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  • अरवल में ऑटो से खींचकर वकील के पत्नी को मारी गोली; मौके पर ही तोड़ा दम, कोर्ट से गवाही देकर लौट रही थी..

    अरवल में ऑटो से खींचकर वकील के पत्नी को मारी गोली; मौके पर ही तोड़ा दम, कोर्ट से गवाही देकर लौट रही थी..

    अरवल में ऑटो से खींचकर वकील के पत्नी को मारी गोली; मौके पर ही तोड़ा दम, कोर्ट से गवाही देकर लौट रही थी..

    बिहार के अरवल जिले में शुक्रवार देर रात एक सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए. अरवल न्यायालय में गवाही देकर लौट रही एक महिला की बाइक सवार हथियारबंद अपराधियों ने ऑटो से खींचकर गोली मारकर हत्या कर दी. घटना जहानाबाद-अरवल मुख्य मार्ग पर बाजितपुर मोड़ के पास हुई. बताया जा रहा है कि महिला अपने दूसरे पति के साथ घर लौट रही थी, तभी पहले से घात लगाए अपराधियों ने ऑटो को रोक लिया. देखते ही देखते ताबड़तोड़ फायरिंग हुई और महिला की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है. अरवल से NDTV के लिए विश्वनाथ प्रताप यादव की रिपोर्ट.

    गवाही देकर लौट रही थी महिला

    मृतका की पहचान 28 वर्षीय शोभा कुमारी के रूप में हुई है. वह अपने दूसरे पति पप्पू कुमार के साथ अरवल न्यायालय में एक मामले में गवाही देने गई थी. कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने के बाद दोनों ऑटो से जहानाबाद की ओर लौट रहे थे. NDTV को प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैसे ही ऑटो करपी थाना क्षेत्र के बाजितपुर मोड़ के पास पहुंचा, वहां पहले से मौजूद बाइक सवार अपराधियों ने उसे रोक लिया.

    ऑटो से खींचकर मारी गोली

    पुलिस के अनुसार अपराधियों ने सीधे शोभा कुमारी को निशाना बनाया. आरोप है कि बदमाशों ने महिला को ऑटो से जबरन नीचे उतारा और उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. हमले में शोभा कुमारी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति पप्पू कुमार बाल-बाल बच गए.

    शरीर पर मिले गोली लगने के कई निशान

    सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि महिला के शरीर पर चार गोलियों के निशान पाए गए हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला को कितनी गोलियां लगी थीं और मौत का सटीक कारण क्या रहा.

    पुलिस ने शुरू की जांच, एफएसएल ने जुटाए सैंपल

    घटना की सूचना मिलते ही करपी थानाध्यक्ष सुधीर कुमार सिन्हा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू की. पुलिस उपाधीक्षक कुमार संजय ने बताया कि घटनास्थल से दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. वहीं फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्र किए हैं. जांच एजेंसियां घटनास्थल और पूरे घटनाक्रम को जोड़कर अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं.

    पूर्व पति पर हत्या की साजिश का आरोप

    पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतका का अपने पूर्व पति रविंद्र राम के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था. मृतका के दूसरे पति पप्पू कुमार के बयान पर पुलिस ने पूर्व पति रविंद्र राम सहित अन्य लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस का मानना है कि हत्या के पीछे पुराना पारिवारिक विवाद एक अहम कारण हो सकता है, हालांकि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.

    दो लोग हिरासत में, छापेमारी जारी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. साथ ही संभावित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही घटना में शामिल अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

  • कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये 5 आसान घरेलू उपाय, दिल रहेगा स्वस्थ..

    कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये 5 आसान घरेलू उपाय, दिल रहेगा स्वस्थ..

    कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये 5 आसान घरेलू उपाय, दिल रहेगा स्वस्थ..

    बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। अच्छी बात यह है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई लोग अपने कोलेस्ट्रॉल स्तर को नियंत्रित रखने में मदद पा सकते हैं। हालांकि, यदि डॉक्टर ने दवा लिखी है तो उसे बिना सलाह बंद न करें।

    1. लहसुन को संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करें

    कुछ शोध बताते हैं कि लहसुन का नियमित सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, यह कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा का विकल्प नहीं है। यदि आप ब्लड थिनर दवाएं लेते हैं, तो अधिक मात्रा में लहसुन लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    2. फाइबर से भरपूर भोजन करें

    ओट्स, जौ, साबुत अनाज, दालें, फल और हरी सब्जियां घुलनशील फाइबर (Soluble Fiber) का अच्छा स्रोत हैं। यह LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है।

    3. आंवला और खट्टे फल शामिल करें

    आंवला, नींबू, संतरा और अन्य विटामिन C से भरपूर फल एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं और संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।

    4. स्वस्थ तेल और अंकुरित अनाज अपनाएं

    तले हुए और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों की जगह सीमित मात्रा में सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन या जैतून के तेल का उपयोग करें। साथ ही अंकुरित दालें, बीन्स और सोया उत्पाद भी संतुलित आहार का अच्छा हिस्सा हो सकते हैं।

    5. नशे से दूरी और नियमित व्यायाम

    धूम्रपान और अत्यधिक शराब हृदय स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या अन्य शारीरिक गतिविधियां करने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।

    क्या धनिया पानी फायदेमंद है?

    कुछ लोग रातभर भिगोए हुए धनिए का पानी पीते हैं। हालांकि, इसे कोलेस्ट्रॉल कम करने का वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार नहीं माना जाता। यदि आपको यह पसंद है, तो इसे संतुलित आहार के हिस्से के रूप में लिया जा सकता है, लेकिन केवल इसी पर निर्भर न रहें।

    कब डॉक्टर से मिलें?

    यदि आपका LDL कोलेस्ट्रॉल अधिक है, पहले से हृदय रोग, मधुमेह या उच्च रक्तचाप है, तो नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा एवं जीवनशैली दोनों का पालन करें।

    निष्कर्ष

    कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है—संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान-शराब से दूरी। घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन वे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं।

  • 5 राज्य और 1 विदेशी देश! भारत का वो अनोखा राज्य जिसकी सीमाएं उड़ा देंगी होश; क्या आप पहचान सकते हैं इसका नाम?

    5 राज्य और 1 विदेशी देश! भारत का वो अनोखा राज्य जिसकी सीमाएं उड़ा देंगी होश; क्या आप पहचान सकते हैं इसका नाम?

    5 राज्य और 1 विदेशी देश! भारत का वो अनोखा राज्य जिसकी सीमाएं उड़ा देंगी होश; क्या आप पहचान सकते हैं इसका नाम?

    भारत का भूगोल अनोखे चमत्कारों से भरा पड़ा है। एक ऐसा राज्य जो देश के पांच राज्यों से सीमा साझा करने के अलावा पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी जुड़ा हो, वह है राजस्थान- ‘राजाओं का स्थान’। यह न केवल क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य है, बल्कि इसकी सीमाएं भौगोलिक विविधता और रणनीतिक महत्व की मिसाल हैं। आइए, इस अनोखे राज्य की पड़ताल करते हैं, जो थार रेगिस्तान से अरावली पहाड़ियों तक फैला है।

    राजस्थान की अनूठी सीमाएं

    राजस्थान उत्तर-पश्चिम भारत में बसा है, जहां इसकी कुल स्थलीय सीमा 5920 किमी लंबी है। उत्तर में पंजाब (89 किमी), उत्तर-पूर्व में हरियाणा (1262 किमी), पूर्व में उत्तर प्रदेश (877 किमी), दक्षिण-पूर्व में मध्य प्रदेश (1600 किमी) तथा दक्षिण-पश्चिम में गुजरात (1022 किमी) से लगती हैं। पश्चिम में 1070 किमी लंबी रेडक्लिफ रेखा पाकिस्तान को स्पर्श करती है, जो श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जिलों से गुजरती है।

    यह संयोजन इसे भारत का इकलौता राज्य बनाता है, क्योंकि झारखंड भले ही पांच राज्यों (बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश) से घिरा हो, लेकिन विदेशी सीमा न होने से यह पिछड़ जाता है।

    क्षेत्रफल का दबदबा

    3,42,239 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला राजस्थान भारत के कुल भू-भाग का 10.4% कवर करता है, जो मध्य प्रदेश (3,08,245 वर्ग किमी) और महाराष्ट्र से बड़ा है। 2011 जनगणना के अनुसार जनसंख्या 6.85 करोड़ है, साक्षरता दर 66.1%। जयपुर इसकी राजधानी है, जिसे ‘पिंक सिटी’ कहते हैं, जबकि जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर प्रमुख शहर हैं। थार रेगिस्तान राज्य के 60% हिस्से पर कब्जा जमाए है, वहीं अरावली पर्वतमाला जलवायु को संतुलित रखती है।

    ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व

    ‘राजपूताना’ के नाम से जाना जाने वाला यह राज्य राजसी वैभव का प्रतीक है। जयपुर का हवा महल, उदयपुर की झीलें, जोधपुर का मेहरानगढ़ किला पर्यटकों को लुभाते हैं। रणनीतिक रूप से पाक सीमा सुरक्षा का केंद्र, यहां बीएसएफ चौकियां तैनात हैं। आर्थिक रूप से खनिज संपदा (जस्ता, तांबा), पर्यटन और कृषि (बाजरा, ज्वार) मजबूत हैं।

    तुलना में अनोखापन

    राजस्थान न केवल भूगोल का चमत्कार है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी। इसकी सीमाएं व्यापार, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती हैं।

  • प्रेम प्रसंग पर बवाल! कानपुर में युवक को ग्रामीणों ने पकड़कर पीटा, ‘तालिबानी सजा’ जैसी घटना से सनसनी..

    प्रेम प्रसंग पर बवाल! कानपुर में युवक को ग्रामीणों ने पकड़कर पीटा, ‘तालिबानी सजा’ जैसी घटना से सनसनी..

    प्रेम प्रसंग पर बवाल! कानपुर में युवक को ग्रामीणों ने पकड़कर पीटा, ‘तालिबानी सजा’ जैसी घटना से सनसनी..

    कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र में सामने आई एक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा में आ गया है. वीडियो के अनुसार खिरवां डेरा गांव में अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचे युवक और युवती को ग्रामीणों ने कथित तौर पर पकड़ लिया, जिसके बाद दोनों के साथ मारपीट की गई. वायरल वीडियो में युवक को रस्सी से बांधकर पीटते और युवती के साथ भी हाथापाई करते हुए कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं. पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है, हालांकि अभी तक किसी पक्ष की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है.

    क्या है मामला?

    डेरापुर के खिरवां डेरा गांव में एक युवक अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए उसके घर पहुंचा था. लेकिन दोनों की यह मुलाकात छुप न सकी. इसकी भनक लगते ही सतर्क हुए गांव वालों ने बिना देर किए घर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और तुरंत खेतों पर काम कर रहे परिजनों को सूचना देकर बुला लिया. परिजनों के पहुंचते ही घर के अंदर का माहौल तनावपूर्ण हो गया. आरोप है कि घर के भीतर दोनों को रंगे हाथों पकड़ने के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी एक्शन सीक्वेंस से कम नहीं था. ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने प्रेमी जोड़े की जमकर धुनाई कर दी. घटना के दौरान का मंजर देख वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया.

    वायरल वीडियो में क्या कुछ है?

    वीडियो मे देखा जा सकता है कि युवक को जहां गांव वालों ने लाठी-डंडों, लात-घूंसों से पीटा. वहीं युवतियों और महिलाओं ने भी पीछे न हटते हुए लड़की की जमकर खबर ली. पिटाई से भी जब ग्रामीणों का मन नहीं भरा, तो उन्होंने प्रेमी के हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए और उसे आंगन में ही लिटा दिया. इस पूरी घटना का किसी ने चुपके से वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका है और पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.

  • गुड़ से जुड़े ये पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय माने जाते हैं शुभ, जानें क्या है धार्मिक मान्यता..

    गुड़ से जुड़े ये पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय माने जाते हैं शुभ, जानें क्या है धार्मिक मान्यता..

    गुड़ से जुड़े ये पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय माने जाते हैं शुभ, जानें क्या है धार्मिक मान्यता..

    भारतीय संस्कृति और ज्योतिष परंपरा में गुड़ को शुभ, सात्विक और मंगलकारी माना गया है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुड़ का दान, पूजा या विशेष अवसरों पर इसका उपयोग सकारात्मक ऊर्जा, दान-पुण्य और शुभ फल का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इन उपायों के लाभों का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें केवल धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    1. संकट और भय से राहत के लिए

    धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को किसी बड़े कार्य, यात्रा या ऑपरेशन को लेकर भय हो, तो मंगलवार या शनिवार के दिन तांबे के पात्र में गुड़ रखकर हनुमान मंदिर में दान किया जाता है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने की परंपरा भी प्रचलित है।

    2. सूर्य से जुड़े ज्योतिषीय उपाय

    ज्योतिष शास्त्र में कुछ लोग मानते हैं कि यदि जन्मकुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो, तो रविवार के दिन गुड़ का दान करना, बहते जल में गुड़ प्रवाहित करना या जरूरतमंदों को गुड़ और गेहूं दान करना शुभ माना जाता है। यह उपाय केवल ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित हैं।

    3. घर और संपत्ति से जुड़ी मान्यता

    कुछ परंपराओं के अनुसार, यदि घर या संपत्ति से संबंधित कार्यों में बार-बार बाधा आ रही हो, तो शुक्रवार को जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना, रविवार को गाय को गुड़ खिलाना और शनिवार को शनि मंदिर में दान करना शुभ माना जाता है।

    4. मनोकामना के लिए पारंपरिक उपाय

    लोकमान्यताओं में गुरुवार के दिन पीले कपड़े में 7 गुड़ की डलियां, 7 साबुत हल्दी की गांठें और एक सिक्का बांधकर विशेष विधि से रखने या दान करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसे कुछ लोग अपनी मनोकामना व्यक्त करने का प्रतीकात्मक धार्मिक उपाय मानते हैं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    5. ऋण मुक्ति और आर्थिक सुख-समृद्धि

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान मंदिर में गुड़-चना या लड्डू का भोग लगाकर प्रार्थना करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। कई श्रद्धालु इसे आर्थिक कठिनाइयों से उबरने की कामना के साथ करते हैं।

    6. परिवार में प्रेम और मेल-मिलाप

    लोक परंपराओं में गुड़ को मिठास और रिश्तों में सौहार्द का प्रतीक माना गया है। इसी कारण परिवार में प्रेम और आपसी संबंध मजबूत करने के लिए गुड़ का दान या वितरण शुभ माना जाता है।

    ध्यान रखें

    ये सभी उपाय धार्मिक, ज्योतिषीय और लोकमान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी समस्या का निश्चित समाधान या सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता। जीवन में सफलता, आर्थिक उन्नति और पारिवारिक सुख के लिए मेहनत, सकारात्मक सोच, सही निर्णय और आपसी सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हैं।

    निष्कर्ष

    गुड़ भारतीय परंपरा में शुभता और मिठास का प्रतीक माना जाता है। यदि आप इन उपायों में आस्था रखते हैं, तो इन्हें श्रद्धा और सद्भावना के साथ कर सकते हैं। साथ ही, जीवन की चुनौतियों का सामना व्यावहारिक सोच, परिश्रम और उचित योजना के साथ करना भी आवश्यक है।

  • भारत में एक नहीं, बल्कि 2 जयपुर हैं! राजस्थान के अलावा दूसरा ‘पिंक सिटी’ कहाँ है? नाम जानकर रह जाएंगे दंग –

    भारत में एक नहीं, बल्कि 2 जयपुर हैं! राजस्थान के अलावा दूसरा ‘पिंक सिटी’ कहाँ है? नाम जानकर रह जाएंगे दंग –

    भारत में एक नहीं, बल्कि 2 जयपुर हैं! राजस्थान के अलावा दूसरा ‘पिंक सिटी’ कहाँ है? नाम जानकर रह जाएंगे दंग –

    राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी गुलाबी इमारतों, भव्य किलों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की पहचान के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो जयपुर हैं? राजस्थान के अलावा ओडिशा के कोरापुट जिले में भी एक जयपुर बसा है, जिसे ऐतिहासिक रूप से जेरपोरे (Jeypore) के नाम से जाना जाता है।

    यह तथ्य सामान्य ज्ञान के सवालों से लेकर सोशल मीडिया पोस्ट तक चर्चा का विषय बना हुआ है। हमारी गहन पड़ताल में सामने आया कि दोनों शहरों की अपनी-अपनी अनोखी कहानी और सांस्कृतिक विरासत है।

    राजस्थान का प्रसिद्ध जयपुर

    जयपुर का नाम सुनते ही राजस्थान का चित्र उभरता है- हवा महल, आमेर किला, जंतर मंतर और गुलाबी गलियां। इस शहर की स्थापना 18 नवंबर 1727 को कछवाहा राजपूत शासक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। आमेर से स्थानांतरित होकर बने इस शहर को 1876 में प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत के लिए महाराजा राम सिंह ने गुलाबी रंग से रंगा, जो आज ‘पिंक सिटी’ की पहचान है। 2019 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। पर्यटकों की भारी भीड़, ज्वेलरी मार्केट और राजपूताना वैभव इसे भारत का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनाते हैं। लेकिन लोकप्रिय धारणा के उलट, यह एकमात्र जयपुर नहीं।

    ओडिशा का दूसरा जयपुर

    ओडिशा का जयपुर (जेरपोरे) पूर्वी घाट की पहाड़ियों में बसा एक छोटा लेकिन समृद्ध शहर है। कोरापुट जिले का यह हिस्सा ब्रिटिश काल में जेपुर रियासत की राजधानी था। 19वीं सदी तक यह एक स्वतंत्र रियासत के रूप में फली-फूली, जब रामचंद्र देव और नीलमाधव देव जैसे राजाओं ने शासन किया। स्वतंत्रता के बाद यह ओडिशा में विलय हो गया।

    यहां की खासियत आदिवासी संस्कृति है – बोंडा, डांगरीया कोंधा जैसे जनजातियां रंग-बिरंगे परिधानों और उत्सवों के लिए प्रसिद्ध हैं। हर साल नव रात्रि में होने वाला ‘जेरपोरे पर्व’ हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में यह दूधसागर झरने, तादिम्बा गुफाओं और घने जंगलों से घिरा है।

    दोनों जयपुरों की तुलना

    दोनों जयपुरों में समानता नाम की है, लेकिन व्यक्तित्व बिलकुल अलग। राजस्थान का जयपुर शाही वैभव, संगमरमर महल और रेगिस्तानी संस्कृति का प्रतीक है, जबकि ओडिशा का जयपुर आदिवासी जीवनशैली, जैव विविधता और पूर्वी भारत की लोक परंपराओं का केंद्र। पहले का क्षेत्रफल 484 वर्ग किमी है, जनसंख्या 40 लाख से अधिक, वहीं दूसरे का महज 249 वर्ग किमी में 80 हजार से कम लोग बसते हैं। राजस्थान वाला वैश्विक पर्यटन हब है, ओडिशा वाला इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक उत्सवों के लिए जाना जाता।

    ऐतिहासिक संयोग और भ्रम

    यह दोहरा नामकरण ऐतिहासिक संयोग का नतीजा लगता है। ओडिशा के जेरपोरे का नाम संभवतः जयपुर राज्य के संस्थापक से प्रेरित हो। लेकिन भ्रम की स्थिति बनी रहती है – स्कूलों के जीके सवालों से लेकर वायरल पोस्ट तक लोग हैरान होते हैं। पर्यटन विभाग को ऐसे अनोखे तथ्यों को प्रमोट करना चाहिए। ओडिशा टूरिज्म पहले से ही ‘ट्राइबल टूरिज्म’ को बढ़ावा दे रहा है, जबकि राजस्थान का जयपुर करोड़ों सैलानियों का स्वागत करता रहता।

    पर्यटन के नए आयाम

    क्या ये दो जयपुर एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं? क्यों न एक ‘ट्विन सिटी टूर’ पैकेज बने? ओडिशा सरकार ने हाल ही में कोरापुट को हेरिटेज सर्किट में शामिल किया है। आने वाले समय में यह दूसरा जयपुर भी नई ऊंचाइयों को छू सकता है। कुल मिलाकर, भारत की विविधता इन नामों में झलकती है – एक गुलाबी शाही नगरी, दूसरा हरा-भरा आदिवासी गढ़। अगली बार ‘जयपुर घूमने’ का प्लान बनाएं, तो राज्य जरूर चेक करें!

  • वाराणसी में सो रहे तीन लोगों पर पत्थरों से हमला; साड़ी कारीगर की सिर कुचलकर हत्या, दो अन्य घायल

    वाराणसी में सो रहे तीन लोगों पर पत्थरों से हमला; साड़ी कारीगर की सिर कुचलकर हत्या, दो अन्य घायल

    वाराणसी में सो रहे तीन लोगों पर पत्थरों से हमला; साड़ी कारीगर की सिर कुचलकर हत्या, दो अन्य घायल

    वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में शनिवार तड़के हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. हनुमान फाटक क्षेत्र में दुकानों के बाहर सो रहे तीन लोगों पर अज्ञात हमलावरों ने ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया. हमले में 40 वर्षीय साड़ी कारीगर पप्पू विश्वकर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जुट गई और लोगों में आक्रोश फैल गया. सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी. पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला पुरानी रंजिश और आपसी विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, हालांकि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है.

    भोर में सो रहे लोगों पर किया गया हमला

    जानकारी के अनुसार आदमपुर के मुस्लिम बहुल हनुमान फाटक क्षेत्र में पप्पू विश्वकर्मा शुक्रवार रात काम समाप्त करने के बाद अपनी दुकान के बाहर सो रहे थे. उनके पास ही पान की दुकान चलाने वाले अशोक पासी उर्फ बाबा और गणेशु कनौजिया भी सोए हुए थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक तड़के करीब तीन बजे कुछ हमलावर वहां पहुंचे और सो रहे लोगों पर अचानक ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया. हमले में पप्पू विश्वकर्मा के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

    दो अन्य लोग घायल, मौके पर पहुंचे विधायक-पुलिस अधिकारी

    इस हमले में अशोक पासी उर्फ बाबा गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि गणेशु कनौजिया को भी चोटें आईं. दोनों घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए. क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया. सूचना मिलने पर क्षेत्रीय विधायक नीलकंठ तिवारी भी मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को कहा. लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया.

    पुलिस को पुरानी रंजिश का शक

    काशी जोन के एडीसीपी वैभव बांगर ने NDTV को बताया कि प्रारंभिक जांच में आपसी विवाद और पुरानी रंजिश का एंगल सामने आया है. उन्होंने कहा कि घटना से पहले भी संबंधित पक्षों के बीच विवाद की जानकारी मिली है. शनिवार सुबह पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई है. इसके बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और जांच शुरू की.

    सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

    पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है. हमलावरों की पहचान और उनके आने-जाने के रास्तों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अलावा स्थानीय लोगों से पूछताछ भी की जा रही है. पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है.

  • शनिवार को तुलसी से जुड़े ये पारंपरिक उपाय माने जाते हैं शुभ, जानें धार्मिक मान्यता और महत्व..

    शनिवार को तुलसी से जुड़े ये पारंपरिक उपाय माने जाते हैं शुभ, जानें धार्मिक मान्यता और महत्व..

    शनिवार को तुलसी से जुड़े ये पारंपरिक उपाय माने जाते हैं शुभ, जानें धार्मिक मान्यता और महत्व..

    हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से तुलसी की पूजा करने और उससे जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय अपनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सुख-शांति बनी रहती है। हालांकि, इन उपायों के लाभ धार्मिक आस्था पर आधारित हैं और इनके परिणाम व्यक्ति की मान्यता एवं विश्वास पर निर्भर करते हैं।

    1. शनिवार को आटे में तुलसी के पत्ते मिलाने की परंपरा

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनिवार को आटा पिसवाने से पहले थोड़े से गेहूं में लगभग 100 ग्राम काले चने, 11 तुलसी के पत्ते और 2–3 रेशे केसर मिलाकर बाकी गेहूं के साथ पिसवाया जाता है। कई लोग इसे घर में समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रतीकात्मक उपाय मानते हैं।

    2. काले कुत्ते को रोटी खिलाना

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में शनिवार के दिन सरसों के तेल लगी रोटी काले कुत्ते को खिलाना शुभ माना जाता है। इसे दया, सेवा और शनि देव की कृपा से जोड़कर देखा जाता है।

    3. पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना

    शनिवार की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे देसी घी या तिल के तेल का दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।

    4. तुलसी के पौधे की नियमित पूजा

    रोज सुबह या शाम तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाकर पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक विश्वास है कि इससे घर का वातावरण पवित्र बना रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

    ध्यान रखें

    ये सभी उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें किसी समस्या का निश्चित समाधान या आर्थिक सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता। जीवन में सफलता के लिए मेहनत, सही योजना, ईमानदारी और सकारात्मक सोच भी उतनी ही आवश्यक है।

    निष्कर्ष

    तुलसी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यदि आप इन उपायों में विश्वास रखते हैं, तो इन्हें श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ कर सकते हैं। साथ ही, जीवन में प्रगति के लिए कर्म, अनुशासन और सतत प्रयास को हमेशा प्राथमिकता दें।

  • समोसा भारतीय है या विदेशी? 10वीं सदी से शुरू हुआ स्वाद का सफर; जानें इस चटपटे स्नैक का असली सच –

    समोसा भारतीय है या विदेशी? 10वीं सदी से शुरू हुआ स्वाद का सफर; जानें इस चटपटे स्नैक का असली सच –

    समोसा भारतीय है या विदेशी? 10वीं सदी से शुरू हुआ स्वाद का सफर; जानें इस चटपटे स्नैक का असली सच –

    ‘समोसा’ नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। कुरकुरा पराठा, मसालेदार आलू की फिलिंग, हरी चटनी का तड़का- यह नाश्ता भारतीयों का पसंदीदा है। घर में मेहमान आएं या चाय के साथ क्विक स्नैक चाहिए, सबसे पहले समोसा ही याद आता है। विदेशी पर्यटक भी इसे बड़े चाव से चखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गली-नुक्कड़ का यह चटपटा स्नैक असल में भारतीय नहीं है? जी हां, समोसे की जड़ें मध्य पूर्व और ईरान में हैं। 10वीं शताब्दी से शुरू यह स्वाद का सफर कई देशों से गुजरकर भारत पहुंचा। आइए, एक स्किल्ड रिपोर्टर की नजर से इसकी पूरी कहानी खोलें।

    प्राचीन जड़ें: मध्य पूर्व का ‘संबुश्क’

    समोसे का इतिहास 10वीं शताब्दी के मध्य पूर्व से जुड़ा है। वहां इसे ‘संबुश्क’ या ‘संबुसा’ कहा जाता था- एक तिकोने आकार का तला हुआ व्यंजन, जिसमें कीमा या सूखे मेवे भरी जाती थीं। ईरानी इतिहासकार अबुल-फजल बेहाकी ने 11वीं सदी की अपनी किताब ‘तारीख-ए-बेहाकी’ में पहली बार इसका जिक्र किया।

    उन्होंने महमूद गजनवी के शाही दरबार में परोसे जाने वाले इस नमकीन का वर्णन किया, जो खस्ता और स्वादिष्ट होता था। शुरू में यह शाही पकवान था, आम लोगों तक नहीं पहुंचा। व्यापारियों और यात्रियों ने इसे मध्य एशिया, अफगानिस्तान होते हुए फैलाया। फारसी शब्द ‘सनबोसाक’ या ‘सम्मोकसा’ से ही ‘समोसा’ बना।

    भारत में एंट्री: 13वीं-14वीं शताब्दी का सफर

    13वीं-14वीं शताब्दी में तुर्क-अफगान शासकों और मध्य एशियाई व्यापारियों के साथ समोसा भारत आया। मोरक्को के यात्री इब्न बतूता ने दिल्ली सल्तनत के मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में ‘संभूसक’ का जिक्र किया। इसमें कीमा, मटर, पिस्ता, बादाम भरकर शरबत के साथ सर्व किया जाता था। अमीर खुसरो जैसे कवियों ने भी इसका उल्लेख किया।

    आइन-ए-अकबरी में मुगल बादशाह अकबर के शाही व्यंजनों में इसे शामिल बताया गया। लेकिन भारत पहुंचने पर इसका स्वरूप बदला। 16वीं सदी में पुर्तगालियों ने आलू लाया, तब से आलू वाली फिलिंग लोकप्रिय हुई।​

    भारतीय तड़का: रूपांतरण और लोकप्रियता

    भारत में समोसा चाय का साथी बन गया। बिहार-बंगाल में इसे ‘सिंघाड़ा’ कहते हैं, जो पानी के फल जैसा दिखता है। यहां के मसालों- जीरा, धनिया, अमचूर- ने इसे अनोखा बना दिया। आज बाजार में आलू समोसे के अलावा पनीर, चिकन, चॉकलेट, मावा, चाउमीन वाले वैरायटी मिलते हैं। भारत में रोज 5-6 करोड़ समोसे बिकते हैं, स्ट्रीट फूड इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा है। बंगाल में मटन-फिश समोसे, मीठे में खोया-चाशनी भरे बनते हैं।

    वैश्विक सफर और सबक

    समोसा सिर्फ भारत का नहीं- अरब में ‘सम्बूसा’, स्पेन में ‘एम्पानाडा’, पूर्वी अफ्रीका में ‘समोसा’ ही कहलाता है। यह ग्लोबलाइजेशन का प्राचीन उदाहरण है, जहां संस्कृतियां खाने से जुड़ती हैं। युवाओं के लिए यह सामान्य ज्ञान का हिस्सा होना चाहिए। जिसे हम अपना समझते हैं, वह यात्रा का नतीजा है। अगली बार समोसा खाते हुए इस सफर को याद करें- 10वीं सदी से गली तक का चटपटा रास्ता!

  • पहले प्यार, फिर ब्लैकमेल… युवकों को जाल में फंसाकर 6 करोड़ की ठगी का सनसनीखेज खुलासा,,

    पहले प्यार, फिर ब्लैकमेल… युवकों को जाल में फंसाकर 6 करोड़ की ठगी का सनसनीखेज खुलासा,,

    पहले प्यार, फिर ब्लैकमेल… युवकों को जाल में फंसाकर 6 करोड़ की ठगी का सनसनीखेज खुलासा,,

    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक महिला ने डेटिंग ऐप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको ब्लैकमेल किया और उनसे करोड़ों रुपये वसूले. पल्लवी सिंह राजपूत नाम की महिला पर आरोप है कि वह डेटिंग ऐप टिंडर और सोशल मीडिया के जरिए पुरुषों से दोस्ती करती थी. बातचीत और मुलाकात के बाद आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के जरिए उनको ब्लैकमेलिंग करती थी. रकम देने से इनकार करने पर रेप और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मुकदमों में उनको फंसाने की धमकी देती थी. इस कथित नेटवर्क के जरिए 5 लोगों को जेल भिजवाने और 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली का दावा किया गया है.

    टिंडर पर दोस्ती, फिर ब्लैकमेलिंग का खेल

    आरोपों है कि पल्लवी सिंह राजपूत डेटिंग ऐप पर पुरुषों से संपर्क करती थी. बातचीत के जरिए पहले दोस्ती और फिर नजदीकी बढ़ाती थी. अपनी कोई न कोई मजबूरी बता कर आर्थिक लाभ उठाती रहती थी. इसके बाद मुलाकात के दौरान फोटो और वीडियो बना लेती थी. पीड़ित पक्ष का दावा है कि इन्हीं फोटो और वीडियो को बाद में ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाया जाता था. वह कथित तौर पर पीड़ितों से बड़ी रकम मांगती थी. पैसे देने से इनकार करने पर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाती थी.

    नोटों के बिस्तर पर सोती थी

    मामले से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में नोटों के बंडल दिखाई दे रहे हैं. एक तस्वीर में महिला के पास असलहा भी नजर आ रहा है. इन तस्वीरों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, तस्वीरों में मौजूद रकम, असलहे और उनके पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.

    5 लोगों को जेल भेजने का आरोप

    पीड़ित पक्ष ने दावा किया है कि महिला की शिकायतों के बाद अब तक खुद पीड़ित समेत कुल 5 लोग जेल जा चुके हैं. कई लोग बदनामी और मुकदमे के डर से पैसे देने को मजबूर हो गए. उन्होंने कहा कि इस पूरे खेल में डेटिंग ऐप के जरिए बनाए गए रिश्ते, आपत्तिजनक सामग्री और कानूनी कार्रवाई की धमकी को कथित तौर पर वसूली के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

    प्रयागराज के अलावा लखनऊ में भी मुकदमों का दावा

    शिकायत के मुताबिक, मामला सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं है. लखनऊ के विभूतिखंड और सुशांत गोल्फ सिटी थानों में भी महिला द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों का जिक्र किया गया है.वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि पल्लवी सिंह राजपूत के खिलाफ 14 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. आरोप है कि अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई को कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया.

    कई नामों से सोशल मीडिया अकाउंट चलाने का आरोप

    यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला सोशल मीडिया पर अलग-अलग नामों से अकाउंट बनाकर लोगों से संपर्क करती थी. इनमें ‘स्वीटी तिवारी’ समेत दूसरे नामों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है. आरोप है कि इन्हीं सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप अकाउंट के जरिए नए लोगों को संपर्क में लाया जाता था. कुल 5 लोग ग्राउंड पर गिरोह को ऑपरेटर करते है. पीड़ित के दावे के मुताबिक, पल्लवी के साथ 2 अन्य लड़कियां और दो और लड़के भी शामिल हैं.अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

    पीड़ितों से करोड़ों रुपये वसूलने का आरोप

    मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं. एक तरफ पीड़ित पक्ष करोड़ों रुपये की वसूली, ब्लैकमेलिंग और फर्जी मुकदमों के जरिए लोगों को फंसाने का आरोप लगा रहा है. वहीं पूरे मामले में पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.