Category: Gazab

  • धरती पर मौजूद है मिट्टी से रचा देवलोक, इतिहास और अध्यात्म का है अद्भुत संगम.

    धरती पर मौजूद है मिट्टी से रचा देवलोक, इतिहास और अध्यात्म का है अद्भुत संगम.

    धरती पर मौजूद है मिट्टी से रचा देवलोक, इतिहास और अध्यात्म का है अद्भुत संगम

    धरती पर कश्मीर को स्वर्ग कहा जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि धरती पर प्राकृतिक देवलोक भी मौजूद है। हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित बिष्णुपुर शहर की, जो बंगाल की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

    यहां के मंदिर सिर्फ अध्यात्म और आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि खुद में एक इतिहास को समेटे हैं। यह छोटा सा शहर अपने प्रसिद्ध उत्कृष्ट शिल्प कौशल के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें सिर्फ मिट्टी का इस्तेमाल होता है। पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित बिष्णुपुर शहर अपने आप में अनोखा है।

    बिष्णुपुर शहर में कई मंदिर बने हैं जो प्राचीन होने के साथ-साथ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इस कला को देखने के लिए न सिर्फ देश के अलग-अलग राज्यों से बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। इस शहर में बने सभी मंदिरों को सिर्फ मिट्टी से बनाया गया है और किसी तरह के सीमेंट और पत्थर का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

    मंदिर का बनाव बंगाल की समृद्ध विरासत की गवाही देता है।पक्की मिट्टी से तैयार इन मंदिरों की दीवारों पर महाभारत और रामायण काल की कहानियों को प्रतिमा के जरिए उकेरा गया है। यही कारण है कि यहां की मिट्टी की प्रतिमाओं में आस्था के साथ कला की छठा भी दिखती है। इन मंदिरों पर की गई जटिल मिट्टी की नक्काशी धार्मिक और सांस्कृतिक कहानियों का एक समृद्ध ताना-बाना बुनती है,

    जो इन्हें भारत की स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न अंग बनाती है।यूनेस्को ने इन मंदिरों को बेहतरीन नमूनों की अस्थायी सूची में शामिल किया है और हर साल इन मंदिरों को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां आपको रासमंच मंदिर, जोड़ बांग्ला मंदिर, मदन मोहन मंदिर, रघुनाथ जीऊ मंदिर, नूतन महल, विष्णुपुर हवा महल जैसे कई मंदिर देखने को मिल जाएंगे और मुख्यत: वैष्णव धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं।

    यहां घूमने का सही समय सितंबर से दिसंबर और फरवरी-मार्च रहता है। इस समय मौसम का तापमान कम रहता है और यह घूमने के लिए सही तापमान है। इस वक्त सबसे ज्यादा संख्या में पर्यटक घूमने के लिए बिष्णुपुर शहर पहुंचते हैं।

  • OMG! खेल-खेल में 11 साल के बच्चे ने की ऐसी खोज, जिसे देखकर खुद वैज्ञानिक भी हुए हैरान.

    OMG! खेल-खेल में 11 साल के बच्चे ने की ऐसी खोज, जिसे देखकर खुद वैज्ञानिक भी हुए हैरान.

    OMG! खेल-खेल में 11 साल के बच्चे ने की ऐसी खोज, जिसे देखकर खुद वैज्ञानिक भी हुए हैरान

    Ajab Gajab 11 साल के इस बच्चे ने समुद्र किनारे खेलते हुए पत्थर का अजीब टुकड़ा देखा. बच्चे ने तुरंत उस अजीब पत्थर को अपने पास रख लिया. मगर जब वैज्ञानिकों ने उस पत्थर की जांच की तब वो 18 लाख साल पुराना खजाना निकला.

    छोटी उम्र में ही बच्चे कभी-कभी ऐसा कारनामा कर देते हैं जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान रह जाता है. ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला इंग्लैंड से सामने आया है. यहां 11 साल एक के बच्चे ने खेल-खेल में ऐसी खोज कर डाली, जिसने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है. न्यूयॉर्क पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक 11 साल के इस बच्चे ने समुद्र किनारे खेलते हुए पत्थर का अजीब टुकड़ा देखा. बच्चे ने तुरंत उस अजीब पत्थर को अपने पास रख लिया. मगर जब वैज्ञानिकों ने उस पत्थर की जांच की तब वो 18 लाख साल पुराना खजाना निकला.

    मानसून की दमदार वापसी, सैटेलाइट में दिखी 1500KM लंबी बारिश की पट्टी; इन राज्यों में होगी झमाझम बारिश

    समुद्र किनारे टहल रहा था बच्चा

    रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना 24 मई की है. इंग्लैंड के सफोक इलाके के बोड्सी बीच पर 11 साल का चार्ली ऑर्चर्ड-लिसल अपनी मां एलेनोर के साथ टहल रहा था. तभी उसकी नजर लहरों के पास पड़े एक अजीब से पत्थर पर गई. बच्चे ने उसे पत्थर समझकर उठा लिया. मगर तभी परिवार को समझ आ गया कि ये कोई साधारण पत्थर नहीं है. बाद में वैज्ञानिक जांच के बाद पता चला कि वो साधारण पत्थर करीब 18 लाख साल पुराना हाथी का दांत निकला. मामले में चार्ली की मां ने बताया कि बीच पर पहुंचने से कुछ मिनट पहले ही उनका बेटा हाथियों के बारे में बात कर रहा था और कह रहा था कि उसे हाथी बहुत पसंद हैं. ऐसे में हाथी से जुड़ी इतनी बड़ी चीज मिलना उनके लिए किसी संयोग से कम नहीं था.

    बच्चे ने खोजा 18 लाख साल पुराना खजाना

    परिवार ने उस चीज की तस्वीरें एक्सपर्ट्स को भेजीं. जांच के बाद लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के जीवाश्म वैज्ञानिक प्रोफेसर एड्रियन लिस्टर ने पुष्टि की कि यह अनानकस अर्वरनेन्सिस नाम की विलुप्त हो चुकी हाथी की प्रजाति का ऊपरी जबड़े का दाढ़ वाला दांत है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह प्रजाति करीब 85 लाख साल पहले से लेकर 20 लाख साल पहले तक धरती पर रहती थी. यह आज के अफ्रीकी हाथियों की रिश्तेदार मानी जाती है और इसकी ऊंचाई करीब 8 फीट से ज्यादा होती थी.

    समुद्र की लहरों से बाहर निकला हाथी दांत

    करीब 4 इंच चौड़ा यह दांत लाखों साल तक जमीन के अंदर दबा रहा. समय के साथ यह पूरी तरह खनिज में बदल गया, इसलिए आज भी इसकी बनावट काफी अच्छी हालत में है. लाखों साल पुराना हाथी दांत मिलने पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये जीवाश्म बोड्सी के रेड क्रैग इलाके की चट्टानों में दबा हुआ था. समुद्र की लहरों और तटीय कटाव की वजह से यह बाहर निकल आया और किनारे तक पहुंच गया, जहां चार्ली की नजर इस पर पड़ी.

  • नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच मलबे से निकला कैश! कीचड़ में दबे मिले नोटों के बंडल, वायरल वीडियो ने चौंकाया..

    नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच मलबे से निकला कैश! कीचड़ में दबे मिले नोटों के बंडल, वायरल वीडियो ने चौंकाया..

    नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और पानी के तेज बहाव ने कई इलाकों में घरों और सामान को अपनी चपेट में ले लिया। पानी कम होने के बाद जब लोग मलबा और कीचड़ हटाकर अपनों और सामान की तलाश कर रहे हैं, तो उन्हें कई ऐसी चीजें मिल रही हैं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान है।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें मलबे और कीचड़ के बीच से नोटों की गड्डियां और कीमती सामान निकाले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

    मलबे में मिला नोटों से भरा बैग

    वायरल हो रहे एक वीडियो में कुछ लोग बाढ़ के बाद जमा हुए मलबे को हटाते नजर आते हैं। इसी दौरान उन्हें एक लाल रंग की साड़ी में लिपटा हुआ काफी कैश दिखाई देता है।

    इसके अलावा एक शख्स को लाल रंग का हैंडबैग भी मिलता है। जब बैग की जिप खोली जाती है तो उसके अंदर नोटों की कई गड्डियां दिखाई देती हैं। वीडियो में सामान निकाल रहे लोगों ने नारंगी रंग की जैकेट पहन रखी है, जिससे उनके रेस्क्यू टीम का हिस्सा होने का दावा किया जा रहा है।

    क्या बैंक का लॉकर भी बह गया था?

    नेपाल की बाढ़ से जुड़े सोशल मीडिया वीडियो के साथ कई तरह के दावे भी किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में दावा किया गया है कि बाढ़ के दौरान स्थानीय बैंक की एक शाखा का वॉल्ट या लॉकर भी पानी के तेज बहाव में बह गया।

    इसके बाद कथित तौर पर बैंक से जुड़ी नकदी और अन्य सामान मलबे के बीच मिलने की बातें सामने आईं। हालांकि, वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    कीचड़ और पानी से निकल रहा सामान

    सोशल मीडिया पर सामने आए अन्य वीडियो में भी बाढ़ के बाद कीचड़ और पानी में दबे लॉकर या दूसरे सामान से नोटों की गड्डियां निकलती हुई दिखाई देती हैं। अलग-अलग वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

