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  • रसिक दुलारी शरण की ‘मौत’ से पहले का CCTV आया सामने, छत पर कुछ देर बैठे फिर अचानक बाउंड्री की ओर बढ़े’

    रसिक दुलारी शरण की ‘मौत’ से पहले का CCTV आया सामने, छत पर कुछ देर बैठे फिर अचानक बाउंड्री की ओर बढ़े’

    रसिक दुलारी शरण की ‘मौत’ से पहले का CCTV आया सामने, छत पर कुछ देर बैठे फिर अचानक बाउंड्री की ओर बढ़े’

    वृंदावन: प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के मामले में घटना से पहले का बताया जा रहा CCTV फुटेज सामने आया है। फुटेज में एक व्यक्ति चार मंजिला इमारत की छत पर दिखाई दे रहा है, जिसे रसिक दुलारी शरण बताया जा रहा है। हालांकि, सामने आए CCTV वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    बताया जा रहा है कि फुटेज में व्यक्ति कुछ समय तक छत की बाउंड्री के पास बैठा दिखाई देता है। इसके बाद वह वहीं लेट जाता है। कुछ देर बाद वह अचानक उठता है और बाउंड्री की तरफ तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई देता है। इसके बाद वह नीचे गिरता नजर आता है।

    घटना के बाद छत की ओर दौड़ता दिखा व्यक्ति

    CCTV फुटेज में घटना के तुरंत बाद एक अन्य व्यक्ति छत की तरफ से आता दिखाई देता है। वह बाउंड्री के पास पहुंचकर नीचे की ओर झांकता नजर आता है। फुटेज सामने आने के बाद घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    हालांकि, केवल CCTV फुटेज के आधार पर मौत के पीछे की पूरी वजह तय नहीं की जा सकती। पुलिस मामले में CCTV के अलावा मोबाइल फोन और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में क्या सामने आया?

    मथुरा पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला चार मंजिला आवास से खुद नीचे गिरने का प्रतीत हो रहा है। पुलिस के मुताबिक, घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है।

    मृतक की पहचान दीपक लोधी के रूप में हुई है। वह मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे और वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के पास साधक के रूप में रह रहे थे।

    पुलिस को चार मंजिला साधक आवास से एक व्यक्ति के नीचे गिरने की सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

    मोबाइल फोन की भी जांच

    जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को जुटाया है। मृतक के मोबाइल फोन को भी फॉरेंसिक जांच के लिए देखा जा रहा है, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिल सके।

    दीपक लोधी के परिवार के सदस्य भी जबलपुर से वृंदावन पहुंचे हैं। परिवार की ओर से पुलिस को एक प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। पुलिस इसी आधार पर मामले की आगे जांच कर रही है।

    मौत से पहले क्या हुआ था, जांच में जुटी पुलिस

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले दीपक लोधी कहां थे, उनके मोबाइल पर किससे बातचीत हुई और उस समय वहां कौन-कौन मौजूद था। CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को आपस में मिलाकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    फिलहाल पुलिस ने मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है। मौत की वास्तविक परिस्थितियां जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।

  • सरपंच की हत्याः अवैध संबंध के शक में 7 आरोपियों ने बेरहमी से मार डाला, फिर रात भर जंगल में रखे लाश |

    सरपंच की हत्याः अवैध संबंध के शक में 7 आरोपियों ने बेरहमी से मार डाला, फिर रात भर जंगल में रखे लाश |

    सरपंच की हत्याः अवैध संबंध के शक में 7 आरोपियों ने बेरहमी से मार डाला, फिर रात भर जंगल में रखे लाश |

    कोंडागांव। जिले के मोहपाल सरपंच मंगल सिंह मरकाम की हत्याकांड को पुलिस ने सुलझा लिया है। मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने मिलकर सरपंच को बेरहमी से हत्या कर दी थी। हत्या के बाद शव को जंगल में रात भर रखे रहे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से डंडा और लोहे का राॅड बरामद कर लिया है।

    दरअसल, 30 सितंबर की सुबह 8:30 बजे सीएचसी फरसगांव से थाना बड़ेडोंगर पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम मोहपाल के वर्तमान सरपंच मंगल सिंह मरकाम की अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मारपीट कर हत्या कर दी गई है। इस जानकारी पर पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा के निर्देश पर एफएसएल, साइबर, थाना बड़ेडोंगर और रक्षित केंद्र कोण्डागांव के पुलिस बल को घटना स्थल रवाना किया गया।

    इसलिए बनाई गई थी हत्या की योजना

    जाँच के दौरान संदेही मिट्ठू राम नेताम से गवाहों के समक्ष पूछताछ की गई, जिसमें उसने बताया कि सरपंच मंगल सिंह मरकाम का आरोपी परिवार की एक महिला से प्रेम प्रसंग का संदेह था। इसी रंजिश के चलते मिट्ठू राम नेताम, श्रवण कुमार नेताम, अमित कुमार नेताम, लखन नेताम, नवलू वट्टी, राकेश मण्डावी व प्रभु लाल नेताम द्वारा पूर्व नियोजित तरीके से घटना को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। 29 सितंबर को सरपंच के आने की सूचना मिलने पर सभी आरोपी पगडंडी मार्ग व नदी किनारे जंगल में घात लगाकर बैठे थे। सरपंच को देखते ही पकड़कर हाथ, थप्पड़, चप्पल, लोहे के राड व डण्डे से मारपीट की।

