय इलाज न समझें। Satyareport.com उपलब्ध दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
अमेरिका के एक किसान ने बिना सिंचाई के 40 साल तक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स उगाईं. उनकी ड्राई फार्मिंग तकनीक मिट्टी की नमी बचाकर कम पानी में खेती का रास्ता दिखाती है.
हम अक्सर बाजार में टमाटर, आलू या दूसरी सब्जियों की बढ़ी हुई कीमत देखकर परेशान हो जाते हैं. लेकिन इन सब्जियों को खेत से हमारी रसोई तक पहुंचाने के पीछे किसान की कितनी मेहनत होती है, इसका अंदाजा शायद ही हमें होता है. बदलते मौसम और पानी की कमी के बीच खेती करना आसान नहीं है. ऐसे में अमेरिका के एक किसान ने खेती का ऐसा तरीका अपनाया है, जो खासा दिलचस्प है. उन्होंने बिना सिंचाई के टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी फसलें उगाकर दिखा दी हैं. इस तरीके को ड्राई फार्मिंग कहा जाता है.
अमेरिका के ऑरिगन राज्य में रहने वाले इस किसान के लिए ड्राई फार्मिंग कोई नया प्रयोग नहीं है. वह करीब 40 साल से इस तरीके से खेती कर रहे हैं. उनका अनुभव बताता है कि अगर मिट्टी को सही तरीके से तैयार किया जाए और फसल का चुनाव सोच-समझकर किया जाए, तो कम पानी में भी खेती की जा सकती है.
पानी नहीं फिर भी फसल तैयार!
ड्राई फार्मिंग में सबसे ज्यादा ध्यान मिट्टी की तैयारी पर दिया जाता है. खेत की मिट्टी को इस तरह तैयार किया जाता है कि उसमें मौजूद नमी लंबे समय तक बनी रहे. किसान ने वसंत के मौसम में खेत की जुताई की थी. उस समय मिट्टी में इतनी नमी थी कि वह आपस में जुड़ी रह सके, लेकिन इतनी सूखी भी थी कि आसानी से बिखर रही थी. जुताई के बाद खेत को करीब तीन हफ्तों तक छोड़ दिया गया. इससे मिट्टी बीज बोने के लिए बेहतर स्थिति में आ गई और उसमें मौजूद नमी भी संरक्षित रही.
इस खेती में मिट्टी का प्रकार भी काफी मायने रखता है. किसान ने ऐसी चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल किया, जो पानी को ज्यादा समय तक अपने भीतर रोककर रख सकती है. इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए दलहन जैसी फसलों को भी खेती का हिस्सा बनाया गया. किसान ने शुरुआत में ड्राई फार्मिंग कैलिफोर्निया में की थी. बाद में साल 2007 में वह ऑरिगन चले गए और करीब 9.6 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की. यहां सबसे बड़ी चुनौती पानी की थी, क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने खेती जारी रखी और सफल भी रहे.
ऑरिगन यूनिवर्सिटी की 2014 में प्रकाशित एक स्टडी में भी उनके लंबे अनुभव का जिक्र किया गया था. इसके मुताबिक, 1974 से 2014 तक उन्होंने बिना सिंचाई के ऑर्गेनिक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी कई फसलें उगाईं. ड्राई फार्मिंग में बीज बोने का तरीका भी काफी अहम है. बीजों को मिट्टी में इस तरह रखा जाता है कि वे जमीन की नमी के ज्यादा करीब रहें. पौधों के आसपास की मिट्टी को कुछ इंच तक ढीला रखा जाता है, ताकि जड़ों को फैलने की जगह मिले. पौधों के बीच उचित दूरी भी रखी जाती है, जिससे सीमित पानी और पोषक तत्वों के लिए उनके बीच ज्यादा प्रतिस्पर्धा न हो.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राई फार्मिंग हर जगह आसानी से की जा सकती है. फसल का चुनाव, मिट्टी, मौसम और बारिश का पैटर्न इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. तेज बारिश या ऊपर से लगातार पानी डालना इस सिस्टम को बिगाड़ सकता है. फिर भी, जहां पानी की कमी है या सिंचाई का खर्च बहुत ज्यादा है, वहां ड्राई फार्मिंग खेती का एक उपयोगी विकल्प जरूर बन सकती है.
