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  • महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के मुख्यालय नरसाराओपेट स्थित एक निजी अस्पताल से एक बेहद हैरान करने वाला और मेडिकल जगत को चकित कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंची 33 वर्षीय महिला की जब डॉक्टरों ने जांच की, तो उसके पेट के अंदर का नजारा देखकर सब हैरान रह गए. महिला के पेट में 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती मौजूद थी. डॉक्टरों की टीम ने तुरंत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर इन सभी चीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है.

    जानकारी के अनुसार, पेटलुरिवारीपलेनी मंडल की रहने वाली 33 वर्षीय विवाहित महिला को पिछले कुछ समय से सीने में तेज दर्द की शिकायत थी. शनिवार को जब दर्द असहनीय हो गया, तो परिजन उसे आनन-फानन में नरसाराओपेट स्थित माताश्री अस्पताल ले गए. वहां डॉक्टरों ने जब कई तरह के मेडिकल टेस्ट और स्कैन किए, तो महिला के पेट के अंदर असामान्य वस्तुएं होने की पुष्टि हुई.

    लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाली गईं वस्तुएं

    मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन करने का फैसला लिया. पेट में एक छोटा सा छेद करके (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और 1 मोमबत्ती को सफलता पूर्वक बाहर निकाला गया.

    डॉक्टरों ने बताया कि इनमें से एक पेन का ढक्कन नहीं था, जिसकी वजह से वह पेट की अंदरूनी सतह पर चुभ रहा था और महिला को अत्यधिक दर्द हो रहा था. डॉक्टरों का कहना है कि किसी इंसान का एक साथ इतनी सारी ठोस चीजें निगल लेना बेहद दुर्लभ और असामान्य बात है.

    10 साल से मानसिक बीमारी से पीड़ित है पीड़िता

    घटना के बाद पीड़िता के पिता नोमुला हनुमंथा राव ने बताया कि उनकी बेटी पिछले 10 वर्षों से गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव आते रहते हैं. पिता ने यह भी बताया कि बीमारी और घरेलू तनाव की वजह से दो महीने पहले ही उसके पति ने उसे तलाक दे दिया था.

    सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रही है. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि महिला को शारीरिक इलाज के साथ-साथ अब किसी वरिष्ठ मनोचिकित्सक की देखरेख और नियमित काउंसलिंग की सख्त जरूरत है.

  • दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    इन दिनों दुनिया भर में युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और अशांति की खबरें आम हो गई हैं. नेपाल की आपदा हो या अंतरराष्ट्रीय तनाव, कई लोग भविष्य को लेकर चिंतित दिखते हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर एक नया दावा चर्चा में है. इसमें एक व्यक्ति जो खुद को टाइम ट्रैवलर बता रहा है ने कहा कि वह भविष्य यानी 2028 से लौटा है और वहां उसने पूरे लगभग एक साल अकेले बिताए है.

    2028 में उसे पूरी पृथ्वी पर एक भी इंसान नहीं मिला. यह शख्स टिकटॉक पर सक्रिय है और अपना खाता @unicosobreviviente चलाता है जिसका मतलब है “इकलौता जीवित बचा हुआ”. उसका नाम जेवियर बताया जा रहा है और वह स्पेन में होने का दावा करता है. उसने वैलेंसिया, बार्सिलोना, मैड्रिड और सेविले जैसे शहरों के वीडियो अपलोड किए हैं जिनमें सड़कें पूरी तरह सुनसान दिखती हैं. गाड़ियां खड़ी हैं, इमारतें जैसी की तैसी हैं लेकिन कोई इंसान नजर नहीं आता.

    वीडियो में दिखाता है भविष्य
    जेवियर के वीडियो में भविष्य की झलक दिखती है. एक वीडियो में वह म्यूजियम के अंदर घूम रहा है जो आम दिनों में लोगों से भरा रहता है. दूसरे में समुद्र तट पर अकेला खड़ा है और ड्रोन शॉट्स भी हैं. जेवियर का कहना है कि वह भविष्य में फंस गया है और वापस आने का रास्ता ढूंढ रहा है. हाल के पोस्ट में उसने लिखा कि अकेले 340 दिन पूरे हो चुके हैं. वह शहरों का दौरा कर चुका है लेकिन कहीं कोई मानव जीवन नहीं मिला. वह खाना ढूंढकर खा रहा है और उम्मीद खोता जा रहा है. कुछ वीडियो में वह फॉलोअर्स से मदद की अपील भी करता है. दिलचस्प बात यह है कि भविष्य में भी बिजली और इंटरनेट चल रहा है जिससे वह वीडियो बनाकर अपलोड कर पा रहा है. जब यूजर्स ने इस बारे में सवाल किया तो उसने कहा कि शायद 2021 से 2027 के बीच कोई कनेक्शन है. यह जवाब कई लोगों को और संदिग्ध लगा.

