जिले के जैजैपुर थाना क्षेत्र में एक भिक्षुक महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान राजकुमार कंवर और छतराम कंवर के रूप में हुई है। आरोप है कि दोनों ने महिला को राजकुमार कंवर के घर में दो दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उसे कमरे में बंद कर जबरन शराब पिलाई गई और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
घटना के बाद पीड़िता ने जैजैपुर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 70(1) एवं 127(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है।
राजधानी रायपुर के आजाद चौक थाना क्षेत्र में पार्षद के लेटरहेड और हस्ताक्षर का फर्जी इस्तेमाल कर सरकारी दस्तावेज तैयार करने के मामले में पुलिस ने च्वॉइस सेंटर संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक लैपटॉप, एक कलर प्रिंटर और एक लैमिनेशन मशीन जब्त की गई है।
पुलिस के अनुसार, दीपक जायसवाल, जो शहीद चूड़ामणि नायक वार्ड क्रमांक-37, नगर पालिका निगम रायपुर के निर्वाचित पार्षद हैं, ने आजाद चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके नाम से जारी लेटरहेड और हस्ताक्षर का फर्जी तरीके से उपयोग कर मंगल बाजार स्थित आर्यन च्वॉइस सेंटर में जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड सहित नगर निगम से संबंधित विभिन्न दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
शिकायत के आधार पर थाना आजाद चौक में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 336(3), 340(2) और 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मंगल बाजार स्थित सेंटर में दी गई दबिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर थाना आजाद चौक पुलिस ने जांच तेज की। साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस टीम ने मंगल बाजार स्थित आर्यन च्वॉइस सेंटर में दबिश दी। वहां मौजूद संचालक विपीन केशरी से दस्तावेजों के संबंध में पूछताछ की गई।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने पार्षद के लेटरहेड और हस्ताक्षर का अनधिकृत एवं फर्जी तरीके से उपयोग कर जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज तैयार करने की बात स्वीकार की।
लैपटॉप, प्रिंटर और लैमिनेशन मशीन जब्त
पुलिस ने आरोपी विपीन केशरी (38), पिता राकेश चंद्र केशरी, निवासी कटरा बाजार, थाना कोईरवाना, जिला भदोही (उत्तर प्रदेश) तथा वर्तमान पता अश्वनी नगर, कृति ब्यूटी पार्लर के पास, थाना पुरानी बस्ती, रायपुर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक लैपटॉप, एक कलर प्रिंटर और एक लैमिनेशन मशीन जब्त की गई है।
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर एक अंधे हत्याकांड का खुलासा करते हुए मृतक की बहू समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि पारिवारिक विवाद के चलते बहू ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर 70 वर्षीय ससुर की हत्या की साजिश रची थी। आरोपियों ने आधी रात को घर में घुसकर पहले लकड़ी के फट्टे और मुक्कों से बुजुर्ग पर हमला किया, फिर उनके हाथ-पैर बांध दिए और मुंह में कपड़ा ठूंसकर हत्या कर दी।
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार तथा एसडीओपी जशपुर के मार्गदर्शन में थाना दुलदुला पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया।
घर में मृत आस्था में मिली थी बुजुर्ग की लाश
जानकारी के अनुसार, 4 जुलाई 2026 को थाना दुलदुला क्षेत्र के ग्राम बोड़ाजोर निवासी 70 वर्षीय चुगरू प्रधान अपने घर में मृत अवस्था में पाए गए। उनके हाथ-पैर बंधे हुए थे और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में एफएसएल टीम और डॉग स्क्वॉड की मदद से घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया व वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए।
पारिवारिक विवाद के चलते बहू ने रची हत्या की साजिश
पुलिस जांच में पता चला कि मृतक का अपनी बहू सुगंती बेसरा के साथ लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते उसने अपने तीन परिचितों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। इस बीच 3 और 4 जुलाई की दरमियानी रात आरोपी मोटरसाइकिल से मृतक के घर पहुंचे। दरवाजा खुलवाने के बाद उन्होंने लकड़ी के फट्टे और मुक्कों से हमला किया। इसके बाद बुजुर्ग के हाथ-पैर बांध दिए और मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसकी हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर से मिली सूचना और वैज्ञानिक जांच के आधार पर आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान सभी आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त लकड़ी का फट्टा, एक मोटरसाइकिल और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
सोशल मीडिया पर एक क्रिएटर को रईसी दिखाना भारी पड़ गया. उसकी रील्स देखने वाले तीन लोगों ने मिलकर उसे किडनैप कर लिया. पुलिस ने तीनों आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसका जुलूस निकाला.
