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  • क्या बादाम खाने से ‘आंखों’ की रोशनी बढ़ सकती है? जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य.

    क्या बादाम खाने से ‘आंखों’ की रोशनी बढ़ सकती है? जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य.

    क्या बादाम खाने से ‘आंखों’ की रोशनी बढ़ सकती है? जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य.

    अक्सर हमने अपने बड़े-बुजुर्गों से सुना है कि अगर बच्चे का दिमाग पढ़ाई में कमजोर है, उसको याद करने में दिक्कत होती है तो उसे बादाम खिलाएं। दादी-नानी आज भी कहती हैं कि रोज बादाम खाने से आंखों की रोशनी बेहतर होती है और चश्मे की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन क्या ये सिर्फ पीढ़ियों से चली आ रही बातें हैं या इनके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार भी है? क्या बादाम सच में दिमाग और आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट और वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो बादाम में विटामिन E, राइबोफ्लेविन, फोलेट, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं। विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो मस्तिष्क की कोशिकाओं (Brain Cells) और आंखों के पतले ऊतकों को ऑक्सीडेटिव तनाव और फ्री-रेडिकल्स के नुकसान से बचाता है। इसके नियमित सेवन से बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होने की गति धीमी होती है और आंखों में मोतियाबिंद या मैकुलर डिजनरेशन का जोखिम कम हो सकता है। हम सभी जानते हैं कि हमारी हेल्दी डाइट हमारी सेहत पर अहम रोल निभाती है, बादाम भी उसी का हिस्सा है।

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री ने बताया अगर आप आंखों को पूरा पोषण देना चाहते हैं और नेचुरल तरीके से आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो आप बादाम का सेवन खास तरीके से करें। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक बादाम को रातभर पानी में भिगोकर और उसका छिलका उतारकर उसे पीस लें तो उसकी तासीर नॉर्मल हो जाती है और शरीर इसके पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। आइए जानते हैं कि बादाम का सेवन करने से आंख, ब्रेन और सेहत पर कैसा होता है असर।

    बादाम कैसे ब्रेन पर करता है असर?

    बादाम एक ऐसा सूखा ड्राई फ्रूट है जिसमें विटामिन E, राइबोफ्लेविन, फोलेट और ओमेगा-3 फैटी एसिड मौजूद होता हैं। ये पोषक तत्व मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। Brain Research Bulletin में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक बादाम का नियमित सेवन मस्तिष्क में ‘एसिटाइलकोलाइन’ नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बढ़ाता है। एसिटाइलकोलाइन वो रसायन है जो न्यूरॉन्स के बीच संदेश भेजने, ध्यान केंद्रित करने और याददाश्त को मजबूत करने के लिए जिम्मेदार होता है।

    बादाम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, खासकर विटामिन E मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। न्यूरोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार, विटामिन E मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी समस्याओं का जोखिम कम होता है। बादाम में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, ओमेगा-6 फैटी एसिड और फोलेट मस्तिष्क की नसों (Neurons) की झिल्ली को लचीला और हेल्दी बनाए रखते हैं। इससे दिमाग नई चीजें सीखने और जानकारी को लंबे समय तक याद रखने में अधिक सक्षम बनता है। Purdue University द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक दोपहर के खाने के समय बादाम खाने से Blood Sugar का स्तर कंट्रोल रहता है। इससे दोपहर में होने वाली दिमागी थकान कम होती है। बादाम में राइबोफ्लेविन (विटामिन B2) और एल-कार्निटाइन जैसे पोषक तत्व होते हैं जो दिमागी गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ न्यूरल पाथवे (Neural Pathways) में सुधार करते हैं।

    बादाम का सेवन कैसे आंखों के लिए असरदार है?

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री ने बताया अगर आप आंखों को पूरा पोषण देना चाहते हैं और नेचुरल तरीके से आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो आप बादाम का सेवन खास तरीके से करें। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए आप बादाम को दूध के साथ और काली मिर्च के साथ कॉम्बिनेशन करके खाएं। इस तरह बादाम का सेवन आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और आंखों की रोशनी बढ़ाता है। आंखों की हेल्थ के लिए आप डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता, बादाम, अखरोट और आंवला का भी सेवन करें।

    बादाम में मौजूद विटामिन E एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है। यह उम्र के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं की गति धीमा कर सकता है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, बादाम आंखों की सेहत और रोशनी को लंबे समय तक बनाए रखने में बहुत कारगर है। इसमें मुख्य रूप से विटामिन E, जिंक (Zinc) और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं जो आंखों की आंतरिक संरचना को बनाए रखते हैं।

    अमेरिका के National Eye Institute द्वारा की गई Age-Related Eye Disease Study के मुताबिक विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। बादाम में मौजूद विटामिन E रेटिना की हेल्दी कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है। एक मुट्ठी बादाम से आपको अपनी दैनिक जरूरत का लगभग 48-50% विटामिन E मिल जाता है, जो आपकी आंखों की हिफाजत करता है। आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों के मुताबिक रोजाना बादाम का सेवन आंख से लेकर ब्रेन तक के लिए उपयोगी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। बादाम या कोई भी घरेलू नुस्खा किसी चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं है। आंखों की समस्या या कमजोर याददाश्त के लिए हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें।

  • शारदीय नवरात्रि 9 नहीं: बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें.

    शारदीय नवरात्रि 9 नहीं: बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें.

    शारदीय नवरात्रि 9 नहीं: बल्कि 10 दिन की होगी, कलश स्थापना, अष्टमी-नवमी कब देखें.

