Author: contact.satyareport@gmail.com

  • कब्ज से राहत पाने: के लिए लैक्सेटिव पर न रहें निर्भर, डाइट से लेकर योग तक ये 7 आदतें बना सकती हैं पेट की सेहत बेहतर.

    कब्ज से राहत पाने: के लिए लैक्सेटिव पर न रहें निर्भर, डाइट से लेकर योग तक ये 7 आदतें बना सकती हैं पेट की सेहत बेहतर.

    कब्ज से राहत पाने: के लिए लैक्सेटिव पर न रहें निर्भर, डाइट से लेकर योग तक ये 7 आदतें बना सकती हैं पेट की सेहत बेहतर.

    क्या आप भी कब्ज से परेशान रहते हैं और पेट साफ करने के लिए और कब्ज (Constipation) से तुरंत राहत पाने के लिए हर सुबह लैक्सेटिव या गोलियों का सहारा लेते हैं? गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट के मुताबिक लंबे समय तक इन दवाइयों पर निर्भर रहना आपकी आंतों की कार्यप्रणाली को कमजोर बना सकता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ और पेट को नेचुरल तरीके से साफ करने के लिए दवाइयों से ज्यादा आपकी डाइट और लाइफस्टाइल मायने रखता है। डाइट, पर्याप्त पानी और नियमित योग जैसे छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव न केवल कब्ज की समस्या को जड़ से दूर कर सकते हैं, बल्कि आपकी आंतों की सेहत (Gut Health) को भी मजबूत बनाते हैं।

    भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक कब्ज आजकल एक आम समस्या बन गई है। कई लोग सुबह पेट साफ न होने पर तुरंत हर्बल चाय, अरंडी का तेल या दूसरी लैक्सेटिव दवाओं का सहारा लेने लगते हैं जिसके सेहत पर साइड इफेक्ट होते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कब्ज से राहत पाने के लिए सबसे पहले रोज की दिनचर्या, खानपान, पानी और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ लोगों में नियमित रूप से फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त पानी और हल्की एक्सरसाइज करने से मल त्याग को नियमित रखने में मदद मिल सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ऐसी कौन-कौन सी 5 आदतें है जो कब्ज का इलाज कर सकती है और पाचन को दुरुस्त कर सकती हैं।

    सुबह की शुरुआत करें पानी से

    हंसा जी योगेंद्र ने बताया अगर आप कब्ज से परेशान रहते हैं तो आप सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। रात भर सोने के बाद सुबह पानी का सेवन बॉडी को हाइड्रेट करता है और पाचन को दुरुस्त करता है। पानी पीने के बाद आप हल्की पेट की एक्सरसाइज या मूवमेंट कर सकते हैं। सुबह शौचालय जाने के लिए नियमित समय तय करना भी कब्ज से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है। अगर तुरंत मल त्याग न हो तो ज्यादा जोर न लगाएं। शरीर को धीरे-धीरे नियमित रूटीन की आदत डालने की कोशिश करें।

    खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं

    कब्ज से बचाव के लिए डाइट में पर्याप्त फाइबर लेना बेहद जरूरी है। रोज करीब 25-30 ग्राम फाइबर का सेवन करें। हालांकि फाइबर का सेवन व्यक्ति की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है। फाइबर के लिए आप खाने में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फलों का सेवन करें। नाश्ते में वेजिटेबल ओट्स या दलिया, वेजिटेबल पोहा, इडली-सांभर या सब्जियों से बना बेसन या मूंग दाल के चीला का सेवन करें। मूंग, मसूर, चना, राजमा और हरी मटर जैसी दालें और फलियां भी फाइबर के स्रोत हैं। इसके अलावा गेहूं की रोटी, ब्राउन राइस और मिलेट्स को डाइट में शामिल करें कब्ज से बचाव में मददगार साबित होंगे।

    कब्ज से परेशान हैं तो रोज एक फल खाएं

    अगर आप कब्ज से परेशान हैं तो रोजाना एक फल का सेवन करें। फलों में आप पपीता, अमरूद, नाशपाती, अंजीर, कीवी और प्रून जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं। साथ ही थोड़ी मात्रा में नट्स, बीज और सूखे मेवे भी डाइट में शामिल करें।

    मुनक्का और अंजीर का करें सेवन

    अगर आप कब्ज से परेशान रहते हैं तो रोज मुनक्का और अंजीर का सेवन सुबह खाली पेट करें। रात भर भिगोए हुए 8-10 काली किशमिश या मुनक्का सुबह खाएं। दो सूखे अंजीर सुबह खाने से फायदा होता है। ध्यान रखें कि फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का भी सेवन करें। फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने से कुछ लोगों में गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है, इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।

    त्रिफला और इसबगोल का करें सेवन

    कब्ज से राहत पाना चाहते हैं तो आप त्रिफला और इसबगोल का सेवन करें। त्रिफला हरड़, बहेड़ा और आंवला से तैयार किया जाता है और आयुर्वेद में इसे पाचन तथा मल त्याग को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कुछ दिनों तक त्रिफला या इसबगोल खाने से आपको कब्ज से राहत मिल सकती है। इसबगोल एक घुलनशील फाइबर है। यह पानी को सोखकर मल को नरम और भारी बनाने में मदद कर सकता है। इसका सेवन पर्याप्त पानी के साथ करना जरूरी है।

    अरंडी के तेल का करें सेवन

    कब्ज को दूर करने के लिए आप अरंडी के तेल का सेवन करें। अरंडी का तेल यानी Castor oil दूसरे उपायों से अलग है। यह एक stimulant laxative है और मल त्याग करा सकता है, लेकिन इससे पेट में ऐंठन, मितली या दस्त जैसी परेशानी हो सकती है इसलिए रोजाना इसका सेवन नहीं करें।

    कब्ज में मदद कर सकते हैं ये योगासन

    पाचन और पेट की गतिविधियों को सपोर्ट करने के लिए कुछ हल्के योग अभ्यास भी आपकी मदद कर सकते हैं। योगा एक्सपर्ट ने बताया आप कब्ज को दूर करने के लिए रोजाना मार्जरी आसन-बितिलासन (Cat-Cow Pose), पवनमुक्तासन, हल्का स्पाइनल ट्विस्ट, पेट से गहरी सांस लेने का अभ्यास, शवासन और निस्पंद भाव करने से आपको राहत मिल सकती है। इन अभ्यासों को अपनी क्षमता के अनुसार आराम से करना चाहिए और किसी भी आसन में दर्द या असहजता होने पर उसे रोक देना चाहिए। भोजन के बाद हल्की वॉक करना भी रोज की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है।

    बार-बार कब्ज हो तो वजह समझना जरूरी

    अगर अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि के बावजूद कब्ज बार-बार हो रही है तो केवल घरेलू नुस्खे बदलते रहने के बजाय आप कब्ज के कारण का पता लगाएं। कुछ दवाएं, शरीर में पानी की कमी, कम शारीरिक गतिविधि और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी कब्ज में योगदान दे सकती हैं। तनाव और चिंता भी कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पर्याप्त आराम, नियमित नींद, हल्की एक्सरसाइज और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनी डेली लाइफ में शामिल करें आपको फायदा होगा।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कब्ज लंबे समय तक रहने, बार-बार होने या गंभीर लक्षणों के साथ होने पर डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी आयुर्वेदिक उपाय, सप्लीमेंट या लैक्सेटिव का नियमित इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।

  • फांसी के बाद कितनी; देर में होती है मौत, जानिए शरीर पर क्या होता है असर.