    अस्पताल लाने से पहले मौत

    आरोपियों द्वारा सरपंच मंगल सिंह मरकाम के हाथ बांधकर मारपीट की गई और घटनास्थल से करीब 60 मीटर दूर ले जाकर कंबल से ढंक दिया गया। इसके बाद आरोपी सड़क किनारे आग जलाकर रातभर वहीँ थे। सुबह करीब 5 से 5:30 बजे के बीच मौके से फरार हो गए।

    परिजनों द्वारा घायल अवस्था में सरपंच को उपचार हेतु सीएचसी फरसगांव ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में थाना बड़ेडोंगर में धारा 103(1) बीएनएस कायम कर विवेचना में लिया गया तथा विवेचना के दौरान धारा 61(2)(क), 191(2) बीएनएस जोड़ी गई। आरोपी मिट्ठू राम नेताम के मेमोरण्डम कथन के आधार पर डण्डा एवं लोहे का राड जब्त किया गया।

    सातों आरोपी गिरफ्तार

    प्रकरण में आरोपी मिट्ठू राम नेताम (45), श्रवण कुमार नेताम (20), अमित कुमार नेताम (20), लखन नेताम (25), नवलू वट्टी (28), राकेश मण्डावी (21) व प्रभु लाल नेताम (20) सभी निवासी ग्राम मोहपाल, थाना बड़ेडोंगर, जिला कोण्डागांव को आज 1 अक्टूबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर पेश किया गया।

    इनकी रही अहम भूमिका

    आरोपियों की गिरफ्तारी एवं प्रकरण की विवेचना में थाना प्रभारी निरी. राजकुमार सोरी, सउनि जगजीत कवाची, प्र0आर0 845 श्रवण मण्डावी, प्र0आर0 106 राजेन्द्र कुठूर, आर0 920 अनिल मरकाम, आर0 957 राजेन्द्र नेताम, आर0 903 बुधमन नेताम, आर0 115 कुंजबिहारी पुजारी एवं सायबर टीम कोण्डागांव के प्र0आर0 62 अजय बघेल, आर0 808 बीजूराम यादव, आर0 800 चंदन यादव तथा रक्षित केन्द्र कोण्डागांव के बल प्र0आर0 22 बंशीराम मरकाम, प्र0आर0 37 सनत नेताम, आर0 181 दलित कुर्रे का विशेष योगदान रहा।

  • किडनी पर दबाव: बढ़ा सकते हैं ये 4 फूड्स, साइलेंट किलर इन फूड्स को कैसे करें कंट्रोल, डॉक्टर से जानिए..

    किडनी पर दबाव: बढ़ा सकते हैं ये 4 फूड्स, साइलेंट किलर इन फूड्स को कैसे करें कंट्रोल, डॉक्टर से जानिए..

    किडनी पर दबाव: बढ़ा सकते हैं ये 4 फूड्स, साइलेंट किलर इन फूड्स को कैसे करें कंट्रोल, डॉक्टर से जानिए..

    गलत खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल का सीधा असर हमारी किडनी की सेहत पर पड़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जो धीमी गति से किडनी पर दबाव बढ़ाते हैं और ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करते हैं। समय रहते इनकी सही मात्रा और परहेज की जानकारी होना बेहद जरूरी है। किडनी शरीर के उन खास अंगों में शामिल है, जिनके बिना शरीर के सामान्य कामकाज की कल्पना करना मुश्किल है। शरीर में मौजूद दो किडनी लगातार खून को फिल्टर करने का काम करती हैं। इनके जरिए यूरिया और दूसरे अपशिष्ट पदार्थ पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकलते हैं। इसके अलावा किडनी शरीर में पानी, सोडियम और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण से जुड़े कुछ हार्मोनल कामों में भी किडनी की भूमिका अहम है।

    किडनी स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रगति गुप्ता के मुताबिक किडनी को हेल्दी रखने के लिए सिर्फ पर्याप्त पानी पीना ही जरूरी नहीं, बल्कि खान-पान पर भी ध्यान देना जरूरी है। लंबे समय तक ज्यादा नमक, चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे जैसी स्थितियों का जोखिम बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर किडनी की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। जरूरत से ज्यादा सफेद दिखने वाले कुछ फूड्स का सेवन किडनी की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए डाइट में सीमित रखना जरूरी है। आइए जानते हैं कि ये सफेद फूड्स कैसे किडनी की सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं और इन्हें कैसे करें कंट्रोल।

    सफेद नमक का ज्यादा सेवन साइलेंट किलर

    नमक में मौजूद सोडियम शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है। ज्यादा सोडियम लेने से शरीर में पानी रुक सकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने पर किडनी की रक्त वाहिकाओं और फिल्ट्रेशन सिस्टम पर असर पड़ सकता है। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या शरीर में सूजन की समस्या है, उन्हें खास तौर पर नमक की मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। खाने में अतिरिक्त नमक डालने की आदत कम करने के साथ पैकेज्ड और अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन भी सीमित करना बेहतर है।

    सफेद चीनी भी करती है किडनी पर असर

    चीनी का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से वजन बढ़ने और ब्लड शुगर हाई होने का खतरा रहता है। लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। चाय, कॉफी और दूसरी चीजों में अतिरिक्त चीनी की मात्रा कम करना बेहद जरूरी है। अगर आपको मीठा खाने की क्रेविंग होती है तो फलों का सेवन करें। शहद और खजूर भी शुगर के स्रोत हैं, लेकिन डायबिटीज या किडनी की बीमारी वाले लोगों को इन्हें भी सीमित मात्रा में लेना चाहिए।

    मैदा बढ़ा सकता है मेटाबॉलिक जोखिम

    मैदा रिफाइंड अनाज से तैयार होता है और इसमें साबुत अनाज की तुलना में फाइबर काफी कम होता है। मैदे से बनी चीजें जैसे बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, पिज्जा बेस और कई तरह के बेकरी प्रोडक्ट्स अक्सर कैलोरी, नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट की मात्रा ज्यादा होती हैं। इन चीजों का नियमित और ज्यादा सेवन वजन बढ़ने, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। ये सभी कारक लंबे समय में किडनी की सेहत पर असर डाल सकते हैं। इसलिए डाइट में साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना बेहतर है। किडनी के मरीज दूध, पनीर और चीज का सेवन भी सीमित करें।

    किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?

    किडनी की सेहत में सुधार करना चाहते हैं तो किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह ‘जहर’ मानने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करें। नमक और अतिरिक्त चीनी का सेवन सीमित करें, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से बचें, वजन को कंट्रोल करें, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों की डाइट उनकी बीमारी की स्थिति और मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार अलग हो सकती है। किसी भी खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट से पूरी तरह हटाने या शामिल करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें। यह जानकारी किसी चिकित्सकीय जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।

  • सुबह क्यों नहीं करते ‘श्राद्ध? दोपहर के इस समय को पितरों के लिए माना गया है खास.

    सुबह क्यों नहीं करते ‘श्राद्ध? दोपहर के इस समय को पितरों के लिए माना गया है खास.

    सुबह क्यों नहीं करते ‘श्राद्ध? दोपहर के इस समय को पितरों के लिए माना गया है खास.

    Pitru Paksha 2026: पितरों को श्रद्धांजलि देने और उन्हें याद करने का समय है पितृ पक्ष, जो 27 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है. पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान को लेकर समय का विशेष महत्व बताया गया है.

    आमतौर पर देवी-देवताओं की पूजा सुबह के समय की जाती है लेकिन पितरों के निमित्त किया जाने वाला श्राद्ध अपराह्न काल में करने का विधान है. आखिर क्यों श्राद्ध दोपहर के समय ही किया जाता है आइए जानते हैं.

    सुबह श्राद्ध क्यों नहीं किया जाता?

    श्राद्ध का उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और अर्पण करना है. वीरमित्रोदय में स्पष्ट रूप से कहा गया है. पूर्वाह्णे दैविकं कार्यमपराह्णे तु पैतृकम् अर्थात पूर्वाह्न में देवकार्य और अपराह्न में पितृ कार्य को प्रमुख माना गया है.

    चूंकि सुबह का समय देवों का होता है, क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त को देवताओं का समय माना गया है. सुबह सूर्योदय के समय सभी दैवीय शक्तियां जागृत हो जाती हैं. भगवान की भक्ति के लिए जरूरी है कि मन एकाग्र रहे ताकि प्रभु में पूरा ध्यान लगाया जा सके. जागने के बाद हमारा मन शांत और स्थिर रहता है, इसलिए सुबह के समय देव पूजन को महत्व दिया है न कि पितृ पूजन.

    श्राद्ध के लिए दोपहर का समय ही क्यों श्रेष्ठ

    धर्मशास्त्रीय परंपरा में दिन के जिस हिस्से को पितृ कर्म के लिए उपयुक्त माना गया है, उसमें कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल प्रमुख हैं. दरअसल इस समय सूर्य की स्थिति और किरणों का प्रभाव ऐसा होता है कि पितरों तक भोजन और तर्पण का अंश ठीक से पहुंचता है इसलिए दोपहर का समय पितृ पूजन के लिए श्रेष्ठ है. पितृ पक्ष में सुबह स्नान, संकल्प और श्राद्ध की तैयारी की जा सकती है लेकिन श्राद्ध अपराह्न में किया जाता है.

    क्या है कुतुप मुहूर्त?

    दिन को 15 मुहूर्तों में विभाजित करने पर आठवां मुहूर्त कुतुप कहलाता है. शास्त्रीय ग्रंथों में इसे पितृकर्म के लिए विशेष महत्व प्राप्त है.

    दिवसस्याष्टमे भागे मन्दीमवति भास्करःस कालः कुतपो ज्ञेयः पितॄणामन्नमक्षयम्॥” अर्थात दिन के आठवें भाग में सूर्य की स्थिति वाला समय कुतुप कहलाता है और इसे पितरों के लिए अन्न अर्पण के संदर्भ में विशेष माना गया है.

    रौहिण मुहूर्त क्या है?

    कुतुप के बाद आने वाला नौवां मुहूर्त रौहिण कहलाता है. स्कंद पुराण के श्राद्धविधि प्रसंग में भी कहा गया है—

    अष्टमो यो मुहूर्तश्च कुतपः स निगद्यते.नवमो रौहिणः प्रोक्त इति श्राद्धविदो विदुः॥ अर्थात आठवां मुहूर्त कुतुप और नौवां रौहिण कहलाता है.

    अपराह्न काल क्यों है खास?

    अपराह्न दिन का वह भाग है जो मध्याह्न के बाद आता है. श्राद्ध के लिए इसे व्यापक समय माना जाता है. कुतुप और रौहिण इसी आसपास के विशेष मुहूर्त हैं. यदि किसी कारण से कुतुप में श्राद्ध आरंभ न हो पाए तो परंपरा में अपराह्न काल के भीतर श्राद्ध करने का विधान मिलता है.

  • बेटी को जंक ‘फूड’ से दूर रखने के लिए पिता का अजीब जुगाड़, नकली अल्ट्रासाउंड में दिखाए पेट के कीड़े तो डर गई बच्ची.

    बेटी को जंक ‘फूड’ से दूर रखने के लिए पिता का अजीब जुगाड़, नकली अल्ट्रासाउंड में दिखाए पेट के कीड़े तो डर गई बच्ची.

    बेटी को जंक ‘फूड’ से दूर रखने के लिए पिता का अजीब जुगाड़, नकली अल्ट्रासाउंड में दिखाए पेट के कीड़े तो डर गई बच्ची.

    बच्चों को जंक फूड और मोबाइल की आदत से दूर रखना आजकल माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बच्चे बार-बार पिज्जा, बर्गर, चिप्स और दूसरी फास्ट फूड चीजों की मांग करते हैं, वहीं मोबाइल फोन भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में कुछ माता-पिता बच्चों को इन आदतों से बचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में पिता ने अपनी बेटी को जंक फूड से दूर रखने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर लोग हैरान हैं।

    पिता ने बेटी को दिखाई पेट में कीड़ों की नकली तस्वीर

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में एक पिता अपनी बेटी को जंक फूड खाने से रोकने के लिए नकली अल्ट्रासाउंड का सहारा लेता नजर आ रहा है। वीडियो में पिता लैपटॉप और माउस की मदद से बच्ची के पेट का कथित अल्ट्रासाउंड दिखाता है।

    स्क्रीन पर बच्ची के पेट के अंदर कीड़े दिखाई देने का नाटक किया जाता है। जैसे ही बच्ची यह देखती है, वह घबरा जाती है और रोते हुए अपनी मां के पास चली जाती है। इसके बाद बच्ची जंक फूड न खाने की बात कहती नजर आती है।

    वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ तो लोगों के बीच इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी। कुछ लोगों ने पिता के इस तरीके को मजेदार और असरदार बताया, जबकि कई यूजर्स ने बच्चों को डराकर समझाने के तरीके पर सवाल उठाए।

    एक यूजर ने इस तरह की परवरिश पर चिंता जताते हुए कहा कि बच्चों को झूठ बोलकर किसी चीज से दूर करने की कोशिश सही तरीका नहीं है। बच्चों को वही सिखाना बेहतर है जिसे वे आगे चलकर सही और गलत के रूप में समझ सकें।

    बच्चों को डराकर मोबाइल से दूर करने का मामला भी आया था सामने

    ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के खटीमा स्थित आदर्श इंडिया मॉन्टेसरी स्कूल से भी सामने आया था। यहां बच्चों को मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले नुकसान समझाने के लिए एक डरावनी एक्टिविटी कराई गई थी।

    बताया गया कि एक बच्चे की आंखों पर पट्टी बांधी गई और लाल रंग का इस्तेमाल कर ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे लगे कि उसकी आंखों को नुकसान पहुंचा है। बच्चों से यह भी कहलवाया गया कि ज्यादा फोन देखने की वजह से डॉक्टर ने उसकी आंखें निकाल दी हैं।

    इस एक्टिविटी को देखकर कई छोटे बच्चे डर गए थे। कुछ बच्चों के रोने और चीखने की बात भी सामने आई। हालांकि, इस गतिविधि के बाद बच्चों ने मोबाइल फोन से दूर रहने का वादा किया, लेकिन सोशल मीडिया पर स्कूल के इस तरीके की आलोचना भी हुई।

    क्या डराकर बच्चों की आदत बदली जा सकती है?

    बच्चों को जंक फूड और मोबाइल की लत से दूर रखना जरूरी हो सकता है, लेकिन इसके लिए अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर माता-पिता और शिक्षकों के बीच बहस जारी रहती है। कुछ लोग मानते हैं कि डर का असर तुरंत दिखाई दे सकता है, जबकि दूसरे लोगों का कहना है कि बच्चों को किसी आदत के नुकसान समझाने के लिए उन्हें डराने या झूठ बोलने के बजाय बातचीत और सही जानकारी का सहारा लेना चाहिए।

    वायरल वीडियो ने इसी सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है कि बच्चों की गलत आदत छुड़ाने के लिए डर दिखाना कितना सही तरीका है और इसका उनके मन पर लंबे समय में क्या असर पड़ सकता है।

     

     

     

  • थाने के सामने से ‘महिला’ को पिस्टल दिखाकर ले जाने का आरोप, टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल बताए जा रहे युवक पर केस:

    थाने के सामने से ‘महिला’ को पिस्टल दिखाकर ले जाने का आरोप, टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल बताए जा रहे युवक पर केस:

    थाने के सामने से ‘महिला’ को पिस्टल दिखाकर ले जाने का आरोप, टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल बताए जा रहे युवक पर केस:

    मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से महिला के कथित अपहरण का एक गंभीर मामला सामने आया है। ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में एक महिला को पिस्टल के बल पर जबरन कार में बैठाकर ले जाने का आरोप उसके देवर पर लगा है। घटना थाना परिसर के सामने स्थित दुर्गा मंदिर के पास की बताई जा रही है। महिला के पति ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए पुलिस से पत्नी की बरामदगी की गुहार लगाई है।

    पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है और महिला को तलाशने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है।

    दुर्गा मंदिर के पास पहुंची थी महिला

    शिकायत के अनुसार, घटना 27 सितंबर की शाम करीब 4:30 बजे हुई। महिला अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ ब्रह्मपुरा स्थित दुर्गा मंदिर गई थी। इसी दौरान वहां एक सफेद रंग की कार आकर रुकी। आरोप है कि कार से सुमित कुमार बाहर आया और हथियार दिखाकर महिला को अपने साथ ले जाने लगा।

    परिवार के लोगों और आसपास मौजूद लोगों ने कथित तौर पर इसका विरोध किया और शोर मचाया। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी महिला को जबरन कार में बैठाकर वहां से निकल गया।

    महिला के पति ने लगाए धमकी देने के आरोप

    महिला के पति अशोक साह ने पुलिस को दिए आवेदन में दावा किया है कि घटना के बाद आरोपी ने उन्हें फोन कर पुलिस से शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, बच्चों को स्कूल से उठाकर जान से मारने की धमकी भी दी गई।

    परिवार का कहना है कि धमकी के कारण वे बेहद डरे हुए हैं और बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। पति के मुताबिक, आरोपी के डर के कारण उनका परिवार पहले से ही अपना घर छोड़कर सिकंदरपुर इलाके में किराए के मकान में रह रहा था।

    आरोपी के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले होने का दावा

    शिकायत में सुमित कुमार को अहियापुर इलाके का रहने वाला बताया गया है। परिवार का दावा है कि उसका नाम अहियापुर थाने की टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल रहा है। यह भी आरोप लगाया गया है कि वह करीब तीन साल जेल में रहने के बाद लगभग डेढ़ महीने पहले जमानत पर बाहर आया था।

    हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    पत्नी को गलत नीयत से ले जाने की आशंका

    महिला के पति ने अपने आवेदन में आरोपी पर पहले भी लड़कियों को कथित तौर पर जबरन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने, अश्लील वीडियो बनाने और ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि उनकी पत्नी को भी गलत नीयत से ले जाया गया है।

    पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है और महिला की बरामदगी को प्राथमिकता दी जा रही है।

    CCTV और कार की पहचान में जुटी पुलिस

    ब्रह्मपुरा थानेदार विपिन रंजन के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है। पुलिस महिला की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

    जांच के दौरान पुलिस घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ करने के साथ-साथ CCTV फुटेज की जांच कर रही है। जिस सफेद कार से महिला को ले जाने का आरोप है, उसकी पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है। आरोपी के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाकर पुलिस आगे की कार्रवाई में लगी है।

    फिलहाल महिला की बरामदगी और मामले में सामने आए आरोपों की जांच पुलिस के स्तर पर जारी है।

  • नवविवाहिता की ‘संदिग्ध’ परिस्थितियों में मौत:

    नवविवाहिता की ‘संदिग्ध’ परिस्थितियों में मौत:

    नवविवाहिता की ‘संदिग्ध’ परिस्थितियों में मौत:

    धमतरी जिले के भखारा थाना क्षेत्र में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान लगभग 25 वर्षीय काजल पाल के रूप में हुई है, जिसकी शादी महज 6 महीने पहले हुई थी। ससुराल पक्ष का कहना है कि काजल अचानक गिर गई थी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। वहीं, बाद में मायके पक्ष को सूचना दी गई कि काजल ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।

    इस घटना के बाद मृतका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर मारपीट करने और हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि काजल का पति यशवंत धनकर आए दिन उसके साथ विवाद करता था और उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। यशवंत भखारा में फैंसी सामान का थोक कारोबार करता है।

    मृतका के परिजनों के अनुसार, घटना से कुछ देर पहले ही काजल ने उनसे फोन पर बात की थी। इस दौरान उसने ससुराल में विवाद और मारपीट होने की जानकारी दी थी। परिजनों का आरोप है कि फोन पर बातचीत के कुछ ही देर बाद उन्हें काजल की मौत की खबर मिली। इसके बाद से ही मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    मामले में पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है। हालांकि, मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष के खिलाफ मारपीट और हत्या की शिकायत दर्ज कराई है।

    पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों सहित संबंधित लोगों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    काजल पाल के शव का कुरूद अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और दोनों पक्षों के बयान दर्ज होने के बाद ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

    इस मामले में अब पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि काजल ने आत्महत्या की थी या उसकी मौत के पीछे कोई अन्य वजह है।

  • जादू टोना के शक में पिता-पुत्र और चाचा ने बोलेरो से कुचलकर मार डाला, फिर घटना को दिया एक्सीडेंट का रूप…

    जादू टोना के शक में पिता-पुत्र और चाचा ने बोलेरो से कुचलकर मार डाला, फिर घटना को दिया एक्सीडेंट का रूप…

    जादू टोना के शक में पिता-पुत्र और चाचा ने बोलेरो से कुचलकर मार डाला, फिर घटना को दिया एक्सीडेंट का रूप…

    CG: जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में जादू-टोना के शक में पिता-पुत्र और चाचा ने एक ग्रामीण की बेरहमी से हत्या कर दी। तीनों ने मिलकर गाड़ी से कुचलकर ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया। मामले में मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

    जानिए पूरा मामला

    दरअसल, थाना बगीचा क्षेत्र के ग्राम जामपानी सरबकोम्बो निवासी जोयो राम 68 वर्ष की 29 सितंबर को मृत्यु होने की सूचना पर थाना बगीचा में धारा 194 BNSS कायम कर जांच प्रारंभ की गई। मृतक के शव का पंचनामा व पोस्टमार्टम कराया गया।

    मृतक के शव के पंचनामा के दौरान सिर, माथे और बायें पैर पर चोट के निशान पाए गए। पोस्टमार्टम की शॉर्ट रिपोर्ट में सर पर चोट लगने से मौत की वजह सामने आई।

    मर्ग जांच के दौरान मृतक के परिजनों व गवाहों के बयान लिए गए। पूछताछ में पता चला कि मृतक जोयो राम को बोलेरो वाहन क्रमांक CG 14 MC 5946 से जानबूझकर ठोकर मारकर हत्या की गई थी।

    जाँच में यह भी सामने आया कि गांव के दीपक यादव उसके पिता व चाचा ने मृतक जोया राम की पत्नी पर टोनही होने व जादू-टोना करने का आरोप लगाया था। इसी बात को लेकर पिछले 2-3 वर्षों से रंजिश चली आ रही थी। गांव के एक बैगा ने भी यह आरोप लगाया था।

    हत्या की योजना बनाकर घटना को दिया अंजाम

    जाँच के दौरान पुलिस द्वारा आरोपी दीपक यादव पिता कुरशो यादव 21 वर्ष निवासी जामपानी सरबकोम्बो को दबिश देकर 1 अक्टूबर को हिरासत में लिया। पुलिस पूछताछ में आरोपी दीपक यादव ने बताया कि, मृतक जोयो राम की पत्नी पर जादू-टोना करने का आरोप लगाते हुए आरोपी पक्ष द्वारा कई बार विवाद किया गया था। 29 सितंबर को आरोपियों ने मिलकर जोयो राम की हत्या करने की योजना बनाई थी।

    29 सितंबर की शाम करीब 4 बजे आरोपी दीपक यादव अपने चाचा के बोलेरो वाहन CG 14 MC 5946 को लेकर डाहीडांड़ की ओर गया। वहां जोयो राम मेन रोड से करीब 5-10 मीटर की दूरी पर अपने मक्का खेत के सामने खड़ा था। आरोपी द्वारा वाहन को आगे ले जाकर वापस मोड़कर जानबूझकर जोयो राम को ठोकर मार उसकी हत्या कर दिए।

    वाहन की ठोकर से जोयो राम की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वाहन लेकर बगीचा की ओर फरार हो गया, ताकि घटना को सामान्य सड़क दुर्घटना समझा जाए।

    गिरफ्तार आरोपी

    दीपक यादव 21 वर्ष निवासी जामपानी सरबकोम्बो थाना बगीचा, जिला जशपुर (छ.ग.) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। पुलिस मामले में फरार आरोपियों की लगातार पतासाजी कर रही है, जिन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जायेगा।

    मामले की कार्रवाई व आरोपी की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी बगीचा निरीक्षक विक्रांत कुमार सोन, सहायक उप निरीक्षक अनिल कामरे, नरेश मिंज व प्रधान आरक्षक लक्ष्मण सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है

  • 50 की उम्र में स्किन को ‘जवान’ और चमकदार बनाए रखने के लिए अपनाएं ये 8 तरीके, डॉक्टर ने बताया बुढ़ापा में भी रहेंगे जवान.

    50 की उम्र में स्किन को ‘जवान’ और चमकदार बनाए रखने के लिए अपनाएं ये 8 तरीके, डॉक्टर ने बताया बुढ़ापा में भी रहेंगे जवान.

    50 की उम्र में स्किन को ‘जवान’ और चमकदार बनाए रखने के लिए अपनाएं ये 8 तरीके, डॉक्टर ने बताया बुढ़ापा में भी रहेंगे जवान.