    वीडियो में नजर आ रहे ये दृश्य इस बात का अंदाजा देते हैं कि बाढ़ का पानी अपने साथ कितना बड़ा नुकसान लेकर आया होगा। कई लोगों के घर और दुकानें तबाह हो गईं, जबकि बड़ी मात्रा में सामान पानी के तेज बहाव में बह गया।

    तबाही के बाद अपनों की तलाश

    नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों ने अपना घर और जरूरी सामान खो दिया है। पानी कम होने के बाद लोग मलबे को हटाकर अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

    कुछ जगहों पर मलबे से शव भी बरामद होने की खबरें सामने आई हैं, जबकि कई परिवार अभी भी अपने परिजनों के मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

    वायरल हो रहे कैश और सामान से जुड़े वीडियो इसी भयावह तबाही के बीच सामने आए हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही घटनाओं और उनके साथ किए जा रहे दावों की पुष्टि अलग-अलग स्तर पर होना बाकी है।

  • एक शाम घर से निकली  छात्रा, फिर कभी वापस नहीं लौटी; गले की माला बनी हत्या का हथियार..

    एक शाम घर से निकली छात्रा, फिर कभी वापस नहीं लौटी; गले की माला बनी हत्या का हथियार..

    बिहार के जिले में कुछ समय पहले एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 वर्षीय छात्रा की कथित तौर पर गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। वह इसी साल बोर्ड परीक्षा देने वाली थी, लेकिन परीक्षा से पहले ही उसकी जिंदगी खत्म हो गई।

    मामले में मृतका के परिवार ने एक 24 वर्षीय महिला पर गंभीर आरोप लगाए थे।

    शाम को घर से निकली थी छात्रा

    परिवार के मुताबिक, घटना वाली शाम करीब सात बजे छात्रा को दूर के रिश्ते में बुआ लगने वाली एक महिला अपने साथ लेकर गई थी। परिवार को अंदाजा नहीं था कि इसके बाद कुछ ऐसा होने वाला है, जिससे उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी।

    कुछ समय बाद छात्रा की हत्या की खबर सामने आई। परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला ने छात्रा पर जबरन समलैंगिक संबंध बनाने का दबाव बनाया था।

    इनकार करने पर हत्या का आरोप

    मृतका के पिता ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि उनकी बेटी ने महिला की मांग मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद कथित तौर पर उसके गले में पहनी रुद्राक्ष की माला से ही उसका गला घोंट दिया गया।

    परिवार के इस आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले इन आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता था।

    पहले से लड़कियों को प्रभावित करने का भी आरोप

    परिवार ने महिला पर एक और गंभीर आरोप लगाया था। उनका कहना था कि वह पहले भी कुछ लड़कियों को आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा देकर अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करती थी और उनके साथ गलत व्यवहार करती थी।

    हालांकि, इन आरोपों की भी पुलिस की ओर से उस समय आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कराया गया। मामले में हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई और फॉरेंसिक जांच के लिए एफएसएल टीम को भी बुलाया गया।

    पुलिस का कहना था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच से मौत की परिस्थितियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

    बोर्ड परीक्षा से पहले खत्म हो गई जिंदगी

    जिस छात्रा को कुछ ही समय बाद 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठना था, उसकी मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। पढ़ाई और भविष्य के सपनों के बीच वह एक ऐसी घटना का शिकार हो गई, जिसकी पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आनी थी।

    इस मामले में सबसे अहम बात यही रही कि परिवार की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों और पुलिस जांच के निष्कर्षों के बीच फर्क रखा जाए। हत्या के वास्तविक कारण और घटनाक्रम की पुष्टि जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकती है।

  • महाराणा प्रताप : मेवाड़ का वो शेर, जब कहीं जाता तो करता था मिट्टी का तिलक, उसकी वीरता की कहानी अमर..

    महाराणा प्रताप : मेवाड़ का वो शेर, जब कहीं जाता तो करता था मिट्टी का तिलक, उसकी वीरता की कहानी अमर..

    महाराणा प्रताप : मेवाड़ का वो शेर, जब कहीं जाता तो करता था मिट्टी का तिलक, उसकी वीरता की कहानी अमर

    भारत के इतिहास में वीरता और राष्ट्रभक्ति की गाथा गाता है एक ऐसा नाम, जिन्हें कहा गया ‘मेवाड़ का शेर’। कई मध्ययुगीन इतिहासकारों ने उन्हें ‘कीका’ नाम से संबोधित किया। उन्हें यह नाम भीलों से मिला था और इस नाम का मतलब था ‘बेटा’।