    बढ़ रहे फॉलोवर्स
    टिकटॉक पर उसके लाखों फॉलोअर्स हो गए हैं. कुछ लोग उसकी कहानी को रोमांचक मानकर देख रहे हैं तो कई उसे झूठा करार दे रहे हैं. आलोचक कहते हैं कि सुनसान सड़कों के वीडियो सुबह जल्दी या कम आबादी वाले इलाकों में आसानी से बनाए जा सकते हैं. सावधानी से एडिटिंग और कोण चुनकर पूरी तरह खाली शहर का अहसास दिया जा सकता है. पूर्ण तबाही में बिजली, इंटरनेट और काम करते उपकरण कैसे बचेंगे, यह सवाल भी लाजमी है. टाइम ट्रैवल के दावे सोशल मीडिया पर नए नहीं हैं. पहले भी कई लोग भविष्य या अतीत से आने का दावा कर चुके हैं और बाद में वे प्रदर्शन, प्रैंक या ध्यान खींचने के तरीके साबित हुए. जेवियर का केस भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है. फिर भी उसकी वीडियोस की बनावट और लगातार अपडेट्स ने लोगों का ध्यान खींचा है.

  • दुनिया का वो कौन सा बीच है, जहां इकट्ठी होती है लोगों की सबसे ज्यादा भीड़?

    दुनिया का वो कौन सा बीच है, जहां इकट्ठी होती है लोगों की सबसे ज्यादा भीड़?

    दुनिया का वो कौन सा बीच है, जहां इकट्ठी होती है लोगों की सबसे ज्यादा भीड़?

    गर्मियों की छुट्टियों में अगर आपका मन समंदर के किनारे ठंडी हवाओं का लुत्फ उठाने और लहरों के बीच तैरने का हो, तो आप किसी शांत और सुकून भरी जगह की तलाश करेंगे. लेकिन जरा सोचिए, आप बड़े शौक से बीच पर पहुंचे और वहां पानी देखने के बजाय सिर्फ इंसानों का सिर ही सिर दिखाई दे, तो क्या होगा. यह कोई काल्पनिक सोच नहीं है, बल्कि चीन के शेनझेन शहर में स्थित दामेईशा बीच (Dameisha Beach) की कड़वी सच्चाई है. चीन के शेनझेन में मौजूद यह समुद्र तट महज 1.8 किलोमीटर लंबा है. लेकिन इतने छोटे से इलाके में कभी-कभी एक साथ करीब 2 लाख लोग जुट जाते हैं. इतनी भारी भीड़ के कारण इसे दुनिया का सबसे भीड़भाड़ वाला समुद्र तट माना जाता है. चीन में आबादी की कोई कमी नहीं है, लेकिन शेनझेन का यह तट अपने आप में एक अलग ही रिकॉर्ड बना रहा है.

    छुट्टियों के दिनों में और हफ्ते के आखिरी दिनों में यहां की रेत पर सिर्फ और सिर्फ लोग ही नजर आते हैं. स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि स्थानीय प्रशासन को बीच के अंदर जाने वाले लोगों की संख्या पर जबरन रोक लगानी पड़ती है. अगर आपको इस बात का अंदाजा लगाना है कि गर्मी के महीनों में दामेईशा बीच पर कितनी भीषण भीड़ होती है, तो ट्रिपएडवाइजर जैसी ट्रेवल साइट्स पर जाकर पर्यटकों के रिव्यू पढ़ना ही काफी है. वहां कई गुस्साए पर्यटकों ने लिखा है कि वे दूर-दराज से समंदर की लहरों का मज़ा लेने आए थे, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वे किनारे के पानी तक भी नहीं पहुंच पाए. चारों तरफ इतने लोग थे कि आगे पैर रखना भी जंग जीतने जैसा लग रहा था.

    बता दें कि दामेईशा एक पूरी तरह से सरकारी और सार्वजनिक बीच है. यानी यहां आने के लिए किसी को भी टिकट का एक रुपया नहीं देना पड़ता. नियम के मुताबिक तो कोई भी यहां कभी भी आ सकता है, लेकिन हाल के सालों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए शेनझेन प्रशासन ने मई से अक्टूबर के बीच कड़े नियम लागू कर दिए हैं. अब यहां रोजाना आने वाले पर्यटकों की संख्या 80,000 तय कर दी गई है. इसके लिए एक अनिवार्य ऑनलाइन रिजर्वेशन सिस्टम बनाया गया है. यानी अगर आपको बीच पर जाना है, तो पहले से बुकिंग करानी होगी ताकि आप उस दिन वहां प्रवेश कर सकें. हालांकि, 80,000 की सीमा भी सुनने में बहुत ज्यादा लगती है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि खास मौकों पर यहां 2 लाख से ज्यादा लोग एक साथ मौजूद रहते हैं. ऐसे में बीच पर सनबाथ (धूप सेंकना) करना या तैरना तो दूर, अपनी जगह से हिलना-डुलना भी नामुमकिन हो जाता है.

    अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस एक छोटे से बीच पर इतनी बेहिसाब भीड़ क्यों उमड़ती है. इसका सबसे बड़ा कारण यहां की बेहतरीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था है. शेनझेन शहर की कई बस लाइनें सीधे इस बीच तक आती हैं. इससे भी बड़ी बात यह है कि मेट्रो ट्रेन का एक स्टेशन बिल्कुल इस बीच के सामने ही खुलता है. शहर के किसी भी कोने से लोग मेट्रो पकड़ते हैं और सीधे बीच के दरवाजे पर उतर जाते हैं. ऊपर से एंट्री फीस बिल्कुल मुफ्त है. इन सब बातों ने मिलकर दामेईशा को स्थानीय निवासियों और पर्यटकों, दोनों का सबसे पसंदीदा लेकिन सबसे डरावना ठिकाना बना दिया है. ऑनलाइन रिव्यू साइट्स पर मिलने वाली नकारात्मक रेटिंग्स और पर्यटकों की शिकायतों के बावजूद, गर्मियों के दौरान दामेईशा बीच पर लोगों का आना कम नहीं होता. जब भी यहां की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आते हैं, तो समंदर की जगह इंसानों के सैलाब को देखकर पूरी दुनिया हैरान रह जाती है.

  • सफेद फॉर्च्यूनर से चलता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!.

    सफेद फॉर्च्यूनर से चलता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!.

    सफेद फॉर्च्यूनर से चलता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!.

    सोशल मीडिया पर इन दिनों कर्नाटक के बंटवाल से आई एक ऐसी खबर छाई हुई है, जो दिल को छू लेने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देती है. बीसी रोड पर जब एक चमचमाती सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर आकर रुकी, तो सबको लगा कि कोई बड़ा अफसर या नेता उतरा होगा. लेकिन गाड़ी का दरवाजा खुला, तो हाथ में झाड़ू थामे और चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लिए सेसप्पा बाहर निकले.

    एक वक्त ऐसा भी था, जब कफन तक के पैसे नहीं थे

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज फॉर्च्यूनर में घूमने वाले सेसप्पा की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी. उनका अतीत बहुत दर्दनाक और संघर्षों से भरा रहा है. साल 1996 में जब उन्होंने बंटवाल नगर परिषद में नौकरी शुरू की थी, तब उन्हें रोजाना सिर्फ 50 रुपए दिहाड़ी मिलती थी.

    महज तीसरी क्लास तक पढ़े सेसप्पा का परिवार इतनी गरीबी में था कि कई बार भूखे पेट सोना पड़ता था. उनके जीवन का सबसे काला दिन तब आया, जब उनके पिता का निधन हो गया. परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे. मजबूरी में उन्हें अपने पिता के पार्थिव शरीर को नेत्रावती नदी के किनारे ले जाकर खुद विसर्जन करना पड़ा था. उस दिन उन्होंने ठान लिया कि हालात चाहे जैसे हों, वे अपने परिवार को इस लाचारी से बाहर निकालकर रहेंगे.

    एक पुलिसवाले की सलाह ने बदल दी तकदीर

    गरीबी और तनाव की वजह से एक वक्त सेसप्पा को शराब की लत लग गई थी. लेकिन साल 2005 में बंटवाल के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर के.यू. बेलियप्पा की एक बात ने उनकी जिंदगी पलट दी. उन्होंने तुरंत शराब छोड़ दी और अपनी पूरी ताकत मेहनत करने में झोंक दी.

    नगर निगम की ड्यूटी के बाद वे खाली नहीं बैठते थे. उन्होंने खेती की, दूध बेचने का काम किया और पंचायत में पानी सप्लाई का जिम्मा भी उठाया. वे अपनी छोटी-छोटी बचत और लोन के जरिए धीरे-धीरे आगे बढ़े. उन्होंने पहले मारुति 800 और फिर स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां चलाईं और आखिरकार मेहनत के दम पर एक सेकंड हैंड फॉर्च्यूनर खरीद ही ली.