चीन के महजोंग पार्लर की मालकिन ने बुजुर्ग की जान बचाने की कोशिश की तो परिवार ने 2.6 लाख रुपए का जुर्माना वसूल लिया. जानिए कैसे कानून ने दिलाई इंसाफ की जीत.
चीन से एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग सोच में पड़ गए हैं. यहां एक महिला ने बुजुर्ग कस्टमर की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन इसके बदले उसे अपनी जेब से 19,000 युआन (यानी 2.68 लाख रुपए से अधिक) का मुआवजा देना पड़ गया. जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ कि भलाई करने वाली महिला गुनहगार बन गई और फिर पूरा इंसाफ कैसे हुआ?
पार्लर में अचानक बिगड़ी बुजुर्ग की तबीयत
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के हुनान प्रांत की यह घटना 17 अगस्त की है. शियाओ ऐहुआ नाम की महिला एक महजोंग पार्लर (एक तरह का गेमिंग क्लब) चलाती है. उनके पार्लर में 60 साल के लूओ नाम के एक बुजुर्ग नियमित तौर पर आते थे. उस दिन अचानक लूओ पार्लर में ही बेहोश होकर गिर पड़े. शियाओ ने बिना एक पल गंवाए मदद के लिए दौड़ लगाई. उन्हें लगा कि शायद गर्मी या लू लगने से ऐसा हुआ है, इसलिए उन्होंने बुजुर्ग को ताजी हवा में लाने की कोशिश की. हालांकि, घबराहट की वजह से वह तुरंत एम्बुलेंस नहीं बुला पाईं, लेकिन एक पड़ोसी ने समय पर फोन कर दिया और एम्बुलेंस आ गई. अस्पताल ले जाते समय वह जिंदा थे, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई.
’14 लाख दो वरना शव रखकर प्रदर्शन करेंगे’
अस्पताल में मौत के बाद बुजुर्ग के परिवार ने अजीबोगरीब ड्रामा शुरू कर दिया. सीसीटीवी फुटेज देखकर परिवार ने आरोप लगाया कि पार्लर मालकिन की लापरवाही और गलत तरीके से संभालने की वजह से मौत हुई है. परिवार ने पार्लर पर यह कहकर दबाव बनाया कि ग्राहक की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी थी. हद तो तब हो गई जब उन्होंने 1,00,000 युआन (यानी 14 लाख रुपए से अधिक) की मांग की और मुआवजा न मिलने पर पार्लर के बाहर बुजुर्ग का शव रखकर प्रदर्शन करने की धमकी दी. शियाओ और उनके पति इस मानसिक तनाव को झेल नहीं पाए और मजबूरी में डरकर 19,000 युआन दे दिए. इस सदमे से शियाओ की रातों की नींद उड़ गई और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई आपबीती
जब शियाओ के परिवार ने इस ज्यादती की पूरी कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की, तो इंटरनेट पर तूफान आ गया. लोग भड़क उठे और कहने लगे कि अब कोई किसी की जान बचाने आगे नहीं आएगा. जनता का भारी दबाव देखकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने तुरंत मामले की नए सिरे से जांच शुरू की और पाया कि बुजुर्ग की मौत नेचुरल थी. इसमें पार्लर मालकिन शियाओ की कोई गलती नहीं थी.