    Shardiya Navratri 2026: देवी के भक्तों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है, इस बार शारदीय नवरात्रि बहुत खास रहेगी क्योंकि 2026 में शारदीय नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिन की होगी. माता की पूजा के लिए 10 दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

    इस बार नवरात्रि के क्रम में एक तिथि की पुनरावृत्ति हो रही है. इसे तिथि वृद्धि कहा जाता है. इसी वजह से इस बार नवरात्रि 10 दिन तक चलने वाली है. कौन सी तिथि दो दिन तक रहेगी जान लें.

    इस बार 10 दिन की क्यों है नवरात्रि?

    सामान्य तौर पर प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रि नौ दिनों की होती है लेकिन 2026 में पंचांग की तिथियों में विशेष स्थिति बन रही है. सप्तमी तिथि दो दिन यानी 17 और 18 अक्टूबर को पड़ रही है. इसके चलते नवरात्रि का एक दिन बढ़ गया है और ये पर्व 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेगा.

    शारदीय नवरात्रि 10 या 11 अक्टूबर से

    पंचांग की गणना के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात लगभग 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. हिंदू परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, यानी जिस तिथि में सूर्योदय होता है वही पूरे दिन मान्य मानी जाती है। इसी कारण नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्तूबर को होगा. इसके बाद अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की क्रमवार पूजा की जाएगी.

    11 अक्टूबर को घटस्थापना

    पंचांग के अनुसार 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होगी. इसी दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी. प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी.

    दिल्ली के लिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा. इसकी अवधि करीब 3 घंटे 52 मिनट है. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना का समय सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा.

    नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी कब है?

    इस बार दुर्गा अष्टमी 18 अक्टूबर रविवार को मनाई जाएगी. इसी दिन मां महागौरी की पूजा का विधान रहेगा. अष्टमी के दिन कन्या पूजन, हवन और देवी आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह करीब 8.27 बजे शुरू होगी और अगले दिन 19 अक्टूबर दोपहर करीब 10.51 बजे तक रहेगी.

    नवमी और दशहरा कब होगा?

    महानवमी 19 अक्टूबर मंगलवार को होगी. इसी दिन नवमी हवन, आयुध पूजा और नवरात्रि पारण से जुड़े अनुष्ठान किए जाएंगे. पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12.50 तक रहेगी. इसी दिन विजयादशमी और दुर्गा विसर्जन भी रहेगा.

    10 दिन की नवरात्रि समृद्धि का प्रतीक

    ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार जब शारदीय नवरात्रि तिथि वृद्धि के कारण 10 दिन की हो तो उसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि में एक अतिरिक्त दिन मिलने का अर्थ देवी आराधना, जप, पाठ और साधना के लिए एक दिन अतिरिक्त अवसर मिलना है.

    Shardiya Navratri 2026: मां दुर्गा इस बार हाथी पर आएंगी, लेकिन उनकी विदाई किस सवारी पर होगी?

    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.

  • आधार से पासपोर्ट तक, भारत में कितने तरह के पहचान पत्र? जानिए किस दस्तावेज का कहां होता है इस्तेमाल.

    आधार से पासपोर्ट तक, भारत में कितने तरह के पहचान पत्र? जानिए किस दस्तावेज का कहां होता है इस्तेमाल.

    आधार से पासपोर्ट तक, भारत में कितने तरह के पहचान पत्र? जानिए किस दस्तावेज का कहां होता है इस्तेमाल.

    भारत में अलग-अलग सरकारी और प्रशासनिक कामों के लिए कई तरह के पहचान दस्तावेज इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि सभी दस्तावेजों का काम एक जैसा नहीं होता। किसी का इस्तेमाल वित्तीय लेनदेन के लिए होता है, तो कोई मतदान, वाहन चलाने, सरकारी योजनाओं या विदेश यात्रा के लिए जरूरी होता है।

    आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले प्रमुख दस्तावेजों में आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और राशन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा भी कुछ योजनाओं और संस्थानों से जुड़े पहचान पत्र होते हैं।

    आधार कार्ड

    आधार कार्ड भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी UIDAI की ओर से जारी किया जाता है। इसमें व्यक्ति को 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या दी जाती है।

    आधार का इस्तेमाल कई सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं में पहचान और पते की पुष्टि के लिए किया जाता है। सरकारी योजनाओं और सब्सिडी से जुड़ी सेवाओं में भी इसकी जरूरत पड़ सकती है। बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन और कई अन्य सेवाओं में भी आधार का उपयोग पहचान सत्यापन के लिए किया जाता है।

    हालांकि आधार को हर परिस्थिति में नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। इसका मुख्य उद्देश्य पहचान की पुष्टि करना है।

    पैन कार्ड

    पैन यानी Permanent Account Number आयकर विभाग की ओर से जारी किया जाता है। इसमें 10 अंकों का अल्फान्यूमेरिक नंबर होता है।

    पैन का मुख्य संबंध आयकर और वित्तीय गतिविधियों से है। आयकर रिटर्न दाखिल करने, कई तरह के बड़े वित्तीय लेनदेन, निवेश, डीमैट अकाउंट और कुछ संपत्ति संबंधी लेनदेन में इसकी आवश्यकता हो सकती है।

    इसलिए पैन कार्ड को मुख्य रूप से वित्तीय पहचान दस्तावेज के तौर पर देखा जाता है।

    वोटर आईडी कार्ड

    वोटर आईडी भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी किया जाता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण इस्तेमाल चुनाव के दौरान मतदाता की पहचान से जुड़ा है।

    लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों में मतदान के लिए मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने में इसका इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि मतदान के लिए केवल वोटर आईडी ही एकमात्र स्वीकार्य पहचान दस्तावेज नहीं है; चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेज भी मान्य हो सकते हैं।

    ड्राइविंग लाइसेंस

    ड्राइविंग लाइसेंस संबंधित परिवहन प्राधिकरण की ओर से जारी किया जाता है। यह किसी व्यक्ति को निर्धारित श्रेणी का वाहन चलाने की कानूनी अनुमति देता है।

    ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को संबंधित नियमों और ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। वाहन चलाने की अनुमति के अलावा कई जगहों पर यह पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर भी स्वीकार किया जाता है।

    पासपोर्ट

    पासपोर्ट विदेश मंत्रालय के अधीन पासपोर्ट प्राधिकरण की ओर से जारी किया जाता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान होता है।

    विदेश जाने, इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करने और कई देशों का वीजा हासिल करने के लिए पासपोर्ट आवश्यक होता है। पासपोर्ट व्यक्ति की पहचान और राष्ट्रीयता से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है।

    राशन कार्ड

    राशन कार्ड आम तौर पर राज्य सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़ी व्यवस्था के तहत जारी किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न और अन्य निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    राशन कार्ड में परिवार के सदस्यों की जानकारी दर्ज हो सकती है। कई जगहों पर इसका इस्तेमाल परिवार और पते से जुड़े दस्तावेज के रूप में भी किया जाता है, लेकिन इसकी स्वीकार्यता काम और संबंधित विभाग के नियमों पर निर्भर करती है।

    आयुष्मान कार्ड

    आयुष्मान कार्ड पात्र लाभार्थियों को सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार संबंधी सुविधाओं का लाभ लेने में मदद करता है।

    इसका उद्देश्य मुख्य रूप से पात्र परिवारों को योजना के तहत मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इसे सामान्य पहचान पत्र की बजाय सरकारी स्वास्थ्य योजना से जुड़ा लाभार्थी दस्तावेज समझना ज्यादा उचित है।

    कर्मचारी और अन्य संस्थागत पहचान पत्र

    इसके अलावा सरकारी विभागों, कंपनियों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों की ओर से कर्मचारी या संस्थागत पहचान पत्र भी जारी किए जाते हैं।

    इनका इस्तेमाल संबंधित संस्था के भीतर पहचान साबित करने, परिसर में प्रवेश और कुछ निर्धारित सेवाओं का लाभ लेने के लिए किया जाता है। इसी तरह वरिष्ठ नागरिक कार्ड जैसे दस्तावेज भी कुछ विशेष सुविधाओं और सेवाओं के लिए उपयोग किए जा सकते हैं।

    हर पहचान पत्र का काम अलग

    भारत में कई पहचान दस्तावेज होने की वजह से अक्सर लोगों को इनके इस्तेमाल को लेकर भ्रम होता है। लेकिन इन सभी की भूमिका अलग-अलग है।

    आधार मुख्य रूप से पहचान सत्यापन, पैन वित्तीय और कर संबंधी काम, वोटर आईडी चुनावी पहचान, ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने की अनुमति, पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा और राशन कार्ड सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    इसलिए किसी एक पहचान पत्र को हर काम के लिए अनिवार्य या सभी परिस्थितियों में समान रूप से उपयोगी मानना सही नहीं है। किसी विशेष सेवा के लिए कौन-सा दस्तावेज स्वीकार किया जाएगा, यह संबंधित विभाग या संस्था के मौजूदा नियमों पर निर्भर करता है।

  • पुलिस दीदी को धक्का मारा, फिर थप्पड़ बरसाया; पटना में बीच सड़क महिला पुलिसकर्मी से मारपीट.

    पुलिस दीदी को धक्का मारा, फिर थप्पड़ बरसाया; पटना में बीच सड़क महिला पुलिसकर्मी से मारपीट.

    पुलिस दीदी को धक्का मारा, फिर थप्पड़ बरसाया; पटना में बीच सड़क महिला पुलिसकर्मी से मारपीट.

    बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में महिला पुलिसकर्मी से मारपीट का मामला सामने आया है। रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के खेमनीचक स्थित सुभाष चौक के पास बुधवार देर शाम रोको-टोको अभियान के दौरान पुलिस दीदी के साथ सरेआम मारपीट की गई। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने फुटेज के आधार पर मारपीट करने वाले युवक की पहचान शुरू कर उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, रामकृष्ण नगर थाना की पुलिस दीदी सब इंस्पेक्टर प्रियंका कुमारी, अपनी पांच महिला आरक्षियों के साथ बुधवार की शाम लगभग 6:30 बजे खेमनीचक इलाके में गश्ती कर रही थीं। इसी दौरान सुभाष चौक के पास कुछ युवक संदिग्ध स्थिति में नजर आए। पुलिस दीदी ने रोको-टोको अभियान के तहत युवकों को रोककर उनसे पूछताछ शुरू की।

    बहस के बाद धक्कामुक्की, फिर मारपीट

    इसी दौरान युवकों ने पुलिस की पूछताछ का विरोध करना शुरू कर दिया। एक युवक ने पुलिस दीदी के साथ बहस की और फिर धक्का-मुक्की करने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवक ने कथित तौर पर हाथापाई शुरू कर दी। मारपीट की पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। फुटेज में युवक महिला पुलिसकर्मी पर थप्पड़ बरसाते हुए नजर आ रहा है।

    पटना सदर पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी-2 मनोज कुमार ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने गुरुवार को बताया कि एसआई प्रियंका कुमारी अन्य महिला आरक्षियों के साथ खेमनीचक के पास गश्ती कर रही थीं। तभी यह घटना हुई। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मारपीट करने वाले युवक की पहचान की जा रही है।

  • कैश, मोबाइल और ‘कंडोम’ के पैकेट… किराए के घर में पुलिस की रेड, सामने आई सेक्स रैकेट की कहानी;

    कैश, मोबाइल और ‘कंडोम’ के पैकेट… किराए के घर में पुलिस की रेड, सामने आई सेक्स रैकेट की कहानी;

    कैश, मोबाइल और ‘कंडोम’ के पैकेट… किराए के घर में पुलिस की रेड, सामने आई सेक्स रैकेट की कहानी;

    महाराष्ट्र के लातूर में पुलिस ने एक घर पर छापा मारकर नाबालिग लड़की सहित चार महिलाओं को कथित देह व्यापार के चंगुल से मुक्त कराया है. पुलिस का कहना है कि होलकर नगर इलाके में किराए के मकान में महिलाओं को बुलाकर देह व्यापार की सूचना मिली थी. इसके बाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने मौके पर एक्शन लिया. पुलिस ने इस मामले में एक महिला और उसके पुरुष साथी को पकड़ा है. दोनों मिलकर किराए के मकान में यह गतिविधि चला रहे थे.

    मामला लातूर शहर के होलकर नगर इलाके का है. एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सूचना मिली थी कि एक किराए के मकान में महिलाओं से देह व्यापार कराया जा रहा है. सूचना के आधार पर टीम ने घर पर छापा मारा. मौके से एक नाबालिग लड़की समेत चार महिलाओं को बाहर निकाला गया. पुलिस ने मौके से 2,000 रुपये कैश, मोबाइल और कंडोम के पैकेट सहित करीब 7,000 रुपये का सामान जब्त किया है.

    पुलिस के मुताबिक, इस मामले में प्रियंका और उसके साथी गोविंद को अरेस्ट किया गया है. आरोप है कि प्रियंका ने किराए का मकान लिया था और वहीं महिलाओं को बुलाकर सेक्स रैकेट चलाया जा रहा था. पुलिस के मुताबिक, गोविंद भी इसमें शामिल था. पुलिस को मौके से एक नाबालिग लड़की भी मिली. उसे भी सुरक्षित बाहर निकाला गया. नाबालिग से जुड़े मामले में पुलिस ने POCSO एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की है. पीड़ित महिलाओं को पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मुक्त कराया और आगे की कार्रवाई शुरू की.

    लातूर के एमआईडीसी पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया है. यह कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक डॉ. भागीरथी पवार की देखरेख में की गई. एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के सहायक पुलिस इंस्पेक्टर आजिनाथ पाटील और पुलिसकर्मियों की टीम ने छापेमारी की. अब मामले की आगे की जांच एमआईडीसी पुलिस कर रही है. पुलिस इंस्पेक्टर समाधान चौरे के नेतृत्व में जांच की जा रही है.

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गतिविधि में और कौन-कौन लोग शामिल थे. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि महिलाओं को वहां कैसे लाया गया और इस पूरे नेटवर्क को किस तरह ऑपरेट किया जा रहा था. फिलहाल चार महिलाओं को मुक्त कराया गया है और दो आरोपियों को अरेस्ट किया गया है.

  • सिर्फ मसाला नहीं, दवा बनाने में भी काम आती है दालचीनी? शरीर पर इसके असर को समझें आयुर्वेदिक डॉक्टर से.

    सिर्फ मसाला नहीं, दवा बनाने में भी काम आती है दालचीनी? शरीर पर इसके असर को समझें आयुर्वेदिक डॉक्टर से.

    सिर्फ मसाला नहीं, दवा बनाने में भी काम आती है दालचीनी? शरीर पर इसके असर को समझें आयुर्वेदिक डॉक्टर से.

    दालचीनी केवल भारतीय रसोइयों में खाने का स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाला मसाला भर नहीं है, बल्कि सदियों से इसका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता रहा है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मददगार माने जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा और शुरुआती वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, दालचीनी का इस्तेमाल खासतौर से टाइप-2 डायबिटीज, पाचन संबंधी समस्याओं जैसे गैस, अपच और पेट फूलने, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल के रोगों, सर्दी-जुकाम या श्वसन संबंधी संक्रमण का इलाज करने में किया जाता रहा है। इतना ही नहीं दालचीनी का सेवन जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी स्थितियों में एक स्पोर्टिव रेमेडी के रूप में किया जाता है।

    आदर्श आयुर्वेदिक फार्मेसी, कनखल, हरिद्वार में आयुर्वेद विशेषज्ञ, डॉ. दीपक कुमार (वैद्य) ने बताया दालचीनी को अक्सर लोग खाने के साथ, चाय और दूध के साथ खाते हैं। इस मसाले को मसालों की महारानी माना जाता है। इस मसाले के दो से तीन ही गुण नहीं है बल्कि इसके अनगिनत फायदे हैं। अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो आप एक टुकड़ा दालचीनी का चबा लें। दालचीनी चूसने से मुंह की दुर्गंध कम होती है साथ ही दांतों और मसूड़ों की समस्या भी दूर होती है। दालचीनी की खुशबू और इसके कुछ प्राकृतिक यौगिक मुंह की गंध को कुछ समय के लिए कम कर सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि दालचीनी शरीर पर किस तरह असर करती है ।

    पाचन से जुड़ी बीमारियों का करती है उपचार

    वैद्य दीपक कुमार ने बताया कि मौसम बदलने या दूषित भोजन के कारण होने वाले दस्त में 1 से 2 ग्राम दालचीनी पाउडर पानी के साथ खाने से फायदा हो सकता है। इसके अलावा दालचीनी का सेवन कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए भी असरदार साबित होता है।

    डायबिटीज और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर होता है असर

    दालचीनी का सेवन ब्लड शुगर कंट्रोल करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर भी असर करता है। दालचीनी में मौजूद पॉलीफेनॉल एक ऐसा यौगिक है जो इंसुलिन के काम करने की क्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकता है। हालांकि, डायबिटीज के इलाज के लिए दालचीनी को डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    कोलेस्ट्रॉल करता है कंट्रोल और दिल के लिए है जरूरी

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया दालचीनी को हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्याओं में मदद कर सकती है। इसका सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। ये मासाल ट्राइग्लिसराइड को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। दालचीनी धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मददगार साबित हो सकती है।

    एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन करते हैं कंट्रोल

    दालचीनी में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। इसे गठिया और जोड़ों की सूजन में उपयोगी माना जाता है। जिन लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है वो दालचीनी का सेवन करें तो फायदा होता है।

    वेट लॉस में भी है असरदार

    दालचीनी को वजन घटाने और पेट की चर्बी कंट्रोल करने के लिए भी असरदार माना गया है। यह मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने और कैलोरी बर्न करने में भी असरदार साबित होती है। संतुलित डाइट, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और कैलोरी कंट्रोल करने के साथ ही इस मसाले का सेवन किया जाए तो तेजी से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।

    सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी में है असरदार

    दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और कुछ एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं अगर इसका सेवन तुलसी, अदरक, दालचीनी और शहद के साथ मिलाकर किया जाए तो ये सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी में असरदार होता है। दालचीनी का टुकड़ा या चूर्ण चूसने से गले को आराम मिल सकता है, लेकिन यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज नहीं है।

    दालचीनी के एंटीऑक्सीडेंट गुण

    दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट गुण वाले कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े तंत्र पर प्रभाव डाल सकती हैं। दालचीनी का सेवन चाय के साथ और उसका काढ़ा बनाकर इस्तेमाल करना असरदार साबित होता है।

    दालचीनी का सेवन कैसे और कितनी मात्रा में करें

    रोजाना 1 से 2 ग्राम दालचीनी का सेवन सेहत के लिए पर्याप्त है। दालचीनी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करताहै। कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में दालचीनी लेने से मुंह या पेट में जलन जैसी परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में दालचीनी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: दालचीनी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसका सेवन डॉक्टर की सलाह और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही करें। इसे किसी भी दवा या उपचार का विकल्प न मानें।

  • साल 2026 की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या, अक्टूबर में कब है, नोट करें डेट.

    साल 2026 की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या, अक्टूबर में कब है, नोट करें डेट.

    साल 2026 की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या, अक्टूबर में कब है, नोट करें डेट.

    Shanishchari Amavasya 2026: अक्टूबर 2026 में अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है. खास बात यह है कि ये दिन सर्व पितृ अमावस्या भी है. 3 साल बाद ये संयोग बना है. एक ही दिन पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ शनिश्चरी अमावस्या का संयोग बन रहा है.

    धार्मिक मान्यता में अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी गई है, जबकि शनिवार शनि देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है. ऐसे में इस दिन श्रद्धापूर्वक पितृ कर्म करने के साथ शनि देव से जुड़े दान और पूजा पितरों के साथ शनि देव को भी प्रसन्न करने वाला रहेगा.

    साल की आखिरी शनिश्चरी अमावस्या कब ?

    पंचांग के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिवार 10 अक्टूबर 2026 को होगी. आश्विन कृष्ण अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे तक रहेगी. इस दिन पितृ पक्ष का आखिरी दिन यानी सर्व पितृ अमावस्या भी रहेगी. इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका किसी विशेष तिथि पर श्राद्ध न हो पाया हो.

    क्यों खास है ये शनि अमावस्या

    शनिवार, शनि देव का दिन होता है और अमावस्या पितरों व कर्मों से जुड़ी होती है। जब ये दोनों एक साथ आते हैं, तो माना जाता है कि शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव कम हो सकते हैं और इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और पूजा करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति आती है. इस दिन काले तिल, तेल, उड़द दाल, काले कपड़े आदि का दान करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है तथा जीवन में स्थिरता और सफलता बढ़ती है.

    शनिश्चरी अमावस्या पर शनि देव की पूजा करते समय सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि से जुड़े कष्टों से राहत की कामना की जाती है. इस दिन श्रद्धापूर्वक शनि देव का पूजन करें और उनके समक्ष सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं.

    शनि देव और पितरो को कैसे करें प्रसन्न

    इस दिन गरीब या जरूरतमंद लोगों को जूते-चप्पल, वस्त्र और भोजन का दान कर सकते हैं. दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए. ये न सिर्फ शनि देव बल्कि पितरों को भी संतुष्ट करता है.

    सर्व पितृ अमावस्या पर कुत्ते को भोजन खिलाया जाता ही है. ऐसे में शनिवार को अमावस्या पड़ रही है तो काले कुत्ते के लिए भोग निकाले. इससे शनि देव और पितर दोनों प्रसन्न होंगे.

    पितरों के लिए शाम को सरसों के तेल का दीपक लगाएं. इसी के साथ तेल में खुद का चेहरा देखकर दान भी कर दें. इससे शनि दोष दूर होता है.

    पितृ पक्ष में ये 5 गलतियां करने की भूल न करें, 7 पीढ़ियों तक भुगतना पड़ते हैं ये खतरनाक परिणाम!

    Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.

  • असम के इस गांव; में हर साल क्यों गिरने लगते हैं पक्षी? रहस्यमयी घटना के पीछे की कहानी जानकर चौंक जाएंगे.

    असम के इस गांव; में हर साल क्यों गिरने लगते हैं पक्षी? रहस्यमयी घटना के पीछे की कहानी जानकर चौंक जाएंगे.

    असम के इस गांव; में हर साल क्यों गिरने लगते हैं पक्षी? रहस्यमयी घटना के पीछे की कहानी जानकर चौंक जाएंगे.

    असम के दिमा हसाओ जिले में स्थित जतिंगा गांव लंबे समय से एक रहस्यमयी प्राकृतिक घटना के लिए चर्चा में रहा है। मानसून के बाद हर साल बड़ी संख्या में पक्षी यहां घायल या मृत अवस्था में पाए जाते हैं। इसी वजह से जतिंगा को लंबे समय से ‘बर्ड सुसाइड पॉइंट’ जैसे नामों से जाना जाता है।

    हालांकि वैज्ञानिकों के मुताबिक, पक्षी जानबूझकर अपनी जान नहीं देते। इसके पीछे मौसम, घना कोहरा, तेज हवाएं, कम दृश्यता और कृत्रिम रोशनी जैसे कई प्राकृतिक और पर्यावरणीय कारणों की भूमिका मानी जाती है।

    सितंबर से नवंबर के बीच बढ़ जाती है घटना

    जतिंगा में यह घटना मुख्य रूप से सितंबर से नवंबर के बीच देखने को मिलती है। मानसून के बाद घाटी में मौसम तेजी से बदलता है। इस दौरान घना कोहरा और तेज हवाएं पक्षियों के लिए उड़ान भरना और सही दिशा में नेविगेट करना मुश्किल बना सकती हैं।

    रात के समय जब पक्षी उड़ते हैं तो अंधेरा, कोहरा और हवा की दिशा में बदलाव मिलकर उनकी सामान्य दिशा पहचानने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में वे भटककर जमीन के करीब आ सकते हैं।

    रोशनी भी बन सकती है वजह

    इस पूरी घटना में कृत्रिम रोशनी को भी एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। जब पक्षी खराब मौसम और कम रोशनी के कारण भ्रमित होते हैं, तो वे गांव में मौजूद लैंप या दूसरी प्रकाश स्रोतों की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।

    रोशनी की ओर उड़ते समय घने कोहरे के कारण उन्हें सामने मौजूद पेड़, घर, बांस के खंभे और दूसरी संरचनाएं साफ दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में पक्षियों के इन चीजों से टकराने का खतरा बढ़ जाता है।

    टक्कर से घायल होकर गिर सकते हैं पक्षी

    तेज हवा और कम दृश्यता के बीच उड़ते हुए पक्षी जब किसी पेड़ या दूसरी संरचना से टकराते हैं तो उन्हें गंभीर चोट लग सकती है। कई पक्षी घायल होकर जमीन पर गिर जाते हैं, जबकि कुछ की मौत भी हो सकती है।

    इसी वजह से इस मौसम में जतिंगा में बड़ी संख्या में पक्षियों के मृत या घायल मिलने की घटनाएं सामने आती हैं।

    क्या चुंबकीय क्षेत्र भी है जिम्मेदार?

    जतिंगा की घटना को समझाने के लिए समय-समय पर कुछ अन्य वैज्ञानिक सिद्धांत भी सामने आए हैं। इनमें स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से जुड़ी संभावनाएं भी शामिल हैं।

    एक सिद्धांत के मुताबिक, क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना और भूमिगत जल प्रवाह स्थानीय चुंबकीय परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे पक्षियों की नेविगेशन क्षमता पर असर पड़ने की संभावना हो सकती है। हालांकि इसे इस घटना की अंतिम और पूरी तरह प्रमाणित वजह नहीं माना गया है।

    कभी रहस्य और अंधविश्वास से जुड़ी थी कहानी

    पहले स्थानीय स्तर पर पक्षियों के इस तरह गिरने या मरने को रहस्यमयी और दैवीय घटनाओं से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन समय के साथ पक्षी विज्ञान और पर्यावरण से जुड़े अध्ययनों ने इस घटना को प्राकृतिक परिस्थितियों से जोड़कर समझने की कोशिश की।

    आज जतिंगा की घटना को पक्षियों के ‘आत्महत्या करने’ के बजाय पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण होने वाली असामान्य पक्षी मृत्यु और चोटों के रूप में समझा जाता है।

    अब पक्षियों की सुरक्षा पर दिया जा रहा जोर

    समय के साथ प्रशासन और वन्यजीव संगठनों का ध्यान इस घटना को देखने के बजाय पक्षियों को सुरक्षित रखने पर भी गया है। रात के समय तेज कृत्रिम रोशनी को नियंत्रित करने और संवेदनशील इलाकों में मानवीय गतिविधियों को कम करने जैसे उपायों का उद्देश्य पक्षियों के भटकने और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना है।

    जतिंगा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि जिसे लंबे समय तक ‘पक्षियों की आत्महत्या’ जैसी रहस्यमयी घटना माना गया, उसके पीछे वैज्ञानिकों ने मौसम, भूगोल, प्रकाश और पक्षियों की नेविगेशन संबंधी परेशानियों जैसी संभावित वजहों पर ध्यान दिया है।

    यानी पक्षी यहां अपनी जान देने नहीं आते, बल्कि कुछ खास पर्यावरणीय परिस्थितियां उन्हें ऐसी खतरनाक स्थिति में पहुंचा सकती हैं, जहां उनके घायल होने या मरने का खतरा बढ़ जाता है।

  • बिहार में थाने के सामने: से ‘भाभी’ को उठा ले गया कुख्यात देवर, पिस्टल भिड़ाकर अपहरण:

    बिहार में थाने के सामने: से ‘भाभी’ को उठा ले गया कुख्यात देवर, पिस्टल भिड़ाकर अपहरण:

    बिहार में थाने के सामने: से ‘भाभी’ को उठा ले गया कुख्यात देवर, पिस्टल भिड़ाकर अपहरण:

    बिहार में अब थाने के सामने से भाभी को देवर उठा ले गया। मुजफ्फरपुर जिले में अहियापुर थाने के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल कुख्यात सुमित कुमार ने ब्रह्मपुरा थाने के सामने स्थित दुर्गा मंदिर से अपनी भाभी का हथियार के बल पर अपहरण कर लिया। आरोपी अहियापुर चकगाजी मोहल्ले का निवासी है। वह करीब तीन साल जेल में रहने के बाद डेढ़ माह पहले ही जमानत पर बाहर आया है। उसके भय से उसका सगा बड़ा भाई अशोक साह पत्नी और बच्चों को लेकर सिकंदरपुर में किराए के मकान में रहता है।

    पीड़ित अशोक ने ब्रह्मपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराकर भाई के चंगुल से पत्नी को मुक्त कराने की गुहार लगाई है। अशोक ने पुलिस को बताया है कि 27 सितंबर की शाम लगभग 4:30 बजे उसकी पत्नी सुमन अपनी बड़ी बहन गौरी देवी, उसके पति दीपक साह और उसके बड़े भाई अरुण साह के साथ ब्रह्मपुरा दुर्गा मंदिर गई थी। उसी समय उसका छोटा भाई सुमित सफेद रंग की कार से वहां पहुंचा और हथियार का भय दिखाकर सुमन को जबरन खींचकर कार में बैठा लिया। अशोक का आरोप है कि घटना के समय काफी शोर मचाने के बावजूद चंद कदम की दूरी पर मौजूद ब्रह्मपुरा पुलिस सक्रिय नहीं हुई।दिनदहाड़े थाने के सामने हुई इस वारदात से इलाके में दहशत है।

    बच्चों को भी उठाने की धमकी दे रहा बदमाश

    अशोक के अनुसार अपहरण करने के बाद आरोपित ने बड़े भाई अशोक को फोन कर धमकी दी। उसने कहा कि पुलिस में शिकायत की तो उसकी दोनों बेटियों और बेटे को स्कूल से उठा लेगा और उनकी हत्या कर देगा। धमकी के बाद से पूरा परिवार डरा हुआ है। ब्रह्मपुरा थानेदार विपिन रंजन ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर जांच की जा रही है। पीड़िता की बरामदगी के लिए छापेमारी की जा रही है।

    बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया गया है। अशोक ने आरोप लगाया है कि आरोपितदोनों सुमित लड़कियों के साथ जबरन संबंध बनाकर अश्लील वीडियो बनाने एवं उन्हें ब्लैकमेल करने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा है।

  • ‘साथी पकड़ा गया, ‘मोबाइल तोड़ दो’… मैसेज से खुला साइबर ठगी का खेल, PhD स्टूडेंट के गैंग की कहानी’

    ‘साथी पकड़ा गया, ‘मोबाइल तोड़ दो’… मैसेज से खुला साइबर ठगी का खेल, PhD स्टूडेंट के गैंग की कहानी’

    ‘साथी पकड़ा गया, ‘मोबाइल तोड़ दो’… मैसेज से खुला साइबर ठगी का खेल, PhD स्टूडेंट के गैंग की कहानी’

    उत्तर प्रदेश के बागपत में पुलिस ने इंश्योरेंस अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गैंग के आठ सदस्यों को पकड़ा है. इस गैंग में PhD स्टूडेंट के अलावा ग्रेजुएट, 12वीं पास और पूर्व बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं. आरोपी पॉलिसी रिन्यूअल, बोनस, टैक्स और लैप्स पॉलिसी के नाम पर लोगों से पैसे ट्रांसफर कराते थे.

    एक WhatsApp ग्रुप… उसमें साइबर ठगी करने वाले कई लोग जुड़े हुए थे… काम बंटा हुआ था और देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे लोगों को फोन किए जा रहे थे. फिर एक दिन पुलिस ने गैंग के एक सदस्य को पकड़ लिया. इसके बाद WhatsApp ग्रुप में एक मैसेज आया- ‘साथी पकड़ा गया है, मोबाइल तोड़ दो.’ पुलिस का कहना है कि यह मैसेज एक संकेत था कि गैंग में शामिल लोग एक-दूसरे से लगातार संपर्क में थे और गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सबूत मिटाने की कोशिश कर रहे थे. बागपत पुलिस ने इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गैंग का खुलासा किया है.

