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  • दुनिया का सबसे बड़ा साइबर ऑपरेशन! इंटरपोल का 97 देशों में एक्शन, 5,811 गिरफ्तार; 2,500 करोड़ रुपये फ्रीज..

    दुनिया का सबसे बड़ा साइबर ऑपरेशन! इंटरपोल का 97 देशों में एक्शन, 5,811 गिरफ्तार; 2,500 करोड़ रुपये फ्रीज..

    दुनिया का सबसे बड़ा साइबर ऑपरेशन! इंटरपोल का 97 देशों में एक्शन, 5,811 गिरफ्तार; 2,500 करोड़ रुपये फ्रीज..

    Interpol Operation First Light 2026: ऑनलाइन ठगी और सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों के साथ मिलकर ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 चलाया. करीब साढ़े तीन महीने चले अभियान में 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई और 31,014 बैंक खाते ब्लॉक किए गए. कार्रवाई के दौरान 293 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम अपराधियों तक पहुंचने से पहले रोक दी गई. फर्जी पुलिस अधिकारी, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम और क्रिप्टो नेटवर्क इस ऑपरेशन के प्रमुख निशाने रहे.

    क्या है मामला?

    अगर आपके मोबाइल पर कभी बैंक अधिकारी, पुलिस अफसर, किसी सरकारी एजेंसी या निवेश कंपनी के नाम पर फोन आया हो और आपसे पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल साझा करने के लिए कहा गया हो, तो समझ लीजिए कि यह उसी तरह के अपराध हैं जिनके खिलाफ इंटरपोल ने दुनिया का सबसे बड़ा अभियान चलाया है.

    ऑनलाइन ठगी अब केवल किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का रूप ले चुकी है. इसी खतरे से निपटने के लिए इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ मिलकर *ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026* चलाया, जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे. करीब साढ़े तीन महीने तक चले इस अभियान में दुनिया भर में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क पर एक साथ शिकंजा कसा गया.

    फर्जी पुलिस, निवेश और रोमांस स्कैम नेटवर्क का भंडाफोड़, 5,811 गिरफ्तार

    इंटरपोल के मुताबिक इस दौरान 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई, 31,014 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया, 99 इंटरपोल नोटिस और डिफ्यूजन जारी किए गए और 293 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम को अपराधियों के हाथों में पहुंचने से रोक दिया गया.

    इंटरपोल के मुताबिक यह अभियान 15 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक चला. लेकिन इसकी तैयारी इससे पहले ही शुरू हो गई थी. सबसे पहले कई देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की.

    अलग-अलग देशों में सक्रिय गैंग, उनके बैंक खाते, क्रिप्टो वॉलेट, फोन नंबर, फर्जी कंपनियां और डिजिटल नेटवर्क की पहचान की गई. इसके बाद एक तय रणनीति के तहत सभी देशों ने लगभग एक ही समय पर कार्रवाई शुरू की. इस दौरान हजारों जगहों पर छापेमारी की गई, संदिग्ध परिसरों को खंगाला गया, बैंक खातों को फ्रीज किया गया, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट ब्लॉक किए गए और कई बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया.

    साइबर अपराधियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई

    इंटरपोल का यह पूरा अभियान मुख्य रूप से सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ था. यह साइबर अपराध का ऐसा तरीका है जिसमें अपराधी किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाते, बल्कि इंसान के भरोसे, डर, लालच या भावनाओं का इस्तेमाल करके उसे ठगते हैं. उदाहरण के तौर पर अपराधी खुद को बैंक मैनेजर, पुलिस अधिकारी, आयकर विभाग का कर्मचारी, कोर्ट का अधिकारी, सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि, निवेश सलाहकार या किसी रिश्तेदार के रूप में पेश करते हैं. कई मामलों में अपराधी वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी पहनकर बात करते हैं ताकि सामने वाले को यकीन हो जाए कि वह किसी सरकारी अधिकारी से बात कर रहा है.

    Operation First Light 2026 Interpol: पकड़े गए आरोपी

    इसके बाद पीड़ित को यह कहकर डराया जाता है कि उसके खिलाफ कोई केस दर्ज हो गया है, उसका बैंक खाता बंद होने वाला है, उसका आधार कार्ड किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है या फिर उसे किसी निवेश योजना में मोटा मुनाफा मिलेगा. जैसे ही व्यक्ति उनके झांसे में आता है, उससे पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं या उसकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती है.

    ऑपरेशन फर्स्ट लाइट के दौरान इंटरपोल और सदस्य देशों की एजेंसियों ने 1,42,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान की. यानी केवल तीन महीने के दौरान ही इतनी बड़ी संख्या में लोग इन साइबर ठगों के निशाने पर आए थे.

    जांच के दौरान 1,52,808 मामलों का विश्लेषण किया गया. इनमें से 23,715 मामलों को सुलझा लिया गया, जबकि 15,606 लोगों की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई. इससे साफ है कि साइबर फ्रॉड का नेटवर्क बेहद संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है.

