Category: Crime

  • कभी मॉडलिंग में था जलवा, फिर बनी ड्रग्स की क्वीन, खूबसूरती के पीछे छिपी थी अपराध की पूरी कहानी.

    कभी मॉडलिंग में था जलवा, फिर बनी ड्रग्स की क्वीन, खूबसूरती के पीछे छिपी थी अपराध की पूरी कहानी.

    कभी मॉडलिंग में था जलवा, फिर बनी ड्रग्स की क्वीन, खूबसूरती के पीछे छिपी थी अपराध की पूरी कहानी.

    कभी खूबसूरती और मॉडलिंग की दुनिया में पहचान बनाने वाली एक महिला की जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया कि उसका नाम बाद में अपराध की दुनिया से जुड़ने लगा। जिस चेहरे की चर्चा कभी फैशन और ग्लैमर की दुनिया में होती थी, वही चेहरा कुछ समय बाद एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क की जांच में सामने आया।

    कहा जाता है कि वह महिला अपनी खूबसूरती और ग्लैमरस अंदाज के लिए काफी मशहूर थी। उसने एक ब्यूटी कॉन्टेस्ट भी जीता था, लेकिन बाद में उसकी शादी से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद उससे यह खिताब वापस ले लिया गया। इसके बाद कुछ समय तक वह मीडिया की नजरों से दूर रही।

    फिर उसकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया, जिसने सब कुछ बदल दिया।

    मॉडलिंग से जुड़ी यह महिला बाद में विदेश चली गई, जहां उसकी मुलाकात एक चर्चित ड्रग डीलर से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और कुछ समय तक उनका रिश्ता चला। हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए।

    यहीं से उसकी जिंदगी अपराध की दुनिया की ओर मुड़ने लगी।

    बताया जाता है कि इसके बाद उसने कथित तौर पर ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा नेटवर्क खड़ा करना शुरू किया। उसकी ग्लैमरस पहचान और लोगों पर पड़ने वाला प्रभाव इस नेटवर्क में एक खास भूमिका निभाने लगा।

    धीरे-धीरे उसके संपर्क का दायरा बढ़ता गया। अलग-अलग देशों की कुछ महिलाएं भी कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ती चली गईं। मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया से जुड़े चेहरों के इस्तेमाल ने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया।

    कुछ ही समय में जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने के संकेत मिलने लगे। मामला सिर्फ एक छोटे गिरोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई देशों तक इसके तार पहुंचने की बात सामने आई।

    लेकिन अपराध की दुनिया में बढ़ती यह चमक ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।

    एक दिन उसके नेटवर्क से जुड़ी एक मॉडल बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ पकड़ी गई। बरामदगी की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि जांच एजेंसियों का ध्यान सीधे इस पूरे नेटवर्क की ओर गया।

    इसके बाद मुख्य संदिग्ध महिला की तलाश तेज कर दी गई।

    कई महीनों तक जांच चलती रही और आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उस पर ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े गंभीर आरोप लगे और अदालत की प्रक्रिया शुरू हुई।

    जिस महिला ने कभी मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया में अपना नाम बनाया था, उसकी जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी थी।

    उसकी कहानी इस बात का उदाहरण बन गई कि चमक-दमक और खूबसूरती के पीछे छिपी जिंदगी हमेशा वैसी नहीं होती जैसी बाहर से दिखाई देती है। एक समय जिस चेहरे को लोग मॉडल के रूप में जानते थे, वही चेहरा बाद में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स मामले की वजह से सुर्खियों में आ गया।

  • VIP कार में घूम रहा था नकली नोटों का खेल, लाखों के नकली नोटों ने खोला पढ़े-लिखे भाई-बहन का राज.

    VIP कार में घूम रहा था नकली नोटों का खेल, लाखों के नकली नोटों ने खोला पढ़े-लिखे भाई-बहन का राज.

    VIP कार में घूम रहा था नकली नोटों का खेल, लाखों के नकली नोटों ने खोला पढ़े-लिखे भाई-बहन का राज.

    शाम का वक्त था। पुलिस अधिकारी अपने कार्यालय में दिनभर के काम निपटा ही रहे थे कि तभी एक पुराना मुखबिर उनके पास पहुंचा। उसके चेहरे पर इस बार अलग ही उत्साह था।

    उसने कहा, “साहब, इस बार खबर बहुत बड़ी है। अगर समय रहते कार्रवाई हुई तो लाखों रुपये के नकली नोट बरामद हो सकते हैं।”

    पुलिस अधिकारी ने तुरंत पूरी बात बताने को कहा।

    मुखबिर ने बताया कि एक लग्जरी कार में कुछ लोग घूम रहे हैं। कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी है। देखने में ये लोग किसी बड़े परिवार से जुड़े लगते हैं, लेकिन उनके पास बड़ी मात्रा में दो हजार रुपये के संदिग्ध नोट हैं।

    सूचना मिलते ही पुलिस ने आसपास के रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी।

    काफी देर तक गाड़ियों की जांच होती रही, लेकिन संदिग्ध कार दिखाई नहीं दी। रात गहराती गई और पुलिस का इंतजार बढ़ता गया।

    फिर आधी रात के करीब दूर से एक सफेद रंग की लग्जरी कार आती दिखाई दी।

    कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी थी।

    पुलिस ने इशारा कर उसे रोक लिया।

    ड्राइवर ने शीशा नीचे किया और नाराजगी भरे अंदाज में पूछा, “हमें क्यों रोका गया है?”

    पुलिस ने कहा, “गाड़ी की तलाशी होगी। सभी लोग नीचे उतरिए।”

    कार में बैठे लोगों ने खुद को प्रभावशाली परिवार से जुड़ा बताया और पुलिस को समझाने की कोशिश की कि उनकी गाड़ी में कोई गलत सामान नहीं है।

    लेकिन पुलिस ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

    जैसे ही कार की तलाशी शुरू हुई, अंदर रखे तीन बैग देखकर पुलिस की नजरें ठहर गईं।

    बैग खोलते ही उनमें दो हजार रुपये के नोटों की गड्डियां दिखाई दीं।

    पहली नजर में नोट बिल्कुल असली जैसे लग रहे थे।

    लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में नई करेंसी और मुखबिर की सूचना ने पुलिस का शक बढ़ा दिया।

    तीनों लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

    यहीं से एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

    पूछताछ में पता चला कि पकड़ा गया युवक पढ़ा-लिखा था और तकनीकी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू कर चुका था। उसने पढ़ाई के दौरान कई प्रोजेक्ट तैयार किए थे और भविष्य में अपना बड़ा कारोबार खड़ा करने का सपना देख रहा था।

    उसके साथ पकड़ी गई युवती उसकी करीबी रिश्तेदार थी। वह भी अच्छी पढ़ाई कर चुकी थी और कुछ समय से उसके कारोबार में काम कर रही थी।

    शुरुआत में दोनों का ध्यान कारोबार बढ़ाने पर था। लेकिन धीरे-धीरे पैसों की जरूरत बढ़ने लगी।

    इसी दौरान दोनों ने गलत रास्ता चुन लिया।

    पुलिस के मुताबिक, पहले थोड़ी मात्रा में नकली नोट बाजार में चलाकर देखे गए। जब किसी को शक नहीं हुआ तो उनका हौसला बढ़ गया।

    इसके बाद इस काम में कुछ और लोग जुड़ते चले गए।

    एक कारोबारी भी कथित तौर पर इस नेटवर्क का हिस्सा बन गया। फिर नकली नोटों को अलग-अलग लोगों के जरिए बाजार में खपाने की कोशिश शुरू हुई।

    देखते ही देखते यह छोटा सा खेल बड़े नेटवर्क में बदल गया।

    पुलिस की जांच में सामने आया कि नकली नोट तैयार करने के लिए एक अलग जगह का इस्तेमाल किया जा रहा था। वहां से प्रिंटर, कागज और दूसरे सामान समेत कई चीजें बरामद किए जाने का दावा किया गया।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में कुछ और लोग काम कर रहे थे, जिनकी तलाश शुरू कर दी गई।

    लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह लग्जरी कार थी, जिसमें बैठकर आरोपी लाखों रुपये के नकली नोट लेकर घूम रहे थे।

    कार पर वीआईपी नंबर और लालबत्ती लगी थी।

    आरोप था कि इसी दिखावे के सहारे लोगों को प्रभावित किया जाता था और पुलिस की नजर से बचने की कोशिश की जाती थी।

    गिरफ्तारी के बाद जब मामले की जानकारी बाहर आई तो कुछ लोग पुलिस के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे।

    उन्होंने बताया कि उन्हें भी ऐसे नोट दिए गए थे, जिन्हें वे असली समझकर आगे इस्तेमाल कर चुके थे।

    जांच आगे बढ़ी तो बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की भी पड़ताल शुरू हुई।

    बरामद नोटों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया। जांच में नोटों के नकली होने की पुष्टि होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।

    इसके बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।

    इस पूरे मामले ने एक अजीब तस्वीर सामने रखी।

    जिस युवक ने पढ़ाई के बाद अपना कारोबार खड़ा करने और नई तकनीक के जरिए पहचान बनाने का सपना देखा था, वही कथित तौर पर जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराध के रास्ते पर पहुंच गया।

    एक लग्जरी कार, वीआईपी होने का दिखावा और लाखों रुपये की नकली करेंसी ने उसके पूरे राज से पर्दा उठा दिया।

    जिस कार को देखकर लोग रास्ता छोड़ देते थे, उसी कार ने आखिरकार पुलिस को उस कथित नकली नोटों के नेटवर्क तक पहुंचा दिया।

  • प्यार की कीमत: जाति की दीवार के बीच पनपी मोहब्बत का खौफनाक अंत, खेत में मिली दोनों की लाश.

    प्यार की कीमत: जाति की दीवार के बीच पनपी मोहब्बत का खौफनाक अंत, खेत में मिली दोनों की लाश.

    प्यार की कीमत: जाति की दीवार के बीच पनपी मोहब्बत का खौफनाक अंत, खेत में मिली दोनों की लाश.

    शाम का वक्त था। सुरेश अपनी किराने की दुकान पर जाने की तैयारी कर रहा था। तभी उसकी पत्नी कमला का फोन बजा। फोन उठाते ही कमला के चेहरे के भाव बदल गए। कुछ देर तक वह चुपचाप सामने देखती रही और फिर फोन रख दिया।

    सुरेश ने पूछा, “क्या हुआ? किसका फोन था?”

    कमला ने धीमी आवाज में कहा, “तुम्हें एक बात बतानी है… हमारी बेटी नंदिनी किसी लड़के के साथ घूमती है।”

    सुरेश के हाथ वहीं रुक गए।

    “किस लड़के के साथ?”

    कमला ने बताया कि पड़ोस की एक रिश्तेदार ने फोन करके कहा है कि नंदिनी को गांव के बाहर अक्सर एक युवक अमन के साथ देखा जा रहा है।

    सुरेश का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा।

    “तुम्हें पता है वह किस परिवार का लड़का है?”

    कमला ने सिर झुका लिया।

    “सुना है दूसरी जाति का है…”

    इतना सुनते ही सुरेश ने कहा, “आज नंदिनी से बात करनी पड़ेगी। अगर बात सच निकली तो उसका कॉलेज जाना भी बंद कर देंगे।”

    बेटी के घर लौटते ही शुरू हुआ सवाल-जवाब

    नंदिनी शाम को कॉलेज से घर लौटी तो उसे देखते ही समझ आ गया कि घर का माहौल बदला हुआ है।

    मां ने उससे सीधे पूछा, “कहां थी?”

    “कॉलेज में थी।”

    “अमन के साथ भी कॉलेज जाती हो?”

    नंदिनी कुछ पल चुप रही। फिर उसने कहा, “हां, हम दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं।”

    कमला को जैसे झटका लगा।

    नंदिनी ने आगे कहा, “अमन पढ़ा-लिखा है, नौकरी की तैयारी कर रहा है। वह मेरा सम्मान करता है। हम शादी करना चाहते हैं।”

    लेकिन परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं था।

    सुरेश ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह अपनी बेटी की शादी परिवार की पसंद से ही करेगा।

    नंदिनी ने भी अपनी बात रखी।

    “अगर शादी करूंगी तो अमन से ही करूंगी। मुझे जाति देखकर किसी इंसान से रिश्ता तय नहीं करना।”

    यह बात सुनकर घर में विवाद और बढ़ गया।

    युवक के परिवार पर भी बढ़ा दबाव

    नंदिनी और अमन को अलग करने के लिए दोनों परिवारों की ओर से दबाव बढ़ने लगा। अमन के घरवालों ने भी उसे समझाया कि वह इस रिश्ते से पीछे हट जाए, क्योंकि गांव में बात फैल चुकी थी।

    लेकिन दोनों एक-दूसरे से शादी करने के फैसले पर कायम रहे।

    इस बीच परिवार के कुछ लोगों ने दोनों को धमकाने की भी कोशिश की। उन्हें डर था कि अगर दोनों ने अपनी मर्जी से शादी कर ली तो गांव में परिवार की प्रतिष्ठा पर सवाल उठेंगे।

    नंदिनी अपनी सहेली से फोन पर कहती थी कि वह किसी के दबाव में आकर अपना फैसला नहीं बदलेगी।

    अचानक खेत में मिली दोनों की लाश

    दो दिन बाद गांव के बाहर एक खेत में नंदिनी और अमन के शव मिलने की खबर फैल गई।

    पुलिस मौके पर पहुंची तो दोनों की मौत हो चुकी थी। शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जाने लगा, लेकिन घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

    परिवार के लोगों ने दावा किया कि दोनों ने शायद साथ मरने का फैसला किया होगा।

    लेकिन पुलिस को मामला इतना सीधा नहीं लगा।

    दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। पुलिस ने दोनों परिवारों और उनके परिचितों से पूछताछ शुरू कर दी।

    गांव में फैल गई अलग-अलग चर्चाएं

    घटना के बाद गांव में तरह-तरह की बातें होने लगीं। कोई इसे प्रेम प्रसंग का दुखद अंत बता रहा था तो कोई दोनों की हत्या की आशंका जता रहा था।

    नंदिनी की मां कमला अपनी बेटी की मौत से टूट चुकी थी।

    उसे बार-बार वही बात याद आ रही थी जब उसकी बेटी ने कहा था कि वह अमन के साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहती है।

    कमला के मन में सवाल उठ रहा था कि अगर परिवार ने उनकी बात मान ली होती तो क्या आज दोनों जिंदा होते?

    जांच ने बदल दी कहानी की दिशा

    पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो मामला और पेचीदा होता गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने मौत की परिस्थितियों की बारीकी से जांच शुरू की।

    जांच अधिकारियों ने दोनों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और आखिरी समय में उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटाई।

    पुलिस इस बात की भी जांच कर रही थी कि दोनों खेत तक खुद पहुंचे थे या किसी ने उन्हें वहां बुलाया था।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या यह वाकई आत्महत्या थी या प्रेम संबंध और परिवार की कथित इज्जत के विवाद में दोनों की जान ली गई?

    जांच पूरी होने के बाद ही इस सवाल का जवाब सामने आने की उम्मीद थी।

    कमला के लिए मगर कहानी का सच कुछ भी हो, उसकी बेटी हमेशा के लिए उससे दूर जा चुकी थी।

    जिस बेटी के भविष्य के लिए परिवार ने इतने सपने देखे थे, वही बेटी अब एक ऐसी कहानी बन चुकी थी, जिसमें प्यार, परिवार का दबाव और समाज की सोच—तीनों आमने-सामने खड़े थे।

    और सबसे बड़ा सवाल आज भी यही था—क्या दो बालिग लोगों के अपने जीवन का फैसला करने से किसी परिवार की ‘इज्जत’ सच में खत्म हो जाती है, या असली नुकसान तब होता है जब उस फैसले का जवाब हिंसा से दिया जाता है?

  • प्रेम की दोस्ती बनी मौत’ की वजह, घर की इज्जत के नाम पर बेटी की हत्या का आरोप; पिता ने खुद पुलिस को दी सूचना.

    प्रेम की दोस्ती बनी मौत’ की वजह, घर की इज्जत के नाम पर बेटी की हत्या का आरोप; पिता ने खुद पुलिस को दी सूचना.

    प्रेम की दोस्ती बनी मौत’ की वजह, घर की इज्जत के नाम पर बेटी की हत्या का आरोप; पिता ने खुद पुलिस को दी सूचना.

    उत्तर प्रदेश से सामने आई एक वारदात ने रिश्तों और तथाकथित इज्जत के नाम पर होने वाली हिंसा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक नाबालिग लड़की की उसके ही पिता ने हत्या कर दी। लड़की की गांव के ही एक युवक से दोस्ती थी और इसी बात को लेकर पिता कथित तौर पर नाराज चल रहा था।

    मामला एकता थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। घटना सितंबर की शुरुआत की है। पुलिस के मुताबिक, करीब 17 साल की किशोरी कुछ दिन पहले बिना बताए घर से चली गई थी। देर रात जब वह वापस लौटी तो परिवार को उसके एक युवक से संपर्क और दोस्ती की जानकारी हुई। इसके बाद घर में तनाव का माहौल बताया गया।

    बेटी की दोस्ती से नाराज था पिता

    बताया जा रहा है कि लड़की की गांव के ही एक युवक से दोस्ती थी। परिवार को यह रिश्ता पसंद नहीं था। घटना वाले दिन लड़की घर पर अकेली थी। उसका भाई काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था, जबकि मां भी किसी काम से घर से बाहर थी।

    इसी दौरान आरोप है कि पिता ने बेटी से विवाद किया। विवाद इतना बढ़ गया कि उसने कथित तौर पर धारदार कृषि उपकरण से उस पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने के बाद लड़की की मौत हो गई।

    हत्या के बाद खुद पुलिस को दी जानकारी

    घटना के बाद आरोपी पिता ने कथित तौर पर खुद पुलिस को सूचना दी। पुलिस पूछताछ में उसने बेटी की हत्या करने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी ने परिवार की कथित ‘इज्जत’ का हवाला दिया था।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामले में पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की।

    आगरा में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

    आगरा में इससे पहले भी प्रेम संबंध या परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी को लेकर युवतियों की हत्या के मामले सामने आते रहे हैं। एक मामले में युवती ने परिवार की इच्छा के खिलाफ दूसरे समुदाय में शादी की थी। इसके बाद उसकी हत्या का आरोप उसके परिजनों पर लगा था।

    एक अन्य मामले में भी प्रेम संबंध की जानकारी सामने आने के बाद युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पुलिस ने जांच के दौरान परिवार के सदस्यों की भूमिका की जांच की थी।

    ‘इज्जत’ के नाम पर बेटी की जान लेना बना गंभीर सवाल

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि परिवार की कथित प्रतिष्ठा या सामाजिक दबाव के नाम पर किसी की जिंदगी खत्म करने का अधिकार आखिर किसे है। प्रेम संबंध या शादी को लेकर परिवार में असहमति हो सकती है, लेकिन हिंसा और हत्या किसी भी स्थिति में गंभीर अपराध है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। घटना के पीछे वास्तविक विवाद क्या था, हत्या किस परिस्थिति में हुई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।

  • ‘री करने पहुंचे थे दो युवक’कारखाने में ही फंस गए; बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला तो लगाने लगे बचाओ-बचाओ की आवाज.

    ‘री करने पहुंचे थे दो युवक’कारखाने में ही फंस गए; बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला तो लगाने लगे बचाओ-बचाओ की आवाज.

    ‘री करने पहुंचे थे दो युवक’कारखाने में ही फंस गए; बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला तो लगाने लगे बचाओ-बचाओ की आवाज.

    गुजरात के सूरत से चोरी की एक ऐसी घटना सामने आई है, जहां चोरी करने पहुंचे दो युवक खुद ही मुसीबत में फंस गए। दोनों चोरी के इरादे से एक बंद कारखाने में दाखिल हुए थे, लेकिन अंदर जाने के बाद उन्हें बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। कई घंटे तक रास्ता तलाशने के बाद जब कोई रास्ता नहीं मिला तो दोनों खिड़की से लोगों को आवाज लगाकर मदद मांगने लगे।

    कारखाने के अंदर से रात के समय ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाज सुनकर आसपास के लोगों को शक हुआ। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि दो युवक कारखाने के अंदर फंसे हुए हैं। इसके बाद उन्हें बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद ली गई।

    चोरी करने के इरादे से बंद कारखाने में घुसे थे

    मामला सूरत के खटोदरा GIDC इलाके में बमरोली रोड का है। जानकारी के मुताबिक, पांडेसरा के आशापुरी इलाके में रहने वाला 18 वर्षीय रोशन बिनखादर सहानी अपने एक नाबालिग साथी के साथ रविवार शाम एक लूम्स कारखाने में दाखिल हुआ था।

    बताया जा रहा है कि दोनों ने कारखाने में काम बंद होने का फायदा उठाया और चोरी के इरादे से अंदर प्रवेश किया। उन्हें उम्मीद थी कि सामान लेने के बाद वे आसानी से बाहर निकल जाएंगे। हालांकि, अंदर जाने के बाद उनकी मुश्किल बढ़ गई।

    अंधेरे में भूल गए बाहर निकलने का रास्ता

    कारखाने के अंदर पहुंचने के बाद दोनों युवक कथित तौर पर बाहर निकलने का रास्ता तलाशने लगे, लेकिन उन्हें रास्ता नहीं मिला। अंधेरा होने की वजह से परेशानी और बढ़ गई। दोनों काफी देर तक इधर-उधर घूमते रहे, लेकिन बाहर जाने का रास्ता नहीं खोज सके।

    समय बीतने के साथ दोनों घबरा गए। आखिरकार उन्होंने खिड़की से बाहर झांककर आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगना शुरू कर दिया।

    रात में सुनाई दी बचाओ-बचाओ की आवाज

    कारखाने के अंदर से अचानक ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाज सुनकर आसपास के लोग हैरान रह गए। लोगों को लगा कि इमारत के अंदर कोई व्यक्ति मुसीबत में फंस गया है। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    खटोदरा थाने की PCR वैन मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने स्थिति का जायजा लिया तो पता चला कि दो युवक कारखाने के अंदर फंसे हुए हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाया गया।

    फायर ब्रिगेड ने काटी खिड़की की ग्रिल

    सूचना मिलने के बाद मजूरा फायर स्टेशन की टीम बमरोली रोड स्थित एसके नगर-03, कोमल सर्कल पेट्रोल पंप के पास पहुंची। दोनों युवक तीन मंजिला इमारत के एक हिस्से में फंसे हुए थे।

    फायर ब्रिगेड की टीम ने खिड़की तक पहुंचकर लोहे की ग्रिल काटी और दोनों युवकों के बाहर निकलने का रास्ता बनाया। इसके बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    बाहर आते ही पुलिस ने हिरासत में लिया

    रेस्क्यू के बाद PCR पुलिस ने दोनों युवकों को हिरासत में लिया और खटोदरा थाने ले गई। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दोनों कथित तौर पर चोरी करने के इरादे से कारखाने में घुसे थे। इनमें से एक युवक नाबालिग बताया जा रहा है।

    खटोदरा पुलिस इंस्पेक्टर नितिन भरवाड़ ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों युवक चोरी के इरादे से कारखाने में दाखिल हुए थे। पुलिस अब चोरी के प्रयास को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

  • ओवरटेक को लेकर हुआ विवाद तो महिला ने उठाई लोहे की रॉड, स्कॉर्पियो के सारे शीशे तोड़े; पुलिस तक पहुंचा मामला.

    ओवरटेक को लेकर हुआ विवाद तो महिला ने उठाई लोहे की रॉड, स्कॉर्पियो के सारे शीशे तोड़े; पुलिस तक पहुंचा मामला.

    ओवरटेक को लेकर हुआ विवाद तो महिला ने उठाई लोहे की रॉड, स्कॉर्पियो के सारे शीशे तोड़े; पुलिस तक पहुंचा मामला.

    उत्तर प्रदेश के औरैया में ओवरटेक को लेकर हुए विवाद के बाद एक महिला द्वारा स्कॉर्पियो के शीशे तोड़ने का मामला सामने आया है। घटना औरैया-जालौन चौराहे के पास की बताई जा रही है। महिला ने लोहे की रॉड से स्कॉर्पियो के शीशों पर कई वार किए, जिससे गाड़ी के शीशे टूट गए। घटना के दौरान आसपास मौजूद लोग मौके पर जमा हो गए।

    मामले को लेकर महिला ने औरैया सदर कोतवाली में शिकायत भी दी है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    दिल्ली जा रही थी महिला, ओवरटेक को लेकर हुआ विवाद

    जानकारी के मुताबिक, देवनपुर, कानपुर देहात निवासी कुमकुम देवी अपने पति के साथ वाहन से दिल्ली जा रही थीं। जब वे औरैया के पास पहुंचीं, तभी एक कार और काले रंग की स्कॉर्पियो ने उन्हें ओवरटेक किया।

    महिला का आरोप है कि स्कॉर्पियो सवार व्यक्ति ने साइड को लेकर उनके साथ गाली-गलौज की। कुछ दूरी आगे जाने के बाद स्कॉर्पियो को कथित तौर पर उनकी गाड़ी के आगे लगा दिया गया।

    विवाद बढ़ने के बाद रॉड से तोड़े शीशे

    महिला के मुताबिक, जब उन्होंने गाली देने की वजह पूछी तो स्कॉर्पियो सवार लोगों ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट करने की कोशिश की। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

    मामला बढ़ने पर आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया। इसी दौरान स्कॉर्पियो सवार लोग अपनी गाड़ी छोड़कर वहां से चले गए।

    इसके बाद महिला ने लोहे की रॉड उठाई और सड़क किनारे खड़ी स्कॉर्पियो के शीशों पर वार करना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में गाड़ी के कई शीशे टूट गए।

    पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

    घटना के बाद महिला ने सदर कोतवाली पहुंचकर पुलिस को लिखित शिकायत दी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और विवाद से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और दोनों पक्षों के बीच वास्तव में क्या हुआ था। मामले में सामने आए आरोपों की भी जांच की जा रही है।

  • 3500 रूपए रिश्वत लेते सरपंच’ समेत 2 को पकड़ा, प्रमाण-पत्र जारी करने के एवज में मांगी थी घूस; EOW ने की बड़ी कार्रवाई

    3500 रूपए रिश्वत लेते सरपंच’ समेत 2 को पकड़ा, प्रमाण-पत्र जारी करने के एवज में मांगी थी घूस; EOW ने की बड़ी कार्रवाई

    3500 रूपए रिश्वत लेते सरपंच’ समेत 2 को पकड़ा, प्रमाण-पत्र जारी करने के एवज में मांगी थी घूस; EOW ने की बड़ी कार्रवाई

    मध्यप्रदेश के उज्जैन की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने सोमवार को मंदसौर जिले की दलौदा ग्राम पंचायत में कार्रवाई करते हुए सरपंच और उसके पति को 3,500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

    उज्जैनः मध्यप्रदेश के उज्जैन की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने सोमवार को मंदसौर जिले की दलौदा ग्राम पंचायत में कार्रवाई करते हुए सरपंच और उसके पति को 3,500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

    पुलिस के अनुसार मंदसौर जिले के सीतामऊ निवासी विक्रम सिंह ने अपने पिता के नाम से भूमि खरीदी थी, जिसका नामांतरण हो चुका था। बैंक से ऋण लेने के लिए नक्शे के अनुरूप निर्माण अनुमति के लिए ग्राम पंचायत से प्रमाण-पत्र की आवश्यकता थी। प्रमाण-पत्र जारी करने के एवज में सरपंच और उसके पति ने पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में यह राशि चार हजार रुपये तय हुई।

    आवेदक विक्रम सिंह पहले ही 500 रुपये सरपंच के पति को दे चुका था। शेष 3,500 रुपये 28 सितंबर को देना तय हुआ। आवेदक ने इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक समर वर्मा से की। शिकायत के सत्यापन के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने कार्रवाई की और सरपंच दुर्गा कैथवास तथा उनके पति अनिल कैथवास को 3,500 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 

  • अश्लील वीडियो को लेकर’ फंसे महंत ने दी सफाई, मिर्ची बाबा पर लगाया गंभीर आरोप, बोले- उनकी चेली…

    अश्लील वीडियो को लेकर’ फंसे महंत ने दी सफाई, मिर्ची बाबा पर लगाया गंभीर आरोप, बोले- उनकी चेली…

    अश्लील वीडियो को लेकर’ फंसे महंत ने दी सफाई, मिर्ची बाबा पर लगाया गंभीर आरोप, बोले- उनकी चेली…

    मध्य प्रदेश के गोलेश्वर धाम, करहिया के महंत सोमनाथ गिरी महाराज का एक कथित वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। महंत सोमनाथ गिरी ने पूरे मामले को एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए वैराग्यानंद उर्फ ‘मिर्ची बाबा’ और उनके सहयोगियों पर उन्हें फंसाने और बदनाम करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

    ​सोमनाथ गिरी महाराज ने लगाए ​यज्ञ के नाम पर वसूली और साजिश का आरोप

    महंत सोमनाथ गिरी ने आरोप लगाया कि मिर्ची बाबा और उनके सहयोगी गोपाल भारद्वाज धाम और क्षेत्र में यज्ञ कराने के नाम पर आए थे। उनका कहना है कि पिछले साल भी क्षेत्र के लोगों से लाखों रुपये लिए गए थे और इस बार भी ऐसा ही प्रयास किया जा रहा था। जब उन्होंने कलेक्टर और एसडीएम की लिखित अनुमति तथा क्षेत्रवासियों की सहमति के बिना यज्ञ कराने से मना किया, तो उनके खिलाफ साजिश रची गई

    वायरल वीडियो पर दी सफाई

    वीडियो के संदर्भ में सोमनाथ गिरी ने स्पष्ट किया कि करीब एक माह पूर्व वह दिल्ली में उनके ठिकाने पर गए थे। वहां मौजूद युवकों ने किसी महिला से वीडियो कॉल पर बात करते हुए फोन उनके हाथ में थमा दिया और कहा कि यह ‘चेलिन’ (शिष्या) है। महंत के अनुसार, उन्होंने स्क्रीन पर आपत्तिजनक स्थिति देखकर फोन करने का इशारा किया और वीडियो कॉलिंग न करने की बात कही। इसी दौरान पीछे से किसी ने उनका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और बाद में उन्हें बदनाम करने की नीयत से इसे गलत तरीके से प्रचारित किया गया।

    स्थान से हटाने और आर्थिक दबाव बनाने की बात

    महंत का कहना है कि धाम की दान-राशि और व्यवस्था में किसी भी प्रकार का अनुचित हस्तक्षेप न होने देने के कारण कुछ लोग उन्हें इस स्थान से हटाना चाहते हैं।

    प्रशासन को पहले से सूचना देने का दावा

    सोमनाथ गिरी ने दावा किया कि उन्हें पहले से ही इस प्रकार के षड्यंत्र की आशंका थी। इसके चलते उन्होंने तीन-चार महीने पहले ही कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक (एसपी) और संबंधित थाने में आवेदन देकर अपने खिलाफ साजिश रचे जाने की आशंका जताई थी। महंत सोमनाथ गिरी ने कहा कि वह सच्चाई सामने रख रहे हैं और भोलेनाथ सब जानते हैं; अब क्षेत्र की जनता को तय करना है कि वे सच को किस रूप में देखते हैं।

  • MP नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ में बड़ा गड़बड़ घोटाला! गधे का भी जारी हुआ सर्टिफिकेट, हैरान कर देगा पूरा मामला

    MP नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ में बड़ा गड़बड़ घोटाला! गधे का भी जारी हुआ सर्टिफिकेट, हैरान कर देगा पूरा मामला

    MP नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सिस्टम’ में बड़ा गड़बड़ घोटाला! गधे का भी जारी हुआ सर्टिफिकेट, हैरान कर देगा पूरा मामला

    भोपाल: मध्यप्रदेश में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। NSUI ने दावा किया है कि मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में ऐसी खामी सामने आई, जिसके चलते गधे की फोटो और कथित तौर पर मान्य शैक्षणिक दस्तावेजों के बिना भी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया।

    इस दावे के सामने आने के बाद ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में दस्तावेजों और आवेदकों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    गधे की फोटो लगाकर किया गया आवेदन

    NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार के मुताबिक, उन्होंने MPNRC की ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का परीक्षण किया। इस दौरान आवेदन में आवेदक की तस्वीर की जगह गधे की फोटो अपलोड की गई।

    दावा है कि आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेजों की जगह ऐसे दस्तावेज भी लगाए गए, जिनसे वास्तविक शैक्षणिक योग्यता की पुष्टि नहीं होती थी। इसके बावजूद आवेदन ऑनलाइन प्रक्रिया में आगे बढ़ा।

    शुल्क जमा करने के बाद जारी हुआ सर्टिफिकेट

    NSUI के दावे के अनुसार, निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद ऑनलाइन सिस्टम से नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी जारी हो गया। इस दावे ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में होने वाले सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    हालांकि, यह मामला फिलहाल NSUI द्वारा किए गए दावे और प्रक्रिया के कथित परीक्षण पर आधारित है। संबंधित सरकारी विभाग या परिषद की ओर से इस दावे पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की जानकारी सामने आना बाकी है।

    मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल

    NSUI ने आरोप लगाया है कि यदि बिना पर्याप्त सत्यापन के किसी व्यक्ति का नर्सिंग रजिस्ट्रेशन जारी किया जा सकता है, तो इसका सीधा असर रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।

    नर्सिंग पेशे में काम करने वाले लोगों की योग्यता और पहचान का सत्यापन मरीजों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम में किसी भी तरह की तकनीकी या सत्यापन संबंधी कमी गंभीर विषय बन सकती है।

    अब जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार

    गधे की फोटो के साथ रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने के दावे ने MPNRC की ऑनलाइन व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिषद इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कराई जाती है।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गधे की फोटो से सर्टिफिकेट जारी होने का दावा NSUI की ओर से किया गया है। इसकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

  • नहीं थम रहा रिश्वतखोरी का खेल… करनाल में ACB ने नगर निगम क्लर्क को घूस लेते पकड़ा, जानें पूरा मामला

    नहीं थम रहा रिश्वतखोरी का खेल… करनाल में ACB ने नगर निगम क्लर्क को घूस लेते पकड़ा, जानें पूरा मामला

    नहीं थम रहा रिश्वतखोरी का खेल… करनाल में ACB ने नगर निगम क्लर्क को घूस लेते पकड़ा, जानें पूरा मामला

    हरियाणा के करनाल जिले में  एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। यहां  नगर निगम के क्लर्क को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा। 

    मिली जानकारी के अनुसार, पकड़े गए क्लर्क की पहचान गौरव राणा के रुप में हुई है। बताया जा रहा है कि प्रापर्टी आइडी में नाम ठीक करने के एवज में पांच हजार घूस की मांग की थी। शिकायतकर्ता  ने एसीबी को दी शिकायत में बताया कि वह अपनी प्रापर्टी आईडी में हुई गलती ठीक कराने के लिए नगर निगम गया था। वहां क्लर्क गौरव राणा ने गलती ठीक करने के बदले उससे 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इस शिकायत के बाद ACB ने रणनीति बनाकर ट्रैप बिछाया।

    जैसे ही क्लर्क ने रिश्वत के पांच हजार रुपये लिए, टीम ने उसे तुरंत पकड़ लिया। साथ ही उससे रुपये भी बरामद कर लिए हैं। फिलहाल एसीबी टीम क्लर्क को पकड़कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।