    फांसी के बाद कितनी; देर में होती है मौत, जानिए शरीर पर क्या होता है असर.

    फांसी के बाद कितनी; देर में होती है मौत, जानिए शरीर पर क्या होता है असर.

    भारत में मृत्युदंड बेहद गंभीर कानूनी सजा है, जिसे कानून के तहत केवल दुर्लभतम मामलों में लागू किया जाता है। किसी दोषी को फांसी दिए जाने से पहले अदालत से आदेश, जेल प्रशासन की तैयारियां और चिकित्सकीय जांच समेत कई निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

    फांसी की प्रक्रिया को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि फंदे पर लटकाए जाने के बाद आखिर कितनी देर में व्यक्ति की मौत होती है और उस दौरान शरीर में क्या बदलाव आते हैं। इसका जवाब उतना सीधा नहीं है, क्योंकि बेहोशी और मृत्यु का समय इस्तेमाल की गई विधि और शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

    फांसी का आदेश कैसे जारी होता है?

    मृत्युदंड की सजा के बाद उसे लागू करने के लिए अदालत की ओर से निर्धारित कानूनी आदेश जारी किया जाता है। भारत में जेल नियमों के तहत फांसी की तारीख तय होने के बाद कैदी को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयारी और कानूनी उपायों के लिए समय दिया जाता है।

    इस दौरान कैदी को परिवार से मिलने, अंतिम इच्छा या वसीयत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने और धार्मिक या अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि इन व्यवस्थाओं के सटीक नियम संबंधित जेल और लागू कानूनों के अनुसार अलग हो सकते हैं।

    फांसी से पहले जेल में होती हैं तैयारियां

    फांसी की तारीख नजदीक आने पर जेल प्रशासन फांसीघर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच करता है। रस्सी और दूसरे उपकरणों की सुरक्षा संबंधी जांच की जाती है और निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक तैयारियों को पूरा किया जाता है।

    फांसी देने की प्रक्रिया में जेल अधिकारी, मेडिकल अधिकारी और अन्य अधिकृत कर्मचारी मौजूद रहते हैं। सुरक्षा और पहचान से जुड़ी औपचारिकताओं का भी पालन किया जाता है।

    फांसी वाले दिन क्या होता है?

    निर्धारित समय से पहले कैदी की पहचान की पुष्टि की जाती है और उसे अदालत के आदेश से जुड़ी जानकारी दी जाती है। इसके बाद जेल नियमों के अनुसार उसे फांसीघर तक ले जाया जाता है।

    वहां अधिकृत अधिकारी और मेडिकल स्टाफ मौजूद रहते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जल्लाद फंदा तैयार करता है और जेल प्रशासन के अधिकृत अधिकारी के संकेत के बाद फांसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

    फंदे पर लटकने के बाद शरीर में क्या होता है?

    फांसी के दौरान शरीर पर पड़ने वाला प्रभाव केवल गर्दन की चोट तक सीमित नहीं होता। इस्तेमाल की गई विधि के आधार पर गर्दन, रक्त प्रवाह और सांस लेने की प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    लंबे ड्रॉप वाली फांसी में अचानक पड़ने वाला झटका गर्दन की गंभीर चोट और रीढ़ की हड्डी तथा आसपास की संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी परिस्थितियों में गर्दन पर दबाव के कारण मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

    इसी कारण व्यक्ति बेहोश हो सकता है। लेकिन यह कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है कि हर मामले में बिल्कुल कुछ सेकंड में मौत हो जाती है या सभी लोगों में एक निश्चित समय के भीतर दिल और मस्तिष्क पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं। वास्तविक समय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।

    क्या फांसी के तुरंत बाद मृत्यु की पुष्टि हो जाती है?

    फांसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है। जेल प्रशासन केवल यह देखकर मृत्यु की पुष्टि नहीं करता कि व्यक्ति प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है।

    अधिकृत मेडिकल अधिकारी शरीर की जांच करते हैं और मृत्यु की पुष्टि करते हैं। इसके बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत शव को नीचे उतारा जाता है और आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।

    30 मिनट तक शव को लटकाए रखने की बात कितनी सही है?

    कई भारतीय जेल नियमों और पुराने विवरणों में फांसी के बाद कुछ समय तक शव को फंदे पर रहने देने का उल्लेख मिलता है। लेकिन 30 मिनट का समय हर परिस्थिति में सार्वभौमिक चिकित्सकीय नियम है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। मृत्यु की अंतिम पुष्टि अधिकृत चिकित्सकीय अधिकारी की जांच के आधार पर होती है और संबंधित जेल नियमों का पालन किया जाता है।

    इसके बाद पोस्टमॉर्टम तथा शव सौंपने से जुड़ी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।

    आखिर कितनी देर में चली जाती है जान?

    फांसी के बाद बेहोशी और मृत्यु के बीच का समय एक निश्चित संख्या में बताना मुश्किल है। यह फांसी की तकनीक, गर्दन पर पड़े प्रभाव, रक्त प्रवाह और सांस रुकने की स्थिति समेत कई कारकों पर निर्भर करता है।

    इसलिए “फांसी लगते ही कुछ सेकंड में मौत” या “हर व्यक्ति की मौत 3 से 10 मिनट में होती है” जैसे दावों को सार्वभौमिक वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक मृत्यु की पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही की जाती है।

    भारत में मृत्युदंड की पूरी प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत संचालित होती है और इसके हर चरण में संबंधित अधिकारियों की निर्धारित भूमिका होती है।

  • 26 साल का युवक, 46 की महिला और 9 दिन… होटल के कमरे में लटके मिले दोनों के शव, बहराइच पुलिस जांच में जुटी;

    26 साल का युवक, 46 की महिला और 9 दिन… होटल के कमरे में लटके मिले दोनों के शव, बहराइच पुलिस जांच में जुटी;

    26 साल का युवक, 46 की महिला और 9 दिन… होटल के कमरे में लटके मिले दोनों के शव, बहराइच पुलिस जांच में जुटी;

    उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक होटल के कमरे में युवक और महिला की लाश मिलने से हड़कंप मच गया. दोनों पिछले करीब 9 दिनों से होटल में ठहरे हुए थे. गुरुवार को काफी देर तक कमरे से कोई गतिविधि नहीं होने पर होटल कर्मचारियों ने दरवाजा खोला, तो दोनों पंखे से लटके मिले. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी.

    मामला बहराइच के होटल अवध कैलाश का है, जहां 22 सितंबर से 26 साल का युवक रिंकू और 46 साल की महिला पिंकी ठहरी हुई थीं. रिंकू मूल रूप से श्रावस्ती का रहने वाला था, जबकि पिंकी गौतमबुद्ध नगर की रहने वाली और विवाहित बताई जा रही है. दोनों ने होटल में कमरा लेते समय प्राइवेट नौकरी करने और विभागीय काम से बहराइच आने की बात कही थी. इसके बाद होटल प्रबंधन ने उन्हें कमरा दे दिया.