    नकली पुलिस स्टेशन से लेकर क्रिप्टो ठगी तक, इंटरपोल ने खोले बड़े राज

    इस अभियान में इंटरपोल ने अपने विशेष सिस्टम I-GRIP (Global Rapid Intervention of Payments) का भी इस्तेमाल किया. यह ऐसा अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए यदि किसी देश में साइबर ठगी की रकम दूसरे देश में भेजी जा रही हो, तो संबंधित देशों की एजेंसियां तुरंत अलर्ट होकर उस रकम को बैंक या क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंचने से पहले ही रोक सकती हैं. यानी अगर किसी भारतीय के साथ ऑनलाइन ठगी होती है और पैसा कुछ मिनटों में किसी दूसरे देश के खाते में ट्रांसफर होने वाला हो, तो I-GRIP की मदद से उस रकम को समय रहते ब्लॉक किया जा सकता है.

    इस ऑपरेशन का सबसे हैरान करने वाला खुलासा अफ्रीकी देश इस्वातिनी में हुआ. यहां पुलिस ने 82 लोगों को गिरफ्तार किया और एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया जिसने ठगी के लिए पूरा का पूरा नकली ब्राजीलियन पुलिस स्टेशन तैयार कर रखा था.

    इस फर्जी पुलिस स्टेशन में ब्राजील पुलिस जैसी वर्दियां, नेम प्लेट, सरकारी बोर्ड, ऑफिस का सेटअप और वीडियो कॉल की पूरी व्यवस्था मौजूद थी. जब किसी विदेशी नागरिक को फोन किया जाता था तो वीडियो कॉल पर सामने पुलिस की वर्दी पहने लोग दिखाई देते थे.  पीड़ित को बताया जाता था कि उसका नाम किसी अपराध में सामने आया है और जांच पूरी होने तक उसे अपने पैसे सरकारी सुरक्षा खाते में जमा कराने होंगे. जैसे ही व्यक्ति पैसे ट्रांसफर करता, पूरी रकम अपराधियों के पास पहुंच जाती थी.

    छापेमारी में 240 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, विदेशी मुद्रा और बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए गए. डिजिटल साक्ष्यों की भारी मात्रा को देखते हुए इंटरपोल ने अपनी विशेष फॉरेंसिक टीम भी इस्वातिनी भेजी. थाईलैंड में जांच एजेंसियों ने दो लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें एक आरोपी की उम्र केवल 20 साल थी.

    जांच में सामने आया कि यह गिरोह रोमांस स्कैम के जरिए लोगों से ठगी करता था. बाद में इस पैसे को अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर कई ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियां असली स्रोत तक न पहुंच सकें. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस 20 साल के आरोपी के डिजिटल वॉलेट से केवल 10 महीनों में 122.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लेनदेन हुआ था.

    सिंगापुर और ओमान में बड़ी वारदात टली

    ऑपरेशन के दौरान इंटरपोल के I-GRIP सिस्टम की सबसे बड़ी सफलता सिंगापुर और ओमान में देखने को मिली. यहां अपराधियों ने एक कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी को निशाना बनाया. उन्होंने कंपनी के सप्लायर की फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर भुगतान अपने खाते में ट्रांसफर कराने की कोशिश की. लेकिन समय रहते दोनों देशों की एजेंसियां सक्रिय हो गईं और 6.6 मिलियन डॉलर की रकम ट्रांसफर होने से पहले ही रोक दी गई. चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र मकाऊ में पुलिस साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही थी. इसी दौरान एक व्यक्ति वहां पहुंचा जो पहले से ही ऑनलाइन ठगों के झांसे में था.

    अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उससे लगभग 3 लाख 72 हजार डॉलर ट्रांसफर कराने वाले थे. लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे समझाया और ठगी होने से बचा लिया.

    प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश पलाऊ में पुलिस ने दो होटलों में चल रहे साइबर स्कैम सेंटर का पर्दाफाश किया. यहां से 22 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर बाद में देश से डिपोर्ट किया गया. ये लोग क्रिप्टोकरेंसी, अवैध जुआ वेबसाइटों और ऑनलाइन निवेश योजनाओं के जरिए दूसरे देशों के नागरिकों को निशाना बना रहे थे.

    भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई, साइबर ठगी नेटवर्क को तगड़ा झटका

    ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में भारत सहित 97 देशों और क्षेत्रों ने हिस्सा लिया. इसके अलावा यूरोपोल, ASEANAPOL और GCCPOL जैसी अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्थाओं ने भी इस अभियान में सहयोग किया. भारत पिछले कुछ सालों से डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड के मामलों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है. ऐसे में इंटरपोल के इस वैश्विक अभियान में भारत की भागीदारी को भी काफी अहम माना जा रहा है.

    कोई भी देश अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता : टॉमोनोबू काया

    इंटरपोल के फाइनेंशियल क्राइम एंड एंटी-करप्शन सेंटर के निदेशक टॉमोनोबू काया ने कहा कि साइबर ठग अब तकनीक से ज्यादा इंसानी सोच और भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं. कोई भी देश अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता. इसलिए जरूरी है कि दुनिया भर की पुलिस एजेंसियां एक-दूसरे के साथ लगातार सूचना साझा करें और संयुक्त कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि इंटरपोल भविष्य में भी सदस्य देशों को तकनीकी सहायता, खुफिया जानकारी और समन्वित अभियान के जरिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को खत्म करने में मदद करता रहेगा.

