Raksha Bandhan 2026:
रक्षाबंधन का पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है. सावन पूर्णिमा तिथि इस साल 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को महत्व देते हुए. सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को मान्य होगी. इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा.
भाई न होने पर क्या करें?
रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई के हाथ में राखी बांधती हैं. इसे रक्षा सूत्र माना जाता है. अगर किसी का भाई नहीं है, तो वह ऐसे में भगवान को राखी बांध सकती हैं. इससे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा. इसके अलावा भगवान को राखी बांधना बहुत ही शुभ माना जाता है. आप भाई को राखी बांधने से पहले भगवान को राखी बांध सकती हैं. चलिए देवताओं को राखी बांधने के बारे में जानते हैं.
इन 4 देवताओं को बांध सकती हैं राखी
शिव जी –
रक्षाबंधन के पर्व पर भगवान शिव को राखी बांधनी चाहिए. शिव जी को राखी बांधने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होगा. भोलेनाथ भय और संकट से आपकी रक्षा करेंगे. शिव जी को हरे रंग की राखी बांधनी चाहिए.
हनुमान जी –
हनुमान जी को शिव जी का ही रूप माना जाता है. आप हनुमान जी को राखी बांध सकती हैं. हनुमान जी को नारंगी रक्षासूत्र बांधे. इससे आपको बल-बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिलेगा.
गणेश जी –
गणेश जी को हिंदू धर्म में सर्वप्रथम पूज्नीय माना जाता है. रक्षाबंधन के पर्व पर गणेश जी को राखी बांधें. गणेश जी को राखी बांधने से विघ्नहर्ता सभी विघ्न दूर करेंगे. गणेश जी को लाल या नारंगी रंग की राखी बांधे.
कृष्ण जी –
कृष्ण जी को आप राखी बांध सकती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्रौपदी ने कृष्ण जी को रक्षा सूत्र बांधा था. इसके बाद उन्होंने द्रौपदी की रक्षा की थी. आप कृष्ण जी को नीले रंग की राखी बांधे.
अक्सर जब लोगों को पता चलता है कि उनका cholesterol बढ़ गया है, तो वे तुरंत walking और exercise शुरू कर देते हैं। अच्छी बात है, लेकिन cholesterol को control करने में आपकी diet का भी बहुत बड़ा role होता है।
आज मैं आपको ऐसे 10 foods के बारे में बताऊंगा जिन्हें अपनी regular diet में शामिल करके cholesterol को कम करने में मदद मिल सकती है।
इनमें से आप अपनी सुविधा के अनुसार कुछ foods को अपनी daily diet का हिस्सा बना सकते हैं।
1. ओट्स (Oats)
कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए पहला food है ओट्स।
ओट्स में beta-glucan नाम का soluble fiber पाया जाता है। यह पेट और आंतों में एक तरह का gel बनाता है और cholesterol को शरीर से बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
अगर आप oats लेते हैं तो flavored और ज्यादा processed oats की जगह plain rolled oats या steel-cut oats को प्राथमिकता दे सकते हैं।
इन्हें सब्जियों के साथ नमकीन दलिया बनाकर भी खाया जा सकता है।
2. जौ (Barley)
दूसरा बहुत अच्छा food है जौ।
आयुर्वेद में जौ को मेदहर कहा गया है। इसमें भी soluble fiber पाया जाता है, जो cholesterol management में मदद कर सकता है।
अगर आप रोज गेहूं की रोटी खाते हैं, तो अपनी diet में कुछ मात्रा में जौ की रोटी शामिल कर सकते हैं।
3. अलसी (Flax Seeds)
तीसरा food है अलसी।
अलसी में:
Omega-3 fatty acids
Lignans
Fiber
जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
इसे खाने का एक आसान तरीका है कि अलसी को हल्का भूनकर पीस लें और फिर इसे:
दाल
सलाद
चावल
आटा
सूप
आदि में मिलाकर खाएं।
बेहतर होगा कि एक साथ बहुत ज्यादा powder बनाकर रखने की बजाय थोड़ी मात्रा में ही पीसें।
4. लहसुन (Garlic)
लहसुन को cholesterol के लिए एक महत्वपूर्ण food माना जाता है।
लहसुन में allicin नाम का compound पाया जाता है।
लहसुन का इस्तेमाल अपनी regular diet में किया जा सकता है। इसे सब्जी, दाल या अन्य भोजन में शामिल करना आसान है।
5. मेथी दाना (Fenugreek Seeds)
अगला food है मेथी दाना।
मेथी में fiber और कई bioactive compounds पाए जाते हैं। इसे cholesterol और blood sugar management के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
एक तरीका यह है कि मेथी दाने को रातभर पानी में भिगोकर सुबह लिया जाए।
इसे पीसकर आटे या दाल-सब्जी में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
6. आंवला (Amla)
आंवला आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाने वाला food है।
इसमें antioxidant compounds और vitamin C पाए जाते हैं।
आप इसे अलग-अलग तरीकों से अपनी diet में शामिल कर सकते हैं:
कच्चा आंवला
आंवला पाउडर
आंवला अचार
आंवला मुरब्बा
अगर मुरब्बा खाते हैं तो उसमें मौजूद अतिरिक्त sugar का भी ध्यान रखना चाहिए।
7. अखरोट (Walnuts)
अखरोट में healthy fats और Omega-3 fatty acids पाए जाते हैं।
इसे snack के रूप में लिया जा सकता है।
उदाहरण के लिए शाम के समय कुछ अखरोट के साथ आंवला लिया जा सकता है।
8. भिंडी (Lady Finger)
भिंडी में soluble fiber पाया जाता है।
इसलिए cholesterol management के लिए इसे अपनी diet में शामिल किया जा सकता है।
भिंडी को बहुत ज्यादा तेल में fry करने की बजाय कम तेल में बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
9. इसबगोल (Psyllium Husk)
इस पूरी list में इसबगोल सबसे महत्वपूर्ण fiber sources में से एक है।
इसमें बड़ी मात्रा में soluble fiber होता है और cholesterol management में इसका उपयोग किया जाता है।
इसे दही या पानी के साथ लिया जा सकता है।
इसबगोल लेते समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
10. साबुत दालें और Beans
हमारी रोज की kitchen में मौजूद एक बहुत underrated food है साबुत दालें और legumes।
जैसे:
राजमा
छोले
काले चने
लोबिया
हरी मूंग
साबुत मसूर
इनमें fiber और plant-based protein पाया जाता है।
Cholesterol को ध्यान में रखते हुए साबुत दालों को diet में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
दालों को पकाने से पहले कुछ घंटे भिगोने से digestion में भी मदद मिल सकती है।
और जरूरत के अनुसार अलसी, मेथी दाना, लहसुन और इसबगोल को भी अपनी diet में शामिल किया जा सकता है।
अगर आपका cholesterol काफी बढ़ा हुआ है या आप पहले से cholesterol की दवा ले रहे हैं, तो अपनी दवा को खुद से बंद करने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही बदलाव करें।
जयपुर : जयपुर के सांगानेर सदर इलाके में झाड़ियों के पीछे पड़ा वो प्लास्टिक का कट्टा सिर्फ एक सड़ती हुई लाश को नहीं छुपा रहा था, बल्कि खून से सने उस खौफनाक सच को भी दबाए बैठा था, जिसने रिश्तों के ताने-बाने को तार-तार कर दिया. 75 साल के बुजुर्ग जगदीश जाट को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि जिस घर को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा, वही घर उनकी कब्र की वजह बनेगा. जब पुलिस ने कट्टे को खोला, तो भीतर पड़े सड़ चुके शव और उससे उठती बदबू ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी. लेकिन सांगानेर सदर पुलिस की तीखी नजरों से वो मुजरिम बच न सके, जिन्होंने इस खूनी खेल की पटकथा लिखी थी.
दोपहर के करीब साढ़े तीन बजे जब राहगीरों ने झाड़ियों के पीछे से एक अजीब सी सड़न भरी बदबू महसूस की, तो तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब प्लास्टिक के बोरे को काटा, तो उसमें 75 वर्षीय जगदीश जाट का शव मिला. लाश की हालत देखकर साफ लग रहा था कि कत्ल कई दिन पहले किया गया है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जब परिवार वालों को मौके पर बुलाया, तो मृतक की पत्नी सजना देवी और पुत्र सवाईराम जाट के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं. उनके चेहरे पर गम की जगह एक अजीब सा डर और हड़बड़ाहट साफ दिखाई दे रही थी. पुलिस उपायुक्त-दक्षिण राजर्षि राज की सतर्क टीम ने दोनों के इन संदिग्ध हाव-भावों को भांप लिया और बिना देर किए उन्हें हिरासत में ले लिया.
शराब की लत और घर की कलह का खूनी अंत
थाने के कड़े पहरे में जब पुलिस ने सजना देवी और सवाईराम से अलग-अलग पूछताछ शुरू की, तो दोनों ज्यादा देर तक झूठ के पुलिंदे के पीछे नहीं छिप सके. कड़ाई से हुई पूछताछ में दोनों टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में सामने आया कि मृतक जगदीश अत्यधिक शराब पीने का आदी था और आए दिन घर में क्लेश और मारपीट करता था. रोज-रोज के इस झगड़े से तंग आकर मां-बेटे ने मिलकर जगदीश को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया. उन्होंने मौका पाकर 18 अगस्त की शाम जब शराब के नशे में विवाद हुआ, तो पत्नी सजना देवी (70) और छोटे बेटे सवाईराम जाट (40) ने मिलकर पहले जगदीश का गला दबाया. फिर भी सांसें चलती देख कुल्हाड़ी, चाकू और दांतली से वार कर उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद आरोपी बेटा सवाईराम शव को घसीटकर बाथरूम में ले गया. उसने कुल्हाड़ी से पिता के हाथ और गर्दन काटने का प्रयास किया. जब कुल्हाड़ी से अंग नहीं कटे तो उसने रसोई से चाकू और दांतली लाकर धड़ व हाथ अलग-अलग काट डाले. 19 अगस्त को पूरा दिन और रात शव घर में ही पड़ा रहा. बेटा रातभर लाश के साथ रहकर उसके टुकड़े करता रहा.
कैब चालक की सतर्कता से खुली कत्ल की परतें
20 अगस्त को तड़के करीब 3:30 बजे सवाईराम कट्टे में भरे शव के टुकड़ों को ठिकाने लगाने के लिए टैक्सी बुलाकर ले जाने की फिराक में था. लेकिन कट्टे से आती तेज बदबू के कारण टैक्सी चालक को अनहोनी की आशंका हुई और उसने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही सांगानेर सदर थानाधिकारी कमलेश कुमार शर्मा की टीम मौके पर पहुंची. पानी की टंकी के पास खाली प्लॉट में झाड़ियों के बीच प्लास्टिक के कट्टे में बंद जगदीश चौधरी का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ. पुलिस ने जब परिजनों को बुलाया, तो मृतक की पत्नी सजना देवी और बेटे सवाईराम जाट के चेहरे के हाव-भाव देखकर पुलिस को तुरंत शक हो गया. डीसीपी (साउथ) राजर्षि राज वर्मा के निर्देशन में जब पुलिस ने दोनों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उन्होंने बताया कि जगदीश अत्यधिक शराब पीने का आदी था और रोज-रोज के क्लेश व प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया.
टोंक में बहू की हत्या में भी जेल जा चुका है पूरा परिवार
इस अंधे कत्ल की जांच में सबसे सनसनीखेज खुलासा यह हुआ कि यह परिवार पहले से ही खूनी वारदातों में शामिल रहा है. आरोपी सजना देवी और सवाईराम जाट वर्ष 2024 (टोंक के पचेवर थाना क्षेत्र) में अपनी ही बहू की हत्या के मामले में जेल जा चुके थे. इस संगीन वारदात में मृतक जगदीश, उसकी पत्नी, दोनों बेटे (सवाईराम और रामअवतार) शामिल थे. पूरा परिवार करीब चार महीने पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आया था, जबकि बड़ा बेटा रामअवतार अभी भी जेल में ही बंद है. जमानत पर बाहर आते ही मां-बेटे ने मिलकर घर के मुखिया की ही बलि चढ़ा दी. सांगानेर सदर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की थी. हनुमान जी के भक्त रोजाना या खासकर मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करते हैं. हनुमान जी की भक्ति और चालीसा का पाठ करने वाले लोगों को हनुमान चालीसा पढ़ने के दौरान कई नियमों का ध्यान रखना चाहिए. हनुमान चालीसा का पाठ करने के नियमों के बारे में जानते हैं.
हनुमान चालीसा का पाठ करने के नियम
हनुमान चालीसा का पाठ साफ और स्वच्छ स्थान पर बैठकर करना चाहिए. शुद्धता और पवित्रता का खास ध्यान रखना चाहिए. सुबह या शाम के समय चालीसा का पाठ करना अधिक फलदायी होता है. स्नान कर साफ लाल रंग के वस्त्र पहनकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष बैठकर और प्रतिमा के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर चालीसा का पाठ करें. चालीसा का पाठ करने के साथ ही हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं. भक्त 5, 7, या 11 बार चालीसा का पाठ करें.
श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि। बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
चौपाई
—विज्ञापन—
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे। कांधे मूंज जनेउ साजे।। शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन।। बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानु। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रच्छक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूतपिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।। और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकन्दन राम दुलारे।। अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुह्मरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै।। अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरिभक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
मुरादाबाद के रानीनागल गांव में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब पांच साल पहले सड़क हादसे में पति को खो चुकी तीन बच्चों की मां तबस्सुम ने छह बच्चों के पिता मोहम्मद उमर के साथ निकाह कर नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया है। दोनों ने परिवार की नाराजगी के बावजूद पहले निकाह और फिर कोर्ट मैरिज की।
पति की मौत के बाद बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही थीं तबस्सुम
तबस्सुम के पति रियाजुल की करीब पांच साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों की परवरिश कर रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात मोहम्मद उमर से हुई। उमर पेशे से मैकेनिक हैं और उनके भी छह बच्चे हैं। दोनों की परिस्थितियां काफी हद तक एक जैसी थीं और बातचीत के दौरान दोनों ने साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया।
परिवार ने किया विरोध, फिर भी नहीं बदला फैसला
बताया जा रहा है कि दोनों के रिश्तेदार इस शादी के पक्ष में नहीं थे। इसके बावजूद तबस्सुम और उमर ने परिजनों को बिना बताए कलियर शरीफ जाकर निकाह किया और बाद में कोर्ट मैरिज भी कर ली। जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो विवाद खड़ा हो गया। मामला बढ़ने पर गांव में पंचायत बुलाई गई।
पंचायत में दोनों ने साफ कहा- अब अलग नहीं होंगे
ग्राम प्रधान जाहिद हुसैन की अगुवाई में हुई पंचायत में दोनों से उनकी राय पूछी गई। तबस्सुम और उमर ने साफ कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से साथ रहने का फैसला किया है और अब अलग नहीं होंगे। उमर ने तबस्सुम और उनके तीनों बच्चों की जिम्मेदारी उठाने का भरोसा भी दिया।
बताया गया कि उमर ने किराए के मकान, खरीदे गए प्लॉट और बच्चों के भरण-पोषण को लेकर हलफनामा भी दिया।
अब एक परिवार में होंगे 9 बच्चे
पंचायत की सहमति के बाद तबस्सुम अपने तीनों बच्चों के साथ उमर के घर चली गईं। अब दोनों के कुल 9 बच्चे एक साथ रहेंगे। यानी पति-पत्नी और 9 बच्चों को मिलाकर यह परिवार कुल 11 सदस्यों का होगा।
गांव में इस शादी को लेकर काफी चर्चा है। कई लोग दोनों के फैसले की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि दोनों ने अपने पुराने संघर्षों को पीछे छोड़कर एक-दूसरे का साथ देने और मिलकर अपने बच्चों का भविष्य संवारने का फैसला किया है
जनपद मथुरा के वृंदावन कोतवाली क्षेत्र स्थित अटल्ला चुंगी स्थित प्रेम कुटी आश्रम पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में लवेदी थाना क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर घार निवासी संत राघवदास उर्फ राजकुमार (57) की चाकू से गोदकर हुई नृशंस हत्या और पोस्टमार्टम के बाद शव गुरुवार देर शाम गांव पहुंचा।
शव देखकर छोटे भाई अमित कुमार, कल्याण सिंह, भानु प्रताप, बहनें ज्योति, लक्ष्मी, पूजा, खुशबू और वृद्ध मां राजकुमारी सभी रोने विलखने लगे।
स्वजन के अनुसार संत राघवदास पिछले नौ वर्षों से प्रेम कुटी आश्रम में पूजा-पाठ कर रहे थे, उनका परिवार गांव में रहता है। आरोप लगाया कि आश्रम पर कब्जा करने की नियत से लवेदी क्षेत्र के ग्राम पहाड़पुर निवासी एक साधु और तीन अन्य लोगों ने 17 अगस्त को दोपहर करीब ढाई बजे आश्रम में घुसकर संत राघवदास से मारपीट की थी। यह जानकारी राघवदास ने फोन पर भाई भानु प्रताप को दी थी।
स्वजन ने बताया कि 18 अगस्त की दोपहर करीब तीन बजे आरोपितों ने दोबारा आकर राघवदास पर हमला कर दिया और शरीर में नौ से दस जगह चाकू से वार कर हत्या कर दी। सूचना मिलने पर गांव से 20 से 25 लोग वृंदावन पहुंचे, लेकिन तब तक पुलिस पोस्टमार्टम के बाद शव उनके घर के लिए भेज दिया था। घटना के बाद सभी हत्यारोपित फरार हो गए।
भाई भानू प्रताप की तहरीर पर कोतवाली वृंदावन में तीन नामजद समेत पांच लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपित लवेदी थाना क्षेत्र के ग्राम पहाड़पुर का साधु है। अन्य आरोपित वृंदावन के बताए जा रहे हैं। शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरे गांव में शोक की लहर है।
घटना गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे की है जब बच्चे के दादा-दादी काम पर निकले हुए थे। बच्चे के दादा की लिखित शिकायत पर पुलिस ने आरोपित महिला को मौके से गिरफ्तार कर लिया है।
पारिवारिक विवाद की बात
आरोपित महिला की पहचान अखिलेश राम की 25 वर्षीय पत्नी आरती कुमारी के रूप में की गई है। बच्चे के दादा कैलाश राम के अनुसार उनके पुत्र अखिलेश की शादी सात वर्ष पूर्व सोढ़ना माधोपुर निवासी आरती से हुई थी।
अखिलेश पंजाब में मजदूरी करता है और दोनों पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।
गाछी में दिया जहर
परिजनों का कहना है कि महिला पंद्रह दिन पहले मायके गई थी और बुधवार को ही ससुराल लौटी थी। गुरुवार दोपहर वह घर से 200 मीटर दूर गाछी में बच्चे को लेकर गई और बिस्किट में जहरीला पदार्थ मिलाकर खिला दिया।
मासूम आर्यन की हालत बिगड़ने पर महिला के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीण पहुंचे लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
एफएसएल टीम ने की जांच
थानाध्यक्ष अंजलि कुमारी ने बताया कि घटनास्थल से जहर की शीशी और बिस्किट का पैकेट बरामद किया गया है। सूचना मिलने के बाद एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच के लिए आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं।
पुलिस ने बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया है जहां जांच के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है।
उत्तर प्रदेश में हजारों गांव हैं और हर गांव के नाम के पीछे कोई न कोई कहानी छिपी होती है। कुछ नाम सुनने में बेहद सामान्य लगते हैं, तो कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें सुनकर लोग मुस्कुरा देते हैं। सुल्तानपुर का एक गांव भी लंबे समय से अपने नाम को लेकर चर्चा में रहा है।
यह गांव जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर भदैयां क्षेत्र में स्थित है। गांव का नाम सुनकर बाहर के लोग अक्सर मजाक करने लगते हैं। यही वजह है कि खासकर गांव की महिलाएं और युवतियां कई बार अपना गांव बताते हुए झिझक महसूस करती हैं।
कुछ महिलाएं ऐसी स्थिति से बचने के लिए अपने गांव के बजाय नजदीकी बाजार या आसपास के किसी प्रसिद्ध स्थान का नाम बता देती हैं। उनका कहना है कि जब गांव का नाम बताते हैं तो सामने वाला व्यक्ति अक्सर हंसी-मजाक शुरू कर देता है, जिससे असहज स्थिति पैदा हो जाती है।
नाम के पीछे छिपी है पुरानी कहानी
गांव के बुजुर्गों के मुताबिक, इस नाम का संबंध किसी मजाक या आपत्तिजनक बात से नहीं, बल्कि गांव के पुराने इतिहास से है। बताया जाता है कि कभी इस इलाके में तीन भाई अलग-अलग स्थानों पर जाकर बसे थे।
इनमें से एक भाई के बसाए स्थान का नाम उसके नाम से जुड़कर रखा गया, दूसरे के नाम पर दूसरा गांव पहचाना जाने लगा और जिस जगह तीसरे भाई ने अपना ठिकाना बनाया, उसी से वर्तमान गांव के नाम की पहचान बनी।
यानी आज जिस नाम को सुनकर कुछ लोग मजाक करते हैं, उसके पीछे दरअसल गांव के पूर्वजों और उनके बसाए गांव की कहानी जुड़ी हुई है।
अब लोग नाम को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होते
शुरुआत में गांव के लोगों को बाहर वालों के मजाक का बुरा लगता था। खासकर महिलाओं को अपना मायका बताते समय असहज महसूस होता था। लेकिन समय के साथ ग्रामीणों की सोच में बदलाव आया है।
अब गांव के कई लोग मानते हैं कि किसी जगह की पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के काम और व्यवहार से होती है। उनका कहना है कि अगर गांव तरक्की कर रहा है और लोग मिल-जुलकर रह रहे हैं, तो नाम को लेकर किसी तरह की शर्म महसूस करने की जरूरत नहीं है।
नाम नहीं, काम बनाता है पहचान
ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव की असली पहचान वहां रहने वाले लोगों, उनकी मेहनत और आपसी भाईचारे से है। गांव में खेती, शिक्षा और विकास से जुड़े कामों पर भी लोग ध्यान दे रहे हैं।
कुछ युवाओं ने खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाया है, वहीं स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों में भी ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी है।
आज भी गांव का नाम सुनकर बाहरी लोग भले ही मुस्कुरा दें, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों से जुड़ी पहचान और अपनी मिट्टी की विरासत है।
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अक्सर फर्जी कॉल और ऑफर का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां बेरोजगारों को नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे पैसे ऐंठे जा रहे थे। प्रतिष्ठित जॉब पोर्टलों के नाम का इस्तेमाल कर एक गिरोह लंबे समय से लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था।
मामले का खुलासा साइबर क्राइम पुलिस की जांच के दौरान हुआ। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से एक लैपटॉप, 10 मोबाइल फोन और 11 सिम कार्ड बरामद किए गए।
नामी जॉब पोर्टलों के नाम पर करते थे संपर्क
जांच में पता चला कि आरोपी नौकरी की तलाश करने वाले लोगों का डेटा जुटाते थे। इसके बाद उन्हें फोन करके बताया जाता था कि उनके लिए नौकरी का ऑफर आया है। बातचीत के दौरान आरोपियों की तरफ से खुद को नौकरी दिलाने वाली कंपनी या एजेंसी से जुड़ा बताया जाता था।
इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, सिक्योरिटी मनी और ऑफर लेटर जैसी अलग-अलग प्रक्रियाओं के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। बेरोजगार युवक नौकरी की उम्मीद में आरोपियों के बताए खाते में रकम ट्रांसफर कर देते थे।
पैसे मिलते ही ठग अपना मोबाइल बंद कर देते या पीड़ित का नंबर ब्लॉक कर देते थे। इस तरह नौकरी की उम्मीद लेकर फोन उठाने वाले लोगों को कुछ ही देर में हजारों रुपये का चूना लग जाता था।
एक पीड़ित से 22 हजार रुपये से ज्यादा की ठगी
पुलिस की पूछताछ में एक मामले का भी पता चला, जिसमें आंध्र प्रदेश के एक युवक से नौकरी दिलाने के नाम पर 22,480 रुपये वसूले गए थे। साइबर अपराध से जुड़े मोबाइल नंबर की जांच के दौरान पुलिस को इस नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह गिरोह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और अलग-अलग राज्यों में रहने वाले नौकरी के इच्छुक लोगों को निशाना बना रहा था।
महिलाओं की भी थी भूमिका
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह में कुछ महिलाएं भी शामिल थीं। वे कॉल सेंटर की तरह लोगों से बातचीत करती थीं और नौकरी के नाम पर उन्हें भरोसे में लेने की कोशिश करती थीं।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी के जरिए कितनी रकम जुटाई।
नौकरी के नाम पर आने वाली कॉल से रहें सावधान
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर नौकरी के नाम पर पैसे ट्रांसफर न करें। रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन या ऑफर लेटर के नाम पर पैसे मांगने वालों की अच्छी तरह जांच करें।
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो उसे बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते शिकायत करने से ठगी की रकम को ट्रेस करने और कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक प्रेमी-प्रेमिका की मुलाकात अचानक बड़े विवाद में बदल गई थी। युवक अपनी प्रेमिका से मिलने एक रेस्टोरेंट पहुंचा था। दोनों बातचीत कर ही रहे थे कि युवती के परिजन और उसका भाई वहां पहुंच गए। इसके बाद रेस्टोरेंट में हंगामा शुरू हो गया।
बताया गया था कि मामला चांदपुर के एक बाजार स्थित रेस्टोरेंट का था। युवक और युवती एक टेबल पर बैठे थे, तभी युवती के परिजन वहां पहुंच गए। आरोप है कि परिजनों ने युवक के साथ मारपीट शुरू कर दी। कुछ ही देर में रेस्टोरेंट का माहौल पूरी तरह बदल गया और वहां चीख-पुकार मच गई।
घटना के दौरान रेस्टोरेंट संचालक और कर्मचारियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। इसी दौरान युवती के परिजनों और रेस्टोरेंट पक्ष के लोगों के बीच भी कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच मारपीट हो गई।
बताया गया था कि झगड़े के दौरान लाठी-डंडे और लोहे की सरिया तक इस्तेमाल किए गए। मारपीट में युवती पक्ष के तीन और रेस्टोरेंट पक्ष के दो लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों में भी नाराजगी देखने को मिली थी। कई व्यापारी रेस्टोरेंट संचालक के समर्थन में थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी थी। उस समय किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं दी गई थी। पुलिस का कहना था कि तहरीर मिलने और जांच पूरी होने के बाद मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।