मध्य प्रदेश के दतिया में यातायात पुलिस की चेकिंग के दौरान उस वक्त अजीब स्थिति बन गई, जब एक महिला ने वाहन रोके जाने पर कहा कि उसे ‘माता आ गई हैं।’ महिला की इस बात के बाद मौके पर हंगामा खड़ा हो गया और कुछ देर के लिए ट्रैफिक पुलिस भी हैरान रह गई।
मामला शहर में चल रहे विशेष यातायात चेकिंग अभियान के दौरान का बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस वाहन और यातायात नियमों की जांच कर रही थी, तभी यह घटना सामने आई।
चेकिंग के दौरान अचानक बदला माहौल
दरअसल, ट्रैफिक पुलिस अभियान के तहत वाहनों को रोककर जरूरी दस्तावेज और यातायात नियमों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक वाहन को पुलिस ने रोका।
वाहन में मौजूद महिला ने अचानक कहा कि ‘मुझे माता आ गई हैं।’ महिला के इस कथन के बाद मौके पर मौजूद लोग भी उसकी ओर देखने लगे और स्थिति सामान्य चेकिंग से अलग हो गई।
महिला की बात सुनकर पुलिस भी रह गई हैरान
महिला के इस तरह कहने के बाद मौके पर मौजूद यातायात कर्मियों के सामने भी स्थिति कुछ देर के लिए असमंजस वाली बन गई। आसपास मौजूद लोगों की भी भीड़ जमा होने लगी।
मामले को लेकर मौके पर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में महिला के इस दावे की किसी स्वतंत्र या चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी नहीं दी गई है।
आस्था और पुलिस चेकिंग के बीच बना अजीब माहौल
घटना के बाद मौके पर कुछ देर तक हंगामा जैसी स्थिति बनी रही। एक तरफ यातायात पुलिस अपनी नियमित चेकिंग कर रही थी, वहीं दूसरी ओर महिला के ‘माता आने’ के दावे ने लोगों का ध्यान खींच लिया।
ऐसे मामलों में किसी धार्मिक या आध्यात्मिक दावे को तथ्य मानने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है। केवल किसी व्यक्ति के कहने या मौके पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसे चमत्कार या किसी अलौकिक घटना के रूप में प्रमाणित नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा की संभावना
इस तरह की घटनाएं अक्सर मौके पर मौजूद लोगों के मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड हो जाती हैं और बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनती हैं। हालांकि, किसी वीडियो के वायरल होने मात्र से उसमें दिखाई गई घटना की पूरी सच्चाई साबित नहीं होती।
दतिया की यह घटना भी इसी वजह से लोगों के बीच चर्चा में आई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामला यातायात पुलिस की चेकिंग के दौरान हुए घटनाक्रम से जुड़ा है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। महिला के ‘माता आने’ संबंधी दावे की स्वतंत्र चिकित्सकीय या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे तथ्यात्मक रूप से प्रमाणित अलौकिक घटना के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
अमेरिका में एक मरीज 271 दिनों तक जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे बिना डायलिसिस के रहा… बाद में उसे इंसानी किडनी मिली, जिससे ट्रांसप्लांट की नई उम्मीद जगी.
कल्पना कीजिए, किसी मरीज की दोनों किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं और उसकी जिंदगी डायलिसिस मशीन के भरोसे चल रही है. ऐसे में अगर डॉक्टर उसे इंसानी किडनी की जगह सूअर की किडनी लगा दें और वह किडनी करीब नौ महीने तक काम करती रहे, तो यह किसी मेडिकल चमत्कार से कम नहीं लगेगा. अमेरिका में डॉक्टरों ने ऐसा ही एक प्रयोग किया है, जिसने ट्रांसप्लांट की दुनिया में नई उम्मीद पैदा की है.
अमेरिका में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टरों ने एक ऐसे मरीज का मामला सामने रखा है, जिसने जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे 271 दिन तक बिना डायलिसिस के जिंदगी बिताई. खास बात यह है कि बाद में इस मरीज को इंसानी डोनर की किडनी भी मिल गई और उसका सफल ट्रांसप्लांट किया गया. The Lancet में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज का नाम टिम एंड्रयूज़ है. वह एंड-स्टेज किडनी फेल्योर से जूझ रहे थे और उन्हें लंबे समय से डायलिसिस की जरूरत थी. जनवरी 2025 में डॉक्टरों ने उन्हें जेनेटिकली एडिट की गई सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट की. ट्रांसप्लांट के बाद किडनी ने काम करना शुरू कर दिया और टिम को डायलिसिस से राहत मिल गई.
