Category: Health

  • वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक… सोया चंक्स की ये 4 हाई-प्रोटीन रेसिपीज करेंगी आपकी डाइट को बेहतर..

    वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक… सोया चंक्स की ये 4 हाई-प्रोटीन रेसिपीज करेंगी आपकी डाइट को बेहतर..

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    आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि लोग अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर खास ध्यान दे रहे हैं. खासकर जिम जाने वाले, वर्कआउट करने वाले, वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोग और शाकाहारी भोजन करने वाले लोग ऐसे विकल्प तलाशते हैं जो प्रोटीन से भरपूर होने के साथ स्वादिष्ट भी हों. ऐसे में सोया चंक्स एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. इसमें प्रोटीन के अलावा फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे कई तरह की स्वादिष्ट और हेल्दी रेसिपीज में आसानी से शामिल किया जा सकता है.

    सोया चंक्स सलाद
    अगर आप हल्का और पौष्टिक स्नैक चाहते हैं तो सोया चंक्स सलाद अच्छा विकल्प है. उबले हुए सोया चंक्स में खीरा, टमाटर, प्याज, गाजर, शिमला मिर्च और हरा धनिया मिलाएं. ऊपर से नींबू का रस, काली मिर्च और थोड़ा काला नमक डालें. यह सलाद प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है.

    सोया चंक्स पुलाव
    सोया चंक्स का पुलाव स्वाद और पोषण दोनों का बेहतरीन मेल है. सबसे पहले सोया चंक्स को गर्म पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें. इसके बाद चावल, मटर, गाजर, बीन्स और हल्के मसालों के साथ पुलाव तैयार करें. यह लंच या डिनर के लिए हेल्दी विकल्प है.

    सोया चंक्स टिक्की
    शाम की हल्की भूख के लिए सोया चंक्स टिक्की बनाई जा सकती है. उबले हुए सोया चंक्स को बारीक काटकर उसमें उबला आलू, गाजर, हरा धनिया और हल्के मसाले मिलाएं. टिक्की बनाकर तवे पर कम तेल में सेंक लें. इसे हरी चटनी या दही के साथ परोस सकते हैं.

    सोया चंक्स भुर्जी
    अगर जल्दी बनने वाली हाई-प्रोटीन डिश चाहिए तो सोया चंक्स भुर्जी बढ़िया विकल्प है. भीगे हुए सोया चंक्स को बारीक काटकर प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और मसालों के साथ भूनें. यह रोटी, पराठे या ब्रेड के साथ स्वादिष्ट लगती है.

    सोया चंक्स बनाते समय रखें ये बातें
    सोया चंक्स को इस्तेमाल करने से पहले 10 से 15 मिनट तक गर्म पानी में भिगोना और फिर अच्छी तरह निचोड़ना जरूरी है. इससे इसका स्वाद और बनावट बेहतर हो जाती है. इसे ज्यादा तेल और मसालों में पकाने से बचें ताकि इसकी पौष्टिकता बनी रहे. साथ ही इसमें ताजी सब्जियां मिलाने से पोषण और बढ़ जाता है. बेहतर स्वाद और अधिक पोषण के लिए सोया चंक्स की रेसिपी हमेशा ताजा बनाकर ही खाएं.

  • 27 साल बाद खुला बचपन का खौफनाक सच! जिन्हें माता-पिता माना, वो निकले अपहरणकर्ता..​​​​

    27 साल बाद खुला बचपन का खौफनाक सच! जिन्हें माता-पिता माना, वो निकले अपहरणकर्ता..​​​​

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    मात्र तीन साल की उम्र में जुआना रामिरेज को मेक्सिको सिटी के विशाल बोस्के दे चापुल्टेपेक पार्क से दिनदहाड़े किडनैप कर लिया गया था. परिवार पार्क में घूम रहा था. माता-पिता ने क्षणभर के लिए हाथ छोड़ा और बच्ची गायब हो गई. किडनैपर्स ने उसे नया नाम रोसियो दिया और नया जन्मदिन बताकर अपने साथ रख लिया.