    होटल कर्मचारियों के मुताबिक, दोनों की उम्र में काफी अंतर था, लेकिन उन्होंने इस बारे में उनसे कोई विशेष पूछताछ नहीं की. दोनों सामान्य तौर पर होटल में रह रहे थे और रोजाना अपनी जरूरत के मुताबिक सामान और खाने-पीने की चीजें मंगाते थे. कर्मचारियों ने बताया कि सुबह, दोपहर और शाम को चाय, नाश्ता और खाना समेत अन्य चीजों की डिमांड की जाती थी. होटल में उनके व्यवहार से किसी तरह की असामान्य स्थिति का अंदाजा नहीं लगा.

    गुरुवार को करीब 10 बजे के बाद कमरा नंबर 201 से कोई गतिविधि नजर नहीं आई. काफी समय तक दरवाजा नहीं खुलने और अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर होटल कर्मचारियों को शक हुआ. इसके बाद कमरे को खोला गया, तो अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए. कमरे में रिंकू और पिंकी दोनों के शव पंखे से लटके हुए थे. इसके बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई.

    पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों शवों को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी. शुरुआती तौर पर दोनों के फांसी लगाकर जान देने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पुलिस ने अभी मौत की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है. मौके से ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी या सुसाइड नोट सामने आने की बात नहीं कही गई है, जिससे यह पता चल सके कि दोनों ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया.

    पुलिस अब होटल में दोनों के ठहरने से जुड़ी जानकारी जुटा रही है. कमरे की जांच के साथ-साथ होटल कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है. दोनों के बीच क्या संबंध था और वे 22 सितंबर से बहराइच के इस होटल में क्यों ठहरे थे, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस का कहना है कि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की परिस्थितियों के बारे में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

    फिलहाल, इस मामले में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी वजह अभी सामने नहीं आई है. पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया भी की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि 26 साल के रिंकू और 46 साल की पिंकी की मौत किन परिस्थितियों में हुई.

    पुलिस उपाधीक्षक एन. डी. मिश्रा ने बताया कि बहराइच के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र स्थित होटल अवध कैलाश के कमरा नंबर 201 में एक युवक और युवती के शव फंदे से लटके मिले. होटल मैनेजर के मुताबिक, दोनों 22 सितंबर से पति-पत्नी के रूप में होटल में ठहरे हुए थे. शुक्रवार सुबह कमरे से कोई गतिविधि नजर नहीं आने पर मैनेजर को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी.

    सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और महिला पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचीं. होटल मैनेजर की मौजूदगी में और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराते हुए कमरे का दरवाजा खोला गया, जहां दोनों के शव फंदे से लटके मिले. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है.

  • सोते समय क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? मेडिकल रिसर्च में सामने आया हार्मोनल कारण; जानिए डॉक्टरों की राय.

    सोते समय क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? मेडिकल रिसर्च में सामने आया हार्मोनल कारण; जानिए डॉक्टरों की राय.

    सोते समय क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? मेडिकल रिसर्च में सामने आया हार्मोनल कारण; जानिए डॉक्टरों की राय.

    क्या आप जानते हैं कि सोते समय भी आपका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है? अक्सर हम हाई बीपी का कारण तनाव, खराब डाइट या खराब लाइफस्टाइल मानते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च के मुताबिक शरीर में मौजूद कुछ हार्मोन का असंतुलन भी रात में बीपी बढ़ने की मुख्य वजह बन सकता है। खासकर एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) या कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे हार्मोन नींद के दौरान ब्लड प्रेशर के स्तर को प्रभावित करते हैं। वैज्ञानिकों ने हाई ब्लड प्रेशर के एक ऐसे कारण पर ध्यान दिया है, जो सामान्य जांच में कई बार पकड़ में नहीं आ पाता। यह कारण प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म (Primary Aldosteronism) नाम की हार्मोन संबंधी स्थिति है।

    हमारा एड्रिनल ग्लैंड्स एल्डोस्टेरोन नाम का हार्मोन बनाता हैं। यह शरीर में नमक और पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब शरीर में एल्डोस्टेरोन जरूरत से ज्यादा बनने लगे, तो यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और लंबे समय में दिल के रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।

    रिसर्च में हुआ खुलासा, रात में बढ़ सकता है एल्डोस्टेरोन

    Science Translational Medicine जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म नाम की एक हार्मोन संबंधी बीमारी पर ध्यान दिया गया है। यह स्थिति हाई ब्लड प्रेशर वाले हर पांच में से एक व्यक्ति तक को प्रभावित कर सकती है और इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज और दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इस रिसर्च में ब्रिटेन की University of Bristol और University of Manchester, नॉर्वे की University of Bergen तथा स्टॉकहोम और एथेंस के शोधकर्ता शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों में हार्मोन का उत्पादन दिन के साथ-साथ रात में सोते समय भी अचानक बढ़ सकता है, जबकि सामान्य ब्लड टेस्ट आमतौर पर रात में नहीं किए जाते।

    घर पर 24 घंटे की गई हार्मोन की निगरानी

    शोधकर्ताओं ने U-RHYTHM नाम के एक पोर्टेबल डिवाइस की मदद से मरीजों के हार्मोन स्तर की 24 घंटे तक निगरानी की। यह डिवाइस University of Bristol में विकसित किया गया है। मोबाइल फोन के आकार का यह हल्का उपकरण कमर पर लगाया जाता है और मरीज की स्किन से हर 20 मिनट में हार्मोन के स्तर की जानकारी लेने में मदद करता है। इससे मरीजों की निगरानी अस्पताल या रिसर्च सेंटर में रखने के बजाय उनके घर पर, उनकी नॉर्मल एक्टिविटी के दौरान की जा सकी। इसमें सोने का समय भी शामिल था। इस तरह हार्मोन में होने वाले ऐसे बदलावों को भी देखा जा सका, जो सामान्य जांच के दौरान छूट सकते हैं।

    University of Bristol में Clinical Research Fellow और Bristol Hospitals NHS Foundation Trust में सीनियर क्लीनिकल फेलो, अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक डॉ. थॉमस अप्टन ने बताया प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म हाई ब्लड प्रेशर का एक महत्वपूर्ण कारण है और सेकेंडरी हाइपरटेंशन के सबसे आम कारणों में से एक है। हार्मोन पूरे दिन बदलता रहता है और बीमारी की जांच की प्रक्रिया जटिल होने के कारण कई मामलों में इसका निदान देर से होता है या बीमारी की पहचान ही नहीं हो पाती।

    सामान्य टेस्ट में क्यों छूट सकती है बीमारी?