Kidnapping Case: सोशल मीडिया पर महंगे मोबाइल, लग्जरी लाइफ और रईसी दिखाने वाली रील्स बनाना मध्य प्रदेश के एक युवक को भारी पड़ गया. उसके फॉलोअर्स ने उसकी रील्स देखी, उन्हीं ने उसे अगवा कर लिया. परिवार से 10 लाख रुपये की फिरौती मांग डाली. हालांकि पुलिस की तेजी से की गई कार्रवाई की वजह से युवक सुरक्षित घर लौट आया और तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए.
यह मामला मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के पवई का है. पीड़ित की पहचान 19 वर्षीय अंशुल उर्फ कान्हा डेंगरे के रूप में हुई है. बताया गया कि कान्हा सोशल मीडिया पर अक्सर महंगे मोबाइल, स्टाइलिश लाइफस्टाइल और रईसी दिखाने वाली रील्स पोस्ट करता था.
रिहाई के बदले मांगे 10 लाख
बता दें कि 27 जून को तीन लोगों ने कान्हा का अपहरण कर लिया. आरोपियों ने परिवार से उसकी रिहाई के बदले 10 लाख रुपये की मांग की. बेटे की सुरक्षा को देखते हुए परिजनों ने पहले आरोपियों के बैंक खाते में 1.48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए. इसके साथ ही उन्होंने पुलिस को भी पूरी घटना की जानकारी दी.
तीन आरोपी गिरफ्तार
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और सबसे पहले जिस बैंक खाते में पैसे भेजे गए थे. उसे तुरंत फ्रीज कराया गया. इसके बाद तकनीकी जांच और लगातार तलाश के आधार पर पुलिस ने अंशुल को सुरक्षित बरामद कर लिया और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने इस मामले में राजकमल रजक, राजकुमार पाल और शिवेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया. उनके पास से एक पिस्तौल, दो देशी कट्टे और वारदात में इस्तेमाल की गई दो मोटरसाइकिलें भी बरामद हुईं.
निकाला गया जुलूस
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों का पवई नगर की सड़कों पर पैदल जुलूस निकाला. पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य अपराधियों को सख्त संदेश देना और लोगों में कानून के प्रति भरोसा बढ़ाना था. बाद में तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.
इससे पहले भी हुआ ऐसा केस
ऐसा पहला मामला नहीं है, जब सोशल मीडिया पर रईसी दिखाना किसी के लिए मुसीबत बन गया हो. इससे पहले मध्य प्रदेश के शिवपुरी में रचना गुर्जर नाम की महिला ने सोशल मीडिया पर अपने महंगे गहनों की रील शेयर की थी. इसके कुछ समय बाद चोरों ने उनके घर को निशाना बनाया और लाखों रुपये के गहने चोरी कर लिए थे. यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी, महंगी चीजें या संपत्ति का दिखावा करना कभी-कभी अपराधियों के लिए आसान सुराग बन सकता है.
हमारे शास्त्रों और पुराणों में भोजन को लेकर कई जरूरी नियम बताए गए हैं. सनातन धर्म में माना जाता है कि जैसा अन्न होता है, वैसा ही हमारा मन बनता है. गरुड़ पुराण में विशेष तौर पर बताया गया है कि हमें हर किसी के घर का खाना नहीं खाना चाहिए.
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके घर का भोजन करने से आपके पुण्य कर्म नष्ट हो जाते हैं. इतना ही नहीं, इससे आपकी उम्र भी कम हो सकती है और आपको पाप का भागी बनना पड़ता है. आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण के अनुसार वे कौन से 4 तरह के लोग हैं जिनके घर भूलकर भी खाना नहीं खाना चाहिए.
ब्याजखोर या सूदखोर का खाना
इस सूची में पहला नाम उन लोगों का आता है जो गलत तरीके से ब्याज का धंधा करते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाकर भारी ब्याज वसूलता है, उसका धन अशुद्ध होता है.
ऐसे सूदखोर का मुख्य मकसद दूसरों को परेशान करके पैसा कमाना होता है. जब आप ऐसे किसी इंसान के घर का खाना खाते हैं, तो उनकी नकारात्मक ऊर्जा आपके भीतर चली जाती है.
इससे आपके विचार भी दूषित होने लगते हैं और आपके संचित पुण्य धीरे-धीरे घटने लगते हैं. इसलिए मेहनत की कमाई का ही भोजन स्वीकार करना चाहिए.
चोर या बेईमान के घर का भोजन
दूसरा नियम चोर, डाकू या बेईमानी से पैसा कमाने वाले लोगों के लिए है. जो व्यक्ति दूसरों का हक मारकर या चोरी करके अपना घर चलाता है, उसके घर में कभी भी सकारात्मकता नहीं हो सकती.
ऐसे लोगों के घर में बनने वाले भोजन में रोने-धोने और बेबसी की बददुआएं शामिल होती हैं. यदि आप जानते हुए भी किसी चोर या अपराधी के घर का खाना खाते हैं, तो शास्त्रों के अनुसार आप भी उनके पाप में हिस्सेदार बन जाते हैं.
ये अन्न आपके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है और आपकी आयु को कम करता है.
गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति
तीसरी स्थिति किसी ऐसे व्यक्ति की है जो लंबे समय से किसी गंभीर या संक्रामक बीमारी से पीड़ित हो. गरुड़ पुराण में व्यावहारिक कारणों से भी ऐसे घर में भोजन करने से मना किया गया है.
जो व्यक्ति बहुत बीमार है, उसके आसपास का वातावरण और हवा कीटाणुओं से भरी हो सकती है. पुराने समय में चिकित्सा व्यवस्था आज जैसी नहीं थी, इसलिए संक्रमण से बचने के लिए ये नियम बनाया गया था.
बीमार व्यक्ति के घर का खाना खाने से आप भी उस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं, जिससे आपकी सेहत बिगड़ सकती है और उम्र घट सकती है.
किन्नरों के हाथ का भोजन
चौथा और बेहद महत्वपूर्ण नियम किन्नरों के घर भोजन करने से जुड़ा हुआ है. शास्त्रों में बताया गया है कि किन्नरों को दान देना सबसे उत्तम और पुण्यदायी कार्य माना जाता है.
उन्हें कपड़े, पैसे और अनाज दान करने से घर में बरकत आती है. लेकिन गरुड़ पुराण के अनुसार, किन्नरों के घर पर जाकर भोजन करने की मनाही है. इसके पीछे कारण ये है कि किन्नरों को समाज में कई तरह के अच्छे-बुरे लोग दान देते हैं.
उनके पास आने वाले धन में हर तरह के लोगों की ऊर्जा शामिल होती है, इसलिए उनके येां भोजन करने से बचना चाहिए.
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, सेहत से जुड़े जोखिम भी बदलते रहते हैं, इसलिए उम्र के हिसाब से हेल्थ चेक-अप करवाना बचाव के लिए जरूरी हो जाता है। जवानी से लेकर बुढ़ापे तक अलग-अलग तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है, जिसके लिए खास तरह की प्रिवेंटिव हेल्थ स्क्रीनिंग और रेगुलर मेडिकल टेस्ट की ज़रूरत होती है। यह जानना कि जिंदगी के किस पड़ाव पर कौन से टेस्ट ज़रूरी हैं, सेहत से जुड़ी समस्याओं का जल्दी पता लगाने और उन्हें सही ढंग से संभालने में मदद करता है। यह गाइड अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए ज़रूरी स्क्रीनिंग के बारे में बताती है, ताकि आप अपनी सेहत और भलाई को लेकर पहले से ही सतर्क रह सकें।
उम्र के हिसाब से हेल्थ चेक-अप क्यों ज़रूरी हैं
समय के साथ इंसानी शरीर बदलता है और सेहत से जुड़े संभावित जोखिम भी बदलते हैं। जवानी के शुरुआती दौर में ध्यान बीमारियों से बचाव और सेहत के बेसलाइन (शुरुआती स्तर) को ट्रैक करने पर होता है, जबकि बाद के चरणों में पुरानी या गंभीर बीमारियों की निगरानी जरूरी हो जाती है। नियमित प्रिवेंटिव केयर (बचाव वाली देखभाल) से लक्षणों के दिखने से पहले ही छिपी हुई बीमारियों का पता लगाने में मदद मिलती है। इससे समय पर इलाज हो पाता है, बेहतर नतीजे मिलते हैं और लंबे समय तक रहने वाली जटिलताओं का खतरा कम होता है।
जवानी के शुरुआती दौर में हेल्थ चेक-अप (उम्र 20–29)
इस दौर को अक्सर सबसे सेहतमंद माना जाता है, लेकिन लंबे समय तक सेहतमंद रहने के लिए मज़बूत नींव बनाना ज़रूरी है। जवानी के शुरुआती दौर में सुझाए गए हेल्थ टेस्ट:
-ब्लड प्रेशर की जांच (हर 1–2 साल में)
-बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और वजन की निगरानी
-बेसिक ब्लड टेस्ट (CBC, अगर जोखिम के कारण हों तो ब्लड शुगर)
-लिपिड प्रोफ़ाइल (अगर परिवार में बीमारी का इतिहास हो या जीवनशैली से जुड़ा जोखिम हो)
-यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की जांच
मानसिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन (तनाव, एंग्जायटी, नींद के पैटर्न)
ये रूटीन हेल्थ टेस्ट जीवनशैली से जुड़े शुरुआती जोखिमों की पहचान करने और सेहत का बेसलाइन तय करने में मदद करते हैं।
युवावस्था में हेल्थ चेक-अप (उम्र 30–39)
जैसे-जैसे मेटाबॉलिज़्म बदलने लगता है, इस दौर में ज़्यादा व्यवस्थित प्रिवेंटिव हेल्थ स्क्रीनिंग की ज़रूरत होती है। उम्र (30–39) के हिसाब से सुझाए गए मेडिकल टेस्ट:
-हर साल ब्लड प्रेशर की निगरानी
-फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c
-लिपिड प्रोफ़ाइल (कोलेस्ट्रॉल का स्तर)
-थायरॉइड फंक्शन टेस्ट
-लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट
-सर्वाइकल स्क्रीनिंग (महिलाओं के लिए पैप स्मीयर)
-तनाव, नींद और जीवनशैली का आकलन
ये स्क्रीनिंग डायबिटीज़ या हार्मोनल असंतुलन जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने में मदद करती हैं।
मध्य-आयु में हेल्थ चेक-अप (उम्र 40–49)
यह एक अहम दौर है जब कई छिपी हुई बीमारियां सामने आने लगती हैं। 40 साल की उम्र के बाद ज़रूरी टेस्ट:
-डायबिटीज की जांच (फास्टिंग ग्लूकोज, HbA1c)
-दिल की सेहत की जांच (ECG, लिपिड प्रोफाइल)
-ब्लड प्रेशर की नियमित जांच
-मैमोग्राम (महिलाओं के लिए, जोखिम के आधार पर)
-प्रोस्टेट हेल्थ स्क्रीनिंग (पुरुषों के लिए, अगर सलाह दी जाए)
-आंखों की जांच (दृष्टि और ग्लूकोमा की जांच)
-विटामिन D और हड्डियों की सेहत की जांच
इस उम्र में, नियमित प्रिवेंटिव हेल्थ स्क्रीनिंग से गंभीर समस्याओं का जोखिम काफी कम हो सकता है।
बाद की उम्र में हेल्थ चेक-अप (50 साल और उससे ज़्यादा उम्र)
उम्र बढ़ने के साथ पुरानी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है, इसलिए नियमित चेक-अप ज़रूरी हो जाते हैं। बाद की उम्र में सुझाई गई हेल्थ स्क्रीनिंग:
-कैंसर की जांच (कोलन, ब्रेस्ट, प्रोस्टेट)
-बोन डेंसिटी टेस्ट (ऑस्टियोपोरोसिस की जांच)
-कार्डियोवैस्कुलर स्क्रीनिंग (ECG, ज़रूरत पड़ने पर स्ट्रेस टेस्ट)
-ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी
-सुनने और देखने की क्षमता की जांच
-किडनी और लिवर के कामकाज की जांच
नोट: किसी भी मेडिकल कंडीशन का खुद से इलाज करने की बजाय अपने डॉक्टर की सलाह लें।
5 बच्चों की मां के ‘अवैध संबंध’ का खौफनाक अंजाम! पहली शादी से तलाक, दूसरे को धोखा; गुस्साए पति ने देसी कट्टे से प्रेमी को ठोका!
फरीदाबाद के सेक्टर-58 से सनसनीखेज वारदात सामने आई है जहां राजीव कॉलोनी में छत पर सो रहे एक 25 साल के युवक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी कोई नहीं, बल्कि युवक के साथ लिव-इन में रहने वाली महिला का पति है जिसे अपनी पत्नी के अवैध संबंधों को पहले से ही पता था. कई बार महिला को युवक के साथ न रहने की चेतावनी भी दी थी लेकिन बावजूद महिला अपनी जिद पर अड़ी रही. पुलिस की पूछताछ से खुलासा हुआ कि युवक छत पर सोया था इसलिए आरोपी के निशाने पर आ गया लेकिन महिला अंदर कमरे में थी जिसके चलते वो जिंदा बच गई.
3 साल से चल रहा था लिव-इन
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी मैनपुरी निवासी 26 वर्षीय विपिन यादव राजीव कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान में अपनी शादीशुदा गर्लफ्रेंड के साथ रहता था. दोनों के लिव-इन रिलेशनशिप को 2-3 साल हो गए. महिला की पहली शादी से तलाक हो गया था.करीब 7 से 8 साल पहले दूसरी शादी विनायकपुर निवासी विजय यादव से हुई थी. विपिन यादव पति के घर के पास में ही रहता था, जिससे धीरे-धीरे संपर्क बना और एक-दूसरे से प्यार करने लगे.
ससुराल से भागने की कई बार कोशिश
पुलिस की जांच से पता चला कि महिला ने अपने ससुराल से 2 बार भागने की कोशिश की थी. लेकिन सफल नहीं हो पाई, इसलिए 1 जून को वो अपनी भाभी और बहन से मिलने के बहाने हरियाणा के फरीदाबाद चली आई. यहां राजीव कॉलोनी में अपने परिवार संग रहने लगी. जब पति विजय यादव ने ससुराल वापस ले जाने की जिद की तो महिला ने साफ इनकार कर दिया. गांव के बजाए फरीदाबाद में रहने की इच्छा जताई जिसके लिए पति ने उसी इलाके में एक कमरा किराए पर ले लिया.
पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
आरोपी विजय यादव और महिला से कड़ी पूछताछ से सामने आया कि बॉयफ्रेंड विपिन यादव भी महिला के पास राजीव कॉलोनी स्थित आवास पर रहने लगा. दोनों ने एक साथ टिफिन बनाने वाली कंपनी में काम किया और एक साथ रहने लगे. इस बीच हत्या के आरोपी पति ने कई बार महिला को ससुराल साथ चलने को कहा लेकिन महिला नहीं मानी. इसी बात से नाराज विजय यादव वापस गांव तो चला गया, लेकिन बदले की आग लेकर 30 जून की रात को वापस आ गया. बताया जा रहा है कि उस रात तीनों ने एक साथ बैठकर खाना भी खाया था. विजय और विपिन छत पर सो गए जबकि महिला कमरे में चली गई.
खोपड़ी में गोली उतारकर फरार
पुलिस की जांच से पता चला कि रात को जब महिला का प्रेमी गहरी नींद में था तो विजय ने अपने दोस्त से लिया देसी कट्टा निकाला और विपिन के सिर में फायरिंग कर दी. गोली की आवाज सुनकर सभी लोग छत पर पहुंचे लेकिन तब तक विजय फरार हो चुका था. महिला की शिकायत पर पुलिस ने पति विजय यादव को गिरफ्तार किया और उसके पास से देसी कट्टे के साथ-साथ 2 जिंदा कारतूस बरामद की जिसे 6,000 में खरीदा गया था. पुलिस ने पूछताछ में पाया कि पत्नी विजय से करीब 12 साल बड़ी है. पहली शादी से महिला के 4 बच्चे और दूसरी शादी से एक बच्चा भी है. महिला पांचों बच्चों को खुद पाल रही थी.
2 जुलाई की रात को हुई वारदात की शिकायत महिला ने ही सेक्टर-58 थाना में की थी जबकि प्रेमी विपिन यादव की मौत उसी रात दिल्ली के ट्रामा सेंटर में हो गई थी. पुलिस ने आरोपी पति विजय यादव के खिलाफ हत्या के जुर्म में केस दर्ज करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
Akriti Sutar Death: साउथ दिल्ली की लोधी कॉलोनी में 28 साल की नई-नई शादीशुदा महिला की रहस्यमयी मौत की घटना सामने आई है. महिला आकृति सुतार के घरवालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए परेशान करने और हत्या के आरोप लगाए हैं.
पुलिस का कहना है कि वे सभी मुमकिन एंगल से जांच कर रहे हैं, वहीं आकृति सुतार के परिवार ने ज़ोर देकर कहा है कि उसकी हत्या की गई है और सुसाइड का कोई सवाल ही नहीं है, जैसा कि उसके पति के परिवार ने कहा है.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, शनिवार शाम, पुष्प विहार की रहने वाली आकृति, दिल्ली की लोधी कॉलोनी में पालिका कुंज में NDMC फ्लैट्स की तीसरी मंज़िल से कथित तौर पर गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल पाई गईं. यह जगह उनके ससुराल से लगभग 10 km दूर थी और अभी तक यह पता नहीं चला है कि वह वहां क्यों गई थीं.
उन्हें वहां रहने वालों ने जमीन पर पड़ा पाया और पुलिस को बुलाया. जमीन पर खून नहीं था, लेकिन उसके शरीर पर चोट के निशान और दूसरी चोटें थीं. उसे तुरंत AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जिसके बाद पोस्टमॉर्टम जांच चल रही है.
छतरपुर में एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव थी महिला
पुलिस के मुताबिक, आकृति सुतार – जो छतरपुर में एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करती थी. महिला ने 24 अप्रैल को अरस्तु सिक्का से शादी की थी. दोनों एक-दूसरे को आठ साल से जानते थे. एक रिश्तेदार ने कहा कि यह एक लव मैच था. आकृति पहले अरस्तु की बहन, अगस्तिका सिक्का की दोस्त थी, और फिर अरस्तु के साथ रिलेशनशिप में आ गई.
बेरोजगार है पति, दहेज का दावा
सिक्का अभी बेरोज़गार है. उसके पिता सरकारी नौकरी करते हैं लेकिन वह अपने काम के बारे में कभी कोई जानकारी नहीं देते. आकृति के परिवार ने सुसाइड की बात से इनकार किया है और आरोप लगाया है कि दहेज की मांग को लेकर उसकी हत्या की गई. उन्होंने दावा किया कि अरस्तु सिक्का और उसका परिवार 20 लाख रुपये मांग रहे थे और शादी के बाद से ही आकृति को बार-बार परेशान किया और धमकाया था.
उसके 24 साल के भाई अमय सुतार ने दावा किया है कि वह दिमागी तौर पर मजबूत है और कभी अपनी जान नहीं लेती. परिवार ने यह भी दावा किया कि अरस्तु ने उसे कई बार जान से मारने की धमकी दी थी और उसकी मौत से ठीक दो दिन पहले कपल के बीच गंभीर झगड़ा हुआ था.
मौत से कुछ घंटे पहले महिला ने मां से की थी बात
घटना के बारे में बताते हुए, आकृति के चाचा मनंजय सुतार ने कहा आकृति ने शनिवार शाम करीब 6 बजे अपनी माँ से बात की थी, अपनी मौत से कुछ घंटे पहले. उसने कहा था कि वह दिन के लिए ऑफिस से निकली थी और घर आ रही थी. रात करीब 8 बजे, परिवार को अरस्तु का फोन आया कि आकृति गायब है. करीब 90 मिनट बाद, पुलिस ने उन्हें बताया कि पालिका कुंज में एक महिला की लाश मिली है.
मौके पर खून के कोई धब्बे नहीं मिले
परिवार ने घटना के हालात पर सवाल उठाए हैं, और बताया कि जिस बिल्डिंग में आकृति की लाश मिली, वह ज़्यादातर खाली है. उन्होंने आगे दावा किया कि मौके पर खून के कोई धब्बे नहीं मिले, जिससे उन्हें शक है कि जुर्म की प्लानिंग सोच-समझकर की गई थी. उन्होंने कहा कि मौत की सही वजह पता लगाने में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बहुत ज़रूरी होगी.
परिवार के मुताबिक, आकृति ने अपनी शादी के लिए छुट्टी लेने के बाद 1 जुलाई को काम फिर से शुरू किया था और शनिवार को अपने साथ काम करने वालों के लिए एक छोटी सी पार्टी भी रखी थी. उसके चाचा ने सुसाइड थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा अगर वह दुखी थी या अपनी जान देने का प्लान बना रही थी, तो वह काम पर लौटने का जश्न क्यों मना रही थी? इन दावों के बाद पुलिस अब मामले की जांच में जुट चुकी है.
Odisha News: ओडिशा की अपराध शाखा (CID-CB) ने करीब ढाई साल पुराने एक ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है. वैज्ञानिक जांच और डीएनए प्रोफाइलिंग की मदद से न केवल मृतक की पहचान की गई, बल्कि हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों तक भी जांच एजेंसी पहुंच गई. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है.
यह मामला सीआईडी-सीबी थाना केस संख्या-02/2024 से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत उदला थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में दर्ज हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले से हुई थी. उस समय एक सुनसान इलाके में स्थित परित्यक्त कुएं से बोरे में बंद एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था. शव लंबे समय तक पानी में पड़े रहने के कारण बुरी तरह सड़ चुका था, जिससे उसकी पहचान करना संभव नहीं हो सका.
जांच टीम ने दोबारा की थी पड़ताल
बाद में मामले की जांच सीआईडी-सीबी को सौंपी गई. जांच टीम ने घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की दोबारा पड़ताल की और तकनीकी व वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया. अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्रों से दर्ज सभी गुमशुदगी के मामलों का मिलान किया. इस प्रक्रिया में दो संभावित व्यक्तियों की पहचान की गई, जिनके परिवारों के रक्त नमूने डीएनए परीक्षण के लिए भेजे गए.
29 जून 2026 को आई डीएनए रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि कुएं से मिला शव मयूरभंज जिले के उदला थाना क्षेत्र के सुखुआ साही गांव निवासी जुबुराज सिंह का था. मृतक की पहचान उसके बेटे बिस्वनाथ सिंह के डीएनए से मेल खाने के बाद सुनिश्चित हुई.
कथित तांत्रिक अनुष्ठान के लिए बुलाया गया था
जांच के दौरान सामने आया कि घटना से पहले जुबुराज सिंह को बानासाही (डुगुधा) गांव में झाड़-फूंक और कथित तांत्रिक अनुष्ठान के लिए बुलाया गया था. वहां उन्होंने एक भोज में भी हिस्सा लिया था. इसके बाद वह रहस्यमय तरीके से लापता हो गए. कुछ समय बाद उनका शव बोरे में बंद अवस्था में काजू के जंगल के बीच स्थित एक परित्यक्त कुएं से बरामद हुआ था.
सीआईडी-सीबी की जांच में खुलासा हुआ कि गांव के कुछ लोगों को शक था कि जुबुराज सिंह कथित रूप से जादू-टोना करते थे. आरोपियों का मानना था कि उनकी तांत्रिक गतिविधियों के कारण ही एक बच्चे की मौत हुई थी. इसी अंधविश्वास और शक के चलते उनकी हत्या की साजिश रची गई.
तीन आरोपी गिरफ्तार
जांच एजेंसी ने इस मामले में बानासाही (डुगुधा) गांव के रहने वाले संगौरामोहन सिंह उर्फ बिड़ा सिंह और नरहरि सिंह उर्फ बापी सिंह को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया. दोनों को 2 जुलाई 2026 को गिरफ्तार कर उसी दिन उदला के एसडीजेएम न्यायालय में पेश किया गया. मामले में शामिल एक विधि-विरुद्ध बालक (Child in Conflict with Law) को 3 जुलाई 2026 को बारिपदा स्थित किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
सीआईडी-सीबी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की गुत्थी सुलझाने में वैज्ञानिक जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग और लगातार की गई फील्ड इन्वेस्टिगेशन ने अहम भूमिका निभाई. लंबे समय तक अज्ञात रहे शव की पहचान होने के बाद जांच सही दिशा में आगे बढ़ी और हत्या के पीछे अंधविश्वास से जुड़ा कारण सामने आया.
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि अंधविश्वास और जादू-टोने जैसी मान्यताएं किस तरह गंभीर अपराधों को जन्म दे सकती हैं. साथ ही, आधुनिक फोरेंसिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच की मदद से वर्षों पुराने ब्लाइंड मर्डर मामलों का भी सफलतापूर्वक खुलासा संभव है.
Badaun Girlfriend Murder Case: यूपी के बदायूं में एक युवक ने शनिवार रात अपनी नाबालिग गर्लफ्रेंड की गला घोंटकर हत्या कर दी. गर्लफ्रेंड इस बात से नाराज थी कि उसने कहीं और शादी तय कर ली थी. सगाई के बाद से ही उसका उससे झगड़ा चल रहा था. तब से वह उससे शादी करने की जिद कर रही थी.
गर्लफ्रेंड शनिवार सुबह 10 बजे नागार्जुन कॉलेज से 12वीं का TC लेने के बहाने घर से निकली थी. वह सीधे अपने बॉयफ्रेंड के घर चली गई. युवक उसे झांसे में लेकर मक्के के खेत में ले गया, जहां उसने उसके ही दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी.
बॉयफ्रेंड को पुलिस ने किया गिरफ्तार
यह घटना बिल्ली के रामपुर टांडा गांव में हुई. जब बेटी शनिवार देर शाम तक घर नहीं लौटी, तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. काफी तलाश के बाद, उन्होंने बेटी के प्रेमी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने बॉयफ्रेंड को उसके घर से हिरासत में लिया और उससे कड़ी पूछताछ की. उसने हत्या की बात कबूल कर ली.
आरोपी की निशानदेही पर, पुलिस उसे एक खेत में ले गई और उसकी गर्लफ्रेंड की लाश बरामद की. बॉयफ्रेंड का नाम जोगेंद्र (19) है, जो BA सेकंड ईयर का स्टूडेंट है. गर्लफ्रेंड नाबालिग है. उसने इसी साल इंटरमीडिएट पास किया है और BA में एडमिशन ले रखा है. उनके घर 100 मीटर दूर हैं.
नाबालिग लड़की तीन साल से आरोपी के साथ रिलेशनशिप में थी
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी जोगेंद्र और लड़की करीब तीन साल से रिलेशनशिप में थे. जोगेंद्र की शादी तीन महीने पहले हयातनगर में तय हुई थी. जून में उनकी सगाई हुई थी. जब से जोगेंद्र की शादी पक्की हुई थी, तब से दोनों के बीच फोन पर झगड़ा होता रहता था. जोगेंद्र अपने परिवार की मर्ज़ी से शादी करना चाहता था, लेकिन उसकी गर्लफ्रेंड उस पर शादी का दबाव बना रही थी. उसके परिवार को भी उनके रिश्ते के बारे में पता था.
लड़की के परिवार को बॉयफ्रेंड के पिता पर भी हत्या का शक
गर्लफ्रेंड के परिवार ने बताया कि जोगेंद्र काफी समय से उनकी बेटी को परेशान कर रहा था, यहां तक कि उसका पीछा भी करता था. उन्होंने इस बारे में कई बार उसके पिता हरपाल से शिकायत की थी. लेकिन अपने बेटे को रोकने के बजाय, उसने मामले को नजरअंदाज कर दिया. परिवार को शक है कि जोगेंद्र के पिता और जोगेंद्र भी इस हत्या में शामिल हैं. लड़की तीन भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटी थी. दो बहनों की शादी हो चुकी है. पिता और भाई किसान हैं. पुलिस ने आरोपी जोगेंद्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है.