  • आधार में नंबर बदलकर रची साजिश! मानसिक रूप से कमजोर युवक के खाते से लाखों रुपये उड़ाने का आरोप

    आधार में नंबर बदलकर रची साजिश! मानसिक रूप से कमजोर युवक के खाते से लाखों रुपये उड़ाने का आरोप

    आधार में नंबर बदलकर रची साजिश! मानसिक रूप से कमजोर युवक के खाते से लाखों रुपये उड़ाने का आरोप

    Sikar News: सीकर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहाँ कुछ लोगों ने एक मानसिक रूप से कमजोर युवक की मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी बेशकीमती जमीन और बैंक खाते पर कब्जा कर लिया. आरोपियों ने युवक के सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की और उसके खाते से लाखों रुपये उड़ा लिए. इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है.

    कोतवाली पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, दुर्गापुरा निवासी रणवीर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनका भाई मदन सिंह मानसिक रूप से कमजोर है. उसका पिछले कई वर्षों से उपचार चल रहा है. मदन सिंह के नाम पर गांव में तीन बीघा से अधिक भूमि है. रणवीर सिंह का आरोप है कि गांव के ही रहने वाले गजसिंह, भंवरलाल और सुरेश कुमार ने मदन की मानसिक स्थिति का गलत लाभ उठाया.

    आधार कार्ड और बैंक खाते में की धोखाधड़ी
    आरोप है कि आरोपी गजसिंह ने मदन के आधार कार्ड में अपने खुद के मोबाइल नंबर जुड़वा दिए, ताकि युवक को किसी भी प्रकार की सूचना न मिल सके. इसके बाद, आरोपियों ने बैंक स्टाफ की मिलीभगत से मदन का कोटक महिंद्रा बैंक में एक नया खाता खुलवाया. इस खाते में भी गजसिंह ने अपने ही मोबाइल नंबर अपडेट करवा दिए, जिससे खाते की सारी जानकारी सीधे उसके पास आने लगी.

    डीएलसी की राशि पर डाला हाथ
    धोखाधड़ी का सिलसिला तब और बढ़ गया जब 3 अप्रैल को मदन के खाते में डीएलसी का 3.50 लाख रुपये का चेक जमा हुआ. जैसे ही यह राशि खाते में आई, आरोपी गजसिंह ने तुरंत चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लेनी. इससे पहले, आरोपियों ने 18 मार्च को मदन की मानसिक कमजोरी का फायदा उठाकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री भी अपने नाम करवा ली थी. फिलहाल, पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है.

  • शादी के नाम पर बड़ा खेल! 6 लाख का एग्रीमेंट कराया, मंदिर में फेरे लिए और अगले दिन दुल्हन फरार..

    शादी के नाम पर बड़ा खेल! 6 लाख का एग्रीमेंट कराया, मंदिर में फेरे लिए और अगले दिन दुल्हन फरार..

    शादी के नाम पर बड़ा खेल! 6 लाख का एग्रीमेंट कराया, मंदिर में फेरे लिए और अगले दिन दुल्हन फरार..

    इंदौर में दूसरी शादी की उम्मीद लेकर पहुंचे एक किसान के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. शादी कराने का झांसा देने वाले एक गिरोह ने किसान से पहले छह लाख रुपये वसूल लिए. इसके बाद अनुबंध के जरिए शादी कराई गई, लेकिन शादी के अगले ही दिन दुल्हन घर से फरार हो गई. पीड़ित की शिकायत और जांच के बाद पुलिस ने दुल्हन, उसकी मां, महिला दलाल समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

    मामला देवास जिले के बागली क्षेत्र के पिपलिया साहब गांव का है जहां एक 28 साल के हरिनारायण हजारीलाल परारिया ने एमजी रोड थाना में शिकायत दर्ज कराई है. जिसके अनुसार किसान हरिनारायण की पहली शादी साल 2007 में तारा बाई महिला से हुई थी लेकिन शादी नहीं चल सकी और दोनों की बीच तलाक हो गया. जिसके बाद किसान दोबारा विवाह करना चाहता था इसी को लेकर उसके भाई ने हसीना बाई से संपर्क किया और उसके लिए दुल्हन तलाशने की बात कही…

    शादी के बाद गायब हुई दुल्हन
    आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि वे उसकी शादी करा देंगे. इसके बदले उन्होंने किसान से कहा कि नंदनी की मां सुमन बाई लंबे समय से बीमार है और इलाज के लिए छह लाख रुपये की जरूरत है. शादी की जल्दबाजी और नई जिंदगी की उम्मीद में किसान आरोपियों की बातों में आ गया और तय रकम उन्हें दे दी.

    एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित किसान ने आरोप लगाया है कि शादी के अगले ही दिन नंदनी बिना किसी को बताए घर से गायब हो गई. काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला. बाद में जानकारी जुटाने पर पता चला कि नंदनी और उसके साथी शादी के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह से जुड़े हैं.

    शादी की खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक
    30 जून को हरिनारायण अपने गांव के सरपंच जितेंद्र सिंह दरबार, मोहन जाट, ज्योति बाई जाट और अन्य लोगों के साथ इंदौर जिला कोर्ट पहुंचा. यहां एक लिखित एग्रीमेंट तैयार किया गया, एग्रीमेंट के बाद हरिनारायण ने आरोपियों को 6 लाख रुपये सौंप दिए. इसके बाद सभी लोग तुकोगंज क्षेत्र स्थित राम मंदिर पहुंचे, जहां धार्मिक रीति-रिवाज के साथ शादी की रस्में पूरी कराई गईं. शादी के बाद हरिनारायण ढोल-ताशों के साथ अपनी नई दुल्हन को गांव लेकर पहुंचा. परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी.