    Secret For Age Reversal: बढ़ती उम्र को पूरी तरह रोकना या सचमुच “रिवर्स” करना संभव नहीं है, लेकिन सही खान-पान और हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से उम्र बढ़ने के असर को धीमा जरूर किया जा सकता है। लगातार तनाव, प्रदूषण, खराब डाइट, नींद की कमी, स्मोकिंग, तंबाकू का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता का असर शरीर के साथ-साथ स्किन पर भी दिखाई देने लगता है, जिससे व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से अधिक उम्रदराज नजर आ सकता है।

    हार्वर्ड के प्रोफेसर डॉ. डेविड सिंक्लेयर, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के आनुवंशिकी विभाग के प्रोफेसर और पॉल एफ. ग्लेन सेंटर फॉर बायोलॉजी ऑफ एजिंग रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक हैं। वे पिछले कई दशकों से उम्र बढ़ने, लंबी उम्र और उम्र से जुड़ी बीमारियों के जैविक कारणों पर शोध कर रहे हैं। डॉ. डेविड ने बताया कि 80 की उम्र में मरना जरूरी नहीं है आप अपने हालात को खुद बदल सकते हैं।

    बुढ़ापा तेज आने का कारण

    डॉक्टर ने बताया कि उन्हें लैब में रिसर्च में ऐसे कई प्रमाण मिले हैं जो बताते हैं कि बुढ़ापा को रिवर्स किया जा सकता है। डॉक्टर डेविड ने बताया धूम्रपान, अल्ट्रा प्रोसेस खाना,अत्याधिक शराब और बहुत ज्यादा हवाई यात्रा बुढ़ापा को तेज करती है। एक्सपर्ट ने बताया बुढ़ापा को रिवर्स करके अल्जाइमर, कैंसर और हृदय रोग जैसी बीमारियां खत्म हो सकती है क्योंकि इनमें से कई बीमारियों के पीछे मुख्य कारण बुढ़ापा है। डॉक्टर डेविड ने बुढ़ापा को रिवर्स करने के लिए कुछ हेल्दी टिप्स बताएं हैं। आप भी इन्हें अपनी डेली लाइफ में अपनाकर बॉडी को हेल्दी और जवान रख सकते हैं।

    नियमित एक्सरसाइज करें

    डॉ. डेविड सिंक्लेयर के अनुसार, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा रखने के लिए शरीर को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम मांसपेशियों की ताकत, हृदय की सेहत और शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करता है। रेगुलर एक्सरसाइज में आप तेज वॉक, कार्डियो और शक्ति बढ़ाने वाली कसरत को अपनी डेली लाइफ का हिस्सा बनाएं। लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय दिनभर सक्रिय रहना लॉग लाइफ और जवान रहने के लिए जरूरी है।

    भोजन के बीच अंतर रखें

    सिंक्लेयर भोजन के बीच पर्याप्त अंतर रखने और कुछ समय तक खाना न खाने की सलाद देते हैं। डॉक्टर उपवास को शरीर के लिए एक तरह का नियंत्रित तनाव मानते हैं। उनके अनुसार, भोजन से मिलने वाली लगातार ऊर्जा के बजाय कुछ समय का अंतर शरीर में ऐसे जैविक तंत्रों को सक्रिय कर सकता है जो कोशिकाओं की मरम्मत और रखरखाव से जुड़े होते हैं। हालांकि, उपवास हर व्यक्ति के लिए जरूरी या सुरक्षित नहीं है।

    कभी-कभी भोजन छोड़ने की आदत डालें

    डॉ. सिंक्लेयर ने अपने व्यक्तिगत जीवन में कभी-कभी एक समय का भोजन छोड़ने की बात भी साझा की है। उनका मानना है कि हर समय खाते रहने के बजाय शरीर को भोजन के बीच कुछ समय का अंतर देना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब लंबे समय तक भूखे रहना नहीं है। डायबिटीज, गर्भावस्था, खान-पान संबंधी विकार या किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे लोगों को उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

    हेल्दी वेट रखना भी है जरूरी

    स्वस्थ वजन बनाए रखना लंबे समय तक अच्छी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। शरीर में अत्यधिक वसा, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी, कई मेटाबॉलिक समस्याओं और उम्र से जुड़ी बीमारियों के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसलिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद के जरिए बॉडी को हेल्दी और जवान रखने में मदद मिलती है। केवल वजन कम करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि शरीर की ताकत और ओवर ऑल हेल्थ पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा खाएं

    डॉ. सिंक्लेयर अपने खान-पान में मुख्य रूप से पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात करते हैं। फल, सब्जियां, दालें, बीन्स, साबुत अनाज, नट्स और बीज शरीर को फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और कई फायदेमंद प्लांट बेस्ड यौगिक देते हैं। अलग-अलग तरह के पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना शरीर को जरूरी पोषण देने और हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    धूम्रपान और शराब से बचें

    हेल्दी तरीके से उम्र को बढ़ाना चाहते हैं तो धूम्रपान से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। धूम्रपान शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचा सकता है और कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। शराब का सेवन भी सीमित रखना बेहतर है। डॉ. सिंक्लेयर ने अपनी जीवनशैली में शराब और धूम्रपान से दूरी रखने की बात कही है।

    रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं

    सिर्फ जिम में कसरत करना ही पर्याप्त नहीं है। दिनभर शरीर को सक्रिय रखना भी हेल्दी तरीके से उम्र बढ़ने के लिए जरूरी है। पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना, घर के काम करना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना शारीरिक गतिविधि बढ़ाने के आसान तरीके हैं। नियमित गतिविधि मांसपेशियों, हड्डियों, हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ सक्रिय रहना शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने में खास भूमिका निभाता है।

    तनाव कम करें और आराम करें

    लगातार तनाव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकता है। इसलिए स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए तनाव को नियंत्रित करना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद, आराम, ध्यान, गहरी सांस लेने की तकनीक और अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। डॉ. सिंक्लेयर ने भी अपनी जीवनशैली में तनाव कम करने और आराम को महत्व देने की बात की है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी डॉ. डेविड सिंक्लेयर द्वारा साझा किए गए विचारों और उपलब्ध वैज्ञानिक शोध पर आधारित है। उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह रिवर्स करने का कोई प्रमाणित इलाज अभी उपलब्ध नहीं है। उपवास, डाइट में बदलाव या किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

  • दीक्षा से पहले .दुल्हन. की तरह क्यों सजती हैं जैन लड़कियां ? जानें इस रस्म का रहस्य

    दीक्षा से पहले .दुल्हन. की तरह क्यों सजती हैं जैन लड़कियां ? जानें इस रस्म का रहस्य

    दीक्षा से पहले .दुल्हन. की तरह क्यों सजती हैं जैन लड़कियां ? जानें इस रस्म का रहस्य

    जैन धर्म में खान-पान से लेकर जीवन जीने तक सादगी और सात्विकता को काफी महत्व दिया जाता है. लेकिन जैन धर्म में दीक्षा लेने की परंपरा भी अपने आप में बेहद खास है. खासकर कुछ जैन समुदायों में दीक्षा से पहले का दृश्य लोगों का ध्यान खींचता है.

    दीक्षा लेने वाली लड़कियां इस मौके पर दुल्हन की तरह सजती हैं, अच्छे कपड़े और आभूषण पहनती हैं. इसके बाद जब दीक्षा की प्रक्रिया पूरी होती है, तो यही श्रृंगार और सांसारिक पहनावा पीछे छूट जाता है और वे बेहद साधारण वस्त्रों में आ जाती हैं. आखिर क्या है दीक्षा लेने से पहले श्रृंगार का महत्व जान लें.

    वैराग्य से पहले क्यों करते हैं श्रृंगार

    जैन धर्म में दीक्षा का अर्थ केवल वस्त्र बदलना नहीं बल्कि यह सांसारिक जीवन से वैराग्य लेकर संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प माना जाता है.

    दीक्षा से पहले किया जाने वाला ये श्रृंगार सिर्फ सजने-संवरने की रस्म नहीं बल्कि गृहस्थ जीवन से विदाई को दर्शाता है.

    इस समय साधक अच्छे कपड़े और आभूषण पहनकर अपने सांसारिक जीवन को सम्मान के साथ पीछे छोड़ने की तैयारी करता है.

    ये सौंदर्य, आकर्षण का आखिरी अनुभव होता है, मेहंदी लगाना ये दर्शाता है कि साधक ने अपने जीवन में समस्त रंगों का अनुभव कर लिया है अब वह मोह-माया से दूर साधारण जीवन को अपनाने जा रहा है.

    ये संदेश होता है कि अब ये वस्तुएं उसके जीवन की प्राथमिकता नहीं रहेंगी.

    अपरिग्रह का महत्व

    जैन दर्शन में अपरिग्रह यानी संग्रह और वस्तुओं के प्रति आसक्ति का त्याग महत्वपूर्ण सिद्धांत है. दीक्षा ग्रहण करने वाला व्यक्ति सांसारिक संपत्ति, पारिवारिक-सामाजिक जीवन और भौतिक मोह से स्वयं को अलग करने का संकल्प लेता है. दीक्षा के बाद साधु-साध्वी जीवन में आवश्यक वस्तुओं तक ही सीमित रहने की परंपरा होती है.

    खुशी से सबके सामने लेते हैं संकल्प

    दीक्षा समारोह में किया गया श्रृंगार सिर्फ बाहरी सजावट नहीं होता. समुदाय के सामने सजने के बाद जब साधक अपने आभूषण, श्रृंगार और सांसारिक सुख-सुविधाओं को छोड़ता है, तो यह उसके त्याग के संकल्प को सबके सामने दिखाता है. इसके बाद केशलोंच, सादे वस्त्र और संयमपूर्ण जीवन की शुरुआत होती है.

    जो बदलाव मन के भीतर आया है, उसे इन परंपराओं के जरिए बाहरी रूप भी दिया जाता है. यही दीक्षा का मूल भाव है. गृहस्थ जीवन को पीछे छोड़कर त्याग, संयम और आत्मअनुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ना.