    रिसर्च के मुताबिक प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म वाले मरीजों में एल्डोस्टेरोन का स्तर हर समय बढ़ा हुआ नहीं रहता। यहां तक कि बीमारी के कुछ गंभीर मामलों में भी ऐसे समय आए, जब हार्मोन का स्तर बीमारी की पहचान के लिए इस्तेमाल की जाने वाली न्यूनतम सीमा से नीचे चला गया। इसके बजाय शोधकर्ताओं को हार्मोन के स्तर में बार-बार बढ़ोतरी के पैटर्न मिले। खास तौर पर रात में सोते समय हार्मोन के अचानक बढ़ने के मामले सामने आए, जबकि शरीर का सामान्य दिन-रात का हार्मोन रिदम बना रहा। रिसर्च के मुताबिक ये हार्मोन स्पाइक एड्रिनल ग्लैंड से निकल रहे थे और उन मरीजों में ज्यादा स्पष्ट थे, जिनकी बीमारी सिर्फ एक एड्रिनल ग्लैंड की समस्या के कारण थी। खास बात यह रही कि प्रभावित एड्रिनल ग्लैंड को सर्जरी से निकालने के बाद ये असामान्य हार्मोन पैटर्न गायब हो गए। इससे शोधकर्ताओं को इस बात का अतिरिक्त प्रमाण मिला कि ये हार्मोन स्पाइक बीमारी से सीधे जुड़े हुए थे।भविष्य में बदल सकता है हाई BP की जांच का तरीका

    University of Bristol के Professor of Medicine और U-RHYTHM तकनीक के आविष्कारक प्रो. स्टैफर्ड लाइटमैन के अनुसार रिसर्च के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि डॉक्टरों को प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म की पहचान करने के तरीके पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो सकती है। भविष्य में केवल एक निश्चित समय पर किए जाने वाले ब्लड टेस्ट की जगह शरीर में हार्मोन के स्तर और उनके दिन-रात के बदलावों की लगातार निगरानी पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। खासकर रात के समय होने वाले हार्मोन बदलाव बीमारी की पहचान के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दिशा में और रिसर्च की जरूरत है। प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म हाई ब्लड प्रेशर का एक ऐसा कारण है, जिसका इलाज संभव है और कुछ मामलों में बीमारी के मूल कारण का इलाज करके इसे ठीक भी किया जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। U-RHYTHM या 24-घंटे हार्मोन निगरानी जैसी तकनीकों व जांचों के लिए हमेशा अपने हृदय रोग विशेषज्ञ या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से संपर्क करें। स्वयं कोई डॉक्टरी निष्कर्ष न निकालें।

  • दुनिया का सबसे ‘ठंडा’ गांव, जहां -50°C में भी चलती है जिंदगी, गाड़ियां बंद करना भी पड़ता है भारी.

    दुनिया का सबसे ‘ठंडा’ गांव, जहां -50°C में भी चलती है जिंदगी, गाड़ियां बंद करना भी पड़ता है भारी.

    दुनिया का सबसे ‘ठंडा’ गांव, जहां -50°C में भी चलती है जिंदगी, गाड़ियां बंद करना भी पड़ता है भारी.

    दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जहां सर्दियों में तापमान बेहद नीचे चला जाता है, लेकिन रूस के साइबेरिया में स्थित ओइम्याकॉन अपनी जमा देने वाली ठंड के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसे अक्सर धरती पर इंसानों की स्थायी आबादी वाली सबसे ठंडी जगहों में शामिल किया जाता है। यहां सर्दियों के दौरान तापमान करीब -50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाना असामान्य नहीं है।

    हैरानी की बात यह है कि इतनी मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद यहां करीब 500 लोग रहते हैं। यहां रहने वाले लोगों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को मौसम के हिसाब से ढाल लिया है। खाना पकाने से लेकर घर गर्म रखने, पानी की व्यवस्था और आने-जाने तक, यहां जीवन का लगभग हर हिस्सा तापमान को ध्यान में रखकर चलता है।

    कितनी खतरनाक होती है यहां की ठंड?

    ओइम्याकॉन की सर्दियां बेहद कठोर होती हैं। इस इलाके में ऐतिहासिक रूप से -67.7 डिग्री सेल्सियस के आसपास का तापमान दर्ज किया गया है, जबकि अक्सर इंटरनेट पर -71.2°C का आंकड़ा भी बताया जाता है, हालांकि उस रिकॉर्ड की माप और आधिकारिक स्थिति को लेकर स्रोतों में अंतर मिलता है।

    इतनी ठंड में शरीर के खुले हिस्से पर कुछ ही समय में फ्रॉस्टबाइट का खतरा पैदा हो सकता है। सांस से निकलने वाली नमी भी चेहरे, पलकों और बालों पर बर्फ की परत जमा सकती है। इसलिए यहां बाहर निकलते समय बेहद गर्म और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े जरूरी होते हैं।

    खेती मुश्किल, इसलिए अलग है लोगों का खाना

    इतनी ठंडे वातावरण में खेती करना बेहद कठिन है। जमीन लंबे समय तक जमी रहने और बेहद कम तापमान के कारण स्थानीय लोगों के लिए पारंपरिक कृषि पर निर्भर रहना आसान नहीं है।

    ऐसे में यहां के पारंपरिक भोजन में पशु उत्पादों की बड़ी भूमिका रही है। घोड़े और रेनडियर का मांस, मछली तथा डेयरी उत्पाद स्थानीय खानपान का हिस्सा हैं। ठंडे मौसम में शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देने के लिए ज्यादा कैलोरी वाला भोजन महत्वपूर्ण माना जाता है।

    जमी हुई मछली को खास पारंपरिक तरीकों से खाने की परंपरा भी इस क्षेत्र में देखी जाती है। यहां का खानपान स्थानीय जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के साथ लंबे समय में विकसित हुआ है।

    गाड़ियां बंद करना क्यों पड़ सकता है मुश्किल?

    ओइम्याकॉन में बेहद कम तापमान का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं, बल्कि मशीनों पर भी पड़ता है। जब तापमान बहुत नीचे चला जाता है तो इंजन ऑयल और दूसरे तरल पदार्थ गाढ़े या जम सकते हैं। इंजन और अन्य मैकेनिकल हिस्सों के लिए भी दोबारा स्टार्ट होना मुश्किल हो सकता है।

    इसी वजह से बेहद ठंडे दिनों में वाहन को लंबे समय तक बंद छोड़ना परेशानी पैदा कर सकता है। कुछ लोग जरूरत के मुताबिक इंजन को चालू रखते हैं या वाहनों को गर्म जगह पर रखने की कोशिश करते हैं।

    मोबाइल फोन, कैमरा और दूसरी बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी इतनी ठंड में सामान्य परिस्थितियों की तुलना में जल्दी बैटरी खो सकती हैं और ठीक से काम करने में परेशानी हो सकती है।

    पानी की व्यवस्था भी आसान नहीं

    ओइम्याकॉन जैसे इलाके में सामान्य प्लंबिंग सिस्टम बनाए रखना बड़ी चुनौती है। पाइपों में मौजूद पानी जम सकता है, जिससे घरों तक पानी पहुंचाना मुश्किल हो जाता है।

    इसलिए यहां पानी की व्यवस्था स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध स्रोतों पर निर्भर करती है। अत्यधिक ठंड के कारण पारंपरिक इंडोर प्लंबिंग की जगह कुछ जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करना पड़ता है। बेहद कम तापमान में सैनिटेशन भी रोजमर्रा की जिंदगी की बड़ी चुनौती बन जाता है।

    घरों को कैसे गर्म रखते हैं लोग?

    यहां घरों का निर्माण और इस्तेमाल इस तरह किया जाता है कि अंदर की गर्मी ज्यादा से ज्यादा समय तक बनी रहे। अच्छी इंसुलेशन व्यवस्था ठंडी हवा को अंदर आने से रोकने में मदद करती है।

    सबसे कड़ाके की ठंड के दौरान हीटिंग व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है। पारंपरिक तौर पर लकड़ी और कोयला जैसे ईंधनों का इस्तेमाल घरों को गर्म रखने के लिए किया जाता रहा है।

    यहां हीटिंग सिर्फ आराम की चीज नहीं, बल्कि अत्यधिक ठंड में सामान्य जीवन बनाए रखने की बुनियादी जरूरत है।

    बाहर निकलते समय बरतनी पड़ती है खास सावधानी

    ओइम्याकॉन में सर्दियों के दौरान बाहर निकलना किसी सामान्य ठंडे शहर में बाहर जाने जैसा नहीं है। तापमान बेहद कम होने पर शरीर से गर्मी तेजी से निकल सकती है।

    चेहरे की खुली त्वचा, उंगलियां, पैर और नाक जैसे हिस्से फ्रॉस्टबाइट की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। लंबे समय तक अत्यधिक ठंड में रहने पर हाइपोथर्मिया का खतरा भी बढ़ जाता है।

    इसीलिए यहां रहने वाले लोगों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनने, शरीर को ढककर रखने और बहुत ज्यादा देर तक खुले वातावरण में न रहने जैसी सावधानियां बरतनी पड़ती हैं।

    इतनी ठंड में आखिर कैसे चलती है जिंदगी?

    ओइम्याकॉन की कहानी सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ ठंड की नहीं, बल्कि इंसानों के वातावरण के अनुसार खुद को ढाल लेने की भी है। यहां रहने वाले लोगों की दिनचर्या, भोजन, घरों की संरचना, परिवहन और पानी की व्यवस्था—सब कुछ मौसम की कठोर परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित हुआ है।

    जहां दुनिया के कई हिस्सों में -10 या -20 डिग्री तापमान भी असामान्य महसूस होता है, वहीं ओइम्याकॉन के लोग इससे कहीं ज्यादा कम तापमान में भी अपनी जिंदगी और रोजमर्रा के काम जारी रखते हैं। यही वजह है कि यह छोटा सा साइबेरियाई गांव दुनिया की सबसे कठोर आबादी वाली जगहों में एक अनोखा उदाहरण माना जाता है।

  • मर्सिडीज में घूम रहा था ‘मास्टमाइंड’ मुनाफे का झांसा देकर 100 करोड़ की ठगी का आरोप, जयपुर में 2 गिरफ्तार

    मर्सिडीज में घूम रहा था ‘मास्टमाइंड’ मुनाफे का झांसा देकर 100 करोड़ की ठगी का आरोप, जयपुर में 2 गिरफ्तार

    मर्सिडीज में घूम रहा था ‘मास्टमाइंड’ मुनाफे का झांसा देकर 100 करोड़ की ठगी का आरोप, जयपुर में 2 गिरफ्तार

    राजस्थान के जयपुर में डिजिटल कॉइन में निवेश के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है. सोडाला थाना पुलिस ने इस मामले में मोहित कालिया और धनश्याम कंवले नाम के आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से मर्सिडीज कार और महंगी बाइक बरामद की गई है.

    मास्टरमाइंड मर्सिडीज में घूम रहे थे, महंगी बाइक भी थी और लोगों को डिजिटल कॉइन में इनवेस्टमेंट कर मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाया जा रहा था. लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो इसी चमक-दमक के पीछे करीब 100 करोड़ रुपये की कथित ठगी की कहानी सामने आई. जयपुर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, ठगी की रकम से महंगी गाड़ियां खरीदी गई थीं और आरोपियों के कब्जे से करोड़ों रुपये कीमत की मर्सिडीज कार और बाइक बरामद की गई है.

    मामला जयपुर के सोडाला थाना क्षेत्र का है. पुलिस का कहना है कि डिजिटल कॉइन में निवेश के नाम पर लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई. इस मामले में मोहित कालिया और धनश्याम कंवले को गिरफ्तार किया है.

    अब आरोपियों से पूछताछ कर इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और निवेशकों से जुटाई गई रकम के बारे में पता किया जा रहा है. सोडाला थानाधिकारी मनोज बेरवाल के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को डिजिटल कॉइन में निवेश करने के नाम पर भारी मुनाफे का भरोसा दिलाया. इसके लिए डिजिटल कॉइन वेबसाइट तैयार की गई थी.

    आरोपियों की ओर से निवेशकों को बताया जाता था कि डिजिटल कॉइन में पैसा लगाने पर उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा. मुनाफे का भरोसा मिलने के बाद लोग निवेश के लिए तैयार होते गए. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सिर्फ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ही लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपने संपर्कों और रिश्तेदारों के जरिए भी निवेशकों को जोड़ा. मोहित कालिया और धनश्याम कंवले पर आरोप है कि उन्होंने रिश्तेदारों के जरिए लोगों को डिजिटल कॉइन में पैसा लगाने के लिए तैयार किया.

    पुलिस का कहना है कि निवेशकों को समय-समय पर भारी मुनाफे का भरोसा दिया जाता था. इसी के साथ डिजिटल कॉइन के नाम पर रकम जमा होती रही. आरोप है कि बाद में कंपनी और संबंधित वेबसाइट को बंद कर दिया गया और आरोपी फरार हो गए. निवेशकों को जब अपने पैसे और रिटर्न नहीं मिला तो मामला पुलिस तक पहुंचा. इस मामले में 1 जनवरी 2026 को सोडाला थाने में FIR दर्ज की गई. केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की.

    पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले सुरागों को जोड़ते हुए आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई गई. इसके बाद पुलिस टीम ने मोहित कालिया और धनश्याम कंवले को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मर्सिडीज कार और Triumph Street Triple बाइक बरामद की. इन वाहनों को ठगी की रकम से खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है.

    100 करोड़ की ठगी की जांच अभी जारी

    करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी का आंकड़ा सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और कितने निवेशकों से रकम जुटाई गई. पुलिस आरोपियों से पूछताछ के जरिए डिजिटल कॉइन वेबसाइट, लोगों से संपर्क करने के तरीके और पैसों के लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटा रही है. फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. मामले की जांच जारी है और पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी की रकम कहां-कहां इस्तेमाल की गई.

  • मेडिकल स्टोर्स पर अब सरकार; की होगी पैनी नज़र, प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री के लिए CCTV अनिवार्य करने का प्रस्ताव!

    मेडिकल स्टोर्स पर अब सरकार; की होगी पैनी नज़र, प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री के लिए CCTV अनिवार्य करने का प्रस्ताव!

    मेडिकल स्टोर्स पर अब सरकार; की होगी पैनी नज़र, प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री के लिए CCTV अनिवार्य करने का प्रस्ताव!

    देश में बिना डॉक्टर की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) के बेची जाने वाली दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। प्रस्तावित नए नियमों के तहत अब मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि शेड्यूल दवाओं की खरीद-बिक्री की पारदर्शी निगरानी की जा सके। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य एंटीबायोटिक्स और आदत बनाने वाली दवाओं के दुरुपयोग को रोकना तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस नए प्रस्ताव में क्या-क्या प्रावधान शामिल हैं और इसका आम जनता व मेडिकल स्टोर संचालकों पर क्या असर पड़ेगा।

    किन दवाओं की केंद्र सरकार करेगा निगरानी?

    केंद्र सरकार दवाओं की बिक्री को लेकर बनाए गए नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य Schedule H, H1 और X श्रेणी की दवाओं की बिक्री और उपलब्धता पर नियामक निगरानी मजबूत करना है। प्रस्तावित बदलावों के जरिए सरकार का मकसद प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की अनधिकृत बिक्री और बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन इनके इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

    सरकार का किन दवाओं पर खास फोकस है और क्या है प्रस्ताव?

    सरकार Schedule H, H1 और X श्रेणी की दवाओं की बिक्री बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचने पर रोक लगाना चाहती है। यह प्रस्ताव पहले औषधि Drugs Consultative Committee (DCC) में चर्चा के लिए लाया गया है, जिसके बाद औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (Drugs Technical Advisory Board – DTAB) के सदस्यों ने भी इस पर विचार-विमर्श किया। प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य बिना डॉक्टर की सलाह या वैध पर्चे के इन दवाओं की बिक्री और आम लोगों तक उनकी पहुंच को कंट्रोल करना है। अगर प्रस्तावित संशोधन लागू होते हैं, तो प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर्स की निगरानी व्यवस्था और कड़ी हो सकती है।

    प्रस्ताव पास होने पर दवा दुकानों के लिए क्या रहेगा नियम

    फिल्हाल इस प्रस्ताव को ड्राफ्ट कर दिया गया है। प्रस्ताव ड्राफ्ट करने का मकसद लोगों से इसके लिए सुझाव मांगना है। लोगों की आपत्तिया और लोगों की रजामंदी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। अगर प्रस्ताव पास हो जाता है तो नियमों के मुताबिक दवा की दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। दवा बेचने वाली मेडिकल दुकानों को बिक्री की रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना होगा।

    थोक बिक्री पर लागू नहीं होगा प्रस्तावित CCTV नियम ड्राफ्ट में प्रस्तावित CCTV व्यवस्था रिटेल स्तर पर प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर होने वाली दवा बिक्री के लिए है। इसमें थोक लेनदेन को बाहर रखा गया है। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों के सुझाव के इंतजार में है। लोगों की रजामंदी जाहिर होने पर ही सरकार अपना आगे कदम बढ़ाएंगी। सरकार का कुछ दवाओं पर निगरानी रखने का मकसद बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाई खाने पर रोक लगाना है। सेल्फ मेडिकेशन हेल्थ के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित Drugs Rules, 1945 में संशोधन के ड्राफ्ट पर आधारित है। प्रस्तावित नियम अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं और इनमें बदलाव संभव है। दवाओं का सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह और वैध प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही करें।

  • मुगल काल में 1 रुपये: में क्या-क्या मिल जाता था? आज वही सामान खरीदने में लगेंगे हजारों रुपये.

    मुगल काल में 1 रुपये: में क्या-क्या मिल जाता था? आज वही सामान खरीदने में लगेंगे हजारों रुपये.

    मुगल काल में 1 रुपये: में क्या-क्या मिल जाता था? आज वही सामान खरीदने में लगेंगे हजारों रुपये.

    आज के समय में एक रुपये में शायद ही कोई जरूरी सामान खरीदा जा सकता है। लेकिन कुछ सदियों पीछे मुगल काल के दौरान रुपये की क्रय शक्ति आज की तुलना में काफी अलग थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उस दौर की कई वस्तुओं की कीमतों का उल्लेख मिलता है, जिनसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय एक रुपये से कितनी चीजें खरीदी जा सकती थीं।

    खास तौर पर सम्राट अकबर के शासनकाल से जुड़े ‘आईन-ए-अकबरी’ जैसे ऐतिहासिक स्रोत उस समय की अर्थव्यवस्था, वस्तुओं की कीमत और मजदूरी के बारे में जानकारी देते हैं। हालांकि पुराने समय की कीमतों को आज की कीमतों से सीधे जोड़ना आसान नहीं है, क्योंकि मुद्रा, मजदूरी, वजन की इकाइयों और बाजार व्यवस्था में काफी बदलाव आ चुका है।

    एक रुपये में कितना अनाज?

    ऐतिहासिक रिकॉर्ड में मुगल काल के दौरान अनाज की कीमतों का उल्लेख मिलता है। उस समय ‘मन’ जैसी पारंपरिक वजन इकाइयों का इस्तेमाल किया जाता था।

    कुछ उपलब्ध विवरणों के आधार पर एक रुपये में कई मन अनाज खरीदे जाने का उल्लेख मिलता है। एक मन का वजन क्षेत्र और समय के अनुसार अलग-अलग हो सकता था, इसलिए इसे आज के किलो में बदलते समय सावधानी जरूरी है।

    इसी वजह से यह कहना अधिक उचित है कि उस दौर में एक रुपये की मदद से बड़ी मात्रा में अनाज खरीदा जा सकता था, जबकि आज उतनी मात्रा में गेहूं या चावल खरीदने के लिए हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं।

    घी और तेल भी थे काफी सस्ते

    मुगल काल से जुड़े कुछ मूल्य विवरणों में घी और तेल जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी दर्ज हैं। इन्हीं ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर कई जगह दावा किया जाता है कि एक रुपये में कई किलोग्राम घी या तेल खरीदा जा सकता था।

    हालांकि यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग जगहों, वर्षों और बाजारों में कीमतें अलग हो सकती थीं। इसलिए इन आंकड़ों को पूरे मुगल साम्राज्य में लागू एक समान कीमत मानना सही नहीं होगा।

    मांस की कीमत भी आज से बिल्कुल अलग थी

    उस समय मांस की कीमत भी आज के मुकाबले बहुत कम थी। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के आधार पर एक रुपये में बड़ी मात्रा में मांस खरीदे जाने की बात सामने आती है।

    आज अगर इतनी ही मात्रा में मांस खरीदा जाए तो इसकी कीमत हजारों रुपये तक पहुंच सकती है। लेकिन दोनों दौरों की आर्थिक स्थिति अलग होने के कारण केवल रुपये की संख्या के आधार पर महंगाई की सीधी गणना करना सही तरीका नहीं माना जाता।

    मुगल रुपये में कितनी चांदी होती थी?

    मुगल काल का रुपया सिर्फ एक कागजी मूल्य नहीं था। उस समय का रुपया चांदी का सिक्का था और उसमें काफी मात्रा में चांदी मौजूद होती थी।

    अकबर के दौर के मानक रुपये का वजन लगभग 11.4 से 11.5 ग्राम चांदी के आसपास बताया जाता है। यही वजह है कि उस समय रुपये का मूल्य उसकी धातु की कीमत और निर्धारित मौद्रिक व्यवस्था दोनों से जुड़ा हुआ था।

    अगर आज के चांदी के भाव से केवल उस चांदी की कीमत का हिसाब लगाया जाए, तो एक पुराने मुगल रुपये में मौजूद चांदी का मूल्य करीब एक हजार रुपये के आसपास या उससे अलग हो सकता है, यह मौजूदा चांदी के बाजार भाव पर निर्भर करेगा।

    लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उस समय का एक रुपया सीधे आज के एक हजार रुपये के बराबर था। धातु मूल्य और क्रय शक्ति दो अलग-अलग चीजें हैं।

    मजदूर की कमाई कितनी होती थी?

    मुगल काल की अर्थव्यवस्था को समझने के लिए केवल वस्तुओं की कीमत देखना पर्याप्त नहीं है। उस समय लोगों की आय और मजदूरी भी काफी अलग थी।

    ऐतिहासिक विवरणों में अलग-अलग श्रेणी के मजदूरों और कर्मचारियों की मजदूरी का उल्लेख मिलता है। कुछ सामान्य मजदूरों की मासिक आय कुछ रुपये के आसपास होने के उदाहरण दिए जाते हैं।

    इससे समझा जा सकता है कि उस दौर में एक रुपया आज के मुकाबले सिर्फ एक छोटी रकम नहीं था। किसी व्यक्ति की आय की तुलना में उसकी वास्तविक क्रय शक्ति काफी महत्वपूर्ण हो सकती थी।

    आज से तुलना करना इतना आसान क्यों नहीं?

    मुगल काल के एक रुपये को आज के रुपये में बदलने की कोशिश करते समय कई चीजों को ध्यान में रखना पड़ता है। उस समय की मजदूरी, जमीन की कीमत, खाद्य पदार्थों के दाम, उत्पादन लागत, परिवहन व्यवस्था और मुद्रा प्रणाली आज से पूरी तरह अलग थी।

    इसलिए यह कहना कि ‘मुगल काल का एक रुपया आज के इतने हजार रुपये के बराबर था’, बिना किसी निश्चित आर्थिक पद्धति के पूरी तरह सटीक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

    अलग-अलग तरीकों से तुलना करने पर अलग परिणाम मिल सकते हैं। उदाहरण के लिए, चांदी के वजन से की गई तुलना अलग होगी और मजदूरी या अनाज की क्रय शक्ति के आधार पर की गई तुलना अलग।

    फिर भी एक रुपये की कहानी क्या बताती है?

    मुगल काल के रुपये और आज के रुपये की तुलना हमें उस समय की अर्थव्यवस्था को समझने का एक दिलचस्प तरीका देती है। उस दौर में चांदी के सिक्के, मजदूरी और जरूरी वस्तुओं की कीमतों का आपस में अलग संबंध था।

    आज एक रुपये से बहुत कम चीजें खरीदी जा सकती हैं, जबकि मुगल काल में एक रुपये से बड़ी मात्रा में रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदे जाने के ऐतिहासिक उदाहरण मिलते हैं।

    इसलिए मुगल काल का एक रुपया सिर्फ एक मुद्रा इकाई नहीं था, बल्कि उस समय की मजदूरी, बाजार और वस्तुओं की क्रय शक्ति को समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी था।

  • चीन में था नागपुर का आर्किटेक्ट, अनजान नंबर को ब्लॉक किया… फिर क्रेडिट कार्ड से उड़ गए 6 लाख रुपये

    चीन में था नागपुर का आर्किटेक्ट, अनजान नंबर को ब्लॉक किया… फिर क्रेडिट कार्ड से उड़ गए 6 लाख रुपये

    चीन में था नागपुर का आर्किटेक्ट, अनजान नंबर को ब्लॉक किया… फिर क्रेडिट कार्ड से उड़ गए 6 लाख रुपये

    महाराष्ट्र के नागपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. काम के सिलसिले में चीन गए आर्किटेक्ट को एक अनजान व्यक्ति ने 6 लाख के लोन के लिए गारंटर बनने के लिए कॉल किया. आर्किटेक्ट ने ऐसी किसी गारंटी से इनकार करते हुए नंबर ब्लॉक कर दिया. अगले ही दिन बैंक के मैसेज से पता चला कि उनके क्रेडिट कार्ड से 5.87 लाख रुपये के 13 ट्रांजेक्शन हो चुके थे.

    एक कॉल आया, 6 लाख के कर्ज का गारंटर बनने की बात कही गई. 55 साल के आर्किटेक्ट ने कहा- मैंने किसी के लिए ऐसी गारंटी नहीं दी और फोन करने वाले का नंबर ब्लॉक कर दिया. उन्हें लगा कि बात वहीं खत्म हो गई. लेकिन अगले दिन बैंक के मैसेज ने उनके होश उड़ा दिए. क्रेडिट कार्ड से करीब 5.87 लाख रुपये के ट्रांजेक्शन हो चुके थे. जिस वक्त ये ट्रांजेक्शन हुए, वह चीन में थे.

    मामला महाराष्ट्र के नागपुर का है. पांचपावली पुलिस थाना क्षेत्र में रहने वाले 55 वर्षीय आर्किटेक्ट अमरजीत के क्रेडिट कार्ड से कथित तौर पर 5 लाख 87 हजार रुपये की साइबर ठगी हो गई. शिकायत में कहा गया कि उनके क्रेडिट कार्ड से कुल 13 अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए गए. पुलिस इसकी जांच कर रही है.

    शिकायत के मुताबिक, अमरजीत 8 सितंबर 2026 को काम के सिलसिले में चीन गए थे. वह चीन में ही मौजूद थे, तभी 15 सितंबर को उनके मोबाइल फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने 6 लाख रुपये के लोन के लिए गारंटर बनने की बात कही. इस पर अमरजीत ने फोन करने वाले से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया.

    अमरजीत के मुताबिक, उन्हें उस वक्त इस फोन कॉल से किसी ठगी का अंदाजा नहीं हुआ. लेकिन अगले दिन बैंक से मिले मैसेज के बाद उन्हें पता चला कि उनके क्रेडिट कार्ड से कई ट्रांजेक्शन हो चुके हैं. 16 सितंबर को चीन में रहते हुए जब अमरजीत ने बैंक के मैसेज चेक किए तो उन्हें क्रेडिट कार्ड से हुए कई ट्रांजेक्शन दिखे. शिकायत में बताया गया है कि कुल 5 लाख 87 हजार रुपये के अनधिकृत लेन-देन किए गए थे.

    पीड़ित अमरजीत का कहना है कि उन्होंने इनमें से कोई भी ट्रांजेक्शन नहीं किया था. उनका यह भी कहना है कि उन्होंने किसी अनजान व्यक्ति को अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी भी शेयर नहीं की थी. क्रेडिट कार्ड से 20 अगस्त से 11 सितंबर के बीच कुल 13 ट्रांजेक्शन किए गए. इन ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 5.87 लाख रुपये की रकम खर्च किए गए.

    फोन करने वाले और ट्रांजेक्शन के बीच कनेक्शन की जांच

    इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि कथित तौर पर ठगी का पता चलने से पहले पीड़ित को 6 लाख रुपये के कर्ज का गारंटर बनने के लिए कॉल आया था. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि फोन करने वाला व्यक्ति और क्रेडिट कार्ड से हुए ट्रांजेक्शन के पीछे मौजूद आरोपी एक ही हैं या नहीं. पांचपावली पुलिस इस एंगल सहित पूरे मामले की जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्रेडिट कार्ड से जुड़े लेन-देन किस तरह किए गए और इसके पीछे कौन लोग हैं.

    ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने तुरंत बैंक अधिकारियों को सूचना दी और अपना क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कराया. इसके बाद साइबर क्राइम की शिकायत NCCRP साइबर पोर्टल पर भी दर्ज कराई गई. पीड़ित ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की है.

    बड़ा है कि अगर पीड़ित ने किसी को क्रेडिट कार्ड की जानकारी नहीं दी, तो कार्ड से इतने बड़े अमाउंट के ट्रांजेक्शन कैसे हो गए. क्या फोन करने वाला व्यक्ति सिर्फ संयोग से कॉल कर रहा था या फिर उसके पीछे कोई ठगी की प्लानिंग थी. फिलहाल इसका जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अज्ञात आरोपी की तलाश की जा रही है.

    पुलिस की ओर से लोगों को लगातार सलाह दी जाती है कि किसी अनजान कॉल पर बैंक, क्रेडिट कार्ड, OTP या अन्य फाइनेंशियल डिटेल शेयर न करें. किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी मिलते ही बैंक को सूचना देकर कार्ड ब्लॉक कराना और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करना जरूरी है.

  • क्या बादाम खाने से ‘आंखों’ की रोशनी बढ़ सकती है? जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य.

    क्या बादाम खाने से ‘आंखों’ की रोशनी बढ़ सकती है? जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य.

    क्या बादाम खाने से ‘आंखों’ की रोशनी बढ़ सकती है? जानिए क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य.

    अक्सर हमने अपने बड़े-बुजुर्गों से सुना है कि अगर बच्चे का दिमाग पढ़ाई में कमजोर है, उसको याद करने में दिक्कत होती है तो उसे बादाम खिलाएं। दादी-नानी आज भी कहती हैं कि रोज बादाम खाने से आंखों की रोशनी बेहतर होती है और चश्मे की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन क्या ये सिर्फ पीढ़ियों से चली आ रही बातें हैं या इनके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार भी है? क्या बादाम सच में दिमाग और आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट और वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो बादाम में विटामिन E, राइबोफ्लेविन, फोलेट, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं। विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो मस्तिष्क की कोशिकाओं (Brain Cells) और आंखों के पतले ऊतकों को ऑक्सीडेटिव तनाव और फ्री-रेडिकल्स के नुकसान से बचाता है। इसके नियमित सेवन से बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होने की गति धीमी होती है और आंखों में मोतियाबिंद या मैकुलर डिजनरेशन का जोखिम कम हो सकता है। हम सभी जानते हैं कि हमारी हेल्दी डाइट हमारी सेहत पर अहम रोल निभाती है, बादाम भी उसी का हिस्सा है।

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री ने बताया अगर आप आंखों को पूरा पोषण देना चाहते हैं और नेचुरल तरीके से आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो आप बादाम का सेवन खास तरीके से करें। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक बादाम को रातभर पानी में भिगोकर और उसका छिलका उतारकर उसे पीस लें तो उसकी तासीर नॉर्मल हो जाती है और शरीर इसके पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है। आइए जानते हैं कि बादाम का सेवन करने से आंख, ब्रेन और सेहत पर कैसा होता है असर।

    बादाम कैसे ब्रेन पर करता है असर?

    बादाम एक ऐसा सूखा ड्राई फ्रूट है जिसमें विटामिन E, राइबोफ्लेविन, फोलेट और ओमेगा-3 फैटी एसिड मौजूद होता हैं। ये पोषक तत्व मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और याददाश्त को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। Brain Research Bulletin में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक बादाम का नियमित सेवन मस्तिष्क में ‘एसिटाइलकोलाइन’ नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को बढ़ाता है। एसिटाइलकोलाइन वो रसायन है जो न्यूरॉन्स के बीच संदेश भेजने, ध्यान केंद्रित करने और याददाश्त को मजबूत करने के लिए जिम्मेदार होता है।

    बादाम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, खासकर विटामिन E मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। न्यूरोलॉजिकल रिसर्च के अनुसार, विटामिन E मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी समस्याओं का जोखिम कम होता है। बादाम में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, ओमेगा-6 फैटी एसिड और फोलेट मस्तिष्क की नसों (Neurons) की झिल्ली को लचीला और हेल्दी बनाए रखते हैं। इससे दिमाग नई चीजें सीखने और जानकारी को लंबे समय तक याद रखने में अधिक सक्षम बनता है। Purdue University द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक दोपहर के खाने के समय बादाम खाने से Blood Sugar का स्तर कंट्रोल रहता है। इससे दोपहर में होने वाली दिमागी थकान कम होती है। बादाम में राइबोफ्लेविन (विटामिन B2) और एल-कार्निटाइन जैसे पोषक तत्व होते हैं जो दिमागी गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ न्यूरल पाथवे (Neural Pathways) में सुधार करते हैं।

    बादाम का सेवन कैसे आंखों के लिए असरदार है?

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट नित्यानंदम श्री ने बताया अगर आप आंखों को पूरा पोषण देना चाहते हैं और नेचुरल तरीके से आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो आप बादाम का सेवन खास तरीके से करें। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए आप बादाम को दूध के साथ और काली मिर्च के साथ कॉम्बिनेशन करके खाएं। इस तरह बादाम का सेवन आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और आंखों की रोशनी बढ़ाता है। आंखों की हेल्थ के लिए आप डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता, बादाम, अखरोट और आंवला का भी सेवन करें।

    बादाम में मौजूद विटामिन E एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है और कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है। यह उम्र के साथ होने वाली आंखों की समस्याओं की गति धीमा कर सकता है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, बादाम आंखों की सेहत और रोशनी को लंबे समय तक बनाए रखने में बहुत कारगर है। इसमें मुख्य रूप से विटामिन E, जिंक (Zinc) और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं जो आंखों की आंतरिक संरचना को बनाए रखते हैं।

    अमेरिका के National Eye Institute द्वारा की गई Age-Related Eye Disease Study के मुताबिक विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। बादाम में मौजूद विटामिन E रेटिना की हेल्दी कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाता है। एक मुट्ठी बादाम से आपको अपनी दैनिक जरूरत का लगभग 48-50% विटामिन E मिल जाता है, जो आपकी आंखों की हिफाजत करता है। आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों के मुताबिक रोजाना बादाम का सेवन आंख से लेकर ब्रेन तक के लिए उपयोगी है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। बादाम या कोई भी घरेलू नुस्खा किसी चिकित्सकीय इलाज का विकल्प नहीं है। आंखों की समस्या या कमजोर याददाश्त के लिए हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें।