फतेहपुर : उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पुलिस ने फर्जी सीबीआई अधिकारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्त के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन बरामद किया है।
थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने रविवार काे जहानाबाद क्षेत्र के ग्राम नरायनपुर निवासी धीरेन्द्र पुत्र बाबू सिंह को सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डराकर साइबर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
थानाध्यक्ष मनीष कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी धीरेन्द्र सिंह अपने साथियों के साथ अंजान लोगों को फोन कर स्वयं को सीबीआई अधिकारी बताता था और अश्लील वीडियो देखने के नाम पर मुकदमा दर्ज कराने व गिरफ्तारी का भय दिखाकर क्यूआर कोड के माध्यम से रुपये ट्रांसफर करा लेता था। बताया गया कि महाराष्ट्र के मुंबई निवासी चंद्रपाल नरनवरे से इसी तरीके से 28,540 रुपये की साइबर ठगी की गई थी जिसका वहां पर मुकदमा दर्ज है। जांच के दौरान मोबाइल नंबर की लोकेशन धीरेन्द्र पुत्र बाबू सिंह निवासी नरायणपुर, थाना जहानाबाद, जनपद फतेहपुर मिलने पर पुलिस ने आरोपित को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध थाना जहानाबाद में बीएनएस की संबंधित धाराओं एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को निवेश पर अधिक मुनाफे का लालच देकर ठगी करता था। पुलिस के अनुसार एक ही व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से करीब 500 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में सेंधाराम चौधरी ने 16 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता को ‘105 आईएनडी स्टॉक्स एडीवी’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर रकम निवेश कराई गई थी। तकनीकी जांच में पता चला कि इसी ग्रुप के जरिए देशभर के लोगों से करीब 500 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
जांच के दौरान उप महानिरीक्षक शांतनु कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप डेटा का विश्लेषण किया। इसके आधार पर गिरोह के मास्टरमाइंड युवराज सतीश मुदलियार 35 निवासी लोहगांव पुणे को गिरफ्तार कर ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस के नाम से फर्जी लोन कंपनियां संचालित करता था। लोन दिलाने के बहाने लोगों के पैन कार्ड, आधार, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज लेकर उनके नाम पर म्यूल बैंक खाते खुलवाता था। खाताधारकों को 10 हजार रुपये कमीशन दिया जाता था। इन खातों में ठगी की रकम जमा होने के बाद नकदी निकालकर हवाला नेटवर्क के माध्यम से बिनांस वॉलेट में यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) खरीदकर विदेशों में भेजी जाती थी, जिससे आरोपी को पांच प्रतिशत कमीशन मिलता था। पुलिस के अनुसार गिरोह पहले निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए छोटी राशि मुनाफे के रूप में लौटाता था। बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से हटाकर ग्रुप डिलीट कर दिया जाता था।
थानाधिकारी एवं उपाधीक्षक गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक हरिराम, उप निरीक्षक अजय कुमार, कांस्टेबल भींवाराम, सुभाष चाहर और चालक कांस्टेबल सुबेसिंह की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस आरोपी के बैंक खातों और बिनांस वॉलेट को फ्रीज कराने के साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़ी एक आम समस्या है लो स्पर्म काउंट, जिसे मेडिकल भाषा में ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है। जब एक मिलीलीटर वीर्य में स्पर्म की संख्या 1.5 करोड़ से कम हो जाती है, तो इसे सामान्य से कम माना जाता है। वहीं अगर वीर्य में स्पर्म बिल्कुल न हों, तो इस स्थिति को एजूस्पर्मिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है।
क्या होते हैं इसके लक्षण
लो स्पर्म काउंट का सबसे बड़ा संकेत यही है कि लंबे समय तक कोशिश करने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता। कई मामलों में इसके अलावा कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि कुछ पुरुषों में हार्मोन असंतुलन की वजह से यौन इच्छा में कमी, इरेक्शन से जुड़ी समस्या, टेस्टिकल में दर्द, सूजन या गांठ जैसी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं।
सिर्फ धूम्रपान नहीं, ये कारण भी जिम्मेदार
अक्सर लोग मानते हैं कि स्पर्म काउंट कम होने की वजह सिर्फ सिगरेट या तंबाकू है, लेकिन इसके पीछे कई और कारण भी हो सकते हैं। मोटापा, लगातार तनाव, ज्यादा शराब का सेवन और नशीले पदार्थ भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर डालते हैं। इसके अलावा हार्मोन असंतुलन, थायरॉयड की समस्या, वैरिकोसील जैसी बीमारी, कुछ इंफेक्शन और लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन भी स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या को प्रभावित कर सकता है।
कब करानी चाहिए जांच
अगर कोई कपल एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के नियमित प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाता, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है। जिन लोगों को पहले से टेस्टिकल या प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या रही है, उन्हें भी समय पर जांच करानी चाहिए ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके।
क्या इसे ठीक किया जा सकता है
अच्छी बात यह है कि हर केस में लो स्पर्म काउंट का मतलब बांझपन नहीं होता। कई मामलों में लाइफस्टाइल सुधार और सही इलाज से स्थिति बेहतर की जा सकती है। संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल, तनाव कम करना और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाना स्पर्म की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है। इसके अलावा आधुनिक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स की मदद से भी गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को परेशान कर दिया है. दरअसल, राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर के सूर्यपुर हाट इलाके में रविवार (5 जुलाई, 2026) की सुबह एक बंद बोरी बरामद की गई है, जिसमें से एक 11 साल की बच्ची का शव निकला है.
‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि यह बच्ची एक दिन पहले यानी शनिवार (4 जुलाई, 2026) को लापता हो गई थी, जिसका अब शव बरामद किया गया है. इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न किया गया है और उसके बाद उसकी हत्या करके बोरी में बांधकर फेंक दिया गया है.
एक 11 साल की बच्ची के ऐसे हालत में शव बरामद किए जाने के बाद से लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है. स्थानीय लोगों ने इस मामले में आक्रोश जताते हुए बरुईपुर-जॉयनगर रोड को जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन से इस घृणित अपराध को अंजाम देने वाले अपराधियों को तुरंत गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
वहीं, मामले में जनता के विरोध को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सड़क जाम कर रहे प्रदर्शनकारियों से घटनास्थल पर पहुंचकर बातचीत की, उन्हें मामले में तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया और सड़क जाम को हटाया.
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
पुलिस अधिकारियों के बताया कि बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि उसकी मौत के पीछे के असली कारण का खुलासा किया जा सके और इस बात की भी पुष्टि की जा सके कि क्या बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न भी हुआ था. अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार भी किया गया है और फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है.
बंगाल पुलिस के अधिकारियों ने आगे बताया कि मृतका बच्ची एक दिन पहले शनिवार (4 जुलाई, 2026) को अपने दोस्त के जन्मदिन के लिए गिफ्ट खरीदने के लिए घर से बाहर निकली थी. इसके बाद से ही वह लापता हो गई. वहीं, बच्ची के परिजनों का आरोप है कि बच्ची जब घर से बाहर निकली तो उसे चार लोग जबरदस्ती उठाकर अपने साथ ले गए.
गुजरात के राजकोट ग्रामीण जिले के शापर-वेरावल क्षेत्र से एक ऐसा हत्या का मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान के खतरों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. पुलिस के अनुसार, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर खुद को युवती बताकर एक युवक से संपर्क करने के बाद शुरू हुआ रिश्ता तीन साल तक विवादों में उलझा रहा और आखिरकार हत्या की वारदात पर जाकर खत्म हुआ. मामले में उत्तर प्रदेश के 20 वर्षीय युवक पीयूष कुमार खरवार को गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस के मुताबिक, 25 जून को शापर-वेरावल के पास मस्कत फाटक के नजदीक रेलवे की दीवार के पास एक अज्ञात व्यक्ति का सड़ा-गला शव मिला था. शव पर महिला के कपड़े थे, जिसके कारण शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध जरूर लगा, लेकिन पहले इसे दुर्घटनावश मौत मानकर कार्रवाई शुरू की गई. हालांकि, फोरेंसिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोटों की पुष्टि होने के बाद स्पष्ट हुआ कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या का मामला है.
पुलिस जांच में सामने आया फर्जी पहचान का दावा
इसके बाद राजकोट ग्रामीण पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर जांच तेज की. इसी दौरान उत्तर प्रदेश निवासी पीयूष कुमार खरवार को हिरासत में लिया गया. पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार कर ली. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हैदराबाद में रहने के दौरान पीयूष की पहचान फेसबुक पर ‘निशा कुमार’ और इंस्टाग्राम पर ‘पूनम’ नाम से संचालित सोशल मीडिया प्रोफाइल से हुई थी. पुलिस के अनुसार, ये दोनों प्रोफाइल चंदन कुमार नामक व्यक्ति चला रहा था, जिसने खुद को महिला बताकर पीयूष से दोस्ती की थी.
एक घटना के बाद बदला रिश्ते का पूरा सच
पुलिस का कहना है कि समय के साथ दोनों साथ रहने लगे. जांच में यह भी सामने आया कि धार्मिक मन्नत का हवाला देकर चंदन शारीरिक संबंध बनाने से बचता रहा. इसी दौरान पीयूष ने उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करते हुए उसकी मांग में सिंदूर भी भरा था. पुलिस के मुताबिक, विवाद तब शुरू हुआ जब पीयूष ने एक दिन चंदन को शेविंग करते देखा. इसके बाद उसे पता चला कि जिसे वह अब तक महिला समझ रहा था, वह वास्तव में पुरुष है. पुलिस का कहना है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच लगातार तनाव बना रहा. जांच में सामने आया कि रोजगार की तलाश में पीयूष जहां-जहां गया, चंदन भी उसके संपर्क में बना रहा. यह सिलसिला हैदराबाद से उत्तर प्रदेश, फिर राजस्थान और अंत में राजकोट के पडवला इलाके तक पहुंचा.
फैक्ट्री में विवाद के बाद हत्या का आरोप
पुलिस के अनुसार, 21 जून को पडवला स्थित एक फैक्ट्री में दोनों के बीच फिर से कहासुनी हुई. आरोप है कि इसके बाद पीयूष चंदन को रेलवे ट्रैक के पास सुनसान स्थान पर ले गया, जहां उसने बड़े पत्थरों से हमला कर उसकी हत्या कर दी. पुलिस का दावा है कि वारदात के बाद आरोपी ने शव को पत्थरों से ढक दिया और किसी को शक न हो, इसलिए वापस फैक्ट्री पहुंचकर सामान्य तरीके से काम करने लगा. राजकोट ग्रामीण पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
हैदराबाद में घरेलू विवाद में पति ने शुक्रवार शाम चाकू मारकर अपनी 37 वर्षीय पत्नी की हत्या कर दी. उसे पिछले कई वर्षों से पत्नी के चाल-चलन पर शक था. इस बात पर अक्सर पति-पत्नी में कलह होती थी. शुक्रवार शाम दोनों में फिर इस बात पर विवाद हुआ, जिसके बाद गुस्साए पति ने घर में रखे चाकू से बीवी पर हमला करके गंभीर रूप से घायल कर दिया. ज्यादा खून बह जाने की वजह से पत्नी की मौके पर मौत हो गई. इसके बाद आरोपी ने अपनी बहन को फोन करके वारदात के बारे में बताया.
पति-पत्नी में होने लगे झगड़े
पुलिस के मुताबिक, यह दर्दनाक घटना हैदराबाद के चिल्कानगर में शुक्रवार शाम हुई. उप्पल थाने के सब-इंस्पेक्टर विनय के मुताबिक, मृतका की पहचान पापिथोट्टी जेसिका (37) के रूप में हुई है. वह एक अस्पताल में नर्स का काम करती थी. मृतका के छोटे भाई ने इस बारे में पुलिस को शिकायत दी है, जिस पर पुलिस मामले में जांच कर रही है.
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2015 में जेसिका का विवाह सुरेश (41) के साथ हुआ था. इसके बाद उन्हें एक बेटी पैदा हुई. शादी के कुछ समय तक तो सब ठीक चला लेकिन बाद में दोनों में छोटी-छोटी बात पर झगड़े होने लगे. हालांकि, झगड़ों के बावजूद दोनों साथ रह रहे थे.
चाकू से वार कर पत्नी का कर दिया कत्ल
मृतका के भाई ने अपनी कंप्लेंट में बताया कि जेसिका 28 जून से गांधी अस्पताल में अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए रुकी हुई थीं. जब पति को यह पता चला कि जेसिका अस्पताल में रातें बिता रही हैं तो वह शक करने लगा. उसने उसके चरित्र पर सवाल उठाते हुए मानसिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया. दोनों में इस मुद्दे पर कई बार झगड़े हुए.
पुलिस के मुताबिक, 3 जुलाई को शाम करीब 4 बजे चिल्कानगर के आदर्श नगर वाले घर में कपल के बीच फिर झगड़ा हुआ. इसी बीच आरोपी पति ने चाकू लेकर पत्नी जेसिका की छाती, बाएं कंधे और बाईं कांख में चाकू से वार कर दिए. इससे खून की धार बह निकली. ज्यादा खून बह जाने की वजह से वह मौके पर ही मर गई.
अपनी बहन को फोन करके बताया और हो गया फरार
वारदात करने के बाद आरोपी ने शनिवार सुबह अपनी बहन को फोन करके करतूत के बारे में बताया और फिर मौके से फरार हो गया. उसकी बहन ने इस घटना की सूचना मृतका के भाई को दी. इसका पता चलते ही वह अपनी बहन के घर पहुंचा, जहां पर उसने उसे मृत पाया.
उसने इस बात की सूचना पुलिस को दी. जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. साथ ही, आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. उसे शनिवार दोपहर बाद अरेस्ट कर लिया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी से वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद करने की कोशिश कर रही है.
पंजाब के तरनतारन जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. जानकारी के अनुसार, यहां अपनी रूठी हुई पत्नी को मनाने और उसे वापस घर ले जाने के लिए ससुराल गए एक युवक को उसके सगे साले ने सरेआम पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया. इस भयावह घटना में युवक और उसे बचाने दौड़ी एक महिला की तड़प-तड़पकर मौत हो गई है. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मर्डर का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
पत्नी को वापस लाने गया था लवप्रीत, मिली दर्दनाक मौत
मृतक युवक की पहचान लवप्रीत सिंह के रूप में हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लवप्रीत सिंह और उसकी पत्नी संदीप कौर के बीच पिछले कुछ समय से अनबन चल रही थी, जिसके बाद संदीप अपने मायके जाकर रहने लगी थी. बीती 13 जून को लवप्रीत अपनी पत्नी को समझा-बुझाकर वापस घर लाने के मकसद से अपने ससुराल गया था. उसे अंदाजा भी नहीं था कि वहां उसकी जिंदगी का सबसे खौफनाक अंत इंतजार कर रहा है. वहां बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि लवप्रीत के साले साजन सिंह ने गुस्से में आकर अपने जीजा पर कोई ज्वलनशील पदार्थ फेंका और माचिस जला दी. देखते ही देखते लवप्रीत आग का गोला बन गया.
बचाने आई महिला भी लपटों में घिरी, दोनों की मौत
जब लवप्रीत को जिंदा जलाया जा रहा था, तब साजन सिंह की भाभी गुरजीत कौर बीच-बचाव करने और लवप्रीत की जान बचाने के लिए आगे दौड़ीं. लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि गुरजीत कौर भी उसकी चपेट में आ गईं और बुरी तरह झुलस गईं. अस्पताल में इलाज के दौरान लवप्रीत और गुरजीत दोनों ने दम तोड़ दिया. इस घटना में आरोपी साजन सिंह भी खुद थोड़ा झुलस गया, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है.
रूह कंपा देने वाला वीडियो आया सामने, पुलिस ने दर्ज किया केस
इंटरनेट पर आए सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि कैसे एक शख्स अचानक दूसरे पर आग लगा देता है और पीड़ित खुद को बचाने के लिए बेतहाशा इधर-उधर भागता है. गुरजीत कौर को भी आग की लपटों में घिरा देख पीछे खड़ा एक तीसरा शख्स मदद के लिए दौड़ता है. वीडियो में आग तेजी से फैलती हुई और दोनों पीड़ितों को अपनी चपेट में लेती दिख रही है. तरनतारन पुलिस ने इस जघन्य अपराध को लेकर मुख्य आरोपी साजन सिंह के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है.
बाराबंकी जिले में एसटीएफ ने एक ऐसे अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया है, जिसने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी सबसे जरूरी चीज, चाय को ही सवालों के घेरे में ला दिया है। थाना बड्डूपुर क्षेत्र के ग्राम शाहपुर में चल रही नकली और मिलावटी चायपत्ती बनाने की फैक्ट्री पर छापेमारी कर पुलिस ने भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की है। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
एसटीएफ की टीम ने मौके से लगभग 763.75 किलोग्राम मिलावटी चायपत्ती बरामद की है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री और रसायन भी मिले हैं। बरामद सामान में फर्जी ब्रांड की मिलावटी चायपत्ती के सैकड़ों पैकेट, लगभग 3.9 किलोग्राम रंगीन रसायन, पैकिंग मशीन और भारी मात्रा में खाली रैपर और बोरे शामिल हैं। इन सभी चीजों का इस्तेमाल नकली चाय को असली ब्रांड की तरह पैक कर बाजार में बेचने के लिए किया जा रहा था।
कैसे चलता था मिलावट का यह धंधा?
जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित गिरोह द्वारा चलाया जा रहा था। गिरोह के सदस्य असम से सस्ती और घटिया क्वालिटी की चायपत्ती मंगाते थे। इसके बाद उसमें रंग और रसायन मिलाकर उसे मजबूत स्वाद और आकर्षक रंग दिया जाता था। फिर इस मिलावटी चाय को अलग-अलग नामी ब्रांड के पैकेट में पैक कर लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, शाहजहांपुर और बहराइच जैसे जिलों में सप्लाई किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी ने खोले कई राज
गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद शकील ने पूछताछ में स्वीकार किया कि यह पूरा कारोबार एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। उसके मुताबिक, इस धंधे में कई लोग शामिल हैं जो अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। उसने यह भी बताया कि कम लागत में तैयार होने वाली यह नकली चाय बाजार में असली ब्रांड के नाम पर बेची जाती थी, जिससे गिरोह को मोटा मुनाफा होता था।
एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई
एसटीएफ की यह कार्रवाई अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में की गई। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर टीम ने शाहपुर गांव में छापा मारा और मौके से एक आरोपी को दबोच लिया। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
इस मामले में थाना बड्डूपुर में बीएनएस की धारा 318(2), 318(4), 274 और 275 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे सप्लाई नेटवर्क और फंडिंग चैन की जांच कर रही है। फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे सप्लाई चेन पर है और जांच आगे बढ़ रही है।
मौत एक ऐसा सच है जिससे कोई भी बच नहीं सकता. गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है. आमतौर पर माना जाता है कि जब किसी इंसान का अंत समय आता है, तो यमराज के दूत यानी यमदूत उसे लेने आते हैं.
गरुड़ पुराण के अनुसार यमदूतों का रूप बहुत भयानक होता है और वे पापियों को बेरहमी से घसीटते हुए ले जाते हैं. लेकिन इसी पुराण में एक बेहद गुप्त और खास नियम का भी जिक्र मिलता है.
शास्त्रों के अनुसार 3 तरह के लोग ऐसे होते हैं जिनके पास आने की हिम्मत यमराज के दूत भी नहीं कर पाते. यमदूत इन खास लोगों को कभी हाथ तक नहीं लगाते, बल्कि इनके प्राण लेने के लिए खुद भगवान के दिव्य पार्षद आते हैं. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार कौन से हैं वे खुशकिस्मत लोग.
प्रभु भक्ति में लीन रहने वाले सच्चे भक्त
इस सूची में पहला नाम उन लोगों का आता है जो अपना पूरा जीवन ईश्वर की भक्ति और सिमरन में बिता देते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार जो व्यक्ति हर समय भगवान का नाम लेता है, उसका अंत समय बहुत शांति से कटता है.
ऐसे लोगों के मन में मृत्यु का कोई डर नहीं होता. जब उनकी सांसें खत्म होने वाली होती हैं, तो यमराज के भयानक दूत उनके आसपास भी नहीं फटकते. प्रभु का नाम जपने वाले इन लोगों के प्राण हरने के लिए सीधे वैकुंठ धाम से विष्णुदूत आते हैं. वे बहुत सुंदर और शांत रूप में प्रकट होते हैं. वे इन भक्तों की आत्मा को बहुत आदर के साथ अपने दिव्य विमान में बैठाकर ले जाते हैं.
निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करने वाले
दूसरा नियम उन लोगों के लिए है जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं. शास्त्रों में बताया गया है कि भूखों को खाना खिलाना, बीमारों की सेवा करना और बेसहारा लोगों को आश्रय देना सबसे बड़ा धर्म है.
जो इंसान बिना किसी लालच के समाज की भलाई करता है, उसके खाते में अपार पुण्य जमा हो जाते हैं. ऐसे दयालु लोगों के पास जाने से यमदूत खुद कतराते हैं.
यमराज के दूतों को केवल उन लोगों को ले जाने का अधिकार है जिन्होंने जीवन भर दूसरों को सताया हो. दूसरों के आंसू पोंछने वाले परोपकारी लोगों का स्वागत करने के लिए स्वर्ग के देवता खुद आते हैं.
सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले इंसान
तीसरी स्थिति उन लोगों की है जो जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएं, कभी झूठ और बेईमानी का रास्ता नहीं चुनते. गरुड़ पुराण के अनुसार सत्य बोलना और अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना भी एक बहुत बड़ी तपस्या है.
जो लोग माता पिता की सेवा करते हैं, किसी का दिल नहीं दुखाते और धर्म के नियमों का पालन करते हैं, उन्हें यमराज का भय नहीं सताता. यमदूत ऐसे ईमानदार और साफ दिल वाले लोगों को दूर से ही प्रणाम करते हैं.
इनके प्राण निकलते समय इन्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होता. इनकी आत्मा को सीधे मोक्ष या उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है.
अच्छे कर्मों का मिलता है ये दिव्य फल
इस तरह गरुड़ पुराण की यह बातें हमें जीवन को सही दिशा में जीने का संदेश देती हैं. मृत्यु से डरने की बजाय हमें अपने आज के कर्मों को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए. जो इंसान लालच, नफरत और धोखेबाजी से दूर रहता है, उसका अंत समय अपने आप सुधर जाता है.
यमदूतों का खौफ सिर्फ उन्हीं के लिए है जो बुरे कामों में डूबे रहते हैं. अगर हमारा मन साफ है और हम भगवान पर भरोसा रखते हैं, तो यमराज के दूत हमारे लिए कोई मायने नहीं रखते. अच्छे कर्म करने वालों को अंत में यमदूतों की यातनाएं नहीं बल्कि ईश्वर की शरण मिलती है.
Gorakhpur:
गोरखपुर के सहजनवा थाना क्षेत्र में पांच वर्षीय मासूम के अपहरण और हत्या के चर्चित मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए एक दंपती को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी मासूम का अपहरण फिरौती वसूलने की नीयत से कर ले गए थे, लेकिन पुलिस की तेजी से शुरू हुई जांच और तलाश अभियान के कारण पकड़े जाने के डर से उन्होंने बच्चे की हत्या कर दी।
बच्चे की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक, 2 जुलाई 2026 को मासूम के दादा ने सहजनवा थाने में अपने पांच वर्षीय पौत्र के घर से लापता होने की सूचना दी थी। शिकायत के आधार पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने बच्चे की तलाश शुरू की। जांच के दौरान आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें बालक को स्थानीय निवासी कल्पेश राय के साथ जाते हुए देखा गया। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध की तलाश तेज कर दी।
आरोपी गिरफ्तार
लगातार की गई खोजबीन के दौरान 3 जुलाई को लापता बालक का शव बरामद हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश फैल गया। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रविवार को आरोपी कल्पेश राय और उसकी पत्नी नीलम प्रभा राय को गिरफ्तार कर लिया।
परिवार की सूचना के बाद पुलिस सक्रिय
पुलिस पूछताछ में आरोपी कल्पेश राय ने स्वीकार किया कि उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर फिरौती के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण किया था। हालांकि, जब परिवार की सूचना पर पुलिस सक्रिय हो गई और गिरफ्तारी की आशंका बढ़ी तो दोनों ने मिलकर मासूम की हत्या कर दी। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस जांच में पूरा मामला उजागर हो गया।
पहलुओं की गहन जांच जारी
सहजनवा पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में दर्ज मुकदमे में अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई को थाना प्रभारी बलराम पाण्डेय के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने अंजाम दिया, जिसमें उपनिरीक्षक जितेन्द्र यादव, उपनिरीक्षक मृत्युंजय कुमार तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।