  • 5 बच्चों की जिम्मेदारी छोड़ प्रेमिका संग फरार हुआ पति, बेबस पत्नी बोली- बस एक बार लौट आओ, सब भूल जाऊंगी…

    5 बच्चों की जिम्मेदारी छोड़ प्रेमिका संग फरार हुआ पति, बेबस पत्नी बोली- बस एक बार लौट आओ, सब भूल जाऊंगी…

    5 बच्चों की जिम्मेदारी छोड़ प्रेमिका संग फरार हुआ पति, बेबस पत्नी बोली- बस एक बार लौट आओ, सब भूल जाऊंगी…

    पत्नी माया, पति विजय और उसकी प्रेमिका कमलेश.

    हरियाणा के हिसार से अजीबोगरीब प्रेम प्रसंग का एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है. हिसार के गंगवा गांव में रहने वाला 42 वर्षीय विजय अपने 5 बच्चों और पत्नी को बेसहारा छोड़कर अपनी 50 साल की प्रेमिका के साथ रफूचक्कर हो गया है. पीड़ित पत्नी अब अपने बच्चों का पेट पालने के लिए ई-रिक्शा चलाने को मजबूर है. यह घटना 20 जून की है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पति का कोई सुराग नहीं लगा, तो लाचार पत्नी ने पुलिस और मीडिया के सामने अपनी आपबीती बयां की है.

    पीड़ित पत्नी माया देवी ने बताया कि उसकी शादी करीब 20 साल पहले विजय के साथ हुई थी. विजय पेशे से ड्राइवर है. पिछले कुछ समय से विजय का व्यवहार काफी बदल गया था. 20 जून को माया देवी को भनक लगी कि उसके पति का किसी दूसरी महिला के साथ चक्कर चल रहा है. जब वह अपने पति की गर्लफ्रेंड के घर ऋषिनगर पहुंची, तो वहां के पड़ोसियों ने बताया कि विजय पिछले कई महीनों से यहां आ रहा है और उस महिला ने आस-पास के लोगों को विजय को अपना पति बता रखा था.

    बेटे को दी थी जानकारी

    चौंकाने वाली बात यह है कि विजय ने यह बात अपने परिवार से भी नहीं छिपाई थी. वह अक्सर अपने बड़े बेटे और अपने भाई (माया के देवर) को कहता था कि “यह तेरी दूसरी मां है, यह मेरी सेटिंग है.” देवर को पिछले ढाई साल से इस बात की जानकारी थी, लेकिन विजय ने उसे जुबान खोलने पर जान से मारने की धमकी दे रखी थी.

    रात 11 बजे घर से भागा पति; प्रेमिका के पहले से हैं दो पति

    माया देवी ने जब 20 जून की रात को घर लौटे पति से उस महिला के बारे में पूछताछ की, तो दोनों के बीच विवाद हो गया. इसके बाद विजय रात करीब 11 बजे अपने घर से निकला और अपनी प्रेमिका कमलेश को साथ लेकर फरार हो गया. विजय अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ गया है, जबकि उसकी प्रेमिका का फोन लगातार बंद आ रहा है.

    माया ने बताया कि जिस महिला कमलेश के साथ उसका पति भागा है, वह पहले ही दो शादियां कर चुकी है. उसका पहला पति मंदबुद्धि है और विजय उसकी जिंदगी में आने वाला तीसरा मर्द है. कमलेश की एक 18 साल की बेटी भी है, जिसे उसने भागने से ठीक पहले हरिद्वार भेज दिया था.

    किराए का मकान, 5 बच्चे और ई-रिक्शा चलाने की मजबूरी

    इस धोखे के बाद माया देवी के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. माया के 5 बच्चे हैं, जिनमें 3 बेटियां और 2 बेटे हैं. वह वर्तमान में ढाई हजार रुपये महीने के किराए के मकान में रहती है. पति के भाग जाने के बाद बच्चों के पालन-पोषण और घर के खर्च के लिए माया दिनभर हिसार की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती है. माया ने रुआंसे मन से कहा कि उसकी मां हमेशा कहती थी कि उसका पति ठीक इंसान नहीं है, उसे छोड़ दे, लेकिन उसने कभी मां की बात नहीं मानी. हालांकि, आज भी वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपने पति की हर खता माफ कर उसे अपनाने को तैयार है, बशर्ते वह घर लौट आए.

    पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप

    माया देवी का आरोप है कि पति के लापता होने के बाद जब वह न्याय की गुहार लेकर आजाद नगर थाने पहुंची, तो पुलिस ने बेहद संवेदनहीन रवैया अपनाया. माया के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत पर गंभीरता दिखाने के बजाय कह दिया कि “तेरा पति भाग गया तो भाग गया, हम इसमें क्या कर सकते हैं.” पुलिस के इस असहयोगात्मक रवैये के कारण परेशान महिला अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.

  • अमेरिका में चार्जशीट का सामना कर रहा रोहित गोदारा, बीकानेर में 5 करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप..

