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  • ‘बैंड बजा दूंगा…’, मर्डर के आरोपी ने महिला को किया इंस्टाग्राम पर मैसेज, हाई कोर्ट ने जमानत रद्द कर फिर भेजा जेल..

    ‘बैंड बजा दूंगा…’, मर्डर के आरोपी ने महिला को किया इंस्टाग्राम पर मैसेज, हाई कोर्ट ने जमानत रद्द कर फिर भेजा जेल..

    ‘बैंड बजा दूंगा…’, मर्डर के आरोपी ने महिला को किया इंस्टाग्राम पर मैसेज, हाई कोर्ट ने जमानत रद्द कर फिर भेजा जेल..

    पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मर्डर के एक आरोपी की बेल कैंसिल की है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया कि इस आरोपी ने बेल पर जेल से बाहर आने के बाद कथित रूप से शिकायकर्ता और उसके परिवार को धमकाया। मर्डर के आरोपी पर आरोप है कि उसने इंटाग्राम और फेसबुक के जरिए शिकायकर्ता और उसके परिवार से को धमकाते हुए कहा, “बैंड बजा दूंगा इसके चक्कर में सबकी।”

    सुनवाई के दौरान पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि आरोपी ने बेल पर जेल से बाहर आने के तुरंत बाद शिकायतकर्ता और उसके परिवार को धमकाना शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं, आरोपी ने सोशल मीडिया पर शिकायकर्ता की बहन की तस्वीर भी अपलोड की थी। हाईकोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता पक्ष को धमकाकर आरोपी ने अपने जमानत आदेश की “सबसे जरूरी शर्त” का उल्लंघन किया है।

    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस विक्रम अग्रवाल एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें हत्या के मामले में 28 जनवरी को एक दूसरी बेंच द्वारा आरोपी को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपी से बातचीत भी की और पाया कि उसका व्यवहार “असामान्य” था और वह “ठीक से बात नहीं कर पा रहा था”। हाई कोर्ट ने जेल अधिकारियों या संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर उसकी मानसिक स्थिति की जांच करवाई जाए।

    क्या है मामला?

    आरोपी श्याम लाल नाम के व्यक्ति के कथित मर्डर मामले में मुकदमे का सामना कर रहा है। श्याम लाल (23 जून 2023 को) शिकायकर्ता के चचेरा भाई के नौकर थे। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, जब यह घटना हुई, उस समय शिकायतकर्ता खुद मौके पर मौजूद था और इस दौरान वह घायल हो गया।

    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी को 28 जनवरी को एक अदालत (समकक्ष पीठ) द्वारा नियमित जमानत दे दी गई थी। यह जमानत कुछ शर्तों पर मिली थी, जिसमें यह भी शामिल था कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई लालच, धमकी या वादा नहीं देगा, ताकि उन्हें अदालत या किसी अन्य अधिकारी के सामने सच बताने से न रोका जा सके।

    शिकायतकर्ता ने दावा किया कि आरोपी ने बेल पर बाहर आते ही उसे और उसके पिता को उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर धमकाने वाले मैसेज मिलने लगे। उन्हें फेसबुक पर भी ऐसे ही मैसेज मिले। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन मैसेजों में आरोपी ने कथित तौर पर उसकी बहन के लिए अपशब्दों और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इस मैसेज में एक मैसेज यह भी था, “इसके चक्कर में मैं सबकी बैंड बजा दूंगा।”

    शिकायतकर्ता के भाई को भी धमकी दी

    आरोप है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता के भाई को भी धमकी दी थी। उसने कहा था कि अगर वह ट्रायल कोर्ट में उसके खिलाफ गवाही देने आया, तो वह उसकी बहन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल देगा। आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता की दूसरी बहन को भी आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे। शिकायतकर्ता ने 4 मार्च को शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद 17 मार्च को एक और FIR दर्ज की गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। वह हिरासत में ही रहा।

    शिकायतकर्ता के वकील ने दलील दी कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार को सीधे धमकी देने के कारण जमानत रद्द की जानी चाहिए। आरोपी की ओर से पेश हुए वकील समय संधावालिया ने दलील दी कि सिर्फ इस एक घटना के आधार पर जमानत रद्द नहीं की जानी चाहिए।

    कोर्ट ने कहा- जमानत रद्द करना एक कड़ा कदम

    कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करना एक “कड़ा कदम” है और ऐसा आसानी से नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जमानत रद्द करने से जुड़े कानून पहले से ही अच्छी तरह तय हैं।

    कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता पक्ष को धमकाकर जमानत देने वाले आदेश की सबसे जरूरी शर्त का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि उसे जमानत पर रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि अगर ऐसा किया गया, तो “कोई भी अनहोनी घटना हो सकती है”।

  • महिलाओं की अनोखी मुहिम: शाम होते ही हाथों में झाड़ू-डंडा लेकर निकलती है 50 औरतों की टीम, शराबबंदी के लिए गश्त

    महिलाओं की अनोखी मुहिम: शाम होते ही हाथों में झाड़ू-डंडा लेकर निकलती है 50 औरतों की टीम, शराबबंदी के लिए गश्त

    महिलाओं की अनोखी मुहिम: शाम होते ही हाथों में झाड़ू-डंडा लेकर निकलती है 50 औरतों की टीम, शराबबंदी के लिए गश्त

    बिहार के बगहा अंतर्गत रामनगर के सिल्वटिया बड़गो गांव में महिलाओं ने अवैध शराब बिक्री और सेवन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हाथ में डंडा और झाड़ू लेकर 50 से अधिक महिलाओं की टीम रोज शाम गांव में गश्त करती है.

    बगहा के रामनगर में इन दिनों शाम होते ही एक अलग नजारा देखने को मिल रहा है. हाथों में डंडा और झाड़ू लिए महिलाओं का समूह गांव की गलियों में निकल पड़ता है. मकसद है- शराब के खिलाफ आवाज बुलंद करना और गांव के माहौल को बेहतर बनाना. मामला रामनगर प्रखंड के सोनख पंचायत के सिल्वटिया बड़गो गांव का है. यहां शराब की बिक्री और सेवन से परेशान महिलाओं ने खुद एकजुट होकर अभियान शुरू किया है. पिछले करीब एक सप्ताह से महिलाएं हर शाम समूह बनाकर गांव में गश्त कर रही हैं और शराब पीने-पिलाने का विरोध कर रही हैं.

    चंद महिलाओं से शुरू हुआ अभियान, अब 50 से ज्यादा महिलाएं साथ शुरुआत में कुछ महिलाओं ने मिलकर यह अभियान शुरू किया था. धीरे-धीरे गांव की दूसरी महिलाएं भी इससे जुड़ती चली गईं. अब 50 से ज्यादा महिलाएं इस मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं. महिलाओं का कहना है कि उनका मकसद किसी से विवाद करना नहीं, बल्कि गांव के माहौल को बेहतर बनाना और परिवारों को शराब के नुकसान से बचाना है. जीविका समूह की अध्यक्ष फूलकली देवी ने बताया कि घरों में शराब की वजह से बिगड़ते माहौल को देखते हुए महिलाओं ने यह कदम उठाया. उनके मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद बाहरी लोगों की आवाजाही भी कम हुई है.

    रामनगर एसडीपीओ सतेंद्र राम ने बताया कि गांव की महिलाएं अब अवैध पदार्थों की बिक्री और खरीदारी को लेकर जागरूक हो रही हैं. महिलाएं इस तरह की गतिविधियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. पुलिस भी ऐसी सूचनाओं पर कार्रवाई कर रही है और लोगों से अपील है कि वे अवैध पदार्थों की बिक्री या खरीदारी की जानकारी तत्काल पुलिस को दें.

    शाम होते ही निकलता है महिला दस्ता गांव में महिलाओं की टीम शाम होते ही सक्रिय हो जाती है. हाथों में डंडा और झाड़ू लेकर महिलाएं गांव की गलियों में घूमती हैं और लोगों को शराब से दूर रहने के लिए जागरूक करती हैं. महिलाओं का कहना है कि जब तक गांव में पूरी तरह बेहतर माहौल नहीं बन जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा. मुखिया रमिता देवी ने भी महिलाओं की इस पहल की सराहना की है. वहीं, नगीना देवी ने बताया कि कुछ महिलाओं से शुरू हुआ यह कारवां अब 50 से ज्यादा महिलाओं तक पहुंच गया है.

    महिलाओं के मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद गांव में शराब की बिक्री में कमी देखने को मिली है. अब महिलाएं इसे सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि गांव के माहौल को बदलने की सामूहिक कोशिश मान रही हैं.

  • बंद बंगले में घुसते: ही जाली में बुरी तरह फंसा युवक, बाहर निकालने के बजाय लोगों ने शुरू कर दी पिटाई, जानिए पूरा मामला

    बंद बंगले में घुसते: ही जाली में बुरी तरह फंसा युवक, बाहर निकालने के बजाय लोगों ने शुरू कर दी पिटाई, जानिए पूरा मामला

    बंद बंगले में घुसते: ही जाली में बुरी तरह फंसा युवक, बाहर निकालने के बजाय लोगों ने शुरू कर दी पिटाई, जानिए पूरा मामला

    सूरत: गुजरात के सूरत शहर के नाना वराछा इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बंद बंगले में घुसने की कोशिश के दौरान एक युवक स्टील की जाली में बुरी तरह फंस गया। वह काफी देर तक बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। इस दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोप है कि युवक की मदद करने के बजाय कुछ लोगों ने उसे डंडों से पीटना शुरू कर दिया।

    बंद बंगले की जाली में फंसा युवक

    यह मामला नाना वराछा की राजा राम नगर सोसायटी का बताया जा रहा है। सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, युवक एक बंद बंगले में घुसा था। इसी दौरान वह मकान की स्टील की जाली में फंस गया। जाली के बीच फंसे युवक ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन वह खुद को छुड़ा नहीं पाया।

    कुछ ही देर में आसपास के लोग वहां इकट्ठा हो गए। युवक को कथित चोर समझकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस घटना ने इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है।

    हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक यह पुष्टि नहीं की गई है कि युवक वास्तव में चोरी करने के इरादे से बंगले में घुसा था या उसके पीछे कोई दूसरी वजह थी।

    करीब 15 दिन पुराना बताया जा रहा मामला

    कापोद्रा पुलिस इंस्पेक्टर महिपाल सिंह सोलंकी के मुताबिक, यह घटना करीब 15 दिन पुरानी है। हालांकि, इससे जुड़ा मामला दो-तीन दिन पहले सोशल मीडिया पर सामने आया और इसके बाद चर्चा में आ गया।

    पुलिस के अनुसार, बंगले में रहने वाला परिवार लंबे समय से अमेरिका में रहता है। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बंगले के मालिक किशोर भाई से भी संपर्क किया।

    घर से सामान चोरी होने की नहीं मिली जानकारी

    बंगले के मालिक ने पुलिस को बताया कि घर से कोई सामान चोरी नहीं हुआ है। साथ ही, किसी ताले के टूटने की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल पुलिस जाली में फंसे युवक की पहचान करने में जुटी है। इसके अलावा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह बंगले में किस उद्देश्य से दाखिल हुआ था। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल मामले में किसी शिकायत की जानकारी नहीं मिली है।

    जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि युवक बंगले में किस मकसद से घुसा था और उसके साथ हुई मारपीट को लेकर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

  • पति ने इलाज का: नहीं दिया पैसा तो पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग, 40 किमी दूर नाविकों ने बचाई जान

    पति ने इलाज का: नहीं दिया पैसा तो पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग, 40 किमी दूर नाविकों ने बचाई जान

    पति ने इलाज का: नहीं दिया पैसा तो पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग, 40 किमी दूर नाविकों ने बचाई जान

    यूपी के मिर्जापुर में एक कपल के बीच झड़गा इतना बढ़ गया कि पत्नी ने पुल से गंगा में छलांग लगा दी. 12 घंटे बाद 40 किलोमीटर दूर नाविकों ने महिला को पानी से निकाला. नाविकों ने महिला की जान बचाई.

    उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर में पति और पत्नी के झगड़े में पत्नी ने गंगा में छलांग लगा दिया. गंगा में रात भर 12 घंटे संघर्ष करने के बाद 40 किलोमीटर दूर नाविकों ने उसको बचाया.

    इलाज के पैसे को लेकर कपल में बवाल- घटना कटरा कोतवाली थाना क्षेत्र के लोहिया तालाब छोटी बसही की है, जहाँ 15 सितंबर 2026 को सुनीता देवी ने गुजरात मे नौकरी करने वाले अपने पति सूरज से फोन कर अपने इलाज के लिए पैसे मांगे. पति ने फोन पर पैसे देने से इंकार कर दिया और अपनी माँ से बात करवाने को कहा.

    नाराज पत्नी ने गंगा में लगाई छलांग- जिसके बाद सुनीता नाराज हो कर शाम 5 बजे के लगभग शास्त्री ब्रिज पर पहुची, वहां से गंगा में छलांग लगा दिया. घर वाले सुनीता का इंतजार करते रहे, मगर जब घण्टों बाद नहीं आई तो उसकी तलाश शुरू किया. मगर कहीं उसका पता नहीं चला.

    40 किमी दूर नाविकों ने बचाया- अगले दिन सुबह 5 बजे के लगभग 40 किलोमीटर दूर चुनार में नाविकों ने सुनीता को पानी में बहते देख उसको बचाया. सुनीता अब अपने मायके में है. उसके चारों बच्चे घर पर माँ का इंतजार कर रहे है.

    बेटे राहुल का कहना है कि पापा और मम्मी के बीच फोन पर बात हुई. दोनों के बीच झगड़ा हुआ. जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया है.

    सास ने क्या कहा? वहीं, सुनीता की सास बिरंजी देवी का कहना है कि बेटे ने कहा, मेरी माँ से बात करवा दीजिये, मगर उन्होंने बात नहीं करवाया. हम लोग तलाश किए, नहीं मिली. इलाज के लिए हम लोग पैसा दे रहे थे. पति से बात हुई तो उसने कहा कि पैसा नही है. माँ से बात करवा दीजिये. वह शाम को 5 बजे कूदी थी, सुबह 5 बजे मिली है.

    कटरा कोतवाली थाना प्रभारी नीरज पाठक का कहना है कि महिला परसो गंगा में कूदी थी. अब वह पूरी तरह से सुरक्षित है.

  • ड्रोन उड़ाकर खेतों में करती हैं छिड़काव, नीतू पासवान की बदली जिंदगी, बताईं 50-60 हजार रुपये महीने की कमाई.

    ड्रोन उड़ाकर खेतों में करती हैं छिड़काव, नीतू पासवान की बदली जिंदगी, बताईं 50-60 हजार रुपये महीने की कमाई.

    गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली नीतू पासवान ने ड्रोन के जरिए कृषि क्षेत्र में काम करते हुए अपनी कमाई का जरिया तैयार किया है। मेरौली गांव की रहने वाली नीतू ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से जुड़ी हैं। उनके मुताबिक, साल 2024 में ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने ड्रोन से खेतों में स्प्रे का काम शुरू किया।

    नीतू पासवान का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने ड्रोन चलाने और खेतों में इसका इस्तेमाल करने का काम सीख लिया। अब अच्छे सीजन में उनकी कमाई 50 से 60 हजार रुपये महीने तक पहुंच जाती है। उन्होंने सालभर में करीब 5 से 6 लाख रुपये तक कमाई होने की बात भी कही है।

    ड्रोन से खेतों में करती हैं कीटनाशक और उर्वरक का छिड़काव

    नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन ड्रोन का इस्तेमाल किसानों के खेतों में तरल उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाओं के लिए किया जाता है।

    नीतू भी किसानों के खेतों में ड्रोन के जरिए स्प्रे का काम करती हैं। इस तरह ड्रोन उनके लिए सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि आय का एक साधन भी बन गया है।

    2024 में ली ट्रेनिंग, फिर शुरू किया काम

    नीतू पासवान के मुताबिक, उन्होंने 2024 में ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद उन्होंने खेतों में स्प्रे का काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में काम आसान नहीं था, लेकिन समय के साथ उन्हें इसका अनुभव होने लगा।

    सरकार की योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को ड्रोन पायलट के तौर पर प्रशिक्षण भी दिया जाता है। फरवरी 2026 में सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, ड्रोन दीदियों को अधिकृत ट्रेनिंग संस्थानों के जरिए ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग दी गई है।

    योजना में 80 फीसदी तक केंद्रीय सहायता

    नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पैकेज की लागत का 80 फीसदी तक केंद्रीय वित्तीय सहयोग, अधिकतम 8 लाख रुपये तक, दिया जाता है। बाकी राशि के लिए ऋण की सुविधा का प्रावधान है और उस पर ब्याज में भी सहायता दी जाती है।

    केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 2023-24 से 2025-26 की अवधि में 1,261 करोड़ रुपये का परिव्यय मंजूर किया था। योजना का लक्ष्य महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि क्षेत्र में ड्रोन आधारित सेवाएं देने के लिए सक्षम बनाना है।

    नीतू ने सरकार के लिए कही ये बात

    नीतू पासवान ने अपने अनुभव को साझा करते हुए प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं से महिलाओं को आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से मजबूत होने का मौका मिल रहा है।

    उन्होंने अपने बयान में योगी सरकार के योगदान की भी सराहना की और इसे महिलाओं के लिए मददगार बताया। यह नीतू पासवान का व्यक्तिगत अनुभव और उनके द्वारा दिया गया बयान है।

    15 हजार ड्रोन देने का लक्ष्य

    नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कुल 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार के अनुसार, योजना के जरिए महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ ड्रोन सेवाओं के माध्यम से अतिरिक्त आजीविका का अवसर उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।

    नीतू पासवान की कहानी इसी योजना के तहत ड्रोन ट्रेनिंग और कृषि सेवाओं से जुड़ी महिलाओं की बदलती आजीविका की एक मिसाल के तौर पर सामने आई है।

  • मीडिया की नौकरी छूटी: तो नोएडा की सड़कों पर बेचा वड़ा पाव, 12 साल एंकरिंग करने वाले इस कपल के जज्बे को लोग कर रहे सलाम

    मीडिया की नौकरी छूटी: तो नोएडा की सड़कों पर बेचा वड़ा पाव, 12 साल एंकरिंग करने वाले इस कपल के जज्बे को लोग कर रहे सलाम

    मीडिया की नौकरी छूटी: तो नोएडा की सड़कों पर बेचा वड़ा पाव, 12 साल एंकरिंग करने वाले इस कपल के जज्बे को लोग कर रहे सलाम

    नोएडा में वड़ा पाव का स्टॉल चलाने वाले पूर्व न्यूज एंकर और प्रड्यूसर जसवीर और सुधा की कहानी संघर्ष और आत्मसम्मान की अनूठी मिसाल है. मीडिया क्षेत्र की अनिश्चितता और आर्थिक तंगी से उबरकर दोनों ने अपनी नई पहचान बनाई है.

    वक्त कब जिंदगी का रुख बदल दे, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं होता. जसवीर और उनकी पत्नी सुधा ने भी कभी नहीं सोचा था कि जिस चकाचौंध और पत्रकारिता की दुनिया को दोनों ने अपनी जिंदगी के कई साल दिए, एक दिन उसी पेशे की अनिश्चितता उन्हें बिल्कुल नया रास्ता चुनने के लिए मजबूर कर देगी. जसवीर करीब 12 साल और सुधा 7 साल तक पत्रकारिता से जुड़ी रहीं. दोनों ने एंकर और निर्माता के तौर पर काम किया. लेकिन नौकरी की अनिश्चितता ने जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया, तो उन्हें अपने पुराने पेशे से बाहर निकलकर कुछ नया शुरू करने का फैसला लेना पड़ा और उन्होंने वड़ा पाव बेचना शुरू कर दिया.

    12 साल के करियर में देखीं कई मुश्किलें जसवीर बताते हैं कि नौकरी की दुनिया में यह तय नहीं होता कि अगले दिन भी नौकरी रहेगी या नहीं. अपने 12 साल के करियर में उन्होंने लागत घटाने के नाम पर होने वाली छंटनी देखी, कई लोगों को नौकरी से जाते देखा और खुद भी छंटनी की उस सूची में आने का सामना उन्हें करना पड़ा. एक समय ऐसा आया जब सुधा की नौकरी चली गई और जसवीर की तनख्वाह इतनी कम कर दी गई कि उससे किराया तक देना मुश्किल हो गया. दोनों उस समय भी किराए के मकान में रह रहे थे और आज भी किराए के घर में ही रहते हैं.

    नौकरी मिली, लेकिन घर चलाना मुश्किल रहा इसके बाद जसवीर ने महीनों तक नौकरी तलाश की. काम मिला भी, लेकिन वेतन इतना कम था कि उससे परिवार की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं था. उस समय उनके सामने यह सवाल नहीं था कि आगे कौन सा पेशा चुनना है. सबसे बड़ी चिंता यह थी कि घर का खर्च कैसे चलेगा. इसी मजबूरी ने उन्हें नौकरी से आगे कुछ नया सोचने पर मजबूर किया.

    वड़ा पाव से पहले शुरू की थी टिफिन सेवा वड़ा पाव बेचने का फैसला अचानक लिया गया कदम नहीं था. इससे पहले करीब एक साल तक दोनों टिफिन सेवा चलाते रहे. वे घरों और दफ्तरों तक खाना पहुंचाते थे. शुरुआत में जसवीर ने लोगों को योग भी सिखाया, लेकिन उससे उन्हें उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं हो पाई. इसके बाद उनकी जिंदगी धीरे-धीरे एक ऐसे मोड़ पर पहुंची, जहां उन्होंने खाने के कारोबार की तरफ कदम बढ़ाया.

    शिरडी से लौटने के बाद आया विचार जसवीर बताते हैं कि एक दिन उन्हें बाबा का बुलावा आया और वे पत्नी के साथ शिरडी तथा सिद्धिविनायक गए. वहां उन्होंने लस्सी के साथ वड़ा पाव खाया. घर लौटने के बाद यही साधारण सा अनुभव उनके लिए एक नए रास्ते की शुरुआत बन गया. उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वह सड़क पर रेहड़ी लगाकर वड़ा पाव बेचेंगे. लेकिन जसवीर इसे भगवान की देन और उनके दिखाए रास्ते के तौर पर देखते हैं. जसवीर ने सबसे पहले अपने लिए वड़ा पाव बनाया. इसके बाद पड़ोसियों को खिलाया. कई बार बनाने और सुधारने के बाद जब उन्हें लगा कि उनके वड़ा पाव में अब अपना खास स्वाद और अंदाज आ गया है, तब उन्होंने इसे लोगों को बेचने का फैसला किया. उन्होंने 9 अक्टूबर 2023 को उन्होंने पहली बार वड़ा पाव बेचा.

    आज वही जसवीर और सुधा, जिन्होंने पत्रकारिता में कई साल एंकरिंग और निर्माण का काम किया, नोएडा की सड़कों पर वड़ा पाव बेचते हैं. उनकी कहानी सिर्फ पेशा बदलने की कहानी नहीं है. यह उस दौर की कहानी है, जब नौकरी की अनिश्चितता के बीच दोनों के सामने घर चलाने की चुनौती थी और उन्होंने परिस्थितियों के सामने रुकने के बजाय खुद के लिए एक नया रास्ता बनाने का फैसला किया.

  • इश्क के लिए परिवार: से छिपाई पहचान, फिर रची अपनी मौत की कहानी, 4 साल बाद जिंदा सामने आया युवक

    इश्क के लिए परिवार: से छिपाई पहचान, फिर रची अपनी मौत की कहानी, 4 साल बाद जिंदा सामने आया युवक

    इश्क के लिए परिवार: से छिपाई पहचान, फिर रची अपनी मौत की कहानी, 4 साल बाद जिंदा सामने आया युवक

    मामला मुजफ्फरपुर के देवरिया थाना क्षेत्र से जुड़ा है. सोनू कुमार मूल रूप से गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र का रहने वाला है. 6 नवंबर 2022 को वह दुकान का सामान खरीदने के लिए करीब 50 हजार रुपए लेकर पटना जाने की बात कहकर घर से निकला था. इसके बाद वह अचानक लापता हो गया. काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला.

    50 हजार रुपए लेकर घर से निकला था सोनू

    50 हजार रुपए लेकर घर से निकला था सोनू

    प्रेम प्रसंग से जुड़ा दूसरा केस सामने आया

    प्रेम प्रसंग से जुड़ा दूसरा केस सामने आया

    मुजफ्फरपुर में चार साल पुराने कथित हत्याकांड का ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया. जिस युवक सोनू कुमार की हत्या की FIR दर्ज हुई थी, वह चार साल बाद खुद पुलिस के सामने पहुंच गया. पूछताछ में सामने आया कि सोनू ने अपनी हत्या की झूठी कहानी खुद रची थी. पुलिस के मुताबिक, उसने प्रेम प्रसंग को परिवार से छिपाने और घरवालों से दूर रहने के लिए यह पूरी साजिश रची.

    50 हजार रुपए लेकर घर से निकला था सोनू मामला मुजफ्फरपुर के देवरिया थाना क्षेत्र से जुड़ा है. सोनू कुमार मूल रूप से गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र का रहने वाला है. 6 नवंबर 2022 को वह दुकान का सामान खरीदने के लिए करीब 50 हजार रुपए लेकर पटना जाने की बात कहकर घर से निकला था. इसके बाद वह अचानक लापता हो गया. काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला.

    9 नवंबर को सोनू के भाई धीरज प्रसाद श्रीवास्तव ने थावे थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. इसी बीच परिवार के WhatsApp पर सोनू के मोबाइल से एक ऑडियो मैसेज और सिर से खून निकलने की तस्वीर भेजी गई. ऑडियो में दावा किया गया कि कुछ लोगों ने पैसे और बैग छीनने के लिए सोनू के साथ मारपीट की और उसकी हत्या कर दी.

    हत्या का केस दर्ज, पुलिस ने बनाई विशेष टीम ऑडियो और तस्वीर सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया. इसके बाद मुजफ्फरपुर के देवरिया थाने में कांड संख्या 25/23 के तहत हत्या का केस दर्ज किया गया. मामले की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम बनाई. पुलिस ने सोनू की तलाश में कई जगह दबिश दी और अलग-अलग एंगल से जांच की, लेकिन काफी समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला.

    प्रेम प्रसंग से जुड़ा दूसरा केस सामने आया करीब चार साल बाद इस मामले में नया मोड़ आया. पुलिस के सामने सोनू के प्रेम प्रसंग से जुड़ा एक अलग मामला पहुंचा. थावे थाने में एक युवती की मां ने उसके अपहरण को लेकर कांड संख्या 324/22 दर्ज कराई थी. पुलिस ने दोनों मामलों को जोड़कर जांच शुरू की. जांच आगे बढ़ी तो सोनू के लापता होने और उसकी कथित हत्या की कहानी के पीछे प्रेम प्रसंग का कनेक्शन सामने आया. पुलिस के मुताबिक, सोनू युवती को अपने साथ दूसरे राज्य ले गया था. इसके बाद उसने परिवार को गुमराह करने के लिए अपनी मौत का झूठा नाटक रचा.

    चार साल बाद खुद थाने पहुंचा सोनू पुलिस की लगातार कार्रवाई और दबिश के बाद सोनू कुमार 17 सितंबर 2026 को खुद देवरिया थाने पहुंच गया. पूछताछ में उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह अपने प्रेम प्रसंग को परिवार से छिपाना चाहता था. इसी वजह से उसने खुद को मृत दिखाने की साजिश रची और परिवार को हत्या की कहानी पर विश्वास दिलाने के लिए ऑडियो और तस्वीर भेजी. अब पुलिस सोनू के बयान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है. चार साल तक जिस युवक की हत्या की जांच चलती रही, उसके जिंदा मिलने से पूरे मामले की कहानी ही बदल गई है.

  • 5 साल से रोज वकील: के चेंबर में रोटी लेने पहुंचता है बंदर, मेज पर बैठकर करता है इंतजार, अनोखी दोस्ती ने जीता लोगों का दिल

    5 साल से रोज वकील: के चेंबर में रोटी लेने पहुंचता है बंदर, मेज पर बैठकर करता है इंतजार, अनोखी दोस्ती ने जीता लोगों का दिल

    5 साल से रोज वकील: के चेंबर में रोटी लेने पहुंचता है बंदर, मेज पर बैठकर करता है इंतजार, अनोखी दोस्ती ने जीता लोगों का दिल

    गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिला कचहरी में एक अधिवक्ता और बंदर की अनोखी दोस्ती इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब पांच साल से एक बंदर रोजाना अधिवक्ता महेश यादव के चेंबर में रोटी लेने पहुंचता है। दोनों के बीच इतना अपनापन हो गया है कि बंदर को अपने इस खास दोस्त के पास पहुंचने का इंतजार रहता है।

    बताया जाता है कि बंदर कभी अधिवक्ता की मेज पर बैठकर रोटी मिलने का इंतजार करता है, तो कभी उनकी जेब में रोटी तलाशने लगता है। जैसे ही उसे रोटी मिलती है, वह उसे लेकर वहां से चला जाता है। अधिवक्ता भी अपने इस बेजुबान दोस्त का खास ख्याल रखते हैं और रोज उसके लिए रोटी रखते हैं।

    30 साल से वकालत कर रहे हैं महेश यादव

    अधिवक्ता महेश यादव पिछले करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे हैं। वह पहले सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। रोजाना की तरह जब वह जिला कचहरी में अपने चेंबर में बैठते हैं, तो उनका यह खास मेहमान भी उनसे मिलने पहुंच जाता है।

    कई बार बंदर सीधे उनकी मेज पर आकर बैठ जाता है और चुपचाप रोटी मिलने का इंतजार करता है। महेश यादव भी प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हैं और उसे रोटी खिलाते हैं। कभी-कभी बंदर उनकी जेब टटोलकर रोटी निकालने की कोशिश भी करता है।

    वकील नहीं आते, तब भी चेंबर के आसपास मंडराता है बंदर

    इस अनोखी दोस्ती की सबसे खास बात यह है कि यह रिश्ता कुछ दिनों या महीनों का नहीं, बल्कि करीब पांच साल पुराना बताया जा रहा है। अगर किसी वजह से महेश यादव कचहरी नहीं पहुंचते, तब भी बंदर उनके चेंबर के आसपास मंडराता रहता है।

    अगले दिन जैसे ही अधिवक्ता कचहरी पहुंचते हैं, बंदर फिर उनके पास आ जाता है। उसकी यह आदत देखकर आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह जाते हैं।

    कचहरी के व्यस्त माहौल में बेजुबान दोस्ती की चर्चा

    जिला कचहरी जैसे व्यस्त माहौल में अधिवक्ता और बंदर का यह अपनापन लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला देता है। इंसान और जानवर के बीच बने इस अनोखे रिश्ते को देखकर लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं।

    यह कहानी बताती है कि प्यार और अपनापन केवल इंसानों तक सीमित नहीं होता। कभी-कभी बेजुबान जानवर भी अपने व्यवहार से ऐसा रिश्ता बना लेते हैं, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जगह बना लेता है।

  • जिस महिला की हत्या: की हो रही थी जांच, वो 20 दिन बाद मिली जिंदा, कैसे Instagram ने खोला राज?

    जिस महिला की हत्या: की हो रही थी जांच, वो 20 दिन बाद मिली जिंदा, कैसे Instagram ने खोला राज?

    जिस महिला की हत्या: की हो रही थी जांच, वो 20 दिन बाद मिली जिंदा, कैसे Instagram ने खोला राज?

    जिस महिला की हत्या की आशंका की जांच झारखंड पुलिस कर रही थी, वो महिला सूरत में छुपकर रह रही थी. एक दिन महिला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो डाल दिया. इसके बाद उसका राज खुल गया. गुजरात पुलिस ने उसे बरामद किया और झारखंड पुलिस को सौंप दिया.

    गुजरात के सूरत से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां झारखंड पुलिस जिस विवाहिता को मृत मानकर उसकी हत्या की आशंका में जांच कर रही थी, वह महिला सूरत में जीवित और सुरक्षित मिली है. सूरत की पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए लापता विवाहिता को खोज निकाला. महिला के जीवित मिलने के बाद झारखंड में दर्ज हत्या के मामले की जांच में बड़ा मोड़ आ गया है. अब झारखंड पुलिस जीवित सूरत से लेकर रवाना हो गई है. महिला के जीवित होने का प्रमाण पुलिस और महिला के ससुराल वालों को उसकी इंस्टाग्राम आईडी से मिला था.

    पिता ने की थी हत्या की शिकायत- झारखंड के रांची जिले के खलारी थाना क्षेत्र में एक महिला की हत्या कर शव छिपाने का आरोप लगाते हुए उसके पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के आधार पर खलारी थाना पुलिस ने महिला के पति समेत दो नामजद आरोपियों और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.

    साल 2010 में हुई थी महिला की शादी- खलारी पुलिस थाने में दर्ज हुई FIR के मुताबिक शिकायतकर्ता 65 साल के छट्टू गोप चतरा के टंडवा ग्वाला टोली के रहने वाले हैं. उन्होंने अपनी 36 वर्षीय बेटी विणी देवी उर्फ विणा देवी की शादी वर्ष 2010 में रांची जिले के खलारी थाना क्षेत्र के चुरी दक्षिणी बस्ती निवासी सामु महतो, पिता बंधु महतो के साथ हिंदू रीति-रिवाज से कराई थी. दंपती के दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी है।शिकायत में पिता ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उनका दामाद सामु महतो उनकी बेटी के साथ मारपीट करता था और उसे प्रताड़ित करता था. इस संबंध में उन्होंने 30 अगस्त 2026 को खलारी थाने में सनहा दर्ज कराया था.

    पति पर लगा था पत्नी की हत्या का आरोप- झारखंड के खलारी थाने में दर्ज शिकायत में आगे आरोप लगाया गया कि 24 अगस्त 2026 को सामु महतो ने अपने साथी अनिकेत यादव के साथ मिलकर उनकी बेटी की कथित तौर पर हत्या कर दी और उसके शव को छिपा दिया. पिता ने पुलिस से अपनी बेटी के शव को बरामद करने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी. FIR में सामु महतो, अनिकेत यादव और घर के अन्य सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं.

    सूरत में मिली महिला की लोकेशन- पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और महिला को मृत मानकर उसके ससुराल पक्ष के लोगों से भी पूछताछ कर रही थी. इसी बीच खलारी थाना पुलिस को गुमशुदा महिला की इंस्टाग्राम आईडी पर अपलोड किए वीडियो से उसके सूरत में होने की जानकारी मिली थी. महिला ने जब अपना मोबाइल ऑन किया तो उसका लोकेशन सूरत की सचिन GIDC पुलिस स्टेशन क्षेत्र में आया था. झारखंड पुलिस ने फ़ौरन ही सूरत की सचिन जीआईडीसी थाना पुलिस का संपर्क कर उनके थाने में दर्ज महिला के हत्या मामले की एफ़आईआर से अवगत कराया था. सूचना के आधार पर सूरत की सचिन जीआईडीसी थाना पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और झारखंड पुलिस की एफ़आईआर में मर चुकी महिला को सुरक्षित और जीवित खोज निकाला था.

    प्रताड़ना से तंग आकर छोड़ा घर- महिला प्राथमिक पूछताछ में महिला ने सूरत की सचिन जीआईडीसी पुलिस को बताया कि वह अपने पति और ससुराल पक्ष की ओर से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान थी. इसी प्रताड़ना से तंग आकर उसने घर छोड़ने का फैसला किया और किसी को बिना बताए चुपचाप 20 दिन पहले सूरत आकर रहने लगी थी. यहाँ पर वो देहाड़ी मजदूरी कर अपना गुजारा करती थी. अब सूरत में विवाहित महिला के जीवित और सुरक्षित मिलने के बाद झारखंड पुलिस की हत्या की जाँच में नया मोड़ ले लिया है. जिस मामले में झारखंड में विवाहिता की हत्या की आशंका जताई गई थी, उसमें अब महिला के बयान के आधार पर आगे की जांच की जाएगी.

    सूरत पुलिस ने क्या बताया?

    सूरत पुलिस के एसीपी सुनील तरड़े ने बताया कि 15 सितंबर 2026 को झारखंड राज्य के रांची जिले के खलारी पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर ने सचिन GIDC पुलिस स्टेशन सूरत से संपर्क किया. उन्होंने लिखित रिपोर्ट देकर सहायता मांगी. खलारी थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR No. 46/2026) के तहत बीएनएस (BNS 2023) की धारा 85, 103 (हत्या), 238 और अन्य धाराओं में मामला दर्ज था. पीड़िता का नाम विनी देवी उर्फ वीणा देवी है. पुलिस के मुताबिक महिला को सकुशल रांची पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है. प्राथमिक पूछताछ में सामने आया कि महिला का पति उस पर शक करता था और उसके साथ मारपीट व प्रताड़ना करता था. पति के इसी उत्पीड़न से तंग आकर महिला बिना किसी को बताए घर से निकल गई थी. वह पिछले लगभग 20 दिनों से सचिन GIDC इलाके में रह रही थी और पहली बार यहां आकर छोटा-मोटा मजदूरी का काम करके अपना गुजारा कर रही थी.

  • 28 से 30 सितंबर तक: बैंक हड़ताल, लगातार 5 दिन बंद रहेंगी ब्रांच, जानें कैश और UPI पर कितना पड़ेगा असर

    28 से 30 सितंबर तक: बैंक हड़ताल, लगातार 5 दिन बंद रहेंगी ब्रांच, जानें कैश और UPI पर कितना पड़ेगा असर

    28 से 30 सितंबर तक: बैंक हड़ताल, लगातार 5 दिन बंद रहेंगी ब्रांच, जानें कैश और UPI पर कितना पड़ेगा असर

    देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर के आखिरी दिनों में परेशानी बढ़ सकती है. दरअसल, बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला किया है. चलिए आपको डीटेल में पूरी खबर बताते हैं.

    देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर के आखिरी दिनों में परेशानी बढ़ सकती है. दरअसल, बैंक यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला किया है. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS), इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक मैनेजमेंट की अपील के बावजूद यूनियनें अपने फैसले पर कायम हैं. यूनियनों का कहना है कि बैंक कर्मचारियों के लिए हफ्ते में पांच दिन काम यानी 5-Day Banking की मांग पर सरकार और बैंक मैनेजमेंट की तरफ से कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.

    28 से 30 सितंबर तक रहेगी हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने मंगलवार को जारी बयान में अपनी सभी यूनियनों और सदस्यों से 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है. यानी सोमवार से बुधवार तक बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल रहेगी.

    लगातार 5 दिन बंद रह सकती हैं बैंक ब्रांच इस हड़ताल का असर इसलिए ज्यादा हो सकता है क्योंकि इसके ठीक पहले शनिवार और रविवार की छुट्टी है. 26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे, जबकि 27 सितंबर को रविवार की छुट्टी रहेगी. इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल होगी. इस तरह कई बैंक ब्रांच लगातार पांच दिनों तक बंद रह सकती हैं.

    ATM से निकाल सकेंगे कैश बैंक हड़ताल का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों को कैश के लिए पूरी तरह परेशान होना पड़ेगा. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने ग्राहकों को हड़ताल के दौरान ATM और ADWM का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. केनरा बैंक ने भी ATM और BNA जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करने की जानकारी दी है. हालांकि, ATM में कैश उपलब्धता जगह और समय के हिसाब से अलग हो सकती है.

    UPI और ऑनलाइन बैंकिंग चलती रहेगी डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर हड़ताल का सीधा असर नहीं पड़ने की उम्मीद है. SBI ने ग्राहकों को इंटरनेट बैंकिंग, YONO, मोबाइल बैंकिंग और UPI का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. केनरा बैंक ने भी मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग के साथ UPI ऐप के जरिए लेनदेन करने को कहा है. यानी ग्राहक ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने, UPI पेमेंट और कई डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे.

    ब्रांच जाकर होने वाले काम प्रभावित हड़ताल के दौरान बैंक ब्रांच में होने वाले कई जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं. इनमें कैश जमा या निकासी, चेक से जुड़े काम, दस्तावेज जमा करना और KYC जैसे काम शामिल हैं. इसलिए जिन ग्राहकों को इन कामों के लिए ब्रांच जाना जरूरी है, वे हड़ताल से पहले अपना काम निपटा सकते हैं.