Blog

  • 60-65 की उम्र में फिर बने छठी क्लास के बच्चे: 30 दोस्तों ने स्कूल पहुंचकर खेला पिठ्ठू-गिल्ली डंडा

    60-65 की उम्र में फिर बने छठी क्लास के बच्चे: 30 दोस्तों ने स्कूल पहुंचकर खेला पिठ्ठू-गिल्ली डंडा

    60-65 की उम्र में फिर बने छठी क्लास के बच्चे: 30 दोस्तों ने स्कूल पहुंचकर खेला पिठ्ठू-गिल्ली डंडा

    दरअसल, यह पूरा मामला करीब 7 साल पुराने एक वीडियो से जुड़ा है. राजा मंडी गोकुलपुरा निवासी राकेश नागर के मुताबिक, दोस्तों ने साल 2019 में अपने यूट्यूब चैनल के लिए यह वीडियो बनाया था. उस समय वीडियो को करीब 1500 व्यू मिले थे.

    कहते हैं उम्र सिर्फ शरीर की होती है, यादों की नहीं…

    उत्तर प्रदेश में आगरा गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां 60 से 65 साल की उम्र पार कर चुके दोस्तों ने कुछ घंटों के लिए अपनी उम्र को जैसे पीछे छोड़ दिया. सफेद कमीज, काली पैंट और गले में पानी की बोतल… बिल्कुल छठी क्लास के बच्चों की तरह ये दोस्त अपने पुराने स्कूल पहुंचे और फिर शुरू हुआ बचपन को दोबारा जीने का सिलसिला.

    किसी ने स्कूल के गेट से दौड़ते हुए एंट्री की, तो कोई दोस्तों के साथ नाचते-गाते क्लास तक पहुंचा. क्लासरूम में पहुंचकर कोई बेंच पर बैठा तो किसी ने पुराने दिनों वाली शरारत शुरू कर दी. इसके बाद दोस्त स्कूल के मैदान में पहुंचे और पिठ्ठू यानी सात पत्थरों का खेल और गिल्ली-डंडा खेलने लगे.

    खास बात यह है कि इन दोस्तों की उम्र भले ही 60 से 65 साल हो चुकी है, लेकिन खेल के दौरान उनके चेहरों पर वही उत्साह नजर आया, जो कभी स्कूल के दिनों में हुआ करता था. कोई दोस्तों का हाथ पकड़कर मस्ती करता दिखा तो कोई रेलगाड़ी बनाकर स्कूल में दौड़ता नजर आया.

    7 साल पहले बनाया था वीडियो दरअसल, यह पूरा मामला करीब 7 साल पुराने एक वीडियो से जुड़ा है. राजा मंडी गोकुलपुरा निवासी राकेश नागर के मुताबिक, दोस्तों ने साल 2019 में अपने यूट्यूब चैनल के लिए यह वीडियो बनाया था. उस समय वीडियो को करीब 1500 व्यू मिले थे.

    हाल ही में वीडियो के कुछ हिस्सों को नए वॉइसओवर के साथ इंस्टाग्राम पर दोबारा पोस्ट किया गया. इसके बाद लोगों का ध्यान इस वीडियो पर गया और बड़ी संख्या में लोग इसे देख और शेयर करने लगे.

    करीब 30 दोस्तों ने दोबारा पहनी स्कूल की ड्रेस इस खास वीडियो में करीब 30 पुराने दोस्त शामिल हुए थे. इनमें रिटायर्ड IPS अधिकारी, डॉक्टर, अकाउंटेंट, शिक्षक और अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर चुके लोग शामिल थे. यानी जिंदगी ने सबको अलग-अलग रास्तों पर पहुंचा दिया, लेकिन स्कूल की दोस्ती ने इन सभी को फिर एक जगह ला खड़ा किया.

    इन दोस्तों का ग्रुप भी अचानक नहीं बना. राकेश के मुताबिक, करीब 10 साल पहले उनके दोस्त केशव शर्मा ने पुराने सहपाठियों का एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था. धीरे-धीरे स्कूल के दूसरे दोस्त भी इसमें जुड़ते गए.

    एक दिन राकेश ने इसी ग्रुप में स्कूल की पुरानी यादों पर वीडियो बनाने का आइडिया रखा. दोस्तों को विचार पसंद आया और फिर तय हुआ कि सिर्फ बातें नहीं होंगी, बल्कि एक बार फिर स्कूल जाकर उसी दौर को जिया जाएगा.

    टीचर ने समझाया तो मिली शूटिंग की इजाजत शूटिंग के लिए स्कूल पहुंचना भी इतना आसान नहीं था. शुरुआत में स्कूल में शूटिंग की अनुमति नहीं मिली. इसके बाद शिक्षक डॉ. जनक सिंह सिसोदिया ने प्रिंसिपल को पूरी बात समझाई. अनुमति मिलने के बाद दोस्तों ने स्कूल में शूटिंग की और अपने बचपन को कैमरे में कैद कर लिया.

    राकेश ने बताया कि उन्होंने इसी स्कूल में साल 1971 में छठी क्लास में दाखिला लिया था और 1976 में दसवीं पास की. स्कूल के दिनों में मंच पर अभिनय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. आगे चलकर उन्होंने अलग-अलग जगह काम किया और बाद में गायन से भी जुड़े.

