क्या संक्रमण से भी हो सकता है कैंसर? HPV और H. pylori को लेकर सामने आई अहम जानकारी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

क्या संक्रमण से भी हो सकता है कैंसर? HPV और H. pylori को लेकर सामने आई अहम जानकारी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
क्या संक्रमण से भी हो सकता है कैंसर? HPV और H. pylori को लेकर सामने आई अहम जानकारी, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

कैंसर का नाम आते ही अक्सर लोगों के मन में धूम्रपान, तंबाकू, खराब खान-पान, मोटापा, शराब या जेनेटिक कारणों का ख्याल आता है। लेकिन कैंसर के कुछ मामलों में लंबे समय तक बने रहने वाले संक्रमण भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। खास तौर पर कुछ वायरस और बैक्टीरिया ऐसे हैं, जिनका लंबे समय तक शरीर में रहना कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है।

‘द लैंसेट ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित एक अध्ययन में संक्रमण से जुड़े कैंसर के वैश्विक बोझ का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में दुनियाभर में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे। भारत में ऐसे मामलों की अनुमानित संख्या करीब 1.9 लाख बताई गई है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को HPV, H. pylori या कोई अन्य संक्रमण होने पर उसे कैंसर होना तय है। कैंसर का विकास कई कारकों पर निर्भर करता है और संक्रमण के मामले में भी उसका प्रकार, संक्रमण की अवधि तथा व्यक्ति की अन्य स्वास्थ्य स्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं।

HPV भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर का बड़ा कारण

भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी HPV की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। HPV के कुछ हाई-रिस्क प्रकार सर्वाइकल कैंसर के विकास से जुड़े हैं।

HPV संक्रमण आम है और कई मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इसे खुद नियंत्रित कर लेती है। लेकिन कुछ मामलों में हाई-रिस्क HPV संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है और गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में बदलाव का कारण बन सकता है। समय के साथ यही बदलाव कुछ महिलाओं में कैंसर का रूप ले सकते हैं।

HPV से जुड़े कैंसर के खतरे को कम करने के लिए टीकाकरण और नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केवल वैक्सीन ही नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार जांच और असामान्य परिणाम आने पर समय पर इलाज भी जरूरी है।

H. pylori से पेट के कैंसर का खतरा

Helicobacter pylori यानी H. pylori एक बैक्टीरिया है जो पेट में संक्रमण पैदा कर सकता है। लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण पेट की अंदरूनी परत में सूजन और अन्य बदलावों से जुड़ा हो सकता है।

अध्ययन में 2024 के दौरान दुनियाभर में करीब 7.6 लाख कैंसर मामलों को H. pylori संक्रमण से संबंधित बताया गया है। इसका संबंध मुख्य रूप से पेट के कैंसर से है।

हालांकि H. pylori संक्रमण होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से पेट का कैंसर होगा। लेकिन कुछ लोगों में लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए जिन लोगों में डॉक्टर संक्रमण की जांच या इलाज की सलाह दें, उनके लिए उचित चिकित्सकीय देखभाल महत्वपूर्ण हो सकती है।

दुनिया में ये पांच संक्रमण कैंसर से सबसे ज्यादा जुड़े

अध्ययन में कई संक्रमण पैदा करने वाले एजेंट्स का आकलन किया गया। इनमें पांच प्रमुख संक्रमणों को संक्रमण से जुड़े वैश्विक कैंसर मामलों के बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार पाया गया।

  • H. pylori: करीब 7.6 लाख कैंसर मामले
  • HPV: करीब 7.5 लाख मामले
  • हेपेटाइटिस B वायरस: करीब 3.6 लाख मामले
  • Epstein-Barr virus (EBV): करीब 2.6 लाख मामले
  • हेपेटाइटिस C वायरस: करीब 1.6 लाख मामले

रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ एशिया सहित निम्न और मध्यम आय वाले देशों में काफी अधिक है। ऐसे में टीकाकरण, संक्रमण की पहचान और समय पर इलाज कैंसर की रोकथाम की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हेपेटाइटिस B और C भी बढ़ा सकते हैं लिवर कैंसर का जोखिम

लंबे समय तक रहने वाला हेपेटाइटिस B या हेपेटाइटिस C संक्रमण लिवर कैंसर, विशेष रूप से हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा, के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है।

हेपेटाइटिस B के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है, इसलिए टीकाकरण संक्रमण से बचाव का महत्वपूर्ण तरीका है। दूसरी ओर, हेपेटाइटिस B और C की समय पर जांच भी जरूरी है, क्योंकि कई लोगों में संक्रमण लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमण की पहचान होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार निगरानी और उपचार किया जाना चाहिए।

सिर्फ वैक्सीन नहीं, स्क्रीनिंग भी जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण से जुड़े कैंसर का बोझ कम करने के लिए कई स्तरों पर काम करने की जरूरत है। इनमें HPV और हेपेटाइटिस B का टीकाकरण, जरूरत के अनुसार H. pylori तथा हेपेटाइटिस B और C की जांच, संक्रमण का उचित इलाज और कैंसर स्क्रीनिंग शामिल हैं।

सर्वाइकल कैंसर के मामले में नियमित स्क्रीनिंग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआती चरण में कैंसर से पहले होने वाले कुछ बदलावों की पहचान की जा सकती है और समय पर उपचार से आगे के जोखिम को कम किया जा सकता है।

क्या हर संक्रमण कैंसर का कारण बनता है?

नहीं। यह समझना बहुत जरूरी है कि हर वायरस, बैक्टीरिया या संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनता।

वैज्ञानिक शोध में केवल कुछ विशेष संक्रमणों और कुछ खास प्रकार के कैंसर के बीच संबंध स्थापित किया गया है। इसके अलावा संक्रमण होने के बाद कैंसर विकसित होगा या नहीं, यह व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली, संक्रमण की अवधि, अन्य जोखिम कारकों और कई जैविक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

इसलिए किसी संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से सही सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर उपचार कराना अधिक महत्वपूर्ण है।

2050 तक बढ़ सकता है कैंसर का वैश्विक बोझ

अध्ययन में दुनिया में कैंसर के नए मामलों में आने वाले दशकों में बड़ी वृद्धि का अनुमान भी सामने रखा गया है। 2024 में करीब 2 करोड़ नए कैंसर मामलों से यह संख्या 2050 तक लगभग 3.5 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

इस वृद्धि में मुख्य

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