
जनवरी से दिसंबर तक: आखिर अंग्रेजी कैलेंडर के 12 महीनों के नाम कैसे पड़े? हम हर साल इन महीनों के हिसाब से त्योहार, छुट्टियां और जरूरी काम तय करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जनवरी, फरवरी, मार्च और दिसंबर जैसे नाम कहां से आए? दिलचस्प बात यह है कि इन नामों के पीछे प्राचीन रोम के देवताओं, सम्राटों और गिनती का इतिहास छिपा है। इतना ही नहीं, साल के आखिरी चार महीनों के नाम आज भी उस पुराने कैलेंडर की याद दिलाते हैं, जिसमें साल की शुरुआत मार्च से होती थी।
शुरुआत में कैलेंडर में होते थे सिर्फ 10 महीने
आज हम जिस कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, उसकी जड़ें प्राचीन रोम में मिलती हैं। परंपरागत मान्यता के अनुसार, शुरुआती रोमन कैलेंडर में 10 महीने थे और साल की शुरुआत मार्च से होती थी। इस कैलेंडर में कुल 304 दिन गिने जाते थे, जबकि सर्दियों की अवधि को महीनों में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया जाता था।
बाद में रोमन परंपरा में राजा नूमा पोम्पिलियस को जनवरी और फरवरी जोड़ने का श्रेय दिया गया। इस तरह 12 महीनों वाले कैलेंडर की नींव पड़ी। समय के साथ कैलेंडर में बदलाव हुए और जनवरी साल का पहला महीना बन गया।
जनवरी: दो चेहरों वाले देवता के नाम पर पड़ा नाम
जनवरी का नाम रोमन देवता जेनस (Janus) से जुड़ा है। जेनस को दरवाजों, प्रवेश द्वारों, बदलाव और नई शुरुआत का देवता माना जाता था। उनकी मूर्तियों में अक्सर दो चेहरे दिखाए जाते थे। एक अतीत की ओर और दूसरा भविष्य की ओर देखता था।
नए साल की शुरुआत के लिए जनवरी को एक प्रतीकात्मक महत्व मिला। लैटिन भाषा में इस महीने को Ianuarius कहा जाता था, जिससे आगे चलकर अंग्रेजी का January नाम बना।
फरवरी: शुद्धिकरण से जुड़ा है नाम
फरवरी का नाम लैटिन शब्द Februa से संबंधित माना जाता है, जिसका संबंध शुद्धिकरण की रस्मों से था। प्राचीन रोम में इस अवधि के दौरान ऐसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते थे, जिन्हें पुराने दोषों और अशुद्धियों से मुक्ति पाने से जोड़ा जाता था।
फरवरी आज भी साल का सबसे छोटा महीना है। सामान्य वर्षों में इसमें 28 दिन होते हैं, जबकि लीप वर्ष में 29 दिन होते हैं।
मार्च: युद्ध के देवता मार्स के नाम पर
मार्च का नाम रोमन युद्ध देवता मार्स (Mars) के नाम पर रखा गया। पुराने रोमन कैलेंडर में मार्च साल का पहला महीना था। सर्दियां समाप्त होने के बाद इस समय सैन्य अभियानों और कृषि गतिविधियों के शुरू होने का महत्व था।
इसी वजह से मार्च को रोमन समाज में खास स्थान मिला। अंग्रेजी में इस महीने का नाम March बना।
अप्रैल: फूलों के खिलने से जुड़ी कहानी
अप्रैल के नाम की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों के बीच एकमत नहीं है। एक लोकप्रिय व्याख्या इसे लैटिन शब्द Aperire से जोड़ती है, जिसका अर्थ है खोलना। वसंत के मौसम में कलियों के खिलने और प्रकृति के नए रूप में सामने आने के कारण इस व्याख्या को अक्सर अप्रैल से जोड़ा जाता है।
एक दूसरी धारणा इसके नाम को देवी एफ्रोडाइट से संबंधित मानती है। हालांकि, अप्रैल नाम की सटीक उत्पत्ति निश्चित रूप से स्थापित नहीं है।
मई: वृद्धि और उर्वरता की देवी माया
मई का नाम आमतौर पर रोमन देवी माया (Maia) से जोड़ा जाता है। उन्हें वृद्धि, प्रकृति और उर्वरता से संबंधित देवी माना जाता था।
वसंत के दौरान पौधों और फसलों की बढ़ोतरी के संदर्भ में भी इस नाम को देखा जाता है। हालांकि, कुछ विद्वान इसकी उत्पत्ति को दूसरे लैटिन शब्दों से भी जोड़ते हैं।
जून: देवताओं की रानी जूनो के नाम पर
जून का नाम रोमन देवी जूनो (Juno) से जुड़ा माना जाता है। जूनो को देवताओं के राजा जुपिटर की पत्नी और विवाह तथा परिवार की संरक्षक देवी माना जाता था।
इसी धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध के कारण जून को पश्चिमी समाज की कुछ परंपराओं में विवाह के लिए शुभ महीना माना जाता रहा है।
जुलाई: जूलियस सीजर के सम्मान में बदला नाम
जुलाई का पुराना रोमन नाम Quintilis था, जिसका अर्थ पांचवां महीना था। उस समय साल की शुरुआत मार्च से होने के कारण जुलाई वास्तव में पांचवें स्थान पर आता था।
बाद में रोमन शासक जूलियस सीजर के सम्मान में इस महीने का नाम बदलकर Julius कर दिया गया। आगे चलकर यही नाम अंग्रेजी में July बना। जूलियस सीजर ने 45 ईसा पूर्व में जूलियन कैलेंडर लागू करवाया था, जिसने रोमन समय-गणना में महत्वपूर्ण बदलाव किए।
अगस्त: सम्राट ऑगस्टस के नाम पर
अगस्त का पुराना नाम Sextilis था, जिसका अर्थ छठा महीना था। बाद में पहले रोमन सम्राट ऑगस्टस के सम्मान में इसका नाम Augustus रखा गया, जिससे अंग्रेजी का August नाम बना।
एक प्रचलित कहानी के मुताबिक, अगस्त को जुलाई के बराबर 31 दिन देने के लिए फरवरी से एक दिन कम किया गया था। हालांकि, इतिहासकार इस कहानी को लेकर सावधानी बरतते हैं और इसे पूरी तरह प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।
सितंबर से दिसंबर तक: नामों में छिपी है गिनती
सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के नामों में सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये लैटिन भाषा की संख्याओं से जुड़े हैं।
| महीना | लैटिन शब्द | मूल अर्थ |
|---|---|---|
| सितंबर (September) | Septem | सात |
| अक्टूबर (October) | Octo | आठ |
| नवंबर (November) | Novem | नौ |
| दिसंबर (December) | Decem | दस |
जब रोमन कैलेंडर में मार्च से साल शुरू होता था, तब ये महीने क्रमशः सातवें, आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर आते थे। बाद में जनवरी और फरवरी को साल की शुरुआत में शामिल करने के बाद इनकी स्थिति बदल गई, लेकिन पुराने नाम बने रहे।
यही कारण है कि आज सितंबर नौवां, अक्टूबर दसवां, नवंबर ग्यारहवां और दिसंबर बारहवां महीना है, जबकि उनके नामों के मूल अर्थ पुरानी गिनती की याद दिलाते हैं।
आज का कैलेंडर कैसे बना?
समय के साथ जूलियन कैलेंडर में साल की लंबाई को लेकर थोड़ी-सी त्रुटि जमा होने लगी, जिससे लंबे समय में तारीखों और ऋतुओं के बीच अंतर बढ़ने लगा।
इसे सुधारने के लिए 1582 में पोप ग्रेगरी तेरहवें ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया। इसमें

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