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  • भागलपुर में हैवानियत की हद, युवक पर तलवारों से हमला कर कान काटा..

    भागलपुर में हैवानियत की हद, युवक पर तलवारों से हमला कर कान काटा..

    भागलपुर में हैवानियत की हद, युवक पर तलवारों से हमला कर कान काटा..

    Bhagalpur : बिहार के भागलपुर जिले से एक रूह कंपा देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पीरपैंती थाना क्षेत्र में मोबाइल पर पब्जी (PUBG) गेम खेल रहे एक युवक पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने तलवारों से जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने इस खौफनाक वारदात को इतनी बेरहमी से अंजाम दिया कि युवक का कान कटकर शरीर से अलग हो गया। लहूलुहान होकर वह बेसुध हालत में पास के नाले में जा गिरा। फिलहाल, युवक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।

    साजिश के तहत बुझाया बल्ब, फिर किया ताबड़तोड़ वार

    यह खौफनाक वारदात बीती रात की है। घटना को लेकर घायल युवक की मां महमुर निशा और जीजा मोहम्मद कासिम आलम ने बताया कि बदमाशों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इस खूनी खेल को अंजाम दिया। घायल युवक की पहचान मोहम्मद रमजान मंसूरी के रूप में हुई है।

    परिजनों के मुताबिक, रमजान घर के बाहर पड़ोस में बैठकर अपने मोबाइल पर PUBG गेम खेल रहा था। इसी दौरान दयानंद, सूरज और राहुल समेत पांच की संख्या में आए हथियारबंद बदमाशों ने अचानक वहां लगे बिजली के बल्ब को बुझा दिया। चारों तरफ अंधेरा छाते ही इन बदमाशों ने रमजान पर तलवार से ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया।

    गला काटने की थी तैयारी, बचाव में कटा कान

    बताया जा रहा है कि बदमाशों ने सीधा रमजान के गले पर वार कर उसे जान से मारने की कोशिश की थी। हालांकि, रमजान ने फुर्ती दिखाते हुए खुद को बचाने का प्रयास किया, जिससे तलवार उसके कान पर जा लगी और कान कटकर अलग हो गया। सिर, हाथ और पैर पर कई गहरे जख्म होने के कारण वह बेसुध होकर पास के नाले में गिर गया।

    पुणे लौटने वाला था रमजान, 5 दिन पहले ही रची गई थी साजिश

    पीड़ित परिवार ने इस हमले के पीछे एक बड़ी और सोची-समझी साजिश का अंदेशा जताया है। रमजान महाराष्ट्र के पुणे में बिजली वायरिंग (इलेक्ट्रीशियन) का काम करता है। वह बकरीद के त्योहार पर छुट्टी मनाने अपने घर भागलपुर आया हुआ था। दुखद बात यह है कि अगले ही दिन उसे वापस काम पर पुणे लौटना था, लेकिन उसकी रवानगी से ठीक पहले इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया गया।

    घायल की मां महमुर निशा का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया, “हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। उन लोगों ने 5 दिन पहले से ही मेरे बेटे को जान से मारने का प्लान बना रखा था। साजिश के तहत पहले उसे फुसलाकर वहां पब्जी खेलने के लिए बिठाया गया और फिर मौका पाकर सबने मिलकर हमला कर दिया। जब हम चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे, तो बेटा नाले में खून से लथपथ पड़ा तड़प रहा था।”

    मायागंज अस्पताल में भर्ती, आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज

    घटना के तुरंत बाद आनन-फानन में परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और रमजान को बेहद गंभीर हालत में भागलपुर के मायागंज स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) ले गए। अस्पताल के सर्जरी विभाग में युवक को भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, अत्यधिक खून बह जाने और गहरे जख्मों के कारण युवक की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

    इस सनसनीखेज हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल व्याप्त है। घटना की सूचना मिलते ही पीरपैंती थाना पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। पुलिस ने पीड़ित परिवार और चश्मदीदों के बयान दर्ज कर लिए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार आरोपियों दयानंद, सूरज, राहुल और उनके अन्य साथियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी सलाखों के पीछे होंगे

  • हर काम अधूरा लगता है, बार-बार हाथ धोने की आदत भी है? एक्सपर्ट से जानिए OCD और पर्फेक्शनिज्म का अंतर..

    हर काम अधूरा लगता है, बार-बार हाथ धोने की आदत भी है? एक्सपर्ट से जानिए OCD और पर्फेक्शनिज्म का अंतर..

    हर काम अधूरा लगता है, बार-बार हाथ धोने की आदत भी है? एक्सपर्ट से जानिए OCD और पर्फेक्शनिज्म का अंतर..

    17 साल की सारिका पढ़ाई के लिए दिल्ली के एक पीजी में रहती है। उसके साथ रहने वाले लोग जानते हैं कि उसे साफ-सफाई का बेहद ध्यान रहता है। वह दिन में कई बार हाथ धोती है, बार-बार किचन में जाकर गैस सिलेंडर चेक करती है और घर का ताला दो-तीन बार खींचकर देखने के बाद ही उसे तसल्ली मिलती है। आसपास के लोग उसकी इन आदतों को ‘परफेक्शनिज्म’ (हर काम एकदम सही करना) मानते हैं। लेकिन आप जानते हैं कि इस तरह का व्यवहार और विचार कोई आदत नहीं बल्कि एक मानसिक विकार Obsessive-Compulsive Disorder (OCD) हो सकता है जो प्रभावित इंसान की पढ़ाई, नौकरी या सामाजिक रिश्तों में बाधा बनता है। इस परेशानी से ग्रसित इंसान को  किसी काम को बार-बार दोहराने के बाद भी मानसिक संतुष्टि महसूस नहीं होती?

    फोर्टिस हेल्थकेयर में अदायु माइंडफुलनेस हॉस्पिटल में सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया अक्सर लोग इसे केवल एक आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक विकार है, जो समय के साथ व्यक्ति के आत्म-विश्वास और कार्यक्षमता को कमजोर कर देता है। आखिर OCD क्या है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, यह क्यों होता है और मेडिकल साइंस में इसका क्या इलाज है? आइए मानसिक रोग विशेषज्ञ (Psychologist) से जानते हैं इसके पीछे की पूरी सच्चाई।

    OCD क्या है?

    डॉ. अग्रवाल ने बताया Obsessive–compulsive disorder (OCD) यानी ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर एक ऐसा मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति के मन में बार-बार ऐसे अनचाहे विचार (Obsessions), तस्वीरें या आशंकाएं आती हैं, जिन्हें वह चाहकर भी रोक नहीं पाता। इन विचारों से होने वाली घबराहट और बेचैनी को कम करने के लिए वह कुछ काम बार-बार करता है, जिन्हें कम्पल्शन (Compulsions) कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर बार-बार हाथ धोना, ताला जांचना या गैस बंद है या नहीं, इसे बार-बार चेक करना।

    आदत और OCD में क्या अंतर है?

    हर व्यक्ति में कुछ न कुछ आदतें या परफेक्शनिस्ट व्यवहार हो सकते हैं, लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि उसे OCD है। डॉक्टर के अनुसार, जब ये विचार और व्यवहार इतने बढ़ जाएं कि व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, सामाजिक जीवन या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तभी इसे बीमारी माना जाता है।

    क्या परफेक्शनिज्म भी OCD का हिस्सा है?

    परफेक्शनिज्म OCD का एक लक्षण हो सकता है, लेकिन हर परफेक्शनिस्ट व्यक्ति OCD का मरीज नहीं होता। यदि परफेक्शनिज्म के साथ अन्य ऑब्सेसिव विचार और बार-बार किए जाने वाले व्यवहार भी मौजूद हों, तो डॉक्टर OCD की संभावना पर विचार करते हैं।

    भारत में OCD कितना आम है?

    डॉक्टर के अनुसार, OCD एक आम मानसिक स्वास्थ्य विकार है। मनोचिकित्सा विभागों में इसके मरीज अक्सर देखने को मिलते हैं। हालांकि, लोगों में अभी भी इसके सभी लक्षणों के बारे में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। अधिकांश लोग केवल बार-बार हाथ धोने को ही OCD समझते हैं, जबकि इसके और भी कई लक्षण हैं।

    OCD के सामान्य लक्षण क्या हैं?

    OCD के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण हैं

    • बार-बार हाथ धोना।
    • बार-बार ताला, गैस या बिजली का स्विच चेक करना।
    • चीजों को बार-बार गिनना।
    • पढ़ाई करते समय एक ही पैराग्राफ को बार-बार पढ़ना।
    • किसी काम को बार-बार दोहराना क्योंकि तसल्ली नहीं होती।
    • मन में लगातार अनचाहे और परेशान करने वाले विचार आना।

    OCD किस उम्र के लोगों में हो सकता है?

    डॉक्टर के मुताबिक, OCD के लक्षण अक्सर किशोरावस्था (Teenage) में दिखाई देने लगते हैं, जब व्यक्तित्व का विकास हो रहा होता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह बचपन में भी शुरू हो सकता है और कुछ लोगों में वयस्क होने के बाद भी इसकी शुरुआत होती है।

    OCD होने के पीछे क्या कारण हैं?

    OCD के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें आनुवंशिक (Genetic), पारिवारिक (Hereditary) और पर्यावरणीय (Environmental) कारकों की भूमिका होती है। इसके अलावा मस्तिष्क में सेरोटोनिन (Serotonin) और नोरएपिनेफ्रीन (Norepinephrine) जैसे रसायनों का असंतुलन भी इस बीमारी से जुड़ा माना जाता है।

    क्या हल्के OCD को नजरअंदाज करना चाहिए?

    यदि किसी व्यक्ति में OCD के हल्के लक्षण हैं और वह अपनी दिनचर्या सामान्य रूप से संभाल पा रहा है, तब भी उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर का कहना है कि समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है। शुरुआती अवस्था में इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

    OCD का रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या असर पड़ता है?

    OCD व्यक्ति की एकाग्रता (Concentration), याददाश्त (Memory) और कार्यक्षमता (Productivity) को प्रभावित कर सकता है। मरीज का काफी समय बार-बार एक ही काम करने या एक ही विचार में उलझे रहने में निकल जाता है। गंभीर मामलों में इसका असर पारिवारिक रिश्तों, नौकरी और पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

    क्या OCD सिर्फ साफ-सफाई तक सीमित है?

    अक्सर लोगों का मानना है कि OCD सिर्फ साफ-सफाई तक ही सीमित है लेकिन ऐसा नहीं है। OCD केवल हाथ धोने या सफाई से जुड़ा नहीं है। कुछ लोगों को बार-बार यह डर सताता है कि उन्होंने कोई गलती कर दी है, किसी को नुकसान पहुंचा दिया है या कोई काम ठीक से नहीं हुआ। कुछ मरीजों में धार्मिक, नैतिक या हिंसक विचार भी बार-बार आ सकते हैं, जिन्हें वे खुद भी गलत मानते हैं।

    OCD का इलाज कैसे किया जाता है?