    उम्र बढ़ी, लेकिन दोस्ती नहीं बदली इस वीडियो की सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं कि बुजुर्ग दोस्त स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर बच्चों की तरह खेलते नजर आए. असली कहानी उन रिश्तों की है, जो स्कूल से निकलने के दशकों बाद भी बने रहे. ये दोस्त आज भी एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं और समय-समय पर मिलते हैं. वीडियो में भी उनकी हंसी, मस्ती और खेल के बीच करीब पांच दशक पुरानी दोस्ती साफ दिखाई देती है. जिंदगी ने इन दोस्तों को बड़ा कर दिया, जिम्मेदारियां दे दीं, उम्र बढ़ा दी… लेकिन स्कूल की घंटी, दोस्तों की शरारत और बचपन की वो यादें आज भी वहीं हैं. शायद यही वजह है कि सात साल पहले बनाया गया यह वीडियो अब दोबारा लोगों को अपने बचपन और पुराने दोस्तों की याद दिला रहा है. इस वीडियो राजकीय इंटर कॉलेज में जाकर बनाया है. हमने दिखाया है कि जब हम छोटे-छोटे बच्चे थे साथ में पढ़ते थे फीलिंग आए इसलिए बैग और बोतल लेकर इकट्ठे हुए और जितने भी दोस्त थे उन्होंने वहां जाकर प्ले किया.

  • Psychology Facts: रेस्टोरेंट का बिल बार-बार चेक करते हैं? इसे कंजूसी समझने की गलती न करें, जानिए इसके पीछे की वजह,

    Psychology Facts: रेस्टोरेंट का बिल बार-बार चेक करते हैं? इसे कंजूसी समझने की गलती न करें, जानिए इसके पीछे की वजह,

    Psychology Facts: रेस्टोरेंट का बिल बार-बार चेक करते हैं? इसे कंजूसी समझने की गलती न करें, जानिए इसके पीछे की वजह,

    लाइफस्टाइल डेस्क: रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद जब बिल टेबल पर आता है, तो कुछ लोग तुरंत पेमेंट कर देते हैं, जबकि कुछ लोग बिल की हर एंट्री ध्यान से पढ़ते हैं। वे खाने की कीमत, टैक्स, सर्विस चार्ज, डिस्काउंट और कुल रकम का मिलान करते हैं। कई बार इस आदत को देखकर लोग उन्हें कंजूस भी समझ लेते हैं।

    लेकिन बिल को ध्यान से देखना हमेशा कंजूसी का संकेत नहीं होता। इसके पीछे खर्चों का हिसाब रखने, गलती से बचने और पेमेंट को लेकर स्पष्टता पाने जैसी सामान्य वजहें हो सकती हैं।

    1. बिल चेक करने से दूर हो सकता है शक

    कुछ लोग तब तक संतुष्ट महसूस नहीं करते, जब तक उन्हें किसी चीज की पूरी जानकारी न मिल जाए। रेस्टोरेंट का बिल आने पर भी वे यह देखना चाहते हैं कि जो खाना उन्होंने ऑर्डर किया था, उसी का पैसा जोड़ा गया है या नहीं।

    बिल को ध्यान से देखने से उन्हें टैक्स, अतिरिक्त चार्ज और कुल रकम समझने में मदद मिलती है। इससे पेमेंट करने से पहले किसी संभावित गलती को स्पष्ट करने का मौका मिल सकता है।

    2. गलती होने की संभावना से बचना

    कभी-कभी बिल में किसी आइटम की कीमत दो बार जुड़ सकती है या ऐसा सामान भी शामिल हो सकता है, जिसे ग्राहक ने ऑर्डर नहीं किया था।

    ऐसे में बिल की जांच करना एक सामान्य सावधानी है। इससे ग्राहक पेमेंट से पहले गलत एंट्री पर सवाल उठा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे ठीक करवा सकता है।

    इस आदत को केवल कंजूसी से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि अपने खर्च की जांच करना जिम्मेदार व्यवहार भी हो सकता है।

    3. बजट के हिसाब से खर्च का मिलान

    बिल ध्यान से देखने की एक वजह बजट भी हो सकता है। मनोविज्ञान में मेंटल अकाउंटिंग की अवधारणा बताती है कि लोग अक्सर अपने पैसों को अलग-अलग खर्चों के हिसाब से मानसिक रूप से बांटकर देखते हैं।

    उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने रेस्टोरेंट में 1,000 रुपये खर्च करने का बजट बनाया था और बिल 1,300 रुपये आया, तो वह यह जानना चाहेगा कि अतिरिक्त 300 रुपये किन चीजों पर खर्च हुए।

    इस तरह बिल देखने से उसे अपने खर्च का हिसाब समझने और भविष्य के बजट की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

    4. पेमेंट से पहले संतुष्टि और स्पष्टता

    कुछ लोगों को किसी भी भुगतान से पहले रकम और उसकी वजह स्पष्ट होना जरूरी लगता है। बिल देखने के बाद उन्हें यह भरोसा हो सकता है कि वे कितनी रकम चुका रहे हैं और उसके बदले उन्हें क्या मिला है।

    इससे भुगतान के बाद होने वाली उलझन या अनिश्चितता कम हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की आदत और सोच अलग होती है, इसलिए इसके पीछे एक ही मनोवैज्ञानिक वजह मानना ठीक नहीं है।

    5. क्या यह चिंता या तनाव का संकेत है?

