UN में स्थायी सीट मिल: जाए तो क्या बदल जाएगा? जानिए भारत की वैश्विक भूमिका पर कितना पड़ेगा असर.

UN में स्थायी सीट मिल: जाए तो क्या बदल जाएगा? जानिए भारत की वैश्विक भूमिका पर कितना पड़ेगा असर.
UN में स्थायी सीट मिल: जाए तो क्या बदल जाएगा? जानिए भारत की वैश्विक भूमिका पर कितना पड़ेगा असर.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में स्थायी सदस्यता भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रमुख कूटनीतिक मांगों में शामिल है। सितंबर 2026 में रूस ने एक बार फिर भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बेहतर प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर दिया।

फिलहाल सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन पांच स्थायी सदस्य हैं, जबकि 10 सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर भविष्य में सुरक्षा परिषद का विस्तार होता है और भारत को स्थायी सीट मिलती है, तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका में क्या बदलाव आ सकता है?

सबसे बड़ा बदलाव क्या होगा?

स्थायी सदस्य बनने से भारत को सुरक्षा परिषद में लगातार मौजूद रहने का अधिकार मिलेगा। अभी भारत जब भी गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना जाता है, तो उसका कार्यकाल दो साल का होता है। स्थायी सदस्यता की स्थिति में बार-बार चुनाव लड़कर परिषद में लौटने की जरूरत नहीं होगी।

सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर विचार करती है। इसलिए स्थायी सदस्य के तौर पर भारत को इन चर्चाओं और निर्णय प्रक्रियाओं में लगातार भाग लेने का अवसर मिलेगा।

क्या भारत को वीटो पावर भी मिलेगी?

यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सुरक्षा परिषद के सुधार का अंतिम मॉडल क्या तय करता है।

मौजूदा व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है। किसी गैर-प्रक्रियात्मक प्रस्ताव को पारित करने के लिए कम से कम नौ वोटों के साथ स्थायी सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। अगर पांच स्थायी सदस्यों में से कोई एक नकारात्मक वोट देता है, तो प्रस्ताव रुक सकता है।

भारत की वर्तमान स्थिति यह है कि अगर उसे नया स्थायी सदस्य बनाया जाता है तो नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा स्थायी सदस्यों के समान अधिकार और जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। भारत ने सुरक्षा परिषद सुधार की वार्ताओं में नए स्थायी सदस्यों के लिए वीटो के मुद्दे पर यही रुख रखा है।

हालांकि यह अभी तय व्यवस्था नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के सुधार को लेकर अलग-अलग देशों और समूहों के बीच मतभेद हैं। कुछ देश नए स्थायी सदस्यों को वीटो देने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ प्रस्ताव स्थायी सदस्यता के विस्तार का ही विरोध करते हैं।

वैश्विक फैसलों में भारत की लगातार मौजूदगी

स्थायी सदस्यता से भारत को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय तक लगातार अपनी स्थिति रखने का अवसर मिलेगा।

युद्ध, संघर्ष, शांति स्थापना और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सुरक्षा परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे मामलों पर चर्चा के दौरान भारत की मौजूदगी किसी दो साल के कार्यकाल तक सीमित नहीं रहेगी।

इससे भारत को बहुपक्षीय कूटनीति में अपनी प्राथमिकताओं को लगातार सामने रखने का अधिक संस्थागत अवसर मिल सकता है।

ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाने का मंच

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने की बात करता रहा है।

सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलने की स्थिति में भारत एशिया और व्यापक ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को परिषद की स्थायी सदस्यता के जरिए उठाने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि इसे केवल भारत के प्रतिनिधित्व के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। सुरक्षा परिषद सुधार में अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका समेत विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव मौजूद हैं। G4 यानी भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील भी सुरक्षा परिषद के विस्तार की वकालत करते हैं।

भारत की कूटनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ सकता है?

स्थायी सदस्यता भारत को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय सुरक्षा संस्थाओं में से एक में स्थायी स्थान देगी।

इससे भारत को दूसरे देशों के साथ बातचीत, गठबंधन निर्माण और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी स्थिति रखने के लिए एक स्थायी संस्थागत मंच मिलेगा।

हालांकि इसका यह मतलब नहीं होगा कि सुरक्षा परिषद का हर फैसला भारत के पक्ष में होगा या भारत अकेले किसी अंतरराष्ट्रीय निर्णय को नियंत्रित कर सकेगा। सुरक्षा परिषद की व्यवस्था सामूहिक मतदान और दूसरे स्थायी तथा निर्वाचित सदस्यों के रुख पर भी निर्भर करती है।

क्या इससे NSG की सदस्यता पक्की हो जाएगी?

स्थायी UNSC सदस्यता और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानी NSG की सदस्यता दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलने से भारत की NSG सदस्यता अपने आप सुनिश्चित नहीं होगी।

हां, स्थायी सदस्यता से भारत की बहुपक्षीय कूटनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है और इससे अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत के लिए उसका संस्थागत प्रभाव बढ़ सकता है। लेकिन NSG में सदस्यता का फैसला अपने अलग नियमों और सदस्य देशों की सहमति से जुड़ा है।

स्थायी सीट के साथ बढ़ेंगी जिम्मेदारियां भी

सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता सिर्फ अधिक अधिकारों का मामला नहीं होगी। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े जटिल मामलों पर लगातार जिम्मेदारी भी आएगी।

संघर्षों, प्रतिबंधों, शांति अभियानों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावों पर भारत को लगातार अपना रुख तय करना होगा। वीटो का अधिकार मिलने की स्थिति में यह जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो सकती है।

अभी कहां खड़ा है मामला?

भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर रूस सहित कई देशों ने समर्थन व्यक्त किया है, लेकिन सुरक्षा परिषद की संरचना बदलना एक जटिल अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति और चार्टर में आवश्यक बदलावों की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत को कब स्थायी सीट मिलेगी या नए स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार किस रूप में दिया जाएगा। फिलहाल सुरक्षा परिषद सुधार पर संयुक्त राष्ट्र में बातचीत जारी है।

अगर भारत को भविष्य में स्थायी सदस्यता मिलती है, तो सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव यह होगा कि वह सुरक्षा परिषद की निर्णय प्रक्रिया में स्थायी रूप से शामिल होगा। वीटो सहित उसके अधिकारों की अंतिम स्थिति सुरक्षा परिषद सुधार के जिस मॉडल पर सदस्य देश सहमत होंगे, उसी पर निर्भर करेगी।

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