भारत की हिंदू परंपरा में चोटी यानी शिखा का अपना अलग महत्व रहा है. पुराने समय में इसे सिर्फ हेयरस्टाइल नहीं माना जाता था. यह पहचान, अनुशासन और धार्मिक परंपरा से जुड़ी थी. कई विद्वानों और महापुरुषों ने शिखा धारण की. इनमें भगवान कृष्ण, बलराम, चाणक्य और आदि शंकराचार्य जैसे नाम शामिल हैं. आइए जानते हैं, इतिहास और परंपरा में चोटी रखने वाले इन महान लोगों के बारे में, जिनका नाम आज भी लिया जाता है.
आचार्य चाणक्य की अटूट प्रतिज्ञा
आचार्य चाणक्य का नाम आते ही उनकी खुली शिखा वाली प्रतिज्ञा याद आती है. यह इतिहास की सबसे प्रसिद्ध घटना है. कहते हैं, मगध के राजा धनानंद के दरबार में उनका अपमान हुआ था. इसके बाद चाणक्य ने अपनी शिखा खोल दी. उन्होंने संकल्प लिया कि नंद वंश का अंत किए बिना शिखा नहीं बांधेंगे. यही संकल्प आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के उत्थान से जुड़ा. मौर्य साम्राज्य की नींव पड़ी. लक्ष्य पूरा होने के बाद ही चाणक्य ने अपनी शिखा बांधी. इस वजह से उनकी शिखा उनके मजबूत इरादे की पहचान बन गई.
भगवान कृष्ण और बलराम
पौराणिक प्रसंगों में भगवान कृष्ण और बलराम की शिखा का उल्लेख मिलता है. बाल कृष्ण की चोटी से जुड़े कई रोचक प्रसंग मिलते हैं. माता यशोदा के साथ उनके संवाद में भी चोटी का जिक्र आता है. उनके उपनयन के समय बलरामजी के साथ भी पारंपरिक रूप में शिखा का वर्णन मिलता है. इससे साबित होता है कि द्वापर युग के उस दौर में भी चोटी जीवन और संस्कृति का हिस्सा थी.
आदि शंकराचार्य और ऋषि-मुनि
आदि शंकराचार्य का नाम भारतीय दर्शन के इतिहास में बेहद खास है. उन्होंने अद्वैत वेदांत को व्यापक रूप से स्थापित किया. पारंपरिक चित्रण और विवरणों में उन्हें शिखाधारी संन्यासी के रूप में देखा जाता है. प्राचीन ऋषि-मुनियों में भी शिखा की परंपरा रही है. वशिष्ठ, अगस्त्य और सांदीपनि जैसे ऋषियों का नाम इस संदर्भ में लिया जाता है. गुरुकुल और वैदिक शिक्षा में शिखा को ज्ञान और श्रेष्ठता का प्रतीक भी था.
वीर योद्धाओं और महापुरुषों की पहचान
महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह जैसे ऐतिहासिक महापुरुषों का नाम भी हिंदू सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के संदर्भ में लिया जाता है. इनके दौर में चोटी और जनेऊ को लेकर धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान का सवाल भी महत्वपूर्ण था.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.
करनाल के बस्तली गांव के रहने वाले राजीव की आर्मेनिया में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने सरकार से शव भारत लाने में मदद की गुहार लगाई है।
राजीव 2022 में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बेहतर भविष्य के सपने के साथ आर्मेनिया गया था। परिवार ने कर्ज लेकर उसे विदेश भेजा था। बताया गया कि वह वहां काम करता था और रोजाना अपने परिवार से फोन पर बातचीत करता था।
कमरे में बेड पर मिला शव
राजीव के भाई अभिषेक के मुताबिक, घटना के दिन राजीव का रूममेट काम से वापस लौटा तो उसने राजीव को बेड पर लेटा देखा। कुछ देर बाद जब उसने राजीव को उठाने की कोशिश की तो उसकी सांसें नहीं चल रही थीं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने राजीव को मृत घोषित कर दिया।
मौत की वजह अभी साफ नहीं
परिजनों के मुताबिक, राजीव बिल्कुल ठीक था और घटना से पहले परिवार से उसकी बातचीत भी हुई थी। उसकी अचानक मौत कैसे हुई, फिलहाल इसका कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। परिवार को पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही मौत की असली वजह सामने आने की उम्मीद है।
घर बनाने का सपना भी रह गया अधूरा
राजीव अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गया था। कुछ समय पहले ही परिवार ने गांव में मकान बनाना शुरू किया था। भाई अभिषेक के अनुसार, वह रोजाना राजीव को नए बन रहे घर की तस्वीरें भेजता था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश से लौटकर राजीव अपने सपनों का घर पूरा करेगा, लेकिन उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
मां की सरकार से मार्मिक अपील
राजीव की मां कमलेश का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से बेटे का पार्थिव शरीर भारत लाने में मदद की अपील की है। उनका कहना है कि वह अपने बेटे को आखिरी बार देखना चाहती हैं। परिवार के मुताबिक, राजीव घर का छोटा बेटा था और उसके विदेश जाने से परिवार को आर्थिक हालात बेहतर होने की उम्मीद थी।
पत्नी से अवैध प्रेम संबंध के शक में एक युवक पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल युवक का मेरठ के एक अस्पताल में उपचार चल रहा है। आरोपित पति के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
सिंभावली थाना क्षेत्र के एक गांव की महिला का काफी समय से अपने पति से विवाद चल रहा था। इसके चलते महिला हरोड़ा मोड़ के पास किराए के मकान में रह रही थी। मंगलवार को पति अपनी पत्नी के कमरे पर पहुंचा, तो दरवाजा बंद मिला। दरवाजा खुलवाने पर कमरे में उसकी पत्नी के साथ गांव का ही एक युवक मौजूद था।
युवक के साथ पत्नी को देख भड़का पति
वहीं, युवक को पत्नी के साथ देखकर पति भड़क गया और दोनों के बीच अवैध प्रेम संबंध होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज करने लगा। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया।
चेहरे और गर्दन पर चोट के निशान
आरोप है कि पति ने धारदार हथियार से युवक पर हमला कर दिया। चेहरे और गर्दन पर गंभीर चोट लगने से युवक लहूलुहान होकर गिर पड़ा। उसे गंभीर हालत में मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब पुलिस ने घायल युवक के पिता की तहरीर पर आरोपी संजीव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद चौधरी ने बताया कि आरोपित को पत्नी और युवक के बीच प्रेम-प्रसंग का शक था। हमले में युवक को गंभीर चोटें आई हैं, जिसके चलते हत्या के प्रयास की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
भोगल के पंत नगर में बुजुर्ग महिला की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लूटपाट का विरोध कर पर हुई है हत्या। मौके पर क्राइम व फोरेंसिक टीम कर रही जांच।
मृतका की पहचान 70 वर्षीय प्रीति कुमार के रूप में हुई। कालोनी में ही रहने वाली परिचित विजेता अरोड़ा के मुताबिक वे अक्सर उनसे मिलने घर पर जाती थीं। शुक्रवार को कई दिनों के बाद उनके घर पहुंचीं। घर के अंदर सामान बिखरा था।
दोनों हाथ बंधे, चेहरे पर थे चोटों के निशान
प्रीति कुमार के चेहरे पर चोटों के निशान थे। दोनों हाथ बंधे थे। फौरन पुलिस को फोन किया। वह मकान के भूतल पर रहती थीं। आस-पास के पांच घर बाहर से बंद थे। दामाद दीपक सचदेवा ने बताया कि पूरा घर आगे से पीछे तक बिखरा पड़ा था।
लूटपाट के इरादे से घटना होती लग रहा है। आरडब्ल्यूए और पुलिस मिलकर बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए ताकि ऐसी वारदात न होने पाए। एक दिन पहले ही उन्होंने बड़ी बेटी को उसके ससुराल पहुंचाया था। सुबह वह मिलने के लिए आयी तो घर का दरवाजा खुला पाया और अंदर वो मृत मिलीं।
उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने एक परिवार को गहरे संकट में डाल दिया था। तीन बच्चों का पिता घर से पासपोर्ट बनवाने की बात कहकर निकला, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटा। बाद में पत्नी को जानकारी मिली कि वह अपनी साली को साथ लेकर चला गया है।
बताया गया था कि युवक ने घर से निकलते समय पत्नी से कहा था कि वह पासपोर्ट के सिलसिले में बाहर जा रहा है। इसके बाद काफी समय बीतने के बावजूद वह घर नहीं लौटा। पत्नी ने कई बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन पहले फोन नहीं उठाया गया और बाद में मोबाइल बंद हो गया।
जब महिला ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई तो उसे पता चला कि उसका पति उसकी छोटी बहन को भी अपने साथ लेकर चला गया है। इसके बाद वह अपने तीन छोटे बच्चों के साथ पुलिस के पास पहुंची और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
महिला के मुताबिक, उसके पति और उसकी छोटी बहन के बीच पिछले काफी समय से बातचीत और नजदीकियां थीं। उसे अंदाजा नहीं था कि दोनों एक दिन घर छोड़कर चले जाएंगे। महिला ने बताया था कि उसके तीन बच्चे हैं और सबसे छोटा बच्चा महज कुछ महीने का था।
पीड़िता ने पुलिस से पति और अपनी बहन दोनों को तलाशने की गुहार लगाई थी। उसका कहना था कि अगर दोनों वापस लौट आते हैं तो वह परिवार को फिर से साथ रखने के लिए तैयार थी।
महिला ने अपनी छोटी बहन पर भरोसा तोड़ने का आरोप भी लगाया था। उसका कहना था कि जिस बहन को वह अपना करीबी मानती थी, उसी ने उसके वैवाहिक जीवन में ऐसी स्थिति पैदा कर दी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। पुलिस दोनों के बारे में जानकारी जुटाने और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने में लगी थी। परिवार की स्थिति को देखते हुए यह मामला इलाके में काफी चर्चा का विषय बन गया था।
Chanakya Niti:
महान शिक्षक, अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ चाणक्य अपनी खास नीतियों के लिए जाने जाते हैं. वह अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीतिक कौशल के लिए जाने जाते थे. आचार्य चाणक्य की कई नीतियां आज के समय में भी प्रासंगिक हैं. उन्होंने अपनी नीतियों में मित्रों के बारे में बताया है. सच्चे मित्र के बारे में आचार्य चाणक्य के श्लोक के जरिए जान सकते हैं.
“आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रु-संकटे. राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥”
आचार्य चाणक्य के इस श्लोक के जरिए सच्चे मित्र की पहचान के बारे में जान सकते हैं. मित्रता से जुड़ा एक प्रसिद्ध श्लोक सच्चे मित्र की पहचान के बारे में बताया है. आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं कि, कौन लोग आपके सच्चे मित्र होते हैं और कौन लोग सिर्फ दिखावे के लिए आपके साथ होते हैं.
बीमारी में साथ –
आप बीमार हैं या घर-परिवार में कोई सदस्य बीमारी से जूझ रहा है, ऐसे समय में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र होता है. अगर ऐसे समय में कोई साथ छोड़ देता हैं तो वह सिर्फ दिखावे का मित्र है.
विपत्ति और संकट में साथ –
आपके ऊपर कोई बड़ा संकट या विपत्ति आती है, ऐसे समय में साथ रहने वाला ही आपका सच्चा मित्र है. नौकरी जाने, व्यापार में नुकसान होने या जीवन में संकट के समय साथ देने वाला सच्चा दोस्त होता है.
आर्थिक तंगी में साथ –
आप जीवन में किसी कारण से आर्थिक तंगी से परेशान हैं. इस समय में दोस्त आपका साथ छोड़ दें, तो वह सिर्फ दिखावे का मित्र है. असली दोस्त आपकी हर संभव मदद करेगा.
विरोध या लड़ाई में साथ –
किसी से लड़ाई होने पर साथ देना वाला ही आपका दोस्त होता है. ऐसे समय में मुंह मोड़ लेने वाला आपका सच्चा दोस्त नहीं हो सकता है. आपका सच्चा मित्र शत्रु के सामने आपके साथ खड़ा रहेगा.
कानूनी परेशानी में साथ –
अक्सर लोग कानूनी मामलों में उलझ जाते हैं. इस बुरे समय में सभी लोग साथ छोड़ देते हैं. लेकिन आपका सच्चा दोस्त इस समय में आपका साथ नहीं छोड़ेगा. जरूरत के समय वह हमेशा साथ खड़ा मिलेगा.
पारिवारिक पीड़ा में दे साथ –
सच्चा मित्र सिर्फ आपका ही नहीं, बल्कि परिवार का भी साथ देता है. परिवार में किसी अनहोनी के होने या किसी की मृत्यु होने पर भी आपके साथ खड़ा रहता है. आचार्य चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार, बुरे समय में दोस्त साथ नहीं देता है, तो वह सच्चा मित्र नहीं है.
बरसात का मौसम कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर डायबिटीज और कुछ दूसरी क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है और बीमारी होने पर complications की संभावना भी अधिक हो सकती है।आयुर्वेद के मुताबिक बरसात के महीनों में शरीर में ‘पित्त’ और ‘वात’ दोष का असंतुलन हो जाता है जिससे बॉडी में बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। आयुर्वेद के मुताबिक बरसात के महीने में बॉडी को हेल्दी रखने के लिए और इम्यूनिटी को स्ट्रांग करने के लिए किचन में मौजूद कुछ देसी चीजों का सेवन बेहद असरदार साबित होता है।
आधुनिक विज्ञान और न्यूट्रिशन रिसर्च भी कुछ हर्ब्स और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर आप भी इस मौसम में बिना बीमार पड़े सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो अपनी दैनिक डाइट में इन 7 हर्बल फूड्स को शामिल कर सकते हैं। आइए, आयुर्वेदिक विशेषज्ञों और वैज्ञानिक रिसर्च के नजरिए से जानते हैं कि ये हर्बल फूड्स आपकी सेहत के लिए किस तरह फायदेमंद साबित हो सकते हैं और इसका सेवन कैसे करना चाहिए।
गुनगुना पानी
सावन के मौसम में वातावरण में नमी और आर्द्रता बढ़ने से पाचन पर असर पड़ सकता है ऐसे में आपको रोज गुनगुना पानी पीना चाहिए।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक सुबह खाली पेट और दिनभर हल्का गुनगुना पानी पीने से पाचन दुरुस्त रहता है। रोज गुनगुना पानी पीने से पेट में गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। उबला या गुनगुना पानी पीना मानसून में जलजनित संक्रमणों से बचाव के लिए भी उपयोगी बताया गया है।
अदरक का करें सेवन
नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटेड हेल्थ (NCCIH) अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (NIH) का एक प्रमुख हिस्सा है,के मुताबिक संतुलित मात्रा में अदरक का सेवन सेहत को फायदा पहुंचाता है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि अदरक का सेवन पीरियड्स पेन, घुटने के दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। अदरक को मानसून में पाचन और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं के लिए उपयोगी बताया गया है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। इसे हर्बल टी, काढ़े या सब्जियों में शामिल किया जा सकता है।
त्रिफला चूर्ण का करें सेवन
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री के मुताबिक त्रिफला एक ऐसी जड़ी बूटी है जो पेट से लेकर डायबिटीज तक का इलाज करती है। एक चम्मच इस हर्ब के पाउडर का सेवन करने से बॉडी में जमा सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। त्रिफला आंवला, हरड़ और बहेड़ा से बना पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण है। इसे खासतौर पर कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रात को सोने से पहले आधा चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी के साथ लेने से सेहत को फायदा होता है। नियमित या लंबे समय तक सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
भुना हुआ जीरा खाएं
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया है कि जीरे का सेवन पाचन को दुरुस्त करता है। जीरा पाचन को सपोर्ट करने वाला मसाला है। इसे छाछ या पानी में थोड़ा सा मिलाकर लिया जा सकता है। बरसात में जीरे का सेवन करने से पाचन से जुड़ी दिक्कते जैसे गैस, पेट फूलने, भारीपन और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। भोजन में सीमित मात्रा में भुना जीरा शामिल करना मानसून के दौरान एक आसान विकल्प हो सकता है।
सेंधा नमक का करें सेवन
सेंधा नमक का इस्तेमाल खासतौर पर व्रत और उपवास के दौरान किया जाता है लेकिन आयुर्वेद इसे सामान्य नमक से बेहतर विकल्प के तौर पर देखता है। netmeds में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सेंधा नमक पेट में पाचक एंजाइम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) के स्राव को बढ़ावा देता है। यह भोजन के बेहतर अवशोषण, गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सेंधा नमक भी मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड ही है और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन हाई ब्लड प्रेशर या वाटर रिटेंशन वाले लोगों के लिए उचित नहीं है। इसलिए इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है।
तुलसी के पत्ते
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक तुलसी का इस्तेमाल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है। तुलसी में यूजेनॉल समेत कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। बरसात के मौसम में तुलसी की चाय या काढ़े को पीने से मानसून में सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। हालांकि, तुलसी को प्राकृतिक एंटीबायोटिक या वायरल संक्रमण का इलाज मानना सही नहीं है।
नीम की पत्तियां
नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों वाले कई कंपाउंड पाए जाते हैं और पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। बरसात के मौसम में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नीम की कोपलें खाने और नीम के पानी से नहाने की सलाह देते हैं ताकि इम्यूनिटी मजबूत रहे और बॉडी का बीमारियों से बचाव हो। हालांकि, नीम की पत्तियों का नियमित सेवन हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और दवाएं लेने वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के इलाज, दवा या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी खाद्य पदार्थ, घरेलू नुस्खे या हर्बल उत्पाद का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रही दवाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह ले
बचपन में बच्चे जो सीखते हैं, उसका असर लंबे समय तक रहता है. लेकिन डिजिटल दौर में बच्चों की परवरिश किसी चक्रव्यूह से कम नहीं है. इंटरनेट, सोशल मीडिया और बढ़ती जिद के बीच संस्कार कहीं खोते जा रहे हैं. हर माता-पिता अपने बच्चे को सफल बनाना चाहते हैं, लेकिन इस होड़ में नैतिक मूल्य गायब हो रहे हैं. अगर आप भी इस पेरेंटिंग की उलझन से परेशान हैं, तो आपको सदियों पुराना लेकिन बेहद सटीक समाधान चाहिए.
यह समाधान छिपा है बीसवीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा की शिक्षाओं में. बाबा की सीख में अनुशासन, सेवा, सच्चाई और प्रेम को खास जगह मिली है. स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक को जीवन की राह दिखाने वाले बाबा ने बच्चों की परवरिश के सरल लेकिन अचूक नियम बताए हैं. आइए जानते हैं बाबा के वे 5 चमत्कारी पेरेंटिंग टिप्स, जो आपके बच्चे को संस्कारी और सफल बना सकते हैं. पांचवीं सीख तो आज के हर बच्चे के लिए संजीवनी बूटी है.
सुबह की शुरुआत प्रार्थना से
बच्चों को सुबह जल्दी उठने की आदत डालें. दिन की शुरुआत भगवान को याद करके करें. कोई छोटा मंत्र बोलने को कह सकते हैं. या बस कुछ पल शांत बैठने दें. इससे बच्चे दिन की शुरुआत पॉजिटिव तरीके से करेंगे. मन भी शांत रहेगा. धीरे-धीरे उनमें कृतज्ञता की आदत बन सकती है. यह छोटी सी आदत उनके कॉन्फिडेंस और सोच पर भी अच्छा असर डाल सकती है.
नियमित दिनचर्या का पालन
बच्चों की लाइफ में रूटीन होना जरूरी है. सोने, उठने, पढ़ने और खेलने का समय तय रखें. हर बात में डांटने के बजाय प्यार से समझाएं. मोबाइल और गेमिंग का टाइम भी तय किया जा सकता है. इससे बच्चा खुद अपने समय को मैनेज करना सीखता है. पढ़ाई के साथ खेल और आराम के लिए भी वक्त मिले. ऐसी आदत आगे चलकर जिम्मेदारी निभाने में काम आती है.
दूसरों की मदद
नीम करोली बाबा की सीख में सेवा और प्रेम का खास महत्व है. बच्चों को दूसरों की मदद करना सिखाएं. दोस्त की पढ़ाई में मदद करना हो या घर में किसी छोटे काम में हाथ बंटाना. छोटी-छोटी चीजें भी मायने रखती हैं. उन्हें जरूरतमंद के साथ सम्मान से पेश आना बताएं. इससे बच्चे में दया और संवेदनशीलता बढ़ सकती है. वह सिर्फ अपने बारे में सोचने के बजाय दूसरों की फीलिंग्स भी समझना सीखेगा.
सच्चाई और विनम्रता
बच्चे से हमेशा सच बोलने की उम्मीद करें. लेकिन गलती होने पर उसे डराएं नहीं. उसे समझाएं कि सच बोलना ज्यादा जरूरी है. अपनी गलती मानना कमजोरी नहीं है. दूसरों से सम्मान से बात करना भी सिखाएं. बाबा की सीख के मुताबिक, अहंकार से दूर रहना जरूरी है. किसी ने बुरा व्यवहार किया हो, तब भी खुद का व्यवहार अच्छा रखना सीखें. यही आदत बच्चे की पर्सनैलिटी को मजबूत बना सकती है.
सादगीपूर्ण जीवन जीना
बच्चों को हर नई चीज दिलाना जरूरी नहीं है. महंगा फोन या गैजेट खुशी की गारंटी नहीं है. उन्हें चीजों की वैल्यू समझाएं. दिखावे की जगह जरूरत को महत्व देना सिखाएं. परिवार के साथ समय बिताएं. साथ बैठकर खाना खाएं. कभी बिना मोबाइल के बातचीत करें. ऐसी छोटी आदतें बच्चे को रिश्तों की अहमियत समझाती हैं. सादगी के साथ जीने वाला बच्चा लाइफ के उतार-चढ़ाव को भी ज्यादा सहजता से संभालना सीख सकता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.
हरियाणा के रेवाड़ी में हंस नगर में हुए मकान ब्लास्ट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 5 जुलाई को हुए इस हादसे में पिता और बेटी की मौत हो गई थी, जबकि दो साल की बच्ची समेत तीन लोग झुलस गए थे। पुलिस ने पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
गैस की दुर्गंध के बाद हुआ था जोरदार धमाका
पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, घटना के दिन परिवार घर में मौजूद था। इसी दौरान मकान में गैस की दुर्गंध महसूस होने की बात सामने आई। कुछ देर बाद बेटी ने कपड़े प्रेस करने के लिए बिजली का स्विच ऑन किया और अचानक जोरदार धमाका हो गया।
ब्लास्ट इतना तेज था कि मकान का गेट टूटकर दूर जा गिरा और कई जगहों की टाइलें भी उखड़ गईं। हादसे में परिवार के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
इलाज के दौरान पिता-बेटी की मौत
घायलों को पहले ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए तन्नू और उसके पिता सतबीर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान पहले तन्नू और अगले दिन उसके पिता सतबीर ने दम तोड़ दिया।
पाइपलाइन कंपनी के 3 लोग गिरफ्तार
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आईजीएल का ठेका लेने वाली कंपनी से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल, सुपरवाइजर संदीप और सहयोगी कंपनी के आरसीएम रंजीत शामिल हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान PNG गैस लीक होकर मकान में जमा हुई, जिसके बाद बिजली का स्विच ऑन करने से विस्फोट हो सकता है।
अभी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने गैस लीक होने की संभावना से इनकार किया है। घटनास्थल की विशेषज्ञों ने भी जांच की थी, लेकिन ब्लास्ट की वजह को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
पुलिस अब CFL रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसी रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर मकान में इतना बड़ा धमाका किस वजह से हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
गांव ढकिया चमन निवासी मोहम्मद रजा की तीन साल की बेटी अमायरा सोमवार सुबह घर के सामने से लापता हो गई थी। काफी तलाश करने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिल सका था।
शुक्रवार को पांचवे दिन सुबह लगभग 9 बजे घर से लगभग 800 मीटर दूर स्थित तालाब में उसका शव घास में फंसा मिला है। तालाब के सामने रहने वाली किशोरी सोनम को दुर्गंध आई तो उसने पास ही मौजूद आटो चालक रियाज को बताया।
रियाज ने डंडे से घास को हटाया तो अमायरा की टांग नजर आई। उसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गई तथा शव को बाहर निकाला। शव पानी में रहने के कारण फूल चुका था। गले पर निशान बना है।
हालांकि जिस समय शव मिला है, उस समय पुलिस टीम गांव में अन्य घरों की तलाशी लेने की तैयारी कर रही थी। ग्रामीण व स्वजन हत्या की आशंका जता रहे हैं।
एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बच्ची की मौत का कारण स्पष्ट होगा। उसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।