    प्रजा के लिए प्रेम, दया भाव था और यही वजह है कि वे एक योद्धा ही नहीं थे, बल्कि एक आदर्श राजा भी थे। बात हो रही है भारत के वीर सपूत और मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप सिंह की। 9 मई 1540 को महाराणा प्रताप सिंह का जन्म राजपूत वंश में राणा उदय सिंह ‌द्वितीय के यहां हुआ। बचपन से ही उनमें वीरता और शौर्य के गुण कूट-कूट कर भरे थे। घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्ध कौशल में उन्हें महारत हासिल थी।

    मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ पर मुगलों के आक्रमण के बाद राणा उदय सिंह को गुरिल्ला युद्ध अपनाना पड़ा। इस संघर्षपूर्ण माहौल में महाराणा प्रताप पले-बढ़े। उन्होंने अपने पिता से स्वतंत्रता की ज्वाला को विरासत में लिया। जब अकबर ने मेवाड़ को अधीन करने के लिए बल प्रयोग किया, तब महाराणा प्रताप ने मुगल अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने जंगलों में रहकर गुरिल्ला युद्ध आरंभ किया।राणा प्रताप के बारे में मशहूर था कि वे जहां भी जाते थे, जाने से पहले मेवाड़ की मिट्टी उठाकर माथे से लगाते थे। सिर्फ यही नहीं, वे एक चुटकी मिट्टी को बांधकर अपने साफे के एक कोने में रखा करते थे।उनके इतिहास में बताया जाता है कि 1572 में राणा उदय सिंह द्वितीय का देहांत हुआ तो सबसे बड़े बेटे राणा प्रताप के होने के बावजूद उन्होंने अपने 9वें नंबर के बेटे जगमाल को अपना उत्तराधिकारी बनाया था।

    यह अलग बात है कि राज्य के मंत्रियों और दरबारियों ने अंततः राणा प्रताप को सिंहासन पर बैठवाया।मुगल सम्राट अकबर ने मेवाड़ को जीतने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया। चित्तौड़ का दुर्ग खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाकर उन्होंने मुगलों को निरंतर चुनौती देते रहे 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने अकबर की विशाल सेना का मुकाबला किया।

    भले ही युद्ध में उन्हें पीछे हटना पड़ा, लेकिन उनकी वीरता और शौर्य अद्वितीय था।युद्ध में घायल होने के बाद भी उनका वफादार घोड़ा चेतक उन्हें सुरक्षित स्थान तक ले गया। युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने वनवास अपना लिया, मगर कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। भील और अन्य जनजातियों की सहायता से उन्होंने मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनके सैनिक साहस और रणनीति के कारण मुगलों को मेवाड़ पर पूर्ण अधिकार जमाने में कामयाबी नहीं मिली। महाराणा प्रताप ने ऐश्वर्य और सुख सुविधाओं को त्याग कर स्वाभिमान को सर्वोपरि रखा।

    इतिहास में कहीं एक जगह यह लिखा गया है कि हल्दी घाटी में महाराणा प्रताप की हार हुई, पर सारे घटनाक्रम को गहराई से देखा जाए तो पता चलेगा कि यह एक शाही सेना और महाराणा की सेना के बीच 4 घंटे का संक्षिप्त संघर्ष अनिर्णित रहा, जिसमें महाराणा का पलड़ा भारी रहा और शाही सेना भयभीत थी।अपने जीवनकाल में भले ही वे मेवाड़ को पूर्ण रूप से मुक्त न करा सके, परन्तु उन्होंने मुगलों के विरुद्ध संघर्ष की अलख जगाई। मेवाड़ के शेर के रूप में विख्यात महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष और त्याग का प्रतीक है।

    वीर-श्रेष्ठ महाराणा के कार्य आज भी मेवाड़ की एक-एक पुस्तक और साहित्य में वर्तमान समय में जान पड़ते हैं। आज भी उनके वीर कार्यों की कथाएं और गीत प्रत्येक मेवाड़ी के हृदय में उत्तेजना पैदा करते हैं। महाराणा का नाम न सिर्फ राजपूताने में बल्कि पूरे भारतवर्ष में अत्यंत आदर और श्रद्धा से लिया जाता है। अंग्रेजी व भारतवर्ष की प्रायः सभी भाषाओं में प्रताप के वीरत्व और यषोगान के अनेक ग्रंथ बन चुके हैं।

  • हजारों KM दूर मिला भारत का 2000 साल पुराना खजाना, थाईलैंड में हुई इस अनोखी खोज से लोग हैरान..

    हजारों KM दूर मिला भारत का 2000 साल पुराना खजाना, थाईलैंड में हुई इस अनोखी खोज से लोग हैरान..

    हजारों KM दूर मिला भारत का 2000 साल पुराना खजाना, थाईलैंड में हुई इस अनोखी खोज से लोग हैरान

    भारत से हजारों किलोमीटर दूर थाईलैंड में पुरात्व विभाग ने एक ऐसी खोज की है, जिसने हजारों साल पुरानी भारतीय संस्कृति को फिर से चर्चा में ला दिया है.