    यदि बीमारी शुरुआती या हल्की अवस्था में है, तो मनोवैज्ञानिक (Psychologist) द्वारा दी जाने वाली काउंसलिंग और साइकोथेरेपी से काफी लाभ मिल सकता है। लेकिन यदि बीमारी मध्यम या गंभीर हो जाए और व्यक्ति अपने विचारों या व्यवहार पर नियंत्रण न रख पाए, तो मनोचिकित्सक (Psychiatrist) दवाइयों की सलाह देते हैं।

    क्या OCD पूरी तरह ठीक हो सकता है?

    डॉक्टर के अनुसार अधिकांश मरीज सही इलाज से काफी हद तक ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में OCD दवाइयों से भी नियंत्रित नहीं हो पाता, जिसे ‘रेजिस्टेंट OCD’ कहा जाता है। ऐसे मामलों में rTMS (Repetitive Transcranial Magnetic Stimulation) और Modified ECT जैसी न्यूरो मॉड्यूलेशन तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

    यदि बार-बार आने वाले विचार, डर या दोहराए जाने वाले व्यवहार आपकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो उन्हें सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती पहचान और समय पर इलाज से OCD को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ से हुई बातचीत पर आधारित है और यह किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान (Diagnosis) या उपचार (Treatment) का विकल्प नहीं है।

  • क्या सपने देते हैं मौत के आने का इशारा? जानिए इस रहस्यमयी दावे की पूरी कहानी..?

    क्या सपने देते हैं मौत के आने का इशारा? जानिए इस रहस्यमयी दावे की पूरी कहानी..?

    क्या सपने देते हैं मौत के आने का इशारा? जानिए इस रहस्यमयी दावे की पूरी कहानी..?

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    मौत एक ऐसा सच है जिसे कोई टाल नहीं सकता। यह जीवन का अंतिम नियम है, लेकिन ज्यादातर लोग इसके बारे में सोचने से बचते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरी समय में इंसान के मन और चेतना में क्या चलता है?

    Death Dreams Study: इटली के रेज्जियो एमिलिया स्थित IRCCS के विशेषज्ञों ने इसी रहस्य को समझने के लिए गहन अध्ययन किया। उन्होंने 239 विशेषज्ञों से बातचीत कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इस रिसर्च में ‘एंड ऑफ लाइफ ड्रीम्स’ का जिक्र किया गया है, यानी वे अनुभव जो इंसान अपने जीवन के अंतिम चरण में महसूस कर सकता है।

    अंत समय में क्या दिखता है?

    रिसर्च के अनुसार, आखिरी समय में कई लोगों को अपने दिवंगत प्रियजन दिखाई देते हैं। किसी को पुराने रिश्ते याद आते हैं तो किसी को मां या करीबियों की छवि दिखाई देती है। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्हें अपने दिवंगत परिजन यह कहते सुनाई देते हैं कि “मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।” ऐसे अनुभव डर पैदा नहीं करते, बल्कि शांति और सुकून देते हैं, जैसे आगे का रास्ता आसान हो।

    सपनों में रोशनी और डरावने दृश्य

    कई लोगों को तेज रोशनी, खुले दरवाजे, ऊंची सीढ़ियां या सुंदर जगहें भी दिखाई देती हैं, जैसे कोई नई दुनिया सामने हो। वहीं कुछ मामलों में लोगों ने सफेद घोड़ा, खूबसूरत नजारे या शांत दृश्य देखने की बात कही है। लेकिन इसके उलट कुछ मरीजों को डरावने साये या भयानक दृश्य भी नजर आए, जिन्हें विशेषज्ञ इंसान के भीतर छिपे डर और अधूरी इच्छाओं का असर मानते हैं।

    मौत के करीब अनुभव का सच

    अक्सर लोग इन अनुभवों के बारे में खुलकर बात नहीं करते, क्योंकि उन्हें गलत समझे जाने का डर रहता है। लेकिन इन घटनाओं से यह समझ आता है कि इंसान मानसिक रूप से मौत को कैसे स्वीकार कर रहा है। अगर अनुभव शांत और सुकून भरे हों तो माना जाता है कि विदाई आसान होती है। विज्ञान इसे यादों और मानसिक तनाव का प्रभाव मानता है, जबकि कुछ लोग इसे आध्यात्मिक अनुभव भी समझते हैं।

  • पेट में बार-बार दर्द और दस्त को न करें नजरअंदाज, Mesenteric Lymphadenitis का हो सकता है संकेत.

    पेट में बार-बार दर्द और दस्त को न करें नजरअंदाज, Mesenteric Lymphadenitis का हो सकता है संकेत.

    पेट की रहस्यमयी गांठें, अगर पेट में बार बार दर्द, दस्त होना, पेट खराब रहना, बार बार जुकाम -बुखार – खांसी – गले की समस्या रहती है और पेट का अल्ट्रासाउंड कराने पर mesenteric lymphedinitis (पेट में गांठे) आती हैं। आइए जानते इस बीमारी की विस्तृत जानकारी।


    लिम्फ़ सिस्टम क्या होती है
    शरीर में जिस तरह रक्त के संचरण के लिए नसों का नेटवर्क होता है उसी तरह शरीर में लिम्फ के संचार के लिए लिम्फ सिस्टम होता है। इस सिस्टम में पूरे शरीर में जगह जगह गांठें होती हैं। जिनमें लिम्फ़ इकट्ठा रहता है। इन गांठों को lymph nodes कहते हैं।

    पेट में बार-बार दर्द और दस्त को न करें नजरअंदाज, Mesenteric Lymphadenitis का हो सकता है संकेत.

    लिम्फ़ क्या होता है
    यह एक सफेद गाढ़ा तरल होता है जिसमें शरीर को विभिन्न वायरस, बैक्टीरिया, फंगस से बचाती है। यह एक प्रकार से शरीर के रोग से लड़ने के तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पूरे शरीर में बहता है।

    लिम्फ नोड्स क्या होते हैं?
    लिम्फ नोड्स शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (immune system) का हिस्सा होते हैं। ये छोटे-छोटे, बीज के आकार की ग्रंथियाँ होती है जो शरीर मे संक्रमण से लड़ने मे सहायता करती हैं। पेट में जो लिंफ नोड्स होते हैं, उन्हें मेसेंटरिक लिम्फ नोड्स कहा जाता है।

    लिम्फ़ नोड्स में सूजन lymphadinitis के कौन कौन से कारण होते हैं

    • घर से बाहर का खाना।
    • अस्वच्छ भोजन।
      •बहुत ठंडा पानी पीना
      •देर से तथा असमय भोजन करना
    • रात को देर तक जागना, नींद की कमी, अत्यधिक चिंता और तनाव
      •एलोपैथिक दवाओं का निरंतर प्रयोग करना
    • वायरल संक्रमण
    • बैक्टेरियल संक्रमण
    • श्वास प्रणाली में संक्रमण
    • टॉन्सिल या गले का संक्रमण

    मेसेंटरिक लिम्फैडेनाइटिस –
    मेसेंटरिक लिम्फैडेनाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट में मौजूद लिंफ नोड्स (गाँठें) सूज जाती हैं। यह समस्या अक्सर बच्चों और किशोरों में देखी जाती है, लेकिन कभी-कभी युवाओं को भी हो सकती है।

    मेसेंटरिक लिम्फैडेनाइटिस के लक्षण –

    • पेट दर्द,
    • बुखार,
    • उल्टी, जी मचलना,
    • खांसी और गले में खराश होना,
    • दस्त या कब्ज़ का होना

    क्या यह कैंसर हो सकता है?
    सामान्यतया यह कैंसर नहीं होता है लेकिन इलाज में लापरवाही, बिना चिकित्सक की सलाह के दवाईयां लेना, परहेज नहीं करना, इम्यून सिस्टम का अधिक कमजोर होने से यह कैंसर में बदल सकती हैं।

    इसकी जांच कैसे होती है।
    इस रोग की जांच सामान्यतया अनुभवी चिकित्सक क्लीनिक में ही कर लेते हैं। आवश्यकता पड़ने पर रोग के निश्चितीकरण के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड समुचित होता है। यदि चिकित्सक को किसी अन्य रोग स्थिति का संदेह होता है तो अन्य जांचों की तरफ जाना पड़ता है।

    क्या इससे बचाव संभव है?

    • जी हाँ, बच्चों में स्वर्णप्राशन संस्कार द्वारा इससे बचाव संभव है।
    • व्यस्कों में खान-पान सही रखने और नियमित व्यायाम करने से इससे बचाव किया जा सकता है।

    क्या यह ठीक हो सकती है?
    यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता अगर रोगी समय रहते अनुभवी और योग्य चिकित्सक से सलाह और चिकित्सा ले, चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें।

    क्या इसमें आपरेशन कराना जरूरी है?
    नहीं यह कोई आवश्यक नहीं कि सर्जरी से ही इस रोग का इलाज होता है लेकिन यदि गांठ का साइज एक निश्चित सीमा से अधिक बढ़ जाए तब सर्जरी एक उचित विकल्प हो सकता है।

    क्या इसकी चिकित्सा संभव है?

    • जी हाँ,आयुर्वेद क्लिनिक के चिकित्सक इस रोग की चिकित्सा में विशेषज्ञ हैं।
    • समय रहते इलाज शुरू करने से रोग जड़ से समाप्त हो सकता है।
    • आपका स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है
  • स्पा सेंटर पर पुलिस का बड़ा छापा, देह व्यापार के आरोप में संचालक समेत 7 हिरासत में..

    स्पा सेंटर पर पुलिस का बड़ा छापा, देह व्यापार के आरोप में संचालक समेत 7 हिरासत में..

    स्पा सेंटर पर पुलिस का बड़ा छापा, देह व्यापार के आरोप में संचालक समेत 7 हिरासत में..

     मध्य प्रदेश के दमोह में पुलिस ने गुरुवार देर शाम अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन गुल्ली क्षेत्र स्थित यूनिक द थाई स्पा सेंटर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान स्पा सेंटर के संचालक सहित सात लोगों को हिरासत में लिया। मामले में अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस के अनुसार, स्पा सेंटर में लंबे समय से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के सत्यापन के बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से दबिश दी। कार्रवाई के दौरान स्पा सेंटर के भीतर से तीन ग्राहक, तीन वयस्क युवतियां और संचालक को हिरासत में लिया गया। इसके बाद सभी को पूछताछ के लिए पुलिस अभिरक्षा में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई प्रारंभ की गई।

    नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) एच.आर. पांडे ने बताया कि स्पा सेंटर का संचालन रीवा निवासी मोहम्मद आफताब अली कर रहा था। मौके से भगवानदास, अंकुर और पप्पू नामक तीन ग्राहक भी मिले। इसके अलावा तीन वयस्क युवतियां भी स्पा सेंटर से मिली हैं, जिनमें एक जबलपुर और एक कोलकाता की निवासी बताई गई है। सभी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान मिले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि स्पा सेंटर की आड़ में यह गतिविधि कब से संचालित हो रही थी और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है।

    सीएसपी एच.आर. पांडे ने कहा कि दमोह शहर में संचालित अन्य स्पा सेंटरों और ऐसे प्रतिष्ठानों पर भी पुलिस की निगरानी बनी हुई है। यदि किसी स्थान पर अनैतिक गतिविधियों की सूचना मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा।

  • ऑटो चालक पर महिला को नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म करने का आरोप, अस्पताल छोड़कर हुआ फरार!

    ऑटो चालक पर महिला को नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म करने का आरोप, अस्पताल छोड़कर हुआ फरार!

    ऑटो चालक पर महिला को नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म करने का आरोप, अस्पताल छोड़कर हुआ फरार!
    घाटकेसर अपराध समाचार

    घाटकेसर क्राइम न्यूज़: पोचारम आईटी कॉरिडोर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक घटना सामने आई है, जिसमें अस्पताल जाने के लिए ऑटो में सवार एक महिला को ऑटो चालक ने नशीली दवा देकर प्रताड़ित किया और उसके साथ बलात्कार किया। पीड़िता उप्पल के भरतनगर में एक ऑटो में सवार हुई और उसने घाटकेसर क्षेत्र के एक अस्पताल जाने का अनुरोध किया। हालांकि, ऑटो चालक उसे सीधे अस्पताल ले जाने के बजाय, रास्ते में भरतनगर के ताटिकल्लू डिपो पर रुका और टोल वसूला। इसके बाद उसने ऑटो को घाटकेसर आउटर रिंग रोड (ओआरआर) सर्विस रोड के पास एक सुनसान इलाके में मोड़ दिया।

    घाटकेसर क्राइम न्यूज़: कोल्ड ड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर हत्या

    सुनसान इलाके में पहुँचने के बाद, आरोपी ने योजना के अनुसार स्प्राइट की बोतल में नशीला पदार्थ मिलाया और महिला को जबरन पिला दिया। पीते ही वह बेहोश हो गई। पीड़िता की बेहोशी का फायदा उठाते हुए ऑटो चालक ने उसके साथ बेरहमी से बलात्कार किया। इतना ही नहीं, उसने महिला का मोबाइल फोन और नकदी भी छीन ली, उसे वहीं छोड़कर ऑटो लेकर फरार हो गया।

    आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया।

    कुछ समय बाद पीड़िता को होश आया और धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार हुआ। उसने पोचारम आईटी कॉरिडोर पुलिस स्टेशन में इस भयावह घटना की शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष पुलिस टीम ने घटनास्थल तक जाने वाले रास्तों के तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की। प्राप्त मुख्य साक्ष्यों और अन्य जानकारियों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने आरोपी ऑटो चालक को मात्र 24 घंटों के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

  • मक्खन का स्पर्श और शिवलिंग का चमत्कार! इस मंदिर की अनोखी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग..

    मक्खन का स्पर्श और शिवलिंग का चमत्कार! इस मंदिर की अनोखी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग..

    मक्खन का स्पर्श और शिवलिंग का चमत्कार! इस मंदिर की अनोखी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग..

    हमारे देश में देवी देवताओं के कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपने चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. ऐसा ही एक बेहद रहस्यमयी और अनोखा मंदिर देवभूमि हिमाचल प्रदेश में स्थित है. कुल्लू घाटी में पहाड़ों के ऊंचे शिखर पर बने इस मंदिर को बिजली महादेव के नाम से पुकारा जाता है.

    ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां का नजारा बेहद खूबसूरत है. लेकिन इस मंदिर की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि यहां हर 12 साल में आसमान से भयंकर बिजली गिरती है.

    ये बिजली सीधे मंदिर के भीतर स्थापित शिवलिंग पर आकर गिरती है, जिसके बाद का नजारा किसी को भी हैरत में डाल सकता है.

    हर 12 साल में आसमान से बरसती है शिव पर आकाशीय बिजली

    जब इस मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरती है, तो जोरदार धमाका होता है. बिजली के इस तगड़े झटके को झेलते ही गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग पूरी तरह से चकनाचूर हो जाता है.

    शिवलिंग के टुकड़े टुकड़े होकर पूरे मंदिर में बिखर जाते हैं. आम तौर पर अगर किसी पत्थर पर इतनी भारी बिजली गिरे, तो वह नामोनिशान खो देता है. लेकिन यहां भगवान शिव का ऐसा अनूठा चमत्कार होता है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी कोई नुकसान नहीं होता.

    स्थानीय लोगों का मानना है कि महादेव अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए इस आकाशीय बिजली के झटके को खुद अपने ऊपर झेल लेते हैं.

    मक्खन का लेप लगते ही चमत्कारी रूप से जुड़ जाते हैं टुकड़े

    शिवलिंग के टूटने के बाद मंदिर के पुजारी एक खास परंपरा को निभाते हैं. वो बिखरे हुए शिवलिंग के सभी टुकड़ों को इकट्ठा करते हैं. इसके बाद एक अनोखा मरहम तैयार किया जाता है, जो पूरी तरह से मक्खन, सत्तू और अनसाल्टेड बटर से बनता है.

    पुजारी इन टुकड़ों को आपस में मिलाकर उस पर मक्खन का गाढ़ा लेप लगाते हैं. जैसे ही ये लेप शिवलिंग पर लगाया जाता है, चमत्कार देखना शुरू हो जाता है. कुछ ही दिनों के भीतर वह टूटा हुआ शिवलिंग वापस अपने पुराने और ठोस रूप में आ जाता है.

    ये देखकर डॉक्टर और वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं कि बिना किसी सीमेंट या गोंद के पत्थर आपस में कैसे पक्के जुड़ जाते हैं.

    दैत्य कुलांत का वध करने के लिए शिव ने बनाया ये स्थान

    इस अनोखे चमत्कार के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है. कहते हैं कि बहुत समय पहले इस घाटी में कुलांत नाम का एक भयंकर राक्षस रहता था.

    वो राक्षस बहुत विशाल था और अजगर का रूप धारण कर सकता था. एक बार उसने पूरी घाटी को पानी में डुबोकर यहां के जीव जंतुओं को मारने की साजिश रची. भगवान शिव ने जब उसका यह रूप देखा, तो उन्होंने राक्षस का वध कर दिया.

    राक्षस का विशाल शरीर एक बड़े पहाड़ में बदल गया, जिसे आज हम कुल्लू घाटी के नाम से जानते हैं. दैत्य के मरने के बाद शिव ने इंद्र देव से कहा कि वे हर 12 साल में यहां बिजली गिराया करें ताकि धरती पर कोई और संकट न आए.

    विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया इस रहस्यमयी चुंबकीय पहाड़ी की गुत्थी

    बिजली महादेव का यह रहस्य आज के आधुनिक विज्ञान के लिए भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. वैज्ञानिकों ने कई बार इस जगह की जांच की है. उनका कहना है कि इस ऊंचे पहाड़ के नीचे भारी मात्रा में चुंबकीय तत्व यानी आयरन ओर्स मौजूद हो सकते हैं.

    इस वजह से जब भी आसमान में बिजली कड़कती है, तो वह इस पहाड़ी की तरफ तेजी से खिंची चली आती है. लेकिन विज्ञान के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि बिजली हमेशा सिर्फ शिवलिंग पर ही क्यों गिरती है.

    साथ ही मक्खन लगाने से पत्थर का खुद ब खुद जुड़ जाना किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं लगता. यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत चमत्कार को देखने यहां खींचे चले आते हैं.

  • समुद्र मंथन का सबसे बड़ा रहस्य! ये 3 रत्न बने विनाश का कारण, देवताओं ने भी नहीं लगाया हाथ..,?

    समुद्र मंथन का सबसे बड़ा रहस्य! ये 3 रत्न बने विनाश का कारण, देवताओं ने भी नहीं लगाया हाथ..,?

    समुद्र मंथन का सबसे बड़ा रहस्य! ये 3 रत्न बने विनाश का कारण, देवताओं ने भी नहीं लगाया हाथ..,?

    पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन की घटना का बहुत बड़ा महत्व है. जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र को मथा, तो उसमें से एक से बढ़कर एक चमत्कारी चीजें बाहर आईं.

    ज्यादातर लोग ये जानते हैं कि समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी और अमृत निकला था. लेकिन इस मंथन से सिर्फ अच्छी और शुभ चीजें ही नहीं निकली थीं. इसमें से कुछ ऐसी भयानक और विनाशकारी शक्तियां भी बाहर आई थीं, जिन्हें देखकर देवता और दानव दोनों ही कांप उठे थे.

    इनमें से तीन चीजें इतनी ज्यादा खतरनाक थीं कि देवताओं ने उन्हें छूने तक से साफ मना कर दिया था. आइए जानते हैं समुद्र मंथन से निकले उन तीन भयानक रत्नों का रहस्य.

    कालकूट नाम का भयंकर विष

    समुद्र मंथन की शुरुआत में ही जो सबसे पहली चीज बाहर आई, वह था कालकूट नाम का भयंकर जहर. ये कोई साधारण विष नहीं था, बल्कि इसकी गर्मी और धुएं से तीनों लोक जलने लगे थे.

    इस विष का असर इतना तेज था कि देवता और असुर दोनों ही अपनी जान बचाकर भागने लगे. किसी भी देवता या दानव में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इस जहर को हाथ भी लगा सके.

    तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव आगे आए. उन्होंने इस कालकूट विष को अपने हाथ में लिया और पूरा पी गए. माता पार्वती ने शिव जी के गले को दबाकर उस जहर को पेट में जाने से रोका, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए.

    वारुणी यानी मदिरा की उत्पत्ति

    मंथन के दौरान समुद्र की गहराइयों से एक और ऐसी चीज निकली, जिसे देवताओं ने अपनाने से पूरी तरह इंकार कर दिया. ये चीज थी वारुणी, जिसे मदिरा या शराब कहा जाता है.

    वारुणी जब समुद्र से बाहर आई, तो वह एक देवी के रूप में प्रकट हुई थी. वह पूरी तरह से नशे और तामसिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा देने वाली शक्ति थी. देवता जानते थे कि मदिरा का सेवन करने से बुद्धि नष्ट हो जाती है और इंसान या देवता अपने सही मार्ग से भटक जाते हैं.

    इसलिए पवित्र आचरण रखने वाले देवताओं ने वारुणी को छूने से मना कर दिया. अंत में असुरों ने आगे बढ़कर इस मदिरा को सहर्ष स्वीकार कर लिया.

    ज्येष्ठा यानी दरिद्रता की देवी

    समुद्र मंथन से जब धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी प्रकट हुईं, तो हर कोई खुश था. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि माता लक्ष्मी से ठीक पहले समुद्र से उनकी बड़ी बहन भी निकली थीं.

    इनका नाम ज्येष्ठा था, जिन्हें अलक्ष्मी, मूदेवी या दरिद्रता की देवी भी कहा जाता है. ज्येष्ठा का रूप बहुत डरावना था और उनके प्रकट होते ही चारों तरफ उदासी और कंगाली छाने लगी.

    वे जहां भी जातीं, वहां दुख, बीमारी और दरिद्रता अपने आप आ जाती थी. उनके इस विनाशकारी स्वभाव के कारण देवताओं ने उन्हें अपने साथ रखने या छूने से बिल्कुल मना कर दिया. बाद में उन्हें एक ऋषि को सौंप दिया गया और वे पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगीं.

    विनाश के बाद ही मिला अमृत

    इस तरह समुद्र मंथन की पूरी कहानी हमें जीवन का एक बहुत बड़ा सच सिखाती है. जब भी हम किसी बड़े बदलाव या मंथन से गुजरते हैं, तो सबसे पहले बुराई और विनाशकारी चीजें ही सामने आती हैं.

    देवताओं ने धैर्य रखा और इन तीनों खतरनाक शक्तियों यानी कालकूट विष, वारुणी और ज्येष्ठा से दूरी बनाए रखी. उन्होंने अपनी पवित्रता को नहीं खोया और गलत चीजों के लालच में नहीं पड़े.

    यहीं कारण था कि इतनी बड़ी बड़ी बाधाओं और भयानक खतरों को पार करने के बाद अंत में देवताओं को वह दिव्य अमृत और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकी.

  • रोज़ाना फास्ट फूड खाने की आदत बन सकती है कई गंभीर बीमारियों की वजह, जानें इसके नुकसान..

    रोज़ाना फास्ट फूड खाने की आदत बन सकती है कई गंभीर बीमारियों की वजह, जानें इसके नुकसान..

    रोज़ाना फास्ट फूड खाने की आदत बन सकती है कई गंभीर बीमारियों की वजह, जानें इसके नुकसान..

     1. पाचन तंत्र पर प्रभाव

    गैस्ट्रिक अल्सर और एसिडिटी:

    तेज मिर्च-मसाले पेट में अम्लता (Acidity) बढ़ाते हैं, जिससे गैस्ट्रिक अल्सर, एसिड रिफ्लक्स (GERD) और पेट की जलन हो सकती है।

     कब्ज और अपच:

    फास्ट फूड में फाइबर की कमी होती है, और आंतों की गति धीमी कर देते हैं, जिससे कब्ज और अपच हो सकता है।

     आंतों की सूजन (IBD) और बवासीर (Piles):

    फास्ट फूड आंतों में सूजन (Inflammatory Bowel Disease – IBD) और कब्ज बढ़ा सकते हैं, जिससे बवासीर और फिशर जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

    2. लिवर और किडनी पर प्रभाव

     फैटी लिवर और लिवर सिरोसिस:

    फास्ट फूड में मौजूद ट्रांस फैट लिवर में फैट जमा कर देते हैं, जिससे फैटी लिवर, लिवर फाइब्रोसिस और अंततः लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) हो सकता है।

     किडनी स्टोन और किडनी फेल्योर:

    यूरिक एसिड बढ़ाकर किडनी स्टोन और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ाते हैं। किडनी के फिल्टरिंग सिस्टम को कमजोर कर सकती है, जिससे किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।

    3. हृदय और ब्लड प्रेशर पर प्रभाव

     हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक:

    फास्ट फूड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं, धमनियों को सख्त करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक/स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

     दिल की धड़कन असामान्य होना (Arrhythmia):

    तेज मिर्च दिल की धड़कन को असामान्य रूप से तेज (Tachycardia) या धीमा (Bradycardia) कर सकते हैं।

    4. मानसिक और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव

     ब्रेन फॉग और याददाश्त कमजोर होना:

    फास्ट फूड मस्तिष्क की तंत्रिकाओं (Neurons) को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे याददाश्त कमजोर हो सकती है और ब्रेन फॉग (सोचने-समझने की क्षमता में कमी) आ सकता है।

     नींद की समस्या और डिप्रेशन:

    मेलाटोनिन (Melatonin) हॉर्मोन को डिस्टर्ब कर सकते हैं, जिससे अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन हो सकता है।

    5. सेक्सुअल हेल्थ पर प्रभाव

    फास्ट फूड टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को कम करते हैं, जिससे सेक्स ड्राइव घटती है और स्पर्म काउंट कम होता है।

     पीरियड्स में अनियमितता और हार्मोनल असंतुलन (महिलाओं में):

    अधिक जंक फूड एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को असंतुलित कर सकते हैं, जिससे पीरियड्स अनियमित और गर्भधारण में समस्या हो सकती है।

    6. कैंसर का खतरा

     मुंह, गले और पेट के कैंसर का खतरा:

    मसालेदार फास्ट फूड और मांस में मौजूद कार्सिनोजेनिक पदार्थ (जैसे नाइट्रेट्स और ट्रांस फैट) कैंसर कोशिकाओं को ट्रिगर कर सकते हैं।

    7. इम्यूनिटी पर प्रभाव

     प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कमजोर होना:

    फास्ट फूड शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को कमजोर कर देते हैं, जिससे बार-बार सर्दी-जुकाम, इन्फेक्शन और सूजन की समस्या हो सकती है।

    समाधान –

    यदि आप लम्बे समय से या लगातार फ़ास्ट फ़ूड का सेवन करते हैं और आप ऊपर बताये गए सभी रोगों से बचना चाहते हैं तो आप इस प्रकार अपना बचाव कर सकते हैं।
    1 फास्ट फ़ूड का सेवन बहुत कम कर दें। अधिकतम महीने में एक या दो बार सेवन करने से खतरा काफी कम रहने की सम्भावना रहती है।
    2 अभी तक की गयी लापरवाही से शरीर के अंदर जो दूषित तत्व इकट्ठे हो गए हैं उन्हें बाहर निकालने के लिए अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सक से संपर्क करें और सात्विक भोजन एवं व्यायाम की मदद लें।
    3 दूषित तत्व बाहर निकालने, कमजोर हुए अंगों को मजबूत करने, शरीर को उचित पोषण देने के लिए आयुर्वेद मल्टी स्पेशलिटी क्लिनिक के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा तैयार विशेष फार्मूला का उपयोग करना उत्तम रहेगा।

  • आपने कुछ नहीं पहना है…’ फिटनेस इन्फ्लुएंसर के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स, अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल…

    आपने कुछ नहीं पहना है…’ फिटनेस इन्फ्लुएंसर के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स, अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल…

    आपने कुछ नहीं पहना है…’ फिटनेस इन्फ्लुएंसर के कपड़ों पर भद्दे कमेंट्स, अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल…

    25 वर्षीय इस पर्सनैलिटी एड्डा एलिसा पिल्ज़ ने टिकटॉक पर कंपनी की आलोचना की और बताया कि उन्हें एयरपोर्ट पर गेट पर रोका गया और कहा गया कि वह ‘नग्न’ लग रही थीं

    ‘आपने कुछ नहीं पहना है, बिल्कुल… लग रही हो’ खूबसूरत फिटनेस इन्फ़्लुएंसर के अंडरगारमेंट्स तक पर उठाए सवाल

    Edda Elisa Pilz: जर्मन फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर ने लुफ़्थान्सा एयरलाइन की यह कहते हुए आलोचना की है कि उन्हें कम कपड़े वाली स्पोर्ट्स ब्रा पहनने के कारण प्लेन में चढ़ने से रोका गया. यहां तक कहा गया कि आप नग्न हैं! जर्मन फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर एड्डा एलिसा पिल्ज़ ने सोशल मीडिया पर लुफ़्थान्सा की आलोचना करते हुए कहा कि स्पोर्ट्स ब्रा और बाइकर शॉर्ट्स पहने होने के कारण उन्हें एयरलाइन के प्लेन में चढ़ने से रोक दिया गया. सोशल मीडिया टिकटॉक पर कंपनी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें एयरपोर्ट पर गेट पर ही रोक दिया गया और कहा गया कि वह ‘नग्न’ लग रही हैं.

    स्पोर्ट्स ड्रेस में थीं इन्फ़्लुएंसर

    जर्मन भाषा में अपने ऑनलाइन दर्शकों से बात करते हुए 25 वर्षीय जर्मन फ़िटनेस इन्फ़्लुएंसर ने दावा किया कि लुफ़्थान्सा के एक कर्मचारी ने उन्हें प्लेन में चढ़ने से मना कर दिया. जब उन्होंने कारण पूछा, तो प्रतिनिधि ने जवाब दिया ‘आपने कुछ नहीं पहना है. आप नग्न हैं!’  एड्डा एलिसा पिल्ज़ यात्रा के क्रम में सुनहरे बालों के साथ स्किन-टाइट काले शॉर्ट्स और काली ट्रिम वाली लो-कट सफ़ेद ब्रा पहने पहुंची थीं. उन्होंने ग्रे रंग की क्रॉप्ड स्वेटशर्ट भी पहनी थी.

    प्लेन में चढ़ने से रोका

    एड्डा एलिसा पिल्ज़ का कहना है कि उनकी पोशाक सामान्य एथलेटिक-वियर थी, लेकिन उन्हें जैकेट पहनने और उसे पूरी तरह से ज़िप करने के लिए कहा गया. इसके बाद सोशल मीडिया पर लुफ़्थान्सा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि स्पोर्ट्स ब्रा और बाइकर शॉर्ट्स पहने होने के कारण उन्हें एयरलाइन के प्लेन में चढ़ने से रोक दिया गया.

    सामने आई लुफ्थांसा एयरलाइंस की सफाई

    एड्डा ने बताया कि जहां वह थीं, वहां पर अधिकतम  तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या लगभग 86 डिग्री फ़ारेनहाइट था. उन्होंने कहा कि उन्हें गेट एजेंट के ड्रेस कोड बताने के तरीके से दिक्कत थी, न कि खुद ड्रेस कोड से. उन्होंने तर्क दिया, ‘अगर नियम हैं, तो मैं उन्हें मानती हूँ। लेकिन फिर मुझे नियम दिखाए भी जाएं.

    वहीं, ‘मिरर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लुफ्थांसा ने जवाब दिया कि कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए शब्द ‘हमारे मानकों के अनुरूप नहीं हैं’ और ‘उनके स्टाफ द्वारा इस्तेमाल नहीं किए गए होंगे.’ एयरलाइंस की ओर से यह भी कहा गया कि  कर्मचारियों को अपनी नौकरी में पॉलिसी लागू करते समय समझदारी से काम लेने की ट्रेनिंग दी जाती है. एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों को ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो सार्वजनिक यात्रा के माहौल के अनुकूल हों. एड्ड के टिकटॉक पर 639,000 और इंस्टाग्राम पर 555,000 फॉलोअर्स हैं, उन्हें आखिरकार फ्लाइट में चढ़ने की इजाज़त मिल गई.