    ‘काम कोई छोटा नहीं होता’

    नगर निगम के अधिकारी भी सेसप्पा की सादगी और मेहनत के कायल हैं. सुबह-सुबह अपनी लग्जरी गाड़ी से आने के बाद भी वे बिना किसी अहंकार के झाड़ू उठाते हैं और पूरी ईमानदारी से अपनी सफाई की ड्यूटी निभाते हैं.

  • मोहल्ले की चुगली कर खड़े कर लिए दो आलीशान मकान, 67 साल की महिला का अनोखा बिजनेस देख लोग हैरान

    मोहल्ले की चुगली कर खड़े कर लिए दो आलीशान मकान, 67 साल की महिला का अनोखा बिजनेस देख लोग हैरान

    कोलंबिया की एक महिला ने मोहल्ले की गॉसिप बेचकर खड़ा किया अनोखा बिजनेस. चुगली और पड़ोसियों के राज बेचकर खरीद लिए दो-दो मकान; पढ़ें दिलचस्प खबर.

    मोहल्ले की चुगली कर खड़े कर लिए दो आलीशान मकान, 67 साल की महिला का अनोखा बिजनेस देख लोग हैरान

    क्या आपने कभी सोचा है कि दूसरों के घरों की खबरें रखना या मोहल्ले की चुगली करना कभी किसी का बिजनेस बन सकता है? आमतौर पर लोग इसे वक्त की बर्बादी या सिर्फ फालतू टाइमपास मानते हैं, लेकिन कोलंबिया की एक 67 साल की दादी ने इस काम को ऐसा गजब का स्टार्टअप बना दिया कि अच्छे-अच्छे बिजनेसमैन भी हैरान रह जाएं. जी हां, इन्होंने दूसरों के सीक्रेट्स और चुगलियों का ऐसा बाजार सजाया कि कमाई के पैसों से दो-दो मकान खड़े कर लिए.

    कान लगाकर सुनती हैं दूसरों के राज

    गल्फ टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबिया के आर्मेनिया शहर में रहने वाली 67 वर्षीय मिरियम (Miryam) ने साबित कर दिया है कि दिमाग हो तो किसी भी चीज से पैसा कमाया जा सकता है. मिरियम का यह अनोखा कारोबार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. उनका काम बस इतना है कि वे अपने घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठ जाती हैं और पूरे मोहल्ले की हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं. किसके घर में क्या पक रहा है, किसका किससे झगड़ा हुआ और कौन किससे छिपाकर मिल रहा है, इनकी पल-पल की खबर मिरियम के पास होती है.

    चुगली बेचने का अनोखा बिजनेस मॉडल

    मिरियम ने अपनी इस आदत को एक प्रोफेशनल बिजनेस में बदल दिया है. वे खुद को गर्व से पेशेवर चिस्मोसा यानी गॉसिप क्वीन कहती हैं. मोहल्ले के लोगों को जब भी किसी दूसरे पड़ोसी के बारे में कोई चटपटी खबर जाननी होती है, वे सीधे मिरियम के पास दौड़कर आते हैं. मिरियम भी मुफ्त में एक पत्ता तक नहीं हिलने देतीं. छोटी-मोटी खबरों के लिए वे 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो (करीब 150 रुपए से 300 रुपए) वसूलती हैं और अगर मामला किसी बड़े राज का हो, तो उसकी कीमत भी उसी हिसाब से भारी-भरकम होती है. अपनी सबसे महंगी चुगली के बारे में बताते हुए मिरियम ने कहा कि एक आदमी अपनी पत्नी के बाहर जाने पर उसे धोखा देता था, इस राज को छिपाने के लिए उन्होंने उससे 7 लाख कोलंबियन पेसो (लगभग 21,000 रुपए) लिए थे.

    पक्की सबूतों वाली नोटबुक और गॉसिप बोर्ड

    मिरियम का काम सिर्फ हवा में तीर चलाना नहीं है, बल्कि वे पत्रकारों के अंदाज में काम करती हैं. उनके पास एक खास नोटबुक होती है, जिसमें वे हर तारीख और समय के साथ गॉसिप नोट करती हैं. इतना ही नहीं, उनके घर के अंदर एक बकायदा गॉसिप बोर्ड भी लगा है, जिस पर तस्वीरों, कागजों और धागों के जरिए पड़ोसियों के सीक्रेट्स जोड़े गए हैं. हालांकि, इस हरकत की वजह से कई पड़ोसी उनसे खफा रहते हैं, लेकिन मजाल है कि कोई अपनी जिज्ञासा रोक पाए, खबर लेने हर कोई उन्हीं के दरवाजे पर पहुंचता है

  • जमीन के 30 फीट नीचे ‘पाताल लोक’ में बने रहस्यमयी घर, 1000 साल से रह रहे लोग.

    जमीन के 30 फीट नीचे ‘पाताल लोक’ में बने रहस्यमयी घर, 1000 साल से रह रहे लोग.

    जमीन के 30 फीट नीचे ‘पाताल लोक’ में बने रहस्यमयी घर, 1000 साल से रह रहे लोग.

    जब भी हम किसी के घर की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में ईंट, सीमेंट और छत से बनी एक ऐसी इमारत आती है, जो जमीन के ऊपर खड़ी होती है. लेकिन दुनिया में एक ऐसी जगह भी है, जहां लोग जमीन के ऊपर घर बनाने के बजाय जमीन के अंदर गड्ढा खोदकर रहते हैं. ये बिल्कुल पाताल लोक का अहसास दिलाता है. हम बात कर रहे हैं ट्यूनीशिया के दक्षिणी इलाके में बसे मातमाता (Matmata) नाम के एक छोटे से गांव की, जो अपनी इसी अनोखी बनावट की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है. आमतौर पर गर्म इलाकों में लोग गर्मी से बचने के लिए पहाड़ों को काटकर गुफाएं बनाते हैं. लेकिन मातमाता गांव के बर्बर समुदाय के लोगों ने बिल्कुल अलग तरीका अपनाया. उन्होंने पहाड़ की दीवारों को काटने के बजाय सीधी जमीन में ही एक बहुत बड़ा और गहरा गड्ढा खोद दिया.

    इस बड़े गड्ढे को वे अपने घर का आंगन बनाते हैं और फिर उस गड्ढे की अंदरूनी दीवारों को खोदकर चारों तरफ कमरे तैयार करते हैं. कई बार तो आसपास बने ऐसे कई गड्ढों को आपस में जोड़ने के लिए जमीन के नीचे ही खंदक जैसी सुरंगें बना दी जाती हैं, जिससे यह पूरा इलाका एक बड़ी भूलभुलैया जैसा लगता है. अब सवाल यह उठता है कि जमीन के अंदर इतने बड़े गड्ढे और कमरे खोदना कैसे आसान हुआ? दरअसल, मातमाता का यह पूरा इलाका बलुआ पत्थर की एक ऐसी परत पर बसा है जो बहुत ही नरम होती है. इसे हाथ के साधारण औजारों से भी आसानी से खोदा जा सकता है. लेकिन खास बात यह है कि यह पत्थर जितना खोदने में आसान है, सदियों तक बिना गिरे टिके रहने में उतना ही मजबूत भी है. बर्बर समुदाय के लोग पिछले एक हजार से भी ज्यादा सालों से इसी तरीके से जमीन के अंदर अपने आशियाने बनाते आ रहे हैं.

    आखिर क्यों बनाए पाताल लोक में घर?
    इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यह इलाका लीबिया और ट्यूनीशिया के बीच का एकमात्र मैदानी रास्ता हुआ करता था. इस वजह से पुराने जमाने में विदेशी हमलावर बार-बार यहां से गुजरते थे और लूटपाट मचाते थे. हमलावरों से अपनी जान और माल बचाने के लिए बर्बर समुदाय के लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से जमीन के नीचे एक तरह से पाताल लोक में छिपकर रहना शुरू किया. शुरुआत में वे पहाड़ियों पर छिपते थे, लेकिन बाद में जब अरब हमलावरों के साथ उनके रिश्ते सुधरे, तो वे नीचे के मैदानी इलाकों में आए और जमीन के अंदर गड्ढे वाले ये घर बनाने लगे. मातमाता गांव की एक और बड़ी पहचान यह भी है कि इसका कनेक्शन हॉलीवुड से बहुत गहरा है.

    दुनिया भर में मशहूर फिल्म स्टार वॉर्स की शूटिंग इसी गांव में हुई थी. फिल्म के मुख्य किरदार ल्यूक स्काईवॉकर का जो घर पर्दे पर दिखाया गया था, वह असल में मातमाता का ही एक अंडरग्राउंड होटल है, जिसका नाम सिदी द्रिस है. आज भी इस गांव में बहुत से लोग जमीन के नीचे बने इन पारंपरिक घरों में रह रहे हैं. बाहर चाहे कितनी भी भीषण गर्मी या झुलसाने वाली धूप हो, इन गड्ढे वाले मकानों के अंदर का तापमान हमेशा एकदम ठंडा और सुहावना बना रहता है, जो कुदरत और इंसान की समझदारी का एक बेजोड़ नमूना है.

  • Delhi Metro में बिखर गया टिफिन का खाना, लड़के ने तुरंत जो किया, उसे देख लोग करने लगे माता-पिता की तारीफ!

    Delhi Metro में बिखर गया टिफिन का खाना, लड़के ने तुरंत जो किया, उसे देख लोग करने लगे माता-पिता की तारीफ!

    Delhi Metro में बिखर गया टिफिन का खाना, लड़के ने तुरंत जो किया, उसे देख लोग करने लगे माता-पिता की तारीफ!

    दिल्ली मेट्रो का नाम सुनते ही हमेशा लोगों के दिमाग में भीड़, सीट को लेकर बहस, अजीबोगरीब हरकतें और वायरल रील्स की तस्वीरें आने लगती हैं. लेकिन इसी मेट्रो से कभी-कभी ऐसी तस्वीरें भी सामने आती हैं, जो लोगों को कुछ अच्छा सोचने पर मजबूर कर देती हैं. इन दिनों एक ऐसी ही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक लड़के की छोटी-सी हरकत ने लोगों का दिल जीत लिया.

    दरअसल वायरल हो रहे पोस्ट के मुताबिक, एक लड़का दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहा था. उसके कानों में इयरफोन लगे थे और वह अपने बैग से पानी की बोतल निकालने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान उसका टिफिन बॉक्स हाथ से छूट गया और उसमें रखा पूरा खाना मेट्रो के फर्श पर बिखर गया. ऐसे समय में ज्यादातर लोग पहले अपने आसपास देखते हैं कि किसी ने उन्हें देखा तो नहीं. कई बार लोग शर्मिंदगी के कारण वहां से हट जाते हैं या गिरी हुई चीज को साफ करने की जिम्मेदारी किसी और पर छोड़ देते हैं. लेकिन इस लड़के ने ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया.

    नोटबुक का पन्ना फाड़कर समेटा खाना
    खाना फर्श पर गिरते ही लड़का उसे उठाने में जुट गया. उसने अपनी नोटबुक का एक पन्ना फाड़ा और उससे फर्श पर बिखरे खाने को सावधानी से समेटना शुरू कर दिया. उसने इस बात की परवाह नहीं की कि आसपास के लोग उसे देख रहे हैं या नहीं. खाने को समेटने के बाद भी उसने अपना काम अधूरा नहीं छोड़ा. उसने जेब से रुमाल निकाला और जिस जगह खाना गिरा था, उस हिस्से को अच्छी तरह साफ कर दिया. उसकी कोशिश यही थी कि उसके कारण मेट्रो के दूसरे यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े.

  • पत्नी की बेवफाई पकड़ी, 15 लाख जीते…लेकिन एक गलती और पति महोदय को ही हो गई जेल.!

    पत्नी की बेवफाई पकड़ी, 15 लाख जीते…लेकिन एक गलती और पति महोदय को ही हो गई जेल.!

    टेक्नोलॉजी जितनी मदद करती है, कभी-कभी उतनी ही बड़ी मुसीबत भी बन जाती है. ताइवान की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसे पढ़कर आप दंग रह जाएंगे. यहां एक शख्स ने अपनी पत्नी की बेवफाई का राज तो रोबोट वैक्यूम क्लीनर से खोल लिया और 15 लाख रुपए का हर्जाना भी जीत लिया, लेकिन गैजेट के गलत इस्तेमाल के चक्कर में उसे खुद जेल की हवा खानी पड़ गई.

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बात . ताइवान के रहने वाले इस शख्स को अपने हॉलिडे होम में एक ऐसा टूथब्रश दिखा जिसे कोई दूसरा इस्तेमाल कर रहा था. शक हुआ तो उसने गैरेज का सीसीटीवी चेक किया, जहां एक अनजान शख्स उसकी पत्नी को छोड़ते हुए दिखा.

    शक पुख्ता करने के लिए उसने घर के रोबोट वैक्यूम क्लीनर को फोन से रिमोटली चालू कर दिया ताकि वह अपनी पत्नी से बात कर सके. जैसे ही लाइव फीड ऑन हुई, वैक्यूम क्लीनर के कैमरे ने पत्नी और उसके प्रेमी को आपत्तिजनक हालत में कैद कर लिया.

    पति ने अदालत में यह वीडियो सबूत के तौर पर पेश किया. कोर्ट ने मामला सही पाया और पत्नी व उसके प्रेमी पर 15 लाख रुपए का जुर्माना ठोक दिया. पति की जीत तो हो गई, लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ.

    पत्नी ने तुरंत पलटवार करते हुए पति पर बिना सहमति के प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड करने का केस ठोक दिया. ताइवान के कानून के मुताबिक, किसी की भी अंतरंग पलों की चुपके से रिकॉर्डिंग करना गंभीर अपराध है और शादीशुदा होना इसका लाइसेंस नहीं देता.

    अदालत ने पति की दलीलें खारिज कर दीं. रोबोट वैक्यूम क्लीनर से छिपकर वीडियो बनाने के जुर्म में उस बेचारे पति को 15 लाख जीतने के बावजूद 5 महीने की जेल और साढ़े चार लाख रुपए का जुर्माना भुगतना पड़ गया. यानी सबूत जुटाने का यह तरीका उसे बहुत भारी पड़ गया.

  • 10,000 फीट की ऊंचाई से गिरी महिला, फिर भी बच गई जान; VIDEO देख कांप जाएगी रूह!

    10,000 फीट की ऊंचाई से गिरी महिला, फिर भी बच गई जान; VIDEO देख कांप जाएगी रूह!

    यूके के नॉटिंघम में 35 साल की हॉली विफेन के साथ स्काईडाइविंग के दौरान बड़ा हादसा, हवा में सिर पर लगी चोट, 150 की स्पीड से गिरीं फिर भी चमत्कारिक रूप से बची जान. देखें वायरल वीडियो.

    10,000 फीट की ऊंचाई से गिरी महिला, फिर भी बच गई जान; VIDEO देख कांप जाएगी रूह!

    10 हजार फीट की ऊंचाई और नीचे जमीन…सोचकर ही दिल दहल जाता है. अगर पैराशूट धोखा दे जाए, तो बचना नामुमकिन है. लेकिन यूके में एक महिला के साथ ऐसा चमत्कार हुआ जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान है. इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी यह महिला जिंदा बच गई. सोशल मीडिया पर वीडियो भी सामने आया है, जिसे देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए.

    दिल दहला देने वाला ये हादसा नॉटिंघम के लैंगर एयरफील्ड में हुआ. डेवोन के ओकहैम्पटन की रहने वाली 35 साल की हॉली विफेन (Holly Wiffen) अपने दोस्तों के साथ स्काईडाइविंग करने गई थीं. सभी 12 हजार फीट की ऊंचाई से प्लेन से कूदे थे.

    हवा में ही बेहोश होकर गिरने लगीं

    मिरर यूके की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हवा में ही ट्रैकिंग करते वक्त एक दूसरे स्काईडाइवर का पैर जोर से हॉली के सिर पर लग गया. टक्कर इतनी तेज थी कि हॉली हवा में ही बेहोश हो गईं और 150 की स्पीड से नीचे गिरने लगीं. उनके साथी ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, पर पकड़ नहीं पाया.

    पेड़ ने बचा ली जान

    किस्मत अच्छी थी कि नीचे एक घना पेड़ था. हॉली सीधे जमीन पर गिरने की जगह पेड़ से टकरा गईं. पेड़ की टहनियों ने गिरने की रफ्तार को कम कर दिया और उनकी जान बच गई. जब होश आया तो वो जमीन पर पड़ी थीं और उनका पैर मुड़ा हुआ था.

    होश आते ही बोली- फिर करूंगी स्काईडाइविंग

    इस हादसे में हॉली की रीढ़ की हड्डी टूट गई और पैर में भी गंभीर चोटें आईं. हालांकि, मौत को इतने करीब से देखने के बाद भी हॉली का हौसला नहीं टूटा है. उनका कहना है कि ठीक होते ही वो दोबारा स्काईडाइविंग करेंगी

  • अपराधी का दिमाग जांचने के नाम पर काटी लाश, फिर चमड़ी से बनवाए जूते.

    अपराधी का दिमाग जांचने के नाम पर काटी लाश, फिर चमड़ी से बनवाए जूते.

    अपराधी का दिमाग जांचने के नाम पर काटी लाश, फिर चमड़ी से बनवाए जूते.

    किसी इंसान की चमड़ी से जूता बना दिया जाए, क्या आप इसकी कल्पना कर सकते हैं? यह सोचकर ही मन सिहर उठता है, लेकिन यह बिल्कुल सच है. 19वीं सदी के अमेरिकी इतिहास में एक ऐसी खौफनाक और अमानवीय घटना दर्ज है, जहां एक कुख्यात डाकू की मौत के बाद उसकी लाश की जांघों और छाती की चमड़ी निकालकर बाकायदा जूते बनवाए गए. इतना ही नहीं, उस जूते को पहनकर एक मशहूर डॉक्टर बाद में देश का गवर्नर भी बना. यह कहानी है 1870 के दशक के कुख्यात अमेरिकी डाकू जॉर्ज पैरट की, जिसे उसकी बड़ी नाक की वजह से लोग बिग नोज जॉर्ज कहते थे. बिग नोज अपने गैंग के साथ मालगाड़ियों और स्टेजकोच को लूटने के लिए जाना जाता था. साल 1878 में उसके गैंग ने वायोमिंग में एक पैसेंजर ट्रेन को पलटाकर लूटने की कोशिश की.

    साजिश तो नाकाम हो गई, लेकिन पीछा करने आए डिप्टी शेरिफ रॉबर्ट और डिटेक्टिव टिप विंसेंट की इस गैंग ने बड़ी बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी. पुलिस और रेलवे कंपनी ने बिग नोज पर 20 हजार डॉलर (वर्तमान समय में लगभग 19 लाख रुपए) का भारी-भरकम इनाम रख दिया. करीब दो साल बाद मोंटाना के एक बार में शराब के नशे में जब उसने हत्याओं की डींगें हांकनी शुरू की, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. अदालत ने उसे दो अधिकारियों की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई. फांसी से महज दस दिन पहले 22 मार्च 1881 को उसने जेल से भागने की कोशिश की और जेलर का सर फोड़ दिया. इस बात से भड़की गुस्सैल भीड़ ने जेल पर धावा बोल दिया, बिग नोज को घसीटकर बाहर निकाला और टेलीग्राफ के पोल से लटकाकर उसे मार डाला.

    कहानी का सबसे वीभत्स और विचित्र मोड़ यहां से शुरू होता है. जब बिग नोज का शव लेने कोई रिश्तेदार नहीं आया, तो डॉक्टर थॉमस मैगी और डॉक्टर जॉन यूजीन ओसबोर्न ने अपराधी के दिमाग पर रिसर्च करने के लिए उसकी लाश पर कब्जा कर लिया. डॉक्टरों ने बिग नोज की खोपड़ी का ऊपरी हिस्सा आरी से काट दिया. इसके बाद डॉक्टर ओसबोर्न ने उसकी जांघों और छाती की चमड़ी उधेड़कर डेनवर की एक चमड़ा फैक्ट्री में भेज दी और निर्देश दिए कि इस इंसानी चमड़ी से जूते और एक बैग बनाया जाए. डॉक्टर ओसबोर्न ने न केवल इंसानी चमड़ी से बने वे जूते पहने, बल्कि बाद में राजनीति में उतरकर जब वे 1893 में वायोमिंग राज्य के पहले डेमोक्रेटिक गवर्नर बने, तो अपने शपथ ग्रहण समारोह में भी उन्होंने उसी डाकू की चमड़ी के जूते पहन रखे थे.

    बिग नोज का बाकी कटा हुआ शरीर नमक के घोल से भरे व्हिस्की के एक ड्रम में बंद कर डॉक्टर के क्लिनिक के पीछे दफना दिया गया, जबकि उसकी कटी हुई खोपड़ी का ऊपरी हिस्सा एक 15 साल की असिस्टेंट लड़की लिलियन हीथ को दे दिया गया, जिसने सालों तक उसे अपने ऑफिस में ऐशट्रे और डोरस्टॉप की तरह इस्तेमाल किया. घटना के लगभग 70 साल बाद मई 1950 में जब एक नई इमारत की खुदाई के दौरान मजदूरों को व्हिस्की का बैरल और उसमें बंद इंसानी हड्डियां तथा जूते मिले, तो हड़कंप मच गया. 80 साल से अधिक उम्र की हो चुकी डॉक्टर लिलियन हीथ से जब वह खोपड़ी मंगवाकर मिलाई गई, तो वह बैरल में मिली खोपड़ी से बिल्कुल फिट बैठ गई. तब जाकर इस मामले का खुलासा हुआ. आज इंसानी चमड़ी से बने वे जूते और बिग नोज की खोपड़ी वायोमिंग के कार्बन काउंटी म्यूजियम में पर्यटकों के देखने के लिए रखे गए हैं.