    खोज में मिली एक और अंगूठी

    रिपोर्ट के मुताबिक पुरात्व विभाग को एक और प्राचीन अंगूठी मिली है. हालांकि सोने की इस अंगूठी पर किसी तरह का पैटर्न या संदेश लिखा हुआ नजर नहीं आता. प्राचीन चीजों की समझ रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंगूठी का मालिक जरूर व्यापारी होगा. जिसे प्राचीन जाति व्यवस्था में वैश्य समाज से जुड़ा माना गया है, जो उस समय व्यापार के लिए दूर-दूर तक यात्रा करते थे. थाईलैंड के फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट के मुताबिक ये खोज दून याई थॉन्ग (Don Yai Thong) पुरातात्विक स्थल पर हुई है. खुदाई के दौरान मानव कंकालों के साथ ये अंगूठियां मिलीं, जिससे माना जा रहा है कि इन्हें किसी बेहद खास और संपन्न व्यक्ति के साथ दफनाया गया होगा.

    कैसे मिलीं प्राचीन अंगूठी

    रिपोर्ट के मुताबिक ये पुरातात्विक स्थल इसी साल तब चर्चा में आया था, जब स्थानीय लोगों को धान के खेत में प्राचीन कांस्य ढोल के टुकड़े मिले थे. इसके बाद यहां वैज्ञानिक तरीके से खुदाई शुरू की गई. अब तक यहां से कई मानव कंकाल, सोने और कांसे के आभूषण, मिट्टी के बर्तन और अन्य प्राचीन वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये पूरा इलाका करीब 1,500 से 2,500 साल पुराना है और उस दौर में यहां संपन्न लोगों का अंतिम संस्कार या दफन संस्कार किया जाता था.

    भारत के हजारों साल पुराने रिश्ते

    ब्राह्मी लिपि वाली सोने की अंगूठी मिलने के बाद भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच हजारों साल पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों पर नई चर्चा शुरू हो गई है. अब इस खोज की आगे भी गहन जांच की जाएगी, जिससे इतिहास के कई और राज सामने आने की उम्मीद है.

  • अमेरिका का वो वीरान शहर, जहां 65 साल से जमीन के नीचे धधक रही आग; रहस्य जानकर चौंक जाएंगे..

    अमेरिका का वो वीरान शहर, जहां 65 साल से जमीन के नीचे धधक रही आग; रहस्य जानकर चौंक जाएंगे..

    दुनिया में कई ऐसी जगहें मौजूद हैं, जिनके पीछे की कहानी आज भी लोगों को हैरान करती है। अमेरिका का सेंट्रालिया शहर भी ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है, जो कभी लोगों से गुलजार रहता था, लेकिन आज लगभग पूरी तरह वीरान हो चुका है। इस शहर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां जमीन के नीचे लगी आग कई दशकों से लगातार जल रही है।

    कभी खनन के लिए मशहूर था सेंट्रालिया

    अमेरिका के पेंसिलवेनिया राज्य में स्थित सेंट्रालिया कभी एक व्यस्त माइनिंग टाउन हुआ करता था। यहां बड़े पैमाने पर कोयले की खदानें थीं और बड़ी संख्या में लोग खनन से जुड़े काम करते थे।

    लेकिन समय के साथ हालात बदलते गए। साल 1962 के आसपास यहां भूमिगत कोयला खदानों में आग फैल गई। आग को बुझाने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन इसे पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सका।

    जमीन के नीचे आज भी जल रही आग

    बताया जाता है कि भूमिगत कोयले की परतों में फैली यह आग धीरे-धीरे जमीन के नीचे आगे बढ़ती रही। दशकों गुजरने के बावजूद आग पूरी तरह शांत नहीं हुई। कई जगहों पर जमीन से धुआं और जहरीली गैसें निकलने की खबरें सामने आती रही हैं।

    भूमिगत आग के कारण इलाके में रहना लोगों के लिए लगातार खतरनाक होता चला गया। यही वजह रही कि धीरे-धीरे सेंट्रालिया की आबादी कम होती गई और लोगों ने इस शहर को छोड़ना शुरू कर दिया।

    1980 तक आबादी थी करीब 2700

    रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 1980 तक सेंट्रालिया में करीब 2700 लोग रहते थे। मगर भूमिगत आग और उससे पैदा होने वाले खतरे के कारण यहां से लगातार पलायन होता रहा।

    समय के साथ स्थिति ऐसी हो गई कि शहर में गिने-चुने लोग ही रह गए। रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरकार बचे हुए लोगों ने भी वर्ष 2020 तक यहां से दूसरी जगहों का रुख कर लिया।

    आग बुझाने की कोशिशें भी हुईं नाकाम

    सेंट्रालिया की भूमिगत आग को बुझाने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन आग को पूरी तरह खत्म करना बेहद मुश्किल साबित हुआ। कोयले की भूमिगत परतों में आग फैलने के कारण इसे नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण बना रहा।

    इसके साथ ही जमीन के नीचे से निकलने वाली गैसों ने भी इस इलाके को खतरनाक बना दिया। जांच में यहां कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया है, जो इंसानों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकती है।

    क्यों वीरान हो गया पूरा शहर?

    लगातार जलती भूमिगत आग, जहरीली गैसों का खतरा और जमीन के अस्थिर होने की आशंका ने सेंट्रालिया को रहने के लिए बेहद जोखिम भरा बना दिया। नतीजा यह हुआ कि कभी आबाद रहने वाला यह शहर धीरे-धीरे खाली हो गया।

    आज सेंट्रालिया का नाम दुनिया की उन रहस्यमयी जगहों में लिया जाता है, जहां इंसानी बस्ती लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन जमीन के नीचे आग अब भी अपना असर दिखा रही है।

  • मॉडलिंग की चमक के पीछे छिपा काला खेल, एक ईमेल ने खोल दिया खौफनाक राज..

    मॉडलिंग की चमक के पीछे छिपा काला खेल, एक ईमेल ने खोल दिया खौफनाक राज..

    ग्लैमर की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखाई देती है, उसके पीछे की कुछ कहानियां उतनी ही डरावनी होती हैं। कुछ महीने पहले सामने आए दस्तावेजों ने ऐसी ही एक कहानी को फिर चर्चा में ला दिया था। इस मामले में एक चर्चित अमेरिकी अरबपति और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े पुराने ईमेल सामने आए, जिनमें युवा मॉडल्स को लेकर बेहद आपत्तिजनक बातचीत का खुलासा हुआ।

    इन संदेशों ने यह सवाल खड़ा किया कि मॉडलिंग में करियर बनाने का सपना देखने वाली युवतियों को किस तरह कथित तौर पर लालच और प्रभाव के जाल में फंसाया जाता था।

    एक ईमेल और खुल गया पूरा राज

    कहानी कई साल पुरानी है। एपस्टीन के संपर्क में रहने वाले एक मॉडल एजेंट के साथ उसकी लगातार ईमेल के जरिए बातचीत होती थी। इन संदेशों में युवा महिलाओं की उम्र, उनकी आर्थिक स्थिति, खूबसूरती और एपस्टीन के साथ मुलाकात की संभावनाओं पर चर्चा की जाती थी।

    एक ईमेल में एजेंट ने आर्थिक परेशानी से जूझ रही करीब 20 साल की एक युवती का जिक्र किया। उसने एपस्टीन से उस लड़की के साथ संबंध बनाने की अपील तक कर डाली।

    यह सिर्फ एक संदेश नहीं था। पुराने ईमेल्स में ऐसे कई उदाहरण मिले, जिनसे संकेत मिलता है कि महिलाओं को उनकी प्रतिभा या व्यक्तित्व से ज्यादा उनके शरीर और यौन उपयोगिता के नजरिए से देखा जा रहा था।

    उम्र को लेकर भी होती थी बातचीत

    ईमेल्स में लड़कियों की उम्र को लेकर भी कई टिप्पणियां की गई थीं। एक संदेश में एजेंट ने 23 साल की महिला का जिक्र करते हुए लिखा कि उसे पता है कि एपस्टीन के लिए यह उम्र ज्यादा है।

    एक अन्य युवती के बारे में बताया गया कि वह बेहद खूबसूरत है, लेकिन धार्मिक होने की वजह से शायद एपस्टीन की रुचि के मुताबिक न हो।

    इन संदेशों से कथित तौर पर यह तस्वीर सामने आई कि एजेंट एपस्टीन की पसंद को समझता था और उसी हिसाब से महिलाओं के बारे में जानकारी साझा करता था।

    मॉडलिंग के नाम पर बड़ी योजना

    मामला केवल व्यक्तिगत मुलाकातों तक सीमित नहीं था। बातचीत में मॉडलिंग और फैशन इंडस्ट्री के जरिए बड़ी संख्या में युवतियों तक पहुंच बनाने की योजनाओं का भी जिक्र आया।

    ब्राजील की मॉडलिंग इंडस्ट्री में निवेश और एक बड़ी मॉडलिंग प्रतियोगिता आयोजित करने जैसे विचारों पर चर्चा हुई। योजना यह थी कि प्रतियोगिता के जरिए हजारों युवतियों तक पहुंच बनाई जा सके और विजेताओं को विदेश ले जाने का रास्ता तैयार किया जाए।

    यानी जिस चीज को बाहर से मॉडलिंग और फैशन का अवसर बताया जा सकता था, उसके पीछे कथित तौर पर कुछ और मकसद भी छिपे होने की आशंका दिखाई देती है।