    रेस्टोरेंट का बिल दोबारा चेक करना अपने आप में किसी मानसिक समस्या या अत्यधिक चिंता का प्रमाण नहीं है। बहुत से लोग इसे अपनी सामान्य दिनचर्या और सावधानी का हिस्सा मानते हैं।

    अगर कोई व्यक्ति हर छोटी रकम को लेकर लगातार परेशान रहता है, बार-बार जांच करने के बावजूद संतुष्ट नहीं होता या पैसों से जुड़ी चिंता उसकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है, तो वह स्थिति अलग हो सकती है। केवल बिल देखने की आदत के आधार पर किसी के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

    निष्कर्ष: रेस्टोरेंट का बिल ध्यान से पढ़ना पैसों का हिसाब रखने, संभावित गलतियों से बचने और भुगतान को लेकर स्पष्टता पाने का एक सामान्य तरीका हो सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति को सिर्फ इस आदत के आधार पर कंजूस कहना उचित नहीं है।

  • डेट पर जाते हैं: लेकिन बनते-बनते बिगड़ जाती है बात, अगली बार जाएं तो लेकर जाएं ये तोहफे, हो जाएगी पार्टनर इंप्रेस

    डेट पर जाते हैं: लेकिन बनते-बनते बिगड़ जाती है बात, अगली बार जाएं तो लेकर जाएं ये तोहफे, हो जाएगी पार्टनर इंप्रेस

    डेट पर जाते हैं: लेकिन बनते-बनते बिगड़ जाती है बात, अगली बार जाएं तो लेकर जाएं ये तोहफे, हो जाएगी पार्टनर इंप्रेस

    पहली डेट पर लड़की को इंप्रेस करने के लिए महंगे तोहफे नहीं, बल्कि छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखना मायने रखता है. ये कुछ बजट-फ्रेंडली गिफ्ट्स उनका दिल जीत सकते हैं.

    डेट पर जाना लड़के और लड़की, दोनों के लिए ही एक खास एक्सपीरियंस होता है. जब हम किसी से मिलने जाते हैं, तो मन में कुछ न कुछ उम्मीदें जरूर होती हैं. कुछ लोग डेट पर इसलिए जाते हैं कि उन्हें अपना लाइफ लॉन्ग साथ निभाने वाला साथी मिल जाए, वहीं कुछ लोग ऐसे इंसान की तलाश में होते हैं, जिसके साथ वे अच्छे पल बिता सकें. जरूरी नहीं कि हर रिश्ता जिंदगीभर साथ रहे, लेकिन कई बार कोई ऐसा शख्स मिल जाता है, जो आपके साथ रहकर आपकी छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखता है और जिंदगी के खूबसूरत पलों को और खास बना देता है.

    वहीं, जब भी किसी से मिलने या डेट पर जाने की बात आती है, तो मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर ऐसा क्या लेकर जाया जाए, जिससे सामने वाला खुश हो जाए. खासकर जब बात लड़की को गिफ्ट देने की हो, तो कई लोग महंगी चीजों के बारे में सोचने लगते हैं, तो कोई खाली हाथ चला जाता है. लेकिन जरूरी नहीं कि किसी को इंप्रेस करने के लिए हजारों रुपये ही खर्च किए जाएं. कई बार छोटी और काम की चीजें भी लड़कियों के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान ला देती हैं. अगर आप भी अगली बार किसी लड़की के साथ डेट पर जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि उनके लिए क्या लेकर जाएं, तो ये कुछ गिफ्ट आइडिया हैं, जो आपके काम आ सकते हैं.

    फूल देखकर लड़कियां हो सकती हैं सबसे ज्यादा खुश फूल एक ऐसा गिफ्ट है, जिसे लेकर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपको पता है कि उन्हें कौन सा फूल पसंद है, तो वही लेकर जाएं. पसंद नहीं पता है, तो एक गुलाब या गुलाब का बुके ले लें. गुलाब ज्यादातर लड़कियों को पसंद आता है. उनकी ख्वाहिश होती है कि उनका पार्टनर उन्हें गुलाब गिफ्ट करे.

    उनकी पसंद की चॉकलेट दें पहले बातों-बातों में उनकी फेवरेट चॉकलेट के बारे में पूछ लें. अगर सामने वाले को चॉकलेट पसंद है, तो आप गुलाब के साथ चॉकलेट भी दे सकते हैं. चाहें तो फूल के बुके में चॉकलेट भी डलवा सकते हैं, जो देखने में एस्थेटिक लगेगा और आपकी गर्लफ्रेंड को पसंद भी आएगा. यहां भी कीमत से ज्यादा मायने रखता है.

    कोई प्यारी सी किताब हो सकती है खास अगर जिस लड़की के साथ आप डेट पर जा रहे हैं, उन्हें किताबें पढ़ना पसंद है, तो उनकी पसंद की कोई किताब गिफ्ट कर सकते हैं. इसके लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें किस तरह की किताबें पढ़ना पसंद है. अगर वह हिंदी साहित्य की शौकीन हैं, तो उन्हें ‘रेत की मछली’, ‘गुनाहों का देवता’, ‘लॉकडाउन का रोजनामचा’ या ‘रश्मिरथी’ जैसी खूबसूरत किताब दे सकते हैं. अगर किताब के साथ एक गुलाब देंगे, तो माहौल और प्यारा हो जाएगा.

    हैंडमेड गिफ्ट भी हो सकता है खास कुछ ऐसा जो आपने खुद बनाया हो, वह भी खास हो सकता है. छोटा सा हैंडरिटन नोट, हैंडमेड कार्ड या कोई छोटी सी चीज आप खुद तैयार करके दे सकते हैं. जैसे कोई क्राफ्ट या पेंटिंग.इस तरह के गिफ्ट में आपकी मेहनत दिखाई देती है और लड़कियों को लगता है कि आप उनके बारे में सोचते हैं.

    कुछ लड़कियों को पसंद आते हैं प्यारे खिलौने अगर उन्हें क्यूट चीजें और खिलौने पसंद हैं, तो आप कोई प्यारा सा सॉफ्ट टॉय भी गिफ्ट कर सकते हैं. यह जरूरी नहीं कि खिलौना बहुत बड़ा या महंगा हो. उनकी पसंद का छोटा सा क्यूट टॉय भी उन्हें पसंद आ सकता है और वह उसे अपने पास संभालकर भी रख सकती हैं.

    गिफ्ट से ज्यादा मायने रखती है आपकी नीयत आखिर में सबसे जरूरी बात यह है कि किसी को इंप्रेस करने के लिए गिफ्ट की कीमत देखने की जरूरत नहीं है. कई बार सामने वाले की पसंद याद रखना और उसी हिसाब से कुछ लेकर जाना ही काफी होता है. इसलिए अगली बार डेट पर जाने से पहले महंगे गिफ्ट की जगह थोड़ा समय निकालकर उनकी पसंद के बारे में सोचिए. हो सकता है आपकी छोटी सी कोशिश ही उनके लिए सबसे खास बन जाए.

  • घर में सोता रहा परिवार: डेढ़ घंटे तक अलमारियां खंगालता रहा चोर..गाजियाबाद में हुई लाखों की चोरी

    घर में सोता रहा परिवार: डेढ़ घंटे तक अलमारियां खंगालता रहा चोर..गाजियाबाद में हुई लाखों की चोरी

    घर में सोता रहा परिवार: डेढ़ घंटे तक अलमारियां खंगालता रहा चोर..गाजियाबाद में हुई लाखों की चोरी

    घर में दाखिल होने के बाद चोर ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक पूरे मकान को खंगाला. उसने अलग-अलग मंजिलों पर रखी अलमारियों, सेफ और लॉकर को खोला और उनमें रखी नकदी व सोने-चांदी के जेवरात चोरी कर लिए.

    गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में चोरों ने एक तीन मंजिला मकान को निशाना बनाकर लाखों रुपये की नकदी और सोने-चांदी के जेवरात चोरी कर लिए. हैरानी की बात यह है कि वारदात के दौरान घर में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे मौजूद थे, लेकिन किसी की नींद नहीं खुली. परिवार ने आशंका जताई है कि चोर ने नींद लाने वाले किसी स्प्रे का इस्तेमाल किया होगा. हालांकि, इसकी पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.

    वारदात सेक्टर-9 के एफ ब्लॉक स्थित मकान नंबर 243 में रहने वाले दुष्यंत कुमार शर्मा के घर हुई. बताया जा रहा है कि चोर किसी तरह मकान की तीसरी मंजिल तक पहुंचा. वहां जाली वाले गेट की जाली तोड़कर उसने हाथ अंदर डाला और कुंडी खोलकर घर में प्रवेश कर गया.

    तीनों मंजिलों पर खंगाली अलमारियां और लॉकर घर में दाखिल होने के बाद चोर ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक पूरे मकान को खंगाला. उसने अलग-अलग मंजिलों पर रखी अलमारियों, सेफ और लॉकर को खोला और उनमें रखी नकदी व सोने-चांदी के जेवरात चोरी कर लिए. इसके बाद चोरी का सामान एक बैग में भरकर मौके से फरार हो गया.

    परिवार के मुताबिक, सुबह करीब 5:30 बजे उनकी नींद खुली. घर का सामान बिखरा देखकर उन्हें चोरी की जानकारी हुई. इसके बाद उन्होंने तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी. विजयनगर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की.

    CCTV में कैद हुआ चोर घर में लगे CCTV कैमरे में चोर के भागने की तस्वीर सामने आई है. फुटेज में वह चोरी का सामान बैग में भरकर कंधे पर लटकाए दिखाई दे रहा है. इसके बाद वह मकान की बाउंड्री पर चढ़ता है और दूसरी तरफ कूदकर सड़क पर उतर जाता है. पुलिस अब CCTV फुटेज के आधार पर चोर की पहचान करने के साथ उसके आने-जाने के रास्ते का पता लगाने में जुटी है.

    दो दिन पहले भी इसी इलाके में चोरी सेक्टर-9 में चोरी की यह घटना पहली नहीं है. दो दिन पहले 19 सितंबर की रात भी इसी इलाके में प्रदीप सिंह के मकान में चोरी हुई थी. प्रदीप सिंह के मुताबिक, चोर करीब 5 लाख रुपये के जेवरात और 75 हजार रुपये नकद लेकर फरार हो गए थे. उस घटना में भी चोर की तस्वीर CCTV कैमरे में कैद हुई थी.

  • कान में घुस गया जिंदा कीड़ा: तुरंत करें ये काम, उंगली डालना पड़ सकता है भारी..

    कान में घुस गया जिंदा कीड़ा: तुरंत करें ये काम, उंगली डालना पड़ सकता है भारी..

    कान में घुस गया जिंदा कीड़ा: तुरंत करें ये काम, उंगली डालना पड़ सकता है भारी..

    अगर कान में जिंदा कीड़ा चला जाए तो सबसे पहले घबराएं नहीं. कान के अंदर उंगली या कोई नुकीली चीज डालकर कीड़े को निकालने की कोशिश न करें. ऐसा करने से कीड़ा कान की त्वचा को खरोंच सकता है या काट सकता है.

    कई बार खेलते समय, बाहर घूमने के दौरान या सोते हुए कोई छोटा कीड़ा कान में चला जाता है. ज्यादातर मामलों में कीड़ा कुछ समय बाद खुद ही बाहर निकल आता है. लेकिन अगर वह कान के अंदर फंस जाए, तो घबराहट में लोग उसे निकालने के लिए उंगली, माचिस या ईयरबड्स का इस्तेमाल करने लगते हैं. ऐसा करना परेशानी को और बढ़ा सकता है. इससे कीड़ा और अंदर जा सकता है और कान के पर्दे को भी चोट पहुंच सकती है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि अगर कान में कीड़ा चला जाए तो क्या करें.

    जल्दबाजी न करें अगर कान में जिंदा कीड़ा चला जाए तो सबसे पहले घबराएं नहीं. कान के अंदर उंगली या कोई नुकीली चीज डालकर कीड़े को निकालने की कोशिश न करें. ऐसा करने से कीड़ा कान की त्वचा को खरोंच सकता है या काट सकता है. ज्यादा छेड़छाड़ करने पर कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंच सकता है.

    कान में डालें 2-3 बूंद तेल अगर कान के अंदर कीड़ा चलता हुआ महसूस हो रहा है, तो उस कान में 2-3 बूंद नारियल तेल या सरसों का तेल डाला जा सकता है. तेल कीड़े के ऊपर एक परत बना देता है, जिससे वह कुछ ही समय में मर जाता है. इसके बाद कान के अंदर हलचल और दर्द जैसी परेशानी कम हो सकती है.

    खुद निकालने की कोशिश न करें कीड़ा मर जाने के बाद भी उसे कान से निकालने के लिए उंगली या ईयरबड्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इससे कीड़ा और अंदर फंस सकता है और कान में चोट या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए तेल डालने के बाद जल्द से जल्द ENT डॉक्टर के पास जाएं और कीड़े को सुरक्षित तरीके से निकलवाएं.

  • अचानक तेज सिरदर्द​​​​​​​ को: न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है ब्रेन एन्यूरिज्म..

    अचानक तेज सिरदर्द​​​​​​​ को: न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है ब्रेन एन्यूरिज्म..

    अचानक तेज सिरदर्द​​​​​​​ को: न करें नजरअंदाज, कम उम्र में भी हो सकता है ब्रेन एन्यूरिज्म..

    20 या 30 साल उम्र में तेज सिरदर्द को आमतौर पर लोग सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अक्सर इसे देर रात तक जागने, काम के तनाव, पानी की कमी या माइग्रेन से जोड़कर देखते हैं। जबकि ये ब्रेन एन्यूरिज्म जैसी खतरनाक कंडीशन हो सकती है। आइये जानते हैं ब्रेन एन्यूरिज्म क्या है और इसके लक्षण कैसे होते हैं।

    सितंबर का महीना ब्रेन एन्यूरिज्म जागरूकता के रूप में मनाया जाता है। बहुत कम लोग इस समस्या के बारे में जानते हैं कि ब्रेन एन्यूरिज्म युवाओं को भी प्रभावित कर सकता है। ब्रेन एन्यूरिज्म उस स्थिति को कहते हैं, जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका की दीवार का कमजोर हिस्सा फूलकर गुब्बारे जैसा हो जाता है। कई एन्यूरिज्म का पता नहीं चल पाता, क्योंकि उनमें कोई लक्षण नहीं होते और वो सालों तक बिना बदलाव के रह सकते हैं। लेकिन एन्यूरिज्म फटने पर दिमाग के आसपास ब्लीडिंग हो सकती है, जिसे सबरैक्नॉइड हेमरेज कहा जाता है। यह जानलेवा आपातस्थिति बन सकती है।

    डॉक्टर विपुल गुप्ता (डायरेक्टर, न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरी, सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई) कम उम्र के लोगों में ब्रेन एन्यूरिज्म कम होता है, लेकिन यह कम उम्र में भी हो सकता है और लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकता है। कई मामलों में इसका पहला संकेत अचानक एन्यूरिज्म का फटना और मस्तिष्क में रक्तस्राव हो सकता है।

    ब्रेन एन्यूरिज्म के लक्षण

    ब्रेन एन्यूरिज्म के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। एन्यूरिज्म फटने पर आमतौर पर अचानक बेहद तेज सिरदर्द होता है, जो कुछ सेकंड या मिनटों में अपनी चरम तीव्रता तक पहुंच जाता है। इसके साथ उल्टी, गर्दन में अकड़न, बेहोशी, दौरे, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने से जुड़ी समस्या या भ्रम जैसी स्थिति भी हो सकती है।

    कुछ मामलों में एन्यूरिज्म फटने से पहले भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासकर जब एन्यूरिज्म बड़ा होकर आसपास की नसों पर दबाव डालने लगे। ऐसे में आंख के आसपास लगातार दर्द, दोहरा दिखाई देने लगता है, पलक का झुकना या आंखों की रोशनी और आंखों की गतिविधियों में अचानक बदलाव हो सकता है। इन लक्षणों को कई बार माइग्रेन, आंखों की थकान या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से जोड़ दिया जाता है। लेकिन अचानक या असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    उम्र के साथ अन्य जोखिम कारक

    ब्रेन एन्यूरिज्म के खतरे को सिर्फ उम्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। परिवार में किसी करीबी सदस्य को ब्रेन एन्यूरिज्म रहा हो, कुछ आनुवंशिक बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर और तंबाकू का सेवन जोखिम बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में ब्रेन एन्यूरिज्म का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर से इसके बारे सलाह लेनी चाहिए। युवाओं को भी नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच, शारीरिक गतिविधि बनाए रखने और तंबाकू से दूर रहने की आदत डालनी चाहिए।

    जांच से स्थिति का समय पर पता लगाया जा सकता है

    ब्रेन एन्यूरिज्म की आशंका होने पर सीटी एंजियोग्राफी या एमआर एंजियोग्राफी के जरिए इसकी पहचान और जांच की जा सकती है। कुछ मामलों में और अधिक जानकारी के लिए डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) की जरूरत पड़ सकती है। यदि एन्यूरिज्म का पता चलता है तो उसके आकार, स्थान और बनावट के साथ मरीज की उम्र, फैमिली हिस्ट्री और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है।

    कम उम्र के मरीजों में इसकी जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उन्हें लंबे समय तक इस स्थिति के साथ रहना पड़ सकता है। कुछ एन्यूरिज्म की नियमित इमेजिंग के जरिए निगरानी की जा सकती है, जबकि कुछ मामलों में फटने या दोबारा ब्लीडिंग के खतरे को कम करने के लिए इलाज जरूरी हो सकता है।

    एन्यूरिज्म की जगह और उसकी स्थिति के आधार पर उपचार में एंडोवैस्कुलर प्रक्रिया या सर्जिकल क्लिपिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। एंडोवैस्कुलर ट्रीटमेंट में रक्त वाहिकाओं के रास्ते दिमाग पहुंचकर एन्यूरिज्म का उपचार किया जाता है।

    हर सिरदर्द को ब्रेन स्कैन की जरूरत नहीं

    जागरूकता का मतलब यह नहीं है कि हर सिरदर्द में ब्रेन स्कैन कराया जाए या युवाओं में अनावश्यक डर पैदा हो। जरूरी यह है कि व्यक्ति उन लक्षणों को पहचाने जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और यह समझे कि किन परिस्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है। ब्रेन एन्यूरिज्म युवाओं में अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन केवल उम्र के आधार पर इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर जब लक्षण अचानक, गंभीर या असामान्य हों। इसलिए चेतावनी संकेतों को समझें, परिवार में बीमारी के इतिहास की जानकारी रखें और अचानक तेज या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

  • 56 किलो वजन​​​​​​​ घटाकर: बदला लुक, जानें इस महिला ने 1.5 साल में कैसे किया गजब का बॉडी ट्रां..

    56 किलो वजन​​​​​​​ घटाकर: बदला लुक, जानें इस महिला ने 1.5 साल में कैसे किया गजब का बॉडी ट्रां..

    56 किलो वजन​​​​​​​ घटाकर: बदला लुक, जानें इस महिला ने 1.5 साल में कैसे किया गजब का बॉडी ट्रां..

    क्या आप भी वजन कम करना चाहते हैं लेकिन ये काफी चैलेंजिंग लग रहा है। तो इस महिला की वेट लॉस जर्नी आपको इंस्पायर कर सकती है।

    मोटापा न केवल आपके लुक को खराब करता है बल्कि कई बीमारियों का घर भी माना जाता है। लेकिन एक महिला ने अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से सभी को हैरान कर दिया है। हाल ही में एक महिला ने लगभग डेढ़ साल में 56 किलो वज़न घटाने की अपनी फ़िटनेस जर्नी के बारे में बताया। अपने ट्रांसफ़ॉर्मेशन को महिला ने एक रील के जरिए दिखाया है, जिसे देख हर कोई हैरान है। अनुरीत कौर ने अपने वेट लॉस के बारे में एक यूज़र के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने बताया, “मुझे इसमें डेढ़ साल का समय लगा। मैंने जनवरी 2024 में शुरुआत की थी और कुल 56 किलो वज़न घटाया। तब से मैंने अपना ध्यान मसल्स बनाने और मसल्स स्ट्रेंथ बढ़ाने पर लगाया है।

    रील शेयर कर शेयर की अपने वेट लॉस जर्नी

    उन्होंने एक रील से शेयर करके बताया कि जब मैंने 2024 में शुरुआत की, तो मेरा एक ही लक्ष्य था वज़न कम करना। मैं पतली होना चाहती थी, छोटे साइज़ के कपड़े पहनना चाहती थी और वज़न कम करना चाहती थी। फिर मेरे अंदर बदलाव आया। मुझे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से प्यार हो गया। मुझे मज़बूत होने से मिलने वाला आत्मविश्वास, मसल्स बनाने की संतुष्टि और अपनी सेहत का ध्यान रखने की खुशी का एहसास हुआ। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो एहसास होता है कि मैं सिर्फ़ अपने शरीर को नहीं बदल रही थी मैं अपनी सोच को भी बदल रही थी।

    56 किलो वज़न कम करने का सफ़र यह भी दिखाता है कि सही सोच कितनी ज़रूरी है। “कोई भी सिर्फ़ एक हफ़्ते में इतना वज़न कम नहीं कर सकता। यह वेट लॉस जर्नी डेडिकेशन को भी दर्शाता है। वेट लॉस में वॉक करना, क्रेविंग होने पर कंट्रोल करना, शरीर के थके होने पर भी एक्सरसाइज करना, और मुश्किलों के बाद हार मानने के बजाय फिर से शुरुआत करना। अनुरीत कौर की वेट लॉस जर्नी हर किसी के लिए इंस्पिरेशन है।

    वेट लॉस के दौरान किन बातों का रखना चाहिए ध्यान दीक्षा सहवाग, वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ, फोर्टिस अस्पताल, मानेसर बताती हैं कि वेट लॉस के दौरान कुछ बातों का बेहद खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।

    डाइट और कैलोरी संतुलन

    कैलोरी डेफिसिट: जितनी कैलोरी आप दिनभर में बर्न करते हैं, उससे थोड़ा कम कैलोरी खाएं।

    प्रोटीन की भरपूर मात्रा: अपनी डाइट में दालें, पनीर, अंडे, सोया या अंकुरित अनाज जरूर शामिल करें। प्रोटीन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं।

    प्रोसेस्ड फूड और चीनी से दूरी: पैकेज्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, तली-भुनी चीजें और रिफाइंड शुगर का सेवन बिल्कुल बंद या बहुत कम कर दें।

    फाइबर शामिल करें: हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स पाचन में सुधार करते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं।

    वर्कआउट और फिजिकल एक्टिविटी

    कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: केवल पैदल चलना या दौड़ना ही काफी नहीं है। हफ्ते में 3–4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें ताकि मेटाबॉलिज्म तेज रहे और फैट लॉस के साथ मसल्स टोन हों।

    एक्टिव लाइफस्टाइल: वर्कआउट के अलावा दिनभर में कम से कम 8,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें।

    I

  • अब बांका में​​​​​​​ लड़की के साथ छेड़छाड़, बिहार मेें तीसरी घटना.

    अब बांका में​​​​​​​ लड़की के साथ छेड़छाड़, बिहार मेें तीसरी घटना.

    अब बांका में​​​​​​​ लड़की के साथ छेड़छाड़, बिहार मेें तीसरी घटना.

    बिहार के बांका में टूरिस्ट साइट पर एक महिला से छेड़छाड़ और उसके दोस्त के साथ बदसलूकी का वीडियो सामने आया है। राज्य में पिछले 1 हफ्ते में छेड़छाड़ की यह तीसरी घटना है। इससे पहले जमुई और समस्तीपुर में ऐसी ही घटनाएं सामने आई थीं।

    पुलिस के मुताबिक, बांका के मंदार हिल में हुई घटना के मामले में 6 युवकों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कई युवा महिला के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं और उसे चप्पलों से भी पीट रहे हैं। उनमें से एक उसे धमकी देता भी नजर आ रहा है।

    वीडियो बनाकर भी शेयर कियासमाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बौसनी पुलिस को 22 सितंबर को सोशल मीडिया के जरिए इस घटना की जानकारी मिली थी और उन्होंने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने बाद में इसे मंदार हिल की घटना बताई। FIR में कहा गया है कि 6 युवाओं ने लड़की के साथ कथित तौर अश्लील हरकतें कीं। इस दौरान घटना का वीडियो बनाया गया और बाद में सोशल मीडिया पर शेयर किया गया।

    पुलिस ने वीडियो में नजर आ रहे युवाओं और महिला की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। मंदार हिल के पास रहने वाले लोगों और दुकानदारों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस SHO पंकज कुमार झा ने बताया कि 6 अज्ञात युवकों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    समस्तीपुर मामले में 4 लोग गिरफ्तारइससे पहले बुधवार को पुलिस ने समस्तीपुर में नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया था। वीडियो में दिख रहा था कि लोग लड़की के साथ छेड़छाड़ करते नजर आ रहे थे। एक युवक ने उसका हाथ पकड़ रखा था, जबकि वह छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। वीडियो में युवक लड़की के साथ अश्लील हरकत करते और इशारे करते हुए नजर आ रहे थे।

    जमुई छेड़छाड़ मामले में 6 गिरफ्तारजमुई की घटना 19 सितंबर की शाम करीब 7 बजे की है। 10वीं में पढ़ने वाली एक नाबालिग अपने नाबालिग दोस्त के साथ शनिवार को ट्यूशन के बाद छात्र जमुई के मडवा हिल गए। लौटते समय कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया और उनके साथ छेड़छाड़ और मारपीट की। आरोप है कि दोनों के साथ करीब एक घंटे तक छेड़छाड़ और मारपीट हुई। इस मामले में पुलिस ने अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य आरोपी नंदन यादव भी है। पुलिस ने एनकाउंटर के बाद उसे गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी।

  • H1N1 कितना खतरनाक​​​​​​​ है? कोविड से कितना अलग है स्वाइन फ्लू, जानें लक्षण, बचाव और इलाज.

    H1N1 कितना खतरनाक​​​​​​​ है? कोविड से कितना अलग है स्वाइन फ्लू, जानें लक्षण, बचाव और इलाज.

    H1N1 कितना खतरनाक​​​​​​​ है? कोविड से कितना अलग है स्वाइन फ्लू, जानें लक्षण, बचाव और इलाज.

    देश के अलग-अलग हिस्सों में H1N1 इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आने के बीच लोगों के बीच स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या H1N1 कोविड-19 जितना खतरनाक है और इससे किस तरह बचा जा सकता है।

    H1N1 को आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है। यह Influenza A वायरस का एक सबटाइप है। इसी वायरस से जुड़ा संक्रमण 2009 में वैश्विक महामारी का कारण बना था। हालांकि, मौजूदा समय में H1N1 मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा माना जाता है और ज्यादातर स्वस्थ लोगों में संक्रमण गंभीर बीमारी का रूप नहीं लेता।

    क्या H1N1 कोविड जैसा खतरनाक है?

    H1N1 और कोविड-19 दोनों सांस से फैलने वाले संक्रमण हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग वायरस के कारण होते हैं। H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस का एक प्रकार है, जबकि कोविड-19 SARS-CoV-2 वायरस से होता है।

    H1N1 संक्रमण के ज्यादातर मामलों में मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए इसे पूरी तरह सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।

    कैसे फैलता है H1N1?

    H1N1 संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक या बातचीत के दौरान निकलने वाली सांस

  • बुखार-सिरदर्द में दवा​​​​​​​ लेने: से पहले सावधान, CDSCO ने painkillers और antibiotics के गलत इस्तेमाल पर चेताया.

    बुखार-सिरदर्द में दवा​​​​​​​ लेने: से पहले सावधान, CDSCO ने painkillers और antibiotics के गलत इस्तेमाल पर चेताया.

    बुखार-सिरदर्द में दवा​​​​​​​ लेने: से पहले सावधान, CDSCO ने painkillers और antibiotics के गलत इस्तेमाल पर चेताया.

    बुखार, सिरदर्द या शरीर में दर्द होने पर कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवा लेना शुरू कर देते हैं। अगर दवाओं का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक किया जाए तो इसके दुष्प्रभावों का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को लेकर केंद्र सरकार के ड्रग रेगुलेटर Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने सावधानी बरतने की बात कही है।

    CDSCO ने 22 सितंबर 2026 को जारी एक सर्कुलर में painkillers यानी NSAIDs, antibiotics और इनके अनियंत्रित इस्तेमाल से जुड़े Chronic Kidney Disease (CKD) के जोखिम का उल्लेख किया है।

    NSAIDs क्या हैं और क्यों दी गई सावधानी?

    NSAIDs ऐसी दवाओं का समूह है, जिनका इस्तेमाल दर्द, सूजन और बुखार जैसी समस्याओं में किया जाता है। इनका इस्तेमाल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार उचित मात्रा और उचित अवधि तक किया जाना जरूरी है।

    समस्या तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति सामान्य सिरदर्द, बुखार या शरीर में दर्द होने पर बार-बार खुद से दवा लेने लगे। कई बार लक्षण कम होने के बाद भी लोग अपनी तरफ से दवा जारी रखते हैं।

    CDSCO ने ऐसे अनियंत्रित इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने पर जोर दिया है।

    क्या painkillers से किडनी खराब हो सकती है?

    सरकारी सर्कुलर में painkillers और antibiotics के अनियंत्रित इस्तेमाल को Chronic Kidney Disease के जोखिम से जोड़कर सावधानी बरतने की बात कही गई है।

    हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर व्यक्ति को दर्द या बुखार में painkiller लेने से किडनी की बीमारी हो जाएगी। दवा का प्रकार, खुराक, कितने समय तक दवा ली गई, व्यक्ति की उम्र और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कई कारक जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

    खासकर जिन लोगों को पहले से किडनी की समस्या है, उन्हें ऐसी दवाएं लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

    Antibiotics भी बिना सलाह के लेना ठीक नहीं

    CDSCO ने antibiotics के अनियंत्रित इस्तेमाल का भी उल्लेख किया है। हर बुखार या संक्रमण में antibiotics की जरूरत नहीं होती। कई सामान्य वायरल संक्रमणों में antibiotics प्रभावी नहीं होते।

    बिना जरूरत antibiotics लेने से antimicrobial resistance यानी दवाओं के खिलाफ बैक्टीरिया के प्रतिरोध की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा, उसकी खुराक और अवधि का पालन करना महत्वपूर्ण है।

    किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

    जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी बीमारी है, उन्हें painkillers लेने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बुजुर्गों और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए भी दवा शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

    अगर बुखार या सिरदर्द बार-बार हो रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या इसके साथ कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो केवल खुद से दवा लेते रहने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी