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  • मानसून में डाइट में शामिल कर सकते हैं ये 7 हर्बल फूड्स, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं इन्हें अमृत,

    मानसून में डाइट में शामिल कर सकते हैं ये 7 हर्बल फूड्स, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट मानते हैं इन्हें अमृत,

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    बरसात का मौसम कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर डायबिटीज और कुछ दूसरी क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है और बीमारी होने पर complications की संभावना भी अधिक हो सकती है।आयुर्वेद के मुताबिक बरसात के महीनों में शरीर में ‘पित्त’ और ‘वात’ दोष का असंतुलन हो जाता है जिससे बॉडी में बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। आयुर्वेद के मुताबिक बरसात के महीने में बॉडी को हेल्दी रखने के लिए और इम्यूनिटी को स्ट्रांग करने के लिए किचन में मौजूद कुछ देसी चीजों का सेवन बेहद असरदार साबित होता है।

    आधुनिक विज्ञान और न्यूट्रिशन रिसर्च भी कुछ हर्ब्स और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। अगर आप भी इस मौसम में बिना बीमार पड़े सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो अपनी दैनिक डाइट में इन 7 हर्बल फूड्स को शामिल कर सकते हैं। आइए, आयुर्वेदिक विशेषज्ञों और वैज्ञानिक रिसर्च के नजरिए से जानते हैं कि ये हर्बल फूड्स आपकी सेहत के लिए किस तरह फायदेमंद साबित हो सकते हैं और इसका सेवन कैसे करना चाहिए।

    गुनगुना पानी

    सावन के मौसम में वातावरण में नमी और आर्द्रता बढ़ने से पाचन पर असर पड़ सकता है ऐसे में आपको रोज गुनगुना पानी पीना चाहिए।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और योग गुरु बाबा रामदेव के मुताबिक सुबह खाली पेट और दिनभर हल्का गुनगुना पानी पीने से पाचन दुरुस्त रहता है। रोज गुनगुना पानी पीने से पेट में गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। उबला या गुनगुना पानी पीना मानसून में जलजनित संक्रमणों से बचाव के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

    अदरक का करें सेवन

    नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटेड हेल्थ (NCCIH) अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (NIH) का एक प्रमुख हिस्सा है,के मुताबिक संतुलित मात्रा में अदरक का सेवन सेहत को फायदा पहुंचाता है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि अदरक का सेवन पीरियड्स पेन, घुटने के दर्द या ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। अदरक को मानसून में पाचन और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं के लिए उपयोगी बताया गया है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और दूसरे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। इसे हर्बल टी, काढ़े या सब्जियों में शामिल किया जा सकता है।

    त्रिफला चूर्ण का करें सेवन

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री के मुताबिक त्रिफला एक ऐसी जड़ी बूटी है जो पेट से लेकर डायबिटीज तक का इलाज करती है। एक चम्मच इस हर्ब के पाउडर का सेवन करने से बॉडी में जमा सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। त्रिफला आंवला, हरड़ और बहेड़ा से बना पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण है। इसे खासतौर पर कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रात को सोने से पहले आधा चम्मच त्रिफला गुनगुने पानी के साथ लेने से सेहत को फायदा होता है। नियमित या लंबे समय तक सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    भुना हुआ जीरा खाएं

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर रूपाली जैन ने बताया है कि जीरे का सेवन पाचन को दुरुस्त करता है। जीरा पाचन को सपोर्ट करने वाला मसाला है। इसे छाछ या पानी में थोड़ा सा मिलाकर लिया जा सकता है। बरसात में जीरे का सेवन करने से पाचन से जुड़ी दिक्कते जैसे गैस, पेट फूलने, भारीपन और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। भोजन में सीमित मात्रा में भुना जीरा शामिल करना मानसून के दौरान एक आसान विकल्प हो सकता है।

    सेंधा नमक का करें सेवन

    सेंधा नमक का इस्तेमाल खासतौर पर व्रत और उपवास के दौरान किया जाता है लेकिन आयुर्वेद इसे सामान्य नमक से बेहतर विकल्प के तौर पर देखता है। netmeds में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक सेंधा नमक पेट में पाचक एंजाइम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) के स्राव को बढ़ावा देता है। यह भोजन के बेहतर अवशोषण, गैस, ब्लोटिंग (पेट फूलना) और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सेंधा नमक भी मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड ही है और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन हाई ब्लड प्रेशर या वाटर रिटेंशन वाले लोगों के लिए उचित नहीं है। इसलिए इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है।

    तुलसी के पत्ते

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक तुलसी का इस्तेमाल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से किया जाता रहा है। तुलसी में यूजेनॉल समेत कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। बरसात के मौसम में तुलसी की चाय या काढ़े को पीने से मानसून में सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। हालांकि, तुलसी को प्राकृतिक एंटीबायोटिक या वायरल संक्रमण का इलाज मानना सही नहीं है।

    नीम की पत्तियां

    नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों वाले कई कंपाउंड पाए जाते हैं और पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। बरसात के मौसम में आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नीम की कोपलें खाने और नीम के पानी से नहाने की सलाह देते हैं ताकि इम्यूनिटी मजबूत रहे और बॉडी का बीमारियों से बचाव हो।  हालांकि, नीम की पत्तियों का नियमित सेवन हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और दवाएं लेने वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के इलाज, दवा या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी खाद्य पदार्थ, घरेलू नुस्खे या हर्बल उत्पाद का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रही दवाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह ले

  • नीम करोली बाबा का ‘बेस्ट पेरेंटिंग’ फॉर्मूला, जिद्दी बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए अपनाएं ये बातें..

    नीम करोली बाबा का ‘बेस्ट पेरेंटिंग’ फॉर्मूला, जिद्दी बच्चों को संस्कारी बनाने के लिए अपनाएं ये बातें..

    बचपन में बच्चे जो सीखते हैं, उसका असर लंबे समय तक रहता है. लेकिन डिजिटल दौर में बच्चों की परवरिश किसी चक्रव्यूह से कम नहीं है. इंटरनेट, सोशल मीडिया और बढ़ती जिद के बीच संस्कार कहीं खोते जा रहे हैं. हर माता-पिता अपने बच्चे को सफल बनाना चाहते हैं, लेकिन इस होड़ में नैतिक मूल्य गायब हो रहे हैं. अगर आप भी इस पेरेंटिंग की उलझन से परेशान हैं, तो आपको सदियों पुराना लेकिन बेहद सटीक समाधान चाहिए.

    यह समाधान छिपा है बीसवीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा की शिक्षाओं में. बाबा की सीख में अनुशासन, सेवा, सच्चाई और प्रेम को खास जगह मिली है. स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक को जीवन की राह दिखाने वाले बाबा ने बच्चों की परवरिश के सरल लेकिन अचूक नियम बताए हैं. आइए जानते हैं बाबा के वे 5 चमत्कारी पेरेंटिंग टिप्स, जो आपके बच्चे को संस्कारी और सफल बना सकते हैं. पांचवीं सीख तो आज के हर बच्चे के लिए संजीवनी बूटी है.

    सुबह की शुरुआत प्रार्थना से

    बच्चों को सुबह जल्दी उठने की आदत डालें. दिन की शुरुआत भगवान को याद करके करें. कोई छोटा मंत्र बोलने को कह सकते हैं. या बस कुछ पल शांत बैठने दें. इससे बच्चे दिन की शुरुआत पॉजिटिव तरीके से करेंगे. मन भी शांत रहेगा. धीरे-धीरे उनमें कृतज्ञता की आदत बन सकती है. यह छोटी सी आदत उनके कॉन्फिडेंस और सोच पर भी अच्छा असर डाल सकती है.

    नियमित दिनचर्या का पालन

    बच्चों की लाइफ में रूटीन होना जरूरी है. सोने, उठने, पढ़ने और खेलने का समय तय रखें. हर बात में डांटने के बजाय प्यार से समझाएं. मोबाइल और गेमिंग का टाइम भी तय किया जा सकता है. इससे बच्चा खुद अपने समय को मैनेज करना सीखता है. पढ़ाई के साथ खेल और आराम के लिए भी वक्त मिले. ऐसी आदत आगे चलकर जिम्मेदारी निभाने में काम आती है.

    दूसरों की मदद

    नीम करोली बाबा की सीख में सेवा और प्रेम का खास महत्व है. बच्चों को दूसरों की मदद करना सिखाएं. दोस्त की पढ़ाई में मदद करना हो या घर में किसी छोटे काम में हाथ बंटाना. छोटी-छोटी चीजें भी मायने रखती हैं. उन्हें जरूरतमंद के साथ सम्मान से पेश आना बताएं. इससे बच्चे में दया और संवेदनशीलता बढ़ सकती है. वह सिर्फ अपने बारे में सोचने के बजाय दूसरों की फीलिंग्स भी समझना सीखेगा.

    सच्चाई और विनम्रता

    बच्चे से हमेशा सच बोलने की उम्मीद करें. लेकिन गलती होने पर उसे डराएं नहीं. उसे समझाएं कि सच बोलना ज्यादा जरूरी है. अपनी गलती मानना कमजोरी नहीं है. दूसरों से सम्मान से बात करना भी सिखाएं. बाबा की सीख के मुताबिक, अहंकार से दूर रहना जरूरी है. किसी ने बुरा व्यवहार किया हो, तब भी खुद का व्यवहार अच्छा रखना सीखें. यही आदत बच्चे की पर्सनैलिटी को मजबूत बना सकती है.

    सादगीपूर्ण जीवन जीना

    बच्चों को हर नई चीज दिलाना जरूरी नहीं है. महंगा फोन या गैजेट खुशी की गारंटी नहीं है. उन्हें चीजों की वैल्यू समझाएं. दिखावे की जगह जरूरत को महत्व देना सिखाएं. परिवार के साथ समय बिताएं. साथ बैठकर खाना खाएं. कभी बिना मोबाइल के बातचीत करें. ऐसी छोटी आदतें बच्चे को रिश्तों की अहमियत समझाती हैं. सादगी के साथ जीने वाला बच्चा लाइफ के उतार-चढ़ाव को भी ज्यादा सहजता से संभालना सीख सकता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • रेवाड़ी मकान ब्लास्ट केस में बड़ा एक्शन, पिता-बेटी की मौत के बाद 3 आरोपी गिरफ्तार; PNG लीकेज का शक

    रेवाड़ी मकान ब्लास्ट केस में बड़ा एक्शन, पिता-बेटी की मौत के बाद 3 आरोपी गिरफ्तार; PNG लीकेज का शक

    हरियाणा के रेवाड़ी में हंस नगर में हुए मकान ब्लास्ट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 5 जुलाई को हुए इस हादसे में पिता और बेटी की मौत हो गई थी, जबकि दो साल की बच्ची समेत तीन लोग झुलस गए थे। पुलिस ने पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

    गैस की दुर्गंध के बाद हुआ था जोरदार धमाका

    पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, घटना के दिन परिवार घर में मौजूद था। इसी दौरान मकान में गैस की दुर्गंध महसूस होने की बात सामने आई। कुछ देर बाद बेटी ने कपड़े प्रेस करने के लिए बिजली का स्विच ऑन किया और अचानक जोरदार धमाका हो गया।

    ब्लास्ट इतना तेज था कि मकान का गेट टूटकर दूर जा गिरा और कई जगहों की टाइलें भी उखड़ गईं। हादसे में परिवार के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए।

    इलाज के दौरान पिता-बेटी की मौत

    घायलों को पहले ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए तन्नू और उसके पिता सतबीर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था। इलाज के दौरान पहले तन्नू और अगले दिन उसके पिता सतबीर ने दम तोड़ दिया।

    पाइपलाइन कंपनी के 3 लोग गिरफ्तार

    मामले की जांच के बाद पुलिस ने आईजीएल का ठेका लेने वाली कंपनी से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल, सुपरवाइजर संदीप और सहयोगी कंपनी के आरसीएम रंजीत शामिल हैं।

    पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान PNG गैस लीक होकर मकान में जमा हुई, जिसके बाद बिजली का स्विच ऑन करने से विस्फोट हो सकता है।

    अभी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

    हालांकि, कंपनी प्रबंधन ने गैस लीक होने की संभावना से इनकार किया है। घटनास्थल की विशेषज्ञों ने भी जांच की थी, लेकिन ब्लास्ट की वजह को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    पुलिस अब CFL रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इसी रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर मकान में इतना बड़ा धमाका किस वजह से हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

  • अमरोहा में 5 दिन से लापता 3 साल की अमायरा का तालाब में मिला शव, गले पर निशान से हत्या की आशंका..

    अमरोहा में 5 दिन से लापता 3 साल की अमायरा का तालाब में मिला शव, गले पर निशान से हत्या की आशंका..

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    फाइल फोटो

    गांव ढकिया चमन निवासी मोहम्मद रजा की तीन साल की बेटी अमायरा सोमवार सुबह घर के सामने से लापता हो गई थी। काफी तलाश करने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिल सका था।

    शुक्रवार को पांचवे दिन सुबह लगभग 9 बजे घर से लगभग 800 मीटर दूर स्थित तालाब में उसका शव घास में फंसा मिला है। तालाब के सामने रहने वाली किशोरी सोनम को दुर्गंध आई तो उसने पास ही मौजूद आटो चालक रियाज को बताया।

    रियाज ने डंडे से घास को हटाया तो अमायरा की टांग नजर आई। उसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ लग गई तथा शव को बाहर निकाला। शव पानी में रहने के कारण फूल चुका था। गले पर निशान बना है।

    हालांकि जिस समय शव मिला है, उस समय पुलिस टीम गांव में अन्य घरों की तलाशी लेने की तैयारी कर रही थी। ग्रामीण व स्वजन हत्या की आशंका जता रहे हैं।

    एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बच्ची की मौत का कारण स्पष्ट होगा। उसके बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

  • दहेज में मांगी बोलेरो, नहीं मिली तो ले ली जान: अदालत ने पति को सुनाई 10 साल की सजा, पिता-भाई बरी

    दहेज में मांगी बोलेरो, नहीं मिली तो ले ली जान: अदालत ने पति को सुनाई 10 साल की सजा, पिता-भाई बरी

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    दहेज में चार पहिया गाड़ी की मांग पूरी न होने पर पत्नी की प्रताड़ना और मृत्यु के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त पति महीपाल को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में सह-अभियुक्त ससुर ॠषिपाल और देवर जीतपाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया गया है।

    रजपुरा के गांव सैंडोरा निवासी नरेशपाल ने 12 दिसंबर 2019 को दहेज हत्या में पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें बताया कि उसने अपनी बेटी रेखा का विवाह चार वर्ष पूर्व रजपुरा निवासी महीपाल के साथ किया था।

    विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज में बुलेरो गाड़ी की मांग को लेकर रेखा को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। 12 दिसंबर 2019 को मारपीट के दौरान आई चोटों के कारण रेखा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।

    तहरीर के आधार पर पति महिपाल, सास गुड्डी, जेठ यशपाल, देवर जीतपाल, ससुर ऋषिपाल के खिलाफ दहेज हत्या की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।

    पुलिस ने विवेचना में पति महिपाल, ससुर ऋषिपाल और देवर जीतपाल को दोषी माना और आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोपालजी की अदालत में हुई।

    न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर अभियुक्त महीपाल को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास और चार हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जबकि धारा 302/34 हत्या के आरोप से न्यायालय ने अभियुक्त को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

  • 700 साल पुराने गांव की अनोखी मान्यता, लोग कहते हैं- जहरीला सांप काटे तो भी नहीं जाती जान!

    700 साल पुराने गांव की अनोखी मान्यता, लोग कहते हैं- जहरीला सांप काटे तो भी नहीं जाती जान!

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक ऐसा गांव है, जो अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं के कारण लंबे समय से चर्चा में रहा है। करीब 700 साल पुराने इस गांव को लेकर स्थानीय लोगों के बीच ऐसी मान्यता है कि यहां जहरीले सांप के काटने के बाद भी व्यक्ति की जान नहीं जाती। ग्रामीण इसे एक संत की कृपा से जोड़कर देखते हैं।

    यह गांव अपने प्राचीन धार्मिक इतिहास और मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित एक पुराने मंदिर और समाधि स्थल पर आसपास के कई गांवों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।

    बाबा नारायण दास से जुड़ी है मान्यता

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, कई सदियों पहले इस क्षेत्र में बाबा नारायण दास का जन्म हुआ था। बताया जाता है कि वह भगवान शिव के भक्त थे और उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर रहकर साधना की थी।

    कहा जाता है कि उन्होंने अपनी काफी जमीन मंदिर के लिए दान कर दी थी। बाद में एक प्राचीन शिव मंदिर के पास साधना करते समय उन्होंने वहीं समाधि ले ली। समय के साथ उस स्थान पर उनकी समाधि बनाई गई, जहां आज भी लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

    12 गांवों में मानी जाती है खास आस्था

    स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा नारायण दास को आसपास के करीब 12 गांवों में ग्राम देवता के रूप में माना जाता है। इन गांवों के लोग किसी भी शुभ कार्य से पहले बाबा की समाधि पर पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं।

    ग्रामीणों का विश्वास है कि बाबा की कृपा के कारण यहां सांप के काटने की घटनाओं में भी लोगों को नुकसान नहीं होता। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने आज तक किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में नहीं सुना जिसकी सांप के काटने से मौत हुई हो।

    क्या सच में सांप का जहर असर नहीं करता?

    सांप के काटने को लेकर गांव में प्रचलित यह बात धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यता का हिस्सा है। हालांकि जहरीले सांप के काटने पर जहर का असर न होने की बात को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

    सांप के काटने की स्थिति में किसी भी तरह की देरी या झाड़-फूंक पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार कराना जरूरी है।

    मंदिर में दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

    बाबा की समाधि को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। ग्रामीणों के लिए यह स्थान सिर्फ धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि उनके गांव की सदियों पुरानी परंपरा और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।

    सांप के काटने से मौत न होने की कहानी भले ही स्थानीय मान्यता हो, लेकिन इसी अनोखी मान्यता ने इस गांव को आसपास के इलाकों में खास पहचान दिला दी है।

  • चार साल पहले हो चुकी थी मौत, फिर भी पुलिस रिकॉर्ड में बना ‘गुंडा’; जिला बदर का आदेश आते ही मचा हड़कंप..

    चार साल पहले हो चुकी थी मौत, फिर भी पुलिस रिकॉर्ड में बना ‘गुंडा’; जिला बदर का आदेश आते ही मचा हड़कंप..

    उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में कुछ समय पहले प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। जिस युवक की करीब चार साल पहले सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी, उसका नाम पुलिस की रिपोर्ट में शामिल रहा और बाद में उसके खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई भी कर दी गई।

    मामला खड्डा कस्बे से जुड़ा बताया गया था। यहां रहने वाले एक युवक की वर्ष 2021 में वाराणसी में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। परिवार के लिए यह घटना कई साल पुरानी हो चुकी थी, लेकिन बाद में उसका नाम एक प्रशासनिक कार्रवाई में सामने आया तो परिजन और स्थानीय लोग हैरान रह गए।

    बताया गया था कि पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कुछ लोगों के खिलाफ गुंडा नियंत्रण कानून के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी सूची में मृत युवक का नाम भी शामिल था। सुनवाई के बाद उसके खिलाफ छह महीने के लिए जिला बदर किए जाने का आदेश तक जारी कर दिया गया।

    मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि जिस व्यक्ति की कई साल पहले मृत्यु हो चुकी थी, उसके खिलाफ पुलिस रिपोर्ट तैयार करते समय उसके जीवित होने की पुष्टि क्यों नहीं की गई।

    प्रशासनिक आदेश में अन्य आरोपियों के नाम भी शामिल थे। कुछ आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई। लेकिन मृत युवक का नाम उसी प्रक्रिया में शामिल होना पूरे मामले को असामान्य बना गया।

    घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। लोगों का कहना था कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने से पहले उसके बारे में बुनियादी जानकारी और वर्तमान स्थिति की जांच होना जरूरी है।

    मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि पुलिस रिकॉर्ड को अपडेट करने और कार्रवाई के लिए भेजी जाने वाली रिपोर्टों की जांच किस स्तर पर की जाती है। मृत व्यक्ति के खिलाफ जिला बदर का आदेश जारी होने की खबर सामने आने के बाद यह घटना इलाके में काफी चर्चा का विषय बन गई थी।

  • प्रेमी की आंखों में डूबी थी पत्नी, तभी मायके में आ धमका पति, फिर जो हुआ वो रोंगटे खड़े कर देगा!..

    प्रेमी की आंखों में डूबी थी पत्नी, तभी मायके में आ धमका पति, फिर जो हुआ वो रोंगटे खड़े कर देगा!..

    उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। पति से विवाद के बाद मायके में रह रही एक महिला अपने परिचित युवक से मिलने पहुंची थी। इसी दौरान उसका पति वहां पहुंच गया और दोनों को साथ देखकर विवाद खड़ा हो गया।

    बताया गया था कि महिला की शादी कुछ समय पहले हुई थी, लेकिन पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद चल रहा था। इसी वजह से महिला करीब तीन महीने से अपने मायके में रह रही थी। इसी दौरान उसकी एक युवक से बातचीत होने लगी थी।

    घटना वाले दिन महिला युवक से मिलने एक सुनसान स्थान के पास पहुंची थी। दोनों बातचीत कर रहे थे, तभी महिला का पति अपने एक रिश्तेदार के साथ वहां पहुंच गया। आरोप है कि दोनों को साथ देखकर पति ने अपना आपा खो दिया।

    आरोप लगाया गया था कि पति और उसके साथ आए व्यक्ति ने महिला और युवक को पकड़ लिया और पास के एक पेड़ से बांध दिया। इसके बाद दोनों के साथ मारपीट की गई। घटना में महिला और युवक को चोटें आई थीं।

    चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद कुछ लोग मौके पर पहुंचे और दोनों को बंधन से मुक्त कराया। इसके बाद पुलिस को घटना की सूचना दी गई। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी मौके से निकल गए थे।

    महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसके पति और उसके साथ आए रिश्तेदार के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों से पूछताछ की और मारपीट के कारणों की पड़ताल शुरू की।

    घटना सामने आने के बाद इलाके में काफी चर्चा हुई थी। पति-पत्नी के विवाद और महिला के दूसरे युवक से संपर्क को लेकर मामला स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

  • दोस्ती के बहाने बुलाया, फिर पति-पत्नी ने परिचित को बनाया बंधक, लाखों रुपये लूटने की साजिश का हुआ खुलासा..

    दोस्ती के बहाने बुलाया, फिर पति-पत्नी ने परिचित को बनाया बंधक, लाखों रुपये लूटने की साजिश का हुआ खुलासा..

    उत्तर प्रदेश में कुछ समय पहले एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया था, जहां एक परिचित व्यक्ति को भरोसे में लेकर बुलाने के बाद उसे बंधक बना लिया गया। आरोप था कि एक दंपती और उनके साथियों ने मिलकर उसके साथ मारपीट की और हथियार के दम पर नकदी व ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए लाखों रुपये हड़प लिए।

    बताया गया था कि पीड़ित पहले एक मकान में किराये पर रहता था। वहीं उसकी पहचान एक दंपती से हुई थी। कुछ समय बाद दंपती मकान खाली कर दूसरे शहर में रहने चला गया, लेकिन पुरानी जान-पहचान बनी रही।

    घटना से कुछ दिन पहले महिला ने फोन कर परिचित को अपने पास बुलाया था। उसे बताया गया था कि कुछ जरूरी बात करनी है। भरोसा होने के कारण वह वहां पहुंच गया। आरोप है कि पहुंचते ही पहले से मौजूद लोगों ने उसे जबरन वाहन में बैठाया और दूसरे स्थान पर ले जाकर बंधक बना लिया।

    पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और उसके पास मौजूद सोने के आभूषण तथा नकदी छीन ली। इसके अलावा हथियार दिखाकर उससे ऑनलाइन भुगतान का पिन भी हासिल कर लिया गया। इसके बाद उसके खाते से करीब तीन लाख रुपये की रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर किए जाने का आरोप लगा।

    किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलने के बाद पीड़ित पुलिस के पास पहुंचा और पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

    पुलिस की जांच में दंपती समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई थी। पूछताछ के बाद आरोपियों के पास से कथित तौर पर लूटे गए सामान, नकदी, एक अवैध हथियार और वाहन बरामद किए गए।

    जांच में यह भी सामने आया था कि पुरानी जान-पहचान और आपसी विवाद को लेकर आरोपी पक्ष के मन में नाराजगी थी। इसी के बाद परिचित को बुलाकर उसके साथ वारदात करने की योजना बनाई गई थी। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी थी।

  • बॉडी की गंदगी बाहर निकालने वाली किडनी ब्लड शुगर भी करती है कंट्रोल, जानिए डायबिटीज और किडनी का क्या है कनेक्शन..

    बॉडी की गंदगी बाहर निकालने वाली किडनी ब्लड शुगर भी करती है कंट्रोल, जानिए डायबिटीज और किडनी का क्या है कनेक्शन..

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    आमतौर पर माना जाता है कि किडनी का काम केवल शरीर से अपशिष्ट पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके ब्लड शुगर लेवल को भी सीधे नियंत्रित करती है? आमतौर पर जब ब्लड शुगर की बात होती है, तो हमारा ध्यान पैंक्रियाज, इंसुलिन, खानपान और एक्सरसाइज पर जाता है, लेकिन डायबिटीज और किडनी के बीच का सीधा संबंध भी उतना ही जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज किडनी के बारीक फिल्टर्स को नुकसान पहुंचा कर डायबिटिक नेफ्रोपैथी जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। जानिए कैसे किडनी रीनल ग्लूकोनियोजेनेसिस प्रक्रिया के जरिए शुगर कंट्रोल करती है।

    कंसल्टेंट डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने indianexpress.com को बताया है कि काश ज़्यादा लोग इस बात को समझते है कि किडनी सिर्फ वेस्ट को फिल्टर नहीं करती बल्कि रीनल ग्लूकोनियोजेनेसिस नाम की प्रक्रिया के ज़रिए ग्लूकोज़ को कंट्रोल करने में भी सक्रिय रूप से शामिल होती हैं, जिसमें किडनी के टिश्यू असल में ग्लूकोज़ बनाते हैं। साथ ही वे ग्लूकोज़ रीएब्ज़ॉर्प्शन के ज़रिए फ़िल्टर हुई शुगर को यूरिन में जाने देने के बजाय वापस ब्लडस्ट्रीम में ले आती हैं।

    डायबिटीज और किडनी का कनेक्शन

    • हाई शुगर के कारण किडनी के फिल्टरिंग यूनिट्स (Nephrons) पर दबाव बढ़ता है और वे सख्त या कठोर होने लगते हैं।
    • हेल्दी किडनी खून से प्रोटीन (Albumin) को रोकने देती है, लेकिन डैमेज होने पर प्रोटीन यूरीन के जरिए बाहर निकलने लगता है।
    • जब फिल्टर काम करना बंद कर देते हैं, तो शरीर में पानी, नमक और टॉक्सिन जमा होने लगते हैं।

    किडनी ब्लड शुगर को कैसे कंट्रोल करती है?

    किडनी में Renal Gluconeogenesis नाम की प्रक्रिया होती है। इसमें किडनी का ऊतक जरूरत पड़ने पर ग्लूकोज बनाता है। खासकर जब व्यक्ति लंबे समय तक कुछ नहीं खाता या फास्ट में होता है, तब शरीर में ब्लड ग्लूकोज बनाए रखने में यह प्रक्रिया मदद करती है। इसके अलावा किडनी खून को फिल्टर करते समय ग्लूकोज को भी फिल्टर करती है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर इस ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर नहीं जाने देता, बल्कि उसे दोबारा खून में वापस पहुंचा देता है। इसे Glucose Reabsorption यानी ग्लूकोज का पुनः अवशोषण कहा जाता है। इस प्रक्रिया में SGLT2 (Sodium-Glucose Cotransporter-2) नाम का ट्रांसपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डायबिटीज की कुछ दवाएं इसी SGLT2 को टारगेट करके काम करती हैं, जिससे अतिरिक्त ग्लूकोज पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकलता है।

    किडनी और ब्लड शुगर का रिश्ता एकतरफा नहीं है

    डायबिटीज और किडनी के बीच संबंध को आमतौर पर इस तरह समझाया जाता है कि लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर किडनी को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन यह रिश्ता सिर्फ एक दिशा में नहीं चलता। किडनी शरीर में इंसुलिन को तोड़ने और साफ करने में भी भूमिका निभाती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है, तो इंसुलिन शरीर में ज्यादा समय तक रह सकता है। इसके अलावा किडनी की कार्यक्षमता में बदलाव ग्लूकोज के दोबारा अवशोषण और शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है।

    इसलिए किडनी की कार्यक्षमता में शुरुआती बदलाव और ब्लड शुगर के कंट्रोल के बीच संबंध हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर व्यक्ति में हल्की किडनी समस्या सीधे डायबिटीज का कारण बनती है। किडनी और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म के बीच संबंध जटिल और कई कारकों पर निर्भर करता है।

    किडनी की सेहत और ब्लड शुगर को कैसे रखें हेल्दी

    किडनी और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने के लिए कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं जैसे

    • रेगुलर बॉडी को एक्टिव रखें। नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि डायबिटीज कंट्रोल रखती है और किडनी की सेहत भी दुरुस्त रहती है।
    • खाने में अतिरिक्त नमक और ज्यादा सोडियम से बचें। नमक का कम सेवन आपकी सेहत को दुरुस्त रखता है।
    • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।
    • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीने की कोशिश न करें।
    • ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें।
    • डायबिटीज या किडनी की बीमारी का जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन की जांच कराते रहें।
    • बहुत अधिक प्रोटीन वाली डाइट बिना जरूरत या विशेषज्ञ की सलाह के न लें, खासकर अगर किडनी की बीमारी का जोखिम हो।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज या किडनी से जुड़ी किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद या शुरू न करें। सही जांच और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।