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  • चीनी बार-बार हो जाती है गीली: और चिपचिपी? डिब्बे में डाल दें ये चीजें…

    चीनी बार-बार हो जाती है गीली: और चिपचिपी? डिब्बे में डाल दें ये चीजें…

    चीनी बार-बार हो जाती है गीली: और चिपचिपी? डिब्बे में डाल दें ये चीजें…

    चीनी बार-बार हो जाती है गीली और चिपचिपी? कुछ आसान तरीकों को अपनाकर चीनी को लंबे समय तक सूखा रखा जा सकता है. चलिए जानते हैं कैस.

    चीनी हमारी रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है. चाय-कॉफी से लेकर मिठाई और कई दूसरी चीजों में इसका इस्तेमाल होता है. लेकिन कई बार डिब्बे में रखी चीनी कुछ दिनों बाद गीली और चिपचिपी होने लगती है. चीनी के दाने आपस में चिपककर गुच्छे बना लेते हैं और डिब्बे की अंदरूनी सतह पर भी नमी नजर आने लगती है. दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हवा में मौजूद नमी होती है. चीनी नमी को आसानी से सोख लेती है. हालांकि, कुछ आसान तरीकों को अपनाकर चीनी को लंबे समय तक सूखा रखा जा सकता है.

    चीनी चिपचिपी क्यों हो जाती है? चीनी के गीले होने की सबसे बड़ी वजह नमी है. अगर डिब्बा ठीक से बंद नहीं है, तो नम हवा अंदर पहुंचकर चीनी को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा गीले चम्मच से चीनी निकालना भी इसकी एक वजह है. इसलिए हमेशा सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें.

    सही कंटेनर में रखें चीनी चीनी को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कांच के जार में रखना बेहतर है. डिब्बे में चीनी भरने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसमें पानी या नमी न हो. रोजाना इस्तेमाल के लिए अलग डिब्बा रखें और बाकी चीनी को अलग कंटेनर में स्टोर करें. इससे पूरे स्टॉक को बार-बार खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

    चावल के दाने करेंगे मदद चीनी को नमी से बचाने के लिए डिब्बे में कुछ चावल के दाने रख सकते हैं. चावल अतिरिक्त नमी सोखने में मदद कर सकता है. अगर आप चावल को सीधे चीनी में नहीं रखना चाहते, तो उसे साफ कपड़े की छोटी पोटली में बांधकर डिब्बे में रखा जा सकता है.

    लौंग और दालचीनी चीनी के डिब्बे में 4-5 लौंग रखने से उसकी खुशबू चींटियों को दूर रखने में मदद कर सकती है. लंबे समय तक चीनी स्टोर करनी हो तो 2-3 दालचीनी की छड़ियां भी रख सकते हैं.

    ब्लॉटिंग पेपर आएगा काम चीनी रखने से पहले कंटेनर के नीचे साफ ब्लॉटिंग पेपर की एक शीट रख सकते हैं. यह अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद कर सकती है.

  • बायोडाटा में 48 लाख की नौकरी, परिवार के पास 200 एकड़ जमीन… शादी होते ही बंद हुआ दूल्हे का फोन

    बायोडाटा में 48 लाख की नौकरी, परिवार के पास 200 एकड़ जमीन… शादी होते ही बंद हुआ दूल्हे का फोन

    बायोडाटा में 48 लाख की नौकरी, परिवार के पास 200 एकड़ जमीन… शादी होते ही बंद हुआ दूल्हे का फोन

    युवती का आरोप है कि युवक हर्षदीप ने खुद को जयपुर की एक बड़ी कंपनी में डेटा एनालिस्ट मैनेजर बताते हुए 48 लाख रुपये सालाना वेतन होने का दावा किया था. इसके अलावा उसके परिवार के पास 150 से 200 एकड़ जमीन और पिता के कारोबार का सालाना टर्नओवर 88 लाख रुपये बताया गया था.

    फर्जी बायोडाटा से शादी का रिश्ता

    फर्जी बायोडाटा से शादी का रिश्ता

    शादी के बाद सामने आई हकीकत

    शादी के बाद सामने आई हकीकत

    छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शादी के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर युवती और उसके परिवार को कथित तौर पर गुमराह करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि युवक हर्षदीप ने खुद जयपुर की एक बड़ी कंपनी में डेटा एनालिस्ट मैनेजर बताया. उसने अपना सालाना वेतन 48 लाख रुपए बताया था. इसके अलावा परिवार के पास 150 से 200 एकड़ जमीन और पिता के कारोबार का सालाना टर्नओवर 88 लाख रुपए होने की जानकारी दी गई थी.

    फर्जी दुल्हा, फर्जी बायोडाटा और शादी होते ही फोन नंबर बंद इन दावों पर भरोसा कर युवती के परिवार ने शादी के लिए सहमति दी. इसके बाद 12 मार्च 2026 को बिलासपुर के होटल पेट्रीशियन में दोनों की शादी हुई. युवती का आरोप है कि शादी के बाद सामने आए तथ्यों से उसे पता चला कि युवक द्वारा दिया गया बायोडाटा कथित तौर पर फर्जी था. शादी का खर्च दूल्हे के पिता लोधन राम द्वारा उठाने की बात कही गई थी, लेकिन आरोप है कि कैटरिंग और कार समेत कुछ खर्चों का भुगतान नहीं किया गया.

    शादी से पहले दुल्हन के परिवार से 6.76 लाख रुपए लिए युवती के अनुसार शादी से पहले और बाद में अलग-अलग कारण बताकर उसके परिवार से कुल 6.76 लाख रुपए भी लिए गए. जब कथित दावों की वास्तविकता सामने आई तो विवाद बढ़ गया. मामले में युवती ने जशपुर में शिकायत दर्ज कराई. वहां पुलिस ने शून्य पर रिपोर्ट दर्ज करने के बाद केस डायरी बिलासपुर पुलिस को भेज दी.जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि जयपुर में लिखी गई रिपोर्ट के आधार पर सुनने में एफआईआर दर्ज कर ली गई थी. वर्तमान में बिलासपुर में मामले की जांच की जा रही है. दूल्हे और उसके माता-पिता से संपर्क किया गया है. पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर रही है. जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

  • एक जैसी शक्ल तो जुड़वां: बहनों में देखी होगी, लेकिन यहां रेटिना और फिंगरप्रिंट भी निकले सेम, बनते-बनते अटक गया आधार, पढ़ें ये अनोखी कहानी

    एक जैसी शक्ल तो जुड़वां: बहनों में देखी होगी, लेकिन यहां रेटिना और फिंगरप्रिंट भी निकले सेम, बनते-बनते अटक गया आधार, पढ़ें ये अनोखी कहानी

    एक जैसी शक्ल तो जुड़वां: बहनों में देखी होगी, लेकिन यहां रेटिना और फिंगरप्रिंट भी निकले सेम, बनते-बनते अटक गया आधार, पढ़ें ये अनोखी कहानी

    रामपुर की जुड़वां बहनों खिज़रा और तूबा के फिंगरप्रिंट और रेटिना 100% मैच होने के कारण आधार अपडेट की प्रक्रिया में डुप्लीकेसी की समस्या आ गई.

    सोचिए, दो जुड़वां बहनें हों और उनकी शक्ल-सूरत एक जैसी हो, तो उन्हें पहचानना परिवार खात तौर पर मां तक के लिए भी कई बार मुश्किल हो जाता है. लेकिन रामपुर में मामला इससे कहीं आगे निकल गया. यहां सेंट मैरी स्कूल की कक्षा 10 में पढ़ने वाली जुड़वां बहनें खिज़रा और तूबा जुबैर ऐसी बायोमेट्रिक समानता की वजह से परेशान हो गईं कि एक का आधार अपडेट होता तो दूसरी का आवेदन डुप्लीकेसी बताकर रद्द हो जाता था. कई महीनों तक चली इस परेशानी का असर उनकी 10वीं बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन पर भी पड़ने लगा.

    दरअसल खिज़रा और तूबा के आधार कार्ड पहले से बने हुए थे, लेकिन अब बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए उन्हें आधार अपडेट कराना था. इसी दौरान बायोमेट्रिक प्रक्रिया में अड़चन आ गई. दोनों बहनों के फिंगरप्रिंट और आंखों का रेटिना इतना समान पाया गया कि सिस्टम दूसरे आवेदन को पहले वाले रिकॉर्ड से डुप्लीकेट मानने लगा. परिवार ने कई बार आधार केंद्र जाकर इसे ठीक कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार समस्या वहीं की वहीं रही. एक तरफ 10वीं के रजिस्ट्रेशन की चिंता थी, तो दूसरी तरफ यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिर दो अलग-अलग बहनों की पहचान सिस्टम में अलग कैसे दर्ज हो.

    मोबाइल के फेस लॉक ने खोल दिया बड़ा राज इस पूरे मामले में एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब परिवार को मोबाइल के फेस लॉक से दोनों बहनों की असामान्य समानता का अंदाजा हुआ. खिज़रा ने बताया कि उनके पिता ने एक बार उनके चेहरे से फोन लॉक किया और तूबा का चेहरा दिखाने पर फोन अनलॉक हो गया.

    इसके बाद तूबा के चेहरे से फोन लॉक किया गया तो खिज़रा का चेहरा दिखाने पर भी फोन खुल गया. इसी घटना के बाद परिवार को लगा कि दोनों बहनों के चेहरे ही नहीं, बल्कि आंखों से जुड़ी पहचान में भी काफी समानता हो सकती है. खिज़रा के मुताबिक, इसी वजह से उन्होंने इतनी परेशानियां झेलीं.

    तब आएं डीएम के पास जब आधार केंद्रों पर लगातार कोशिश के बाद भी समाधान नहीं निकला तो परिवार के लोगों ने जिलाधिकारी से मिलने का फैसला किया. खिज़रा ने बताया कि उनके चाचू ने उनसे कहा कि डीएम साहब के पास चलते हैं, वहीं से कोई रास्ता निकल सकता है. इसके बाद परिवार रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के पास पहुंचा और पूरी समस्या बताई. डीएम ने मामले को गंभीरता से लिया और यूआईडीएआई के दिल्ली और लखनऊ कार्यालयों से संपर्क किया. परिवार को भरोसा दिया गया कि उन्हें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी और इसी प्रक्रिया के जरिए समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.

    ढाई से तीन महीने तक चलती रही प्रक्रिया खिज़रा की बात की पुष्टि उनके चाचा मकसूद अहमद ने भी की. उन्होंने बताया कि दोनों बच्चियां उनकी भतीजियां हैं और सेंट मैरी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ती हैं. उनके मुताबिक, एक का आधार अपडेट हो जाता था, जबकि दूसरे का आवेदन रिजेक्ट हो जाता था. मकसूद अहमद के अनुसार, डीएम ने इसे काफी रेयर केस बताया और दिल्ली तथा लखनऊ में संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया. इसके बाद वहां से जो निर्देश मिलते रहे, परिवार उसी के मुताबिक प्रक्रिया पूरी करता रहा. इस दौरान डीएम भी बीच-बीच में फोन करके अपडेट लेते रहे. करीब ढाई से तीन महीने तक यह प्रक्रिया चली. आखिरकार दोनों बहनों के पुराने रिकॉर्ड को हटाकर उनके नए आधार कार्ड अलग-अलग अपडेट हो गए. परिवार के मुताबिक, 10वीं के रजिस्ट्रेशन में आ रही परेशानी भी इसी के चलते दूर हो सकी.

    ऐसा केस पहली बार सामने आया जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि खिज़रा और तूबा जुबैर, जुबेर इलियास की बेटियां हैं और दोनों 10वीं कक्षा की छात्राएं हैं. बचपन में माता-पिता की पहचान के आधार पर उनके आधार कार्ड बनाए गए थे. अब बोर्ड परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक के आधार पर आधार अपडेट होना था. डीएम के मुताबिक, पहली बच्ची का आधार अपडेट हो गया, लेकिन दूसरी बच्ची के फिंगरप्रिंट और आई रेटिना स्कैन पहले वाली बच्ची से मैच कर गए. इसी वजह से उसका आवेदन डुप्लीकेसी में चला गया और आगे नहीं बढ़ पाया. इसके बाद जिला प्रशासन ने दिल्ली में यूआईडीएआई अधिकारियों से संपर्क किया और वहां से लखनऊ मुख्यालय के अधिकारियों के साथ समन्वय किया गया.

    ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ बताया मामला अजय कुमार द्विवेदी ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ बताया. उनके मुताबिक, जुड़वां बच्चों में भी रेटिना या फिंगरप्रिंट में थोड़ा-बहुत अंतर होता है, लेकिन इस मामले में दोनों में कोई अंतर नहीं मिला. डीएम ने कहा कि यूआईडीएआई ने विशेष प्रयास करते हुए दोनों बच्चियों के अलग-अलग आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था की. उनके मुताबिक, इससे दोनों छात्राओं की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों में मदद मिलेगी.

    परिवार ने जताया डीएम का आभार मकसूद अहमद ने बताया कि परिवार लंबे समय से इस परेशानी से गुजर रहा था. उनके मुताबिक, उन्होंने कभी ऐसा मामला नहीं सुना था जिसमें जुड़वां बहनों के बीच इस तरह रेटिना और फिंगरप्रिंट मैच होने की वजह से आधार की प्रक्रिया अटक गई हो. अब दोनों बहनों के आधार अलग-अलग अपडेट हो चुके हैं. खिज़रा ने भी जिलाधिकारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी वजह से आधार अपडेट हो पाया और अब उनका 10वीं कक्षा का रजिस्ट्रेशन हो सकेगा. परिवार ने भी इस पूरी प्रक्रिया में मदद करने के लिए जिलाधिकारी का आभार जताया है.

  • ‘पट्टीदार देखी जरता’ पर: देवरानी बना रही थी रील, जेठानी को लगा-ताना मार रही है, विवाद के बाद जमकर हुई मारपीट

    ‘पट्टीदार देखी जरता’ पर: देवरानी बना रही थी रील, जेठानी को लगा-ताना मार रही है, विवाद के बाद जमकर हुई मारपीट

    ‘पट्टीदार देखी जरता’ पर: देवरानी बना रही थी रील, जेठानी को लगा-ताना मार रही है, विवाद के बाद जमकर हुई मारपीट

    छोटी गोतनी ने भोजपुरी गीत ‘पट्टीदार देखी जरता’ गाने पर रील्स बना रही थी, तभी उसकी गोतनी ने उसके साथ मारपीट कर दी.

    रील में पट्टीदार शब्द सुन भड़की गोतनी

    रील में पट्टीदार शब्द सुन भड़की गोतनी

    रील बनाने को लेकर दो गोतनी भिड़ीं

    रील बनाने को लेकर दो गोतनी भिड़ीं

    आजकल हर कोई सोशल मीडिया पर रील बनाकर व्यूज और लाइक्स बटोरना चाहता है. लेकिन झारखंड के गढ़वा में एक भोजपुरी गाने पर रील बनाना दो महिलाओं के बीच विवाद की वजह बन गया. मामला इतना बढ़ा कि दोनों गोतनी यानी देवरानी-जेठानी आपस में भिड़ गईं. मारपीट में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

    भोजपुरी गाने पर बना रही थी रील मामला गढ़वा जिले के डंडा थाना क्षेत्र के निमिया टोला गांव का है. यहां रमाला देवी, पति रवि चौधरी, भोजपुरी के चर्चित गाने ‘पट्टीदार देखी जरता’ पर रील वीडियो बना रही थीं. इसी दौरान उनकी गोतनी ने रील को लेकर आपत्ति जताई.

    बताया जा रहा है कि रील में इस्तेमाल किए गए गाने के बोल में पट्टीदार शब्द आने की वजह से गोतनी को लगा कि वीडियो के जरिए उसे ही निशाना बनाया जा रहा है. इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई.

    कहासुनी के बाद मारपीट परिजनों के मुताबिक, कुछ ही देर में विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई. रमाला देवी के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनकी गोतनी ने उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की कोशिश भी की. मारपीट में रमाला देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं. घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.

    पट्टीदार शब्द पर हुआ विवाद विवाद की मुख्य वजह भोजपुरी गाने के बोल बताए जा रहे हैं. आरोपी गोतनी का कहना है कि रील में पट्टीदार कहकर उसे ही निशाना बनाया जा रहा था. इसी बात को लेकर उसने आपत्ति जताई थी. वहीं, रमाला देवी के परिजनों का कहना है कि वह सिर्फ भोजपुरी गाने पर रील बना रही थीं और उनका किसी को निशाना बनाने का इरादा नहीं था.

    दोनों परिवारों में समझौते की कोशिश घटना के बाद गांव में दोनों परिवारों के बीच विवाद बढ़ गया. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश चल रही है. वहीं, पीड़ित पक्ष की ओर से डंडा थाने में शिकायत करने की तैयारी की जा रही है. इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी शिकायत दर्ज होने के बाद सामने आएगी. सोशल मीडिया पर कुछ मिनट की रील से शुरू हुआ विवाद अब मारपीट और अस्पताल तक पहुंच गया है.

  • सोने की चेन चोरी: कर बनाई रील, परिवार ने इंस्टाग्राम पर देखा तो पहुंच गया पुलिस लेकर

    सोने की चेन चोरी: कर बनाई रील, परिवार ने इंस्टाग्राम पर देखा तो पहुंच गया पुलिस लेकर

    सोने की चेन चोरी: कर बनाई रील, परिवार ने इंस्टाग्राम पर देखा तो पहुंच गया पुलिस लेकर

    घर से सोने की अंगूठी, चेन और अन्य जेवरात गायब होने के बाद परिवार परेशान था. शुरुआत में किसी पर शक नहीं हुआ. लगातार सामान गायब होने के बाद फरियादी ने लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई.

    इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में पिछले करीब दो साल से घर से हो रही चोरी का पुलिस ने खुलासा किया है. चोरी की गई सोने की चेन इंस्टाग्राम पर नजर आने के बाद पुलिस आरोपी पूर्व नौकरानी तक पहुंची. पुलिस ने आरोपी महिला की निशानदेही पर करीब 3 लाख रुपए से ज्यादा कीमत के सोने और डायमंड जड़ित जेवरात समेत अन्य सामान बरामद किया है. पुलिस अब पिछले दो साल के दौरान घर से गायब हुए दूसरे सामान को लेकर भी पूछताछ कर रही है.

    दो साल से धीरे-धीरे गायब हो रहे थे जेवर मामला लसूड़िया थाना क्षेत्र की शालीमार टाउनशिप का है. यहां संजय झाला के घर से पिछले करीब दो वर्षों से धीरे-धीरे कीमती सामान गायब हो रहा था. घर से सोने की अंगूठी, चेन और अन्य जेवरात गायब होने के बाद परिवार परेशान था. शुरुआत में किसी पर शक नहीं हुआ. लगातार सामान गायब होने के बाद फरियादी ने लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और घर में काम करने वाले पुराने कर्मचारियों समेत अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई.

    इंस्टाग्राम पर दिखी वही सोने की चेन जांच के दौरान परिवार की नजर इंस्टाग्राम पर एक फोटो और रील पर पड़ी. इसमें पूर्व नौकरानी पूनम अपने गले में सोने की चेन पहने नजर आई. परिवार ने चेन को पहचान लिया. उनका दावा था कि यही चेन उनके घर से गायब हुई थी. पूनम करीब दो महीने पहले ही घर का काम छोड़ चुकी थी. इसके बाद पुलिस ने इंस्टाग्राम पर सामने आई तस्वीर को जांच का अहम सुराग माना और पूनम को पूछताछ के लिए बुलाया.

    पूछताछ में चोरी की बात कबूलने का दावा पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान पूनम ने घर से सोने की चेन के साथ अन्य जेवरात और सामान चोरी करना स्वीकार किया. इसके बाद पुलिस ने उसकी निशानदेही पर सामान की बरामदगी शुरू की. पुलिस का कहना है कि अब तक करीब 3 लाख रुपए से ज्यादा कीमत के सोने और डायमंड जड़ित जेवरात समेत अन्य सामान बरामद किया गया है. बरामद सामान में सोने की चेन, अंगूठी और दूसरे कीमती सामान शामिल हैं.

    चेन पहनकर बनाई थी रील, इसी से मिला सुराग इस मामले में सबसे खास बात यह रही कि आरोपी महिला ने कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन पहनकर इंस्टाग्राम पर रील भी बनाई थी. यही रील परिवार की नजर में आ गई और इसके बाद पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में मदद मिली. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले दो साल में घर से कितने सामान की चोरी हुई और इनमें से कितने सामान की बरामदगी हो सकती है. पुलिस आरोपी महिला से पूछताछ कर चोरी की अन्य घटनाओं और इसमें किसी दूसरे व्यक्ति की भूमिका के बारे में भी जानकारी जुटा रही है.

  • पैकेट वाले खाने पर: अब साफ दिखेगा कितना है चीनी-नमक, FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

    पैकेट वाले खाने पर: अब साफ दिखेगा कितना है चीनी-नमक, FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

    पैकेट वाले खाने पर: अब साफ दिखेगा कितना है चीनी-नमक, FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

    नए प्रस्ताव के तहत खाद्य पदार्थों में ज्यादा मात्रा में चीनी, नमक या वसा होने की जानकारी उपभोक्ताओं को ज्यादा स्पष्ट तरीके से दी जाएगी. इसका मकसद यह है कि कोई व्यक्ति सामान खरीदने से पहले ही आसानी से समझ सके कि उसमें इन पोषक तत्वों की मात्रा कितनी है.

    डिब्बाबंद और पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदने वालों के लिए आने वाले समय में पैकेट का पिछला हिस्सा ही नहीं, बल्कि सामने का हिस्सा भी काफी अहम होने वाला है. ज्यादा चीनी, नमक और वसा वाले खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट चेतावनी देने के मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की है. इसमें चेतावनी लेबलिंग के नियमों को एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है. ड्राफ्ट नियम तैयार करने के लिए 4 महीने और कंपनियों को नियम लागू करने के लिए 365 दिन की अवधि देने की बात कही गई है.

    क्या बदलेगा पैकेट पर? नए प्रस्ताव के तहत खाद्य पदार्थों में ज्यादा मात्रा में चीनी, नमक या वसा होने की जानकारी उपभोक्ताओं को ज्यादा स्पष्ट तरीके से दी जाएगी. इसका मकसद यह है कि कोई व्यक्ति सामान खरीदने से पहले ही आसानी से समझ सके कि उसमें इन पोषक तत्वों की मात्रा कितनी है. अभी कई उत्पादों में पोषण संबंधी जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में होती है. नए बदलाव का जोर ऐसी जानकारी को उपभोक्ता के लिए ज्यादा स्पष्ट और आसानी से दिखाई देने वाला बनाने पर है.

    आर्टिफिशियल स्वीटनर पर भी सामने चेतावनी सिर्फ ज्यादा चीनी, नमक और वसा ही नहीं, बल्कि नॉन-कैलोरिक स्वीटनर यानी कृत्रिम मिठास के इस्तेमाल को लेकर भी फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी देने का प्रस्ताव है. अगर किसी खाद्य या पेय पदार्थ में नॉन-कैलोरिक स्वीटनर मौजूद है तो पैकेट के सामने ‘CONTAIN NON CALORIC SWEETENER’ लिखना होगा. अभी ऐसी जानकारी आमतौर पर पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में दी जाती है.

    एक साथ लागू होंगे नए नियम FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नए नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के बजाय एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया है. ड्राफ्ट नियम तैयार करने के लिए 4 महीने की समयसीमा तय की गई है. इसके बाद खाद्य कंपनियों और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को बदलाव लागू करने के लिए 365 दिनों की अवधि दी जाएगी. यानी नियम अधिसूचित होने के बाद कंपनियों को पैकेजिंग में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.

    हर शुगर को हाई शुगर कहना आसान नहीं FSSAI ने यह भी बताया कि खाद्य पदार्थों को सिर्फ उनकी कुल चीनी के आधार पर ‘हाई शुगर’ घोषित करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं. मसलन, फलों और दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूद चीनी और किसी उत्पाद को बनाने के दौरान अलग से मिलाई गई चीनी एक जैसी नहीं होती. यानी किसी खाद्य पदार्थ में मौजूद चीनी का स्रोत भी महत्वपूर्ण है. FSSAI ने इसी वजह से ‘प्राकृतिक’ और ‘अधिक चीनी’ वाले खाद्य पदार्थों के वर्गीकरण की चुनौती का उल्लेख किया है.

    चेतावनी लेबल और वेज-नॉनवेज निशान अलग होंगे पैकेट पर मौजूद वेजिटेरियन/नॉन-वेजिटेरियन निशान और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चेतावनी को अलग-अलग तरीके से दिखाया जाएगा. दोनों के आकार और रंग में अंतर रखा जाएगा, ताकि उपभोक्ता इन्हें आसानी से पहचान सकें.

    स्कूलों में भी स्वस्थ भोजन पर जोर FSSAI ने स्कूलों में खाद्य सुरक्षा और पोषण को लेकर पहले से चल रही व्यवस्था की जानकारी भी कोर्ट को दी है. स्कूलों में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम 2020 में जारी किए जा चुके हैं. इनमें स्कूलों में भोजन तैयार करने से जुड़े मानक शामिल हैं. इसके अलावा FSSAI और शिक्षा मंत्रालय की ओर से छात्रों के लिए ‘Eat Right Campaign’ चलाया जा रहा है. देशभर के स्कूलों के पाठ्यक्रम में खाद्य सुरक्षा, पोषण संबंधी जानकारी और स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए ‘Eat Right India’ कार्यक्रम से जुड़ा अध्याय शामिल किया गया है. स्कूलों को FSSAI Eat Right School प्रमाणन लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन का बेहतर माहौल मिल सके.

    आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या? आने वाले समय में पैकेट वाला खाना खरीदते समय आपको सिर्फ ब्रांड या स्वाद देखकर फैसला नहीं करना होगा. पैकेट के सामने ही यह समझने में मदद मिल सकती है कि उसमें ज्यादा चीनी, नमक, वसा या कृत्रिम मिठास मौजूद है या नहीं.

  • सिर्फ एक छात्रा फिर भी: 5 km पैदल चलकर रोज पढ़ाने पहुंचते हैं 55 साल के शिक्षक. जंगल में तेंदुए-बायसन का डर, फिर भी नहीं रुके कदम

    सिर्फ एक छात्रा फिर भी: 5 km पैदल चलकर रोज पढ़ाने पहुंचते हैं 55 साल के शिक्षक. जंगल में तेंदुए-बायसन का डर, फिर भी नहीं रुके कदम

    सिर्फ एक छात्रा फिर भी: 5 km पैदल चलकर रोज पढ़ाने पहुंचते हैं 55 साल के शिक्षक. जंगल में तेंदुए-बायसन का डर, फिर भी नहीं रुके कदम

    55 साल के शिक्षक जीवन मिठारी रोज करीब 5 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पैदल तय करते हैं. रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा रहता है, लेकिन शिक्षक अपने फर्ज से पीछे नहीं हटते. उनकी मेहनत देखकर छात्रा स्वरा बोडके भी आगे चलकर डॉक्टर बनने का सपना देख रही है.

    मिशन एजुकेशन की अनोखी कहानी महाराष्ट्र के कोल्हापुर से सामने आई है. यहां एक सरकारी स्कूल में अब सिर्फ एक छात्रा पढ़ती है. इस बच्ची की पढ़ाई न रुके, इसके लिए 55 साल के शिक्षक जीवन मिठारी रोज करीब 5 किलोमीटर का जंगल का रास्ता पैदल तय करते हैं. रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा रहता है, लेकिन शिक्षक अपने फर्ज से पीछे नहीं हटते. उनकी मेहनत देखकर छात्रा स्वरा बोडके भी आगे चलकर डॉक्टर

    बनने का सपना देख रही है.1974 में शुरू हुआ था स्कूल कोल्हापुर जिले की गगनबावडा तहसील के धनगरवाडा गांव में जिला परिषद प्राथमिक विद्या मंदिर स्कूल साल 1974 में शुरू हुआ था. कभी इस स्कूल में 50 से 70 बच्चे पढ़ते थे. साल 2001 से 2024 के बीच भी यहां 15 से 20 छात्र-छात्राएं पढ़ते रहे, लेकिन अब स्कूल में सिर्फ एक छात्रा स्वरा बोडके रह गई है. गांव में सुविधाओं की कमी और रोजगार के लिए कई परिवार शहरों की ओर चले गए. अब यहां सिर्फ 2-3 परिवार ही रहते हैं. इसके बावजूद स्कूल को बंद नहीं किया गया है, ताकि स्वरा की पढ़ाई जारी रह सके.रोज 50 किमी फसर स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक जीवन मिठारी, कोल्हापुर से रोज करीब 50 किलोमीटर की यात्रा करके पहुंचते हैं.

    मोटर मार्ग से स्कूल करीब 2.5 किलोमीटर दूर है. इसके बाद उन्हें घने जंगल और पहाड़ी रास्ते से करीब 2.5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. आने-जाने में उनका रोज करीब 5 किलोमीटर पैदल सफर होता है.रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा इस जंगल के रास्ते में गवे यानी बायसन और तेंदुए जैसे जंगली जानवर दिखाई दे सकते हैं. वन विभाग ने यहां ट्रैप कैमरे भी लगाए हैं. शिक्षक को सलाह दी गई है कि जंगल के रास्ते में कहीं रुकें या बैठें नहीं. जीवन मिठारी कहते हैं, ‘मुझे भी डर लगता है, लेकिन अब आदत हो गई है.’ रोज की यह पैदल यात्रा अब उनकी दिनचर्या और व्यायाम का हिस्सा बन चुकी है.छोटी छात्रा का बड़ा सपना गांव के सरपंच धुंदवडे के मुताबिक, स्कूल तक रास्ता, बिजली और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है.

    पास का स्कूल धुंदवडे में है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए रोज 11 किलोमीटर का जंगल वाला सफर करना मुश्किल है. जीवन मिठारी पहले कोल्हापुर जिला प्राथमिक शिक्षक सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण स्कूल में पढ़ाने की जिम्मेदारी स्वीकार की. मई 2029 में उनकी सेवानिवृत्ति होनी है. फिलहाल उनकी मेहनत से स्वरा की पढ़ाई जारी है और वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही है.

  • एक मिनट में 900: राउंड फायरिंग! रूस का 4 मशीन गन वाला ‘जुब्र’ सिस्टम करेगा ड्रोन का शिकार, जानिए इसकी खासियत.

    एक मिनट में 900: राउंड फायरिंग! रूस का 4 मशीन गन वाला ‘जुब्र’ सिस्टम करेगा ड्रोन का शिकार, जानिए इसकी खासियत.

    एक मिनट में 900: राउंड फायरिंग! रूस का 4 मशीन गन वाला ‘जुब्र’ सिस्टम करेगा ड्रोन का शिकार, जानिए इसकी खासियत.

    मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सैन्य ठिकानों और दूसरे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर ड्रोन हमलों की चुनौती से निपटने के लिए रूस अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों पर भी जोर दे रहा है। इसी बीच रूस का ‘जुब्र एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम’ चर्चा में है।

    इस सिस्टम में चार PKT मशीन गन लगाई गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इसकी कुल फायरिंग क्षमता करीब 900 राउंड प्रति मिनट बताई जाती है। इसे छोटे ड्रोन का पता लगाने और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए तैयार किया गया है।

    क्या है रूस का ‘जुब्र’ एंटी-ड्रोन सिस्टम?

    रूस-यूक्रेन युद्ध में छोटे ड्रोन और कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। इनका उपयोग सैन्य ठिकानों, वाहनों, बंकरों और अन्य लक्ष्यों पर हमले के लिए किया जाता है। ऐसे में इनसे सुरक्षा के लिए नजदीकी हवाई रक्षा प्रणालियों की भूमिका बढ़ गई है।

    ‘जुब्र’ को इसी तरह की एक नजदीकी सुरक्षा प्रणाली बताया जा रहा है। इसे सैन्य ठिकानों, काफिलों और महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास तैनात किया जा सकता है। इसका उद्देश्य संभावित ड्रोन खतरे को पहचानकर उसे आगे बढ़ने से रोकना है।

  • गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ: तो न करें ये गलतियां, वरना इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से कर सकती है इनकार

    गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ: तो न करें ये गलतियां, वरना इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से कर सकती है इनकार

    गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ: तो न करें ये गलतियां, वरना इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से कर सकती है इनकार

    कार का एक्सीडेंट होने के बाद हर किसी को उम्मीद रहती है कि इंश्योरेंस कंपनी गाड़ी की मरम्मत का खर्च संभाल लेगी. लेकिन कई बार छोटी-छोटी गलतियों की वजह से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है और पूरा खर्च आपकी जेब पर आ जाता है.

    गाड़ी का एक्सीडेंट होते ही सबसे पहले दिमाग में यही आता है कि अब कार की मरम्मत का खर्च कैसे उठेगा. ऐसे समय में इंश्योरेंस पॉलिसी बड़ी राहत देती है, क्योंकि लोगों को उम्मीद होती है कि बीमा कंपनी नुकसान की भरपाई कर देगी. लेकिन सोचिए, अगर हादसे के बाद कंपनी आपका क्लेम ही रिजेक्ट कर दे तो? कार का नुकसान तो रहेगा ही, साथ में हजारों या लाखों रुपये का खर्च भी आपकी जेब पर आ सकता है.

    कई बार क्लेम रिजेक्ट होने की वजह बीमा कंपनी नहीं, बल्कि पॉलिसीधारक की अपनी छोटी-सी गलती होती है. आइए जानते हैं वो कौन-सी गलतियां हैं, जिनसे आपका इंश्योरेंस क्लेम अटक सकता है.नशे में ड्राइविंग करना अगर एक्सीडेंट के समय ड्राइवर शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ के प्रभाव में पाया जाता है, तो बीमा कंपनी क्लेम खारिज कर सकती है. नशे में गाड़ी चलाना कानूनन अपराध भी है. ऐसे में कार को हुए नुकसान का खर्च आपको खुद उठाना पड़ सकता है.

    वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी कार चलाने के लिए वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है. अगर हादसे के समय ड्राइवर के पास कार चलाने का वैध लाइसेंस नहीं है, तो क्लेम पर असर पड़ सकता है. लाइसेंस एक्सपायर होने या वाहन के हिसाब से सही लाइसेंस नहीं होने पर भी बीमा कंपनी दावा खारिज कर सकती है.एक्सीडेंट की जानकारी देने में न करें देरी हादसे के बाद बीमा कंपनी को समय पर इसकी जानकारी देना बेहद जरूरी है. पॉलिसी में क्लेम की सूचना देने की समय सीमा तय होती है. तय समय के बाद जानकारी देने पर कंपनी क्लेम को लेट इंटिमेशन मानकर खारिज कर सकती है. इसलिए हादसे के तुरंत बाद बीमा कंपनी को सूचित करना बेहतर होता है.

    निजी कार से कमर्शियल काम करना पड़ सकता है भारी अगर कार का इंश्योरेंस निजी इस्तेमाल के लिए कराया गया है, लेकिन उसका इस्तेमाल कैब, डिलीवरी या किसी दूसरे कमर्शियल काम के लिए किया जा रहा है, तो एक्सीडेंट होने पर क्लेम खारिज हो सकता है. इसके अलावा पॉलिसी खत्म होने के बाद हुए हादसे या बीमा कंपनी को बताए बिना गाड़ी में बड़े बदलाव करने पर भी क्लेम मिलने में दिक्कत हो सकती है.क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें अगर आपको लगता है कि बीमा कंपनी ने गलत तरीके से क्लेम खारिज किया है, तो पहले कंपनी के इंटरनल ग्रीवांस सेल में शिकायत की जा सकती है. वहां से समाधान नहीं मिलने पर IRDAI के शिकायत निवारण सिस्टम के जरिए शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

  • चार बेटों के बीच बंटा: बुजुर्ग दंपती का घर, पिता 2 बेटों के साथ तो मां 2 बेटों के साथ रहने लगी, पत्नी ने पति से मांगा इलाज का खर्च, अब हर महीने मिलेंगे 5 हजार

    चार बेटों के बीच बंटा: बुजुर्ग दंपती का घर, पिता 2 बेटों के साथ तो मां 2 बेटों के साथ रहने लगी, पत्नी ने पति से मांगा इलाज का खर्च, अब हर महीने मिलेंगे 5 हजार

    चार बेटों के बीच बंटा: बुजुर्ग दंपती का घर, पिता 2 बेटों के साथ तो मां 2 बेटों के साथ रहने लगी, पत्नी ने पति से मांगा इलाज का खर्च, अब हर महीने मिलेंगे 5 हजार

    परिवार में विवाद कई बार मारपीट तक भी पहुंचा और मामला थाने तक पहुंच गया. इसके बाद पति अपनी पत्नी से और दोनों बीच के बेटों से नाराज हो गए. उन्होंने उनसे मिलना-जुलना भी बंद कर दिया और अपने दो बेटों के साथ अलग रहने लगे.

    समय के साथ रिश्तों का स्वरूप भी बदल रहा है. कभी माता-पिता बुढ़ापे में अपने बच्चों का सहारा चाहते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सामने आई एक घटना ने परिवार और रिश्तों की एक अलग तस्वीर सामने रखी है. सिकंदराबाद क्षेत्र में 75 साल के बुजुर्ग और उनकी 70 वर्षीय पत्नी अपने ही चार बेटों के बीच अलग-अलग रहने को मजबूर हो गए. दो बेटे पिता के साथ रहने लगे, जबकि दो बेटों ने मां की जिम्मेदारी संभाल ली. पति-पत्नी के बीच बच्चों को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ने एक-दूसरे से अलग रहना शुरू कर दिया.

    पति-पत्नी के बीच बच्चों को लेकर था विवाद बताया गया कि बुजुर्ग दंपति के चार बेटे हैं. पिता सबसे बड़े और सबसे छोटे बेटे के साथ रहना चाहते थे, जबकि मां दोनों बीच के बेटों के साथ रहना चाहती थीं. इसी बात को लेकर पति-पत्नी में अक्सर विवाद होता था. धीरे-धीरे विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों अलग-अलग रहने लगे.

    परिवार में विवाद कई बार मारपीट तक भी पहुंचा और मामला थाने तक पहुंच गया. इसके बाद पति अपनी पत्नी से और दोनों बीच के बेटों से नाराज हो गए. उन्होंने उनसे मिलना-जुलना भी बंद कर दिया और अपने दो बेटों के साथ अलग रहने लगे.

    मां की तबीयत खराब हुई तो पति से मांगी आर्थिक मदद अलग रहने के बावजूद समय बीतने के साथ 70 वर्षीय सत्यवती की मुश्किलें बढ़ती गईं. उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां हैं. जिन दो बेटों के साथ वह रह रही थीं, उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे मां के इलाज और रोजमर्रा के खर्च का पूरा इंतजाम कर सकें. ऐसे में सत्यवती को अपने पति की तरफ देखना पड़ा. उन्होंने पति से इलाज और गुजारे के लिए आर्थिक मदद मांगी. उनका कहना था कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की भी होती है. इसी शिकायत के बाद मामला पुलिस की महिला सेल तक पहुंचा.

    काउंसलिंग में दोनों को साथ लाने की कोशिश शिकायत मिलने के बाद महिला सेल ने बुजुर्ग दंपति को बुलाया. काउंसलर्स ने दोनों को समझाने और परिवार को दोबारा एक साथ लाने की कोशिश की. चारों बेटों और माता-पिता को साथ बैठाकर विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया. हालांकि, लंबे समय से चले आ रहे विवाद और आपसी कड़वाहट के कारण दोनों पति-पत्नी साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुए. इसके बाद पुलिस ने कम से कम आर्थिक मदद को लेकर समाधान निकालने की कोशिश की.

    पति हर महीने देंगे 5 हजार रुपए महिला सेल की प्रभारी अलका चौधरी के मुताबिक, समझाइश के बाद बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को हर महीने 5 हजार रुपए देने के लिए तैयार हो गए. फिलहाल 15 दिन के खर्च के तौर पर 2700 रुपए भी उन्हें दिए गए हैं. अगले महीने से पति नियमित रूप से 5 हजार रुपए देने पर सहमत हुए हैं. अलका चौधरी ने बताया कि दोनों को काफी समझाया गया. कोशिश थी कि बुजुर्ग दंपति और उनके चारों बेटे साथ रहें, लेकिन सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद पति द्वारा पत्नी को हर महीने गुजारा भत्ता देने पर सहमति बनी और मामले का औपचारिक निस्तारण कर दिया गया.