दहेज में चार पहिया गाड़ी की मांग पूरी न होने पर पत्नी की प्रताड़ना और मृत्यु के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त पति महीपाल को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में सह-अभियुक्त ससुर ॠषिपाल और देवर जीतपाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया गया है।
रजपुरा के गांव सैंडोरा निवासी नरेशपाल ने 12 दिसंबर 2019 को दहेज हत्या में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें बताया कि उसने अपनी बेटी रेखा का विवाह चार वर्ष पूर्व रजपुरा निवासी महीपाल के साथ किया था।
विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज में बुलेरो गाड़ी की मांग को लेकर रेखा को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। 12 दिसंबर 2019 को मारपीट के दौरान आई चोटों के कारण रेखा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।
तहरीर के आधार पर पति महिपाल, सास गुड्डी, जेठ यशपाल, देवर जीतपाल, ससुर ऋषिपाल के खिलाफ दहेज हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस ने विवेचना में पति महिपाल, ससुर ऋषिपाल और देवर जीतपाल को दोषी माना और आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोपालजी की अदालत में हुई।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर अभियुक्त महीपाल को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास और चार हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जबकि धारा 302/34 हत्या के आरोप से न्यायालय ने अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
आमतौर पर माना जाता है कि किडनी का काम केवल शरीर से अपशिष्ट पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके ब्लड शुगर लेवल को भी सीधे नियंत्रित करती है? आमतौर पर जब ब्लड शुगर की बात होती है, तो हमारा ध्यान पैंक्रियाज, इंसुलिन, खानपान और एक्सरसाइज पर जाता है, लेकिन डायबिटीज और किडनी के बीच का सीधा संबंध भी उतना ही जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज किडनी के बारीक फिल्टर्स को नुकसान पहुंचा कर डायबिटिक नेफ्रोपैथी जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। जानिए कैसे किडनी रीनल ग्लूकोनियोजेनेसिस प्रक्रिया के जरिए शुगर कंट्रोल करती है।
कंसल्टेंट डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने indianexpress.com को बताया है कि काश ज़्यादा लोग इस बात को समझते है कि किडनी सिर्फ वेस्ट को फिल्टर नहीं करती बल्कि रीनल ग्लूकोनियोजेनेसिस नाम की प्रक्रिया के ज़रिए ग्लूकोज़ को कंट्रोल करने में भी सक्रिय रूप से शामिल होती हैं, जिसमें किडनी के टिश्यू असल में ग्लूकोज़ बनाते हैं। साथ ही वे ग्लूकोज़ रीएब्ज़ॉर्प्शन के ज़रिए फ़िल्टर हुई शुगर को यूरिन में जाने देने के बजाय वापस ब्लडस्ट्रीम में ले आती हैं।
डायबिटीज और किडनी का कनेक्शन
हाई शुगर के कारण किडनी के फिल्टरिंग यूनिट्स (Nephrons) पर दबाव बढ़ता है और वे सख्त या कठोर होने लगते हैं।
हेल्दी किडनी खून से प्रोटीन (Albumin) को रोकने देती है, लेकिन डैमेज होने पर प्रोटीन यूरीन के जरिए बाहर निकलने लगता है।
जब फिल्टर काम करना बंद कर देते हैं, तो शरीर में पानी, नमक और टॉक्सिन जमा होने लगते हैं।
किडनी ब्लड शुगर को कैसे कंट्रोल करती है?
किडनी में Renal Gluconeogenesis नाम की प्रक्रिया होती है। इसमें किडनी का ऊतक जरूरत पड़ने पर ग्लूकोज बनाता है। खासकर जब व्यक्ति लंबे समय तक कुछ नहीं खाता या फास्ट में होता है, तब शरीर में ब्लड ग्लूकोज बनाए रखने में यह प्रक्रिया मदद करती है। इसके अलावा किडनी खून को फिल्टर करते समय ग्लूकोज को भी फिल्टर करती है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर इस ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर नहीं जाने देता, बल्कि उसे दोबारा खून में वापस पहुंचा देता है। इसे Glucose Reabsorption यानी ग्लूकोज का पुनः अवशोषण कहा जाता है। इस प्रक्रिया में SGLT2 (Sodium-Glucose Cotransporter-2) नाम का ट्रांसपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डायबिटीज की कुछ दवाएं इसी SGLT2 को टारगेट करके काम करती हैं, जिससे अतिरिक्त ग्लूकोज पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकलता है।
किडनी और ब्लड शुगर का रिश्ता एकतरफा नहीं है
डायबिटीज और किडनी के बीच संबंध को आमतौर पर इस तरह समझाया जाता है कि लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर किडनी को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन यह रिश्ता सिर्फ एक दिशा में नहीं चलता। किडनी शरीर में इंसुलिन को तोड़ने और साफ करने में भी भूमिका निभाती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है, तो इंसुलिन शरीर में ज्यादा समय तक रह सकता है। इसके अलावा किडनी की कार्यक्षमता में बदलाव ग्लूकोज के दोबारा अवशोषण और शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।
इसलिए किडनी की कार्यक्षमता में शुरुआती बदलाव और ब्लड शुगर के कंट्रोल के बीच संबंध हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर व्यक्ति में हल्की किडनी समस्या सीधे डायबिटीज का कारण बनती है। किडनी और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म के बीच संबंध जटिल और कई कारकों पर निर्भर करता है।
किडनी की सेहत और ब्लड शुगर को कैसे रखें हेल्दी
किडनी और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने के लिए कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं जैसे
रेगुलर बॉडी को एक्टिव रखें। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि डायबिटीज कंट्रोल रखती है और किडनी की सेहत भी दुरुस्त रहती है।
खाने में अतिरिक्त नमक और ज्यादा सोडियम से बचें। नमक का कम सेवन आपकी सेहत को दुरुस्त रखता है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीने की कोशिश न करें।
ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें।
डायबिटीज या किडनी की बीमारी का जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन की जांच कराते रहें।
बहुत अधिक प्रोटीन वाली डाइट बिना जरूरत या विशेषज्ञ की सलाह के न लें, खासकर अगर किडनी की बीमारी का जोखिम हो।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज या किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद या शुरू न करें। सही जांच और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
Premanand Maharaj:
प्रेमानंद महाराज अपने साधक और भक्तों से एकांतिक वार्तालाप करते हैं. इसके कई वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. वह एकांतिक वार्तालाप के दौरान भक्तों द्वारा किए जाने वाले सभी सवालों का जबाव देते हैं. भक्त अक्सर सामान्य जीवन और धर्म-कर्म से जुड़े सवाल पूछते हैं. एक भक्त ने महाराज जी से ऑफिस में छूट्टी के लिए झूठ बोलने के बारे में पूछा.
छुट्टी के लिए झूठ बोलना
एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि, ‘मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं. कंपनी में जरूरी काम के कारण कई बार छुट्टी नहीं मिलती है. ऐसे में कई बार दादी, फूफा या किसी अन्य रिश्तेदार की मौत का बहाना बनाकर छुट्टी लेनी पड़ती है, तो क्या छुट्टी के लिए झूठ बोलने से पाप लगता है?’ इस बात को सुनकर प्रेमानंद महाराज के चेहरे पर हंसी आ गई. इसके बाद उन्होंने इस बात का जबाव दिया.
क्या बोले प्रेमानंद महाराज?
इसका जबाव प्रेमानंद महाराज ने हंसते हुए एक कहावत के साथ दिया, उन्होंने बोला कि, यह सब कलयुग का प्रभाव है. ‘झूठइ लेना झूठइ देना, झूठइ भोजन झूठ चबेना’ वह बोले कि, लेकिन कुछ भी हो झूठ बोलना पाप ही होता है. ऐसा करने से बचना चाहिए. उन्होंने आगे बताया कि, ‘सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप, जाके हृदय ताप है. तांके हृदय आप’ यानी जिसके मन में सच्चाई होती है उसके मन में भगवान का वास होता है. आप अपनी कठिनाइयों से लड़ें लेकिन झूठ बोलने से बचना चाहिए.
प्रेमानंद महाराज को वहां बैठे एक व्यक्ति ने बताया कि, वह आज भी झूठ बोलकर यहां आया है. वरना उसे वृंदावन आने के लिए छुट्टी नहीं मिलती. इसको लेकर महाराज जी ने कहा कि, भजन, धाम और भगवत प्राप्ति के लिए झूठ बोलना झूठ नहीं होता है. आप पूजा-अर्चना और भगवान के दर्शन के छुट्टी लेकर जा सकते हैं. धार्मिक कार्यों के लिए झूठ बोलना उचित हो सकता है लेकिन सांसारिक कार्यों के लिए झूठ नहीं बोलना चाहिए.
तुलसीदास जी महान संत और भगवान श्रीराम के परम भक्त थे. वह 16वीं शताब्दी के महान संत थे. वह हनुमान जी की भक्ति करते थे. तुलसीदास जी ने रामचरितमानस महाकाव्य, हनुमान चालीसा और कई महाकाव्य की रचना की थी. उन्होंने अकबर की कैद में रहकर हनुमान चालीसा की रचना की थी.
गोस्वामी तुलसीदास जी ने मुश्किल परिस्थितियों में हनुमान चालीसा की रचना की थी.
अकबर की कैद में लिखी थी हनुमान चालीसा?
प्रचलित कहानियों के अनुसार, एक बार मुगल बादशाह अकबर ने गोस्वामी तुलसीदास जी को अपने दरबार में बुलाया था. इसके बाद अकबर ने तुलसीदास जी से चमत्कार दिखाने के लिए कहा. उनके मना करने से अकबर ने तुलसीदास जी को फतेहपुर सीकरी के कारागार में डाल दिया था. तुलसीदास जी ने अकबर की कैद में रहने के दौरान हनुमान चालीसा की रचना की थी.
तुलसीदास जी ने कारागार में रोजाना हनुमान जी की स्तुति की और रोजानाा एक चौपाई लिखि. इस प्रकार 40 दिनों तक अकबर की कैद में रहने के दौरान तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की थी. लोक कथाओं के अनुसार, तुलसीदास जी के कैद में होने के दौरान 40वें दिन बंदरों ने फतेहपुर सीकरी के कारागार में हमला कर दिया. अकबर की सेना भी उन्हें नहीं रोक पाई. इसके बाद एक दरबारी ने सलाह दी कि, तुलसीदास जी को मुक्त कर दें. अकबर ने दरबारी की सलाह मानी और तुलसीदास जी को मुक्त कर दिया गया. इसके बाद सभी बंदर भी वहां से चले गए. इस प्रकार से हनुमान चालीसा की रचना हुई थी.
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के चैलचौक से एक दुखद घटना सामने आई है। यहां बिहार की रहने वाली 25 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, महिला ने कथित तौर पर अपने क्वार्टर में फंदा लगाकर जान दे दी।
बेटे के लिए पति से मंगवाई थी टॉफी
मृतका की पहचान मनीषा खातून, पत्नी मुश्ताकुल अली, निवासी नारायणपुर, भागलपुर (बिहार) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मनीषा अपने पति और बेटे के साथ चैलचौक में रहती थी। उसका पति पास की एक दुकान पर दर्जी का काम करता है।
घटना से कुछ समय पहले मनीषा ने अपने बेटे के लिए पति से टॉफी लाने को कहा था। पति दुकान से टॉफी लेकर वापस क्वार्टर पहुंचा और कमरे में गया, तो वहां का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए।
कमरे में मिला महिला का शव
पति ने मनीषा को फंदे से लटका हुआ देखा। इसके बाद उसने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मौत की वजह तलाश रही पुलिस
मंडी पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने घटना की पुष्टि की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और महिला की मौत के पीछे की वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
ग्वालियर में एक युवती की मौत के बाद अग्निवीर विकास बघेल पर दुष्कर्म, ब्लैकमेल और हत्या का आरोप लगा है। पुलिस ने उसे अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया है, युवती को वीडियो डिलीट करने के बहाने बुलाकर जहर खिलाया गया था।
ग्वालियर में एक युवती की मौत के मामले ने गंभीर आरोपों के बाद सनसनी फैला दी है। पंजाब के अमृतसर में सेना की यूनिट में तैनात एक अग्निवीर पर युवती से दुष्कर्म, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने, मारपीट और जबरन जहरीला पदार्थ खिलाने के आरोप लगे हैं। अस्पताल में उपचार के दौरान युवती की मौत हो गई। सिरोल थाना पुलिस ने मामले में हत्या, दुष्कर्म समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपित अग्निवीर विकास बघेल को अमृतसर से गिरफ्तार कर लिया है।
शादी की बात टूटी, लेकिन फोन पर बढ़ता गया संपर्क
पुलिस के मुताबिक सिरोल थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती की शादी की बातचीत चिनौर निवासी विकास बघेल से चली थी। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और मोबाइल नंबर भी साझा किए, लेकिन किसी कारण से रिश्ता तय नहीं हो सका। इसके बावजूद विकास लगातार युवती के संपर्क में रहा।
आरोप है कि करीब तीन वर्ष पहले उसने युवती को मिलने के बहाने बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने कथित तौर पर अश्लील वीडियो को इंटरनेट मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर युवती को ब्लैकमेल किया और कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
वीडियो डिलीट करने के बहाने फिर बुलाया
पुलिस के अनुसार कुछ दिन पहले विकास ग्वालियर आया था। सात अगस्त को उसने युवती को यह कहकर मिलने बुलाया कि वह उसका अश्लील वीडियो मोबाइल से डिलीट कर देगा। आरोप है कि मिलने के बाद उसने फिर युवती पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला।
युवती ने विरोध किया तो पोसंपा रेस्त्रां के पास उसके साथ मारपीट की गई। आरोप है कि इसके बाद उसे जबरन जहरीला पदार्थ खिलाया और पानी पिलाकर आरोपित वहां से फरार हो गया।
अस्पताल में भर्ती, इलाज के दौरान मौत
जहरीला पदार्थ खिलाए जाने के बाद युवती किसी तरह हजार बिस्तर अस्पताल के पास पहुंची और अपने ममेरे भाई को फोन कर बुलाया। स्वजन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
युवती का मरणासन्न बयान- दो बार कराया गर्भपात
पुलिस ने अस्पताल में युवती का मृत्युकालिक कथन दर्ज किया था। इसमें उसने कथित तौर पर बताया कि वह करीब तीन वर्षों से प्रताड़ना झेल रही थी। उसका आरोप था कि विकास न तो उससे शादी कर रहा था और न ही उसे छोड़ रहा था। मिलने से इंकार करने पर मारपीट किए जाने की बात भी उसने कही।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उसके दो बार गर्भपात कराए गए। उसने बताया कि सात अगस्त को भी उसे जबरन जहरीला पदार्थ खिलाया गया था।
मृत्यु के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हत्या, दुष्कर्म और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया। जांच के बाद आरोपित विकास बघेल को अमृतसर से गिरफ्तार कर ग्वालियर लाया गया है। पुलिस मामले में सामने आए आरोपों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जंडियाला गुरु में दसवीं के छात्र गुरसेवक सिंह की संदिग्ध मौत हुई। गले पर निशान मिलने पर परिवार ने दो युवकों पर हत्या का आरोप लगाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
अमृतसर के जंडियाला गुरु में 10वीं कक्षा के छात्र गुरसेवक सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए दो युवकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि गुरसेवक सिंह का गला दबाकर हत्या की गई है। हालांकि पुलिस ने अभी हत्या की पुष्टि नहीं की है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच की जा रही है।
परिवार के अनुसार गुरसेवक सिंह पढ़ाई के साथ खेलों में भी रुचि रखता था। वह गांव के मैदान में अक्सर फुटबाल खेलता था और अच्छा खिलाड़ी था। उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है।
छात्र के गले पर मिले निशान
परिवार ने पुलिस को बताया कि छात्र के गले पर निशान मिले हैं। इसी आधार पर उन्हें आशंका है कि उसका गला दबाकर हत्या की गई। परिवार ने आरोप लगाया कि दो युवकों ने कथित तौर पर गुरसेवक सिंह के साथ मारपीट की और बाद में उसका गला दबा दिया।
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल से संबंधित जानकारी जुटाई। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू की
डीएसपी बलजीत सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि छात्र की मौत के कारणों को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। पुलिस परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि छात्र की मौत से पहले उसके साथ क्या हुआ था और वह किन लोगों के संपर्क में था। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कब्ज एक आम पाचन संबंधी समस्या है, लेकिन इसका असर सिर्फ पेट तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक कब्ज रहने पर पेट में भारीपन, असहजता और दिनभर की सामान्य गतिविधियों में परेशानी हो सकती है। बार-बार होने वाली कब्ज व्यक्ति की मानसिक परेशानी और तनाव को भी बढ़ा सकती है। इसलिए कब्ज को केवल एक छोटी-मोटी समस्या मानकर नजरअंदाज करने के बजाय इसके कारणों को समझना और समय रहते सही उपाय करना जरूरी है। आयुर्वेद में कब्ज का इलाज करने के लिए कई आयुर्वेदिक हर्ब्स को असरदार पाया गया है। वेदों में नीम को सर्व रोग निवारिणी कहा गया है, जिसका मतलब है सभी बीमारियों का इलाज। नीम एक ऐसा आयुर्वेदिक पेड़ है जिसके पत्ते से लेकर उसकी छाल और उसका फूल सब औषधीय गुणों से भरपूर है। लोग नीम के बीज, पत्तियां, नीम का रस, फल, फूल, तेल, जड़ें और छाल का इस्तेमाल दवा के तौर पर करते हैं। पारंपरिक आयुर्वेद में नीम को औषधीय गुणों का भंडार माना गया है।
healthifyme.com के मुताबिक नीम के एंटी-ऑक्सीडेंट और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाचन क्रिया को सुचारू बनाने में मदद कर सकते हैं, बशर्ते इसका सेवन सही मात्रा और सही तरीके से किया जाए। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण ने बताया नीम का पत्ता पाचन के लिए अमृत की तरह असर करता है। लोग अक्सर पाचन के लिए तुलसी और करी पत्ता खाते हैं लेकिन नीम का पत्ता भी पाचन का अचूक इलाज है। आइए जानते हैं मेडिकल साइंस और आयुर्वेद के मुताबिक नीम का पत्ता कैसे पाचन को दुरुस्त करता है और बॉडी को हेल्दी रखता है।
नीम का पत्ता कैसे पाचन को दुरुस्त करता है?
नीम के एंटी-बैक्टीरियल गुण आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने और उन्हें साफ करने में मदद करते हैं। इसके अलावा नीम मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर पाचन में सुधार करता है। यह शरीर में कफ दोष को बैलेंस करने में भी मदद करता है, जिससे शरीर में पानी जमा नहीं होता और फैट बाहर निकल जाता है।
नीम में एंटी-फ्लैटुलेंस यानी गैस कम करने वाले और एस्ट्रिंजेंट गुण भी होते हैं, जो पाचन नली में गैस बनने से रोकते हैं। साथ ही, इसमें एंटी-एसिड गुण भी होते हैं जो पेट में ज़रूरत से ज़्यादा एसिड बनने से रोकते हैं। इसके अलावा, नीम में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है। इसलिए, नीम पाउडर का सेवन करने से मल आसानी से पास होता है और कब्ज़ की समस्या नहीं होती। रोज़ सुबह खाली पेट नीम का जूस पीने से पाचन संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
नीम का पत्ता सेहत पर कैसे करता है असर?
इम्यूनिटी होती है मजबूत
नीम के पत्ते का सेवन करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है और बॉडी का बीमारियों से बचाव होता है। नीम में कई जैविक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी गुण हो सकते हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि नीम का पत्ता इम्यूनिटी को मजबूत करता है। Journal of Ethnopharmacology और BMC Complementary Medicine and Therapies में प्रकाशित अध्ययनों से पता चलता है कि नीम का अर्क शरीर में T-कोशिकाओं (T-cells) को सक्रिय करता है। यह लिंफोसाइट्स की संख्या बढ़ाकर शरीर के इम्यून रिस्पांस को मजबूत करता है। PubMed Central की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नीम के फ्लैवोनोइड्स शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करके फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं।
ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी है असरदार
ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी नीम का पत्ता असरदार साबित होता है। कुछ रिसर्च में नीम के अर्क से ब्लड शुगर कम होने की संभावना सामने आई है। हालांकि, डायबिटीज की दवा के विकल्प के तौर पर नीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। Journal of Medical Food (2021) में प्रकाशित एक क्लीनिकल ट्रायल में मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले मरीजों को नीम का अर्क दिया गया। 12 हफ्तों के बाद उनके फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रांडियल शुगर और HbA1c के स्तर में काफी सुधार देखा गया। Pharmacological Research की स्टडी के अनुसार नीम की पत्तियों का अर्क मसल्स में GLUT4 ट्रांसपोर्टर्स को बढ़ावा देता है, जिससे खून में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज कोशिकाओं में अवशोषित हो जाता है।
बॉडी की सूजन करते हैं कंट्रोल
नीम के पत्तों का सेवन करने से सूजन भी कंट्रोल रहती है। नीम में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। नीम में मौजूद निमबीडिन (Nimbidin) और निम्बिन (Nimbin) सूजन बढ़ाने वाले प्रो-इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइन (Cytokines) के असर को दबाते हैं। Inflammation Research और Phytotherapy Research के अध्ययनों में देखा गया कि नीम का अर्क शरीर में सूजन पैदा करने वाले साइक्लोऑक्सीजिनेज (COX) और लाइपोक्सीजिनेज (LOX) एंजाइम को ब्लॉक करता है, जिससे जोड़ों या आंतों की पुरानी सूजन (Chronic Inflammation) कम होती है।
लिवर के लिए भी हैं असरदार
नीम के पत्तों का सेवन लिवर की हेल्थ में भी सुधार कर सकता है। नीम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद कर सकते हैं। Food and Chemical Toxicology और PMC (2021) में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक नीम के पत्तों का अर्क लिवर एंजाइम्स जैसे ALT (Alanine Transaminase) और AST (Aspartate Aminotransferase) के स्तर को कंट्रोल रखता है। नीम में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स लिवर के टिश्यूज को नुकसान से बचाते हैं।
नीम के पत्ते नेचुरल ब्लड प्यूरीफायर
नीम का सेवन करने से खून साफ होता है। ये ब्लड में मौजूद अशुद्धियों को दूर करता है। शरीर से टॉक्सिन निकालने में नीम का जूस बेहद असरदार साबित होता है। International Journal of Ayurveda Research और स्किन-डर्मेटोलॉजी से जुड़ी रिसर्च के मुताबिक, नीम खून से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर लिवर और किडनी के लोड को कम करता है। यह लिपिड पेरोक्सीडेशन (Lipid Peroxidation) को रोककर लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) का ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाव करता है।
कब्ज का इलाज के लिए नीम का कैसे करें सेवन
अगर आप कब्ज का इलाज नीम से करना चाहते हैं तो आप नीम की पत्तियों का पानी पिएं। नीम की कुछ साफ पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाएं और उसे छानकर उसका सेवन करें। नीम को पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी परेशानियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
नीम की पत्तियों की चाय बनाकर करें उसका सेवन। आप 2–4 नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उसकी चाय तैयार करें। इसे पारंपरिक तौर पर पाचन और हेल्थ को दुरुस्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
नीम का सेवन उसका पाउडर बनाकर करें। नीम की सूखी पत्तियों को पीसकर पाउडर बना लें और उसे फांक लें और फिर पानी पी लें।
डिस्क्लेमर :यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। पुरानी कब्ज या पेट से जुड़ी गंभीर समस्याओं में नीम का सेवन करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
Raksha Bandhan 2026:
रक्षाबंधन का पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है. सावन पूर्णिमा तिथि इस साल 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को महत्व देते हुए. सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को मान्य होगी. इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा.
भाई न होने पर क्या करें?
रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई के हाथ में राखी बांधती हैं. इसे रक्षा सूत्र माना जाता है. अगर किसी का भाई नहीं है, तो वह ऐसे में भगवान को राखी बांध सकती हैं. इससे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा. इसके अलावा भगवान को राखी बांधना बहुत ही शुभ माना जाता है. आप भाई को राखी बांधने से पहले भगवान को राखी बांध सकती हैं. चलिए देवताओं को राखी बांधने के बारे में जानते हैं.
इन 4 देवताओं को बांध सकती हैं राखी
शिव जी –
रक्षाबंधन के पर्व पर भगवान शिव को राखी बांधनी चाहिए. शिव जी को राखी बांधने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा. भोलेनाथ भय और संकट से आपकी रक्षा करेंगे. शिव जी को हरे रंग की राखी बांधनी चाहिए.
हनुमान जी –
हनुमान जी को शिव जी का ही रूप माना जाता है. आप हनुमान जी को राखी बांध सकती हैं. हनुमान जी को नारंगी रक्षासूत्र बांधे. इससे आपको बल-बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिलेगा.
गणेश जी –
गणेश जी को हिंदू धर्म में सर्वप्रथम पूज्नीय माना जाता है. रक्षाबंधन के पर्व पर गणेश जी को राखी बांधें. गणेश जी को राखी बांधने से विघ्नहर्ता सभी विघ्न दूर करेंगे. गणेश जी को लाल या नारंगी रंग की राखी बांधे.
कृष्ण जी –
कृष्ण जी को आप राखी बांध सकती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्रौपदी ने कृष्ण जी को रक्षा सूत्र बांधा था. इसके बाद उन्होंने द्रौपदी की रक्षा की थी. आप कृष्ण जी को नीले रंग की राखी बांधे.
अक्सर जब लोगों को पता चलता है कि उनका cholesterol बढ़ गया है, तो वे तुरंत walking और exercise शुरू कर देते हैं। अच्छी बात है, लेकिन cholesterol को control करने में आपकी diet का भी बहुत बड़ा role होता है।
आज मैं आपको ऐसे 10 foods के बारे में बताऊंगा जिन्हें अपनी regular diet में शामिल करके cholesterol को कम करने में मदद मिल सकती है।
इनमें से आप अपनी सुविधा के अनुसार कुछ foods को अपनी daily diet का हिस्सा बना सकते हैं।
1. ओट्स (Oats)
कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए पहला food है ओट्स।
ओट्स में beta-glucan नाम का soluble fiber पाया जाता है। यह पेट और आंतों में एक तरह का gel बनाता है और cholesterol को शरीर से बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
अगर आप oats लेते हैं तो flavored और ज्यादा processed oats की जगह plain rolled oats या steel-cut oats को प्राथमिकता दे सकते हैं।
इन्हें सब्जियों के साथ नमकीन दलिया बनाकर भी खाया जा सकता है।
2. जौ (Barley)
दूसरा बहुत अच्छा food है जौ।
आयुर्वेद में जौ को मेदहर कहा गया है। इसमें भी soluble fiber पाया जाता है, जो cholesterol management में मदद कर सकता है।
अगर आप रोज गेहूं की रोटी खाते हैं, तो अपनी diet में कुछ मात्रा में जौ की रोटी शामिल कर सकते हैं।
3. अलसी (Flax Seeds)
तीसरा food है अलसी।
अलसी में:
Omega-3 fatty acids
Lignans
Fiber
जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
इसे खाने का एक आसान तरीका है कि अलसी को हल्का भूनकर पीस लें और फिर इसे:
दाल
सलाद
चावल
आटा
सूप
आदि में मिलाकर खाएं।
बेहतर होगा कि एक साथ बहुत ज्यादा powder बनाकर रखने की बजाय थोड़ी मात्रा में ही पीसें।
4. लहसुन (Garlic)
लहसुन को cholesterol के लिए एक महत्वपूर्ण food माना जाता है।
लहसुन में allicin नाम का compound पाया जाता है।
लहसुन का इस्तेमाल अपनी regular diet में किया जा सकता है। इसे सब्जी, दाल या अन्य भोजन में शामिल करना आसान है।
5. मेथी दाना (Fenugreek Seeds)
अगला food है मेथी दाना।
मेथी में fiber और कई bioactive compounds पाए जाते हैं। इसे cholesterol और blood sugar management के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
एक तरीका यह है कि मेथी दाने को रातभर पानी में भिगोकर सुबह लिया जाए।
इसे पीसकर आटे या दाल-सब्जी में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
6. आंवला (Amla)
आंवला आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाने वाला food है।
इसमें antioxidant compounds और vitamin C पाए जाते हैं।
आप इसे अलग-अलग तरीकों से अपनी diet में शामिल कर सकते हैं:
कच्चा आंवला
आंवला पाउडर
आंवला अचार
आंवला मुरब्बा
अगर मुरब्बा खाते हैं तो उसमें मौजूद अतिरिक्त sugar का भी ध्यान रखना चाहिए।
7. अखरोट (Walnuts)
अखरोट में healthy fats और Omega-3 fatty acids पाए जाते हैं।
इसे snack के रूप में लिया जा सकता है।
उदाहरण के लिए शाम के समय कुछ अखरोट के साथ आंवला लिया जा सकता है।
8. भिंडी (Lady Finger)
भिंडी में soluble fiber पाया जाता है।
इसलिए cholesterol management के लिए इसे अपनी diet में शामिल किया जा सकता है।
भिंडी को बहुत ज्यादा तेल में fry करने की बजाय कम तेल में बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
9. इसबगोल (Psyllium Husk)
इस पूरी list में इसबगोल सबसे महत्वपूर्ण fiber sources में से एक है।
इसमें बड़ी मात्रा में soluble fiber होता है और cholesterol management में इसका उपयोग किया जाता है।
इसे दही या पानी के साथ लिया जा सकता है।
इसबगोल लेते समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
10. साबुत दालें और Beans
हमारी रोज की kitchen में मौजूद एक बहुत underrated food है साबुत दालें और legumes।
जैसे:
राजमा
छोले
काले चने
लोबिया
हरी मूंग
साबुत मसूर
इनमें fiber और plant-based protein पाया जाता है।
Cholesterol को ध्यान में रखते हुए साबुत दालों को diet में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
दालों को पकाने से पहले कुछ घंटे भिगोने से digestion में भी मदद मिल सकती है।
और जरूरत के अनुसार अलसी, मेथी दाना, लहसुन और इसबगोल को भी अपनी diet में शामिल किया जा सकता है।
अगर आपका cholesterol काफी बढ़ा हुआ है या आप पहले से cholesterol की दवा ले रहे हैं, तो अपनी दवा को खुद से बंद करने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही बदलाव करें।