    एक मशहूर मॉडल का भी आया जिक्र

    इन दस्तावेजों में कजाख मूल की मशहूर मॉडल रूस्लाना कोर्शुनोवा का नाम भी सामने आया था। वह बेहद कम उम्र में मॉडलिंग की दुनिया में पहचान बना चुकी थीं।

    रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 2006 में एपस्टीन के कैरेबियाई द्वीप पर गई थीं। दो साल बाद न्यूयॉर्क में एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उस समय उनकी मौत को आत्महत्या माना गया था।

    पुराने ईमेल्स में उनकी संपत्ति और उनसे जुड़े दस्तावेजों का भी जिक्र मिला था। हालांकि, इन ईमेल्स से उनकी मौत और एपस्टीन के बीच किसी आपराधिक संबंध का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

    गिरफ्तारी से पहले तक संपर्क

    सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि एपस्टीन की 2019 में गिरफ्तारी से कुछ समय पहले तक भी एजेंट और उसके बीच युवा महिलाओं को लेकर बातचीत जारी थी।

    एक रूसी युवती को अमेरिका लाने के संभावित रास्तों पर भी चर्चा हुई। अमेरिकी वीजा को लेकर परेशानी सामने आने पर दूसरे विकल्पों की बात की गई।

    इससे यह संकेत मिलता है कि एपस्टीन के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद उसके संपर्कों का नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय रहा।

    एजेंट ने बाद में क्या कहा?

    ईमेल सामने आने के बाद संबंधित एजेंट ने अपनी पुरानी भाषा पर खेद जताया। उसका कहना था कि वह एपस्टीन के बेहद करीबी लोगों के समूह का हिस्सा नहीं था और उसे कथित यौन शोषण की पूरी जानकारी नहीं थी।

    लेकिन सामने आए संदेशों ने ग्लैमर और मॉडलिंग की दुनिया में शक्ति, पैसे और युवा महिलाओं के शोषण से जुड़े गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    चमक के पीछे छिपी कहानी

    यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या कुछ ईमेल्स की कहानी नहीं है। यह उस खतरे की ओर भी इशारा करता है जहां बड़े नाम, पैसा और करियर के सपने किसी कमजोर व्यक्ति को आसानी से प्रभावित कर सकते हैं।

    मॉडलिंग या मनोरंजन की दुनिया में अवसर तलाशने वाले युवाओं के लिए यह घटना एक चेतावनी जैसी है कि किसी भी बड़े ऑफर या प्रभावशाली व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय अपनी सुरक्षा और सीमाओं को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • तारे या गैलेक्सी… दोनों में फर्क कैसे पहचानें? डिफ्रैक्शन स्पाइक्स से दूर होगी उलझन.

    तारे या गैलेक्सी… दोनों में फर्क कैसे पहचानें? डिफ्रैक्शन स्पाइक्स से दूर होगी उलझन.

    तारे या गैलेक्सी... दोनों में फर्क कैसे पहचानें? डिफ्रैक्शन स्पाइक्स से दूर होगी उलझन

    अंतरिक्ष की गहराइयों में तारे और गैलेक्सी को देखकर अक्सर भ्रम हो जाता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने सोशल मीडिया पर एक खास तस्वीर पोस्ट करते हुए इस उलझन का समाधान बताया है। नासा के हबल टेलीस्कोप ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “तारे या गैलेक्सी?”। हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा ली गई इस तस्वीर में गैलेक्सियों के एक पूरे समूह को दिखाया गया है,

    लेकिन इसमें कुछ तारे भी नजर आ रहे हैं। इन दोनों को अलग-अलग पहचानने के आसान तरीके, यानी ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’, के बारे में भी नासा ने जानकारी दी। पोस्ट की गई तस्वीर एमएसीएस जे1141.6-1905 नामक गैलेक्सी क्लस्टर को दिखाती है। इसमें दिखाई देने वाला लगभग हर चमकीला बिंदु एक पूरी गैलेक्सी है, जिसमें लाखों या अरबों तारे मौजूद हैं। हालांकि, कुछ चमकते बिंदु हमारी आकाशगंगा के अपेक्षाकृत पास मौजूद तारे हैं।

    ऐसे में यह भ्रम होना स्वाभाविक है कि कौन-सा बिंदु तारा है और कौन-सी गैलेक्सी।नासा के अनुसार, जब किसी तारे या अन्य प्रकाश स्रोत की रोशनी हबल टेलीस्कोप के सेकेंडरी मिरर को सहारा देने वाले ढांचों के किनारों से गुजरती है, तो वह डिफ्रैक्ट होकर चारों ओर नुकीली किरणों या ‘स्पाइक्स’ का रूप ले लेती है।