    27 लंबे सालों तक जुआना उन्हें अपनी असली मां-बाप समझती रही. फिर एक तस्वीर ने सब कुछ बदल दिया. घटना 1 अक्टूबर 1995 की है. लोरेना रामिरेज अपने पति, तीन बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पार्क घूमने गई थी. चिड़ियाघर देखकर जब वे विदाई ले रहे थे तभी छोटी जुआना बीच से गायब हो गई. लोरेना ने बताया कि उन्होंने और पति ने क्षणभर के लिए हाथ छोड़ा था. जब मुड़े तो बच्ची वहां नहीं थी. उन्होंने तुरंत खोज शुरू की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई. लोरेना ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी. 24 साल तक वे बेटी को खोजती रहीं.

    बदल दी थी पहचान
    किडनैपर्स ने जुआना को टोलुका ले जाकर रखा. उन्होंने उसे बताया कि उसका जन्मदिन 1 अक्टूबर 1995 है यानी जिस दिन उसे उठाया गया. असली जन्मदिन 16 जून था. नया नाम रोसियो रखा गया. पड़ोसियों ने बाद में बच्ची को बताया कि ये लोग उसके जैविक माता-पिता नहीं हैं. जब उसने पूछा तो “मां” ने कहा कि उन्होंने उसे पार्क में अकेला घूमते पाया और गोद ले लिया. जुआना ने बताया कि उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था. 17 साल की उम्र में वह घर छोड़कर भाग निकली और बाद में शादी कर ली. सालों बाद सोशल मीडिया और मिसिंग पर्सन पोस्टर की मदद से राज खुला. जुआना (रोसियो) ने अपनी बचपन की तस्वीर अपलोड की थी. लोरेना की दूसरी बेटी मारिया जोस ने वह फोटो देखी और समानता देखकर संपर्क साधा. डीएनए टेस्ट में 99.99 प्रतिशत मैच पाया गया. 2022 में मां-बेटी का भावुक पुनर्मिलन हुआ.

    मिल गई खोई बेटी
    लोरेना ने कहा, “मैंने तीन साल की बच्ची खोई और 30 साल की महिला को पाया. उसके जीवन के कई पड़ाव मुझसे छीन लिए गए.” जुआना ने मां को देखते ही कहा, “आप मेरी मां हैं.” दोनों ने गले लगाया. लोरेना ने बताया कि 27 साल की पीड़ा अकल्पनीय थी लेकिन भगवान ने फिर मिलने का मौका दिया. दोनों ने खोया समय पूरा करने का संकल्प लिया. जुआना अब शादीशुदा हैं और खुद मां बन चुकी हैं. इस मामले में किडनैपर्स की बाद में गिरफ्तारी भी हुई. मेक्सिको की अधिकारियों ने जोड़ी को गिरफ्तार किया. लंबे समय तक चले इस अपराध ने पूरे समाज को झकझोर दिया. यह कहानी बाल अपहरण के खतरे को रेखांकित करती है. दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बच्चे असुरक्षित हो सकते हैं. माता-पिता को बच्चों पर निरंतर नजर रखनी चाहिए. पार्क, मेले या बाजार में हाथ कभी ना छोड़ें. मिसिंग चाइल्ड के मामलों में तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराएं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें.

  • बकरी के दूध में छिपे हैं बड़े फायदे! गाय के दूध से भी अलग, जानें क्यों माना जाता है खास..​​​​

    बकरी के दूध में छिपे हैं बड़े फायदे! गाय के दूध से भी अलग, जानें क्यों माना जाता है खास..​​​​

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    इंसान के बच्चों को एक साल की उम्र के बाद आमतौर पर गाय का दूध पिलाना शुरू किया जाता है. गाय को माता का दर्जा दिया जाता है क्योंकि उसका दूध पोषण से भरपूर माना जाता है. लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में एक और विकल्प उभरकर सामने आया है जो कई मामलों में गाय के दूध से बेहतर साबित हो रहा है. वह है बकरी का दूध.

    बकरी के दूध के गुण कई तरह से इंसानी ब्रेस्ट मिल्क से मिलते-जुलते हैं. प्रोटीन और फैट की संरचना ऐसी है कि शरीर इसे आसानी से अवशोषित कर लेता है. बकरी का दूध सदियों से कई संस्कृतियों में इस्तेमाल होता रहा है. भारत में भी पारंपरिक रूप से इसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. आधुनिक रिसर्च इसकी पुष्टि कर रही है. गाय के दूध की तुलना में बकरी के दूध के फैट ग्लोब्यूल्स छोटे होते है. इससे यह पेट में जल्दी टूट जाता है और पचने में आसान रहता है. कई लोगों को गाय का दूध भारी लगता है या गैस बनाता है, लेकिन बकरी का दूध उनके लिए राहत भरा साबित होता है.

    प्रोटीन का खजाना
    प्रोटीन के मामले में भी बकरी का दूध खास है. इसमें बीटा-केसीन की मात्रा अधिक होती है जो इंसानी दूध में भी पाई जाती है. गाय के दूध में ए1 बीटा-केसीन ज्यादा होता है जो कुछ लोगों के लिए पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है. बकरी के दूध में यह कम होता है. व्हे प्रोटीन की संरचना भी इंसानी दूध के करीब होती है. अध्ययनों में पाया गया कि बकरी के दूध आधारित फॉर्मूला का पाचन समय इंसानी दूध के समान अधिक होता है जबकि गाय के दूध वाले फॉर्मूला में यह धीमा रहता है. लैक्टोज की मात्रा बकरी के दूध में थोड़ी कम होती है. इसलिए हल्के लैक्टोज असहिष्णुता वाले लोगों को यह बेहतर लगता है. हालांकि यह पूरी तरह लैक्टोज मुक्त नहीं है.

    काफी पोषक है बकरी का दूध
    ऑलिगोसैकेराइड्स की मात्रा बकरी के दूध में गाय से कई गुना अधिक होती है. ये प्रीबायोटिक की तरह काम करते हैं और आंत के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सूजन कम होती है. पोषक तत्वों की बात करें तो बकरी के दूध में विटामिन ए, कुछ बी विटामिन और कई मिनरल्स अच्छी मात्रा में होते हैं. कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों के लिए जरूरी हैं. पोटैशियम हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है. कुछ अध्ययनों में आयरन और सेलेनियम जैसे तत्व भी उल्लेखनीय पाए गए हैं. कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा गाय के दूध के लगभग समान या थोड़ी अधिक होती है. इंसानी ब्रेस्ट मिल्क के साथ पूर्ण समानता नहीं है. ब्रेस्ट मिल्क शिशुओं के लिए विशेष रूप से तैयार होता है जिसमें एंटीबॉडीज, एंजाइम्स और अन्य बायोएक्टिव कंपोनेंट्स होते हैं. बकरी का दूध शिशुओं के लिए सीधे विकल्प नहीं है. डॉक्टर की सलाह के बिना एक साल से कम उम्र के बच्चों को ना दें. फॉर्मूला मिल्क में इसे फोर्टिफाइड करके इस्तेमाल किया जाता है.

  • आप करते हैं Room Freshner का इस्तेमाल, तो सेहत के लिए हो सकता है हानिकारक साबित…?​​​​

    आप करते हैं Room Freshner का इस्तेमाल, तो सेहत के लिए हो सकता है हानिकारक साबित…?​​​​

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    घर को खुशबूदार बनाने के लिए आजकल रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल काफी आम हो गया है. बाजार में स्प्रे, प्लग-इन, ऑटोमैटिक स्प्रे, जेल, रीड डिफ्यूजर और फ्रेगरेंस बीड्स जैसे कई तरह के रूम फ्रेशनर मिलते हैं. इनसे कमरे की बदबू कुछ समय के लिए दूर हो जाती है और अच्छी खुशबू आने लगती है. लेकिन क्या रोजाना रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करना पूरी तरह सेफ है?

    क्या होता है रूम फ्रेशनर में?

    रूम फ्रेशनर में खुशबू देने वाले केमिकल, एसेंशियल ऑयल और कुछ दूसरे पदार्थ हो सकते हैं. कई लिक्विड फ्रेशनर में खुशबू वाले तेल को ऐसे सॉल्वेंट के साथ मिलाया जाता है, जिससे उसकी खुशबू हवा में फैल सके. स्प्रे वाले फ्रेशनर में गैस का इस्तेमाल भी हो सकता है. वहीं जेल और बीड्स धीरे-धीरे खुशबू छोड़ते हैं.

    रूम फ्रेशनर से पहुंच सकता नुकसान?

    रूम फ्रेशनर से खुशबू के साथ कुछ ऐसे केमिकल हवा में फैल सकते हैं. ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने को लेकर चिंता जताई गई है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रूम फ्रेशनर की हल्की खुशबू से हर व्यक्ति बीमार हो जाएगा. असर व्यक्ति की संवेदनशीलता, इस्तेमाल की मात्रा और कमरे की हवा पर निर्भर करता है.

    अगर फ्रेशनर इस्तेमाल करने के बाद खांसी, गले में जलन, सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे समय पर ताजी हवा वाली जगह पर जाना बेहतर है.

    बच्चों से दूर रखें रूम फ्रेशनर

    लिक्विड रिफिल, जेल, रीड डिफ्यूजर और खुशबू वाले बीड्स बच्चों के लिए खास तौर पर खतरनाक हो सकते हैं. बच्चे इन्हें गलती से मुंह में डाल सकते हैं. इन्हें हमेशा बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें.

    ऐसे करें रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल

    रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल हमेशा कम मात्रा में करें. बंद कमरे में बार-बार स्प्रे करने से बचें और खिड़की खोलकर हवा आने-जाने दें. केवल खुशबू से बदबू छिपाने के बजाय बदबू की असली वजह को साफ करें. स्प्रे वाले फ्रेशनर को आग, मोमबत्ती और सिगरेट से दूर रखें, क्योंकि इनमें मौजूद कुछ पदार्थ आग पकड़ सकते हैं.

  • बारिश में क्यों बढ़ जाती है पसीने की बदबू? ये घरेलू उपाय अपनाकर दिनभर रहें फ्रेश और खुशबूदार..​​​​

    बारिश में क्यों बढ़ जाती है पसीने की बदबू? ये घरेलू उपाय अपनाकर दिनभर रहें फ्रेश और खुशबूदार..​​​​

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    बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ उमस भी बढ़ जाती है. ज्यादा नमी की वजह से शरीर में पसीना अधिक आता है और कई लोगों को बदबू, चिपचिपापन और असहजता की समस्या होने लगती है. अगर समय पर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो यह परेशानी और बढ़ सकती है. हालांकि, रोजमर्रा की कुछ आसान आदतें अपनाकर बारिश के मौसम में भी पूरे दिन ताजगी महसूस की जा सकती है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ आसान उपाय.

    शरीर की सफाई का रखें खास ध्यान
    बारिश के मौसम में रोज कम से कम एक बार जरूर नहाएं. अगर ज्यादा पसीना आता है, तो दिन में दो बार नहाना बेहतर रहेगा. नहाते समय अंडरआर्म्स, गर्दन, कमर, पैरों और शरीर के उन हिस्सों की अच्छी तरह सफाई करें, जहां सबसे ज्यादा पसीना आता है. इससे बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया कम होते हैं और शरीर लंबे समय तक साफ रहता है.

    परफ्यूम लगाएं
    परफ्यूम लगाने का तरीका भी उसकी खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है. इसे कलाई, कानों के पीछे, गर्दन के पीछे, कोहनी के अंदर और घुटनों के पीछे लगाएं. इन हिस्सों की गर्माहट से खुशबू धीरे-धीरे फैलती रहती है. परफ्यूम लगाने के बाद उसे हाथ से रगड़ने से बचें. चाहें तो कंघी पर हल्का-सा स्प्रे करके बालों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

    नहाने के बाद लगाएं बॉडी लोशन
    नहाने के तुरंत बाद हल्की गीली त्वचा पर बॉडी लोशन या मॉइस्चराइजर लगाएं. इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और परफ्यूम की खुशबू भी ज्यादा देर तक टिकती है. अगर एक ही ब्रांड का लोशन और परफ्यूम इस्तेमाल करें, तो इसका असर और बेहतर हो सकता है.

    डियोड्रेंट और बालों की सफाई भी जरूरी
    जिन लोगों को ज्यादा पसीना आता है, उन्हें रोज डियोड्रेंट या एंटीपर्सपिरेंट का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके अलावा बालों को नियमित रूप से शैंपू करें, ताकि उनमें जमा गंदगी और तेल साफ हो सके. दिन में दो बार दांत साफ करें, फ्लॉस करें और पर्याप्त पानी पिएं. जरूरत पड़ने पर शुगर-फ्री च्युइंग गम या मिंट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इन छोटी-छोटी आदतों से बारिश के मौसम में भी आप दिनभर ताजगी और आत्मविश्वास के साथ रह सकते हैं.

  • हर महिला को पता होने चाहिए गर्भाशय कैंसर के ये संभावित लक्षण, नजरअंदाज न करें ये संकेत..

    हर महिला को पता होने चाहिए गर्भाशय कैंसर के ये संभावित लक्षण, नजरअंदाज न करें ये संकेत..

    महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनका समय पर पता चलना बेहद जरूरी है। गर्भाशय से जुड़े कैंसर के मामले में भी शुरुआती संकेतों को पहचानना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, नीचे बताए गए लक्षण केवल कैंसर की वजह से ही हों, यह जरूरी नहीं है। कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इनका कारण बन सकती हैं।

    भूख में कमी

    अगर लंबे समय तक भूख कम लग रही है या सामान्य मात्रा में खाना खाने के बावजूद पेट भरा-भरा महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार ऐसी समस्या रहने पर डॉक्टर से जांच कराएं।

    लगातार थकान

    बिना ज्यादा मेहनत किए लगातार थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस होना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

    बिना वजह वजन कम होना

    बिना डाइटिंग या किसी खास वजह के लगातार वजन कम होना एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है। अचानक वजन घटने की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करके कारण की जांच करानी चाहिए।

    पेशाब करते समय दर्द या परेशानी

    पेशाब के दौरान दर्द, जलन या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या को नजरअंदाज न करें। इसके पीछे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन समेत कई कारण हो सकते हैं, इसलिए लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    एनीमिया या कमजोरी

    लगातार कमजोरी, चक्कर आना या एनीमिया होना शरीर में खून की कमी का संकेत हो सकता है। खासकर अगर असामान्य रक्तस्राव भी हो रहा हो, तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    असामान्य रक्तस्राव पर दें खास ध्यान

    मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव, संभोग के बाद ब्लीडिंग या मेनोपॉज के बाद किसी भी तरह का रक्तस्राव असामान्य माना जाता है और इसकी जांच कराना जरूरी है।

    जरूरी बात: इन लक्षणों में से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि महिला को कैंसर ही है। लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ते जाएं या असामान्य रक्तस्राव जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच और सही चिकित्सकीय सलाह स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

  • मुंहासों पर लहसुन लगाना कितना सही? जानिए फायदे और जरूरी सावधानियां..

    मुंहासों पर लहसुन लगाना कितना सही? जानिए फायदे और जरूरी सावधानियां..

    मुंहासे यानी एक्ने त्वचा से जुड़ी बेहद आम समस्या है। हार्मोनल बदलाव, अतिरिक्त ऑयल, बंद पोर्स, तनाव और कई अन्य कारणों से चेहरे पर पिंपल्स हो सकते हैं। ऐसे में लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिनमें लहसुन का इस्तेमाल भी शामिल है।

    लहसुन में कुछ ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, लेकिन कच्चे लहसुन को सीधे चेहरे पर लगाने से मुंहासे 10 मिनट में खत्म हो जाएंगे—इस दावे के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। उल्टा, संवेदनशील त्वचा पर कच्चा लहसुन जलन, लालिमा या त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    लहसुन का रस सीधे न लगाएं

    कच्चे लहसुन का रस त्वचा पर तेज जलन पैदा कर सकता है। इससे पिंपल ठीक होने के बजाय त्वचा पर लाल निशान या जलन बढ़ सकती है। इसलिए इसे सीधे चेहरे पर लगाने से बचना बेहतर है।

    लहसुन का पेस्ट भी जोखिम भरा हो सकता है

    लहसुन पीसकर चेहरे पर लगाने से भी त्वचा में irritation हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा या पहले से सूजन वाले मुंहासों पर इसका इस्तेमाल परेशानी बढ़ा सकता है।

    हल्दी, शहद या एलोवेरा के साथ मिलाने पर?

    लहसुन को हल्दी, शहद या एलोवेरा के साथ मिलाने से यह जरूरी नहीं कि मुंहासे तेजी से ठीक हो जाएं। प्राकृतिक चीजें होने का मतलब यह नहीं कि वे हर त्वचा के लिए सुरक्षित हों।

    मुंहासों के लिए क्या करें?

    हल्के मुंहासों में चेहरे को दिन में दो बार किसी सौम्य क्लींजर से साफ करना, पिंपल्स को न दबाना और नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर उत्पाद इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है। जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेकर प्रमाणित एक्ने ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    जरूरी सावधानी: अगर चेहरे पर दर्दनाक या गहरे मुंहासे हैं, बार-बार एक्ने हो रहा है या दाग पड़ रहे हैं, तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर कच्चा लहसुन सीधे चेहरे पर लगाने से बचें।

  • शरीर में विटामिन की कमी के 5 संकेत, इन्हें नजरअंदाज न करें..

    शरीर में विटामिन की कमी के 5 संकेत, इन्हें नजरअंदाज न करें..

    आज की व्यस्त जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। विटामिन और मिनरल्स की कमी होने पर शरीर कई तरह के संकेत दे सकता है। हालांकि, इनमें से कोई भी लक्षण केवल विटामिन की कमी के कारण हो, यह जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।

    1. मसूड़ों से बार-बार खून आना

    ब्रश करते समय या बिना किसी स्पष्ट कारण के मसूड़ों से बार-बार खून आना कई वजहों से हो सकता है। विटामिन C की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है, लेकिन मसूड़ों की बीमारी और खराब ओरल हाइजीन जैसी समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

    2. त्वचा में बदलाव

    त्वचा का अत्यधिक रूखा होना, घाव देर से भरना या त्वचा में असामान्य बदलाव पोषण की कमी समेत कई कारणों से हो सकते हैं। विटामिन A, C और कुछ अन्य पोषक तत्व त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    3. लगातार बाल झड़ना

    बाल झड़ने के पीछे तनाव, हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारण, थायरॉइड की समस्या या आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। केवल बाल झड़ने के आधार पर किसी एक विटामिन की कमी मान लेना सही नहीं है।

    4. हाथ-पैर में झुनझुनी

    हाथ-पैर में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना विटामिन B12 की कमी से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा नसों से जुड़ी समस्या, डायबिटीज या अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    5. कमजोरी और लगातार थकान

    बिना ज्यादा मेहनत के थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस होना शरीर में आयरन, विटामिन B12, फोलेट समेत कई पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। लेकिन इसके पीछे नींद की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

    क्या करें?

    अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार बना हुआ है, तो खुद से विटामिन की गोलियां लेना शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट के जरिए पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सकता है।

    ध्यान रखें: संतुलित आहार में हरी सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, दूध-दही, अंडे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है।

  • पुरुषों की यौन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है सहजन! जानिए इसके सेवन के फायदे..

    पुरुषों की यौन सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है सहजन! जानिए इसके सेवन के फायदे..

    सहजन यानी मोरिंगा की फली भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। इसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसे खास तौर पर पुरुषों की यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवा मानना सही नहीं है, लेकिन इसके पोषक गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जरूर हैं।

    विटामिन और मिनरल्स से भरपूर

    सहजन की फली में विटामिन C, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज और प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    फाइबर का अच्छा स्रोत

    सहजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। नियमित और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

    पुरुषों की सेहत के लिए

    सहजन में मौजूद पोषक तत्व शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करना भी पुरुषों की यौन और प्रजनन से जुड़ी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    क्या सहजन शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है?

    सहजन को सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने या यौनशक्ति बढ़ाने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध शोध सीमित हैं और इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए यौन कमजोरी या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर केवल सहजन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    महिलाओं के लिए भी उपयोगी

    सहजन में मौजूद फाइबर, विटामिन और खनिज महिलाओं के लिए भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, गर्भाशय की किसी बीमारी या दर्द का इलाज सहजन से होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।

    निष्कर्ष: सहजन को पौष्टिक सब्जी के रूप में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। किसी भी लगातार यौन या प्रजनन संबंधी समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    सहजन यानी मोरिंगा की फली भारतीय खान-पान का हिस्सा रही है। इसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। इसे खास तौर पर पुरुषों की यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने वाली दवा मानना सही नहीं है, लेकिन इसके पोषक गुण सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी जरूर हैं।

    विटामिन और मिनरल्स से भरपूर

    सहजन की फली में विटामिन C, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज और प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करते हैं।

    फाइबर का अच्छा स्रोत

    सहजन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी होता है। नियमित और संतुलित आहार के साथ पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज जैसी समस्या से बचने में मदद मिल सकती है।

    पुरुषों की सेहत के लिए

    सहजन में मौजूद पोषक तत्व शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित करना भी पुरुषों की यौन और प्रजनन से जुड़ी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    क्या सहजन शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाता है?

    सहजन को सीधे तौर पर शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने या यौनशक्ति बढ़ाने की प्रमाणित दवा नहीं माना जा सकता। इस संबंध में उपलब्ध शोध सीमित हैं और इंसानों में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त मजबूत प्रमाण नहीं हैं। इसलिए यौन कमजोरी या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर केवल सहजन पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    महिलाओं के लिए भी उपयोगी

    सहजन में मौजूद फाइबर, विटामिन और खनिज महिलाओं के लिए भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, गर्भाशय की किसी बीमारी या दर्द का इलाज सहजन से होने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है।

    निष्कर्ष: सहजन को पौष्टिक सब्जी के रूप में अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे यौनशक्ति बढ़ाने या शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। किसी भी लगातार यौन या प्रजनन संबंधी समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

  • रोना आपकी सेहत के लिए क्यों फायदेमंद हो सकता है? जानिए आंसुओं से जुड़े फायदे..

    रोना आपकी सेहत के लिए क्यों फायदेमंद हो सकता है? जानिए आंसुओं से जुड़े फायदे..

    रोना इंसानी भावनाओं का स्वाभाविक हिस्सा है। दुख, खुशी, तनाव या भावनात्मक दबाव के दौरान आंखों से आंसू निकलना सामान्य प्रक्रिया है। कई बार रोने के बाद व्यक्ति खुद को हल्का और बेहतर महसूस करता है। हालांकि, रोने को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता, लेकिन भावनात्मक रूप से यह तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    आइए जानते हैं रोने से जुड़े कुछ संभावित फायदे।

    आंखों को मिलती है नमी

    आंसू आंखों की सतह को नम रखने में मदद करते हैं। इससे आंखों में सूखापन और जलन जैसी परेशानी से राहत मिल सकती है। आंसुओं में मौजूद प्राकृतिक तत्व आंखों की सतह को सुरक्षित रखने में भी भूमिका निभाते हैं।

    भावनात्मक बोझ कम महसूस हो सकता है

    जब व्यक्ति लंबे समय तक अपनी भावनाओं को दबाकर रखता है, तो मानसिक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में रोना भावनाओं को व्यक्त करने का एक प्राकृतिक तरीका हो सकता है। कई लोगों को रोने के बाद मन हल्का महसूस होता है।

    तनाव कम करने में मदद

    भावनात्मक तनाव के दौरान रोने के बाद कुछ लोगों को शांति और आराम महसूस होता है। रोने के साथ गहरी सांस लेना और भावनाओं को बाहर निकालना व्यक्ति को मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस करा सकता है।

    मूड बेहतर हो सकता है

    रोने के बाद व्यक्ति को भावनात्मक राहत मिल सकती है, खासकर तब जब वह किसी परेशानी या दुख से गुजर रहा हो। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका अनुभव अलग-अलग हो सकता है।

    भावनाओं को व्यक्त करने का स्वस्थ तरीका

    रोना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह शरीर और दिमाग की भावनाओं को व्यक्त करने की प्राकृतिक प्रक्रिया है। अपनी भावनाओं को समझना और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा मददगार हो सकता है।

    जरूरी बात: रोने से आंखों की रोशनी बढ़ने या शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकलने जैसे दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। अगर लगातार उदासी, तनाव, घबराहट या रोने की समस्या बनी रहती है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।