दरहाली नदी के बीच चट्टान पर उकेरी देवी-देवताओं जैसी आकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र, देखने पहुंच रहे लोग.

दरहाली नदी के बीच चट्टान पर उकेरी देवी-देवताओं जैसी आकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र, देखने पहुंच रहे लोग.
दरहाली नदी के बीच चट्टान पर उकेरी देवी-देवताओं जैसी आकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र, देखने पहुंच रहे लोग.

राजौरी: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के दरहाल क्षेत्र में बहने वाली दरहाली नदी के बीच एक चट्टान पर उकेरी गईं देवी-देवताओं जैसी आकृतियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। नदी के पानी में डूबी रहने वाली इन आकृतियों को देखने के लिए स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और दूसरे क्षेत्रों से आने वाले लोगों में उत्सुकता देखी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, नदी के बीच स्थित कठोर चट्टान पर कई ऐसी आकृतियां दिखाई देती हैं, जो हिंदू देवी-देवताओं से मिलती-जुलती बताई जा रही हैं। नदी में पानी का स्तर बदलने के साथ ये आकृतियां कभी आंशिक रूप से तो कभी पूरी तरह पानी में डूबी रह सकती हैं। यही वजह है कि इस स्थान को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर बढ़ी उत्सुकता

दरहाली नदी के बीच चट्टान पर दिखाई देने वाली इन आकृतियों ने क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। लोग जानना चाहते हैं कि इन्हें कब और किस उद्देश्य से बनाया गया होगा। हालांकि, अभी तक इनके निर्माण काल, वास्तविक उत्पत्ति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर कोई प्रमाणिक जानकारी सामने नहीं आई है।

पुरातात्विक जांच से मिल सकती है स्पष्ट जानकारी

इन आकृतियों के ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए विशेषज्ञों और संबंधित पुरातत्व विभाग द्वारा अध्ययन किया जाना जरूरी है। वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ये आकृतियां मानव निर्मित हैं या प्राकृतिक संरचना का हिस्सा हैं।

इसके साथ ही, नदी के तेज बहाव और प्राकृतिक कटाव से चट्टान को होने वाले संभावित नुकसान का आकलन करना भी महत्वपूर्ण है। यदि इन आकृतियों का सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व प्रमाणित होता है, तो उनके संरक्षण के लिए उचित कदम उठाए जा सकते हैं।

फिलहाल, दरहाल क्षेत्र में मौजूद इस चट्टान को लेकर लोगों की उत्सुकता बनी हुई है। अब विशेषज्ञों के अध्ययन के बाद ही इन आकृतियों की उत्पत्ति और ऐतिहासिक महत्व के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है। चट्टान पर दिखाई देने वाली आकृतियों की प्राचीनता, उत्पत्ति और ऐतिहासिक महत्व की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

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