    अमेरिका में चार्जशीट का सामना कर रहा रोहित गोदारा, बीकानेर में 5 करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप..

    अमेरिका में चार्जशीट का सामना कर रहा रोहित गोदारा, बीकानेर में 5 करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप..

    अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के बीच राजस्थान में एक बार फिर गैंगस्टर रोहित गोदारा का नाम सामने आया है. जिस रोहित गोदारा के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग ने चार्जशीट दाखिल की है, उसी गैंग के नाम पर बीकानेर जिले के एक कारोबारी से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है. कारोबारी का आरोप है कि रकम नहीं देने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

    मामला बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के दुलचासर गांव का है. जानकारी के अनुसार यहां के एक व्यवसायी को 5 और 7 जुलाई को फोन किए गए. आरोप है कि कॉल करने वाले ने खुद को रोहित गोदारा गैंग से जुड़ा बताते हुए 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. कारोबारी को यह भी धमकी दी गई कि अगर रकम नहीं दी गई तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा. घटना के बाद कारोबारी के भाई ने बीकानेर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामले को लेकर पुलिस को शिकायत दी गई है और सुरक्षा को लेकर भी गुहार लगाई गई है.

    पुलिस ने शुरू की जांच
    बीकानेर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस कॉल डिटेल और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल कहां से किए गए और इसके पीछे कौन लोग हैं. फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है. इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों में भी चिंता बढ़ गई है.

    अमेरिका में भी रोहित गोदारा पर बड़ी कार्रवाई
    रोहित गोदारा का नाम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत भारतीय मूल के अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. इस कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और जग्गू भगवानपुरिया समेत 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. संयुक्त अभियान के दौरान अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 10 आरोपी अभी भी फरार बताए गए हैं. जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह नेटवर्क हत्या, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल रहा है.

    एक तरफ अंतरराष्ट्रीय जांच, दूसरी तरफ राजस्थान में रंगदारी का आरोप
    अमेरिका में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब राजस्थान में रोहित गोदारा गैंग के नाम पर रंगदारी मांगने का मामला सामने आने से यह नाम फिर चर्चा में है. फिलहाल बीकानेर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. यह भी जांच का विषय है कि कॉल करने वाला वास्तव में गैंग से जुड़ा था या गैंग का नाम लेकर कारोबारी को धमकाने की कोशिश की गई. पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी है.

  • एक महीने बाद मिला छात्र ईशांत का शव, हत्या कर 10 फीट नीचे जमीन में दफनाने का आरोप..

    एक महीने बाद मिला छात्र ईशांत का शव, हत्या कर 10 फीट नीचे जमीन में दफनाने का आरोप..

    एक महीने बाद मिला छात्र ईशांत का शव, हत्या कर 10 फीट नीचे जमीन में दफनाने का आरोप..

    बिहार के समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर में बीते एक महीने से लापता छात्र ईशांत कुमार उर्फ छोटू की लाश देख लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। ईशांत को मारकर जमीन में 10 फीट नीचे दफना दिया गया था। बीते 10 जून को ईशांत दोस्तों के बुलाने पर अपने घर से निकला था, इसका बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। परिजन बीते एक महीने से उसके लौटने का इंतजार कर रहे थे। छात्र के पिता ने गांव के चार युवकों के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया था। इसके बाद एक आरोपी ने सरेंडर कर दिया था। उसी की निशानदेही पर पुलिस ने बुधवार 8 जुलाई की रात को जेसीबी से खुदाई कर छात्र की लाश निकाली।

    ईशांत विद्यापतिनगर थाना क्षेत्र के बंगराहा पंचायत का रहने वाला था। उसकी लाश बुधवार को बगल के लखनपुर गांव में कलना चौर से करीब 10 फीट गहरे गड्ढे से बरामद की गई। 14 वर्षीय इशांत का शव मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। घटनास्थल पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। वहीं, बेटे की लाश देख परिजन की चीख पुकार निकल पड़ी, उसे सुन वहां मौजूद हर शख्स के रोंगटे खड़े हो गए।

    सरेंडर कर चुके आनंदी ने उगले राज

    पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण कर चुके आरोपी आनंदी सिंह को पुलिस ने रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर वरीय डीएसपी विवेक कुमार शर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल बुधवार की रात कलना चौर पहुंचा। यहां जेसीबी मशीन से करीब 10 फीट गहरे गड्ढे की खुदाई कराई गई। कुछ देर बाद मिट्टी के भीतर से छात्र का शव प्लास्टिक से लिपटा बरामद हुआ।

    पहले हत्या, फिर जमीन में दफनाई लाश

    प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इशांत की हत्या के बाद सबूत मिटाने की नीयत से शव को सुनसान खेत में गहरे गड्ढे में दफना दिया गया था, ताकि घटना का कभी खुलासा ना हो सके।

    दोस्तों के बुलाने पर घर से निकला था छोटू

    बंगराहा निवासी किसान रामप्रीत राय का बेटा ईशांत उर्फ छोटू 10 जून की शाम को दोस्तों के बुलाने पर अपने घर से निकला था। वह उत्क्रमित उच्च विद्यालय बंगराहा में नौवीं कक्षा का छात्र था। रात तक वापस नहीं लौटने पर परिजन ने उसकी खोजबीन शुरू की। मगर उसका कोई सुराग नहीं लग पाया।

    इसके बाद पिता ने विद्यापतिनगर थाने में बेटे की गुमशुदगी की सूचना दी। उन्होंने गांव के ही चार युवकों पर साजिश के आरोप लगाए थे। दिन बीतते गए, लेकिन छोटू का कोई पता नहीं चला। 12 जून को आक्रोशित परिजन और ग्रामीणों ने बंगराहा चौक जाम कर उग्र प्रदर्शन भी किया था। लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और छात्र की जल्द बरामदगी की मांग की।

    एसपी ने बनाई एसआईटी

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह खुद 19 जून को गांव पहुंचे। उन्होंने परिजन से मुलाकात कर जल्द मामले का खुलासा करने का भरोसा दिया। इसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर वैज्ञानिक तरीके से केस की जांच शुरू कराई थी। खोजी कुत्तों को भी घटनास्थल पर लाया गया।

    आनंदी ने भतीजे और अन्य के साथ की हत्या

    इसी बीच आनंदी सिंह नाम के आरोपी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली। उसी की निशानदेही पर पुलिस ने बुधवार रात जमीन में दफन ईशांत की लाश बरामद की।

    शव बरामद होने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने कई महत्वपूर्ण नमूने इकट्ठा किए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए समस्तीपुर सदर अस्पताल भेज दिया गया। मौके पर थानाध्यक्ष सूरज कुमार, अनुसंधानकर्ता सलीम रजा सहित कई पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे।

    10 जून को ही हो गई थी ईशांत की हत्या

    वरीय पुलिस उपाधीक्षक विवेक कुमार शर्मा ने बताया कि रिमांड पर लिए गए आरोपी ने कड़ाई से हुई पूछताछ में कई खुलासे किए। आरोपी आनंदी सिंह ने बताया कि उसने अपने भतीजे रंजीत सिंह और अन्य के साथ मिलकर 10 जून को ही ईशांत की हत्या कर दी थी। फिर उसके शव को दफना दिया था। पुलिस के अनुसार ईशांत के शव पर गले में कटने के निशान मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या कैसे हुई, उसकी विस्तृत जानकारी मिल जाएगी।

    एक महीने से बेटे के लौटने की राह देख रही मां बेसुध

    बुधवार रात को जैसे ही ईशांत का शव मिलने की सूचना परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। पिता रामप्रीत राय, मां अभिलाषा देवीबड़े भाई प्रशांत राय और छोटी बहन किरण कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस मां ने करीब एक महीने तक बेटे की वापसी के लिए दुआएं मांगी थीं, वह बेटे का शव देखकर बेसुध हो गई। गांव की महिलाओं की आंखें नम नजर आईं और हर जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर इस मासूम का क्या कसूर था?

    ईशांत की हत्या क्यों की? पुलिस के खुलासे का इंतजार

    ईशांत की हत्या की वजह अभी पता नहीं चल पाई है। पुलिस अब पूरे षड्यंत्र की कड़ियां जोड़ने में जुटी गई है। शव बरामद होने के बाद पुलिस अब ईशांत की हत्या की पूरी साजिश, इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका और हत्या के कारणों की गहराई से जांच कर रही है।

    अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे मामले का जल्द विस्तृत खुलासा किया जाएगा। अगर इस जघन्य अपराध में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। थानाध्यक्ष सूरज कुमार ने बताया की अभी विंदुओं पर कारवाई और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

  • पहले मां की हत्या, अगले दिन उसी जंगल में बेटे का मिला शव; मुरादाबाद में डबल मर्डर से सनसनी..

    पहले मां की हत्या, अगले दिन उसी जंगल में बेटे का मिला शव; मुरादाबाद में डबल मर्डर से सनसनी..

    पहले मां की हत्या, अगले दिन उसी जंगल में बेटे का मिला शव; मुरादाबाद में डबल मर्डर से सनसनी..

    मुरादाबाद के पाकबड़ा थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. मोढ़ा तैय्या गांव के जंगल में दो दिनों के भीतर एक महिला और एक मासूम बच्चे के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है. पुलिस को आशंका है कि दोनों शव मां और बेटे के हैं. फिलहाल, पुलिस दोनों हत्याओं को एक-दूसरे से जोड़कर गहन जांच में जुटी है.

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार को जंगल में एक अज्ञात महिला का रक्तरंजित शव मिलने के बाद, ठीक अगले ही दिन यानी गुरुवार को उसी वन क्षेत्र से एक मासूम बालक की लाश भी बरामद की गई. पुलिस को आशंका है कि महिला की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या की गई होगी. जबकि इस मासूम की गला घोंटकर बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया.

    लगातार दो दिन में 2 मर्डर से मचा हड़कंप

    पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोग इस मृत बच्चे का सीधा संबंध एक दिन पहले मिली उसी अज्ञात महिला से जोड़कर देख रहे हैं. आशंका है कि यह अभागा बच्चा उसी मृत महिला का बेटा था, जिसे कातिलों ने अपनी क्रूरता का शिकार बनाया है. महिला की पहचान छिपाने के लिए चेहरा और शरीर के कुछ हिस्सों को भी क्षत-विक्षत करने का प्रयास किया गया था.

    सूचना मिलते ही पाकबड़ा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शव को कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया था. पुलिस की टीमें मृतका की पहचान करने और हत्यारों के सुराग तलाशने में जुटी ही थी कि तभी इस नए घटनाक्रम ने मामले को और उलझा दिया है. लगातार दो वारदातों से इलाके में हड़कंप मचा है.

    मृतकों की पहचान खंगालने में जुटी पुलिस

    घटना की सूचना मिलते ही एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं. पुलिस आसपास के जिलों और थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों का मिलान कर रही है ताकि मृतकों की पहचान की जा सके. हर पहलू से जांच की जा रही है.

  • प्रेम विवाह का दर्दनाक अंजाम! 14 साल बाद मायके में पत्नी पर चाकू से हमला, मौत से मचा हड़कंप,,

    प्रेम विवाह का दर्दनाक अंजाम! 14 साल बाद मायके में पत्नी पर चाकू से हमला, मौत से मचा हड़कंप,,

    प्रेम विवाह का दर्दनाक अंजाम! 14 साल बाद मायके में पत्नी पर चाकू से हमला, मौत से मचा हड़कंप,,

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक और खौफनाक हत्याकांड सामने आया है जहां एक शादीशुदा कपल ने अपनी 14 साल की लव मैरिज को अपने गुस्से और जिद के आवेश में खत्म कर दिया है. दंपति के 4 बच्चे बताए जा रहे हैं. दोनों पति-पत्नी के बीच नौकरी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था जिससे नाराज होकर पत्नी अपनी मायके आ गई. पति ने कई बार पत्नी को वापस लाने की भी कोशिश की लेकिन जब दोनों के बीच बात नहीं बनी तो गुस्साए पति ने मायके पहुंचकर अपनी पत्नी और 4 बच्चों की मां की चाकू से गोदकर हत्या कर दी. इस घटना के बाद दोनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है जबकि इलाके में सनसनी फैल गई है. इस मामले में मृतका के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद आरोपी पति को गिरफ्तार किया जा चुका है.

    नौकरी छोड़ने पर हुआ था विवाद

    अमर उजाला की रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस ने बताया कि 32 वर्षीय मीनू की शादी 14 साल पहले सन्नी सैनी से हुई थी. दोनों एक साथ फैक्ट्री में काम करते थे. दोनों अलग-अलग जाति से आते थे इसलिए परिवार की सहमति नहीं थी और दोनों ने लव मैरिज कर ली. शादी के बाद पत्नी मीनू ने अपनी नौकरी छोड़ दी और चारों बच्चों की परवरिश में जुट गई. कुछ दिन बाद पति सन्नी भी नौकरी छोड़कर घर बैठ गया. यह बात मीनू को पसंद नहीं आई. घर का खर्चा और बच्चों का पालन पोषण मुश्किल हो गया. पति के फैसले से नाराज होकर पत्नी मीनू अपने मायके आ गई.

    20 दिन पहले हुआ था झगड़ा

    बताया जा रहा है कि दोनों पति-पत्नी के बीच 20 दिन पहले ही नौकरी छोड़ने के पीछे झगड़ा हुआ था. विवाद को सुलझाने के लिए मीनू के परिजन उसके ससुराल यानी पति सन्नी के घर भी गए थे लेकिन मारपीट की नौबत आ गई जिसके कारण पुलिस बुलानी पड़ी और मामला वहीं ठंडे बस्ते में चला गया. हालांकि मीनू के परिजन उसे वापस ले आए लेकिन चारों बच्चे सन्नी के पास ही रह गए.

    चाकू लेकर ससुराल में घुंस आया पति

    मृतका पत्नी मीनू की बहन दीपा ने बताया कि बुधवार सुबह नौ बजे, जब घर के सभी सदस्य काम में लगे हुए थे तो मीनू का पति सन्नी तमतमाता हुआ घर के अंदर घुंस आया. दीपा के दोनों बच्चे घर में मौजूद थे जबकि सन्नी के हाथ में चाकू और सिर पर खून सवार था. दोनों बच्चे डर से सहम गए और अपने मामा को सारी बातें बताने भागे कि पीछे से सन्नी ने मीनू की चाकू गोदकर हत्या कर दी. घटना से पहले सन्नी मीनू को मनाने भी आया था लेकिन पत्नी दोनों के बीच बात नहीं बनी जिसके चलते सन्नी काफी नाराज चल रहा था.

    रोते-रोते मां को पुकार रहे बच्चे

    स्थानीय पुलिस ने घटना के कुछ देर बाद ही पति सन्नी को पत्नी के कत्ल के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. बताया जा रहा है कि दोनों का प्रेम प्रसंद फैक्ट्री में काम के दौरान शुरू हुआ था. दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की थी लेकिन यह रिश्ता इस मोड पर आकर दम तोड़ देगा, यह किसी ने सोचा भी नहीं था. दंपति की एक गलती की वजह से चारों बच्चे अनाथ हो गए. बताया जा रहा है कि चारों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है. ननिहाल और ददिहाल पक्ष की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है जबकि पिता को कत्ल के इल्जाम में जेल हो चुकी है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चारों बच्चों की देखभाल कौन करेगा? फिलहाल, पुलिस ने संबंधित मामलों में मुकदमा दर्ज करके आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर गंभीर आरोप: प्यार के जाल में फंसाकर युवक से ऐंठे 4 लाख, FIR दर्ज..

    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर गंभीर आरोप: प्यार के जाल में फंसाकर युवक से ऐंठे 4 लाख, FIR दर्ज..

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    संभल हनीट्रैप: इन्फ्लुएंसर अरिशा पर ब्लैकमेलिंग, रंगदारी का आरोप

    संभल जिले में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पर हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और रंगदारी वसूलने के गंभीर आरोप लगे हैं. एक 22 वर्षीय युवक की शिकायत पर पुलिस ने इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर अरिशा और उसके दो कथित साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. आरोप है कि युवक को प्रेमजाल में फंसाया गया, फिर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो से लाखों ऐंठ लिए.

    पूरा मामला शहर के चौधरी सराय मोहल्ले का है. पीड़ित शाहरुख फास्ट फूड सेंटर संचालित करता है. उसने तहरीर में आरोप लगाया है कि करीब 3 साल पहले नैनीताल घूमने के दौरान उनकी मुलाकात दीपा सराय निवासी अरिशा से हुई थी. दोनों के बीच नजदीकियां हो गईं, फिर फोटो-वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया गया और बंधकर बना वसूली की गई.

    फोटो हटाने के बदले पहले 3 लाख की मांग

    शिकायतकर्ता का कहना है कि तीन साल पहले वह घूमने के लिए नैनीताल गया था. वहीं उसकी मुलाकात सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अरिशा से हुई. दोनों एक ही शहर के होने के कारण बातचीत करने लगे और बाद में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं. पीड़ित का आरोप है कि नैनीताल में घूमने के दौरान अरिशा ने उसके साथ कई फोटो और वीडियो शूट कराए.

    शाहरुख का कहना है कि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि यही फोटो और वीडियो बाद में उसके लिए ब्लैकमेलिंग का जरिया बन जाएंगे. शिकायत के मुताबिक, कुछ समय बाद अरिशा ने उसे धमकाना शुरू कर दिया. पहले उसके फोटो और वीडियो वायरल कर दिए. जब विरोध किया तो फोटो हटाने के बदले उससे तीन लाख रुपये की मांग की गई.

    फोटो हटाने के बहाने बुलाकर बनाया बंधक

    शिकायत के अनुसार, पैसे देने के बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ. अरिशा लगातार उससे और पैसे मांगती रही. कभी फोटो दोबारा वायरल करने की धमकी दी गई तो कभी झूठे मुकदमे में फंसाने की बात कही गई. शाहरुख के मुताबिक, अब तक वह चार लाख रुपये से अधिक की रकम अरिशा को दे चुका है. इससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो गया था.

    आरोप है कि इस बीच अरिशा ने फोटो और वीडियो हमेशा के लिए डिलीट करने के लिए बुलाया. जहां पहले से मौजूद अनस और शुऐब ने उसे बंधक बना लिया. इसके बाद उसके साथ मारपीट और धमकी दी गई. शाहरुख का आरोप है कि उसकी जेब में रखे 30 हजार रुपये छीन लिए गए. इतना ही नहीं, उसके मोबाइल से दोस्तों को फोन कर ऑनलाइन पैसे भी मंगवाए.

    मामले की गंभीरता से जांच की जा रही- SSP

    शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि साल 2023 में दोनों पक्षों के बीच स्टाम्प पेपर पर नोटरी के माध्यम से समझौता हुआ था, लेकिन इसके बावजूद कथित ब्लैकमेलिंग जारी रही. हालांकि, इसकी पुष्टी नहीं हुई है. एएसपी कुलदीप सिंह ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है.

    पुलिस की ओर से मोबाइल फोन, सोशल मीडिया चैट, बैंक लेनदेन और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है. ASP ने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल मामले की जांच जारी है. आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

  • ल्ली में स्नैचर पुलिस के हत्थे चढ़ा, 5 चोरी के मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद..

    ल्ली में स्नैचर पुलिस के हत्थे चढ़ा, 5 चोरी के मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद..

    ल्ली में स्नैचर पुलिस के हत्थे चढ़ा, 5 चोरी के मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद..

     जनपद बिजनौर के थाना नूरपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए परिवहन विभाग की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) की फर्जी वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन ठगी करने वाले सात सदस्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, ₹12,300 नकद तथा अन्य उपकरण बरामद किए हैं।

    पुलिस के अनुसार, प्रदेश स्तर पर चलाए जा रहे Cy-Vajra अभियान के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जांच में यह गिरोह सामने आया। आरोपियों ने परिवहन विभाग की आधिकारिक HSRP वेबसाइट की हूबहू नकल कर bookkhsrplate.com और bookmyhsrp.com नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार की थीं। इन वेबसाइटों के माध्यम से आम लोगों से HSRP बुकिंग के नाम पर ऑनलाइन भुगतान कराकर साइबर ठगी की जा रही थी।

    थाना नूरपुर में इस संबंध में 8 जुलाई 2026 को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद 9 जुलाई को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि फर्जी वेबसाइट बनाने के लिए डोमेन खरीदने, वेबसाइट डिजाइन और तकनीकी कार्यों में ऑनलाइन AI टूल्स सहित विभिन्न तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया गया। ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों में मंगाकर आपस में बांट लिया जाता था।