    ये डिफ्रैक्शन स्पाइक्स किसी तारे की पहचान का प्रमुख संकेत होते हैं। गैलेक्सी में इतनी स्पष्ट और नुकीली किरणें दिखाई नहीं देतीं।तस्वीर के निचले दाहिने हिस्से में एक तारा साफ तौर पर डिफ्रैक्शन स्पाइक्स के साथ चमकता दिखाई दे रहा है। वहीं, बाईं ओर अलग-अलग आकार की सर्पिल और अंडाकार गैलेक्सियां फैली हुई हैं।एमएसीएस जे1141.6-1905 गैलेक्सी समूह ‘क्रेटर’ तारामंडल में स्थित है और पृथ्वी से लगभग 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

    हबल ने इसे दृश्य और इन्फ्रारेड, दोनों तरह की रोशनी में कैद किया है। वैज्ञानिकों ने इस क्लस्टर का अध्ययन गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग और एक्स-किरणों में चमकने वाली गैलेक्सिज को समझने के लिए किया है।हबल स्पेस टेलीस्कोप का आर्काइव आज 1.7 मिलियन से अधिक ऑब्जर्वेशन्स का खजाना बन चुका है। यह डेटा भविष्य के खगोलविदों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी ईएसए के सहयोग से तैयार की गई इस तस्वीर को हवाई विश्वविद्यालय के एच एबलिंग और नासा के जी कोबर ने प्रोसेस किया है।

  • विल्लुण्डी तीर्थम: समंदर के पास मीठे पानी का रहस्यमयी कुआं, मां सीता से जुड़ा है कनेक्शन.

    विल्लुण्डी तीर्थम: समंदर के पास मीठे पानी का रहस्यमयी कुआं, मां सीता से जुड़ा है कनेक्शन.

    विल्लुण्डी तीर्थम: समंदर के पास मीठे पानी का रहस्यमयी कुआं, मां सीता से जुड़ा है कनेक्शन

    धर्म और आस्था के केंद्र हमारे देश में कई प्राचीन, सिद्धपीठ और महाशक्ति पीठ मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी श्रद्धानुसार जाते हैं। देश में मंदिर के साथ ही कुछ रहस्यमी चमत्कारी कुएं भी मौजूद हैं।

    कुछ कुओं को लेकर मान्यता है कि वे बड़ी से बड़ी बीमारी को ठीक करने की क्षमता रखते हैं, लेकिन तमिलनाडु के रामेश्वरम में ऐसा कुआं मौजूद है, जहां आज भी माता सीता के होने के प्रमाण मिलते हैं। तमिलनाडु के रामेश्वरम में विल्लुण्डी तीर्थम नाम का स्थल है, जहां भगवान श्रीराम और माता सीता का आगमन हुआ था।

    माना जाता है कि भगवान श्रीराम जब माता सीता को रावण की कैद से मुक्त करके वापस अयोध्या आ रहे थे, तब इसी स्थान पर माता सीता को प्यास लगी थी और भगवान श्रीराम ने बाण के प्रहार से पानी का झरना बनाया था। खास बात ये है कि ये स्त्रोत मीठे पानी का है और इसके पास खारे पानी का समंदर है।

    कोई नहीं जानता है कि समंदर के पास कुएं में मीठा पानी कहां से आया। भक्तों का मानना है कि ये भगवान श्रीराम का चमत्कार है और इस मीठे जल से शारीरिक रोगों का नाश होता है। भक्त कुएं का जल अपने साथ भी लेकर जाते हैं।इस स्थान को विल्लुण्डी तीर्थम इसलिए कहा गया क्योंकि तमिल भाषा में ‘बाण से बने छेद’ को ‘विल्लुण्डी’ कहते हैं और तीर्थम का अर्थ है ‘पवित्र स्थान’।

    ये कुआं इसलिए भी खास है क्योंकि ये रामेश्वरम के 64 पवित्र कुओं में से एक है। कुएं से पहले भगवान शिव का प्राचीन मंदिर त्रयम्बकेश्वर भी है। भगवान शिव छोटे से मंदिर में शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। कुएं के दर्शन करने से पहले भक्त भगवान शिव की अराधना करते हैं।माना जाता है कि त्रयम्बकेश्वर मंदिर की स्थापना भी माता सीता और भगवान श्रीराम ने मिलकर की थी।

    भक्त जोड़े में त्रयम्बकेश्वर महादेव की पूजा करने के लिए आते हैं।विल्लुंडी तीर्थम के पास कई और तीर्थ स्थल मौजूद हैं, जिनके दर्शन किए जा सकते हैं। मंदिर से कुछ किलोमीटर दूर ही पंचमुखी हनुमानजी, अग्नि तीर्थम, धनुषकोडी और अरुलमिगु रामनाथस्वामी मंदिर भी मौजूद हैं। ये सभी मंदिर रामेश्वरम के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैं।