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  • हाई बीपी के मरीजों: के लिए केला या संतरा? जानिए किस फल में है ज्यादा पोटैशियम और कौन सा है BP नॉर्मल रखने के लिए बेस्ट!

    हाई बीपी के मरीजों: के लिए केला या संतरा? जानिए किस फल में है ज्यादा पोटैशियम और कौन सा है BP नॉर्मल रखने के लिए बेस्ट!

    हाई बीपी के मरीजों: के लिए केला या संतरा? जानिए किस फल में है ज्यादा पोटैशियम और कौन सा है BP नॉर्मल रखने के लिए बेस्ट!

    क्या आपको अक्सर सुबह उठते ही सिर के पिछले हिस्से में भारीपन महसूस होता है, चक्कर आते हैं या बिना वजह बहुत ज्यादा थकान और घबराहट महसूस होती है? अगर हां, तो इन शुरुआती संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें, यह हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के लक्षण हो सकते है, जिसे मेडिकल साइंस में ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है! आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अत्यधिक मानसिक तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, जंक फूड का सेवन और डाइट में सोडियम की अधिकता हाई बीपी के मुख्य कारण हैं। जब ब्लड वैसल्स (Arteries) पर खून का दबाव लगातार अधिक बना रहता है, तो इससे दिल और किडनी पर गंभीर असर पड़ता है।

    रजिस्टर्ड डायटीशियन ट्रिस्टा चान के मुताबिक (आरडी, एमएचएससी) हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए डाइट में पोटैशियम (Potassium) से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना सबसे असरदार तरीका माना जाता है। पोटैशियम शरीर से अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालकर धमनियों की दीवारों को आराम पहुंचाता है। जब पोटैशियम से भरपूर फलों की बात आती है, तो केला (Banana) और संतरा (Orange) बेस्ट विकल्प हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों में से किस फल में ज्यादा पोटैशियम होता है और हाई बीपी के मरीजों के लिए कौन सा फल खाना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है? आइए जानते हैं केले और संतरे का न्यूट्रिशनल कंपैरिजन और हाई बीपी में इन्हें खाने का सही तरीका।

    ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए केला खाएं या संतरा?

    अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन है, तो हेल्दी डाइट का सेवन कर ब्लड प्रेशर को मैनेज कर सकते हैं। बीपी कंट्रोल करने के लिए डाइट में फलों को शामिल करना अच्छा तरीका है। केला और संतरा दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर फल हैं, लेकिन ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत के लिहाज से दोनों के फायदे अलग-अलग हो सकते हैं। ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने के लिए केला का सेवन असरदार साबित होता है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। यह रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद करता है और शरीर से अतिरिक्त सोडियम को बाहर निकालता है। शरीर में सोडियम की अधिक मात्रा ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है। एक केले में लगभग 375 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है, जो वयस्कों के लिए रोजाना की जरूरत का करीब 8 प्रतिशत है। वहीं, एक संतरे में लगभग 232 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। अगर हेल्दी डाइट के साथ केला का सेवन किया जाए तो ये बीपी को नॉर्मल रखने में मदद करता है।

    संतरे में भी हैं दिल के लिए फायदेमंद पोषक तत्व

    डायटीशियन के मुताबिक संतरे में केले की तुलना में कम पोटैशियम होता है, लेकिन इसमें दिल की सेहत के लिए उपयोगी कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। संतरा खासतौर पर अपने विटामिन C के लिए जाना जाता है। एक संतरे में करीब 83 मिलीग्राम विटामिन C होता है, जो एक वयस्क की रोजाना की जरूरत का लगभग 91 प्रतिशत पूरा कर सकता है।विटामिन C एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करता है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि विटामिन C ब्लड प्रेशर कम करने में मदद कर सकता है। संतरे में फ्लेवोनॉयड्स नामक एंटीऑक्सीडेंट प्लांट कंपाउंड भी पाए जाते हैं। ये रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रखने में मदद कर सकते हैं। विटामिन C और फ्लेवोनॉयड्स की मौजूदगी के कारण नियमित रूप से सिट्रस फलों का सेवन दिल के रोग के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया है। हालांकि, इस संबंध को बेहतर तरीके से समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

    क्या बीपी के लिए केला और संतरा में से किसी एक को चुनना चाहिए?

    अगर आपका उद्देश्य पोटैशियम का सेवन बढ़ाना है ताकि बीपी नॉर्मल रहे, तो केले को डाइट में शामिल करें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संतरे को डाइट से बाहर कर देना चाहिए। केला और संतरा दोनों में ही ऐसे पोषक तत्व मौजूद हैं जो दिल को सेहतमंद रखते हैं। दोनों को DASH डाइट जैसे ऐसे खान-पान के पैटर्न में शामिल किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करना है। डायटीशियन ने बताया बीपी नॉर्मल रखने के लिए सिर्फ एक फल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फलों और सब्जियों को डाइट में शामिल करना जरूरी है। इससे शरीर को अलग-अलग प्रकार के विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। फलों और सब्जियों से भरपूर डाइट बीपी नॉर्मल रखने में उपयोगी है।

    ब्लड प्रेशर के लिए फल खाना क्यों जरूरी है?

    बीपी को नॉर्मल रखने के लिए फलों का सेवन असरदार साबित होता है। फलों से भरपूर संतुलित डाइट ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करती है। फलों में एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं, जो ओवरऑल हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। बीपी को नॉर्मल रखने के लिए सिर्फ केला और संतरा ही काफी नहीं है बल्कि आप अपनी डाइट में सेब, नाशपाती, ब्लूबेरी, किशमिश, अंगूर और एवोकाडो जैसे फलों का भी सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा, पोटैशियम का सेवन बढ़ाने के लिए खरबूजा, कीवी, खुबानी और सूखे आलूबुखारे जैसे विकल्प भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

    सिर्फ डाइट नहीं, ये आदतें भी जरूरी

    ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के लिए केवल फलों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन कंट्रोल करना और सोडियम यानी नमक का सेवन सीमित करना भी जरूरी है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और हार्ट-हेल्थ से जुड़ी सलाह का पालन करना भी जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और आहार विशेषज्ञों के मत पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह , निदान या इलाज का विकल्प न समझें। यदि आप हाई ब्लड प्रेशर या क्रॉनिक किडनी डिसीज (CKD) से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट में पोटैशियम युक्त फलों की मात्रा बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर या कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह जरूर लें।

  • Matra Navami 2026: मातृ नवमी श्राद्ध किस दिन है, क्यों माना जाता ये दिन खास ?

    Matra Navami 2026: मातृ नवमी श्राद्ध किस दिन है, क्यों माना जाता ये दिन खास ?

    Matra Navami 2026: मातृ नवमी श्राद्ध किस दिन है, क्यों माना जाता ये दिन खास ?

    Matra Navami 2026: पितृ पक्ष में कुछ तिथियां बहुत खास होती है इन्हीं में से एक है मातृ नवमी. इस दिन दिवंगत माताओं, बहुओं और बेटियों का पिंडदान किया जाता है जिनकी मृत्यु सुहागिन के रूप में हुई हो. मान्यता है कि इसदिन ईश्वर रूपी कही जाने वाली माता का श्राद्ध करने वालों को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलता है, इस साल मातृ नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर 2026 को है. इस दिन माता के श्राद्ध में क्या खास होता. है जान लें

    4 अक्टूबर को होगी मातृ नवमी

    पंचांग के अनुसार मातृ नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर 2026, रविवार को होगा. दिल्ली के पंचांग के मुताबिक नवमी तिथि 4 अक्टूबर सुबह 5:51 बजे शुरू होकर 5 अक्टूबर सुबह 3:53 बजे तक रहेगी. श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 से 12:33 बजे, रौहिण मुहूर्त 12:33 से 1:20 बजे और अपराह्न काल 1:20 से 3:42 बजे तक रहेगा.

    मातृ नवमी केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि परिवार की उन महिलाओं को याद करने का अवसर भी है, जिनका योगदान परिवार और आने वाली पीढ़ियों के जीवन में रहा है.

    क्या सिर्फ महिलाओं का श्राद्ध होता है ?

    मातृ नवमी को मुख्य रूप से दिवंगत महिला पूर्वजों के श्राद्ध की तिथि माना जाता है. इसमें माता, दादी, नानी, बहन और परिवार की अन्य दिवंगत स्त्रियों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है. कुछ धार्मिक परंपराओं में विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए इस दिन श्राद्ध करने की बात कही गई है, जिनकी मृत्यु पति के जीवित रहते हुई थी. इसी वजह से इसे अविधवा नवमी भी कहा जाता है.

    वैसे तो श्राद्ध का मूल नियम मृत्यु की तिथि के अनुसार है. यदि किसी पूर्वज की मृत्यु नवमी तिथि को हुई थी तो उनका नवमी श्राद्ध किया जाता है. मातृ नवमी का विशेष महत्व महिला पूर्वजों के सामूहिक स्मरण और सम्मान के कारण है.

    मातृ नवमी पर क्या होता है?

    इस दिन स्नान आदि के बाद संकल्प लेकर दिवंगत महिला पूर्वजों का स्मरण करें.

    विधि के अनुसार पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किया जाता है.

    तर्पण में जल और काले तिल का प्रयोग करें.

    इसके बाद ब्राह्मण भोजन और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य किया जाता है.

    सौभाग्य सामग्री का दान सुहागिन महिलाओं को दें.. इसमें सिंदूर, चूड़ी, वस्त्र आदि दिए जाते हैं.

    कैसे तृप्त होते हैं पितृ

    पितृ पक्ष पूर्वजों की आत्मा को तृप्ति दिलाने का समय है. मान्यता है कि इस दौरान पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से भोजन और जल ग्रहण करते हैं. श्राद्ध की इस विधि को तर्पण भी कहा जाता है.

    शारदीय नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें

    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.

  • 27 साल में PhD, अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी और मरीजों का प्यार… फिर सब छोड़कर डिलीवरी राइडर बनीं चीनी डॉक्टर.

    27 साल में PhD, अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी और मरीजों का प्यार… फिर सब छोड़कर डिलीवरी राइडर बनीं चीनी डॉक्टर.

    27 साल में PhD, अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी और मरीजों का प्यार… फिर सब छोड़कर डिलीवरी राइडर बनीं चीनी डॉक्टर.

    आमतौर पर लोग अच्छी डिग्री, सम्मानजनक नौकरी और आर्थिक सुरक्षा को सफलता की निशानी मानते हैं। लेकिन चीन की एक 31 वर्षीय महिला ने अपने करियर में इतना सब हासिल करने के बाद भी एक ऐसा फैसला लिया, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। मेडिसिन में PhD करने वाली लियू जिहान ने अस्पताल की नौकरी छोड़ दी और इसके बाद डिलीवरी राइडर, पब सिंगर और दूसरे छोटे-मोटे काम करने लगीं।

    लियू का कहना है कि करियर बदलने के बाद उनकी जिंदगी में तनाव कम हुआ है। अब वह अपनी जरूरतों का खर्च निकालने के साथ-साथ जिंदगी को अपनी पसंद के हिसाब से जीने की कोशिश कर रही हैं।

    पढ़ाई के दबाव के बीच हासिल की PhD

    लियू चीन के उत्तरी प्रांत हेबेई से हैं। उनका बचपन पढ़ाई और प्रतियोगिता के दबाव के बीच बीता। उन्होंने कुछ समय हेंगशुई हाई स्कूल में भी पढ़ाई की, जो अपने अनुशासन और कड़े शैक्षणिक माहौल के लिए जाना जाता है।

    इसके बाद उन्होंने सिचुआन यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई की। आगे चलकर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मकाऊ के फैकल्टी ऑफ हेल्थ साइंसेज से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की।

    महज 27 साल की उम्र में PhD पूरी करने के बाद लियू ने साल 2022 में अस्पताल में मनोचिकित्सक के तौर पर काम शुरू किया।

    मरीजों से मिला प्यार और सम्मान

    अस्पताल में काम करने के दौरान लियू को मरीजों से काफी सम्मान मिला। कुछ मरीजों ने उनके लिए हाथ से चिट्ठियां लिखीं और उनके सम्मान में बैनर तक बनाए।

    लियू के लिए मरीजों से जुड़ना उनके काम का सबसे अच्छा हिस्सा था। वह मानती थीं कि मरीज की सामाजिक स्थिति या हैसियत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उसे एक इंसान के तौर पर समझा जाए।

    उन्हें लोगों से दिल की बात करना और अलग-अलग तरह के लोगों से जुड़ना पसंद था। लेकिन समय के साथ अस्पताल की नियमित दिनचर्या और तय शेड्यूल उन्हें परेशान करने लगा।

    प्रतिष्ठित अस्पताल की नौकरी भी छोड़ दी

    इस साल फरवरी में लियू ने झुहाई के एक अस्पताल में मनोचिकित्सक और पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर की फुल-टाइम नौकरी छोड़ने का फैसला किया।

    उनके पास PhD थी, सम्मानजनक नौकरी थी और एक स्थिर करियर की राह भी खुली हुई थी। इसके बावजूद उन्हें महसूस हुआ कि सिर्फ सुरक्षित करियर के लिए ऐसी जिंदगी जीना, जिसमें उन्हें संतुष्टि नहीं मिल रही, उनके लिए सही नहीं है।

    नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने कुछ समय यात्रा में बिताया। इसके बाद उन्होंने ऐसे कई काम आजमाए, जिनका उनके मेडिकल करियर से कोई सीधा संबंध नहीं था।

    कभी नाश्ता बेचा, कभी बनीं डिलीवरी राइडर

    लियू ने नाश्ता बेचने का काम किया, डिलीवरी राइडर के तौर पर काम किया और एक पब में सिंगर के रूप में भी परफॉर्म किया।

    इन कामों के दौरान उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों के करीब से मिलने का मौका मिला। रेस्टोरेंट कर्मचारी, डिलीवरी राइडर, पब में काम करने वाले लोग और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले लोग उनकी नई जिंदगी का हिस्सा बने।

    लियू के मुताबिक, इन लोगों में उन्हें एक अलग तरह की सकारात्मकता नजर आई। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद वे एक-दूसरे की मदद करते थे और जिंदगी को ज्यादा सहज तरीके से लेते थे।

    बोलीं- जिंदगी सिर्फ डिग्री और नंबरों का नाम नहीं

    लियू ने महसूस किया कि उनकी पिछली जिंदगी में प्रतियोगिता और उपलब्धियों पर काफी जोर था। उनका मानना है कि युवा अक्सर अच्छे नंबर, डिग्री और करियर की दौड़ में खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल लेते हैं।

    उन्होंने बताया कि डिलीवरी राइडर एक-दूसरे को ट्रैफिक और रास्तों की जानकारी देते हैं। वहीं पब में काम करने वाले लोग और छोटे दुकानदार भी जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की मदद करते हैं।

    लियू के लिए ऐसे छोटे-छोटे अनुभवों ने जिंदगी को देखने का उनका नजरिया बदल दिया। उनके मुताबिक, सिर्फ उपलब्धियां हासिल करना ही जिंदगी का उद्देश्य नहीं है। लोगों के बीच देखभाल, सहयोग और आपसी जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    मेडिसिन से पूरी तरह नाता नहीं तोड़ा

    हालांकि लियू ने मेडिकल क्षेत्र को पूरी तरह नहीं छोड़ा है। वह अब भी पार्ट-टाइम थेरेपिस्ट के तौर पर काम करती हैं। उनका कहना है कि वह अपने काम और निजी जिंदगी के बीच ज्यादा स्वतंत्रता और संतुलन चाहती हैं।

    लियू की कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने उस समय करियर की दिशा बदली, जब उनके पास आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत पेशेवर आधार मौजूद था। उनके लिए यह बदलाव सिर्फ नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं था, बल्कि जिंदगी को अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से देखने की कोशिश भी थी।

  • 12 साल के बेटे के सामने: पति को दबिया से काटने वाली पत्नी को उम्रकैद, मां ने ही पहुंचवाया था जेल

    12 साल के बेटे के सामने: पति को दबिया से काटने वाली पत्नी को उम्रकैद, मां ने ही पहुंचवाया था जेल

    12 साल के बेटे के सामने: पति को दबिया से काटने वाली पत्नी को उम्रकैद, मां ने ही पहुंचवाया था जेल

    बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा में 12 साल के बेटे के सामने पति को दबिया से काटकर निर्मम हत्या करने वाली पत्नी को उम्रकैद की सजा मिली है। पूर्णिया के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विक्रम कुमार की अदालत ने आरोपी उषा देवी को उसके पति बालो दास की हत्या का दोषी करार दिया। जज ने महिला को उम्रकैद की सजा सुनाई और उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह वारदात पिछले साल की है। दोषी उषा देवी की मां ने ही अपनी बेटी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी।

    यह मामला धमदाहा थाना क्षेत्र के दमगाढ़ा वार्ड संख्या 11 का है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था। करीब एक साल तक यह मुकदमा कोर्ट में चला। सरकार की ओर से अताउर रहमान ने अदालत में पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से कुल 6 गवाहों की गवाही कराई गई। घटना के बाद मृतक बालो दास की सास ने मीना देवी ने ही अपनी बेटी उषा देवी के खिलाफ पुलिस को बयान देकर हत्या का मामला दर्ज कराया था।

    घर के आंगन में दबिया से किया था वार

    धमदाहा थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार 12 जुलाई 2025 की रात करीब 8 बजे बालो दास काम से अपने घर लौटा था। नहाने के बाद वह आंगन में ही प्लास्टिक के बोरे पर सो गया था। खाना लेकर पहुंची उषा देवी ने पति को जगाया। उसके नहीं उठने पर उसने आंगन में रखे दबिया से पति के सिर पर वार कर दिया। इससे बालो दास की मौके पर ही मौत हो गई थी।

    बेटे के सामने मां ने किया पिता का कत्ल

    उषा ने अपने पति की हत्या की, तब उसका 12 साल का बेटा भी घर में मौजूद था। बेटे ने पुलिस को बताया था कि वह अपने पिता के बगल में ही सो रहा था। तभी अचानक उसके मुंह पर खून के छींटे आकर गिरे। जब उसने आंखें खोली, तो मां के दबिया लेकर वहां खड़ी हुई थी और पिता के सिर से खून निकल रहा था।

    मां ने बेटे को भी काट डालने की दी थी धमकी

    हत्याकांड के तुरंत बाद घर में मौजूद बेटे को भी उषा देवी ने काट डालने की धमकी दी थी। मां ने उसे धमकाते हुए कहा था कि सो जाओ, नहीं तो तुम्हें भी काट दूंगी। हालांकि, बेटा हिम्मत दिखाते हुए घर से भागा और आस-पड़ोस के लोगों को जगाकर वारदात की सूचना दी।

    बताया गया कि हल्ला होने पर लोग मौके पर जुट गए। घर से कुछ दूरी पर रहने वाली उषा देवी की मां मीना देवी को भी सूचना दी गई। मीना देवी जब दौड़ी-दौड़ी वहां पहुंचीं, तो आंगन में दामाद को प्लास्टिक के बोरे में मृत पड़ा देखा। उसके सिर से खून निकल रहा था। घटना के तुरंत बाद उषा दबिया को आंगन में ही फेंककर अंधेरे में फरार हो गई।

    मां ने ही दामाद की कातिल बेटी को करवाया था गिरफ्तार

    मीना देवी ने अपने दामाद की हत्या की सूचना पुलिस को दी और अपनी ही बेटी के खिलाफ शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराई। धमदाहा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद कर जांच शुरू की। घटना के कुछ घंटों बाद ही उषा को पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।

    आरोपी उषा ने पुलिस को बताया था कि उसने पारिवारिक कलह की वजह से अपने पति की हत्या की। उसका कहना था कि पति अक्सर उसके साथ मारपीट करता था। इससे वह तंग आ चुकी थी।

  • पाकिस्तान में बने ‘कॉस्मेटिक्स’ पर कसा हैदराबाद पुलिस का शिकंजा, ₹7 लाख का माल जब्त, 5 लोग गिरफ्तार’

    पाकिस्तान में बने ‘कॉस्मेटिक्स’ पर कसा हैदराबाद पुलिस का शिकंजा, ₹7 लाख का माल जब्त, 5 लोग गिरफ्तार’

    पाकिस्तान में बने ‘कॉस्मेटिक्स’ पर कसा हैदराबाद पुलिस का शिकंजा, ₹7 लाख का माल जब्त, 5 लोग गिरफ्तार’

    हैदराबाद में पाकिस्तान में बने कॉस्मेटिक्स की बिक्री का मामला सामने आया है. हैदराबाद कमिश्नर की टास्क फोर्स के राजेंद्रनगर जोन ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अधिकारियों के साथ मिलकर कई दुकानों पर छापेमारी की. इस कार्रवाई में करीब 7 लाख रुपये कीमत के कथित अनधिकृत कॉस्मेटिक उत्पाद जब्त किए गए. पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को पकड़ा है और अब पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच की जा रही है.

    यह कार्रवाई 30 सितंबर को मिली सूचना के आधार पर की गई थी. पुलिस को जानकारी मिली थी कि शहर में पाकिस्तान में निर्मित कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद बिना जरूरी भारतीय रजिस्ट्रेशन या अनुमति के बेचे और वितरित किए जा रहे हैं. इसके बाद टास्क फोर्स और CDSCO की टीम ने नांपल्ली और संतोष नगर इलाके में कई दुकानों की जांच की. अधिकारियों ने दुकानों से मिले कॉस्मेटिक उत्पादों को कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू की.

    पुलिस के मुताबिक, नांपल्ली के हबीब नगर इलाके में ब्यूटी लेडीज़ एम्पोरियम, ब्यूटी क्वीन शॉप और एसजे मेडिकल शॉप की जांच की गई. CDSCO के ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. श्रीधर मित्तपल्ली और अंजन गौड़ पेंडेम ने जब्त किए गए उत्पादों की जांच की. जांच में कई तरह की गोरा करने वाली क्रीम और साबुन मिले. इनमें गोरी, चांदनी, फैज़, नविया, पार्ली गोल्डी, अनीज़ा, नूर गोल्ड, आरज़ू, सैंडल, फेस फ्रेश, फाखरा गोल्ड, गोल्डन पर्ल और सदफ़ समेत कई ब्रांड शामिल बताए गए हैं.

    CDSCO अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि इनमें से कुछ उत्पाद उन कॉस्मेटिक्स में शामिल हैं, जिन्हें CDSCO/DCGI की 8 सितंबर 2026 की सार्वजनिक सूचना में अनधिकृत या प्रतिबंधित उत्पादों के तौर पर चिन्हित किया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, इन उत्पादों को भारत में आयात करने के लिए जरूरी पंजीयन प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया था. यानी इन उत्पादों के भारत में आयात और बिक्री से जुड़े नियमों की जांच अब पुलिस और संबंधित विभाग कर रहे हैं.

    अधिकारियों ने इन कॉस्मेटिक उत्पादों से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर भी चिंता जताई है. पुलिस के अनुसार, पहले कुछ ऐसे कॉस्मेटिक उत्पादों में निर्धारित सीमा से ज्यादा हैवी मेटल्स पाए जाने की बात सामने आ चुकी है. ऐसे पदार्थ तय सीमा से अधिक होने पर स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं. हालांकि, जब्त किए गए मौजूदा उत्पादों में किसी विशेष पदार्थ की मात्रा कितनी है, इसे लेकर आगे की जांच और परीक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी.

    जांच में मुंबई कनेक्शन भी सामने आया है. पुलिस के प्रारंभिक जांच के मुताबिक, कुछ उत्पाद मुंबई स्थित एक डीलर या सप्लायर के जरिए मंगाए जा रहे थे. अब जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन उत्पादों की वास्तविक सप्लाई कहां से हुई और वे भारत में किस रास्ते से पहुंचे. पुलिस कथित सप्लायर की भूमिका के साथ-साथ उत्पादों के खरीद-बिक्री और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है.

    पुलिस का आरोप है कि दुकानदारों के पास पाकिस्तान मूल के इन कॉस्मेटिक उत्पादों की खरीद से संबंधित जरूरी बिल, इनवॉयस और दूसरे दस्तावेज मौजूद नहीं थे. जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुछ अतिरिक्त स्टॉक एक गोदाम में रखा गया था. हालांकि, उस गोदाम की सही जगह और वहां रखे गए सामान की कुल मात्रा को अभी सत्यापित किया जा रहा है. पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इसी नेटवर्क के जरिए और कितने उत्पाद बाजार में पहुंचाए गए.

    जांच का दायरा संतोष नगर तक भी पहुंच गया है. पुलिस के मुताबिक, वहां मदीना कॉस्मेटिक नाम की दुकान से भी इसी तरह के उत्पाद बेचे जा रहे थे. यह दुकान कथित तौर पर सैयद इस्माइल द्वारा संचालित की जाती है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके पास ये कॉस्मेटिक उत्पाद कहां से पहुंचे और उसके खरीद तथा वितरण नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं.

    इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों के नाम सामने रखे हैं. इनमें मोहम्मद फजल, मोहम्मद अयान, मोहम्मद रियाजुद्दीन, सैयद आबिद अली और सैयद इस्माइल शामिल हैं. जांच एजेंसियां रियाजुद्दीन और कथित वितरण श्रृंखला से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सप्लायर से दुकानों तक उत्पाद पहुंचाने में किन-किन लोगों ने भूमिका निभाई.

    पुलिस ने इस मामले में अपराध संख्या- 245/2026 दर्ज किया है. केस भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 123 और 318(4) तथा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 18-C और 27-A के तहत दर्ज किया गया है. अब जांच अधिकारी कथित मुंबई सप्लायर तक पहुंचने के साथ-साथ आयात और परिवहन रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. इसके अलावा खरीद के इनवॉइस, बैंक ट्रांज़ैक्शन और दूसरे ठिकानों पर रखे स्टॉक की भी पड़ताल की जा रही है.

    हैदराबाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना अनुमति या अनधिकृत कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदने और इस्तेमाल करने से बचें. पुलिस ने कारोबारियों को भी ऐसे उत्पादों की बिक्री, वितरण या विज्ञापन नहीं करने की चेतावनी दी है. पुलिस के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को ऐसे उत्पादों की अवैध बिक्री या परिवहन की जानकारी मिलती है तो वह Dial-112 या हैदराबाद सिटी पुलिस की हेल्पलाइन के जरिए सूचना दे सकता है. मामले की जांच जारी है और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा उत्पादों के स्रोत का पता लगाया जा रहा है.

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    कब्ज और गैस से परेशान हैं? डाइट में शामिल करें करेला, एक्सपर्ट से जानिए कैसे ये सब्जी पाचन के लिए साबित होती है अमृत.

    कब्ज और गैस से परेशान हैं? डाइट में शामिल करें करेला, एक्सपर्ट से जानिए कैसे ये सब्जी पाचन के लिए साबित होती है अमृत.

    क्या खराब पाचन, गैस और पेट साफ न होने की समस्या से आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है? अगर आप भी हर सुबह कब्ज़ की वजह से परेशान रहते हैं, तो दवाइयों के बजाय आपकी रसोई में मौजूद एक कड़वी सब्जी का सेवन करें। ये कब्ज का नेचुरल समाधान साबित हो सकती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं करेला की, जिसका स्वाद कड़वा होता है जिसे अक्सर लोग इसके स्वाद की वजह से ही खाने से कतराते हैं। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों में इसे पेट के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। करेले में भरपूर मात्रा में फाइबर (Dietary Fiber), पानी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आंतों की सफाई करने और पचन क्रिया को सक्रिय करने में मदद करते हैं। लेकिन पाचन स्वास्थ्य के लिए इसका सही तरीके से सेवन करना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य एवं पोषण विशेषज्ञों के अनुसार अगर करेले का सही मात्रा में उपयोग किया जाए, तो यह कब्ज और ब्लोटिंग जैसी क्रोनिक समस्याओं में राहत दिला सकता है।

    द हेल्दी इंडियन प्रोजेक्ट (THIP) की सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट गरिमा देव वर्मन के अनुसार करेला एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जिसमें बेहद कम कैलोरी और फाइबर ज्यादा होता है। पोषक तत्वों से भरपूर इस सब्जी का सेवन करने से न सिर्फ पाचन दुरुस्त रहता है बल्कि ब्लड शुगर भी नॉर्मल रहता है। कम कैलोरी और हाई फाइबर करेला वजन को कंट्रोल रखने में भी असरदार साबित होता है। आइए जानते हैं कि करेला कैसे कब्ज का इलाज कर पाचन को दुरुस्त करता है।

    कब्ज क्यों होती है?

    कब्ज की समस्या कई कारणों से हो सकती है। डाइट में फाइबर की कमी, पर्याप्त पानी न पीना, शारीरिक गतिविधि कम होना और बार-बार शौच की इच्छा को रोकना इस बीमारी के कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं। इन वजहों से मल कठोर हो सकता है और उसे बाहर निकालने में अधिक जोर लगाना पड़ सकता है। लंबे समय तक कब्ज रहने पर बवासीर या गुदा में दरार जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    बदलता लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, कम पानी का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण आज कई लोग पाचन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कब्ज होने के लक्षणों की बात करें तो मल का कठोर होना, शौच करने में अधिक समय लगना, पेट भारी या फूला हुआ महसूस होना और पेट पूरी तरह साफ न होने जैसा लगना इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। डाइट में पर्याप्त फाइबर और पानी की कमी होने पर कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में रोजाना की डाइट में फाइबर से भरपूर सब्जियों को शामिल करना मददगार हो सकता है।

    फाइबर रिच डाइट पाचन को करती है दुरुस्त

    कब्ज से राहत के लिए पर्याप्त फाइबर, पानी, फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को डाइट में शामिल करना पाचन तंत्र के लिए जरूरी है। फाइबर मल को नरम करने और आंतों की सामान्य गतिविधि को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसलिए रोजाना के संतुलित आहार में फाइबर वाली सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। कड़वे स्वाद वाली हरी सब्जी करेला फाइबर और कई पोषक तत्वों का स्रोत है। इसे संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाने से डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। पर्याप्त फाइबर और पानी का सेवन मल त्याग को आसान बनाने में मददगार हो सकता है।

    गैस और पेट फूलने में करेला की क्या भूमिका है?

    कब्ज के साथ कई लोगों को पेट फूलना, गैस और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं। ऐसे में हल्का और संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ मददगार हो सकते हैं। करेला एक ऐसी सब्जी है जो गैस और अपच का इलाज करने में असरदार साबित हो सकता है।

    कब्ज के लिए करेले की सब्जी खाएं या पिएं जूस

    कब्ज और पाचन को बेहतर रखने के लिए करेले को सब्जी के रूप में खाना ज्यादा बेहतर माना जा सकता है। इसकी वजह यह है कि करेले में मौजूद फाइबर का लाभ सब्जी खाने पर मिलता है, जबकि जूस बनाने के दौरान फाइबर की मात्रा कम हो सकती है। फाइबर मल को नरम करने और नियमित मल त्याग में मदद करता है। करेले का जूस कब्ज का इलाज या पेट साफ करने वाला डिटॉक्स ड्रिंक नहीं है। इसलिए कब्ज के लिए केवल करेले के जूस पर निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त पानी, फाइबर से भरपूर फल-सब्जियां, साबुत अनाज और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए।

    करेला खाते समय इन बातों का रखें ध्यान

    करेले को अच्छी तरह धोकर साफ तरीके से पका कर खाना बेहतर है। इसे बहुत अधिक तेल में तलने के बजाय कम तेल में पकाना, भाप में तैयार करना या अन्य सब्जियों के साथ बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को करेले से एलर्जी है या उसे खाने से परेशानी होती है तो वो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह ले। अगर कब्ज लंबे समय तक बना रहता है या बार-बार होता है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। करेला या उसका जूस कब्ज, गैस या पाचन संबंधी किसी समस्या का इलाज नहीं है। कब्ज बार-बार होने, लंबे समय तक बने रहने, मल में खून आने, तेज पेट दर्द या अन्य गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और चल रही दवाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • पितृ पक्ष में Car या Property’ की बुकिंग? शास्त्र बताते हैं वो सच, जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे!

    पितृ पक्ष में Car या Property’ की बुकिंग? शास्त्र बताते हैं वो सच, जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे!

    पितृ पक्ष में Car या Property की बुकिंग? शास्त्र बताते हैं वो सच, जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे!

    क्या पितृ पक्ष में कार (Car Booking) या नया घर (Property) बुक कराया जा सकता है? लाखों लोगों के मन में हर साल यही सवाल उठता है. एक ओर परंपरा कहती है कि इस काल में कोई नया मांगलिक कार्य न करें.

    दूसरी ओर, मॉडर्न लाइफस्टाइल और रियल एस्टेट (Real Estate), ऑटो सेक्टर (Auto Sector) की स्कीमें इस समय बुकिंग के लिए लुभाती हैं. तो क्या सचमुच पितृ पक्ष में कार या प्रॉपर्टी (Property) की बुकिंग अशुभ है? शास्त्रों के अनुसार इसका उत्तर आपके सोच से बिल्कुल अलग है.

    पितृ पक्ष का महत्व और क्यों माना जाता है इसे अशुभ काल

    पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) को 16 दिनों का ऐसा समय बताया गया है जब पितरों की आत्मा को तर्पण, दान और श्राद्ध से संतुष्ट किया जाता है. मनुस्मृति कहती है कि श्राद्धकाल में देवकार्य न करें, केवल पितृकार्य करें.

    गरुड़ पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है कि इस समय विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ, व्रत आदि नए कार्य निषिद्ध हैं. इसका तात्पर्य यह है कि यह काल नए मांगलिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि पूर्वजों की शांति के लिए समर्पित है.

    तो क्या बुकिंग भी अशुभ है? शास्त्र से जानें

    शास्त्रों की मानें तो नए कार्य की शुरुआत जैसे रजिस्ट्री, गृहप्रवेश और वाहन की डिलीवरी को निषिद्ध माना गया है. सिर्फ बुकिंग या एडवांस पेमेंट जैसे Token देना, Allotment करना शास्त्रों में इसका प्रत्यक्ष निषेध नहीं.

    इसका कारण है कि बुकिंग केवल एक सहमति होती है, असली स्वामित्व और उपयोग श्राद्ध पक्ष के बाद होता है. कई विद्वान इसे व्यावहारिक कार्य मानकर अनुमति देते हैं, लेकिन सलाह देते हैं कि अंतिम क्रिया पितृ पक्ष के बाद ही करें. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीमाली का भी मत यही है.

    धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु क्या कहता है?

    धर्मसिंधु में लिखा है कि पितृ पक्ष में यज्ञ, विवाह और नूतन कार्य त्याज्य हैं. निर्णयसिंधु भी यही कहता है कि मांगलिक कार्य वर्जित हैं. लेकिन व्यावहारिक कार्य जैसे ऋण चुकाना, पुराने सौदे पूरे करना, बुकिंग या ऐसे कार्यों का स्पष्ट निषेध नहीं है.

    कार या प्रॉपर्टी की बुकिंग क्यों होती है इस समय?

    रियल एस्टेट कंपनियां पितृ पक्ष और नवरात्रि के बीच ऑफर लॉन्च करती हैं. ऑटो कंपनियां एडवांस स्कीमें चलाती हैं ताकि डिलीवरी नवरात्रि या दशहरा पर दी जा सके. खरीदार भी सोचते हैं कि बुकिंग अभी, डिलीवरी शुभ मुहूर्त में लें, इससे व्यावहारिक और धार्मिक दोनों दृष्टि सुरक्षित रहते हैं.

    अगर पितृ पक्ष में बुकिंग करनी ही पड़े

    यदि आपको इस समय बुकिंग करनी ही पड़े तो शास्त्रों के अनुसार बुकिंग से पहले पितरों का स्मरण करें और जल व तिल तर्पण करें. मन ही मन प्रार्थना करें पितृदेव प्रसन्न हों, यह सौदा सभी के कल्याण का कारण बने. डिलीवरी या रजिस्ट्री सर्वपितृ अमावस्या के बाद करें. चाहें तो बुकिंग राशि देते समय एक रुपया दान और जल अर्पित कर लें.

    शास्त्रीय प्रमाण और तर्क

    गरुड़ पुराण के अनुसार श्राद्धकाल में मांगलिक कर्मों का त्याग करना चाहिए. मनुस्मृति कहती है कि पितृ पक्ष केवल पितरों की तृप्ति के लिए है, अन्य किसी देवकार्य के लिए नहीं.

    आधुनिक पंडितों की राय है कि बुकिंग यानी जो केवल भविष्य की तैयारी है अशुभ नहीं, लेकिन स्वामित्व ग्रहण अर्थात डिलीवरी या रजिस्ट्री पितृ पक्ष के बाद ही करें.

    पितृ पक्ष समाप्ति और शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या के बाद से ही मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे. नवरात्रि से लेकर दिवाली तक का समय प्रॉपर्टी खरीद और वाहन खरीदने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

    कॉर्पोरेट और रियल एस्टेट की दृष्टि से संकेत

    कंपनियां जानबूझकर पितृ पक्ष में बुकिंग ऑफर निकालती हैं ताकि शुभ नवरात्रि (Shardiya Navratri) पर डिलीवरी (Delivery) की लहर आ सके.

    इसका एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी है लोग नवरात्रि (Navratri), दशहरा (Dussehra) और दीवाली (Diwali) को शुभ मानते हैं, और इस समय नए घर (House) या कार (New Car) खरीदना करना चाहते हैं. शास्त्र और कॉर्पोरेट मॉडल यहां मिलते हैं कि बुकिंग अभी, डिलीवरी बाद में.

    पितृ पक्ष में कार (Car) या प्रॉपर्टी की डिलीवरी, रजिस्ट्री, गृहप्रवेश (Grah Pravesh) निषिद्ध है. केवल बुकिंग या एडवांस टोकन देना शास्त्रसम्मत रूप से वर्जित नहीं है, क्योंकि वास्तविक स्वामित्व बाद में आता है.

    बेहतर यही होगा कि आप बुकिंग करें तो भी अंतिम चरण सर्वपितृ अमावस्या के बाद ही पूरा करें.

    Q1. क्या पितृ पक्ष में नया वाहन खरीदना चाहिए?नहीं, शास्त्रों के अनुसार यह अशुभ माना जाता है. डिलीवरी पितृ पक्ष के बाद करें.

    Q2. क्या केवल बुकिंग करना ठीक है?हां, बुकिंग मात्र पर शास्त्रों में निषेध नहीं है, बशर्ते डिलीवरी बाद में हो.

    Q3. क्या पितृ पक्ष में गृहप्रवेश हो सकता है?नहीं, गृहप्रवेश श्राद्ध पक्ष में वर्जित है.

    Q4. पितृ पक्ष में कौन से कार्य वर्जित हैं?विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ, नूतन वस्तु ग्रहण, वाहन, प्रॉपर्टी डिलीवरी आदि.

    Q5. इस दौरान कौन से कार्य शुभ हैं?श्राद्ध, तर्पण, दान, पितरों का स्मरण और पूजा-पाठ.

    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है .

  • कैब ड्राइवर से ‘लेकर’ एग्जाम सेंटर तक, महिला ने बताए 3 परेशान करने वाले अनुभव, बोली- हर लड़की की अपनी कहानी है.

    कैब ड्राइवर से ‘लेकर’ एग्जाम सेंटर तक, महिला ने बताए 3 परेशान करने वाले अनुभव, बोली- हर लड़की की अपनी कहानी है.

    कैब ड्राइवर से ‘लेकर’ एग्जाम सेंटर तक, महिला ने बताए 3 परेशान करने वाले अनुभव, बोली- हर लड़की की अपनी कहानी है.

    महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अक्सर उन्हें सावधान रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनमें महिला को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर उसे हर समय अपनी सुरक्षा को लेकर इतना सतर्क क्यों रहना पड़ता है। सोशल मीडिया पर एक महिला ने अपने साथ हुई ऐसी ही तीन घटनाएं साझा की हैं, जिनके बाद महिलाओं की सुरक्षा और रोजमर्रा के अनुभवों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    महिला ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में बताया कि अलग-अलग मौकों पर पुरुषों के कुछ व्यवहार ने उन्हें इतना असहज किया कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर काफी चिंता हुई। उनका कहना था कि ऐसी घटनाओं के बाद कई महिलाएं खुद से ही सवाल करने लगती हैं कि उन्होंने क्या पहना था, कहां जा रही थीं या कहीं उनकी तरफ से कोई ऐसी बात तो नहीं हुई, जिसे गलत तरीके से लिया गया।

    पहली घटना ने महिला को घर से निकलने तक से डरा दिया

    महिला ने बताया कि पहली घटना सुबह करीब 6 बजे की है। वह गाजियाबाद से गुरुग्राम जाने के लिए कैब बुक कर रही थीं। पहली कैब काफी देर तक आगे नहीं बढ़ी, इसलिए उन्होंने उसे कैंसिल कर दूसरी कैब बुक करने का फैसला किया।

    कुछ देर बाद पहली कैब का ड्राइवर उनके घर पहुंच गया। महिला के मुताबिक, ड्राइवर ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कैब बुक की थी। महिला ने बताया कि उन्होंने कैब कैंसिल कर दी है और अब दूसरी कैब से जाएंगी।

    इसके बावजूद ड्राइवर ने उनसे गेट खोलने के लिए कहा और यह भी कहा कि वह खुद उन्हें गुरुग्राम छोड़ देगा। महिला ने गेट खोलने से इनकार किया और यहां तक कहा कि अगर कोई कैंसिलेशन चार्ज बनता है तो वह देने के लिए तैयार हैं। लेकिन उनके मुताबिक, ड्राइवर लगातार गेट खोलने की बात कहता रहा।

    इस घटना से महिला काफी डर गईं। उन्होंने बताया कि वह घर के अंदर घबराई हुई थीं। आखिरकार उन्होंने अपनी कैब भी कैंसिल कर दी और उस दिन गुरुग्राम जाने का प्लान छोड़ दिया। उन्हें इस बात की चिंता थी कि ड्राइवर उनका घर देख चुका था और उनका चेहरा भी पहचानता था।

    दूसरी घटना में रात के समय मचा था डर

    महिला ने 2019 की एक घटना भी साझा की। उस समय वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं और एक पीजी में रहती थीं।

    एक रात उनके कुछ दोस्त देर से वापस लौट रहे थे। अचानक वे भागते हुए पीजी पहुंचे और सभी को गेट बंद करके अंदर रहने के लिए कहा।

    महिला के मुताबिक, उनके दोस्तों ने कुछ लोगों को बाइक छोड़कर पीजी की दिशा में आते देखा था। उस समय उन्हें पूरी तरह समझ नहीं आया कि आखिर स्थिति क्या थी, लेकिन उस घटना ने उनके मन में डर जरूर पैदा कर दिया।

    एग्जाम सेंटर पर सीट नंबर को लेकर किया गया कमेंट

    महिला ने तीसरी घटना को हाल की बताया। वह NET परीक्षा देने के लिए लखनऊ गई थीं। परीक्षा केंद्र पर एक कोऑर्डिनेटर उनके दस्तावेज चेक कर रहा था। इसी दौरान उनकी सीट संख्या 69 देखकर उसने कथित तौर पर एक ऐसा कमेंट किया, जिससे महिला असहज हो गईं।

    महिला के मुताबिक, उन्होंने किसी से बातचीत या दोस्ताना व्यवहार करने की कोशिश नहीं की थी। इसके बावजूद उस टिप्पणी ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं कोई उन्हें गलत नजर से तो नहीं देख रहा।

    इसका असर उनकी परीक्षा पर भी पड़ा। महिला ने बताया कि वह पूरे एग्जाम के दौरान इस घटना को लेकर परेशान रहीं और इसी वजह से एक सवाल भी मिस कर दिया।

    बोलीं- किसी पर आरोप नहीं, बस अपना अनुभव बता रही हूं

    महिला ने साफ किया कि उनका मकसद किसी व्यक्ति पर सीधे आरोप लगाना नहीं है। वह सिर्फ यह बताना चाहती हैं कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाएं भी किसी महिला के मन पर कितना असर डाल सकती हैं।

    उनके मुताबिक, कई बार कोई घटना बाहर से छोटी लग सकती है, लेकिन उस समय महिला के मन में पैदा होने वाला डर और असहजता काफी बड़ी होती है।

    सोशल मीडिया पर महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

    महिला का वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। खासतौर पर कई महिलाओं ने कहा कि उनके साथ भी कभी न कभी ऐसी परिस्थितियां हुई हैं, जब उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर

     

     

     
     
  • कमरे में नग्न हालत’ में मिली विधवा महिला की लाश, रेप के बाद मर्डर की आशंका; हड़ंकप.

    कमरे में नग्न हालत’ में मिली विधवा महिला की लाश, रेप के बाद मर्डर की आशंका; हड़ंकप.

    कमरे में नग्न हालत’ में मिली विधवा महिला की लाश, रेप के बाद मर्डर की आशंका; हड़ंकप.

    बिहार के गयाजी में विधवा महिला की नग्न लाश मिलने से सनसनी फैल गई है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मानपुर के मल्लाह टोली की घटना के बाद इलाके के लोग दहशत में हैं। महिला की उम्र 50 साल बताई जा रही है और वो मूख बधिर बताई जा रही हैं। शक जताया जा रहा है कि रेप के बाद महिला की हत्या की गई है। जानकारी के मुताबिक, यह महिला घर में अकेली रहती थीं और उनकी कोई संतान नहीं थी। महिला के सिर पर गैस सिलेंडर से हमले के निशान पाए गए हैं। कमरे में चारों तरफ खून बिखरा मिला है।

    आशंका है कि सिलेंडर से हमला कर महिला की जान ली गई है। इधर इस सनसनीखेज घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे के भी कान खड़े हो गए। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए सिटी एसपी अभिनव और मुफस्सिल थानाध्यक्ष घटनास्थल पहुंचे हैं। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गहरी तफ्तीश में जुटी है। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ भी की है। पुलिस ने घटनास्थल की घेराबंदी कर दी है। कमरे से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं। डॉग स्क्वायड की मदद से भी अपराधियों तक पहुंचने के लिए सुराग तलाशे जा रहे हैं।

    सिटी एसपी अभिनव कुमार ने बताया कि हत्या के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। महिला के साथ दुष्कर्म हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम के बाद ही हो सकेगी। पुलिस परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। मामले में संभावित सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम और एफएसएल जांच के बाद ही महिला की मौत की वजह का पता चल सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने पुलिस ने महिला के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। पुलिस अब आगे की कार्रवाई में जुटी है।

  • 13 लाख कैश, 88 KG ‘चांदी’ और ब्लैंक चेक… दो बहनों के घर छापे में मिली अकूत दौलत, महिला ‘साहूकारों’ की कहानी:

    13 लाख कैश, 88 KG ‘चांदी’ और ब्लैंक चेक… दो बहनों के घर छापे में मिली अकूत दौलत, महिला ‘साहूकारों’ की कहानी:

    13 लाख कैश, 88 KG ‘चांदी’ और ब्लैंक चेक… दो बहनों के घर छापे में मिली अकूत दौलत, महिला ‘साहूकारों’ की कहानी:

    महाराष्ट्र के वाशिम में साहूकारी के खिलाफ सहकार विभाग और पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. यहां लखाला इलाके में रहने वाली दो सगी बहनों के घर पर छापेमारी के दौरान 13 लाख रुपये नकद और करीब 2 करोड़ रुपये कीमत की 88 किलो चांदी बरामद हुई. टीम ने ब्लैंक चेक, कोरे बॉन्ड, साहूकारी के लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और दूसरे दस्तावेज भी जब्त किए हैं.

    मामला वाशिम के लखाला परिसर का है. अलका वायेचाल और प्रिया वायेचाल नाम की दो सगी बहनों के खिलाफ सब रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायत की गई थी. शिकायत में दोनों पर अवैध तरीके से साहूकारी करने का आरोप लगाया गया. शिकायत मिलने के बाद सब रजिस्ट्रार ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी. इसके बाद जिला अधिकारी की देखरेख में सहकार विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीमें बनाई गईं. टीमों ने दोनों महिलाओं के घरों पर कार्रवाई की.

    कार्रवाई के दौरान टीम को घर से बड़ी मात्रा में नकदी और चांदी मिली. अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी में 13 लाख रुपये कैश बरामद हुआ. इसके अलावा करीब 88 किलो चांदी भी मिली, जिसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये बताई गई है.

    लेकिन जांच टीम की नजर सिर्फ कैश और चांदी पर नहीं रुकी. तलाशी के दौरान कई ब्लैंक चेक और कोरे बॉन्ड भी मिले. इसके अलावा साहूकारी के लेनदेन से संबंधित रजिस्टर और दूसरे दस्तावेज भी बरामद किए गए. इन सभी सामान का पंचनामा किए जाने के बाद उन्हें जब्त कर लिया गया.

    इस कार्रवाई में ब्लैंक चेक और कोरे बॉन्ड की बरामदगी भी अहम मानी जा रही है. ये दस्तावेज किस-किस व्यक्ति से जुड़े हैं और इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता था, इसकी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.

    इसी तरह, साहूकारी के लेनदेन से संबंधित रजिस्टर और दूसरे दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी. इन रिकॉर्ड से कथित तौर पर किए गए लेनदेन, रकम और संबंधित लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है. फिलहाल जब्त किए गए सामान और दस्तावेजों की जांच की जा रही है.

    वाशिम के जिला सब रजिस्ट्रार अधिकारी माणिक लटपटे ने बताया कि दोनों महिलाओं के घर पर छापे के दौरान 13 लाख रुपये नकद, लगभग 2 करोड़ रुपये कीमत की 88 किलो चांदी, ब्लैंक चेक, कोरे बॉन्ड और साहूकार लेनदेन से जुड़े रजिस्टर जब्त किए गए हैं. उन्होंने बताया कि सभी सामान को पंचनामा करने के बाद जब्त किया गया है. बरामदगी के आधार और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले की तस्वीर और साफ होगी.

    प्रशासन ने लोगों से मांगी जानकारी

    कार्रवाई के बाद सहकार विभाग ने वाशिम के लोगों से अवैध साहूकारी की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने की अपील की है. अधिकारियों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को अपने इलाके में अवैध साहूकारी की जानकारी है तो वह इसकी शिकायत संबंधित विभाग से कर सकता है.

    सब रजिस्ट्रार माणिक लटपटे ने कहा कि शिकायत करने वाले व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं होगी. प्रशासन का कहना है कि ऐसी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. अब जांच एजेंसियां बरामद रजिस्टर, चेक और बॉन्ड की पड़ताल कर यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित साहूकारी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इन दस्तावेजों में किन लोगों के लेनदेन दर्ज हैं.