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  • सोने से पहले​​​​​​​ इन 3 चीजों: को देखने की ना करें भूल! वास्तु में इन्हें माना गया है अशुभ

    सोने से पहले​​​​​​​ इन 3 चीजों: को देखने की ना करें भूल! वास्तु में इन्हें माना गया है अशुभ

    सोने से पहले​​​​​​​ इन 3 चीजों: को देखने की ना करें भूल! वास्तु में इन्हें माना गया है अशुभ

    रात को सोने से पहले हम अक्सर घर की छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं। दिनभर की भागदौड़ के बाद बस बिस्तर पर पहुंचना और आंखें बंद करना ही काफी लगता है। लेकिन वास्तु शास्त्र में सोने से पहले के माहौल को भी खास महत्व दिया गया है।

    वास्तु शास्त्र

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, आसपास मौजूद कुछ चीजें मन पर असर डाल सकती हैं और नींद में खलल पैदा कर सकती हैं। इनमें गंदे बर्तन, शीशा और पानी को लेकर खास सावधानी बरतने की बात कही जाती है। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।

    रात में सोने से पहले गंदे बर्तन क्यों ना छोड़ें?

    किचन में रातभर पड़े झूठे बर्तनों को वास्तु की दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता है। खासकर जब सिंक में बर्तन जमा हों और उन्हें साफ किए बिना ही घर के लोग सो जाएं। वास्तु में गंदे बर्तनों का संबंध राहु-केतु के प्रभाव से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इन्हें देखकर सोने से मन में बेचैनी और भारीपन बना रह सकता है। यही वजह है कि रात को सोने से पहले किचन की सफाई करने और बर्तन धोकर रखने की परंपरा कई घरों में रही है।

    गंदे बर्तन नींद पर कैसे असर डालते हैं?

    वास्तु के अनुसार, रात में गंदे बर्तन देखने से मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मान्यता है कि दिनभर के काम के बाद अगर आखिरी नजर अस्त-व्यस्त किचन पर पड़े, तो मन पूरी तरह शांत नहीं हो पाता है। इसे धन और घर की समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि झूठे बर्तन रातभर पड़े रहने से मां लक्ष्मी की कृपा प्रभावित हो सकती है और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए सोने से पहले किचन को साफ रखने पर जोर दिया जाता है।

    रात में शीशा देखने से क्यों करते हैं परहेज?

    वास्तु में शीशे को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। इसे ऊर्जा को प्रतिबिंबित करने वाली वस्तु माना जाता है। इसी कारण बेडरूम में शीशे की स्थिति और उसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की बात कही जाती है। मान्यता है कि सोने से ठीक पहले आईने में देखने से मन शांत होने के बजाय ज्यादा सक्रिय हो सकता है। खासकर अगर बिस्तर के सामने शीशा लगा हो, तो इसे वास्तु के लिहाज से उचित नहीं माना जाता है। इसलिए रात में सोने से पहले शीशे से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।

    शीशे की वजह से भी नींद प्रभावित

    वास्तु के अनुसार, रात के समय शीशे में देखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। वास्तु शास्त्र में मान्यता है कि इससे व्यक्ति बेचैनी महसूस कर सकता है और नींद बार-बार टूटने की स्थिति बन सकती है। फिर भी अगर बेड के सामने शीशा लगा हो और उससे असहज महसूस होता हो, तो सोने से पहले ढक दें। इससे कमरे का माहौल शांत और सुकून भरा महसूस हो सकता है।

    सोने से पहले पानी ना देखें

    वास्तु शास्त्र में पानी को चंचल तत्व माना गया है। इसी वजह से सोने से ठीक पहले पानी को देखने या बिस्तर के पास रखने को लेकर कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि रात में पानी देखने से मन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है और व्यक्ति को बेचैनी महसूस हो सकती है। खासतौर पर सिरहाने के पास पानी रखने से बचना चाहिए। अगर रात में पानी रखना जरूरी हो, तो उसे सिर के स्तर से नीचे किसी उचित जगह पर रखना चाहिए।

    सिरहाने पानी रखना क्यों गलत?

    रात में सोते समय सिर के पास पानी रखने की आदत वास्तु के अनुसार शुभ नहीं मानी जाती है। इसके पीछे पानी के चंचल स्वभाव की मान्यता दी जाती है। कहा जाता है कि इससे मन स्थिर नहीं रहता और नींद में बार-बार खलल पड़ सकता है। अगर वास्तु से हटकर भी देखें, तो पानी का गिलास गिरने या फैलने से बिस्तर खराब हो सकता है। इसलिए पानी रखना हो, तो उसे बिस्तर से थोड़ी दूरी पर रखना सुविधाजनक रहता है।

    सोने से पहले घर का माहौल रखें शांत

    वास्तु के अनुसार, रात में सोने से पहले घर को व्यवस्थित करना एक बहुत ही अच्छी आदत है। किचन साफ हो, कमरे में अनावश्यक सामान ना फैला हो और सोने की जगह शांत हो, तो मन को आराम मिलता है। मान्यता है कि सोने से पहले सकारात्मक और साफ माहौल रखना चाहिए। इसलिए गंदे बर्तन, सामने रखा शीशा या सिरहाने रखा पानी जैसी चीजों को लेकर सावधानी बरती जाती है।

    इन मान्यताओं को कैसे समझें?

    गंदे बर्तन, शीशा और पानी को लेकर बताई गई बातें वास्तु और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। हर व्यक्ति इन पर विश्वास करे, यह जरूरी नहीं है। अच्छी नींद के लिए साफ-सुथरा कमरा, आरामदायक वातावरण और नियमित दिनचर्या का भी अपना महत्व है। अगर किसी वास्तु नियम को अपनाने से मन को सुकून मिलता है, तो उसे अपनी सुविधा के अनुसार अपनाया जा सकता है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • वास्तु टिप्स: मनी​​​​​​​ प्लांट की पीली पत्तियां दे रही इस बात का संकेत, ना करें इग्नोर

    वास्तु टिप्स: मनी​​​​​​​ प्लांट की पीली पत्तियां दे रही इस बात का संकेत, ना करें इग्नोर

    वास्तु टिप्स: मनी​​​​​​​ प्लांट की पीली पत्तियां दे रही इस बात का संकेत, ना करें इग्नोर

    वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर मनी प्लांट की पत्तियां पीली पड़ने लगे तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। जानें पीली पड़ रही पत्तियों का क्या मतलब होता है?

    मनी प्लांट की पीली पत्तियों का मतलब

    वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट की गिनती सबसे शुभ पौधों में होती है। इसे घर की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि ये घर में बरकल ले आता है। हालांकि जब इसकी पत्तियां पीली पड़ती है तो इसका क्या मतलब समझा जाए? जानें वास्तु से जुड़ी कुछ जरूरी बातों को।

    आर्थिक स्थिति होती है खराब

    अगर आपके घर में रखे मनी प्लांट की पत्तियां बार-बार पीली पड़ रही है तो इस संकेत को इग्नोर करना गलत होगा। इसका सबसे बड़ा संकेत माना जाता है कि पैसों से जुड़ी कोई दिक्कत हो सकती है। ऐसे में अपने बचत और खर्चे के बीच सही बैलेंस बनाकर रखना चाहिए।

    घर में कलह के संकेत

    वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर मनी प्लांट की कुछ पत्तियां रंग बदल रही हैं और आप उन्हें हटा नहीं रहे हैं तो माना जाता है कि इससे घर की सुख-शांति भंग हो सकती है। वहीं जब घर का माहौल सही और पॉजिटिव होगा तो पेड़ पौधे भी सही रहेंगे।

    बार-बार आएगी बाधा

    अगर मनी प्लांट की पत्तियां सूख रही हैं या फिर पीली पड़ रही हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वास्तु में इसका मतलब है कि आने वाले समय में ऐसी चीजें हो सकती हैं जहां पर आपको सब कुछ स्टक लगे। काम अटक सकता है या फिर ग्रोथ रूकने जैसी दिक्कत शुरू हो सकती है। ऐसे में मनी प्लांट की देखभाल करते रहें।

    गलत दिशा में रखने से भी होती है दिक्कत

    वास्तु के अनुसार ये माना जाता है कि मनी प्लांट को हमेशा सही दिशा में ही लगाना चाहिए। नियम के हिसाब से मनी प्लांट को हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। अगर इसे गलत जगह रखा जाता है को इससे मनी प्लांट की हालत खराब होने लगती है और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।

    हटा दें पीली और सूखी पत्तियां

    अगर आपके मनी प्लांट की पत्तियां पीली पड़ रही हैं या सूख रही हैं तो उन्हें ऐसे ही ना छोड़ें। समय रहते इसे हटा दें। हफ्ते में एक बार इसकी सफाई जरूर करें ताकि मनी प्लांट में ऐसी पत्तियों को समय रहते अलग किया जा सके और इसका नकारात्मक प्रभाव ना पड़े।

    डिस्क्लेमर

    इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • 122 दिन तक​​​​​​​ इन 5 राशियों: पर पैसों की बारिश, शनि गोचर से बदलेगी जिंदगी

    122 दिन तक​​​​​​​ इन 5 राशियों: पर पैसों की बारिश, शनि गोचर से बदलेगी जिंदगी

    122 दिन तक​​​​​​​ इन 5 राशियों: पर पैसों की बारिश, शनि गोचर से बदलेगी जिंदगी

    Transit SATURN Rashifal Shani Horoscope 2026 : शनि जल्द ही अपना नक्षत्र बदलने वाले हैं। इस परिवर्तन से कुल 5 राशियों को लाभ मिलने वाला है। जानें 9 अक्टूबर से किन 5 राशियों के दिन बदलेंगे?

    Transit SATURN Rashifal Shani Horoscope 9 October 2026, शनि का राशिफल : आज से 13 दिन बाद शनि नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। 9 अक्टूबर को रात में 7 बजकर 28 मिनट पर शनि अपने ही उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में जाएंगे। इस वक्त शनि रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में गोचर कर रहे हैं। शनि के नक्षत्र परिवर्तन से एक नहीं दो नहीं बल्कि कुल 5 राशियों को लाभ मिलने वाला है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस बदलाव का पॉजिटिव असर वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और तुला राशि वालों पर दिखेगा।

    शनि समय-समय पर अपनी चाल बदलते हैं और इसका असर हर 12 राशियों पर अलग तरीके से पड़ता है। हालांकि इस नक्षत्र परिवर्तन से इन 5 राशियों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है। जानिए आखिर 9 अक्टूबर 2026 से लेकर अगले साल नक्षत्र बदलने तक इन पांचों राशियों की जिंदगी में किस तरह का बदलाव आएगा।

    वृषभ राशि पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर कैसा होगा?

    शनि की बदलती चाल वृषभ राशि वालों को लाभ ही लाभ देगी। जो लोग नौकरी कर रहे हैं उन्हें कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं पैसों से जुड़ी स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होती नजर आएगी। कुल मिलाकर शनि स्थिति पूरी तरह से बदलते दिखेंगे।

    मिथुन राशि पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर कैसा होगा?

    मिथुन राशि वालों को भी शनि के नक्षत्र परिवर्तन से खूब लाभ मिलेगा। इस राशि के जातकों के लिए 9 अक्टूबर के बाद का समय काफी फेवरेवल होगा। पैसों के मामले में फायदा ही होगा। वहीं नौकरी और बिजनेस के मामले में भी चीजें सही दिशा में आगे बढ़ती हुई नजर आएंगी।

    कन्या राशि पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर कैसा होगा?

    कन्या राशि वालों को भी शनि के इस बदलाव से सब कुछ पॉजिटिव होता ही नजर आएगा। नौकरी में प्रमोशन के चांस बन सकते हैं। हो सकता है कि कहीं से अच्छा ऑफर मिल जाए। बिजनेस से जुड़े लोगों को अब फायदा मिलना शुरू होगा। बस मन पॉजिटिव बातों से ही भरा रहे। कोशिश करें कि इस दौरान मन में किसी भी तरह का नेगेटिव ख्याल ना आए।

    मकर राशि पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर कैसा होगा?

    मकर राशि वालों के स्वामी ग्रह खुद शनि है तो इस बदलाव का असर इन पर काफी गहरा होने वाला है। शनि जैसे ही अपने नक्षत्र में आएंगे तो मकर राशि वालों को प्रॉपर्टी से संबंधित चीजों में ग्रोथ दिखेगी। वहीं पैसों का अचानक लाभ भी होने की संभावना बनेगी।

    तुला राशि पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर कैसा होगा?

    तुला राशि वालों के लिए भी शनि का ये नक्षत्र परिवर्तन शुभ होने वाला है। अटके हुए काम फिर से शुरू होने लगेंगे और इस बीच कमाई-खर्चे के बीच सही बैलेंस बनता दिखेगा। पर फालतू के खर्चों पर अपनी ओर से कंट्रोल रखने की कोशिश करें।

    डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • पितृ पक्ष 2026​​​​​​​ कब से शुरू होगा? 26 या 27 सितंबर को है पहला श्राद्ध, जानें सभी तिथियां और तर्पण का सही समय

    पितृ पक्ष 2026​​​​​​​ कब से शुरू होगा? 26 या 27 सितंबर को है पहला श्राद्ध, जानें सभी तिथियां और तर्पण का सही समय

    पितृ पक्ष 2026​​​​​​​ कब से शुरू होगा? 26 या 27 सितंबर को है पहला श्राद्ध, जानें सभी तिथियां और तर्पण का सही समय

    Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। इसे श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दौरान किए जाने वाले कर्मों के लिए सही तिथि और समय का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    26 या 27 सितंबर, कब है पहला श्राद्ध?

    पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर से मानी जा रही है। 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है, जिसे श्राद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ हो।

    वहीं, 27 सितंबर 2026 को प्रतिपदा श्राद्ध किया जाएगा। सामान्य रूप से पितृ पक्ष की मुख्य अवधि आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है।

    इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।

    श्राद्ध और तर्पण के लिए कौन सा समय माना जाता है शुभ?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का कार्य दिन के अपराह्न काल में करना उचित माना जाता है। इस दौरान कुतुप और रोहिणी मुहूर्त को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के लिए दिए गए मुहूर्त इस प्रकार हैं:

    • कुतुप मुहूर्त: दोपहर 1:17 बजे से 2:05 बजे तक
    • रोहिणी मुहूर्त: दोपहर 2:05 बजे से 2:53 बजे तक
    • अपराह्न काल: दोपहर 2:53 बजे से शाम 5:15 बजे तक

    स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

    पितृ पक्ष 2026 की पूरी श्राद्ध तिथियां

    • 26 सितंबर, शनिवार: भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध
    • 27 सितंबर, रविवार: प्रतिपदा श्राद्ध
    • 28 सितंबर, सोमवार: द्वितीया श्राद्ध
    • 29 सितंबर, मंगलवार: तृतीया श्राद्ध
    • 30 सितंबर, बुधवार: चतुर्थी श्राद्ध
    • 1 अक्टूबर, गुरुवार: पंचमी श्राद्ध
    • 2 अक्टूबर, शुक्रवार: षष्ठी श्राद्ध
    • 3 अक्टूबर, शनिवार: सप्तमी और अष्टमी श्राद्ध
    • 4 अक्टूबर, रविवार: नवमी श्राद्ध और मातृ नवमी
    • 5 अक्टूबर, सोमवार: दशमी श्राद्ध
    • 6 अक्टूबर, मंगलवार: एकादशी श्राद्ध
    • 7 अक्टूबर, बुधवार: द्वादशी श्राद्ध
    • 8 अक्टूबर, गुरुवार: त्रयोदशी श्राद्ध
    • 9 अक्टूबर, शुक्रवार: चतुर्दशी श्राद्ध
    • 10 अक्टूबर, शनिवार: सर्वपितृ अमावस्या

    श्राद्ध के दिन पंचबलि की भी है परंपरा

    धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध के दिन भोजन तैयार होने के बाद पंचबलि निकालने का उल्लेख मिलता है। इसमें गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं या चींटियों और ब्राह्मण के लिए भोजन का अंश निकालने की परंपरा बताई गई है।

    इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अनाज, तिल, गुड़ या दक्षिणा का दान करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

    पितृ पक्ष में रखें तिथि और समय का ध्यान

    पितृ पक्ष के दौरान जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, सामान्यतः उसी तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। यदि मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या का महत्व माना जाता है।

    धार्मिक अनुष्ठानों की विधि और मुहूर्त अलग-अलग पंचांगों तथा स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ अलग हो सकते हैं। इसलिए महत्वपूर्ण श्राद्ध कर्म करने से पहले स्थानीय विद्वान या पंचांग विशेषज्ञ से जानकारी लेना उचित है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई धार्मिक जानकारी मान्यताओं और पंचांग संबंधी विवरणों पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में तिथि या मुहूर्त में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंचांग या विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • ‘DDR की कॉपी​​​​​​​ के लिए मुझसे रिश्वत मांगी गई’, पुलिस थाने में ही शख्स ने खा लिया जहर

    ‘DDR की कॉपी​​​​​​​ के लिए मुझसे रिश्वत मांगी गई’, पुलिस थाने में ही शख्स ने खा लिया जहर

    ‘DDR की कॉपी​​​​​​​ के लिए मुझसे रिश्वत मांगी गई’, पुलिस थाने में ही शख्स ने खा लिया जहर

    पंजाब के बरनाला में DDR की कॉपी को लेकर एक युवक ने पुलिस पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया और थाने में जहरीला पदार्थ खा लिया। पुलिस ने आरोपों से अलग घटनाक्रम बताते हुए कहा कि DDR पहले ही दर्ज की जा चुकी थी।

    बरनाला पुलिस स्टेशन में युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की कोशिश की।

    युवक ने DDR की कॉपी देने के बदले पुलिसकर्मी पर पैसे मांगने का आरोप लगाया।

    पंजाब में हाल के दिनों में आत्महत्या की कोशिश और मौत के 2 मामले सामने आए।

    चंडीगढ़: पंजाब के बरनाला जिले में एक युवक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए थाने के भीतर ही जहरीला पदार्थ खा लिया। युवक का आरोप है कि उसकी आग से क्षतिग्रस्त कार के मामले में डेली डायरी रिपोर्ट यानी कि DDR की कॉपी देने के लिए एक पुलिसकर्मी उससे पैसे मांग रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना धनोला पुलिस स्टेशन की है। जहरीला पदार्थ खाने के बाद युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

    17 दिन पहले कार में लगी थी आग

    युवक की पहचान बरनाला जिले के भठलां गांव निवासी जॉबनप्रीत सिंह के रूप में हुई है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में जॉबनप्रीत ने कथित रूप से बताया कि करीब 17 दिन पहले उसकी कार में आग लग गई थी। उसने बताया कि कार के नुकसान का बीमा क्लेम लेने के लिए उसे पुलिस से DDR की कॉपी की जरूरत थी। जॉबनप्रीत ने बताया कि इसके लिए वह कई बार पुलिस स्टेशन गया।

    पुलिसकर्मी पर पैसे मांगने का आरोप

    जॉबनप्रीत ने आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन में तैनात एक अधिकारी ने DDR की कॉपी देने के बदले उससे रिश्वत मांगी। उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी ने उस पर ही कार में जानबूझकर आग लगाने का आरोप लगा दिया। जॉबनप्रीत ने अपनी शिकायत में संगरूर के बलियां गांव में चल रहे जमीन विवाद का भी जिक्र किया। उसने इस मामले में एक पटवारी का नाम लेते हुए उसके खिलाफ भी आरोप लगाए।

    ‘हमने उसी दिन DDR दर्ज कर दी थी’

    वहीं, पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि जॉबनप्रीत जमीन विवाद के कारण तनाव और अवसाद में था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जॉबनप्रीत बुधवार को पुलिस स्टेशन आया था। पुलिस ने उसी दिन उसकी क्षतिग्रस्त कार से संबंधित DDR दर्ज कर दी थी और उसे उसकी कॉपी अगले दिन लेने के लिए कहा गया था। पुलिस के मुताबिक, गुरुवार सुबह जॉबनप्रीत DDR की कॉपी लेने धनोला पुलिस स्टेशन पहुंचा।

    ‘वीडियो कॉन्फ्रेंस में व्यस्त थे SHO’

    पुलिस ने कहा कि जब जॉबनप्रीत थाने पहुंचा उस समय SHO वीडियो कॉन्फ्रेंस में व्यस्त थे और उन्होंने जॉबनप्रीत को इंतजार करने के लिए कहा। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, इसके बाद जॉबनप्रीत ने पुलिस स्टेशन के अंदर ही कोई जहरीला पदार्थ खा लिया। उसकी हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। (PTI से इनपुट्स के साथ)

    डिस्क्लेमर: प्रशिक्षित और मान्यता प्राप्त मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) परामर्शदाताओं से परामर्श और सहायता प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 या 1800-891-4416 डायल करें।

  • चंडीगढ़ में हेड कॉन्स्टेबल को किसने गोली मारी? बयान बदलने पर बेटा गिरफ्तार, घर में पुलिसकर्मी पत्नी भी थी मौजूद .

    चंडीगढ़ में हेड कॉन्स्टेबल को किसने गोली मारी? बयान बदलने पर बेटा गिरफ्तार, घर में पुलिसकर्मी पत्नी भी थी मौजूद .

    चंडीगढ़ में हेड कॉन्स्टेबल को किसने गोली मारी? बयान बदलने पर बेटा गिरफ्तार, घर में पुलिसकर्मी पत्नी भी थी मौजूद .

    चंडीगढ़। सेक्टर-22 स्थित सरकारी क्वार्टर में हेड कॉन्स्टेबल 42 वर्षीय नितिन के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के समय घर में नितिन की पत्नी मोनिका, जोकि चंडीगढ़ पुलिस में ही तैनात हैं और उनका 19 वर्षीय बेटा अरमान मौजूद थे।

    बार-बार बयान बदलने की वजह से पुलिस ने अरमान को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन वारदात के 6 घंटे बाद भी यह सवाल बना है कि आखिर नितिन को गोली किसने मारी। पुलिस को मौका-ए-वारदात से एक देसी कट्टा भी बरामद हुआ है।

    वारदात शुक्रवार सुबह 9 बजे हुई। गोली चलने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। सेक्टर-17 थाना पुलिस मौके पर पहुंची तो नितिन घायल हालत में बेड पर लेटे मिले। उन्हें जब अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    शुरुआती पूछताछ में अरमान ने पुलिस को बताया कि किसी व्यक्ति ने उसके पिता को गोली मारी और मौके से फरार हो गया। पुलिस ने जब उससे घटना के बारे में दोबारा पूछताछ की तो उसके बयान में विरोधाभास सामने आए।

    पुलिस को उसके बयान पर संदेह हुआ। इसके साथ हत्या के दौरान उसने शोर भी नहीं मचाया। बयानों में विरोधाभास होने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ये पता लगाने की कोशिश में है कि आखिर किसने पुलिसकर्मी को गोली मारी।

    पुलिस अरमान से लगातार पूछताछ कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, देसी कट्टे और परिवार के सदस्यों के बयानों को मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। नितिन अकाउंट ब्रांच पुलिस हेडक्वार्टर सेक्टर 9 में तैनात थे।

    एक पड़ोसी ने बताया कि नितिन के घर कुछ दिनों से विवाद चल रहा था। शुक्रवार सुबह भी घर से झगड़े और शोर की आवाजें सुनाई दे रही थीं। इसके कुछ देर बाद गोली चलने की आवाज आई।

    एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि पुलिस ने इलाके को घेरकर मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। एक देसी कट्टा मिला है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस फिलहाल बेटे से पूछताछ और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

    बेटे ने थार से दो शिक्षकों को कुचला था

    25 फरवरी की रात कलाग्राम लाइट प्वाॅइंट पर अरमान ने अपनी तेज रफ्तार थार से बाइक सवार दो शिक्षकों को रौंद दिया। शिक्षकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान 46 वर्षीय गुलशेर अली और 44 वर्षीय अब्दुल सुभान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के निवासी थे।

    वारदात के बाद अरमान मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने थार के नंबर के आधार पर बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया था। इसी मामले में वह जेल गया था और फिलहाल जमानत पर था।

  • मुख्यमंत्री से मिलना चाहती है आजमगढ़ हत्याकांड के आरोपी अरविंद की भतीजी, पुलिस ने घर कर दिया है सील.

    मुख्यमंत्री से मिलना चाहती है आजमगढ़ हत्याकांड के आरोपी अरविंद की भतीजी, पुलिस ने घर कर दिया है सील.

    मुख्यमंत्री से मिलना चाहती है आजमगढ़ हत्याकांड के आरोपी अरविंद की भतीजी, पुलिस ने घर कर दिया है सील.

    शंभूपुर गांव में घटना के तीसरे दिन अरविंद सिंह की बड़ी भतीजी नीतू सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि उनसे न्याय चाहिए।

    नीतू ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में उनके पिता की हत्या के बाद आरोपितों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई नहीं हुई, जैसी उनके परिवार के साथ हुई। नीतू ने कहा कि घटना के बाद परिवार को गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

    उनका आरोप है कि आरोपित पक्ष के लोग अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि उनका परिवार असहाय होकर घर से दूर रहने को मजबूर है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर पूरे मामले में जवाब मांगने की बात कही।

    पुलिस ने घर कर दिया सील

    नीतू ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने घर सील कर दिया है, जिससे दादी के कपड़े और जरूरी सामान अंदर ही रह गए हैं। परिवार को जर्जर पुराने मकान में रहने की व्यवस्था पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।

    वहीं इस संबंध में एसएसपी का कहना है कि घटना के बाद परिवार इधर-उधर था। मकान को सील नहीं किया गया है, केवल घटना वाले कमरे को सील किया गया। जल्द ही क्राइम सीन रीक्रिएशन कराने के बाद उसे भी खोल दिया जाएगा। परिवार के सभी लोग मकान में आ जा सकते है।

    क्या है पूरा मामला

    अहरौला के शंभूपुर गहजी गांव में मंगलवार की शाम पूजा-पाठ के दौरान विवाद आख‍िरकार पांच मौतों से शांत हो सका। इस वारदात आरोपी ने अपनी पत्नी और पूजा करा रहे दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी। तीन लोगों की हत्या के बाद आरोपित अपने आठ वर्षीय पुत्र शौर्य, नौ वर्षीय पुत्री परी और छह माह की बच्ची को लेकर मकान के एक कमरे में बंद हो गया।

    सूचना पर डीआइजी सुनील कुमार सिंह, एसएसपी डॉ. अनिल कुमार समेत छह थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और मकान को चारों तरफ से घेर लिया। देर शाम तक पुलिस आरोपित से दरवाजा खुलवाने का प्रयास करती रही। बच्चों के कमरे में होने के कारण पुलिस बेहद सतर्कता से कार्रवाई कर रही थी। रात दस बजे तक आरोपित घर के बाहर नहीं निकला।

    पुरानी रंजिश की जांच कर रही पुलिस

    इसके बाद पुलिस मुठभेड़ में अरविंद भी मारा गया। तीन हत्याओं के पीछे परिवार की पुरानी परिस्थितियां भी चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अरविंद सिंह के बड़े भाई सुनील सिंह उर्फ गुड्डू की वर्ष 2018 में गांव के मंदिर में पूजा के बाद आयोजित भंडारे के दौरान हत्या कर दी गई थी। सुनील सुरक्षा का काम करता था, जबकि अरविंद कोई नियमित काम नहीं करता था।

    नशे का आदी था अरविंद

    लोगों ने बताया कि अरविंद नशे का लत भी था और घटना वाले दिन भी वह नशे में था। लोगों के अनुसार, उसकी नशे की लत छुड़ाने और घर में शांति के लिए ही पांच दिवसीय पूजा का आयोजन कराया जा रहा था। अरविंद के बड़े भाई सुनील की पत्नी ममता दिल्ली में किसी कंपनी में काम करती हैं। उनकी दोनों बेटियां अपनी दादी शमला देवी के साथ शंभूपुर गहजी गांव में रहती थीं।

  • विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बेटे सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने का आरोप; पत्नी शालू की भूमिका पर भी जांच जारी.

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बेटे सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने का आरोप; पत्नी शालू की भूमिका पर भी जांच जारी.

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बेटे सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने का आरोप; पत्नी शालू की भूमिका पर भी जांच जारी.

    कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जांच के दौरान बड़ा मोड़ सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी के बेटे सुब्रत मिनोचा पर अपने पिता की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जांच में करीब 40 लाख रुपये के कर्ज और संपत्ति को लेकर आशंका को हत्या की साजिश के पीछे की वजहों में शामिल बताया जा रहा है।

    मामले में शुरुआत में विनीत मिनोचा की बहू शालू को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि, पुलिस की मौजूदा जांच में उसके खिलाफ अब तक पुष्ट सबूत सामने नहीं आने की बात कही गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शालू की भूमिका को लेकर जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

    करीब तीन महीने पहले रची गई थी साजिश

    पुलिस जांच के अनुसार, सुब्रत पर आरोप है कि उसने अपने पिता की हत्या की योजना घटना से कई महीने पहले बनाई थी। जांच में सामने आया कि उस पर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज था और हर महीने बड़ी रकम की किस्त चुकानी पड़ती थी।

    पुलिस के मुताबिक, सुब्रत को यह भी आशंका थी कि उसके पिता अपनी संपत्ति किसी दूसरी महिला के नाम कर सकते हैं। इसी आर्थिक दबाव और संपत्ति को लेकर कथित चिंता के बीच उसने हत्या की साजिश रची।

    कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सुब्रत ने पिता की हत्या के लिए अपने पुराने कर्मचारी विशाल गौतम से संपर्क किया था। पुलिस के अनुसार, विशाल ने पूछताछ में सुब्रत पर हत्या के लिए रकम देने का आरोप लगाया है। इस दावे को पुलिस इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से भी जांच रही है।

    डुप्लीकेट चाबी से घर में पहुंचने का आरोप

    जांच में सामने आया कि घर की डुप्लीकेट चाबी तैयार कराई गई थी।

  • साहिल वाकोडे केस में पुलिस के लिए सिरदर्द बना iPhone 17, 47 मिनट का राज तलाश रही क्राइम ब्रांच..

    साहिल वाकोडे केस में पुलिस के लिए सिरदर्द बना iPhone 17, 47 मिनट का राज तलाश रही क्राइम ब्रांच..

    साहिल वाकोडे केस में पुलिस के लिए सिरदर्द बना iPhone 17, 47 मिनट का राज तलाश रही क्राइम ब्रांच..

    महाराष्ट्र के IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत की जांच में उसका iPhone 17 पुलिस के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. फोन पैटर्न लॉक है और इसका पैटर्न किसी को पता नहीं है. ऐसे में पुलिस अभी फोन का डेटा नहीं निकाल पा रही है.

    पुलिस को उम्मीद है कि अगर फोन खुल गया तो जांच में कई अहम बातें सामने आ सकती हैं. खासकर 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान साहिल ने फोन पर क्या सर्च किया था, इसकी जानकारी मिल सकती है. यही वजह है कि क्राइम ब्रांच फोन को जांच की अहम कड़ी मान रही है.

    परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक 47 मिनट में क्या हुआ?

    मामला 18 सितंबर का है. उस दिन परीक्षा के दौरान साहिल पर मोबाइल इस्तेमाल करने का आरोप लगा था. CCTV फुटेज में दिखा कि प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने साहिल को परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा था. रिकॉर्ड के मुताबिक साहिल करीब 12:38 बजे परीक्षा हॉल से बाहर निकला. इसके बाद करीब 1:25 बजे वह अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा. यानी परीक्षा हॉल से हॉस्टल पहुंचने के बीच करीब 47 मिनट का समय था.

      अब पुलिस इसी 47 मिनट की पूरी कहानी समझने में जुटी है. साहिल इस दौरान कहां था और उसके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है. इसके लिए परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक के रास्ते में लगे सभी CCTV कैमरों की फुटेज देखी जा रही है. पुलिस इन फुटेज के जरिए साहिल की पूरी गतिविधि समझने की कोशिश कर रही है.

       iPhone 17 खुल नहीं रहा, जांच में आई रुकावट

      साहिल का फोन iPhone 17 है और वह पैटर्न लॉक से बंद है. फोन का पैटर्न पुलिस को पता नहीं है. इसके अलावा फोन का डेटा एन्क्रिप्टेड है. पुलिस के पास मौजूद फॉरेंसिक टूल भी इस नए मॉडल का डेटा नहीं निकाल पा रहे हैं. ये टूल पुराने iPhone मॉडल से डेटा निकाल सकते हैं, लेकिन नए मॉडल में दिक्कत आ रही है. अब क्राइम ब्रांच ऐसी दूसरी एजेंसियों से मदद लेने पर विचार कर रही है, जिनके पास एडवांस डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक है.

       लैपटॉप भी पुलिस ने जब्त किया

      जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने साहिल का लैपटॉप भी जब्त कर लिया है. इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. इसके साथ ही परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी देखी जा रही है. मामले में सबसे पहले पवई पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई थी. इसके बाद जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई. अब तक 20 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें छात्र और संस्थान के कर्मचारी शामिल हैं.

      फिलहाल क्राइम ब्रांच की जांच का फोकस साहिल के लॉक iPhone, लैपटॉप और CCTV फुटेज पर है. पुलिस खास तौर पर परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक के उन 47 मिनट की पूरी कहानी पता करने में जुटी है.

    • जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी की हत्या का खुलासा, पति और बेटे ने गला घोंटकर कुएं में फेंका शव.

      जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी की हत्या का खुलासा, पति और बेटे ने गला घोंटकर कुएं में फेंका शव.

      जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी की हत्या का खुलासा, पति और बेटे ने गला घोंटकर कुएं में फेंका शव.

      राजस्थान की राजधानी जयपुर में करीब डेढ़ साल से लापता महिला सीमा उर्फ मिंटू चौधरी की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, मिंटू चौधरी की हत्या किसी गैंग या बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उसके पति और बेटे ने मिलकर की थी। आरोप है कि पारिवारिक विवाद और महिला के अवैध संबंधों को लेकर शक के चलते पिता-पुत्र ने उसकी हत्या कर शव को सूखे कुएं में फेंक दिया था।

      करीब डेढ़ साल बाद 23 सितंबर को मुहाना थाना क्षेत्र के बनखड़ी बालाजी चौराहे के पास एक पुराने कुएं से महिला का शव बरामद हुआ। शव काफी खराब हालत में था। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान सीमा उर्फ मिंटू चौधरी के रूप में की।

      घर में हत्या के बाद कुएं में फेंका शव

      पुलिस जांच के अनुसार, 25 मई 2025 की रात मिंटू चौधरी के पति लालाराम और बेटे हरिओम ने कथित तौर पर घर में ही उसकी हत्या कर दी। आरोप है कि पारिवारिक कलह और महिला के अवैध संबंधों को लेकर शक के चलते दोनों ने उसका गला घोंट दिया।

      इसके बाद शव को कपड़े में लपेटा गया और मिंटू के ही ऑटो में रखकर करीब 4 से 5 किलोमीटर दूर ले जाया गया। वहां शव को एक सूखे कुएं में फेंक दिया गया।

      वारदात के बाद आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की। पिता-पुत्र खुद मुहाना थाने पहुंचे और मिंटू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके अलावा रिश्तेदारों और परिचितों के बीच यह बात फैलाई गई कि मिंटू किसी मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

      पुलिस जांच में खुला हत्या का राज

      मामले की जांच के दौरान पुलिस की स्पेशल टीम और स्थानीय थाना पुलिस ने तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर