उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक प्रेम कहानी ने पूरे इलाके में खूब चर्चा बटोरी थी। करीब पांच साल से एक-दूसरे को जानने वाले युवक और युवती की मुलाकात उस वक्त यादगार बन गई, जब प्रेमिका से मिलने करीब 65 किलोमीटर दूर पहुंचे युवक को ग्रामीणों और परिजनों ने पकड़ लिया।
बताया गया था कि युवक सावन शिवरात्रि के मौके पर लगे मेले में अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचा था। दोनों काफी समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे। मेला खत्म होने के बाद युवक प्रेमिका को उसके घर छोड़ने जा रहा था, तभी ग्रामीणों और परिवार के लोगों की नजर दोनों पर पड़ गई।
दोनों को साथ देखकर मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। मामला बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के परिवार भी वहां पहुंच गए। इसके बाद गांव में पंचायत बुलाई गई, जिसमें काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच बातचीत चली।
करीब ढाई घंटे तक चली पंचायत के बाद दोनों परिवारों की सहमति से युवक और युवती की शादी कराने का फैसला लिया गया। इसके बाद गांव के शिव मंदिर में दोनों का विवाह कराया गया। पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी की रस्में पूरी हुईं और दोनों ने सात फेरे लेकर एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।
बताया गया था कि दोनों की प्रेम कहानी करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी। एक पारिवारिक शादी समारोह के दौरान दोनों की पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद मुलाकातों और बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।
आखिरकार, जिस रिश्ते को दोनों लंबे समय से परिवार और गांव वालों से छिपाकर निभा रहे थे, उसका अंत शादी के साथ हुआ। मंदिर में हुई इस शादी को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे और नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं।
दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करना सेहत के लिए हमेशा से फायदेमंद माना जाता रहा है। आयुर्वेद से लेकर आधुनिक साइंस तक, खाली पेट पानी पीने को फायदेमंद मानता है। साइंस के मुताबिक सुबह खाली पेट पानी पीने से बॉडी डिटॉक्स होती है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। कुछ लोग सुबह उठकर 12 महीने गर्म पानी पीते हैं तो कुछ लोग ठंडा पानी पीते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि सुबह उठकर हर किसी के लिए ठंडा और गर्म पानी पीने के फायदे बराबर हैं क्या? दरअसल, हर इंसान के शरीर की प्रकृति और उसकी शारीरिक जरूरतें अलग-अलग होती हैं। अक्सर लोग बिना अपनी बॉडी टाइप जैसे पित्त, वात या कफ को समझे केवल सुनी-सुनाई बातों पर सुबह-सुबह खौलता हुआ गर्म पानी पीना शुरु कर देते हैं तो कुछ लोग फ्रिज का ठंडा पानी पीना शुरू कर देते हैं, जो फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव ने बताया गर्म पानी जहां किसी के शरीर को ठीक कर देता है तो वहीं किसी दूसरे के शरीर में एसिडिटी,पेट में जलन और अपच जैसी घटनाओं को बढ़ा देता है। योग गुरु के मुताबिक अपने शरीर की स्थिति को समझ कर सुबह पानी का सेवन करना जरूरी है और सुबह उठकर प्राणायाम करना भी जरूरी है। आइए जानते हैं कि सेहत और लाइफस्टाइल के हिसाब से पानी का सही तापमान क्या होना चाहिए और इसे पीते समय किन-किन सावधानियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ।
सुबह उठते ही कैसा पानी पिएं?
सुबह उठकर पानी पीना शरीर में रातभर हुई सामान्य फ्लूइड लॉस की भरपाई करने का आसान तरीका है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए पानी का तापमान एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सामान्य स्वस्थ व्यक्ति अपनी पसंद और आराम के अनुसार कमरे के तापमान वाला या हल्का गुनगुना पानी पी सकता है। बहुत गर्म या बहुत ठंडा पानी पीना जरूरी नहीं है।
किन लोगों को ठंडा पानी पीना चाहिए?
योग गुरु के मुताबिक अगर एक हेल्दी इंसान ठंडा पानी आसानी से पचा और सहन कर पाता है, तो उसे नॉर्मल पानी पी सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि गर्मियों में हर व्यक्ति के लिए ठंडा पानी नुकसानदायक होता है। योग गुरु ने बताया बहुत ठंडा पानी कुछ लोगों में दांतों की संवेदनशीलता, गले में असहजता या सिर में अचानक दर्द जैसी परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए तापमान का चुनाव व्यक्ति की सहनशीलता पर निर्भर करता है।
किन लोगों को सुबह गुनगुना पानी पीना चाहिए?
जिन लोगों को सुबह ठंडा पानी पीने से असहजता होती है, वे हल्का गुनगुना पानी ले सकते हैं। कब्ज वाले लोगों में पर्याप्त पानी पीना मल को नरम रखने और bowel movement को आसान बनाने में मदद कर सकता है। गर्म पानी का सेवन करने से ना सिर्फ कब्ज की समस्या में राहत मिलती है बल्कि वजन कंट्रोल करना भी आसान होता है।
कौन-कौन सी बीमारियों में गर्म पानी से करें परहेज
बाबा रामदेव ने बताया जिन लोगों को एसिडिटी और गैस की दिक्कत होती है उन्हें सुबह खाली पेट गर्म पानी का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। ऐसे लोग सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना पानी अपनी सुविधा के अनुसार ले सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए बहुत अधिक मात्रा में पानी एक साथ पीने के बजाय दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर है। अगर बार-बार एसिडिटी होती है, तो केवल पानी के तापमान पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारणों की जांच करना भी जरूरी है।
पानी पीने का सही तरीका क्या है?
आयुर्वेद के मुताबिक पानी पीने का तरीका भी बहुत मायने रखता है। आयुर्वेद खड़े होकर पानी पीने के लिए मना करता है। आयुर्वेद के मुताबिक खड़े होकर पानी पीने से घुटनों या जोड़ों में दर्द होता है, या फिर शरीर में ‘वात विकृत’ हो जाता है। आप जब भी पानी पिएं तो बैठकर पिएं। आराम से बैठकर धीरे-धीरे पानी पीना ठीक है। सबसे जरूरी बात है कि पानी को बहुत तेजी से या जबरदस्ती ज्यादा मात्रा में नहीं पिएं।
सुबह कितना पानी पीना चाहिए?
सुबह उठकर जरूरी नहीं है कि आप बोतल भरकर या फिर तीन चार गिलास पानी का सेवन करें। आप सुबह उठकर एक से दो गिलास पानी पी सकते हैं। पानी की रिक्वायरमेंट प्यास, मौसम, शारीरिक गतिविधि और दिनभर के कुल fluid intake के अनुसार बदलती रहती है। एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय दिनभर नियमित रूप से पानी पीना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। पानी के तापमान और सेवन की मात्रा हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और मौसम के अनुसार अलग हो सकती है। किसी बीमारी के इलाज या वजन कम करने के लिए केवल गर्म या ठंडे पानी पर निर्भर न रहें। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या या लगातार लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह ले।
Pitru Paksha 2026 Date:
हिंदू धर्म में पितृपक्ष का बहुत ही खास महत्व होता है. पितृपक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने और तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. पितृपक्ष का आरंभ हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से होता है. इसका समापन आश्विन माह की अमावस्या पर होता है. पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष का आरंभ 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा के दिन होगा. इसका समापन 10 अक्टूबर को आश्विन अमावस्या को पितृपक्ष का समापन हो जाएगा.
पंचांग के अनुसार, 3 अक्टूबर को सप्तमी तिथि का समापन सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है. इसके बाद अष्टमी तिथि 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर समाप्त हो रही है. 4 अक्टूबर को नवमी तिथि मान्य होगी. ऐसे में 3 अक्टूबर को सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथि मान्य होगी.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचांग की जिस तिथि को परिजन की मृत्यु हुई होती है, उसी दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है. अगर किसी की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई है. ऐसे में उसका श्राद्ध पितृपक्ष में पंचमी तिथि के दिन किया जाएगा. इसके अलावा अगर किसी को अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि का नहीं पता हैं, ऐसे में वह सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और पिंडदान कर सकता है. पितृपक्ष के दौरान पितरों की आत्मा पृथ्वी लोक पर आती हैं. इस दौरान पितरों का श्राद्ध कर्म करने से वह प्रसन्न होते हैं. पितरों के प्रसन्न होने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है.
सुबह की शुरुआत आपकी सेहत का मिजाज तय करती है। अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है और शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ा हुआ है, तो इसकी वजह आपकी सुबह की रूटीन हो सकती है। खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान के चलते वजन बढ़ना और इंसुलिन असंतुलित होना आज एक आम समस्या बन चुका है। अगर आप भी सुबह उठते ही कुछ ऐसी गलतियां कर रहे हैं जो आपके मेटाबॉलिज्म को धीमा कर रही हैं, तो संभल जाने की जरूरत है। भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक सुबह की सिर्फ 3 आदतों में बदलाव करके आप अपने इंसुलिन लेवल को मैनेज कर सकते हैं और वजन को भी कंट्रोल कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि सुबह की आदतें कैसे इंसुलिन और वजन को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं।
सुबह की आदतें कैसे इंसुलिन और वजन को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं
अगर आप कम खाना खाने के बावजूद वजन बढ़ने, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने से परेशान हैं, तो वजह सिर्फ कैलोरी की मात्रा नहीं हो सकती। शरीर इंसुलिन के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करता है, यह भी महत्वपूर्ण है। सुबह की कुछ आसान आदतें इंसुलिन संवेदनशीलता और हेल्दी वेट को सपोर्ट कर सकती हैं। इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। जब हम कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो वे ग्लूकोज में टूटता हैं और ब्लडस्ट्रीम में पहुंचता हैं। इंसुलिन ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जाता है। इसलिए इंसुलिन खुद समस्या नहीं है बल्कि लक्ष्य यह है कि शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करे।
गुनगुना पानी पिएं
रात में 6 से 8 घंटे सोने के बाद शरीर थोड़ा डिहाइड्रेट हो सकता है। सांस लेने और पसीने के कारण रातभर शरीर से पानी की कुछ मात्रा कम होती है। इसलिए सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना हाइड्रेशन बनाए रखने का आसान तरीका है। ध्यान रखें कि पानी सीधे इंसुलिन का स्तर कम नहीं करता, लेकिन पर्याप्त हाइड्रेशन मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है और कई बार प्यास को भूख समझने से बचा सकता है। सुबह-सुबह बहुत गर्म नहीं बल्कि गुनगुना पानी पीना सेहत के लिए उपयोगी है।
मांसपेशियों को एक्टिव करें
आप अपने दिन की शुरुआत करने से पहले अपनी मांसपेशियों को एक्टिव रखें फिर नाश्ता करें। मांसपेशियां शरीर में ग्लूकोज के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब आप शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं और इससे इंसुलिन संवेदनशीलता को सपोर्ट मिल सकती है। सुबह नाश्ते से पहले 15 से 20 मिनट की हल्की से मध्यम एक्टिविटी आपके वजन को कम करने में बेहद असरदार साबित होती है। बॉडी एक्टिविटी में सुबह तेज चाल से चलना, सूर्य नमस्कार, स्ट्रेचिंग, सीढ़ियां चढ़ना या अपनी क्षमता के अनुसार हल्की एक्सरसाइज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए खाली पेट एक्सरसाइज जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता और हेल्थ कंडीशन के मुताबिक आप बॉडी को एक्टिव रख सकते हैं।
इंसुलिन-फ्रेंडली नाश्ता खाएं
आपका सुबह का नाश्ता बैलेंस होना चाहिए जिसमें फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट और अच्छी गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट का संतुलन हो। नाश्ते में फाइबर का सेवन करेंगे तो पाचन की गति धीमी रहेगी, जिससे ग्लूकोज धीरे-धीरे ब्लडस्ट्रीम में पहुंचेगा। आप सुबह के नाश्ते में सब्जियां, स्प्राउट्स, साबुत फल, ओट्स, मिलेट्स और साबुत अनाज खा सकते हैं। प्रोटीन डाइट के लिए आप सुबह के नाश्ते में मूंग, चना, राजमा, पनीर, दही, टोफू, नट्स और बीज खा सकते हैं। प्रोटीन डाइट पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने, मांसपेशियों को सपोर्ट करने और बार-बार स्नैकिंग से बचने में मदद कर सकती है। हेल्दी फैट की प्राप्ति के लिए आप नाश्ते में नट्स, बीज, मूंगफली, तिल, अलसी और थोड़ी मात्रा में घी का सेवन कर सकते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। सुबह सुबह बॉडी में एनर्जी बनाए रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट भी जरूरी हैं, लेकिन बहुत अधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता हैं। आप सुबह के नाश्ते में साबुत अनाज, दालें, बीन्स, साबुत फल, मिलेट और सीमित मात्रा में चपाती या चावल का सेवन कर सकते हैं।
सुबह की खराब आदतें जो बढ़ाती है वजन और बिगाड़ती है इंसुलिन बैलेंस
नाश्ता छोड़ने से बचें
नाश्ता छोड़ने के बाद कुछ लोगों को बहुत ज्यादा भूख लग सकती है, जिसके कारण बाद में ज्यादा खाना या मीठा और रिफाइंड फूड्स लोग ज्यादा खाते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए सिर्फ नाश्ता करना ही जरूरी नहीं बल्कि दिनभर के खाने का ध्यान रखना भी जरूरी है। नाश्ते में पिज्जा, फ्राइड राइस और मिठाइयां न लें। बचे हुए पिज्जा, फ्राइड राइस, नूडल्स और मिठाइयां अक्सर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी और वसा से भरपूर होते हैं। इन्हें नियमित नाश्ते का हिस्सा बनाने के बजाय फाइबर और प्रोटीन से भरपूर विकल्प चुनना बेहतर है।
नाश्ते में सिर्फ ड्रिंक का ही नहीं करें सेवन
फ्रूट जूस, मीठी चाय-कॉफी, मिल्क शेक और मीठी लस्सी जैसे ड्रिंक में फाइबर कम हो सकता है और इनमें मौजूद शुगर तेजी से अवशोषित हो सकती है। साबुत फल खाना आमतौर पर जूस पीने से बेहतर विकल्प है।
जरूरत से ज्यादा खाने से बचें
बहुत ज्यादा खाना एक साथ लेने से कुल कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए पेट को बहुत भारी करने के बजाय संतुष्ट होने तक खाना बेहतर है।
लंबे समय तक लगातार न बैठें
खाने के बाद थोड़ी देर चलना-फिरना या लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना ग्लूकोज कंट्रोल के लिए मददगार हो सकता है। दिनभर की छोटी-छोटी एक्टिविटी करके ब्रेक लेना एक अच्छी आदत है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। सुबह की ये आदतें और संतुलित आहार इंसुलिन संवेदनशीलता और वजन कंट्रोल को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन ये डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस या मोटापे का इलाज नहीं हैं। किसी भी डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव से पहले, खासकर यदि आप डायबिटीज की दवा लेते हैं या कोई स्वास्थ्य समस्या है, डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह जरूर लें।
Money Vastu Upay:
क्या मेहनत करने के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिकता है? कमाई होती है, लेकिन खर्च और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है? ऐसे में हम अक्सर आय बढ़ाने के तरीके खोजते हैं, लेकिन घर के माहौल और मुख्य द्वार पर ध्यान नहीं देते हैं. वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को बेहद खास माना गया है. मान्यता है कि यहीं से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रवेश होता है. इसलिए आज जानते हैं, 3 आसान लेकिन असदार वास्तु उपाय, जिन्हें अपनाने से लाभ होता है.
दरवाजे का रंग और नेमप्लेट
वास्तु की मान्यता के अनुसार, मुख्य द्वार पर बहुत गहरे रंगों से बचना चाहिए. खासकर काला या गहरा नीला रंग न चुनने की सलाह दी जाती है. इसकी जगह हल्का पीला, क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग अच्छा माना जाता है. साथ ही मुख्य द्वार के दाईं तरफ साफ-सुथरी नेमप्लेट लगाएं. लकड़ी या पीतल की नेमप्लेट रख सकते हैं. ध्यान रखें कि उस पर नाम साफ दिखाई दे. टूटी, पुरानी या धुंधली नेमप्लेट को बदल देना बेहतर है.
काली हल्दी की पोटली
नकारात्मक ऊर्जा और नजर से बचाव के लिए काली हल्दी का यह पारंपरिक उपाय किया जाता है. इसके लिए एक छोटे काले कपड़े में काली हल्दी की गांठ और थोड़ा फिटकरी बांध लें. इस पोटली को मुख्य द्वार के पास ऐसी जगह रखा या टांगा जा सकता है, जहां वह बहुत ज्यादा नजर न आए. यह एक पारंपरिक वास्तु मान्यता है, जो अक्सर लोग करते हैं.
दहलीज के लिए खास उपाय
घर की दहलीज को वास्तु में खास महत्व दिया जाता है. पारंपरिक मान्यता के अनुसार, दहलीज के नीचे चांदी का तार रखने का उपाय बताया गया है. अगर इसके लिए तोड़-फोड़ संभव नहीं है, तो आसान तरीका अपना सकते हैं. हर सुबह मुख्य द्वार और दहलीज की अच्छी तरह सफाई करें. पानी में थोड़ी हल्दी मिलाकर दहलीज पर छिड़काव भी किया जा सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि दरवाजे के सामने जूते, कूड़ा या बेकार सामान का ढेर न लगाएं.
इसका भी रखें ध्यान
मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, ॐ या शुभ-लाभ का चिह्न लगाना भी शुभ माना जाता है. आम या अशोक के पत्तों की वंदनवार भी लगा सकते हैं. बस ध्यान रखें कि एंट्री साफ, खुली और रोशनी वाली हो. घर का माहौल जितना व्यवस्थित रहेगा, उतना ही पॉजिटिव फील होगा. आखिर घर की पहली झलक मुख्य द्वार से ही मिलती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए हत्या के दोषी 105 साल के एक बुजुर्ग को बड़ी राहत दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बुजुर्ग को जेल की सलाखों से हमेशा के लिए आजाद कर दिया है। अदालत ने उनकी उम्र और सेहत को ध्यान में रखते हुए न सिर्फ उनका केस बंद कर दिया, बल्कि उनकी उम्रकैद की बाकी सजा को भी पूरी तरह माफ कर दिया है।
मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए साफ किया कि भले ही उनकी उम्रकैद की पूरी अवधि खत्म न हुई हो, लेकिन उन्हें अब दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने साल 2024 में दिए गए उनके अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम रूप दे दिया है।
अब समझिए पूरा मामला
बता दें कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को साल 1994 में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। वह तब से जेल में बंद थे, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें जमानत नहीं दे दी। बुजुर्ग होने के कारण उन्हें कई उम्र संबंधी बीमारियां और स्वास्थ्य समस्याएं थीं।
इसके बाद 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने रसिक चंद्र मंडल की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उनकी याचिका खारिज हो गई थी।
99 साल की उम्र में डाली थी रिहाई की याचिका
गौरतलब है कि उम्र के 99वें साल में पहुंचने पर उन्होंने अपनी अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की याचिका दाखिल की। इसके बाद मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।
इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे अब अदालत ने फाइनल कर दिया है। इस फैसले के बाद अब 105 साल के रसिक चंद्र मंडल बिना किसी कानूनी बंदिश के एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में अपना बाकी जीवन जी सकेंगे।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ।
राजधानी लखनऊ को गुरुवार को सहमा देने वाले डबल मर्डर और सुसाइड केस के बाद आरोप पर सफाई का दौर जारी है। ICICI बैंक में अधिकारी दिव्या मिश्रा हत्या के बाद पति स्टेट बैंक कर्मी मानस बाजपेई ने सुसाइड करने से पहले व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया और पत्नी को चीटर बताया था। दिव्या की हत्या और मानस के व्हाट्सऐप स्टेटस के सामने आने के बाद सोशल मीडिया (Social Media) पर कुछ लोगों के प्रज्ञा मिश्रा को लेकर भी तरह-तरह के सवाल उठने के बाद उन्होंने सबका जवाब दिया।
मानस के व्हाट्सऐप स्टेटस और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखकर मानस पर गंभीर आरोप लगाए और उसे ‘साइको हत्यारा बताया। पुलिस इस मामले में हत्या और आत्महत्या की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है तो दिव्या की बहन के आरोपों ने पति-पत्नी के रिश्ते, कथित घरेलू हिंसा और घटना से पहले के हालात को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शादी की पहली रात ही मानस ने रखी शर्त
प्रज्ञा के मुताबिक, मानस का व्यवहार शादी के शुरुआती दिनों से ही सामान्य नहीं था। दिव्या की बहन प्रज्ञा ने मानस वाजपेई को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। प्रज्ञा के मुताबिक, सुहागरात में मानस ने घर के खर्चों की लिस्ट बनाकर आधा खर्च उठाने की शर्त रखी थी। शादी की पहली रात ही मानस ने घर के खर्चों की एक सूची तैयार की थी और दिव्या के सामने आधा खर्च उठाने की शर्त रखी थी। दिव्या ने शुरुआत में यह व्यवस्था स्वीकार कर ली, लेकिन बाद में जब उसने अपने हिस्से का खर्च देना बंद किया तो मानस को लगा कि उसके साथ धोखा हो रहा है और पत्नी को चिटिंग करने वाली बताया।
छोटी-छोटी बातों पर मारपीट का आरोप
प्रज्ञा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में मानस पर घरेलू हिंसा के गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि मानस छोटी-छोटी बातों को लेकर दिव्या के साथ मारपीट करता था। उन्होंने उदाहरण देते हुए लिखा कि अगर Blinkit से मंगाया गया कोई टमाटर खराब निकल आता था, तो मानस इसके लिए भी दिव्या को जिम्मेदार ठहराकर उसके साथ मारपीट करता था।
बहन तुलिका पर अपनी बीमार मां के साथ भी मारपीट
प्रज्ञा ने मानस और उसकी बहन तुलिका पर अपनी बीमार मां के साथ भी मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रज्ञा ने यह भी दावा किया कि मानस और उसकी बहन ने मिलकर उनकी बीमार मां के साथ भी मारपीट की थी और इतनी पिटाई की कि उनकी मौत हो गई थी।
मानस अक्सर करता था दिव्या का पीछा
प्रज्ञा ने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि मानस अक्सर दिव्या का पीछा करता था। लगातार तनाव की वजह से कुछ समय पहले दिव्या का एक्सीडेंट भी हुआ था, जिसमें उसके हाथ और पैर टूट गए थे। दिव्या को करीब डेढ़ से दो महीने तक इलाज कराना पड़ा। हाल ही में उसने दोबारा चलना शुरू किया था और घटना वाले दिन भी वह दर्द में थी। इसके बावजूद, प्रज्ञा के अनुसार, दिव्या अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रही थी।
रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रही थी दिव्या
प्रज्ञा ने दावा किया कि दिव्या ने अब तक मानस के नाम का टैटू नहीं हटवाया था और वह हरतालिका तीज का व्रत रखने की तैयारी भी कर रही थी। इतनी प्रताड़ना के बावजूद दिव्या तीज का व्रत रखने वाली थी। प्रज्ञा ने कहा कि दिव्या भीतर ही भीतर चाहती थी कि सब कुछ ठीक हो जाए और उसका पति सुधर जाए। इन दावों के जरिए उन्होंने यह सवाल उठाया कि अगर दिव्या अपने पति से पूरी तरह अलग होना चाहती थी, तो वह अब भी रिश्ते को बचाने की कोशिश क्यों कर रही थी। प्रज्ञा ने दावा किया कि दिव्या की फैमिली कोर्ट (Family Court) में काउंसलर के साथ भी झड़प हुई थी।
मानस के मोबाइल पर स्टेटस
मानस बाजपेई ने गुरुवार को मोबाइल पर स्टेटस लगाया था कि ‘टूडे आइ किल माइ वाइफ, एज शी चीटेड मी, नाव हाइ हेव किल माइ सेल्फ एंड माइ सिस्टर…. हर सिस्टर प्रज्ञा एंड भरत नोज एवरीथिंक ( हमने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है, वह मुझे धोखा दे रही थी, अब मैं खुद व अपनी बहन को मारने जा रहा हूं, प्रजा व भरत को पूरी जानकारी है।) दिव्या की बहन प्रज्ञा है और उसके जीजा भरत हैं। इसे पोस्ट ने सनसनी मचा दी। उसने यह भी लिखा था कि दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा और उनके पति भरत यादव सब कुछ जानते हैं।
उत्तर प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया , जिसने उस समय पूरे इलाके में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। बताया गया था कि एक महिला अपने ही पति के मकान में रहने आए किराएदार युवक के संपर्क में आ गई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती गईं और यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया था। इसके बाद महिला अपने पति और छोटे बच्चे को छोड़कर किराएदार युवक के साथ घर से चली गई थी।
यह पूरा मामला जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र का बताया गया था। पीड़ित पति के अनुसार, उसने अप्रैल 2025 में एक युवक को अपने मकान में किराए पर कमरा दिया था। वह युवक अपनी पत्नी के साथ वहां रहने आया था। इसी दौरान उसकी पत्नी और मकान मालिक के बीच बातचीत शुरू हुई थी, जो आगे चलकर बढ़ती चली गई थी।
कुछ समय बाद दोनों के बीच संबंध इतने गहरे हो गए थे कि उन्होंने घर छोड़कर साथ जाने का फैसला कर लिया था। पति का आरोप था कि सितंबर 2024 में उसकी पत्नी अपने छोटे बच्चे को लेकर किराएदार युवक के साथ घर से फरार हो गई थी।
मंदिर में शादी का वीडियो भेजा गया था
पत्नी और बच्चे के अचानक गायब होने के बाद पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवाई थी। इसी बीच उसे जानकारी मिली थी कि महिला ने अपने प्रेमी के साथ मंदिर में शादी कर ली थी।
आरोप यह भी था कि शादी के बाद दोनों ने इसका वीडियो भी पति को भेज दिया था। वीडियो देखने के बाद पति के सामने पत्नी और बच्चे को लेकर स्थिति और भी गंभीर हो गई थी।
बच्चे को लेकर विवाद चलता रहा था
पीड़ित पति का कहना था कि वह अपने बच्चे को वापस पाना चाहता था। उसका दावा था कि बच्चे को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बना हुआ था। इस मामले में पुलिस और न्यायालय स्तर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी।
पति के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिश भी की गई थी, लेकिन उसने सुलह करने से इनकार कर दिया था। उसका कहना था कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने बच्चे से मिलना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
मारपीट और धमकी के आरोप भी लगे थे
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया था कि न्यायालय से लौटने के बाद उसके साथ मारपीट की गई थी और जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इन आरोपों को लेकर उसने अधिकारियों से शिकायत कर सुरक्षा की मांग की थी।
उसका कहना था कि घटना को कई महीने बीत चुके थे, लेकिन वह अब तक अपने बच्चे से नहीं मिल पाया था। उसने प्रशासन से मामले में उचित कार्रवाई करने और अपने बच्चे से मिलने का अधिकार दिलाने की मांग की थी।
फिलहाल यह मामला उस समय पुलिस और प्रशासन के स्तर पर जांच और कार्रवाई के दायरे में चल रहा था। पति द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाई थी।
उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने आसपास के लोगों को हैरान कर दिया। पत्नी को उसके परिचित युवक के साथ देखने के बाद पति ने विवाद या मारपीट करने के बजाय दोनों को साथ रहने की मंजूरी दे दी। बाद में उसने परिवार और परिचितों की मौजूदगी में दोनों की शादी करा दी।
बताया गया था कि दंपती की शादी करीब 25 साल पहले हुई थी और उनके दो बच्चे भी हैं। पिछले कुछ समय से पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद चल रहा था। इसी वजह से पत्नी अलग जगह पर रहने लगी थी।
इसी दौरान महिला की जान-पहचान एक दूसरे व्यक्ति से बढ़ गई। दोनों के बीच बातचीत और मुलाकात का सिलसिला आगे बढ़ा और धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां हो गईं। आसपास के लोगों को भी उनके संबंधों की जानकारी होने लगी थी।
घटना वाले दिन पति अचानक उस स्थान पर पहुंच गया, जहां उसकी पत्नी उस व्यक्ति के साथ मौजूद थी। पत्नी को उसके साथ देखकर पति ने हंगामा करने के बजाय एक अलग ही फैसला लिया। उसने परिवार के कुछ लोगों और परिचितों को वहां बुलाया और दोनों के रिश्ते को स्वीकार करने की बात कही।
इसके बाद सबकी मौजूदगी में महिला ने उस व्यक्ति को वरमाला पहनाई। बाद में मंदिर में दोनों का विवाह भी कराया गया। इस दौरान आसपास के लोग बड़ी संख्या में वहां मौजूद रहे और पूरा घटनाक्रम देखते रहे।
बताया गया कि पति-पत्नी के बीच पहले से ही विवाद चल रहा था और दोनों अलग रहने के साथ वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने की कानूनी प्रक्रिया में भी थे। ऐसे में पति के इस फैसले ने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया।
शादी के बाद महिला ने अपने पुराने परिचित के साथ रहने की बात कही। वहीं, पति के इस कदम की इलाके में काफी चर्चा हुई। लोगों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि पत्नी को दूसरे व्यक्ति के साथ देखने के बाद पति ने विरोध करने के बजाय खुद दोनों के विवाह की पहल कर दी थी।
उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक ऐसा मामला सामने आया था, जिसने पूरे गांव में चर्चा छेड़ दी थी। चार बच्चों की मां और चार बच्चों के पिता ने अपने पुराने रिश्तों से अलग होने के बाद एक-दूसरे के साथ रहने का फैसला किया और शादी कर ली। दोनों के इस फैसले के बाद गांव में मामला काफी गरमा गया था।
बताया गया था कि दोनों पहले से शादीशुदा थे और अपने-अपने परिवारों से अलग रह रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। कुछ समय बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और गांव से बाहर चले गए। बाद में मंदिर में शादी की रस्में निभाते हुए एक-दूसरे को पति-पत्नी स्वीकार करने का वीडियो भी सामने आया था।
महिला के चार बच्चे बताए गए थे, जिनमें दो बेटे और दो बेटियां थीं। वहीं, युवक के भी अपनी पिछली शादी से चार बच्चे थे। जानकारी सामने आने के बाद दोनों परिवारों में तनाव का माहौल बन गया था और गांव में इस रिश्ते को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी थीं।
मामला बढ़ने के बाद गांव में महापंचायत बुलाई गई। पंचायत में दोनों के फैसले को लेकर काफी देर तक चर्चा हुई। कुछ ग्रामीणों ने इस रिश्ते को परिवार और सामाजिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं बताया। बच्चों पर इसके प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई।
पंचायत में यह फैसला लिया गया कि दोनों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि, दोनों ने अपने फैसले को लेकर पीछे हटने से इनकार किया था और साथ रहने की बात कही थी।
इस घटना के बाद गांव में लंबे समय तक यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। एक तरफ दोनों के साथ रहने के फैसले को लेकर सवाल उठे, तो दूसरी तरफ उनके पहले परिवारों और बच्चों की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों के बीच चिंता देखने को मिली।