सूअर की किडनी ने दिया 9 महीने का जीवनदान
सबसे बड़ी बात यह रही कि यह किडनी करीब 271 दिनों तक उनके शरीर में काम करती रही यानी लगभग नौ महीने तक उन्हें डायलिसिस मशीन पर निर्भर नहीं रहना पड़ा. हालांकि बाद में सूअर की किडनी ने काम करना बंद कर दिया, लेकिन तब तक डॉक्टरों को इंसानी डोनर की किडनी मिल चुकी थी. इसके बाद टिम का मानव किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक, यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है जिसमें किसी मरीज ने जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी के सहारे इतने लंबे समय तक रहने के बाद सफलतापूर्वक इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट कराया. इस पूरे प्रयोग की सबसे अहम उपलब्धि यही मानी जा रही है कि मरीज कई महीनों तक डायलिसिस से दूर रह सका.
हालांकि सूअर की किडनी हमेशा के लिए काम नहीं कर पाई. ट्रांसप्लांट के करीब छह महीने बाद डॉक्टरों ने उसकी रक्त वाहिकाओं में नुकसान के संकेत देखे. धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती गई और किडनी की Efficiency प्रभावित होने लगी. आखिरकार डॉक्टरों को उसे निकालना पड़ा. स्टडी में शामिल डॉक्टर लियोनार्डो रिएला के मुताबिक, दुनियाभर में जरूरतमंद मरीजों की तुलना में डोनर किडनी की संख्या काफी कम है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से जानवरों के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं. इसे मेडिकल भाषा में जेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है.
फिलहाल सूअर की किडनी इंसानी किडनी का स्थायी विकल्प नहीं बनी है. लेकिन इस मामले ने यह जरूर दिखाया है कि जेनेटिकली एडिट किए गए जानवरों के अंग भविष्य में उन मरीजों के लिए एक तरह का ‘ब्रिज’ बन सकते हैं, जिन्हें इंसानी डोनर का इंतजार करना पड़ रहा है. अगर इस तकनीक को और सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सका, तो आने वाले समय में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे लाखों मरीजों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है.
अमेरिका की मशहूर बीयर कंपनी Pabst Blue Ribbon इन दिनों एक बेहद अजीब चोरी की वजह से चर्चा में है। कंपनी का करीब 40,000 पाउंड यानी लगभग 18,000 किलो बीयर का शिपमेंट चोरी हो गया। मामला सामने आने के बाद कंपनी ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी सहारा लिया और कथित चोरों के लिए ऐसी अपील कर दी, जिसने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच लिया।
कंपनी ने सोशल मीडिया पर चोरी हुए माल को वापस करने के लिए चोर को बाकायदा 18 दिन और 44 मिनट की डेडलाइन दे दी। इतना ही नहीं, कंपनी ने संकेत दिया कि अगर पूरा ट्रक वापस कर दिया जाए तो वह इस मामले में ज्यादा सवाल-जवाब नहीं करेगी।
सोशल मीडिया पर चोर को दिया सीधा संदेश
Pabst Blue Ribbon ने सोशल मीडिया पर चोरी हुए शिपमेंट को लेकर एक पोस्ट शेयर की। पोस्ट में एक डिलीवरी ट्रक की तस्वीर दिखाई गई, जिस पर बड़े अक्षरों में ‘STOLEN’ लिखा था।
कंपनी ने अपने संदेश में कथित चोर को सीधे संबोधित करते हुए मजाकिया लेकिन गंभीर अंदाज अपनाया। कंपनी का कहना था कि अगर कोई अपने दोस्तों के सामने इस बात की शेखी बघारना चाहता है कि उसके पास कितनी बीयर है, तो यह उसकी बात है, लेकिन समस्या यह है कि यह बीयर ईमानदारी से उसके हाथ नहीं लगी।
इसके बाद कंपनी ने चोरी का माल वापस करने के लिए 18 दिन और 44 मिनट की समयसीमा रख दी।
‘बिना सवाल-जवाब के ट्रक लौटा दो’
कंपनी की सोशल मीडिया अपील का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही था।
Pabst ने कथित चोर से कहा कि अगर वह पूरा ट्रक वापस कर देता है तो कंपनी इस मामले में ज्यादा सवाल-जवाब नहीं करेगी। साथ ही, कंपनी ने ऐसे लोगों के लिए इनाम की बात भी कही जो चोरी हुए शिपमेंट को खोजने में मदद कर सकते हैं।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मामला किसी प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं है, बल्कि वास्तव में चोरी हुई है।
34 हजार बीयर कैन लेकर फरार हुए चोर
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना 17 अगस्त को कैलिफोर्निया के मोंटक्लेयर में हुई।
बताया गया कि वहां स्थित Anheuser-Busch के एक डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर से कार्गो चोरी की घटनाएं हुईं। पुलिस के अनुसार, चोरों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके शिपमेंट हासिल की।
चोरी हुए माल में करीब 34,000 बीयर कैन बताए गए हैं। इन सभी का कुल वजन लगभग 40,000 पाउंड यानी करीब 18,000 किलो था।
यानी मामला कुछ बीयर की पेटियों की चोरी का नहीं, बल्कि एक बड़े कमर्शियल शिपमेंट के गायब होने का था।
पुलिस कर रही है मामले की जांच
पुलिस के मुताबिक, उस दिन दो अलग-अलग कार्गो चोरी की घटनाओं की जानकारी सामने आई थी। दोनों मामलों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर शिपमेंट उठाई गई।
चोरी के बाद कंपनी ने मामले को सार्वजनिक किया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंच सके और गायब माल का पता लगाने में मदद मिल सके।
KitKat की चोरी से क्यों होने लगी तुलना?
Pabst की चोरी की यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो लोगों को इस साल सामने आए एक दूसरे चर्चित कार्गो चोरी के मामले की याद आ गई।
यूरोप में करीब 12 टन KitKat चॉकलेट की चोरी की खबर ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। बताया गया था कि इटली से पोलैंड जा रहे एक ट्रक से बड़ी संख्या में KitKat बार गायब हो गए थे।
उस मामले में भी चॉकलेट कंपनी की ओर से चोरी हुए माल को खोजने के लिए लोगों से मदद मांगी गई थी।
KitKat ने भी Pabst की पोस्ट पर किया कमेंट
Pabst Blue Ribbon की चोरी की पोस्ट पर KitKat ने भी मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी।
KitKat ने संकेत दिया कि उसे भी ऐसी चोरी की घटनाओं का अनुभव है। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स के बीच दोनों मामलों की तुलना और ज्यादा होने लगी।
एक तरफ हजारों किलो बीयर और दूसरी तरफ टनों चॉकलेट—दोनों मामलों में चोरी हुए खाने-पीने के सामान की बड़ी मात्रा ने इंटरनेट यूजर्स का ध्यान खींचा।
मार्केटिंग स्टंट या असली चोरी?
सोशल मीडिया पर इस तरह की मजेदार भाषा देखकर कुछ लोगों को यह किसी विज्ञापन या मार्केटिंग कैंपेन जैसा भी लग सकता है। लेकिन कंपनी ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि मामला वास्तविक है और वह चोरी हुए शिपमेंट को वापस पाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर कंपनी की मजाकिया अपील ने गंभीर चोरी के मामले को एक वायरल इंटरनेट स्टोरी जरूर बना दिया।
अब देखना यह है कि कंपनी की 18 दिन और 44 मिनट वाली डेडलाइन के बाद चोरी हुआ बीयर शिपमेंट वापस मिलता है या नहीं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और कंपनी की सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किए गए विवरणों पर आधारित है। चोरी के मामले में अंतिम तथ्य पुलिस जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे। Satyareport.com किसी भी अपुष्ट आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
चीन के शेनझेन में एक उद्यमी ने पीठ और शरीर खुजाने की सर्विस को बिजनेस बना दिया है. 300 युआन की एक घंटे की सर्विस से उसके दो स्टोर हर महीने करीब 14 लाख रुपये कमा रहे हैं.
पीठ में खुजली हो और हाथ वहां तक न पहुंचे, तो आमतौर पर हम किसी करीबी से इसे खुजाने के लिए कहते हैं. लेकिन चीन के एक शख्स ने इसी रोजमर्रा की जरूरत को एक अनोखे बिजनेस आइडिया में बदल दिया है. अब लोग पैसे देकर अपनी खुजली किसी दूसरे से खुजवा रहे हैं और इस अजीबोगरीब सर्विस से हर महीने लाखों रुपये की कमाई हो रही है.
चीन के शेनझेन शहर में 32 साल के झांग शियाओचियाओ ने इस खास तरह की सर्विस शुरू की है. उनकी कंपनी ‘सुमा’ के नाम से दो आउटलेट चला रही है, जहां ग्राहक आराम से बेड पर लेटते हैं और ट्रेनर कर्मचारी शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हल्के हाथों से खुजाते हैं. ग्राहक खुद भी बता सकते हैं कि उन्हें किस जगह ज्यादा ध्यान चाहिए. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, एक घंटे की इस सर्विस के लिए करीब 300 युआन यानी लगभग 4,200 रुपये लिए जाते हैं. इसके लिए कर्मचारियों को खास तरीके से तैयार किए गए नुकीले नेल्स दिए जाते हैं, जिनकी मदद से वे धीरे-धीरे खुजाने का काम करते हैं.
अब क्या है इनका टारगेट?
इस सर्विस को सिर्फ खुजली मिटाने तक सीमित नहीं रखा गया है. इसे तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस कराने वाले अनुभव के तौर पर पेश किया जा रहा है. कुछ ग्राहकों का कहना है कि इससे उन्हें आराम मिलता है और नींद आने में भी मदद हो सकती है. वहीं, शरीर के कुछ संवेदनशील हिस्सों पर खुजाने के दौरान कई ग्राहक हंसने भी लगते हैं, जिससे पूरा एक्सपीरियंस थोड़ा मजेदार हो जाता है.
झांग के मुताबिक, इस बिजनेस को शुरू करना सुनने में जितना आसान लगता है, असल में उतना था नहीं. चीन में इस तरह की सर्विस का कोई तैयार मॉडल मौजूद नहीं था. इसलिए उन्होंने खुद शरीर के अलग-अलग हिस्सों और खुजाने की तकनीकों पर रिसर्च की. इसके बाद ऐसी तकनीक तैयार की गई जिसे कर्मचारियों को सिखाया जा सके और हर ग्राहक को एक जैसा अनुभव दिया जा सके. झांग को इस आइडिया का ख्याल पिछले साल सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक छोटे से वीडियो से आया. वीडियो में एक महिला अपने पति की पीठ खुजा रही थी. वीडियो पर आए कमेंट्स ने झांग का ध्यान खींचा, क्योंकि कई लोगों ने लिखा था कि वे किसी को पैसे देकर अपनी पीठ खुजवाना पसंद करेंगे.
यहीं से झांग ने सोचना शुरू किया कि क्या इस छोटी सी जरूरत को बाकायदा एक बिजनेस में बदला जा सकता है. इस आइडिया के पीछे उनके बचपन की एक याद भी थी. झांग बताते हैं कि जब वह छोटे थे, तो उनके पिता उनकी पीठ खुजाया करते थे. उन्हें इससे काफी सुकून मिलता था और कई बार उन्हें नींद भी आ जाती थी. झांग ने मई की शुरुआत में शेनझेन के बाओआन जिले में पहला आउटलेट खोला. करीब एक महीने बाद फुतियान जिले में दूसरा स्टोर भी शुरू कर दिया गया. उनका दावा है कि दोनों आउटलेट अब अपनी लागत निकालने के बाद मुनाफा कमा रहे हैं और दोनों स्टोर्स से हर महीने करीब 100,000 युआन यानी लगभग 14 लाख रुपये की कमाई हो रही है.
इस सर्विस को पुरुष और महिलाएं दोनों पसंद कर रहे हैं, हालांकि फिलहाल पुरुष ग्राहकों की संख्या ज्यादा है. झांग के अनुसार, करीब 70 फीसदी ग्राहक पुरुष हैं और 30 फीसदी महिलाएं. अब झांग की नजर बिजनेस को एक्सपेंड करने को लेकर है. उनका टारगेट है आने वाले समय में पूरे चीन में ऐसे 100 स्टोर खोलना है यानी जो काम लोग आमतौर पर घर पर किसी करीबी से करवाते हैं, उसे झांग ने बाकायदा एक पेड सर्विस बना दिया है.