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  • विटामिन B12 की कमी शरीर को बना सकती है कमजोर, पाचन पर भी पड़ सकता है असर; जानिए लक्षण और बचाव…

    विटामिन B12 की कमी शरीर को बना सकती है कमजोर, पाचन पर भी पड़ सकता है असर; जानिए लक्षण और बचाव…

    विटामिन B12 की कमी शरीर को बना सकती है कमजोर, पाचन पर भी पड़ सकता है असर; जानिए लक्षण और बचाव…

    क्या आप भी बिना किसी भारी काम के दिनभर थकान, कमजोरी या सुस्ती महसूस करते हैं? अक्सर लोग इसे काम का तनाव या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, कई मामलों में ये लक्षण शरीर में विटामिन B12 की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। विटामिन B12 नसों को स्वस्थ रखने, रेड ब्लड सेल्स बनाने और शरीर के कई जरूरी कार्यों के लिए अहम पोषक तत्व है।

    अपोलो दिल्ली के सर्जन डॉ. अंशुमान कौशल ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर बताया कि कई मरीजों में बी 12 की कमी के लक्षण जैसे थकान, पैरों में झनझनाहट,याददाश्त से जुड़ी समस्याओं, मूड स्विंग के रूप में दिखते हैं जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोगों में विटामिन बी 12 की कमी से पाचन से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है। आइए एक्सपर्ट से समझते हैं कि बी 12 की कमी कैसे पाचन को प्रभावित करती है, इसके मुख्य लक्षण क्या हैं और इससे सुरक्षित तरीके से कैसे बचा जा सकता है?

    विटामिन बी 12 की कमी क्या है?

    विटामिन B12 की कमी (Vitamin B12 Deficiency) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में इस विटामिन का स्तर नॉर्मल स्तर से काफी कम हो जाता है। ये परेशानी सबसे ज्यादा शाकाहारी लोगों में होती है। Harvard Health और National Institutes of Health (NIH) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से केवल पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यही कारण है कि शाकाहारी और विशेषकर वीगन (Vegan) आबादी में इसकी कमी का खतरा 60% से 80% तक देखा गया है।

    विटामिन B12 बॉडी के लिए जरूरी विटामिन है जिसे हमारी बॉडी खुद नहीं बनाती बल्कि इसे डाइट से हासिल किया जाता है। इस विटामिन का काम डीएनए बनाना, स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) का निर्माण करना, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) का सही कामकाज रखना और ऊर्जा का उत्पादन करना होता है। इसकी कमी होने पर बॉडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और बॉडी में कुछ लक्षण दिख सकते हैं।

    बात करें इसकी कमी से होने वाली परेशानियों की तो लगातार थकान होना, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी, संतुलन बिगड़ना, याददाश्त में कमी और कुछ मामलों में एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि लंबे समय तक इस कमी का इलाज न किया जाए, तो नसों को स्थायी नुकसान भी पहुंच सकता है। बॉडी में इस विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए दूध, दही, अंडे, मछली, चिकन और मांस जैसे एनिमल बेस्ड फूड्स का सेवन करें।

    बी 12 की कमी कैसे पाचन को करती है प्रभावित

    विटामिन B12 सीधे तौर पर भोजन को पचाने का काम नहीं करता, लेकिन यह पाचन तंत्र (Digestive System) की कोशिकाओं और नसों को हेल्दी रखने में अहम किरदार निभाता है। बॉडी में इस विटामिन की कमी होने पर पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है। रिसर्च बताती है कि पेट में बनने वाला ‘इंट्रिन्सिक फैक्टर’ (Intrinsic Factor) नाम का प्रोटीन विटामिन B12 को अवशोषित करने के लिए जरूरी होता है। उम्र बढ़ने के साथ या ‘पर्निशियस एनीमिया’ (Pernicious Anemia) के कारण जब यह प्रोटीन कम बनता है, तो शरीर भोजन से B12 सोख नहीं पाता, जिससे गैस, कब्ज और भूख न लगना जैसी पेट की समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

    बॉडी में इस विटामिन की कमी होने से कुछ लोगों को भूख कम लगती है, जी मिचलाना, मतली (Nausea), कब्ज या दस्त, पेट में गैस, पेट फूलना और वजन कम होने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इसके अलावा, विटामिन B12 की कमी आंतों और पेट से जुड़े कुछ रोगों, जैसे Pernicious anemia, Crohn’s disease का कारण बन सकती है, क्योंकि इन स्थितियों में शरीर भोजन से विटामिन B12 को ठीक से अवशोषित (Absorb) नहीं कर पाता। हालांकि पाचन से जुड़ी समस्याएं सिर्फ बी 12 की कमी के कारण नहीं बल्कि और भी कई कारणों की वजह से हो सकती है।

    विटामिन B12 की कमी पूरी करने के लिए क्या खाएं?

    विटामिन B12 की कमी को दूर करने के लिए सबसे अच्छे प्राकृतिक स्रोत पशु-आधारित खाद्य पदार्थ हैं। नॉनवेज खाने वाले लोग अपनी डाइट में मछली, चिकन, अंडे, लाल मांस (Red Meat), दूध, दही और पनीर जैसी चीजें शामिल कर सकते हैं। वहीं, शुद्ध शाकाहारी लोगों के लिए नेचुरल रूप से विटामिन B12 के विकल्प सीमित होते हैं। ऐसे में वे B12-फोर्टिफाइड (Vitamin B12 Fortified) दूध, प्लांट-बेस्ड मिल्क, ब्रेकफास्ट सीरियल्स और न्यूट्रिशनल यीस्ट जैसे फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं। यदि शरीर में B12 की कमी अधिक हो, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन B12 सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।

    क्या फल और सब्जियां विटामिन B12 की कमी पूरी करते हैं?

    सेब, केला, संतरा, आम और ब्लूबेरी जैसे फल विटामिन B12 के स्रोत नहीं हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों में भी यह न के बराबर होता है। शाकाहारी लोगों के लिए केवल फोर्टिफाइड फूड्स जैसे कुछ खास अनाज या प्लांट मिल्क या डेयरी प्रोडक्ट्स  जैसे दूध, पनीर ही बी 12 का एकमात्र जरिया हैं। ये विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता हैं, जो शरीर के समग्र स्वास्थ्य और इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। इसलिए इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए, लेकिन केवल फलों के भरोसे विटामिन B12 की कमी पूरी नहीं किया जा सकता।

  • गुरुग्राम फ्लैट में खौफनाक वारदात, पार्टनर की शादी का सच सामने आने के बाद महिला को जिंदा जलाया गया..

    गुरुग्राम फ्लैट में खौफनाक वारदात, पार्टनर की शादी का सच सामने आने के बाद महिला को जिंदा जलाया गया..

    गुरुग्राम फ्लैट में खौफनाक वारदात, पार्टनर की शादी का सच सामने आने के बाद महिला को जिंदा जलाया गया..

    हरियाणा के गुरुग्राम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक व्यक्ति ने अपनी पार्टनर के ऊपर मिट्टी का तेल (केरोसिन) डालकर उसे जिंदा जला दिया. पीड़िता की इलाज के दौरान मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी सुनील को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से केरोसिन की बोतल भी बरामद की है. आरोपी को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है और मामले की आगे जांच जारी है.

    गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक आरोपी सुनील पिछले डेढ़ साल से पीड़िता के साथ रिलेशनशिप में था. इसी दौरान पीड़िता को पता चला कि सुनील पहले से शादीशुदा है. इस बात को लेकर पीड़िता उससे झगड़ा करने उसकी दुकान पर पहुंची जहां दोनों के बीच बहस हो गई. आरोप है कि इसी बहस के दौरान सुनील ने पीड़िता पर मिट्टी का तेल फेंक दिया.

    मामला सुलझाने के लिए पीड़िता ने गुरुग्राम के सोहना रोड पर एक फ्लैट बुक किया और आरोपी के साथ वहां रात बिताई. अगली सुबह आरोपी ने पीड़िता से कहा कि अब उसके कपड़ों से केरोसिन की गंध जा चुकी होगी, इसलिए उसने वही कपड़े पहन लिए.

    यह भी पढ़ें: दिल्ली छोड़ गुरुग्राम क्यों शिफ्ट हो रहे हैं लोग? कैसे बदल रही है खरीदारों की सोच

    इसी बात को लेकर दोनों में फिर झगड़ा शुरू हो गया और आरोप है कि सुनील ने पीड़िता को आग लगा दी. इसके बाद आरोपी खुद पीड़िता को आर्टेमिस अस्पताल लेकर गया, जहां से उसे सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया. इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई.

    पुलिस को आर्टेमिस अस्पताल से सूचना मिली थी कि जलने की हालत में एक महिला को भर्ती कराया गया है. इलाज के दौरान 27 जुलाई को पीड़िता की मौत हो गई. इसके तीन दिन बाद 30 जुलाई को पीड़िता के एक कजिन ने पुलिस में शिकायत दी.

    शिकायतकर्ता ने बताया कि 22 जुलाई को जब वह पीड़िता से मिला था तब उसने बताया था कि सुनील उर्फ नोनी नाम के व्यक्ति ने उसे जलाया है और धमकी दी है कि अगर उसने शिकायत की तो वह उसकी मां को भी जान से मार देगा. इस शिकायत के आधार पर गुरुग्राम पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी सुनील को गिरफ्तार कर लिया.

  • घर में मेड रखने से पहले हो जाएं सावधान! दिल्ली-NCR का मामला उड़ा देगा होश..

    घर में मेड रखने से पहले हो जाएं सावधान! दिल्ली-NCR का मामला उड़ा देगा होश..

