संकट में दुनिया, फिर क्यों सस्ता हो रहा सोना? जानें वजह’

संकट में दुनिया, फिर क्यों सस्ता हो रहा सोना? जानें वजह’
संकट में दुनिया, फिर क्यों सस्ता हो रहा सोना? जानें वजह’

युद्ध और तनाव के बीच क्यों गिर रहा है सोना? डॉलर से लेकर ब्याज दरों तक ये हैं बड़ी वजहें

दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद सोने की कीमतों में इन दिनों तेज गिरावट देखने को मिल रही है। आमतौर पर संकट के समय सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में इस पीली धातु पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।

29 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब सात हफ्तों के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। सोमवार को इसमें करीब 4 फीसदी की तेज गिरावट आई थी। भारतीय बाजार में भी सोने की कीमत करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गई।

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? इसके पीछे कई आर्थिक कारण एक साथ काम कर रहे हैं।

1. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई महंगाई की चिंता

मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। 29 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। महंगा तेल दुनिया भर में महंगाई बढ़ा सकता है और इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में नरमी करना मुश्किल हो सकता है।

यही वजह है कि बाजार में अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर नई आशंकाएं पैदा हुई हैं।

2. अमेरिका में ब्याज दरों की चिंता

सोना अपने आप में ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना मजबूत होती है, तो कुछ निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले बॉन्ड और अन्य डॉलर आधारित परिसंपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं।

मौजूदा समय में अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंता और ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण फेड की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार सतर्क है। इसी वजह से सोने पर दबाव देखने को मिल रहा है।

3. डॉलर मजबूत हुआ तो सोने पर पड़ा दबाव

सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत डॉलर में तय होती है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं में सोना अपेक्षाकृत महंगा पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग प्रभावित हो सकती है।

29 सितंबर को डॉलर करीब दो महीने के ऊंचे स्तर के आसपास बना हुआ था, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी ऊंची रही। दोनों चीजों ने सोने की कीमत पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

4. ऊंचे स्तरों के बाद मुनाफावसूली

सोने में लंबे समय तक तेजी के बाद कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा बुक करना शुरू किया। जब बड़ी संख्या में निवेशक एक साथ अपनी पोजीशन बेचते हैं, तो कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।

हाल की गिरावट में यह फैक्टर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

5. युद्ध का मतलब हमेशा सोने में तेजी नहीं होता

यह धारणा आम है कि युद्ध या वैश्विक संकट बढ़ते ही सोने की कीमत जरूर ऊपर जाएगी। लेकिन बाजार में कई आर्थिक कारक एक साथ काम करते हैं।

इस समय भू-राजनीतिक तनाव से तेल महंगा हो रहा है। महंगा तेल महंगाई की चिंता बढ़ा रहा है और इससे अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ रही है। साथ ही डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत हैं। इन परिस्थितियों में संकट के बावजूद सोने की कीमत पर दबाव बन सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सोने की दिशा पर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमत और मध्य पूर्व की स्थिति जैसे कई कारकों का असर पड़ सकता है।

इसलिए मौजूदा गिरावट को केवल युद्ध या तनाव के आधार पर समझना सही नहीं होगा। सोने की कीमत पर इस समय महंगाई, ब्याज दर, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की मुनाफावसूली जैसे कई कारकों का संयुक्त असर दिखाई दे रहा है।.

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