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  • केले के फूल के फायदे: केले के फूल के अद्भुत गुण… मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ।..

    केले के फूल के फायदे: केले के फूल के अद्भुत गुण… मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ।..

    केले के फूल के फायदे: केले के फूल के अद्भुत गुण… मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ।..

    केले के फूल के फायदे: हमारे आसपास प्रकृति में पाए जाने वाले कई पौधों में औषधीय गुणों का भंडार छिपा है। आमतौर पर हम सभी केले और प्लांटैन खूब खाते हैं। लेकिन, बहुत से लोग यह नहीं जानते कि केले के पेड़ से निकलने वाले ‘केले के फूल’ में केले की तुलना में दस गुना अधिक पोषक तत्व और खनिज होते हैं। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इसे पकाकर या कच्चा खाया जाता है, लेकिन कई घरों में इसे बेकार समझकर फेंक दिया जाता है।

    अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के अनुसार, आहार में केले के फूल को शामिल करने से न केवल मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, बल्कि गुर्दे की पथरी को घोलने में भी मदद मिलती है। आइए जानते हैं उस अनोखे केले के फूल के 7 अद्भुत स्वास्थ्य लाभ, जो हमारे शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है।

    यह भी पढ़ें:आदतें: कुछ ऐसी आदतें जो आपकी जिंदगी बदल देंगी!

    केले के फूल के 7 अद्भुत स्वास्थ्य लाभ

    रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करना

    केले के फूल में मधुमेह रोधी गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर में इंसुलिन हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होता है। टाइप-2 मधुमेह के रोगियों पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि इसका नियमित सेवन रक्त शर्करा के स्तर को अचानक बढ़ने से रोककर नियंत्रित करने में मदद करता है।

    केले के फूल के फायदे: गुर्दे की पथरी की रोकथाम

    केले का फूल एक उत्कृष्ट प्राकृतिक मधुमेह निवारक के रूप में कार्य करता है। इसका अर्थ है कि यह शरीर से अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करता है। इसमें मौजूद विशेष यौगिक गुर्दे में कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल के जमाव को रोकते हैं। इससे गुर्दे की पथरी का खतरा काफी कम हो जाता है।

    गर्भाशय संबंधी समस्याओं की जांच करें

    केले का फूल महिलाओं के मासिक धर्म के दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव और पीसीओडी (प्रोजेस्टेरोन सिंड्रोम) की समस्याओं के लिए एक शक्तिशाली औषधि है। यह शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ाता है, गर्भाशय को स्वस्थ रखने में मदद करता है और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करता है।

    पाचन क्रिया में सुधार होता है।

    केले के फूल में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पेट में एसिड के स्तर को संतुलित करता है और एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है। यह पाचन संबंधी संक्रमणों से भी प्रभावी रूप से बचाव करता है।

    एनीमिया की रोकथाम

    हमारे देश में कई महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। केले के फूल में आयरन की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसे सब्जी के रूप में पकाकर खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है और थकान व कमजोरी दूर होती है।

    हृदय स्वास्थ्य सुरक्षित है।

    इसमें मौजूद पोटेशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखता है। साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और धमनियों में रक्त के थक्के बनने से रोकते हैं। इससे दिल के दौरे का खतरा कम होता है।

    तनाव और चिंता को कम करता है

    केले के फूल में प्राकृतिक मैग्नीशियम पाया जाता है। मैग्नीशियम एक प्राकृतिक अवसादरोधी है जो हमारे मूड को बेहतर बनाता है। यह नसों को शांत करता है, मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है और रात को अच्छी नींद लाने में मदद करता है।

    यदि आप सप्ताह में कम से कम एक बार केले के फूल को साफ करके प्याज और मसालों के साथ करी के रूप में पकाते हैं, तो आपको इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होंगे।

  • Sugar-Free Diet Side Effects: क्या बिना चीनी की डाइट बिगाड़ सकती है सेहत? एक्सपर्ट से समझें पूरा मामला…

    Sugar-Free Diet Side Effects: क्या बिना चीनी की डाइट बिगाड़ सकती है सेहत? एक्सपर्ट से समझें पूरा मामला…

    Sugar-Free Diet Side Effects: क्या बिना चीनी की डाइट बिगाड़ सकती है सेहत? एक्सपर्ट से समझें पूरा मामला…

    फिट रहने और वजन घटाने की होड़ में आजकल ‘शुगर-फ्री डाइट’ या चीनी को पूरी तरह से छोड़ देने का चलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भोजन से चीनी को पूरी तरह से गायब कर देना आपकी सेहत के लिए उतना ही खतरनाक हो सकता है जितना कि इसका अत्यधिक सेवन? मेडिकल एक्सपर्ट्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए ग्लूकोज जो चीनी या कार्बोहाइड्रेट से मिलता है, की एक निश्चित मात्रा बॉडी के लिए आवश्यक होती है।

    कुवैत के दासमन डायबिटीज इंस्टीट्यूट के रिसर्चर्स के एक ग्रुप ने 16 हफ़्तों तक चूहों को बिना सुक्रोज वाली कम फैट की डाइट और सुक्रोज वाली डाइट देकर उनकी तुलना की। रिसर्च में बताया गया कि शुगर फ्री डाइट सेहत के लिए नुकसान दायक भी होती है।शिकागो में एंडोक्राइन सोसाइटी की सालाना मीटिंग में पेश की गई इस स्टडी के मुताबिक, जिन चूहों को सुक्रोज-फ्री और कम फैट वाली डाइट दी गई, उनमें सुक्रोज वाली डाइट लेने वाले चूहों की तुलना में ब्लड शुगर कंट्रोल बेहद खराब रहा। रिसर्च में पाया गया कि शुगर फ्री डाइट का चूहों में सेवन करने से उनमें सूजन बढ़ी, गट बैक्टीरिया बिगड़े और फैटी लिवर के लक्षण भी काफी खराब हुए। अध्ययन के अनुसार, खाने से चीनी को पूरी तरह स्किप करना शरीर के मेटाबॉलिज्म और आंतों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

    रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बात

    कुवैत स्थित दसमान डायबिटीज इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने दो समूहों के चूहों की तुलना की। एक समूह को सुक्रोज युक्त लो-फैट डाइट दी गई थी और दूसरे समूह को पूरी तरह सुक्रोज फ्री लो फैट डाइट दी गई। अध्ययन में पाया गया कि दोनों समूहों का वजन लगभग समान रहा, लेकिन शुगर-फ्री डाइट वाले चूहों में इंसुलिन रेजिस्टेंस, ग्लूकोज नियंत्रण में कमी, आंतों में सूजन और गट माइक्रोबायोम में असंतुलन जैसी समस्याएं अधिक देखी गईं।

    शुगर फ्री डाइट पर एक्सपर्ट की राय

    मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स में कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव घोडी ने इन नतीजों को दिलचस्प बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इन्हें सावधानी से समझना चाहिए। डॉ. घोडी ने कहा इस स्टडी में चूहों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि जानवरों पर की गई स्टडी से काम की जानकारी मिल सकती है, लेकिन उनके नतीजे हमेशा इंसानों पर लागू नहीं होते। यह रिसर्च बताती है कि न्यूट्रिशन का मतलब किसी एक खाद्य तत्व को पूरी तरह हटाने का नाम नहीं है, बल्कि संतुलित और गुणवत्तापूर्ण आहार अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    क्या शुगर-फ्री डाइट सेहत को बिगाड़ती है?

    जब डॉ. घोडी से शुगर फ्री डाइट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एडेड शुगर यानी मिठाइयों, कोल्ड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड्स में मौजूद चीनी को कम करना सेहत के लिए लाभकारी है। हालांकि फलों, सब्जियों, दूध और साबुत अनाज में प्राकृतिक रूप से मौजूद शर्करा शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व देती है। उनका कहना है कि सभी प्रकार की शुगर को डाइट से पूरी तरह खत्म कर देना एक अत्यधिक प्रतिबंधात्मक तरीका हो सकता है, जो हर किसी के लिए सही नहीं है।

    गट हेल्थ पर पड़ सकता है असर

    विशेषज्ञों के अनुसार हमारी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहते हैं। नेचुरल शुगर वाले कई खाद्य पदार्थ फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो गट माइक्रोबायोम को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। अगर कोई व्यक्ति शुगर-फ्री डाइट के नाम पर इन पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भी अपनी डाइट से बाहर कर देता है, तो इससे आंतों के बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है। हालांकि इस संबंध में इंसानों पर और अधिक शोध की आवश्यकता है।

    अच्छी हेल्थ और डायबिटीज को मैनेज करने के लिए क्या शुगर फ्री डाइट सही है?

    हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि लोगों को चीनी से डरने या चीने से भरपूर फूड्स को डाइट से निकालने की जरूरत नहीं है। आप शुगर मैनेज करने के लिए और बॉडी को हेल्दी रखने के लिए एडेड शुगर कम करने पर ध्यान दें। इसके साथ ही डाइट में पर्याप्त मात्रा में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन, हेल्दी फैट और फाइबर शामिल करें। एक्सपर्ट ने बताया लम्बे समय तक हेल्दी रहने के लिए टिकाऊ और संतुलित खानपान जरूरी है ना कि प्रतिबंधित डाइट का सेवन करना।

    सभी तरह की शुगर क्या नुकसान पहुंचाती है?

    एक्सपर्ट का मानना है कि सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि सभी प्रकार की शुगर समान रूप से नुकसानदायक होती हैं। उदाहरण के लिए एक सेब में मौजूद नेचुरल शुगर के साथ फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व भी मिलते हैं, जबकि सॉफ्ट ड्रिंक केवल अतिरिक्त कैलोरी देती है और पोषण बहुत कम मिलता है। इसलिए अच्छी हेल्थ के लिए केवल चीनी को दोषी ठहराने की बजाय पूरे खानपान के पैटर्न पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी प्रकार की डाइट या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

  • बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हैं परेशान? एक्सपर्ट से जानिए इसे नेचुरली कंट्रोल करने का सही तरीका..​​​

    बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हैं परेशान? एक्सपर्ट से जानिए इसे नेचुरली कंट्रोल करने का सही तरीका..​​​

    बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हैं परेशान? एक्सपर्ट से जानिए इसे नेचुरली कंट्रोल करने का सही तरीका..​​​

    खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण आज ‘LDL कोलेस्ट्रॉल’ यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। असल में LDL कोलेस्ट्रॉल हमारी धमनियों (Arteries) में जमा होने वाला एक गाढ़ा वसा (Fat) है, जो धीरे-धीरे रक्त के बहाव को रोकने लगता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। राहत की बात यह है कि शुरुआत में ही सतर्क होकर इसे दवाइयों के बिना भी काफी हद तक संभाला जा सकता है। हाल ही में कंटेंट क्रिएटर और ब्रिटेन के सर्जन डॉ. राजन ने इंस्टाग्राम पर कुछ वैज्ञानिक शोधों पर आधारित ऐसी आदतें साझा कीं, जिन्हें नियमित रूप से अपनाने पर LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को नेचुरल तरीके से कम करने में मदद मिल सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं खराब कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के नेचुरल तरीके।

    कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करेगा घुलनशील फाइबर

    डॉ. राजन ने बताया अगर आपको खराब कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करना है तो आपको अपनी डाइट में घुलनशील फाइबर (Soluble Fibre) का सेवन बढ़ाना होगा। एक्सपर्ट ने बताया अगर आप रोजाना ओट्स, दाल, बीन्स जैसी चीजों से केवल 5 से 10 ग्राम घुलनशील फाइबर लेते हैं तो आप LDL कोलेस्ट्रॉल लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक कम कर सकते है।   
    कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करना है तो हेल्दी फैट खाएं

    डॉ. राजन ने सलाह दी कि अगर आप खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप संतृप्त वसा की जगह हेल्दी फैट का सेवन करें। मक्खन और फैटी प्रोसेस्ड मीट की जगह ऑलिव ऑयल, नट्स,सीड्स और ऑयली फिश का सेवन करें। एक्सपर्ट ने बताया 60 क्लीनिकल ट्रायल्स के मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि अगर संतृप्त वसा की जगह असंतृप्त (Unsaturated) वसा ली जाए तो  LDL कोलेस्ट्रॉल में 17 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा एक्सपर्ट ने बताया आप सोया, टोफू, दालें और दूसरे प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का सेवन करें फायदेमंद होगा, क्योंकि पौधों से मिलने वाले प्रोटीन में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता।

    वजन कम करना और नियमित व्यायाम भी जरूरी

    डॉ. राजन ने बताया कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए वजन कंट्रोल करना और बॉडी को रेगुलर एक्टिव रखना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया अगर आपका वजन अधिक है, तो शरीर के कुल वजन का सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत कम करने से LDL कोलेस्ट्रॉल में लगभग 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। साथ ही ट्राइग्लिसराइड और HDL यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बेहतर होता है। एक्सपर्ट ने बताया अगर आप सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज करते हैं तो इससे LDL कोलेस्ट्रॉल 3 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

    रेगुलर बॉडी एक्टिविटी रक्त वाहिकाओं (एंडोथेलियल फंक्शन) की कार्यक्षमता सुधारने, सूजन कम करने और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद करती है। अगर लम्बे समय तक लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव किया जाए तो आसानी से खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए स्टैटिन या PCSK9 इनहिबिटर जैसी दवाओं की जरूरत पड़ती है, तो ये लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव उन दवाओं को और अधिक प्रभावी बना देते हैं।

    लंबे समय तक LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रहने पर शरीर में क्या होता है?

    कार्डिया सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. सी.एम. नागेश बताते हैं जब LDL कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह धीरे-धीरे धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर जमा होने लगता है। इससे प्लेक (Plaque) बनता है। इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है, जिसमें धमनियां संकरी और कठोर होती जाती हैं। एक्सपर्ट ने बताया  जैसे-जैसे रक्त संचार बाधित होता है, दिल और मस्तिष्क तक ऑक्सीजन युक्त रक्त कम पहुंचता है। यदि यह प्लाक फट जाए, तो खून का थक्का (Blood Clot) बन सकता है, जो रक्त प्रवाह को अचानक रोक देता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह नुकसान कई वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।

    LDL कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए डाइट में क्या बदलाव करें?

    डॉ. नागेश के अनुसार अगर आप कोलेस्ट्रॉल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप तले हुए खाद्य पदार्थों और प्रोसेस्ड स्नैक्स से परहेज करें। आप इन फूड्स की जगह हेल्दी ऑप्शन जैसे मेवे,सीड्स, फल और फाइबर से भरपूर भोजन का सेवन करें। ये डाइट लिपिड प्रोफाइल में बेहतरीन सुधार ला सकती है। ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट का इस्तेमाल करें, प्रोसेस्ड मीट कम खाएं और दालें, ओट्स तथा हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें, क्योंकि ये फूड अप्रत्यक्ष रूप से मेटाबॉलिक हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल के पैटर्न को बढ़ावा देते हैं। डॉ. नागेश कहते हैं कि रोजाना 30 से 45 मिनट तेज चाल से पैदल चलना, नियमित व्यायाम, वजन कम करना और संतुलित आहार अपनाने से कुछ महीनों के भीतर LDL कोलेस्ट्रॉल में स्पष्ट सुधार देखा जा सकता है।

    कब पड़ती है दवा की जरूरत?

    एक्सपर्ट के मुताबिक अगर लाइफस्टाइल में बदलाव के बावजूद कोलेस्ट्रॉल लगातार अधिक बना रहे, या व्यक्ति को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान की आदत है, मोटापा या कम उम्र में दिल के रोगों की फैमिली हिस्ट्री है तो दवा शुरू करना जरूरी हो जाता है। ऐसे मामलों में इलाज में देरी करने से भविष्य में हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या नई दिनचर्या शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

  • क्या लंबे समय तक बैठे रहने के बीच 3 मिनट की हल्की कसरत ब्लड शुगर को रख सकती है कंट्रोल? जानिए वैज्ञानिक कारण..​​​

    क्या लंबे समय तक बैठे रहने के बीच 3 मिनट की हल्की कसरत ब्लड शुगर को रख सकती है कंट्रोल? जानिए वैज्ञानिक कारण..​​​

    क्या लंबे समय तक बैठे रहने के बीच 3 मिनट की हल्की कसरत ब्लड शुगर को रख सकती है कंट्रोल? जानिए वैज्ञानिक कारण..​​​

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, डेस्क जॉब, खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल और निष्क्रिय जीवनशैली कम उम्र में ही लोगों को डायबिटीज का शिकार बना रही है। खराब डाइट का सेवन तेजी से ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ाता है। आमतौर पर माना जाता है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखना, घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी है। वॉक को खासतौर पर शुगर कंट्रोल करने के लिए जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग सीटिंग जॉब, वक्त की कमी और आलस की वजह से वॉक नहीं कर पाते और उनका शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।

    बोर्ड-प्रमाणित इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पर्ल ने इंस्टाग्राम पोस्ट में डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि अगर हर 45 मिनट में सिर्फ 3 मिनट तक ये खास एक्सरसाइज की जाए तो आसानी से ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। इस स्टडी में अधिक वजन वाले पुरुषों पर 8.5 घंटे तक बैठे रहने की स्थिति में अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियों के असर की तुलना की गई।

    डॉ. पर्ल के मुताबिक हर 45 मिनट में बॉडी-वेट स्क्वाट्स (Body weight Squats) करने वाले लोगों में ब्लड शुगर का स्तर, उन लोगों की तुलना में बेहतर रहा जो 30 मिनट तक वॉक करते थे। एक्सपर्ट ने बताया इस एक्सरसाइज का असर सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल  तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग और ओवर ऑल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

    3 मिनट की एक्सरसाइज कैसे असर करती है, रिसर्च से समझें

    शोध में प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटा गया। पहला समूह पूरे समय बैठा रहा जबकि दूसरे समूह ने एक बार 30 मिनट की वॉक की। तीसरे समूह ने हर 45 मिनट में 3 मिनट तक वॉक की। चौथे समूह ने हर 45 मिनट में लगभग 10 बॉडी-वेट स्क्वाट्स किए। डॉ. पर्ल मटर ने रिसर्च के निष्कर्ष का हवाला देते हुए बताया जिन लोगों ने हर 45 मिनट में थोड़ी-थोड़ी एक्सरसाइज, चाहे स्क्वाट्स हों या छोटी वॉक हो, की उनका ब्लड शुगर बेहतर तरीके से नॉर्मल रहा। एक्सपर्ट ने बताया साढ़े 8 घंटे बैठकर काम करने के बाद सिर्फ 30 मिनट की वॉक करने से बेहतर हर 45 मिनट में 3 मिनट की एक्सरसाइज है।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि ब्लड शुगर कंट्रोल का संबंध ग्लूटियस मैक्सिमस (कूल्हों की बड़ी मांसपेशी) और क्वाड्रिसेप्स (जांघ की आगे की मांसपेशियां) के सक्रिय होने से था। इससे पता चलता है कि शरीर की ये बड़ी मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में अहम किरदार निभाती हैं। डॉ. पर्ल मटर ने कहा हर किसी के लिए हर 45 मिनट में एक्सरसाइज करना संभव नहीं हो सकता। लेकिन इस स्टडी की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग तरह की छोटी-छोटी एक्सरसाइज को देखा गया। चाहे कुछ लोग स्क्वाट्स करें या थोड़ी देर टहलें, शरीर को इससे मेटाबॉलिक फायदे मिलते हैं। इसका सकारात्मक असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मेटाबॉलिज्म और ब्रेन हेल्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    बार-बार थोड़ा चलना-फिरना क्यों है जरूरी?

    एलीट केयर क्लिनिक के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी (MBBS, MD, FAIG) ने बताया हर आधा से एक घंटे में थोड़ी देर चलना-फिरना लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के नुकसान को कम करता है। लगातार बैठे रहने से मांसपेशियां ब्लड से  ग्लूकोज कम मात्रा में ले पाती हैं। जब स्क्वाट्स, तेज चाल से चलना या सीढ़ियां चढ़ने जैसी एक्टिविटी की जाती है तो शरीर की बड़ी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, तो वे खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती हैं। यह प्रक्रिया कुछ हद तक इंसुलिन पर निर्भर नहीं होती।

    एक्सपर्ट ने बताया अगर कोई इंसान पूरा दिन 10 से 12 घंटे सिर्फ बैठा रहता है और फिर एक बार आधा घंटे वॉक कर लेता है तो ऐसे लोगों में ब्लड शुगर में उतार चढ़ाव बना रहता है।  इसके विपरीत, दिनभर में बार-बार छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेने से शरीर को लगातार मेटाबॉलिक फायदा मिलता है, जिससे ब्लड शुगर बेहतर तरीके से कंट्रोल रहता है और समय के साथ इंसुलिन सेंसिटिविटी भी सुधरती है।

    शुगर कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?

    डॉ. रेड्डी के अनुसार बॉडी-वेट स्क्वाट्स इसलिए प्रभावी हैं क्योंकि ये पैरों की बड़ी मांसपेशियों को एक्टिव करती है, जो अधिक मात्रा में ग्लूकोज का उपयोग कर सकती हैं। एक्सपर्ट ने बताया हालांकि एक्सरसाइज करना सभी के लिए उपयुक्त नहीं है खासकर जिन बुजुर्गों को संतुलन बनाने में परेशानी होती है, घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों, गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोगों या जिन्हें पहले से ही जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए एक्सरसाइज करना परेशानी का सबब बन सकता है। एक्सपर्ट ने बताया एक्सरसाइज हमेशा व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

    सिटिंग जॉब करते हैं तो इस तरह रखें बॉडी को एक्टिव

    • फोन पर बात करते समय कुछ कदम टहलें इस तरह आपकी बॉडी एक्टिविटी बढ़ेगी और मसल्स की स्टिफनेस कम होगी और शुगर नॉर्मल रखने में भी मदद मिलेगी।
    • अगर आप ज्यादा मीटिंग करते हैं या सीटिंग जॉब करते हैं तो एक मीटिंग खत्म होने और दूसरी शुरू होने के बीच 2–3 मिनट चलें। इस तरह 2 से तीन मिनट की वॉक आपकी बॉडी के लिए असरदार साबित होगी।
    • हर 45–60 मिनट में उठकर थोड़ी देर चलें या कुछ स्क्वाट्स करें। नियमित रूप से ऐसा करने पर समय के साथ ब्लड शुगर कंट्रोल और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार देखा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है।

  • क्या बरसात में दही खाने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट..​​​

    क्या बरसात में दही खाने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट..​​​

    क्या बरसात में दही खाने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट..​​​

    आयुर्वेद में ऋतु अनुसार खाने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार चरकसंहिता में बताया गया है कि दही को तीन ऋतुओं में नहीं खाना चाहिए। शरद्ग्रीष्मवसन्तेषु प्रायशो दधि गर्हितम्। अर्थात् शरद् यानि सितंबर-अक्टूबर, ग्रीष्म और बसंत यानि मार्च, अप्रैल, मई, जून में भी दही खाना निषेध बताया गया है। दही की तासीर गरम होती है, पर जब आप इसका मठ्ठा बनाकर पीते है या इसमें पानी मिलाकर पीते है तो यह आपके पेट को अंदर से ठंडा रखता है। दही को पतला करके खाने से एसिडिटी नहीं होती और डिहाइड्रेशन दूर होता है। इसलिए इसका सेवन गर्मियों में लाभदायक माना जाता है। लेकिन मानसून के मौसम में दही क्यों हानिकारक बन जाता है। आयुर्वेद क्या कहता है आइये डॉक्टर शर्मा से जानते हैं। मानसून में दही खानी चाहिए या नहीं?

    क्या बारिश के मौसम में दही नहीं खानी चाहिए?

    आशा आयुर्वेदा की डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि मॉनसून के दौरान हमारी पाचन शक्ति कम हो जाती है। इसका मतलब है कि बहुत ज़्यादा ठंडा और भारी दही खाने से गैस और कफ बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दही की प्रकृति अम्लीय होती है और सादा दही का सेवन आपके खून को भी दूषित कर सकता है। अगर आप रात में दही खाते है तो अभी रुक जाइए, क्योंकि रात में दही खाने से बलगम बन सकता है और गले में खराश हो सकती है।

    दही खाने के फायदे

    • दही हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है
    • दही खाने से इम्यून सिस्टम बेहतर होता है
    • दही से हड्डियों को भी स्वस्थ रख जाता है
    • वजन को नियंत्रित रखने में भी दही मदद करती है

    मानसून में दही सेवन के नुकसान

    अगर आप मानसून के मौसम में दही खा रहे हैं, तो इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाएं। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, गर्मी और मानसून के मौसम में दही में मीठा मिलाकर खाना चाहिए। इस तरह इसकी तासीर बहुत गर्म नहीं होगी और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा। बरसातों में ज्यादा दही खाने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-

    दही की तासीर एसिडिक होना, त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याएं होने का खतरा, पाचन क्रिया की कमजोरी।

    मानसून में दही खाने का सही तरीका

    आयुर्वेद में दही को देर से पचने वाला आहार माना जाता है, लेकिन इसे दूसरी चीजों के साथ मिलाकर खाएं तो नुकसान कम होगा। दही में थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर और काला नमक डालकर खाएं। इससे पाचन बेहतर होता है। घी, चीनी या आंवला जैसी चीजों के साथ खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। फ्रिज से निकालते ही न खाएं। इसे सामान्य तापमान पर आने के बाद खाएं। बारिश के मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पाचन शक्ति कम हो जाती है। इससे दही देर से पचती है और इसका सेवन करने से अपच की समस्या हो सकती है। लोगों को बरसात में हल्का खाना खाना चाहिए, जो आसानी से पच जाए। जो लोग अपच की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें दही से दूरी बना लेनी चाहिए।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • डिटॉक्स से लेकर हाइड्रेशन तक, जानिए खाली पेट खीरा-पुदीना जूस पीने के फायदे..​​​

    डिटॉक्स से लेकर हाइड्रेशन तक, जानिए खाली पेट खीरा-पुदीना जूस पीने के फायदे..​​​

    डिटॉक्स से लेकर हाइड्रेशन तक, जानिए खाली पेट खीरा-पुदीना जूस पीने के फायदे..​​​

    सुबह की शुरुआत अगर एक फ्रेश और हेल्दी ड्रिंक से हो, तो पूरा दिन एनर्जेटिक बना रहता है। आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और असंतुलित खानपान के बीच खुद को डिटॉक्स करना बेहद ज़रूरी है। ऐसे में सुबह खाली पेट खीरा और पुदीने का जूस पीना आपके शरीर के लिए वरदान साबित हो सकता है। यह न सिर्फ आपको ताजगी देता है, बल्कि शरीर को अंदर से साफ कर कई बीमारियों से दूर रखता है। ऐसे में यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि सुबह खाली पेट खीरे और पुदीना का जूस पीने से क्या होता है।

    1. शरीर को करता है डिटॉक्स

    रात भर में हमारे शरीर में कई तरह के हानिकारक टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं। खीरे में भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जबकि पुदीना अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। जब आप खाली पेट इसका सेवन करते हैं, तो यह लिवर और किडनी को साफ करने में मदद करता है और शरीर के सारे गंदे टॉक्सिन्स को बाहर निकाल फेंकता है।

    2. वजन घटाने में मददगार
    अगर आप बढ़ते वजन या पेट की चर्बी से परेशान हैं, तो यह जूस आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। खीरे और पुदीने के जूस में कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है और पानी की मात्रा बहुत अधिक। इसे सुबह पीने से आपका मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है, जिससे फैट बर्न होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। साथ ही, यह लंबे समय तक आपका पेट भरा रखता है, जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं।

    3. पाचन तंत्र के लिए
    गैस, एसिडिटी, कब्ज और ब्लोटिंग जैसी पेट की समस्याओं के लिए यह जूस रामबाण साबित होता है। पुदीने में मौजूद ‘मेंथॉल’ पाचक एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। वहीं, खीरे की ठंडी तासीर पेट की जलन और एसिडिटी को तुरंत शांत करती है। सुबह खाली पेट इसे पीने से आपका पेट पूरी तरह साफ रहता है।

    4. नेचुरल ग्लोइंग स्किन
    कहा जाता है कि आपकी स्किन वैसी ही दिखती है, जैसा आपका पेट होता है। जब यह जूस आपके खून को साफ करता है और शरीर को हाइड्रेट रखता है, तो इसका सीधा असर आपकी त्वचा पर दिखता है। खीरे में मौजूद सिलिका और पुदीने के एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंहासों, दाग-धब्बों को कम करते हैं और त्वचा को अंदर से चमकदार और बेदाग बनाते हैं।

    5. डिहाइड्रेशन से बचाए
    गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है। खीरे में लगभग 95% पानी होता है। सुबह खाली पेट इस जूस को पीने से शरीर का इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है, जिससे आप दिनभर हाइड्रेटेड और फ्रेश महसूस करते हैं। यह शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखता है।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए, सबसे ज्यादा इंफेक्शन का रहता है खतरा..​​​

    मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए, सबसे ज्यादा इंफेक्शन का रहता है खतरा..​​​

    मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए, सबसे ज्यादा इंफेक्शन का रहता है खतरा..​​​

    गीली मिट्टी की खुशबू, ठंडी हवाएं और बारिश की बूंदों की आवाज, ये मानसून के मौसम को सुहावना बना देती हैं। ये मौसम भीषण गर्मी से राहत दिलाता है और हवा में ठंडक लेकर आता है। बारिश के दिनों में लोग तला भुना बहुत खाने लगते हैं। चाय के साथ पकौड़े, समोसे-कचौड़ी खाना लोगों को खूब पसंद होता है। लेकिन आप ये नहीं जानते कि ये मौसम बीमारियों और इंफेक्शन का भी है। इस मौसम में बाहर का खाना सबसे जल्दी खराब होता है। जिससे बीमार पड़ने में देर नहीं लगती। इसलिए बाहर की ये कुछ चीजें आपकी सेहत के लिए खतरा हो सकती हैं।

    बारिश के मौसम में अगर गरम-गरम पकौड़े, चाय और भुने हुए भुट्टे मिल जाएं, तो दिन बन जाता है। लेकिन आशा आयुर्वेद क्लीनिक की डॉक्टर शर्मा ने बताया कि यही मौसम अपने साथ कुछ ऐसे बदलाव लाता है जो आपके शरीर पर प्रभाव डालते हैं। पहले उन बदलावों को जान लेना जरूरी है। मानसून का मौसम वातावरण में नमी और ठंडक लाता है। आयुर्वेद के अनुसार यही मौसम आपके शरीर में वात और पित्त के असंतुलन का कारण बनता है।

    वात असंतुलन- नमी और ठंडी हवा के कारण शरीर में वात बढ़ जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न, बदन दर्द और थकान होती है।

    पित्त असंतुलन- गर्मी के बाद बारिश का मौसम जमीन से भाप छोड़ता है जो प्रकृति में एसिडिक होता है। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। पेट में जलन और एसिडिटी की परेशानी होती है, जिसका सीधा असर आपकी पाचन क्रिया पर पड़ता है। इससे खाना पचाने में भी समय लगता है।

    कफ असंतुलन- अगर आपको हल्की सी सर्दी लगने पर सर्दी, खांसी और कफ की समस्या होती है, तो इसका कारण आपका बढ़ा हुआ कफ दोष है।

    मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए?

    इस मौसम में आपको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि आप बारिश का मज़ा उठा सके और बीमार न पड़े। आप सिर्फ अपने खान पान को सुधार कर सेहतमंद रह सकते है। इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना होगा।

    तला भुना बाहर का खाना छोड़ दें- आयुर्वेद में इसे अभक्ष्य कहते हैं। इसमें तला भुना खाना शामिल होती है। बाहर सड़क पर खुले में बिकने वाले खाने से इस मौसम में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इससे एसिडिटी, गैस और सीने में जलन भी हो सकती है। इसलिए बरसात में चाट पकोड़े, गोल गप्पे, भुने हुए भुट्टे, शकरकंद बाहर से खरीदकर न खाएं।

    नॉन वेज खाना छोड़ दें- बरसात के मौसम में मांसाहारी भोजन से परहेज करें क्योंकि उच्च आर्द्रता बैक्टीरिया को पनपने में मदद करती है। इस मौसम में पाचन क्रिया भी धीमी हो जाती है। अधिक मांस या खराब सी फूड खाने से पेट में गंभीर संक्रमण और फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

    ठंडे पेय और खाना छोड़ दें- इस मौसम में आपको ठंडे भोजन से दूर रहना चाहिए। पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे खाना ठीक से पचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ठंडा पेय या ठंडा भोजन खाने से बचें। हर्बल टी, अदरक का पानी या सूप जैसी गर्म चीजें पीएं। इससे पाचन बेहतर होगा।

    मसालेदार खाना न खाएं- मसालेदार खाना पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा कर सकता है और पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है, खासकर मानसून के मौसम में जब पाचन क्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है। इसके बजाय, अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला खाना चुनें, जिसमें तेल और मसाले कम हों।

    पत्तेदार सब्जियों और कटे हुए सलाद से बचें- हरी सब्जियों की नमी में कीड़े और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। इसे खाने से पेट खराब हो सकता है। बाहर बिकने वाले कटे हुए सलाद या जूस में मक्खियां बैठ सकती हैं। हमेशा घर में ताजा कटा सलाद ही खाएं।

    मानसून के मौसम में अपना ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस मौसम में वातावरण में पनपने वाले कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है ऐसे में आप बाहर के खाने से बचें, घर का शुद्ध सात्विक भोजन ही खाएं। मानसून में ताजा और हल्का गर्म खाना खाएं। इसके अलावा सौंफ और जीरे का पानी पीएं ताकि आपका पेट साफ हो सके और इंफेक्शन से बचें।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • ज्यादा आम खाना पड़ सकता है भारी! जानिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज कितने आम पर्याप्त..​​​

    ज्यादा आम खाना पड़ सकता है भारी! जानिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज कितने आम पर्याप्त..​​​

    ज्यादा आम खाना पड़ सकता है भारी! जानिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज कितने आम पर्याप्त..​​​

    आम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता, भले ही कुछ महीनों के लिए आम बाजार में आता हो, लेकिन इसकी डिमांड सबसे ज्यादा रहती है। लोग सीजन में इतने आम खा लेते हैं जितने दूसरे फल पूरे साल में खाते हैं। आम बहुत ही रसीली, मीठा और स्वादिष्ट फल है। ये जितना स्वादिष्ट है उतना ही गुणवान भी है। अगर आप सही मात्रा में आम खाते हैं तो इससे शरीर को कई फायदे मिलते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा आम खाना नुकसान भी पहुंचा सकता है। जी हां जो लोग बिना सोचे समझे सीजन पर एक दिन में 10-12 आम तक खा जाते हैं उन्हें आम के फायदे और नुकसान जरूर पता होने चाहिए। आइये जानते हैं एक आदमी को 1 दिन में कितने आम खाने चाहिए और ज्यादा आम खाने से क्या नुकसान होता है?

    1 दिन में कितने आम खाने चाहिए?

    डाइटिशियन सिंह के मुताबिक एक स्वस्थ आदमी 1 दिन में 1-2 आम आसानी से खा सकता है। आप सही मात्रा में आम खाएंगे तो ये फायदेमंद साबित होगा, लेकिन किसी भी फल की अति आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। डायबिटीज के मरीज दिनभर में 1-2 पीस आम खा सकते हैं। अगर शुगर कंंट्रोल रहता है तो पूरे दिन में खाने के बाद 100 ग्राम आम तक भी खा सकते हैं।

    1 आम में कितनी कैलोरी होती हैं?

    फिटनेस कोच के अनुसार, आम खाने में समस्या नहीं है, बल्कि आम ज्यादा मात्रा में खाने से परेशानी हो सकती है। अगर आप करीब 100 ग्राम आम खाते हैं तो इससे शरीर को 60 कैलोरी और 14 ग्राम चीनी मिलती है। वहीं 100 ग्राम केला में 89 कैलोरी और 12 ग्राम चीनी होती है। इतने ही अंगूर में करीब 69 कैलोरी और 16 ग्राम चीनी होती है।

    ज्यादा आम खान से क्या नुकसान होता है?

    अगर आप रोजाना जरूरत से ज्यादा आम खाते हैं तो इससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा ज्यादा आम खाने से आपका वजन बढ़ सकता है। आम खाने से मोटापा तेजी से बढ़ता है। चूंकि आम की तासीर गर्म होती है और इसकी मिठास भी ज्यादा होती है, इसलिए ज्यादा आम खाने से ज्यादा त्वचा पर दाने निकलने लगते हैं। रैश, मुंहासे, खुजली जैसी त्वचा से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • डायबिटीज कंट्रोल करनी है? डॉक्टर ने बताया क्यों 10 मिनट की वॉक है 1 घंटे की जिम से ज्यादा असरदार​​​

    डायबिटीज कंट्रोल करनी है? डॉक्टर ने बताया क्यों 10 मिनट की वॉक है 1 घंटे की जिम से ज्यादा असरदार​​​

    डायबिटीज कंट्रोल करनी है? डॉक्टर ने बताया क्यों 10 मिनट की वॉक है 1 घंटे की जिम से ज्यादा असरदार​​​

    अगर आप डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाते हैं तो जान लें सही टाइम पर की गई 10 मिनट की वॉक भी उससे कहीं ज्यादा असरदार हो सकती है। जी हां ये सुनकर भले ही आपको विश्वास न हो, लेकिन साइंस ऐसा कहती है। खाना खाते ही शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। खासतौर से हाई कार्ब्स वाली डाइट शुगर स्पाइक का कारण बनती है। इसलिए सबसे ज़रूरी चीज़ है खाना खाने की टाइमिंग और उसके बाद की गई एक्टिविटी।

    इंस्टाग्राम पर केयरयाया के डॉक्टर नील के शाह ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें वो बता रहे हैं कि कार्ब्स लेने के बाद आपका ब्लड शुगर बढ़ जाता है। आपका शरीर उस शुगर को ब्लडस्ट्रीम से हटाने के लिए इंसुलिन रिलीज़ करता है। अगर लंबे समय तक खाने के बाद शुगर लेवल स्पाइक करे तो इसका असर आपकी सेहत और मेटाबॉलिक हेल्थ पर पड़ता है। लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर आप खाने का बाद वॉक करते हैं तो आपकी मसल्स को फ्यूल की जरूरत होती है। इस स्थिति में मसल्स शुगर से एनर्जी खींचती हैं और इसके लिए ज्यादा इंसुलिन की जरूरत भी नहीं होती है।

    रात के खाने के बाद 10 मिनट की वॉक है फायदेमंद

    रात के खाने के ठीक बाद जब आपका ब्लड शुगर बढ़ रहा हो, तब हल्की वॉक एक रिलीज़ वाल्व की तरह काम करती है। यह शुगर के उछाल को होने से पहले ही कम कर देती है। यह रात के खाने के बाद एक अच्छी आदत है जिसे सभी को अपनाना चाहिए। इसीलिए यहां इंटेंसिटी से ज़्यादा टाइमिंग मायने रखती है। सुबह 7 बजे जिम में हार्ड वर्कआउट कई वजहों से बहुत अच्छा है, लेकिन यह रात 8 बजे आपके खाने से होने वाले ब्लड शुगर के उछाल के लिए कुछ नहीं करता। वॉक इसलिए काम करती है क्योंकि आप इसे खाने के ठीक बाद करते हैं, जब शुगर आपके खून में मिल रही होती है।

    10 मिनट की वॉक से कम होता है शुगर स्पाइक

    स्टडीज़ में यह भी पाया गया है कि खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक खाने के बाद होने वाले शुगर के उछाल को काफी कम कर देती है। इसका मतलब यह नहीं है कि जिम न जाएं। जिम आपकी ताकत, दिल की सेहत और बहुत कुछ बेहतर बनाता है। लेकिन यह अलग काम के लिए एक अलग टूल है। रोजाना ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए, खाने के बाद थोड़ी देर टहलना सबसे आसान और असरदार चीजों में से एक है।

    खाना खत्म करने के 30 मिनट के अंदर सिर्फ़ 10 से 15 मिनट टहलने का टारगेट रखें। आपको आराम से टहलना है, बस इतना ही आपके लिए काफी है। बहुत ज़्यादा तेज वॉक की जरूरत नहीं है। रात के खाने के बाद ऐसा करना सबसे ज़्यादा असरदार होता है, लेकिन यह किसी भी खाने के बाद काम करता है।

    यानि अब से आप खाना खाते ही बैठ जाते हैं या लेट जाते हैं तो ऐसा बिल्कुल भी न करें। अगली बार खाना खाने के बाद बस बैठे न रहें, बल्कि थोड़ी देर टहलें। इससे आप खुद को काफी एनर्जेटिक महसूस करेंगे।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है तो सावधान! इन सब्जियों का ज्यादा सेवन कर सकता है नुकसान..​​​

    ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है तो सावधान! इन सब्जियों का ज्यादा सेवन कर सकता है नुकसान..​​​

    ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है तो सावधान! इन सब्जियों का ज्यादा सेवन कर सकता है नुकसान..​​​

    डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट का बहुत ज़्यादा ध्यान रखना पड़ता है। खानपान को लेकर ज़रा सी लापरवाही ब्लड शुगर बहुत तेजी से बढ़ाती है। डायबिटीज के ज़्यादातर मरीजों लगता है कि उन्हें सिर्फ मीठे से परहेज करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है, ऐसी कई सब्जियां हैं जो हैं तो हेल्दी लेकिन उनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है जों डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी ज़हर से कम नहीं है। डॉक्टर ने अपने यू ट्यूब पेज पर वडियो शेयर कर के बताया है कि डायबिटीज में किन सब्जियों को नहीं खाना चाहिए?

    डायबिटीज इन सब्जियों का नहीं करना चाहिए सेवन

    • आलू
      : डायबिटीज के मरीजों को आलू का सेवन नहीं करना चाहिए। एक पकाए हुए आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 111 तक हो सकता है जो चीनी से भी ज़्यादा है। वहीं, उबाले हुए आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 78 से लेकर 89 तक होता है। उबले हुए आलू का सेवन करने से शुगर उतना ही बढ़ता है जितना एक कोल्ड ड्रिंक पीने से बढ़ता है।

    • कॉर्न
      : बारिश के मौसम में लोग भुट्टा खूब खाते हैं लेकिन यही मक्का डायबिटीज के मरीजों के लिए ज़हर समान है। आधी कटोरी मक्का में 21 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं और सिर्फ 2 ग्राम फाइबर होते हैं। स्वीट कॉर्न का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 60 के ऊपर होता है जो हाई रेंज में आता है। आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे इसलिए कॉर्न को अपनी डाइट से हमेशा दूर रखें।

    • वेजिटेबल जूस
      : डायबिटीज मरीजों के लिए सिर्फ फ्रूट जूस ही हानिकारक नहीं है बल्कि गाजर, बीटरूट और टमाटर जूस जैसे मिक्स जूस भी नुकसानदायक माने जाते हैं। दरअसल, जब आप सब्जी का जूस निकालते हैं तो उसका फायबर चला जाता है और उसमें सिर्फ शुगर रह जाता है। हालांकि, आपके लिए करेले का जूस फायदेमंद है

    • शकरकंदी
      : शकरकंदी का सेवन भी डायबिटीज के मरीजों को नहीं करना चाहिए। शकरकंदी को अगर आप बेक या रोस्ट कर खा रहे हैं तो इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 90 तक जा सकता है। हालांकि, अगर आप इसे उबालकर खाते हैं तो इसका जीआई 40 तक रहता है। तो आप इसका सेवन उबालकर कर सकते हैं लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।