    पुलिस ने मेरठ और गाजियाबाद से आठ आरोपियों को पकड़ा है. गिरफ्तार आरोपियों में एक PhD छात्र भी शामिल है. पुलिस के मुताबिक, कुछ आरोपी ग्रेजुएट और इंटर पास हैं, जबकि कुछ पहले निजी बैंक और पेमेंट बैंक में काम कर चुके हैं. इन लोगों पर आरोप है कि ये नामी इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारी बनकर पॉलिसीधारकों को फोन करते थे और रिन्यूअल, बोनस, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या लैप्स पॉलिसी दोबारा शुरू कराने के नाम पर पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे.

    मामले की शुरुआत बागपत साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक शिकायत से हुई. शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि इंश्योरेंस पॉलिसी के रिन्यूअल और दूसरी प्रक्रिया के नाम पर उससे करीब 2.88 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए. बाद में पता चला कि रकम वास्तविक इंश्योरेंस कंपनी के खाते में नहीं गई थी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया. इसके बाद बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और NCRP पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को खंगाला गया. यहीं से जांच धीरे-धीरे उन लोगों तक पहुंची, जो अलग-अलग शहरों में बैठकर पॉलिसीधारकों को फोन कर रहे थे.

    पहले से पता होती थी पॉलिसी की जानकारी

    पुलिस के मुताबिक, गैंग का तरीका थोड़ा अलग था. आरोपी सीधे किसी अनजान व्यक्ति को कॉल कर पैसे नहीं मांगते थे. पहले उनके पास पॉलिसीधारक से जुड़ी जानकारी होती थी. इसी डेटा के आधार पर फोन किया जाता था.

    कॉल करने वाला खुद को किसी नामी इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी या कर्मचारी बताता था. बातचीत के दौरान वह पॉलिसी से जुड़ी ऐसी जानकारियां बताता था, जिससे सामने वाले को लगता था कि कॉल सच में इंश्योरेंस कंपनी से आया है. इसके बाद कहानी आगे बढ़ती थी. कभी कहा जाता कि पॉलिसी लैप्स हो गई है. कभी रिन्यूअल के लिए पैसे मांगे जाते. कहीं बोनस दिलाने के नाम पर रकम मांगी जाती तो कहीं टैक्स या प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर भुगतान कराया जाता.

    पैसा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था. पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान NCRP पोर्टल पर इस गिरोह से जुड़ी 51 शिकायतें सामने आई हैं. इनमें करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी का आंकड़ा सामने आया है.

    पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था. इसके तार मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, लद्दाख और गोवा समेत कई राज्यों तक जुड़े मिले हैं. यानी फोन एक शहर से किया जा रहा था और निशाना देश के किसी दूसरे हिस्से में मौजूद पॉलिसीधारक हो सकता था.

    PhD छात्र भी गैंग में शामिल

    पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों में निशांत कुमार नाम का एक PhD छात्र भी शामिल है. इसके अलावा कुछ आरोपी ग्रेजुएट और कुछ 12वीं पास हैं. पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी पहले प्राइवेट बैंक और पेमेंट बैंक में भी काम कर चुके हैं.

    एसपी बागपत सूरज कुमार राय के मुताबिक, आरोपी कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते थे. पुलिस का कहना है कि लग्जरी जिंदगी जीने और जल्दी पैसा कमाने की चाह में इन लोगों ने साइबर फ्रॉड को कमाई का जरिया बना लिया.

    पुलिस के मुताबिक, गैंग के सदस्य WhatsApp ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हुए थे. इसी ग्रुप पर नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच संपर्क और अपडेट शेयर किए जाते थे. जांच के दौरान पुलिस को तब इस नेटवर्क के तरीके का अंदाजा हुआ, जब एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद WhatsApp ग्रुप पर दूसरे सदस्यों को सतर्क करने वाला मैसेज भेजा गया. मैसेज में कथित तौर पर कहा गया कि साथी पकड़ा गया है और मोबाइल तोड़ दो.

    पुलिस के लिए यह मैसेज अहम सुराग बना. अब जांच इस बात पर भी चल रही है कि ग्रुप में कितने लोग शामिल थे, किसकी क्या भूमिका थी और पॉलिसीधारकों का डेटा आखिर आरोपियों तक पहुंचता कैसे था.

    लग्जरी गाड़ी, बाइक और मोबाइल बरामद

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक स्कॉर्पियो, एक बाइक, 16 मोबाइल, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज, क्रेडिट कार्ड और सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. खास तौर पर उन लोगों की तलाश की जा रही है, जो कथित तौर पर पॉलिसीधारकों का डेटा उपलब्ध कराते थे.

    एसपी सूरज कुमार राय ने लोगों से अपील की है कि इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़ा कोई भी काम अधिकृत कंपनी के एजेंट या आधिकारिक माध्यम से ही करें. अगर कोई फोन करके पॉलिसी बंद होने, बोनस मिलने, टैक्स जमा करने या रिन्यूअल के नाम पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो पहले कंपनी के आधिकारिक माध्यम से इसका पता करें.

    बागपत पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम भी दिया गया है. फिलहाल आठ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं. पुलिस अब उस नेटवर्क की अगली कड़ी तलाश रही है, जहां से पॉलिसीधारकों का डेटा कथित तौर पर इन लोगों तक पहुंचता था. सवाल है कि अगर कॉल करने वाले इतने लोगों की पॉलिसी की जानकारी पहले से जानते थे, तो उन्हें यह डेटा आखिर मिलता कहां से था?