    घर में मेड रखने से पहले हो जाएं सावधान! दिल्ली-NCR का मामला उड़ा देगा होश..

    दिल्ली के द्वारका में घर की सफाई के लिए ऐप से बुलाई गई मेड ने 55 साल के एक शख्‍स पर दुष्‍कर्म का आरोप लगा दिया. इस मेड ने पुलिस में शिकायत का डर दिखाकर इस परिवार से दो लाख रुपए हड़प लिए. पुलिस ने इस मेड को अरेस्‍ट कर सलाखों के पीछे भेज दिया है.

    दुष्‍कर्म का आरोप लगाकर 5 लाख रुपए की डिमांड करने वाली मेड को दिल्‍ली पुलिस ने अरेस्‍ट किया है. (प्रतीकात्‍मक AI इमेज)

    दिमाग हिला देने वाली यह घटना भले ही दिल्‍ली से जुड़ी है, लेकिन सभी के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. जी हां, यदि आप भी घर में अकेले रहते हैं और घरेलू काम के लिए मे‍ड की सर्विस लेते हैं तो सावधान हो जाइए. कहीं ऐसा ना हो कि ‘पूजा’ आपके साथ भी कांड न कर जाए.

    दिल्‍ली के द्वारका में रहने वाले 55 वर्षीय एक शख्‍स के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. गनीमत रही कि इस शख्‍स के बेटे ने समय रहते समझादारी दिखा दी और पूरे घटना की वीडियो बनाकर पुलिस को दे दी. नहीं तो इस पूरे परिवार की इज्‍जत तो सरेआम नीलाम तो होती ही, ऑनलाइन बुकिंग से आई लाखों रुपए ऐठने में कामयाब हो जाती.

    दरअसल, यह पूरा मामला दिल्‍ली के द्वारका इलाके का है. इस इलाके में रहने वाले एक शख्‍स ने ऑनलाइन एप के जरिए एक मेड को घरेलू काम के लिए बुलाया था. घर में कुछ देर काम करने के बाद इस मेड ने अचानक चिल्‍लाना शुरू कर दिया. कोई कुछ समझता इससे पहले उसने 55 साल के इस शख्‍स पर दुष्‍कर्म का आरोप लगा दिया.

    दुष्‍कर्म का आरोप सुनते ही पूरे परिवार के हाथपैर फूल गए. मेड यही पर नहीं रुकी, उसने पुलिस को बुलाने की धमकी देना शुरू कर दिया. पुलिस की बात कहते हुए उसने किसी को कॉल करना भी शुरू कर दिया. वहीं पुलिस की बात सुनकर पीडि़त शख्‍स मेड के सामने लगभग गिड़गिड़ाने लगा. पीडि़त शख्‍स को पूरी तरह से अपने काबू में आता देख मेड ने अपना अलगा दांव चला.

    मेड ने पुलिस में शिकायत न करने के एवज में पांच लाख रुपए की डिमांड रख दी. इसी बीच, पीडि़त शख्‍स के बेटे ने चुपके से मेड की वीडियो बना ली. इस वीडियो में मेड की दुष्‍कर्म की धमकी देकर ब्‍लैकमेल करते हुए दिख रही थी. साथ ही, रुपए लेते हुए दिख रही थी. वीडियो रिकार्ड करने के बाद पीडि़त शख्‍स के बेटे ने पुलिस को कॉल कर घटना की पूरी जानकारी थी.

    जांच में पता चला कि मेड ने पुलिस को कॉल की ही नहीं था. वह पीडि़त को डराने के लिए पुलिस को कॉल करने का ड्रामा कर रही थी. उसका मंसूबा सिर्फ पीडि़त परिवार को डराने और ब्लैकमेल करने का था. मंगलवार को हुई इस घटना के मामले में पुलिस ने बुधवार को आरोपी मेड को अरेस्‍ट कर लिया है. उसके कब्‍जे से ब्लैकमेलिंग के जरिए हासिल किए गए 2 लाख रुपए भी रिकवर किए है. पुलिस की जांच में सामने आया कि महिला पहले भी इस घर सफाई के लिए आ चुकी थी. फिलहाल इस महिला को कोर्ट ने ज्यूडिशल कस्टडी में भेज दिया गया है.

  • सिर्फ रोटी गिनने से नहीं घटता वजन! जानिए पेट निकलने की असली वजह और आम गलतियां..

    सिर्फ रोटी गिनने से नहीं घटता वजन! जानिए पेट निकलने की असली वजह और आम गलतियां..

    सिर्फ रोटी गिनने से नहीं घटता वजन! जानिए पेट निकलने की असली वजह और आम गलतियां..

    बढ़ता पेट और लटकती तोंद आज कई लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है. इसे कम करने के लिए कोई जिम जॉइन करता है, कोई सुबह-शाम वॉक शुरू कर देता है, तो कई लोग सबसे पहले अपनी थाली छोटी कर देते हैं. जो पहले 5-6 रोटी खाते थे, वे खुद को 2 रोटी तक सीमित कर लेते हैं. लेकिन कई बार महीनों बाद भी पेट वैसा का वैसा ही रहता है. ऐसे में मन में सवाल आना बिल्कुल स्वाभाविक है, “मैं तो सिर्फ 2 रोटी खाता हूं, फिर भी पेट क्यों निकल रहा है?” अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो इसका जवाब सिर्फ रोटी की संख्या में नहीं, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल में छिपा हो सकता है.

    सिर्फ रोटी कम करने से पेट कम नहीं होता

    बहुत से लोग मान लेते हैं कि पेट बढ़ने की सबसे बड़ी वजह रोटी है. इसलिए सबसे पहले रोटी कम कर देते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि वजन और पेट बढ़ना सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आप कितनी रोटी खाते हैं. बल्कि, पूरे दिन में शरीर कितनी कैलोरी ले रहा है और कितनी खर्च कर रहा है, यह ज्यादा अहम है.

    अगर आप दो रोटी ही खाते हैं, लेकिन पूरा दिन कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और शरीर की एक्टिविटी बहुत कम है, तो कैलोरी खर्च नहीं हो पाएगी. ऐसी स्थिति में पेट की चर्बी कम होने की बजाय बढ़ भी सकती है. रोज कम से कम 30 से 45 मिनट की वॉक या दूसरी फिजिकल एक्टिविटी जरूरी मानी जाती है.

    रोटी कम, लेकिन बाकी चीजें ज्यादा?

    कई लोग रोटी तो दो कर देते हैं, लेकिन दिनभर चाय के साथ बिस्किट, नमकीन, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक या तली हुई चीजें खाते रहते हैं. ऐसे में कुल कैलोरी पहले जितनी या उससे ज्यादा हो जाती है. इसलिए सिर्फ रोटी गिनने से फायदा नहीं होगा, पूरी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है.

    प्लेट में प्रोटीन कम है तो भी दिक्कत

    अगर आपकी प्लेट में सिर्फ रोटी और सब्जी है, लेकिन दाल, दही, पनीर, अंडा या दूसरी प्रोटीन वाली चीजें कम हैं, तो जल्दी भूख लग सकती है. इससे बार-बार कुछ न कुछ खाने की आदत बन जाती है, जो वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है.

    यही नहीं, अगर रोज पर्याप्त नींद नहीं मिलती या तनाव लगातार बना रहता है, तो इसका असर शरीर के हार्मोन पर पड़ सकता है. कई रिसर्च बताती हैं कि ऐसी स्थिति में पेट के आसपास चर्बी जमा होने की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए सिर्फ खाना कम करना काफी नहीं, अच्छी नींद और तनाव पर कंट्रोल भी उतना ही जरूरी है.

    उम्र बढ़ने के साथ लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी

    जैसे जैसे उम्र बढ़ती है शरीर की कैलोरी खर्च करने की रफ्तार धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसलिए पहले जितना खाना खाते थे, वही अब वजन बढ़ाने की वजह बन सकता है. ऐसे में सिर्फ रोटी कम करने की बजाय पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.

    तो अगर आप सच में पेट कम करना चाहते हैं, तो सिर्फ रोटी गिनना छोड़िए. संतुलित डाइट लें, प्रोटीन और फाइबर बढ़ाएं, रोज एक्टिव रहें, अच्छी नींद लें और बार-बार स्नैकिंग से बचें. याद रखिए, पेट सिर्फ दो रोटी से नहीं बढ़ता, बल्कि कई छोटी-छोटी आदतों का नतीजा होता है.

  • पत्नी की हत्या के बाद कंधे पर लाश लेकर घूमता रहा पति, लव मैरिज की कहानी का खौफनाक अंत..

    पत्नी की हत्या के बाद कंधे पर लाश लेकर घूमता रहा पति, लव मैरिज की कहानी का खौफनाक अंत..

    पत्नी की हत्या के बाद कंधे पर लाश लेकर घूमता रहा पति, लव मैरिज की कहानी का खौफनाक अंत..

    राजस्थान के अजमेर जिले से एक सनसनीखेज हत्याकांड का मामला सामने आया है. एक युवक ने घरेलू विवाद के अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी. इसके बाद लाश को कंधे पर लादकर घूमता रहा. जब लोगों ने युवक के कंधे पर संदिग्ध बॉडी देखी तो पुलिस को सूचना दी. जानकारी के मुताबिक, महिला ने युवक के साथ एक पति को छोड़कर दूसरी शादी की थी. महिला के पहले पति से एक बच्ची भी है. पुलिस ने पत्नी की हत्या करने वाले आरोपी पति को गिरफ्तार कोर्ट में पेश किया, जहां से न्यायिक हिरासत में आरोपी को जेल भेज दिया गया है.

    24 जून की रात की है घटना

    पुलिस के अनुसार, घटना अजमेर जिले के आदर्श नगर थाना क्षेत्र की 24 जून रात की है. थाना प्रभारी अनिल आदर्श ने घटना के बारे में बताया कि 24 जून की रात में करीब साढ़े तीन बजे सूचना मिली कि एक व्यक्ति एक बॉडी को कंधे पर लेकर परबतपुरा चौराहे पर बैठा है. जब पुलिस ने पता किया तो पति-पत्नी में झगड़े की बात सामने आई.

    आरोपी कानाराम भील और उसकी पत्नी माया भील के साथ किसी बात को लेकर विवाद किया. देखते ही देखते कहासुनी इतनी बढ़ गई कि आरोपी ने पहले प्लास्टिक के पाइप से पत्नी पर हमला कर दिया. गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब माया भील अपनी जान बचाने के लिए भागने लगी तो आरोपी ने उसका पीछा कर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी.

    शव को कंधे पर रखा घूमता रहा पति

    वारदात के बाद आरोपी पत्नी के शव को कंधे पर रखकर परबतपुरा बायपास क्षेत्र में घूमता रहा. संदिग्ध हालत में शव लेकर घूमते युवक को देखकर राहगीरों ने तुरंत आदर्श नगर थाना पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपी अपने बच्चे को साथ लेकर वहां से फरार हो गया. जांच में सामने आया कि काना भील और माया भील का विवाह कुछ माह पहले ही हुआ था. दोनों के बीच अक्सर घरेलू विवाद होता था. मृतका के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

    पुलिस ने बताया कि शराब में मियां-बीवी का आपस में झगड़ा करते रहते थे. उस दिन भी दोनों में किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था. पति ने शराब पी रखी थी. पहले उसने प्लास्टिक के पाइप से पत्नी पर हमला किया. जब पत्नी जान बचाने के लिए वहां से भागी तो दौड़कर उसने पकड़ लिया और गला दबाकर हत्या कर दी. मृतका का नाम माया है. यह भीलवाड़ा के एक पालड़ी गांव की रहने वाली थी. जांच में पता चला कि इसकी पहले से भी शादी हो रखी थी. कानाराम के साथ दोबारा लव मैरिज करके रह रही थी. मृतका की पहले पति से एक बच्ची है. हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.

  • बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्मार्टफोन का क्या असर पड़ता है? नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे…

    बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्मार्टफोन का क्या असर पड़ता है? नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे…

    बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर स्मार्टफोन का क्या असर पड़ता है? नई स्टडी में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे…

    आज के समय में स्मार्टफोन हर उम्र के लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. खासकर बुजुर्गों के लिए यह तकनीक अपने परिवार और दुनिया से जुड़े रहने का एक आसान जरिया है, लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि अगर स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा या आदत के तौर पर किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर उल्टा असर भी डाल सकता है. 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में इसके कारण डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है.

    क्या कहती है नई स्टडी?

    यह स्टडी रटगर्स स्कूल ऑफ सोशल वर्क के प्रोफेसर चिएन-चुंग हुआंग के नेतृत्व में की गई और इसे जेएमआईआर एजिंग नाम की जर्नल में प्रकाशित किया गया है, इसमें चीन के ग्वांगझू शहर के 87 कम्युनिटीज में रहने वाले 2,585 बुजुर्ग लोगों को शामिल किया गया. इन लोगों से उनके स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की आदतों, सोशल लाइफ और रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली गई साथ ही उनकी उम्र, शिक्षा, आय और पारिवारिक स्थिति जैसे आंकड़े भी इकट्ठा किए गए.

    डिप्रेशन से जुड़े सबसे बड़े कारण कौन से पाए गए?

    शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की कि कौन-कौन से कारण डिप्रेशन से सबसे ज्यादा जुड़े हुए हैं. इसमें सबसे बड़ा कारण कम सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना पाया गया. इसके बाद स्मार्टफोन की लत या बहुत ज्यादा इस्तेमाल को दूसरा बड़ा कारण माना गया. जिन लोगों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा और आदतन पाया गया, उनमें डिप्रेशन के लक्षण भी ज्यादा देखे गए.

    क्या स्मार्टफोन हमेशा नुकसान पहुंचाता है?

    स्टडी में यह भी पाया गया कि फोन का इस्तेमाल हमेशा नुकसानदायक नहीं होता. अगर बुजुर्ग लोग वीडियो कॉल, मैसेजिंग या फोटो शेयरिंग के जरिए अपने परिवार और दोस्तों से जुड़े रहते हैं तो यह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है. समस्या तब शुरू होती है जब फोन सिर्फ अकेले बैठकर वीडियो देखने, स्क्रॉल करने या गेम खेलने का जरिया बन जाता है, इससे व्यक्ति धीरे-धीरे असल दुनिया के लोगों से दूरी बनाने लगता है.

    फोन का गलत इस्तेमाल कैसे बढ़ाता है अकेलापन?

    एक शोधकर्ता ने बताया कि जब कोई बुजुर्ग व्यक्ति अपने फोन को असली सामाजिक जीवन की जगह इस्तेमाल करने लगता है तो यह डिप्रेशन का एक बड़ा संकेत हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि फोन ही बीमारी की वजह है, बल्कि यह कि फोन का गलत इस्तेमाल सामाजिक दूरी को बढ़ा सकता है.

    किन बुजुर्गों में ज्यादा देखा गया जोखिम?

    स्टडी में यह भी सामने आया कि कुछ खास समूहों में डिप्रेशन का खतरा ज्यादा देखा गया. जैसे वे बुजुर्ग पुरुष जिनकी शिक्षा कम थी और जो स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल करते थे. इनके लिए डिजिटल दुनिया को समझना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए वे अक्सर सिर्फ मनोरंजन वाले कंटेंट पर निर्भर हो जाते हैं और धीरे-धीरे अकेलेपन में चले जाते हैं. वहीं दूसरी तरफ, ज्यादा पढ़े-लिखे और अच्छे आर्थिक हालात वाले बुजुर्ग भी अगर फोन की लत में फंस जाते हैं तो उनके लिए भी अकेलापन और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है.

    क्या स्मार्टफोन और डिप्रेशन का रिश्ता दोतरफा है?

    शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह जरूरी नहीं है कि ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल सीधे डिप्रेशन का कारण हो. यह भी हो सकता है कि जो लोग पहले से अकेलापन या उदासी महसूस कर रहे हों, वे ज्यादा फोन का इस्तेमाल करने लगें.  यानी यह रिश्ता एक चक्र की तरह हो सकता है, जहां दोनों चीजें एक-दूसरे को बढ़ाती हैं.

  • बीच सड़क महिला पर बरसीं चप्पलें-थप्पड़, बीमार पति बेबस देखता रहा; कानपुर की घटना चर्चा में..

    बीच सड़क महिला पर बरसीं चप्पलें-थप्पड़, बीमार पति बेबस देखता रहा; कानपुर की घटना चर्चा में..

    बीच सड़क महिला पर बरसीं चप्पलें-थप्पड़, बीमार पति बेबस देखता रहा; कानपुर की घटना चर्चा में..

    कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र में बीच सड़क पर एक महिला के साथ सरेआम बर्बरता की गई. महिला को उसके ही देवर और उसके दोस्त ने चप्पलों और थप्पड़ों से बुरी तरह पीटा और उसके कपड़े तक फाड़ दिए. इस घटना का वीडियो बुधवार दोपहर करीब 3 बजे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में कार्रवाई की गई. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो महज 25 सेकेंड का है, वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी किस कदर हैवानियत पर उतारू हैं. सरेराह हुई इस मारपीट और बेइज्जती के कारण महिला बेसुध होकर सड़क पर ही गिर पड़ी.

    15 साल पहले हुई शादी, देवर रखता है गंदी नजर

    मूल रूप से कानपुर देहात की रहने वाली पीड़िता की शादी 15 साल पहले बर्रा 8 के रहने वाले एक फर्नीचर कारीगर से हुई थी. पीड़िता का आरोप है कि उसके ससुराल के पास रहने वाला संदीप सचान नाम का युवक उस पर बुरी नजर रखता था. जब भी महिला इसका विरोध करती, तो ससुराल वाले संदीप का ही साथ देते और महिला से झगड़ा करते थे. रोज-रोज के इन झगड़े से तंग आकर महिला ने करीब डेढ़ साल पहले अपना ससुराल छोड़ दिया था और किराए के मकान में रहने लगी थी.

    बीमार पति को देखने ससुराल लौटी तो महिला पर किया हमला

    जानकारी के अनुसार पिछले 15 दिनों से उसके पति की तबीयत काफी खराब चल रही थी. पति की देखभाल करने के इरादे से मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे वह अपनी तीन साल की बेटी और पति के साथ वापस ससुराल (बर्रा 8) गई थी. लेकिन वहां पहुंचते ही ससुराल वालों ने हंगामा शुरू कर दिया. इसी बीच उसका देवर और इलाके का ही रहने वाला हेमंत सचान वहां आ गए और उन्होंने मारपीट शुरू कर दी. हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने विरोध करने पर महिला के कपड़े फाड़ दिए और उसे घर से बाहर निकाल दिया.

    बाइक पर सवार हो थाने जा रही थी महिला, तभी किया हमला

    ससुराल में हुई बदसलूकी के बाद पीड़िता अपने पति और 3 साल की मासूम बेटी के साथ बाइक पर सवार होकर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने जा रही थी. तभी रास्ते में देवर ने उन्हें रोक लिया और महिला को लगातार दो थप्पड़ जड़ दिए. इसी बीच वहां संदीप सचान भी पहुंच गया. इसके बाद दोनों ने मिलकर बीच सड़क पर तांडव मचा दिया. आरोपियों ने महिला को चप्पलों से पीटना शुरू कर दिया. जब बीमार पति ने अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उस पर भी थप्पड़ों की बरसात कर दी.

    सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

    इस धक्का-मुक्की में उनकी बाइक गिर गई, जिससे उनकी 3 साल की मासूम बेटी भी घायल हो गई. बेरहमी से हुई इस पिटाई के बाद महिला सड़क पर बेहोश होकर गिर गई. इसी दौरान वहां मौजूद किसी शख्स ने इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया.

    बुधवार को जब यह वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, तो कानपुर की गुजैनी पुलिस तुरंत हरकत में आई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की.

    दोनों आरोपी गिरफ्तार, FIR दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

    डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि थाना गुजैनी क्षेत्रान्तर्गत सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में एक महिला अपने पति एवं छोटे बच्चे के साथ बाइक से जाती हुई दिखाई दे रही है. रास्ते में उसका देवर हेमंत शर्मा और उसका मित्र संदीप ने महिला, उसके पति एवं बच्चे के साथ मारपीट की. घटना का संज्ञान लेते हुए थाना गुजैनी में पीड़िता की तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर दोनों नामजद अभियुक्तों हेमंत शर्मा और संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है.

  • फरार होने की कोशिश के दौरान पुलिस पर हमला, जवाबी कार्रवाई में मारा गया इनामी बदमाश..

    फरार होने की कोशिश के दौरान पुलिस पर हमला, जवाबी कार्रवाई में मारा गया इनामी बदमाश..

    फरार होने की कोशिश के दौरान पुलिस पर हमला, जवाबी कार्रवाई में मारा गया इनामी बदमाश..

    उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पुलिस मुठभेड़ में 50,000 रुपए का इनामी डकैत मारा गया, जबकि गोलीबारी के दौरान एक पुलिस उप-निरीक्षक और एक कांस्टेबल गोली लगने से घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ बुधवार देर रात सिविल लाइंस…

    Badaun News: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पुलिस मुठभेड़ में 50,000 रुपए का इनामी डकैत मारा गया, जबकि गोलीबारी के दौरान एक पुलिस उप-निरीक्षक और एक कांस्टेबल गोली लगने से घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ बुधवार देर रात सिविल लाइंस पुलिस थाना क्षेत्र में एक जांच अभियान के दौरान हुई।

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अंकिता शर्मा ने कहा कि एक पुलिस टीम ने शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर बदायूं-बिजनौर राजमार्ग पर एक संदिग्ध मोटरसाइकिल सवार को रुकने का इशारा किया। उन्होंने बताया कि संदिग्ध ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं, जिसके बाद पुलिस की ओर से आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। एसएसपी ने बताया कि आरोपी की पहचान जितेंद्र उर्फ ढालू (35) के रूप में हुई है, जो गोली लगने से घायल हो गया और उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि शेखूपुर पुलिस चौकी प्रभारी उप-निरीक्षक नीरज कुमार और कांस्टेबल अविनाश मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से घायल हो गए। गोलियां उनके बाएं हाथ में लगीं और दोनों का इलाज चल रहा है।

    पुलिस के मुताबिक, मूल रूप से हापुड़ जिले के धौलाना का रहने वाला जितेंद्र 19 मई को इस्लामनगर थाने में दर्ज डकैती के एक मामले में फरार था। मामले में गिरोह के सात सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि वह फरार था। एसएसपी ने बताया कि जितेंद्र पर इनाम की घोषणा बरेली रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक द्वारा की गई थी। वह कथित तौर पर बदायूं, अमरोहा, गौतमबुद्ध नगर और अन्य जिलों में दर्ज डकैती और अन्य गंभीर अपराधों के एक दर्जन से अधिक मामलों में वांछित था। पुलिस ने कहा कि उसके कब्जे से एक अर्ध-स्वचालित पिस्तौल, बड़ी मात्रा में कारतूस और कुछ आभूषण बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि बरामद आभूषणों का सत्यापन किया जा रहा है और संदेह है कि ये डकैती के पिछले मामलों से संबंधित हैं।

  • संदिग्ध परिस्थितियों में प्रवासी युवक की जान गई, जांच के बाद सामने आएगा सच..

    संदिग्ध परिस्थितियों में प्रवासी युवक की जान गई, जांच के बाद सामने आएगा सच..

    संदिग्ध परिस्थितियों में प्रवासी युवक की जान गई, जांच के बाद सामने आएगा सच..

    शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक मुकेश कुमार की पत्नी करीब 2 महीने पहले अपने गांव गई हुई थी और तब से वह वहीं रह रही थी। मुकेश यहां कमरे पर बिल्कुल अकेला था।

    लुधियाना (राज):  टिब्बा रोड इलाके में  किराए के मकान में रहने वाले एक प्रवासी युवक ने संदिग्ध परिस्थितियों में फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान मुकेश कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के जिला सीतामढ़ी का रहने वाला था। घटना की सूचना मिलते ही थाना टिब्बा की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को फंदे से उतारकर अपने कब्जे में ले लिया।

    मिली जानकारी के अनुसार मुकेश कुमार अपने परिवार के बेहतर भविष्य और रोजी-रोटी की तलाश में बिहार से लुधियाना आया हुआ था। वह यहां टिब्बा रोड पर एक किराए का कमरा लेकर रह रहा था और एक कपड़ा फैक्टरी में सिलाई का काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। जांच अधिकारी सुरजन सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक मुकेश कुमार की पत्नी करीब 2 महीने पहले अपने गांव गई हुई थी और तब से वह वहीं रह रही थी। मुकेश यहां कमरे पर बिल्कुल अकेला था। आशंका जताई जा रही है कि अकेलेपन, पारिवारिक तनाव या किसी मानसिक अवसाद के चलते उसने ऐसा कदम उठाया है।

    पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल की बारीकी से तलाशी ली गई है, लेकिन वहां से किसी भी तरह का कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर लुधियाना के सिविल अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है और उनके लुधियाना पहुंचने पर बयानों के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • क्या आपको हमेशा अकेले रहना पसंद आने लगा है? जानें कब हो सकती है मानसिक तनाव की निशानी..

    क्या आपको हमेशा अकेले रहना पसंद आने लगा है? जानें कब हो सकती है मानसिक तनाव की निशानी..

    क्या आपको हमेशा अकेले रहना पसंद आने लगा है? जानें कब हो सकती है मानसिक तनाव की निशानी..

    आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, आर्थिक चिंताएं और लगातार बदलती जीवनशैली लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही है. ऐसे माहौल में बहुत से लोग कुछ समय अकेले बिताना पसंद करते हैं. कई लोगों को लगता है कि अकेले रहना उन्हें सुकून देता है. इसे अगर मनोविज्ञान के नजरिए से देखें तो हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है. कुछ लोग दोस्तों या सगे-संबंधियों से मिलकर अच्छा महसूस करते हैं, जबकि कुछ लोग अकेले समय बिताकर खुद को बेहतर महसूस करते हैं. ऐसे लोगों के लिए अकेलापन नहीं, बल्कि एकांत जरूरी होता है.

    कब है चिंता का विषय

    मनोवैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, सीमित समय का स्वस्थ एकांत तनाव कम करने, भावनाओं को समझने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि समस्या तब शुरू होती है, जब अकेले रहने की आदत धीरे-धीरे सामाजिक दूरी में बदलने लगे. अगर कोई व्यक्ति लगातार दोस्तों, परिवार या सहकर्मियों से मिलने से बचने लगे, फोन उठाना बंद कर दे, बातचीत में रुचि न ले या पहले जिन लोगों के साथ समय बिताना पसंद करता था, उनसे भी दूरी बनाने लगे, तो इसे सामान्य व्यवहार नहीं माना जाता. यह मानसिक तनाव, चिंता या डिप्रेशन जैसी समस्याओं का शुरुआती संकेत हो सकता है.

    फर्क समझना है जरूरी

    साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, स्वस्थ एकांत और नुकसानदायक सोशल आइसोलेशन में फर्क समझना बेहद जरूरी है. स्वस्थ एकांत में व्यक्ति अकेला जरूर होता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर लोगों से जुड़ने में उसे कोई परेशानी नहीं होती. वह अपने काम, परिवार और रिश्तों की जिम्मेदारियां सामान्य तरीके से निभाता रहता है. वहीं, सामाजिक अलगाव में व्यक्ति धीरे-धीरे रिश्तों से दूरी बना लेता है, दूसरों से मिलने की इच्छा खत्म होने लगती है और कई बार जीवन के प्रति उत्साह भी कम हो जाता है. यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है.

    शरीर पर पड़ता है असर

    मेडिकल और साइकोलॉजी रिसर्च बताती हैं कि लंबे समय तक सोशल आइसोलेशन शरीर को भी प्रभावित करता है. लगातार अकेले रहने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन, खासतौर से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है. इसका असर नींद, याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता और प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी पड़ सकता है. कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि लंबे समय तक सामाजिक दूरी बनाए रखने वाले लोगों में चिंता और डिप्रेशन का खतरा ज्यादा देखा जाता है.

    क्या करें

    रोजाना कुछ समय खुले वातावरण में टहलना, प्रकृति के बीच समय बिताना और नियमित शारीरिक गतिविधियां मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती हैं. योग और श्वास संबंधी अभ्यास, जैसे भ्रामरी प्राणायाम, बालासन और सेतुबंधासन, तनाव कम करने और मन को शांत रखने में सहायक माने जाते हैं. पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और नियमित दिनचर्या भी मानसिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं.